01/02/2026
ॐ पूर्णमदः: वह (परमेश्वर/ब्रह्म) पूर्ण है (दिव्य चेतना से परिपूर्ण)।
पूर्णमिदं: यह (जगत/दृश्यमान संसार) भी पूर्ण है (पूर्णता से ही प्रकट)।
पूर्णात्पूर्णमुदच्यते: पूर्ण (ब्रह्म) से ही पूर्ण (जगत) उत्पन्न होता है।
पूर्णस्य पूर्णमादाय: पूर्ण (जगत) को पूर्ण (ब्रह्म) से लेने (या निकाल देने) पर भी।
पूर्णमेवावशिष्यते: पूर्ण ही शेष रहता है।