Sri bhagwate vasudevay Namah

Sri bhagwate vasudevay Namah social work four human resources and development

गोल्ड ज्वेलरी किस प्रकार और कौन सा खरीदा जाए उसकी जानकारी
02/06/2024

गोल्ड ज्वेलरी किस प्रकार और कौन सा खरीदा जाए उसकी जानकारी

सोने की ज्वेलरी खरीदने में भ्रमित ना हो

02/06/2024

गोल्ड खरीदने की जानकारी

11/01/2023

कुंडली एक पूरा व्यक्ति का समाज से मेलजोल है और जो इसमें कुंडली में ऊपर की तरफ बीच में घर होता है वही लगन कहा जाता है जिसमें लगन लिखा होता है बस वही आप हैं व्यक्ति है जिसको और सभी घरों से जो और सभी ग्यारह घर उनसे उसको क्या क्या प्राप्त होगा

मेरा मानना है की हम मतलब लगन हमारा घर है और बाकी जितने भी घर है उनसे हमें कुछ ना कुछ प्राप्त होना है मतलब कि घर को हमें चलाने के लिए जैसे बाजार से सामान खरीदना पड़ता है इसी प्रकार हमें हर घर से कुछ ना कुछ लेना है और हर घर में कुछ ना कुछ सामान है मतलब हर घर कुछ ना कुछ हमें देता है लगन को देता है तो इसी प्रकार हम मानेंगे की लगन को अगर दूसरे भाव से धन प्राप्त होता है तो देखना कि उसमें कौन सी राशि है और कौन सा ग्रह अब राशि और ग्रह दोनों में आपस में कितना संबंध सामान्य से है और कितना आपस में उनमें व्यवहार है उस हिसाब से आपको उस घर से मिलेगा इसी प्रकार आप हर घर पर अप्लाई कर सकते हैं

क्योंकि कुछ अच्छे ग्रह होते हैं कुछ थोड़े से क्रूर होते हैं अब किस राशि में बैठे उस राशि से उसका किस तरह का संपर्क है और
कालपुरुष की राशि से वह किस भाव से संपर्क रखते हैं सभी का विशेषण करके हमें प्राप्त होता है कि लग्न को क्या मिलेगा।
🙏जय श्री शिव पार्वती

25/12/2022

आपको अपनी राशि के अनुसार तय करना चाहिए कि आपको किस धातु का छल्ला धारण करना चाहिए. गलत धातु का छल्ला धारण करने से आपको सही फल नहीं मिलता है, कई बार विपरीत फल भी मिलने की आशंका रहती है. आइए जानते हैं, किस राशि वालों को कौन सी धातु का छल्ला पहनना चाहिए.

मेष राशि- मेष राशि के जातकों को ताम्बे का छल्ला, बाएं हाथ की अनामिका अंगुली में, रविवार दोपहर को धारण करना चाहिए. इससे स्वास्थ्य उत्तम होगा तथा शीघ्र क्रोध आने की समस्या कम होगी.

वृष राशि- आपके लिए उत्तम होगा कि आप चांदी का छल्ला दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में शुक्रवार को धारण करें. इससे आपका वैवाहिक जीवन उत्तम होगा साथ ही धन सम्बन्धी समस्याओं से राहत मिलेगी.

मिथुन राशि- मन की दुविधाओं से निकलने के लिए और करियर में तेजी से उन्नति करने के लिए आपको कांसे का छल्ला दाहिने हाथ की कनिष्ठा अंगुली में , बुधवार शाम को धारण करें. आपको सोने का छल्ला धारण करने से बचना चाहिए.

कर्क राशि- आपको दाहिने हाथ की , कनिष्ठा अंगुली में सोमवार रात्रि को चांदी का छल्ला धारण करना चाहिए , इससे आपका मन नियंत्रित होगा, स्वास्थ्य अच्छा होगा साथ ही रिश्तों की समस्या परेशान नहीं करेगी. लोहे का छल्ला नहीं धारण करना चाहिए.
सिंह राशि- सोने का छल्ला, दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में , रविवार दोपहर को धारण करें , इससे आपका प्रभाव बढेगा , हड्डियों की समस्या से निजात मिलेगी साथ ही जीवन में संघर्ष थोडा कम होगा.

