04/03/2026
सफ़ूफ़ मुग़ल्लिज़ ख़ास
यह नुस्ख़ा दिमाग़ी कमज़ोरी को दूर करता है, दिल को खुश रखने वाला (मुफर्रिह़-ए-क़लब) है, तबीयत में ताज़गी, सुकून और आत्मविश्वास पैदा करता है।
यह एहतलाम (स्वप्नदोष), जरयान, शीघ्रपतन, कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, सामान्य शारीरिक कमजोरी, कमजोरी-ए-बाह (यौन कमजोरी), नसों की कमजोरी तथा शुगर के मरीजों के लिए विशेष लाभकारी बताया गया है।
पुरुषों में बांझपन की समस्या में भी उपयोगी माना जाता है।
यह शीघ्रपतन, शुक्राणुओं की कमी, वीर्य के पतलेपन को दूर कर वीर्य को गाढ़ा बनाने वाला विशेष योग है।
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🌿 नुस्ख़ा (हुवल-शाफ़ी)
ब्राह्मी बूटी — 50 ग्राम
तुख्म सरीला — 50 ग्राम
बीज बंद — 50 ग्राम
तालमखाना — 50 ग्राम
बहुफली — 50 ग्राम
शतावर ज़र्द — 50 ग्राम
तुख्म ओटंगन — 50 ग्राम
सालब पंजा — 50 ग्राम
सफेद मूसली — 50 ग्राम
सालब मिस्री — 50 ग्राम
मस्तगी रूमी — 50 ग्राम
मखाना गुट्टी — 50 ग्राम
आटा सिंघाड़ा — 50 ग्राम
तुख्म रिहान (तुलसी बीज) — 50 ग्राम
मगज पंबा दाना — 50 ग्राम
तुख्म लाजवंती — 50 ग्राम
समंदर सोख — 50 ग्राम
गोखरू कलां — 50 ग्राम
छोटी इलायची — 50 ग्राम
गुड़हल के फूल (छाया में सूखे हुए) — 50 ग्राम
तबाशीर बांस — 25 ग्राम
कुश्ता कलई — 20 ग्राम
कुश्ता नकरा — 20 ग्राम
कुश्ता मरजान — 20 ग्राम
कुश्ता बैज़ा-ए-मुर्ग — 20 ग्राम
कुश्ता शंगरफ — 5 ग्राम
केसर कश्मीरी — 5 ग्राम
इसबगोल का भूसी — 500 ग्राम
कुजा मिस्री — 500 ग्राम
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🧪 बनाने की विधि
इसबगोल, कुश्ताजात, मस्तगी, केसर और मिस्री को छोड़कर बाकी सभी दवाओं को कूट-पीसकर अच्छी तरह मिला लें।
अंत में इसबगोल की भूसी और कुश्ताजात मिलाएँ।
केसर को गुलाब जल में घोटकर तथा मस्तगी को हल्के हाथ से घोटकर मिश्रण में शामिल करें।
अंत में मिस्री मिला दें।
मात्रा: 6–6 ग्राम, दिन में दो बार, गुनगुने दूध के साथ।
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⚠️ नोट
शुगर के मरीज बिना मिस्री के उपयोग करें।
यह शरीर में ऊर्जा बहाल करने और खून की पैदावार बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
पुरुष कमजोरी, हस्तमैथुन या अधिक संभोग से हुई कमजोरी को दूर कर शरीर को पुनः सशक्त बनाने वाला योग बताया गया है।
वीर्य की कमी, पतलापन और शीघ्रपतन की समस्या में लाभकारी माना जाता है।
👉 उपयोग से पहले किसी योग्य वैद्य/हकीम की सलाह अवश्य लें।