संघम् शरणम् गच्छामि ।।।।।।

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02/09/2019
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यक्षेत्र।संघ शिक्षा वर्ग, द्वितीय वर्ष, बिलासपुर।समापन समारोहराष्ट्र निर्माण के कार्य में सम...
16/06/2019

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यक्षेत्र।
संघ शिक्षा वर्ग, द्वितीय वर्ष, बिलासपुर।

समापन समारोह

राष्ट्र निर्माण के कार्य में समाज के प्रत्येक वर्ग को सहयोग करना चाहिए : माधव विद्वान्स

● संघ शिक्षा वर्ग का समापन समारोह, गुरुवार 13 जून 2019 को वर्षा के कारण बनी विपरित परिस्थितियों के बाद भी निर्धारित समय पर सायंकाल 5.45 बजे प्रारंभ हुआ। मंच पर अतिथि आगमन पर स्वागत प्रणाम हुआ, तत्पश्चात ध्वजारोहण, ध्वजप्रणाम और प्रार्थना हुई।

● समारोह में प्रदक्षिणा संचलन के पश्चात शिक्षार्थियों शारीरिक प्रात्यक्षिक गण समता, पदविन्यास, दण्ड संचालन, योगासन आदि के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। घोष का प्रात्यक्षिक संघ के अनुशासन का महत्वपूर्ण भाग है, जो संघस्थान पर दिखायी दे रहा था। सामुहिक समता के उत्तम प्रदर्शन से दर्शकों का ध्यान केवल प्रदर्शन पर टीका रहा, ऐसा दिखाई दे रहा था। सामुहिक व्यायामयोग सबको उत्साह से प्रेरित करनेवाला था। शारिरिक प्रदर्शन के पश्चात सामूहिक गीत "युगपरिवर्तन की बेला में..." हुआ।

● मंच पर आसीन अतिथियों का स्वागत एवं परिचय वर्ग कार्यवाह नवलसिंह भदौरिया ने किया। मंच पर विराजमान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध व्यवसायी एवं समाजसेवी श्री सुधीर कुमार गुप्ता, मुख्य वक्ता माधव विद्वान्स (मध्यक्षेत्र कार्यवाह), वर्ग के सर्वाधिकारी डॉ. विनोद तिवारी (अस्थिरोग विशेषज्ञ) और बिलासपुर के विभाग संघचालक काशीनाथ गोरे थे।

● वर्ग का प्रतिवेदन वर्ग कार्यवाह के द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा आभार प्रदर्शन वर्ग के व्यवस्था प्रमुख गणपति रायल द्वारा किया गया।

● इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि सुधीर कुमार गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि, ईश्वर ने हमें यह जीवन उपहार स्वरूप दिया है। प्रशिक्षण के दौरान जो भी आपको बताया गया, वह अपने जीवन में ग्रहण करने से वह उपहार बन जायेगा। प्रशिक्षण का कार्य पत्थर को तराशने जैसा होता है। चांदी की अच्छी सफाई तब होती है, जब उसमें अपना प्रतिबिंब दिखाई देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, शिक्षार्थी यहां से जो प्रशिक्षण लेकर जाएंगे वे समाजोपयोगी कार्य में जुटेंगे।

● समापन समारोह के मुख्य वक्ता माधव विद्वान्स ने अपने उद्बोधन में कहा कि, इस प्रकार के संघ के प्रशिक्षण वर्ग सम्पूर्ण देशभर चलते हैं। इन प्रशिक्षणों से सादा जीवन उच्च विचार को स्वयंसेवक आत्मसात करते हैं। स्वयं के कार्य को स्वयं करने का अभ्यास करते हैं। ऐसे प्रशिक्षण वर्गों में समाज का साधारण स्वयंसेवक भी राष्ट्रसेवा के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर मातृभूमि की सेवा में जुट जाता है। नागपुर में एक शाखा से प्रारंभ हुआ संघ का कार्य आज देशभर में फैल चुका है। समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संघ के विविध संगठन, जो स्वायत्त और स्वतंत्र है वे समाज के प्रत्येक व्यक्ति को साथ लेकर राष्ट्र कार्य में जुटे हुए हैं।
उन्होंने अपने उद्बोधन में देश की परिस्थितियों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए आह्वान किया कि, धर्म के मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में समाज के प्रत्येक वर्ग सहयोग करना चाहिए।

"इसे व्यवहारिक जीवन की आदत का प्रभाव ही कहेंगे जो आज हम जीवन में विस्मित होना भूल चुके हैं, तभी, विशेष ने अपना मह्त्व खो...
22/05/2016

"इसे व्यवहारिक जीवन की आदत का प्रभाव ही कहेंगे जो आज हम जीवन में विस्मित होना भूल चुके हैं, तभी, विशेष ने अपना मह्त्व खो दिया है और हमने अपनी समझ से उन्हें साधारण बना दिया है।