कन्या राशि- चांदी और सोना बराबर मात्रा में मिलाकर दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में, बुधवार शाम को धारण करें. इससे स्वास्थ्य उत्तम होगा, बार बार आने वाली नौकरी की समस्याओं से बचेंगे साथ ही थोडा सा जिम्मेदार भी होंगे.

तुला राशि- चांदी का एक छल्ला दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली या अंगूठे में,शुक्रवार शाम को धारण करें, इससे आपका नाम यश बढेगा , धन के खर्चे नियंत्रित होंगे और वैवाहिक जीवन सुखद होगा. स्वर्ण धारण करने से आपको बचना चाहिए.

वृश्चिक राशि- एक ताम्बे का छल्ला बाएँ हाथ की अनामिका में मंगलवार को और एक चांदी का छल्ला दाहिने हाथ की छोटी अंगुली में सोमवार को धारण करें. इससे आप पारिवारिक जीवन और करियर में तालमेल बैठा पायेंगे साथ ही संतानोत्पत्ति की समस्या से निजात मिलेगी.

धनु राशि- स्वर्ण या पीतल का एक छल्ला दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में बृहस्पतिवार को प्रातःकाल धारण करें. इससे आपका स्वभाव बेहतर होगा , कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी , साथ ही पाचन तंत्र की समस्याओं से निजात मिलेगी. जहाँ तक हो सके चांदी धारण करने से बचें.
मकर राशि- आपको खूब सारा धन कमाना है साथ ही अपने रूखे स्वभाव को भी ठीक करना है. नयी नयी योजनाएँ तो बनती हैं पर सब कल्पना में ही रह जाती हैं, इन तमाम समस्याओं से राहत पाने के लिए आप स्टील या जस्ते का एक छल्ला,शनिवार को शाम को,बाएँ हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें.आपको स्वर्ण धारण करने से बचना चाहिए.

कुम्भ राशि- मन और भावनाओं का उतार चढ़ाव और आलस्य ही आपकी सबसे बड़ी समस्या है और इसी कारण आप चीज़ों को बीच में छोड़ देते हैं . आपको लोहे का एक छल्ला बाएँ हाथ की मध्यमा अंगुली में शनिवार को शाम को धारण करना चाहिए, साथ ही ताम्बा धारण करने से परहेज करना चाहिए.

मीन राशि- आपको एक पीतल या सोने का छल्ला दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में बृहस्पतिवार को प्रातः धारण करना चाहिए , इससे आपका स्वास्थ्य और स्वभाव दोनों ही उत्तम होगा.

13/11/2022

हम सनातन हिन्दूधर्मी बचपन से ही एक बात सुनते आ रहे हैं कि....
हमारी पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है... और, जब वो (शेषनाग) थोड़ा सा हिलते है... तो, भूकंप आता है..!

और, अंग्रेजी स्कूलों के पढ़े... तथा, हर चीज को वैज्ञानिक नजरिये से देखने वाले आज के बच्चे....
हमारे धर्मग्रंथ की इस बात को हँसी में उड़ा देते हैं...
एवं, वामपंथियों और मलेच्छों के प्रभाव में आकर इसका मजाक उड़ाते हैं..!

दरअसल, हमारी "पृथ्वी और शेषनाग वाली बात" महाभारत में इस प्रकार उल्लेखित है...

"अधॊ महीं गच्छ भुजंगमॊत्तम; सवयं तवैषा विवरं परदास्यति।
इमां धरां धारयता तवया हि मे; महत परियं शेषकृतं भविष्यति।।"

(महाभारत आदिपर्व के आस्तिक उपपर्व के 36 वें अध्याय का श्लोक )

इसमें ही वर्णन मिलता है कि... शेषनाग को ब्रह्मा जी धरती को धारण करने को कहते हैं... और, क्रमशः आगे के श्लोक में शेषनाग जी आदेश के पालन हेतु पृथ्वी को अपने फन पर धारण कर लेते हैं.

लेकिन इसमे लिखा है कि... शेषनाग को.... हमारी पृथ्वी को... धरती के "भीतर से" धारण करना है... न कि, खुद को बाहर वायुमंडल में स्थित करके पृथ्वी को अपने ऊपर धारण करना है.

