30/11/2025
गोंडा, उत्तर प्रदेश, नवंबर 2025: स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (ए.एस.एम.सी.), गोंडा ने प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) धनंजय एस. कोटास्थाने के दूरदर्शी नेतृत्व में नवंबर 2025 में “वन वर्ल्ड, वन हेल्थ – मानव, पशु और पर्यावरणीय कल्याण के लिए एकजुट” विषय पर कई प्रभावशाली कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया । ये कार्यक्रम भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय सामाजिक एवं निवारक चिकित्सा संघ (IAPSM) के सहयोग से आयोजित किए गए ।
1. जागरूकता रैली और नाटक (7 नवंबर 2025)
एमबीबीएस बैच 2024 के छात्रों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में “वन हेल्थ, वन नेशन” विषय पर एक नाट्य प्रस्तुति दी । इस स्किट के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण के कारण मनुष्यों और पशुओं को होने वाले नुकसान को दर्शाया तथा यह संदेश दिया कि जब तक मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य संतुलित नहीं रहेगा, तब तक राष्ट्र स्वस्थ और मजबूत नहीं बन सकता ।
प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डॉ.) धनंजय कोटास्थाने ने कहा कि ‘वन हेल्थ’ को अपनाना एक स्वस्थ, सुरक्षित और सतत भविष्य की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण कदम है । कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण की शपथ के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प लिया ।
2. सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम (15 नवंबर 2025)
सी.एम.ई. ने चिकित्सकों, पशु चिकित्सकों, पर्यावरण वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग की आवश्यकता को दोहराया । कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा पेशेवरों एवं विद्यार्थियों को मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की परस्पर कड़ियों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना था ।
शैक्षणिक सत्रों में विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए जिसमे डॉ. वैशाली डी. कोटास्थाने ने बताया कि अनियंत्रित शहरी विस्तार एवं पारिस्थितिक असंतुलन नई संक्रामक बीमारियों के उद्भव में योगदान करते हैं और सतत विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया; डॉ. अहमद ज़ी फहीम ने एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग एवं मानव तथा पशु चिकित्सा में समन्वित निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा डॉ. सुधीर वर्मा ने पर्यावरणीय विघटन एवं मानव-पशु अंतःक्रियाओं से जुड़ी ज़ूनोटिक संक्रमणों की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा की तथा वन हेल्थ सहयोग के माध्यम से रोकथाम रणनीतियों पर बल दिया ।
मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) धनंजय कोटास्थाने ने अपने संबोधन में वन हेल्थ दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर बल देते हुए बताया कि वैश्वीकरण, शहरीकरण एवं जलवायु परिवर्तन किस प्रकार रोगों की गतिशीलता को प्रभावित कर रहे हैं ।
3. वन हेल्थ क्विज़ प्रतियोगिता (19 एवं 26 नवंबर 2025)
क्विज़ प्रतियोगिता का उद्देश्य वन हेल्थ दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की परस्पर जुड़ाव को रेखांकित करता है। वन हेल्थ क्विज़ प्रतियोगिता का प्रारंभिक दौर 19 नवंबर को आयोजित हुआ, जिसमें एमबीबीएस छात्रों कि कुल 12 टीमों ने भाग लिया । इनमें से चार टीमें फाइनल के लिए चयनित हुईं और उत्कृष्ट ज्ञान एवं उत्साह का प्रदर्शन किया । फाइनल में विजेता टीम (यशस्वी सिंह, हनी शर्मा, शशवत गुप्ता) तथा प्रथम उपविजेता ( यशवी, यशस्वी, वैभव ) द्वितीय उपविजेता (विकास, सुनील कुमार, सौरभ) एवं तृतीय उपविजेता (विभूति, सुरभि, सुजीत) टीमों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए ।
सभी कार्यक्रमों में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेज़िडेंट्स, स्नातकोत्तर रेज़िडेंट्स, इंटर्न्स और एमबीबीएस छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सफल आयोजन का नेतृत्व प्रोफेसर (डॉ.) कुलदीप श्रीवास्तव (विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा), डॉ. सुधीर वर्मा (सहायक प्रोफेसर), कॉलेज नोडल डॉ. हुदा सिद्दीकी (सीनियर रेज़िडेंट) तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संकाय सदस्यों ने किया । इसमें रेज़िडेंट्स, इंटर्न्स और सहयोगी स्टाफ (श्री गोविंद) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा ।
इन तीनों कार्यक्रमों—जागरूकता रैली एवं नाटक, सीएमई कार्यक्रम और क्विज़ प्रतियोगिता—ने ए.एस.एम.सी. गोंडा में वन हेल्थ दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया । संस्थान ने जन-जागरूकता, शैक्षणिक विमर्श और सहयोगात्मक अधिगम को एक साथ जोड़कर यह प्रदर्शित किया कि भावी चिकित्सक केवल रोगों का उपचार ही नहीं करेंगे, बल्कि उनके मूल कारणों को भी संबोधित करेंगे, जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव होगा ।