सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत

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सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत ज्योतिष विज्ञान रहस्य और आध्यात्म ।
प्रमुख- सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

23/12/2025

।।ॐ।।
जिन्होंने किया मूर्तियों का विरोध,
वो आज खुद मूर्ति बन गए।

।।ॐ।।सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत की ऑनलाइन मीटिंग दिनाँक 21 दिसम्बर  2025 में त्यौहारों एवं व्रत पर्व में आ रही विषमताओं...
22/12/2025

।।ॐ।।
सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत की ऑनलाइन मीटिंग दिनाँक 21 दिसम्बर 2025 में त्यौहारों एवं व्रत पर्व में आ रही विषमताओं को दूर करने के लिए एवं सोशल मिडिया से सनातन धर्म के व्रत एवं पर्व के साथ जो खिलवाड़ हो रहा हैं उसमे विषमताओं को दूर करने के उद्देश्य से संस्था ने निर्णय लिया। जिसमे ज्योतिषी गणित एवं अन्य धार्मिक मान्यताओं और शास्त्र मत अनुसार एकमत होकर निर्णय को संस्था ने निर्णय लिया। जिससे समाज में कोई सनातन व्रत या पर्व को जन विश्वास के साथ सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया जाए।
इस क्रम में आनेवाली पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी का व्रत गृहस्थ जीवन निर्वाह कर रहे सनातन धर्म भक्तो को 30 दिसम्बर 2025 को एकादशी व्रत रखने का सर्व सहमति से निर्णय लिया गया। इसने संस्था के कार्यकारणी राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय पं. विश्वकुमार शर्मा जी, राष्ट्रीय महासचिव पं. अभिषेक जोशी जी, संस्था प्रमुख ओमकार मिश्रा, संस्था के जलपीठ प्रमुख पं अमित पाराशर जी, पृथ्वी पीठ प्रमुख पं. रजनीश चातुर्वेदी जी,जलपीठ महामंत्री पं करुण शर्मा, जल पीठ कोषाध्यक्ष प्रदीप शास्त्री जी,पं पुष्प शर्मा जी, पं. निर्मल प्रसाद जी, पं.कैलास वत्स जी, पं. करम चंद्र जी, पं साहिल शर्मा जी, मोनिका मिश्रा जी आदि अन्य समलित हुए।

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच -भारत ⛳
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 #कच्छप_अवतार_का_राहू_केतु_दिव्य_रहस्ययह एक दिलचस्प और प्रतीकात्मक  व्याख्या है, जो पारंपरिक ज्योतिषीय या पौराणिक ग्रंथो...
10/12/2025

#कच्छप_अवतार_का_राहू_केतु_दिव्य_रहस्य
यह एक दिलचस्प और प्रतीकात्मक व्याख्या है, जो पारंपरिक ज्योतिषीय या पौराणिक ग्रंथों में सीधे तौर पर नहीं लिखी गई है, बल्कि यह राहु-केतु के स्वभाव और कछुए की क्रिया के बीच एक आधुनिक आध्यात्मिक या दार्शनिक संबंध बनाती है।
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मेरी इस व्याख्या को इस प्रकार समझा जा सकता है:-

कछुआ जब #सिर_अंदर करता है तब #केतु_का_प्रतीक है
#केतु को वैराग्य, अंतर्मुखता , मोक्ष और भौतिक दुनिया से अलगाव का ग्रह माना जाता है।
जब #कछुआ_अपना_सिर_और_अंग_खोल_में_छिपा_लेता है, तो यह बाहरी दुनिया से कटकर अपनी #सुरक्षा और #अंतर्मुखी स्थिति को दर्शाता है। यह क्रिया केतु के स्वभाव से मेल खाती है—व्यक्ति दुनिया से हटकर अपने भीतर ध्यान केंद्रित करता है।

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कछुआ जब #सिर_बाहर निकालता है तब #राहु_का_प्रतीक है
#राहु को सांसारिक इच्छाओं, भौतिकवाद, विस्तार, महत्वाकांक्षा और बाहरी दुनिया में उलझने का ग्रह माना जाता है।
जब #कछुआ_अपना_सिर_बाहर_निकालता है, तो वह सक्रिय रूप से दुनिया का सामना करता है, #भोजन_की_तलाश करता है और #भौतिक_जीवन_में_संलग्न होता है। यह क्रिया राहु के स्वभाव से मेल खाती है, जो हमेशा कुछ नया चाहता है और दुनियावी मामलों में सक्रिय रहता है।

