अमरीश कुमार यादव

अमरीश कुमार यादव तुम्हारा_तुम

30/09/2025
29/09/2025

माननीय सुप्रीम कोर्ट में 2016 से 2025 तक की मैराथन दौड़। जगजाहिर है कि ख़ूब धन खर्च हुआ।
जिन बुद्धिजीवियों ने इस लड़ाई के महत्व को जानते हुए धन खर्च किया उन्होंने अपने धन खर्च की प्रक्रिया को ‘सहयोग’ से संबोधित किया।
जिन जाहिलों ने इस लड़ाई के महत्व को हमेशा खारिज करते हुए तगड़ा विरोध किया उन्होंने हमारे द्वारा स्वीकार किए गए सहयोग की प्रक्रिया को अक्सर ‘वसूली’ नाम दिया।
असफलता लगी होती हाथ तो स्वीकार कर लेता वसूली शब्द भी। लेकिन जिन सफलताओं के साथ आज हम खड़े हैं उसके साथ वसूली शब्द कतई स्वीकार्य नहीं है।
बाकी नतमस्तक हूँ सहयोग करने वाले सभी विशेष शिक्षक साथियों के प्रति जिनके सहयोग से पूरे विशेष शिक्षा क्षेत्र की दिशा और दशा दोनों में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहा है।

@सहयोग लेने और वसूली करने में नैतिक अंतर है। मैंने इस लड़ाई में हमेशा लोगों से सहयोग की अपील की है, सूची में सबसे अधिक सहयोग वाले अपने नाम के साथ। वसूली नहीं की है कभी। इसलिए हमारी पोस्ट पर जब भी आए नैतिकता का ज्यादा नहीं तनिक ख़्याल जरूर रखा करें।

धन्यवाद!

28/09/2025

उत्तर प्रदेश के जो भी विशेष शिक्षक साथी टेट पास नहीं है, उनसे कहना बस इत्ता भर है कि अब आपके लिए STET एकमात्र सच है जिसकी तैयारी में आप जुट जाइए। STET आपके लिए रखा गया सरलतम अंतिम विकल्प है।
लिख इसलिए रहा हूँ कि सुन रहा हूँ कि कोई पुराने असफलतम नेता टेट से छूट दिलाने के लिए लोगों को लामबंद कर रहे हैं। वो भी ऐसे वक्त में जबकि 1995 का लगा शिक्षक भी टेट की तैयारी कर रहा है।
सच का रास्ता तनिक लंबा हो जाय इसका ए मतलब कदापि नहीं कि झूठ की गोद में बैठकर आप मंजिल पा लेंगे।

@सिर्फ तैयारी में लग जाइए।

कित्ते आश्चर्य की बात कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई और कड़े आदेशों के बाद भी किसी भी राज्य का कोई भी शैक्षिक ...
27/09/2025

कित्ते आश्चर्य की बात कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई और कड़े आदेशों के बाद भी किसी भी राज्य का कोई भी शैक्षिक पटल दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के संदर्भ में 21सितंबर2022 को आरटीई एक्ट में हुए संशोधन को पूरा पढ़ने को तैयार नहीं है। जिसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमशः 1:10/1:15 अनुपात के साथ टिप्पणी1 में उल्लिखित है कि “एक स्कूल और एक (न्यूनतम) विशेष शिक्षा शिक्षक मानदंड यथावत है।
इसमें विचारणीय बात यह है कि उपरोक्त शर्त के आधार पर क्या किसी राज्य में वर्तमान में आवश्यक विशेष शिक्षकों की तुलना में कार्यरत विशेष शिक्षकों की संख्या अधिक हो सकती है?
ऐसे में सवाल है राजस्थान में विशेष शिक्षा संगठनों पर जो जरूरी पटलों पर बैठे जिम्मेदारों को आरटीई एक्ट में अंकित पंक्तियों को समझाने में नाकाम रहा है, वरन जिस राज्य ने विशेष शिक्षकों की सर्वप्रथम सर्वाधिक रिक्तियाँ निकली हों वहां आज आज के पत्रों में कुछ और बेहतर आने के बजाय कार्यरत के आधिक्य की बात हो रही है।
राजस्थान के विशेष शिक्षक संगठनों के नीद की अवधि यदि लंबी रही तो इसका नुकसान सभी को सहना होगा।

धन्यवाद!

