Dr .Vasudev maurya

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13/12/2025

तुर्की के कोन्या क्षेत्र में अचानक बने सैकड़ों गड्ढे किसी रहस्यमयी ताकत का नहीं, बल्कि भूविज्ञान और मानव गतिविधियों का सीधा परिणाम हैं। यह इलाका कार्स्ट भूगोल वाला है, जहां जमीन के नीचे चूना-पत्थर की मोटी परतें मौजूद हैं।

बारिश और भूजल में घुली कार्बन डाइऑक्साइड जब इन चट्टानों के संपर्क में आती है, तो उन्हें धीरे-धीरे घोल देती है। इससे जमीन के नीचे खोखली गुफाएं और खाली जगहें बनती चली जाती हैं, जो ऊपर से दिखाई नहीं देतीं।

समस्या तब गंभीर हो गई जब खेती और जरूरतों के लिए दशकों तक जरूरत से ज्यादा भूजल पंप किया गया। पानी निकलते ही नीचे बनी खोखली जगहों को सहारा देने वाला दबाव खत्म हो गया।

नतीजा यह हुआ कि बिना भूकंप और बिना चेतावनी, ऊपर की जमीन अचानक धंस गई और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए, जिसे वैज्ञानिक मानव-जनित भूवैज्ञानिक आपदा मानते हैं।

#ब्रह्मांडज्ञान

12/12/2025

जंगल की छतरी को ऊपर से देखने पर पेड़ों की चोटियों के बीच जो साफ-साफ खांचे दिखाई देते हैं, उसी घटना को विज्ञान में क्राउन शायनेस कहा जाता है। यह कोई रहस्य नहीं, बल्कि प्राकृतिक अनुकूलन का बेहद सटीक उदाहरण है।

जब हवा में शाखाएँ हल्के कंपन के साथ एक-दूसरे से टकराती हैं, तो पत्तियाँ टूटती हैं और ऊपरी टहनियों को नुकसान होता है। पेड़ इस नुकसान को महसूस करके उसी दिशा में अपनी बढ़त को धीमा या रोक देता है, ताकि आगे टूट-फूट न हो।

साथ ही पेड़ों में प्रकाश-संवेदन की क्षमता होती है, जिससे उन्हें पता चलता है कि पास में दूसरा पेड़ है। परिणामस्वरूप वे अपनी ग्रोथ दिशा बदल लेते हैं, ताकि सभी को पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिल सके और कोई एक पेड़ दूसरे की रोशनी न रोक दे।

इन्हीं दो कारणों के मेल से पेड़ों की चोटियाँ एक-दूसरे को छूने से बचती हैं और एक सुंदर, प्राकृतिक पैटर्न बनता है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी प्रकृति की बुद्धिमत्ता पर हैरान रह जाते हैं।

#देहातीसौंदर्य #गांवकीज़िंदगी #स्वावलंबीगांव #किसानकीमेहनत #प्रकृतिकासौंदर्य #किसान_हमारा_अभिमान
#ब्रह्मांडज्ञान

10/12/2025

#देहातीसौंदर्य #गांवकीज़िंदगी #स्वावलंबीगांव #किसानकीमेहनत #प्रकृतिकासौंदर्य #किसान_हमारा_अभिमान
#ब्रह्मांडज्ञान

10/12/2025

अगर जुपिटर ना होता तो मानव सभ्यता शायद शुरू ही नहीं हो पाती। अंतरिक्ष में अरबों एस्टेरॉयड घूमते हैं और उनमें से कई पृथ्वी की दिशा में आते हैं। लेकिन जुपिटर का गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि वह इन खतरनाक पिंडों को अपनी तरफ खींच लेता या उनकी दिशा बदल देता।

इसके बिना बड़े टक्कर वाले एस्टेरॉयड बार-बार पृथ्वी पर गिरते, महासागर उबल जाते, वातावरण जल जाता और जीवन का विकास असंभव हो जाता। वैज्ञानिक मानते हैं कि धरती पर जीवन सुरक्षित रहने की सबसे बड़ी वजहों में से एक जुपिटर है।

मतलब जुपिटर कोई साधारण ग्रह नहीं, बल्कि हमारा अदृश्य ‘स्पेस बॉडीगार्ड’ है जो हर पल हमें मौत से बचा रहा है।

09/12/2025

#देहातीसौंदर्य #गांवकीज़िंदगी #स्वावलंबीगांव #किसानकीमेहनत #प्रकृतिकासौंदर्य #किसान_हमारा_अभिमान
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09/12/2025
किस किस को याद है ये क्या चीज है 😄“गाँव का बचपन ऐसा ही था…हाथ रंग जाते थे, लेकिन दिल खुशियों से भर जाता था।” ❤️
09/12/2025