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हालांकि यह व्याख्या सीधे तौर पर किसी #शास्त्र से नहीं आती, लेकिन यह राहु और केतु के ज्योतिषीय गुणों को समझने का एक बहुत ही व्यावहारिक और सरल तरीका है। यह एक रूपक है जो इन दो विरोधी ऊर्जाओं को स्पष्ट रूप से समझाता है:

#केतु: भीतर देखना, सुरक्षा, वैराग्य (सिर अंदर)।
#राहु: बाहर देखना, जोखिम उठाना, सांसारिक इच्छाएं (सिर बाहर)।

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हाँ, यह कथन एक गहरे दार्शनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। हिंदू दर्शन और पौराणिक कथाओं में, यह माना जाता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड, जिसमें राहु और केतु जैसे ग्रह और यहां तक कि जीवन की सभी घटनाएं शामिल हैं, भगवान विष्णु की माया (ब्रह्मांडीय भ्रम या दिव्य ऊर्जा) का ही एक हिस्सा हैं।
यहाँ इस दृष्टिकोण को विस्तार से समझा गया है:-

#माया_का_अर्थ: 'माया' का शाब्दिक अर्थ भ्रम नहीं, बल्कि वह शक्ति है जिसके द्वारा भगवान विष्णु (परम सत्य) इस विविध और जटिल भौतिक संसार को प्रकट करते हैं। सब कुछ उसी परमेश्वर की लीला या माया है।

राहु और केतु को अक्सर छाया ग्रह या आसुरी शक्तियाँ माना जाता है जो व्यक्ति के जीवन में सांसारिक उतार-चढ़ाव लाते हैं।
हालांकि, वे ब्रह्मांडीय व्यवस्था में एक निश्चित उद्देश्य पूरा करते हैं। वे कर्मों के फल देते हैं, व्यक्तियों को भौतिक इच्छाओं (राहु) की ओर धकेलते हैं और अंततः वैराग्य (केतु) की ओर ले जाते हैं।

ईश्वरीय नियंत्रण:
राहु और केतु की उत्पत्ति भगवान विष्णु की उपस्थिति में (समुद्र मंथन के दौरान) हुई थी।
वे स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करते; बल्कि, वे उस दिव्य योजना (भगवान की माया) के अनुसार कार्य करते हैं जो हर आत्मा को उसके कर्म पथ पर चलाती है।
इसलिए, यह कहना सही है कि #विष्णु_की_माया_ही_राहु_केतु_है, क्योंकि वे भी उसी परम सत्ता द्वारा स्थापित ब्रह्मांडीय नियमों और लीला का हिस्सा हैं। वे उस #नाटक_के_पात्र हैं जिसे स्वयं भगवान ने रचा है।

#निष्कर्ष
यही विष्णु माया (नाटक) के पात्र ही विष्णु के द्वारपाल िजय है

जय और विजय भगवान विष्णु के द्वारपाल थे जिन्हें श्राप के कारण काल गणना मे भौतिक (राहू) जीवन के जय एवं वैराग्य (केतु ) जीवन का विजय समझकर विष्णु रुपी भव सागर पार करने की नौका है जिसे ही द्वारपाल अंदर बाहर करने की लिया हो ही कच्छप (कूर्म) अवतार ही माया है।

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#ॐनमःशिवाय
Omkar Mishra
सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत
Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

 #पंचम_वेद_या_दृष्टि_का_मार्ग:⛳ #दार्शनिक_या_सर्वोच्च_चेतना_की_दृष्टि ( #पंच_मुख या  #पंच_दृष्टि):-*​यह सबसे गूढ़ व्याख्...
07/12/2025

#पंचम_वेद_या_दृष्टि_का_मार्ग:⛳
#दार्शनिक_या_सर्वोच्च_चेतना_की_दृष्टि ( #पंच_मुख या #पंच_दृष्टि):-*
​यह सबसे गूढ़ व्याख्या है, जो आपके मूल कथन से जुड़ी है।