इसमें शेषनाग की परिभाषा है:

[ विराम प्रत्ययाभ्यास पूर्वः संस्कार शेषोअन्यः ]

अर्थात.... रुक - रुक कर, विशेष अभ्यास , पूर्व के संस्कार [चरित्र /properties] हैं ...तथा, शेष माइक्रो/सूक्ष्म लहर हैं.

परिभाषा के अनुसार... कुल नाग (दीर्घ तरंग) और सर्प (सूक्ष्म तरंग) की संख्या 1000 हैं.

जिसमें से... शेषनाग {सूक्ष्म /दीर्घ तरंग} या शेषनाग की कुण्डलिनी उर्जा की संख्या 976 हैं... तथा, 24 अन्य नाग या तरंग हैं.

और, यह जानकर आपके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहेगा कि...

आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार भी....
यांत्रिक लक्षणों के आधार पर पृथ्वी को स्थलमण्डल, एस्थेनोस्फीयर , मध्यवर्ती मैंटल , बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बांटा गया है.

एवं, रासायनिक संरचना के आधार पर भूपर्पटी ,
ऊपरी मैंटल , निचला मैंटल , बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटा जाता है.

समझने वाली बात यह है कि...

पृथ्वी के ऊपर का भाग... भूपर्पटी प्लेटों से बनी है... और, इसके नीचे मैन्टल होता है.... जिसमें मैंटल के इस निचली सीमा पर दाब ~140 GPa पाया जाता है.

और, मैंटल में संवहनीय धाराएँ चलती हैं.... जिनके कारण स्थलमण्डल की प्लेटों में गति होती है.

और, इन गतियों को रोकने के लिए एक बल काम करता है... जिसे, भूचुम्बकत्व कहते है.

इसी भूचुम्बकत्व की वजह से ही... टेक्टोनिक प्लेट जिनसे भूपर्पटी का निर्माण हुआ है... और, वो स्थिर रहती है...तथा, उसमें कहीं भी कोई गति नही होती.

हमारे शास्त्रों के अनुसार....
शेषनाग के हजारो फन हैं...

अर्थात, भूचुम्बकत्व में हजारों मैग्नेटिक वेब्स है.

और... शेषनाग के शरीर अंत में एक हो जाते हैं.... मतलब एक पूंछ है...

मतलब कि... भूचुम्बकत्व की उत्पत्ति का केंद्र एक ही है.

इसी तरह ये कहना कि... शेषनाग ने पृथ्वी को अपने फन पे टिका रखा है का मतलब हुआ कि.... भूचुम्बकत्व की वजह से ही पृथ्वी टिकी हुई है.

और, शास्त्रों का ये कहना कि...

शेषनाग के हिलने से भूकंप आता है से तात्पर्य है कि.... भूचुम्बकत्व के बिगड़ने (हिलने) से भूकंप आता है।

ध्यान रहे कि.... हमारे वैदिक ग्रंथो में इसी ""भूचुम्बकत्व को ही शेषनाग कहा गया"" है.

जानने लायक बात यह है कि...
क्रोड का विस्तार मैंटल के नीचे है
अर्थात 2890 किमी से लेकर पृथ्वी के केन्द्र तक.

किन्तु यह भी दो परतों में विभक्त है -
बाह्य कोर और आतंरिक कोर.

जहाँ, बाह्य कोर तरल अवस्था में पाया जाता है...
क्योंकि यह द्वितीयक भूकंपीय तरंगों (एस-तरंगों) को सोख लेता है.

इसीलिए, हमारे धर्मग्रंथों का यह कहना कि....
पृथ्वी शेषनाग के फन पे स्थित है... मात्र कल्पना नहीं बल्कि एक सत्य है कि... पृथ्वी शेषनाग (भू-चुम्बकत्व) की वजह से ही टिकी हुई है या शेषनाग के फन पे स्थित है.... और, उनके हिलने से ही भूकंप आते हैं.

अब चूंकि, इतने गूढ़ और वैज्ञानिक रहस्य सबको एक एक समझाना बेहद दुष्कर कार्य था... इसीलिए, हमारे पूर्वजों ने इसे एक कहानी के रूप में पिरो कर हमारे धर्मग्रंथों में संरक्षित कर दिया...!

और, विडंबना देखें कि... आज हम अपने पूर्वजों द्वारा संचित ज्ञान को समझ कर उसपर गर्व करने की जगह उसकी खिल्ली उड़ाने को अपनी शान एवं आधुनिकता समझते हैं.

जय महाकाल...!!! साभार 🙏❤️🙏

03/11/2022

चौरासी लाख योनियों का रहस्य...

हिन्दू धर्म में पुराणों में वर्णित ८४००००० योनियों के बारे में आपने कभी ना कभी अवश्य सुना होगा। हम जिस मनुष्य योनि में जी रहे हैं वो भी उन चौरासी लाख योनियों में से एक है। अब समस्या ये है कि कई लोग ये नहीं समझ पाते कि वास्तव में इन योनियों का अर्थ क्या है? ये देख कर और भी दुःख होता है कि आज की पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी इस बात पर व्यंग करती और हँसती है कि इतनी सारी योनियाँ कैसे हो सकती है। कदाचित अपने सीमित ज्ञान के कारण वे इसे ठीक से समझ नहीं पाते। गरुड़ पुराण में योनियों का विस्तार से वर्णन दिया गया है। तो आइये आज इसे समझने का प्रयत्न करते हैं।

सबसे पहले ये प्रश्न आता है कि क्या एक जीव के लिए ये संभव है कि वो इतने सारे योनियों में जन्म ले सके? तो उत्तर है, हाँ। एक जीव, जिसे हम आत्मा भी कहते हैं, इन ८४००००० योनियों में भटकती रहती है। अर्थात मृत्यु के पश्चात वो इन्ही ८४००००० योनियों में से किसी एक में जन्म लेती है। ये तो हम सब जानते हैं कि आत्मा अजर एवं अमर होती है इसी कारण मृत्यु के पश्चात वो एक दूसरे योनि में दूसरा शरीर धारण करती है। अब प्रश्न ये है कि यहाँ "योनि" का अर्थ क्या है? अगर आसान भाषा में समझा जाये तो योनि का अर्थ है जाति (नस्ल), जिसे अंग्रेजी में हम स्पीशीज (Species) कहते हैं। अर्थात इस विश्व में जितने भी प्रकार की जातियाँ है उसे ही योनि कहा जाता है। इन जातियों में ना केवल मनुष्य और पशु आते हैं, बल्कि पेड़-पौधे, वनस्पतियाँ, जीवाणु-विषाणु इत्यादि की गणना भी उन्ही ८४००००० योनियों में की जाती है। आज का विज्ञान बहुत विकसित हो गया है और दुनिया भर के जीव वैज्ञानिक वर्षों की शोधों के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि इस पृथ्वी पर आज लगभग ८७००००० (सतासी लाख) प्रकार के जीव-जंतु एवं वनस्पतियाँ पाई जाती है। इन ८७ लाख जातियों में लगभग २-३ लाख जातियाँ ऐसी हैं जिन्हे आप मुख्य जातियों में लगभग २-३ लाख जातियाँ ऐसी हैं जिन्हे आप मुख्य जातियों की उपजातियों के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं। अर्थात अगर केवल मुख्य जातियों की बात की जाये तो वो लगभग ८४ लाख है। अब आप सिर्फ ये अंदाजा लगाइये कि हमारे हिन्दू धर्म में ज्ञान-विज्ञान कितना उन्नत रहा होगा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने आज से हजारों वर्षों पहले केवल अपने ज्ञान के बल पर ये बता दिया था कि ८४००००० योनियाँ है जो कि आज की उन्नत तकनीक द्वारा की गयी गणना के बहुत निकट है।

