15/02/2026
महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर (महादेव) को प्रिय आक (मदार) का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों, पुराणों और लोक-आस्था—तीनों में आक का स्थान अत्यंत पवित्र है।
🌿 महाशिवरात्रि पर आक के पौधे का महत्व
तप और वैराग्य का प्रतीक
आक का पौधा कठोर, शुष्क और उपेक्षित भूमि पर भी पनप जाता है। यह भगवान शिव के तपस्वी, वैराग्यपूर्ण और लोक-बंधन से परे स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
अमरत्व और स्थायित्व का संकेत
आक अत्यंत सहनशील पौधा है, इसलिए इसे अमरत्व और दृढ़ता का प्रतीक माना गया है—जो शिव के नाश और पुनर्सृजन के तत्त्व से जुड़ता है।
औषधीय गुणों से युक्त
आयुर्वेद में आक के पत्ते, फूल और जड़ औषधीय माने गए हैं। शिव को औषधि और वैद्यनाथ भी कहा जाता है, इसलिए आक का संबंध उनके उपचारकारी स्वरूप से भी जुड़ता है।
तामसिक गुणों का शमन
मान्यता है कि आक शिव के उग्र और तामसिक गुणों को शांत करता है, इसलिए महाशिवरात्रि पर इसकी अर्पण-परंपरा प्रचलित है।
🌼 आक के फूल का विशेष महत्व
1. शिवलिंग पर अर्पण हेतु प्रिय
आक का फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं—यह लोक-मान्यता है।
2. श्वेत आक: शुद्धता और शांति
सफेद आक का फूल मन, वाणी और कर्म की शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसे विशेष रूप से शुभ माना गया है।
3. कर्म-दोष और भय से मुक्ति
धार्मिक विश्वास के अनुसार आक के फूल अर्पण से भय, दोष और नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है।
4. सरल भक्ति का प्रतीक
आक का फूल सहज, अलंकारहीन और सरल है—जैसे शिव की भक्ति। यही कारण है कि यह शिव को अत्यंत प्रिय माना गया।
🔱 महाशिवरात्रि पर आक अर्पण का भावार्थ
आक का पौधा और उसका फूल यह संदेश देते हैं कि भगवान शिव दिखावे से नहीं, बल्कि तप, त्याग, सरलता और सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं।