Astrologer Hemlata Murlidhar

Astrologer Hemlata Murlidhar ✡️ Astrologist & psychic
spiritual Vedic Astrologer
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29/12/2025

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आख़िरी एकादशी 30 दिसंबर को, जिसके उपायों का पुण्य पूरे वर्ष भर फल देता है ।

एक वैज्ञानिक एक सिद्धांत का परीक्षण करना चाहता था। उसे एक ऐसे स्वयंसेवक की आवश्यकता थी जो किसी भी हद तक जाने को तैयार हो...
29/12/2025

एक वैज्ञानिक एक सिद्धांत का परीक्षण करना चाहता था। उसे एक ऐसे स्वयंसेवक की आवश्यकता थी जो किसी भी हद तक जाने को तैयार हो। अंततः उन्हें एक व्यक्ति मिला: जिसे मृत्युदंड की सजा दी गई थी, तथा जिसे बिजली की कुर्सी पर लटकाकर मृत्युदंड दिया जाना था।

वैज्ञानिक ने अपराधी को एक वैज्ञानिक प्रयोग में भाग लेने का प्रस्ताव दिया। इस प्रयोग में उनकी कलाई पर एक छोटा सा कट लगाया गया, जिससे उनके रक्त को बूंद-बूंद करके अंतिम बूंद तक बहने दिया गया। उन्होंने उसे समझाया कि उसके बचने की संभावना बहुत कम है, लेकिन जो भी हो, उसकी मृत्यु पीड़ा रहित और बिना किसी कष्ट के होगी, और उसे इसका अहसास भी नहीं होगा।

दोषी व्यक्ति ने बिजली की कुर्सी पर मृत्युदंड दिए जाने के स्थान पर इस मृत्यु को स्वीकार कर लिया। उसे स्ट्रेचर पर लिटाया गया और बांध दिया गया ताकि वह हिल न सके। फिर उसकी कलाई पर एक छोटा सा सतही कट लगाया गया और उसकी बांह के नीचे एक छोटा सा एल्युमीनियम कंटेनर रख दिया गया।

कट सतही था, जो त्वचा की केवल पहली परत को प्रभावित कर रहा था, लेकिन यह इतना था कि उसे विश्वास हो गया कि वास्तव में उसकी कलाईयां काटी गयी थीं। बिस्तर के नीचे सीरम की एक बोतल लगाई गई थी, जिसमें नीचे के कंटेनर में बूंद-बूंद तरल के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए एक वाल्व लगा हुआ था।

दोषी व्यक्ति गिरती हुई हर बूँद को सुन सकता था और उसे विश्वास था कि यह उसका ही खून बह रहा है। वैज्ञानिक ने बिना उसे पता चले, धीरे-धीरे वाल्व का प्रवाह कम कर दिया, जिससे उसे विश्वास हो गया कि उसका रक्त पतला हो रहा है।

जैसे-जैसे मिनट बीतते गए, दोषी व्यक्ति का चेहरा पीला पड़ता गया, उसकी हृदय गति बढ़ती गई, तथा सांस लेना कठिन होता गया। जब उनकी चिंता चरम पर पहुंच गई तो वैज्ञानिक ने वाल्व पूरी तरह से बंद कर दिया। उसी समय अपराधी को दिल का दौरा पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई।

वैज्ञानिक ने अभी-अभी यह सिद्ध किया था कि मानव मस्तिष्क जो कुछ भी देखता और स्वीकार करता है, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, उसका सख्ती से पालन करता है, इस प्रकार वह हमारे पूरे अस्तित्व को मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों रूप से प्रभावित करता है।

मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि जब मन स्वयं को धोखा देता है तो उसकी कोई सीमा नहीं होती। यह तब और भी बुरा हो जाता है जब वह किसी बात को नहीं समझता और उसे समझाने के लिए अपना स्वयं का संस्करण बना लेता है, जैसे कि जब हम कुछ घटनाओं को अलौकिक मान लेते हैं, जबकि वास्तव में वे अलौकिक नहीं होतीं।

जीवन में अक्सर हम ऐसी समस्याओं का सामना करते हैं जिनका समाधान असंभव लगता है। कोई हमें यह कह सकता है कि स्थिति को बदलने की बहुत कम संभावना है, लेकिन हम केवल उसी बात पर विश्वास करना चुनते हैं जिसे हम समझ पाते हैं और जिसकी कल्पना कर पाते हैं।

"जो असफलता के बारे में सोचता है वह पहले ही असफल हो चुका है।"

"जो जीत के बारे में सोचता है वह पहले से ही एक कदम आगे है

27/12/2025

तंत्र में नींबू ही क्यों प्रयोग में लिया जाता है ? एक छुपा हुआ रहस्य, आइए जानते हैं

With Preksha Naik – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
26/12/2025

With Preksha Naik – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

22/12/2025

वामन अवतार का वो रहस्य जो 99% लोग नहीं जानते! भगवान विष्णु का वामन अवतार: तीन पग भूमि का वास्तविक रहस्य
जिस भगवान के एक इशारे पर पूरा ब्रह्मांड चलता है, उन्हें किसी राजा से तीन कदम जमीन माँगने की जरूरत क्यों पड़ी?
नमस्कार दोस्तों, आज हम भगवान विष्णु के वामन अवतार की उस प्रसिद्ध कथा के गहरे रहस्य को जानेंगे, जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। अक्सर हमें लगता है कि यह केवल एक राजा और एक बामन ब्राह्मण बालक के बीच जमीन के दान की कहानी है। लेकिन क्या सच में ब्रह्मांड के स्वामी को तीन पग जमीन की जरूरत थी ? या इसके पीछे कुछ ऐसा छिपा है जिसे हम आज तक समझ नहीं पाए हैं ? आज का यह विश्लेषण आपकी आँखें खोल देगा। यह कहानी बाहर की नहीं, आपके भीतर की है। आइए जानते हैं कि भगवान ने वामन अवतार क्यों लिया और उन तीन पगों का हमारी चेतना से क्या संबंध है।

15/12/2025
मेरी कलम से ✍️ आजकल सोशल मीडिया पर मैंने ऐसी कई वीडियो देखी हैं जो मन को हिला देती हैं। इनमें भगवान की कहानियों को इस तर...
12/12/2025

मेरी कलम से ✍️
आजकल सोशल मीडिया पर मैंने ऐसी कई वीडियो देखी हैं जो मन को हिला देती हैं। इनमें भगवान की कहानियों को इस तरह बदल दिया गया है कि उनका स्वरूप ही कुछ और हो जाता है। हाल ही में मैंने एक वीडियो देखी जिसमें बालकृष्ण अपनी माँ से विवाह के बारे में पूछते हैं और मजाक करते हुए कहते हैं— “मैं सुदामा की बहू ले आऊँगा।” पहली नज़र में यह दृश्य किसी हल्के-फुल्के हास्य की तरह लगता है, लेकिन जैसे ही मन गहराई में जाता है, एक चुभन उठती है कि धर्म को आखिर किस दिशा में मोड़ा जा रहा है। जिस बात का शास्त्रों में कहीं उल्लेख नहीं, उसे आज मजाक और तमाशे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, और लोग इसे सच मानकर आनंद भी ले रहे हैं।

कथा-वाचन, जो कभी भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम था, अब बहुत जगहों पर मनोरंजन का साधन बन गया है। कई कथा-वाचक मंच को साधना का स्थान नहीं, बल्कि एक शो की तरह देखते हैं—जहाँ आवाज़ में उतार-चढ़ाव, संवादों में अभिनय और घटनाओं में मनगढ़ंत कल्पना जोड़कर भीड़ को आकर्षित किया जाता है। भगवान, जो जीवन के आदर्श हैं, जिनके चरित्र से हम धैर्य, प्रेम, नीति और सद्गुण सीखते हैं—उन्हें आज मजाक और हास्य के पात्र के रूप में दिखाया जाने लगा है।

सबसे बड़ा खतरा यह है कि आज की पीढ़ी धर्म को किताबों और गुरुओं से नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन से सीख रही है। बच्चा जब पहली बार कृष्ण का नाम सुनता है, तो उसके सामने स्क्रीन पर वही छवि आती है जो उसे वीडियो में दिखाई जाती है। अगर उसे भगवान का स्वरूप इस तरह की हास्यमय, मनगढ़ंत कहानियों में दिखाया जाएगा, तो उसकी श्रद्धा भी उसी दिशा में ढल जाएगी। वह भगवान को आध्यात्मिक शक्ति नहीं, बल्कि एक कॉमिक चरित्र की तरह देखना शुरू कर देगा। धीरे-धीरे धर्म मनोरंजन में बदल जाएगा, और भक्ति का भाव सतही होकर रह जाएगा।

हमें यह समझना होगा कि धर्म केवल घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन की दिशा है। भगवान की प्रत्येक कथा का अपना अर्थ और गहराई होती है। कृष्ण का बाल-स्वरूप भी केवल खेल का रूप नहीं, बल्कि प्रेम, मासूमियत, ज्ञान और धर्म के बीजों का स्वरूप है। लेकिन जब कथा-वाचक अपनी कल्पनाएँ जोड़कर घटनाओं का रूप बदल देते हैं, तो न केवल कथा बदलती है, बल्कि उसका सार भी खो जाता है।

आज आवश्यकता है कि हम सच और दिखावे के बीच का अंतर पहचानें। जो भी कथा सुनें, उसे केवल मनोरंजन की दृष्टि से न लें। यह भी समझें कि भगवान का नाम कोई हँसी-मज़ाक का विषय नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। बच्चों को भगवान के बारे में बताते समय उन्हें सही जानकारी दें, क्योंकि उनके मन में जो पहली छवि बनती है, वही जीवनभर रहती है।

धर्म को हल्का बनाकर प्रस्तुत करने से धर्म कमजोर नहीं होता, लेकिन हमारी श्रद्धा अवश्य कमजोर हो जाती है। जब श्रद्धा कमजोर होती है, तो जीवन भी दिशा खो देता है। इसलिए ज़रूरत है कि हम धर्म को उसकी गंभीरता और पवित्रता में समझें और दूसरों को भी समझने दें।

मैंने जो वीडियो देखी, वह केवल एक दृश्य नहीं था—वह इस बात का संकेत था कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं। यह समय है रुककर सोचने का, खुद को संभालने का और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म की सही रोशनी बचाने का। भगवान को कॉमिक चरित्र नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम और प्रकाश के स्वरूप में देखने का। यही धर्म की मर्यादा है और यही हमारी ज़िम्मेदारी भी।
🙏आपकी नित्य शुभाकांशी हेमलता मुरलीधर 🌹

10/12/2025

आइए जानते है नए साल 2026 मे आने वाले महत्वपूर्ण त्यौहारों की जानकारी ।

08/12/2025

16 दिसंबर को खरमास की शुरुआत हो रही है. खरमास में क्या करें और क्या नहीं ? आइए जानते है।

जानते है!जब " टाईटेनिक " समुन्द्र मे डूब रहा था, तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे, जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा ...
07/12/2025

जानते है!

जब " टाईटेनिक " समुन्द्र मे डूब रहा था, तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे, जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे!

सबसे करीब जो जहाज़ मौजूद था उसका नाम "SAMSON " था और वो हादसे के वक्त टाईटेनिक से सिर्फ 7 मील की दुरी पर था !

सैमसन के कैप्टन ने न सिर्फ टाईटेनिक की ओर से फायर किए गए सफेद शोले (जोकि इन्तेहाई खतरे की हालत मे हवा मे फायर किया जाता है) देखे थे, बल्कि टाईटेनिक के मुसाफिरो के चिल्लाने के आवाज़ को भी सुना भी था, लेकिन सैमसन के लोग गैर कानूनी तौर पर बहुत कीमती समुन्द्री जीव का शिकार कर रहे थे और नही चाहते थे कि पकडे जाए, लिहाजा वो टाईटेनिक की हालात को देखते हुए भी मदद न करके, अपनी जहाज़ को दूसरे तरफ़ मोड़ कर चले गए!

"ये जहाज़ हम मे से उनलोगों की तरह है, जो अपनी गुनाहों भरी जिन्दगी मे इतने मग़न हो जाते हैं कि उनके अंदर से इन्सानियत का एहसास खत्म हो जाता है और फिर वो सारी जिन्दगी अपने गुनाहो को छिपाते गुजार देते हैं...."

दूसरा जहाज़ जो करीब मौजूद था, उसका नाम "CALIFORNIAN " था जो हादसे के वक्त, टाईटेनिक से 14 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने भी टाईटेनिक की तरफ़ से मदद की पुकार को सुना और बाहर निकल कर सफेद शोले अपनी आखो से देखा, लेकिन क्योकि टाईटेनिक उस वक्त बर्फ़ की चट्टानो से घिरा हुआ था, उसे उन चट्टानों के चक्कर काट कर जाना पड़ता, इसलिए वो कैप्टन मदद को ना जा कर, अपने बिस्तर मे चला गया और सुबह होने का इन्तेजार करने लगा!

सुबह को जब वो टाईटेनिक के लोकेशन पर पहुँचा तो टाईटेनिक को समुन्द्र की तह में पहुँचे हुए, 4 घंटे गुज़र चुके थे और टाईटेनिक के कैप्टन Adword Smith समेत 1569 मुसाफिर डूब चुके थे......!

"ये जहाज़ हमलोगो मे से उनकी तरह है जो किसी की मदद करने अपनी सहूलत और असानी देखते है और अगर हालात सही ना हो तो किसी की मदद करना अपना फ़र्ज़ भूल जाते है!"

तीसरा जहाज़ "CARPHATHIYA" था जो टाईटेनिक से 68 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने रेडियो पर टाईटेनिक के मुसाफारो की चीख पूकार सुनी, जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था. उसने फौरन अपने जहाज़ का रुख मोड़ा और बर्फ़ की चट्टानों और खतरनाक़ मौसम की परवाह किए बेगैर, मदद के लिए रवाना हो गया. अगरचे वो दूर होने की वजह से टाईटेनिक के डूबने के दो घंटे बाद लोकेशन पर पहुँच सका, लेकिन यही वो जहाज़ था जिसने लाईफ बोट्स की मदद से टाईटेनिक के बाकी 710 मुसाफिरो को जिन्दा बचाया था और उसे हिफाज़त के साथ न्यूयार्क पहुँचा दिया था!

उस जहाज़ के कैप्टन "आर्थो रोसट्रन" को ब्रिटेन के तारीख के चंद बहादुर कैप्टनों में शूमार किया जाता है और उनको कई समाजिक और सरकारी आवार्ड से भी नवाजा गया था...!

याद रखिए!---

हमारी जिन्दगी मे हमेशा मुश्किलात रहती हैं, चैलेंज रहते हैं, लेकिन जो इस मुश्किलात और चैलेंज का सामना करते हुए भी इन्सानियत की भलाई के लिए कुछ कर जाए, उन्हे ही इन्सान और इन्सानियत याद रखती है!

SPKHATRI

प्रार्थना करें कि भगवान किसी की मदद का मौका दे, क्योंकि ये इन्सानियत की सबसे ऊँचा दर्ज़ा है!

(William Thomas की यादगार पोस्ट

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