हिन्दू धर्म के अनुसार इन ८४ लाख योनियों में जन्म लेते रहने को ही जन्म-मरण का चक्र कहा गया है। जो भी जीव इस जन्म मरण के चक्र से छूट जाता है, अर्थात जो अपनी ८४ लाख योनियों की गणनाओं को पूर्ण कर लेता है और उसे आगे किसी अन्य योनि में जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती है, उसे ही हम "मोक्ष" की प्राप्ति करना कहते है। मोक्ष का वास्तविक अर्थ जन्म-मरण के चक्र से निकल कर प्रभु में लीन हो जाना है। ये भी कहा गया है कि सभी अन्य योनियों में जन्म लेने के पश्चात ही मनुष्य योनि प्राप्त होती है। मनुष्य योनि से पहले आने वाले योनियों की संख्या ८०००००० (अस्सी लाख) बताई गयी है। अर्थात हम जिस मनुष्य योनि में जन्मे हैं वो इतनी विरली होती है कि सभी योनियों के कष्टों को भोगने के पश्चात ही ये हमें प्राप्त होती है। और चूँकि मनुष्य योनि वो अंतिम पड़ाव है जहाँ जीव अपने कई जन्मों के पुण्यों के कारण पहुँचता हैं, मनुष्य योनि ही मोक्ष की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन माना गया है। विशेषकर कलियुग में जो भी मनुष्य पापकर्म से दूर रहकर पुण्य करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति की उतनी ही अधिक सम्भावना होती है। किसी भी अन्य योनि में मोक्ष की प्राप्ति उतनी सरल नहीं है जितनी कि मनुष्य योनि में है। किन्तु दुर्भाग्य ये है कि लोग इस बात का महत्त्व समझते नहीं हैं कि हम कितने सौभाग्यशाली हैं कि हमने मनुष्य योनि में जन्म लिया है।

एक प्रश्न और भी पूछा जाता है कि क्या मोक्ष पाने के लिए मनुष्य योनि तक पहुँचना या उसमे जन्म लेना अनिवार्य है? इसका उत्तर है, नहीं। हालाँकि मनुष्य योनि को मोक्ष की प्राप्ति के लिए सर्वाधिक आदर्श योनि माना गया है क्यूंकि मोक्ष के लिए जीव में जिस चेतना की आवश्यकता होती है वो हम मनुष्यों में सबसे अधिक पायी जाती है। इसके अतिरिक्त कई गुरुजनों ने ये भी कहा है कि मनुष्य योनि मोक्ष का सोपान है और मोक्ष केवल मनुष्य योनि में ही पाया जा सकता है। हालाँकि ये अनिवार्य नहीं है कि केवल मनुष्यों को ही मोक्ष की प्राप्ति होगी, अन्य जंतुओं अथवा वनस्पतियों को नहीं। इस बात के कई उदाहरण हमें अपने वेदों और पुराणों में मिलते हैं कि जंतुओं ने भी सीधे अपनी योनि से मोक्ष की प्राप्ति की। महाभारत में पांडवों के महाप्रयाण के समय एक कुत्ते का जिक्र आया है जिसे उनके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, जो वास्तव में धर्मराज थे। महाभारत में ही अश्वमेघ यज्ञ के समय एक नेवले का वर्णन है जिस युधिष्ठिर के अश्वमेघ यज्ञ से उतना

पुण्य नहीं प्राप्त हुआ जितना एक गरीब के आंटे से और बाद में वो भी मोक्ष को प्राप्त हुआ। विष्णु एवं गरुड़ पुराण में एक गज और ग्राह का वर्णन आया है जिन्हे भगवान विष्णु के कारण मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। वो ग्राह पूर्व जन्म में गन्धर्व और गज भक्त राजा थे किन्तु कर्मफल के कारण अगले जन्म में पशु योनि में जन्मे। ऐसे ही एक गज का वर्णन गजानन की कथा में है जिसके सर को श्रीगणेश के सर के स्थान पर लगाया गया था और भगवान शिव की कृपा से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। महाभारत की कृष्ण लीला में श्रीकृष्ण ने अपनी बाल्यावस्था में खेल-खेल में "यमल" एवं "अर्जुन" नमक दो वृक्षों को उखाड़ दिया था। वो यमलार्जुन वास्तव में पिछले जन्म में यक्ष थे जिन्हे वृक्ष योनि में जन्म लेने का श्राप मिला था। अर्थात, जीव चाहे किसी भी योनि में हो, अपने पुण्य कर्मों और सच्ची भक्ति से वो मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
एक और प्रश्न पूछा जाता है कि क्या मनुष्य योनि सबसे अंत में ही मिलती है। तो इसका उत्तर है, नहीं। हो सकता है कि आपके पूर्वजन्मों के पुण्यों के कारण आपको मनुष्य योनि प्राप्त हुई हो लेकिन ये भी हो सकता है कि मनुष्य योनि की प्राप्ति के बाद किये गए आपके पाप कर्म के कारण अगले जन्म में आपको अधम योनि प्राप्त हो। इसका उदाहरण आपको ऊपर की कथाओं में मिल गया होगा। कई लोग इस बात पर भी प्रश्न उठाते हैं कि हिन्दू धर्मग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में अगले जन्म का भय दिखा कर लोगों को डराया जाता है। जबकि वास्तविकता ये है कि कर्मों के अनुसार अगली योनि का वर्णन इस कारण है ताकि मनुष्य यथासंभव पापकर्म करने से बच सके।