किस किस को याद है ये क्या चीज है 😄

“गाँव का बचपन ऐसा ही था…
हाथ रंग जाते थे, लेकिन दिल खुशियों से भर जाता था।” ❤️

बिना पेट्रोल की गाड़ी और मीलों का सफर... 🏃‍♂️💨एक पुराना टायर और हाथ में लकड़ी, हमारे लिए तो यही 'Ferrari' हुआ करती थी।कि...
08/12/2025

बिना पेट्रोल की गाड़ी और मीलों का सफर... 🏃‍♂️💨

एक पुराना टायर और हाथ में लकड़ी, हमारे लिए तो यही 'Ferrari' हुआ करती थी।

किस-किस ने बचपन में ये रेस लगाई है? हाथ उठाओ! 🙋‍♂️🚲"

08/12/2025

हमलोगों 10th क्लास में जिस प्रकाश-संश्लेषण को पढ़ते थे, असल में उसकी नींव Jan Ingenhousz ने रखी थी।

उन्होंने 1779 में प्रयोग करके साबित किया कि पौधे सिर्फ मिट्टी से नहीं, बल्कि हवा और सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। दिन में वे हवा को शुद्ध करते हैं और रात में उल्टा सांस लेते हैं। इससे पहली बार पता चला कि पृथ्वी की ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा पौधों से आता है।

Ingenhousz ने देखा कि हरी पत्तियाँ रोशनी में बुलबुले छोड़ती हैं, जो बाद में ऑक्सीजन साबित हुए। इस खोज ने हमें बताया कि पौधे और इंसान एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं—हम ऑक्सीजन लेते हैं, पौधे CO₂ लेते हैं।

यानी 10th की किताब में जिस प्रक्रिया को हम Photosynthesis कहते थे, वह दुनिया को समझाने वाले पहले वैज्ञानिक Jan Ingenhousz ही थे।

#ब्रह्मांडज्ञान

🌑 प्लूटो: सौर मंडल का अनोखा बौना ग्रह🔭 खोज (Discovery):प्लूटो की खोज 18 फरवरी 1930 को अमेरिकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉम्बॉ...
08/12/2025

🌑 प्लूटो: सौर मंडल का अनोखा बौना ग्रह

🔭 खोज (Discovery):
प्लूटो की खोज 18 फरवरी 1930 को अमेरिकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉम्बॉ (Clyde Tombaugh) ने की थी। यह सौर मंडल का नौवां ग्रह माना जाता था, लेकिन 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने इसे “बौना ग्रह (Dwarf Planet)” की श्रेणी में रख दिया।

☀️ एक परिक्रमा = 248 पृथ्वी वर्ष

प्लूटो सूर्य से इतना दूर है कि एक परिक्रमा पूरी करने में 248 पृथ्वी वर्ष लग जाते हैं। यही कारण है कि:

1930 में खोजे जाने के बाद भी

आज तक प्लूटो ने सूर्य की एक पूरी परिक्रमा नहीं की है।

अभी तक उसने अपनी कक्षा का केवल लगभग 1/3 भाग ही पार किया है।

🪐 2178 में पूरी होगी पहली परिक्रमा

वैज्ञानिकों के अनुसार, प्लूटो साल 2178 में अपनी पहली परिक्रमा पूरी करेगा। इसका मतलब:

👉 पृथ्वी पर 248 साल = प्लूटो पर 1 साल।

🌡️ तापमान और वातावरण

प्लूटो का औसत तापमान लगभग –230°C से –240°C के बीच होता है।

इसका वातावरण बहुत पतला है, जिसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन, थोड़ी मीथेन और कार्बन मोनॉक्साइड होती है।

जब प्लूटो सूर्य से दूर जाता है तो इसका वातावरण जमकर सतह पर गिर जाता है, और सूर्य के पास आने पर दोबारा फैल जाता है—यह बेहद अनोखी प्रक्रिया है।

🛰️ New Horizons मिशन

2015 में NASA के न्यू होराइजन्स (New Horizons) यान ने प्लूटो की पहली नज़दीकी तस्वीरें भेजीं, जिनसे पता चला कि:

प्लूटो पर बर्फीले पर्वत हैं

विशाल हृदय जैसी संरचना है जिसे “टॉम्बॉ रिजियन” कहा जाता है

इसकी सतह पर नाइट्रोजन बर्फ के मैदान फैले हुए हैं

🌙 प्लूटो के चंद्रमा

प्लूटो के कुल 5 उपग्रह (Moons) हैं:

1. शैरन (Charon) — सबसे बड़ा

2. निक्स

3. हाइड्रा

4. केरबेरॉस

5. स्टिक्स

शैरन इतना बड़ा है कि प्लूटो और शैरन एक-दूसरे की परिक्रमा एक सामान्य बिंदु (barycenter) के चारों ओर करते हैं।

🌌 क्यों अलग है प्लूटो?

इसकी कक्षा बहुत अंडाकार (elliptical) है

इसकी धुरी का झुकाव 122° है, यानी यह लगभग ऊल्टा घूमा करता है

आकार में यह हमारे चंद्रमा (Moon) से भी छोटा है

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