#चार_दृष्टियाँ (चार मुख):
ब्रह्मा जी के चार मुख चारों दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) की ओर देखकर सृष्टि के भौतिक और ज्ञात पहलुओं, जैसे चार वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) और चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

#पंचम_दृष्टि (चेतना):*
पाँचवीं दृष्टि भौतिक दृष्टि नहीं, बल्कि चेतना है। यह वह अंतर्दृष्टि है जो स्वयं ब्रह्म को जानती है। यह सृष्टि को उसके निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं परम सत्य (ब्रह्म) के रूप में देखने की अवस्था है। यह दृष्टि सभी दिशाओं और सभी ज्ञान से परे, अनंत और असीम तत्त्वों को देखने की शक्ति है।

#पंचम_मुख_या_नेत्र:
ये चारो दिशाओ, चारो पुरुषार्थ, चारो वेदो का समायोजन कर एक मुखी चेतन दृष्टि प्रदान करता है जिसे ही पंचम मुख/पंचम वेद यानि नेत्र कहते है, जिसके बाद चेतन तत्वों के एक ब्रह्माण्ड रुपी सहस्रार चक्र को एक्टिव करने के बाद ही आज्ञा चक्र का उदय होता है, जिसे ही तीसरी आँख बोलते है। #पंच_वेद_/ #पंचम_मुख_यानि_चारो_की_एक_दृष्टि_ही_आकाश_नेत्र है*

यही नेत्र यानि मुख ही #अहंकार भी है, अपने अहंकार को काटना ही पंचम मुख है। सर्फ़ चेतन दृष्टि ही #शक्ति है।
#आकाश_नेत्र_ही_शिव_दर्शन_मुख_या_नेत्र_है

⛳ #ॐनमःशिवाय
🌹🙏🌹
Omkar Mishra
सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत
Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के  #वायु_पीठ कार्यकारणी के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक...
29/11/2025

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के
#वायु_पीठ कार्यकारणी के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।
आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई। मंच आशा करता है आप अपने पद की गरिमा का उचित मान रखते हुए,सनातन उत्थान का कार्य करगे।
🌹🙏🌹

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के  ीठ कार्यकारणी के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकाम...
29/11/2025

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के
ीठ कार्यकारणी के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।
आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई। मंच आशा करता है आप अपने पद की गरिमा का उचित मान रखते हुए,सनातन उत्थान का कार्य करगे।
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सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के  #पृथ्वी_पीठ  के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामन...
29/11/2025

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के
#पृथ्वी_पीठ के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।
आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई। मंच आशा करता है आप अपने पद की गरिमा का उचित मान रखते हुए,सनातन उत्थान का कार्य करगे।
🌹🙏🌹

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी

सनातन धर्म ⛳ मे *पंच तत्व* का विशेष महत्व है अतः संस्था मे पाँच पीठ रहेंगे। #उत्तर_खण्ड -  ीठ  #पश्चिम_खण्ड -  #वायु_पीठ...
28/11/2025

सनातन धर्म ⛳ मे *पंच तत्व* का विशेष महत्व है अतः संस्था मे पाँच पीठ रहेंगे।
#उत्तर_खण्ड - ीठ
#पश्चिम_खण्ड - #वायु_पीठ
#दक्षिण_खण्ड - #पृथ्वी_पीठ
#पूर्व_खण्ड - #अग्नि_पीठ
#मध्य_खण्ड - #आकाश_पीठ

इस प्रकार सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत को पंच तत्व मे समाहित कर लिया गया गई, प्रभु भोलेनाथ की आज्ञा से
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*ॐ नमः शिवाय*

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के  ीठ  के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामनाये एवं ब...
28/11/2025

सर्वज्ञ वाणी सनातन मंच-भारत के
ीठ के दायित्व के लिए बहुत बहुत बधाई।
आपको आपके दायित्व पदभार की हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई। मंच आशा करता है आप अपने पद की गरिमा का उचित मान रखते हुए,सनातन उत्थान का कार्य करगे।
🌹🙏🌹

Sarvagya astrology सर्वज्ञ एस्ट्रोलॉजी पं अमित शर्मा पाराशर आचार्य करुण शर्मा

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