उदाहरण के लिए हम 'संवाद' की बात ही ले लें; संसार में सभी जीव जंतु संवाद के लिए ध्वनि एवं संकेतों का प्रयोग करते हैं पर इसका अर्थ यह नहीं की प्रकृति की चेतना के पास इंद्रियां नहीं तो वह संवाद नहीं करती; प्रकृति भी संकेतों के माध्यम से संवाद करती है पर उसे समझने के लिए समझ के स्तर का विकास आवश्यक होगा।

वास्तव में, हमारी दुनिया में शब्द ही शक्ति का स्वाभाविक उदाहरण है पर शायद हम उनसे इतने आदि हो गए हैं की हमें उनके मह्त्व का अनुमान ही नहीं। ज्ञान की शिक्षा हो या कानून का संविधान, धर्म का उपदेश हो या न्याय का आदेश, है तो शब्द ही। अगर हम शब्दों की शक्ति को जान लें तो शायद उसका बेहतर प्रयोग भी कर पाने में सक्षम होंगे; पर सोचने की फुर्सत मिले तब तो !

पृथ्वी के सभी जीव जंतु अथवा प्रकृति या पर्यावरण की बात करें, यह सभी अपनी ऊर्जा के लिए हमारे सौर्य मंडल के सूर्य की रौशनी पर आश्रित हैं, क्या यह तथ्य एकात्म मानवाद के सिद्धांत का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं , पर जानने और मानने में अंतर होता है !

संकेतों से सन्देश स्पष्ट है.... और वह यह है की जब राष्ट्र के लिए नेतृत्व एक समस्या बन जाए तो स्वयंसेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना होगा ; यही कारन है की संघ भी समाज में शाखाओं के माध्यम से अग्र्सरों का निर्माण करता है।

संघ के विषय में संशय जितना भी और जो भी हो, मौखिक रूप से उसका स्पष्टीकरण न ही संभव है और न ही उचित होगा क्योंकि तब संशय की सम्भावना को पूरी तरह नाकारा नहीं जा सकता ; संघ अपना परिचय अपने कार्यों के प्रभाव से देगा और यही स्वयंसेवकों का दायित्व भी !

हमें राजनीति नहीं करनी बल्कि राष्ट्र का नेतृत्व करना है और इस दृष्टि से संघ और स्वयंसेवकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि बात केवल सरकार बनने की नहीं बल्कि सही तरीके से चलने की है जिससे समाज का उत्थान और राष्ट्र के रूप में भारत अपने परम वैभव को प्राप्त कर सके ; यह संभव है और किया जा सकता है परन्तु इसके लिए हमें एक दुसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक बनने की आवश्यकता होगी।

समाज और सरकार व्यवस्था के सिक्के के दो पहलु हैं और अब स्वयंसेवकों को वह धातु बनना है जो अपने माध्यम से इन दोनों पहलुओं को जोड़े ताकि जीवन मूल्यों को मह्त्व प्रदान किया जा सके , यही वर्तमान की आवश्यकता है और हमारे प्रारब्ध का मार्ग भी , क्यों न इसे स्वीकार कर हम अपने प्रयास का चरण बदलें और मानवीय उत्क्रांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ायें ; इसी में हमारे जीवन की सार्थकता निहित है !"

सनातन-संस्कृति के प्रतीक सुप्रतिष्ठित धर्माचार्य व संत-समाज,समाज-सुधारक आदि ने उज्जैन में सिंहस्थ-पर्व की मंगल-बेला में ...
15/05/2016

सनातन-संस्कृति के प्रतीक सुप्रतिष्ठित धर्माचार्य व संत-समाज,समाज-सुधारक आदि ने उज्जैन में सिंहस्थ-पर्व की मंगल-बेला में श्री गुरु कार्ष्णि शिविर में सफाई-कामगार भाइयों-बहिनों के साथ सहभोज का आनन्द लिया। संघ के परम् पूजनीय सर संघ चालक डॉ0 श्री मोहन राव जी भागवत भी विशेष रूप से इस आत्मीय-आयोजन में उपस्थित रहे। निश्चित रूप से ऐसे आयोजनों से समाज को नई प्रेरणा और ऊर्जा मिलती है।

10/04/2016

RSS swayamsevaks waiting in queue outside a hospital in Kollam for donating blood!!

डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रकाण्ड क्रान्तिकारी थे।उनका जन्म हिन्दू वर्ष प्रति...
01/04/2016

डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रकाण्ड क्रान्तिकारी थे।उनका जन्म हिन्दू वर्ष प्रतिपदा (महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश और कर्नाटक में नए-साल के रूप में मनाए जाने वाले पर्व गुडीपाडवा के दिन 1 अप्रैल, 1889) के दिन हुआ था। घर से कलकत्ता गये तो थे डाक्टरी पढने परन्तु वापस आये क्रान्तिकारी बनकर। कलकत्ते में श्याम सुन्दर चक्रवर्ती के यहाँ रहते हुए बंगाल की गुप्त क्रान्तिकारी संस्था अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य बन गये। सन् १९१६ के कांग्रेस अधिवेशन में लखनऊ गये। वहाँ संयुक्त प्रान्त (वर्तमान यू०पी०) की युवा टोली के सम्पर्क में आये। बाद में कांग्रेस से मोह भंग हुआ और नागपुर में संघ की स्थापना कर डाली।

इन्होंने सदैव यही बताने का प्रयास किया कि नई चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें नये तरीकों से काम करना पड़ेगा और स्वयं को बदलना होगा, अब ये पुराने तरीके काम नहीं आएंगे।

मृत्युपर्यन्त सन् १९४० तक वे इस संगठन के सर्वेसर्वा रहे।

देश के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रणेता डॉ. केशव बलिराम हेडगेवारजी को जयंती पर नमन।

In order to give basic information about RSS and its activities to the new people, especially the youth, a short documen...
31/03/2016

In order to give basic information about RSS and its activities to the new people, especially the youth, a short documentary 'Swayameva Mrigendrata/स्वयमेव मृगेन्द्रता' was made which was widely appreciated.

Introduction of 'Rashtriya Swayamsevak Sangh' popularly known as 'RSS' or 'SANGH'. The society has been witness to Sangh's contributions towards nation build...

29/03/2016

पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा कि हम भारत को एक संपन्न, समतायुक्त और शोषणमुक्त देश बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश स्वाभिमान और सामर्थ्य संपन्न बनें और संघ चाहता है कि पूरी दुनिया भारत का नाम ले। इसके लिए हमें अपने जीवन में ‘भारत’ को जीना होगा। संघ इसी के लिए कार्य कर रहा है। डॉ.भागवत कोलकाता में फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी नामक संस्था के सहसंस्थापक दिवंगत मदनलाल अग्रवाल के जीवन पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।

सरसंघचालक जी ने कहा कि हम लोग भारत के हैं। हम लोग ‘भारतमाता की जय’ कहते हैं। जो भारत शब्द है यह केवल भूमि वाचक शब्द नहीं है, यह गुण वाचक शब्द है। और उन गुणों के साथ जब इस भूमि का वासी खड़ा होता है तब वह भारत कहलाता है। अन्यथा वह भारत नहीं कहलाता।

उन्होंने पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन गुणों के साथ खड़ा रहना स्वीकार नहीं था इसलिए उन्होंने अपना अलग देश बनाया। उन गुणों का वर्णन जहां से आया वह उदगम स्थल, उन्होंने अपना देश वहां बनाया है, पाकिस्तान में। वेदों की रचना, हमारी देवभाषा, आदिभाषा संस्कृत का व्याकरण वहां रचा गया। वहां से हमारे पूर्वज सारी दुनिया में गए। ये सब होने के बाद भी उन्होंने (पाकिस्तान ने) अलग होते समय हमसे यह नहीं कहा कि हम अपने देश का नाम भारत रखेंगे, तुम अपने देश का नाम दूसरा ढूंढो। ये उन्होंने कहा नहीं, उन्होंने अपना नाम अलग लिया। क्योंकि जिन गुणों को वे नहीं चाहते थे, वो सब भारत नाम लेते ही उनके पीछे-पीछे आ जाते।

एकमात्र दुनिया में भारतवर्ष ऐसा है इसके जो प्राचीनतम जीवन दर्शन है, उसका प्रत्यक्ष आचरण आज भी यहां पर देखने को मिलता है। यह कागज लेखी बात नहीं, आंखन देखि बात है भाई! सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रहमचर्य, तप, संतोष, ईश्वर प्रणिधान, ये सारी बातें जो है यम, नियम, आत्मीयता, आचरण की, ये सारी की सारी आज भी भारत वर्ष में देखी जा सकती है। उस जीवन को भारत कहते हैं | भारत के जीवन की यह परम्परा सब प्रकार की आपत्तियों और कष्टों को पार कर आज तक चलती आई। इसका कारण तो जीवन ही है।

29/03/2016
27/03/2016

---आज का पंचांग---
चतुर्थी, चैत्र, कृष्ण पक्ष, २०७२ कीलक, विक्रम सम्वत आप सब के लिए मंगलमय हो।

क्या इन सब के बाद भी आप इन्हें गद्दार कहेगें ।।।।।
25/03/2016

क्या इन सब के बाद भी आप इन्हें गद्दार कहेगें ।।।।।

19/03/2016

मोदी ने कहा कि मानवता के लिए इस महत्वपूर्ण समय पर इस शानदार कार्यक्रम का आयोजन होना दुनिया के लिए अहम है। जब हिंसा की काली परछाईं बड़ी होती जा रही है तो उस समय आप उम्मीद का नूर या रोशनी हैं।

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