जलमहल/डीग
27/09/2025

जलमहल/डीग

2017/सितम्बर/सीतापुर/सम्मान
27/09/2025

2017/सितम्बर/सीतापुर/सम्मान

...........२_ इस मामले को ध्यान में रखते हुए, हम 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (दिनांक 07 मार्च, 2025 के उक्त आदेश के...
17/07/2025

...........२_ इस मामले को ध्यान में रखते हुए, हम 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (दिनांक 07 मार्च, 2025 के उक्त आदेश के पृष्ठ 10 पर उल्लिखित) में से प्रत्येक से तीन सप्ताह के भीतर इसमें निहित निर्देशों के अनुपालन की दलील देते हुए अलग-अलग हलफनामे दायर करने का आह्वान करते हैं।
३_ यदि कोई राज्य/संघ शासित प्रदेश ऐसा हलफनामा दाखिल करने में विफल रहता है, तो ऐसे प्रत्येक राज्य/संघ शासित प्रदेश के शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव सुनवाई की अगली तारीख यानी 29 अगस्त, 2025 को उपस्थित रहेंगे, जब इन याचिकाओं को फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा और बताएंगे कि अदालत की अवमानना के लिए कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।

Amarish Kumar Yadav

विशेष शिक्षा आचार्य (माध्यामिक) के 150 पद पर विज्ञापन जारी हो गया है।@झारखंड Amarish Kumar Yadav NASERPP(नासेर्प)
10/06/2025

विशेष शिक्षा आचार्य (माध्यामिक) के 150 पद पर विज्ञापन जारी हो गया है।

@झारखंड

Amarish Kumar Yadav
NASERPP(नासेर्प)

भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा 07/05/2025 को जारी पत्र माननीय सर्वोच्च न्यायालय से 28/10/2021 को आए जजमेंट के पैरा 57 के ब...
11/05/2025

भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा 07/05/2025 को जारी पत्र माननीय सर्वोच्च न्यायालय से 28/10/2021 को आए जजमेंट के पैरा 57 के बिंदु (f) में लिखी पंक्ति: “The other teachers and staff in the general schools be given compulsory training and sensitized to handle the CwSN in the general schools, if admitted; and” के अनुपालन की दिशा में बढ़ाया गया सकारत्मक कदम है। विशेष शिक्षकों को आरसीआई के इस कदम का स्वागत करना चाहिए।
आरसीआई के इस कदम का विशेष शिक्षा से सम्बंधित अन्य किसी नियमावली अथवा चल रही कार्यवाहियों पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कहना और है कि आसमान का विस्तार अनंत तक है इसलिए आसमान में कौआ ढूंढने से ज्यादा बेहतर होगा कि पहले अपने कान को देख लिया जाय।
धन्यवाद!

Amarish Kumar Yadav
NASERPP(नासेर्प)

08/05/2025

झारखंड सरकार द्वारा आज के कैबिनेट बैठक में संविदा पर कार्यरत रिसोर्स शिक्षक पर निर्णय हेतु स्क्रीनिंग कमेटी के गठन हेतु स्वीकृति प्रदान किया गया।

Amarish Kumar Yadav

लो जी! उत्तर प्रदेश विशेष शिक्षा भी प्रगति की राह पर कदम बढ़ा चुकी है। Amarish Kumar Yadav
18/04/2025

लो जी! उत्तर प्रदेश विशेष शिक्षा भी प्रगति की राह पर कदम बढ़ा चुकी है।

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