हालाँकि एक बात और जानने योग्य है कि मोक्ष की प्राप्ति अत्यंत ही कठिन है। यहाँ तक कि सतयुग में, जहाँ पाप शून्य भाग था, मोक्ष की प्राप्ति अत्यंत कठिन थी। कलियुग में जहाँ पाप का भाग १५ है, इसमें मोक्ष की प्राप्ति तो अत्यंत ही कठिन है। हालाँकि कहा जाता है कि सतयुग से उलट कलियुग में केवल पाप कर्म को सोचने पर उसका उतना फल नहीं मिलता जितना करने पर मिलता है। और कलियुग में किये गए थोड़े से भी पुण्य का फल बहुत अधिक मिलता है। कई लोग ये समझते हैं कि अगर किसी मनुष्य को बहुत पुण्य करने के कारण स्वर्ग की प्राप्ति होती हैतो इसी का अर्थ मोक्ष है, जबकि ऐसा नहीं है। स्वर्ग की प्राप्ति मोक्ष की प्राप्ति नहीं है। स्वर्ग की प्राप्ति केवल आपके द्वारा किये गए पुण्य कर्मों का परिणाम स्वरुप है। स्वर्ग में अपने पुण्य का फल भोगने के बाद आपको पुनः किसी अन्य योनि में जन्म लेना पड़ता है। अर्थात आप जन्म और मरण के चक्र से मुक्त नहीं होते। रामायण और हरिवंश पुराण में कहा गया है कि कलियुग में मोक्ष की प्राप्ति का सबसे सरल साधन "राम-नाम" है।

पुराणों में ८४००००० योनियों का गणनाक्रम दिया गया है कि किस प्रकार के जीवों में कितनी योनियाँ होती है। पद्मपुराण के ७८/५ वें सर्ग में कहा गया है: जलज नवलक्षाणी,
स्थावर लक्षविंशति
कृमयो: रुद्रसंख्यकः
पक्षिणाम् दशलक्षणं
त्रिंशलक्षाणी पशवः
चतुरलक्षाणी मानव

अर्थात,

जलचर जीव: ९००००० (नौ लाख)
वृक्ष: २०००००० (बीस लाख)
कीट (क्षुद्रजीव): ११००००० (ग्यारह लाख)
पक्षी: १०००००० (दस लाख)जंगली पशु: ३०००००० (तीस लाख)
मनुष्य: ४००००० (चार लाख)
इस प्रकार ९००००० + २०००००० + ११००००० + १०००००० + ३०००००० + ४००००० = कुल ८४००००० योनियाँ होती है।

जैन धर्म में भी जीवों की ८४००००० योनियाँ ही बताई गयी है। सिर्फ उनमे जीवों के प्रकारों में थोड़ा भेद है।

जैन धर्म के अनुसार:पृथ्वीकाय: ७००००० (सात लाख)
जलकाय: ७००००० (सात लाख)
अग्निकाय: ७००००० (सात लाख)
वायुकाय: ७००००० (सात लाख)
वनस्पतिकाय: १०००००० (दस लाख)
साधारण देहधारी जीव (मनुष्यों को छोड़कर): १४००००० (चौदह लाख)
द्वि इन्द्रियाँ: २००००० (दो लाख)
त्रि इन्द्रियाँ: २००००० (दो लाख)चतुरिन्द्रियाँ: २००००० (दो लाख)
पञ्च इन्द्रियाँ (त्रियांच): ४००००० (चार लाख)
पञ्च इन्द्रियाँ (देव): ४००००० (चार लाख)
पञ्च इन्द्रियाँ (नारकीय जीव): ४००००० (चार लाख)
पञ्च इन्द्रियाँ (मनुष्य): १४००००० (चौदह लाख)

इस प्रकार ७००००० + ७००००० + ७००००० + ७००००० + १०००००० + १४००००० +२००००० + २००००० + २००००० + ४००००० + ४००००० + ४००००० + १४००००० = कुल ८४०००००

अतः अगर आगे से आपको कोई ऐसा मिले जो ८४००००० योनियों के अस्तित्व पर प्रश्न उठाये या उसका मजाक उड़ाए, तो कृपया उसे इस शोध को पढ़ने को कहें। साथ ही ये भी कहें कि हमें इस बात का गर्व है कि जिस चीज कोसाबित करने में आधुनिक/पाश्चात्य विज्ञान को हजारों वर्षों का समय लग गया, उसे हमारे विद्वान ऋषि-मुनियों ने सहस्त्रों वर्षों पूर्व ही सिद्ध कर दिखाया था।

सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है 🚩🚩🙏

18/10/2022

अंक ज्योतिष द्वारा गुण मिलान

मूलांक जन्मतिथि के दिनांक, माह, वर्ष व शताब्दी के सभी अंक जब आपस में जोड़ दिए जाते हैं तो प्राप्त योगफल भाग्यांक कहलाता है। वहीं, केवल जन्मतिथि के अंक या अंकों का योगफल मूलांक कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 25.12.1982 है, तो उसका मूलांक उसके जन्म दिनांक के दोनों अंकों का योगफल अर्थात् 2 + 5 = 7 होगा। भाग्यांक उस व्यक्ति का भाग्यांक निकालने के लिए उसके जन्म की तारीख, मास और वर्ष का योग किया जाएगा जो इस प्रकार होगा- 2 + 5 + 1 ++ 2 + 1 + 9 + 8 + 2 = 30 = 3 + 0 = 3 इस प्रकार, आप अपना मूलांक व भाग्यांक निकालकर अपने जीवनसाथी के मूलांक या भाग्यांक से तुलना करके जान सकते हैं कि उनमें नैसर्गिक मैत्री है या नहीं। तालिका (क) में देखने से पता चलता है कि अंक 1, 5 व 8 का को

मूलांक जन्मतिथि के दिनांक, माह, वर्ष व शताब्दी के सभी अंक जब आपस में जोड़ दिए जाते हैं तो प्राप्त योगफल भाग्यांक कहलाता है। वहीं, केवल जन्मतिथि के अंक या अंकों का योगफल मूलांक कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 25.12.1982 है, तो उसका मूलांक उसके जन्म दिनांक के दोनों अंकों का योगफल अर्थात् 2 + 5 = 7 होगा। भाग्यांक उस व्यक्ति का भाग्यांक निकालने के लिए उसके जन्म की तारीख, मास और वर्ष का योग किया जाएगा जो इस प्रकार होगा- 2 + 5 + 1 ++ 2 + 1 + 9 + 8 + 2 = 30 = 3 + 0 = 3 इस प्रकार, आप अपना मूलांक व भाग्यांक निकालकर अपने जीवनसाथी के मूलांक या भाग्यांक से तुलना करके जान सकते हैं कि उनमें नैसर्गिक मैत्री है या नहीं। तालिका (क) में देखने से पता चलता है कि अंक 1, 5 व 8 का कोई भी अंक अतिमित्र नहीं है। अंक 6, 7 व 9 का कोई भी शत्रु अंक नहीं है।

अंक 6 व 9 के अति मित्र अंकों की संख्या 5-5 है, पर जीवनसाथी तो एक ही चुनना है। तो पांचों में से किस एक को अपना जीवनसाथी चुनें? जातकों के प्रचलित नामों का नामांक व संपूर्ण नामांक के आधार पर भी गुणों का मिलान किया जाता है। अंक गुण मिलान के लिये हमें जन्म दिनांक पर आधारित मूलांक व भाग्यांक चाहिये। नाम के आधार पर नामांक व संपूर्ण नामांक का भी विश्लेषण किया जाता है। भारत में विवाह उपरांत कन्या का संपूर्ण नामांक अक्सर परिवर्तित हो जाता है, उसे भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर वे आपस में मित्र न हों तो प्रस्तावित नाम रखकर भी वैवाहिक जीवन सुखी बनाया जा सकता है।

उदाहरण के लिए वर का नाम दीपक त्रेहन है। उसका जन्म दिनांक 18.09. 1978 है और कन्या का नाम प्रियंका ग्रोवर तथा जन्म दिनांक 11.05.1981 है, तो अंक गुण मिलान फल की गणना निम्न प्रकार से होगी: D E E P A K 4+5+5+8+1+2 = 25 =2+5=7 (नामांक) T R E H A N 4+2+5+8+1+5= 25 =2+5=7 7+7= 14 =14=1+4=5 (संपूर्ण नामांक) दीपक के नाम का नामांक 7 और पूरे नाम का संपूर्ण नामांक 5 हुआ P R I Y A N K A 8+2+1+1+1+5+2+1 = 21 = 2+1 = 3 (नामांक) G R O V E R 3+2+7+6+5+2 = 25 = 5+2 = 7 =3+7= 10 = 1+0= 1(संपूर्ण नामांक) - जन्म दिनांक का मूलांक और भाग्यांक इस प्रकार है: दीपक का जन्म दिनांक: 18.09.1978 दीपक का मूलांक =1+8=9 दिनांक का भाग्यांक 1+8+9+1+9+7+8 = 43 = 4+3 = 7 प्रियंका का जन्म दिनांक: 11.05.1981 प्रियंका का मूलांक = 1+1 = 2 प्रियंका का भाग्यांक 1+1+5+1+9+8+1 = 26 = 2+6 = 8 वर-कन्या के नामों का नामांक और संपूर्ण नामांक की गणना नामांक तालिका ’ख’ द्वारा की गयी हेै। उपर्युक्त गणना का तुलनात्मक अध्ययन हम अंक गुण मिलान सारणी द्वारा भी कर सकते हैं। इस सारणी का मूल आधार अंक मिलान तालिका ’क’ है।

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गुण मिलान सारणी के कुल अंक 50 होते हैं। उसमें कम से कम 25 अंक अवश्य मिलने चाहिए। वर व कन्या के मिलान में कोई अंक शत्रु नहीं होना चाहिए। मूलांक व भाग्यांक, जन्म दिनांक पर आधारित होने के कारण बदले नहीं जा सकते पर विवाह उपरांत कन्या के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है। अतः प्रस्तावित नाम से वर कन्या के अंक मित्र अंक बनाये जा सकते हैं। उपरोक्त उदाहरण में दीपक व प्रियंका के मूलांक मित्र हैं। भाग्यांक व प्रथम नामांक सम हैं पर संपूर्ण नामांक व विवाह उपरांत नामांक आपस में शत्रु हैं। सुझाव दिया गया कि प्रियंका ग्रोवर या त्रेहन में से किसी भी उपनाम का प्रयोग न करें तो दीपक ग्रोवर व प्रियंका का नाम आपस में मित्र होंगे। सारणी में कुल प्राप्त अंक 28 हैं। इनका दांपत्य जीवन अच्छा व सुखी है। यहां विभिन्न मूलांकों की स्त्रियों और पुरुषों के स्वभाव गुण, दोष आदि का विश्लेषण प्रस्तुत है। इन विवरणों के आधार पर उपयुक्त जीवनसाथी का चयन कर सकते हैं। जिनका विवाह पहले हो चुका है वे अपने जीवनसाथी के मूलांक के आधार पर आपसी समन्वय बनाकर अपने वैवाहिक जीवन को और अधिक खुशहाल बना सकते हैं। व्यक्तित्व वाली होती है। पति जो कुछ दे दे उसी में संतुष्ट रहने वाली होती है। ऐसी स्त्रियों के घर में सुख-साधनों की कमी नहीं रहती, इसलिए आलसी होने की संभावना रहती है।

मूलांक 3: मूलांक 3 वाली स्त्री का परिवार पर अच्छा प्रभाव होता है।ऐसी स्त्रियां पति पर पूर्ण अधिकार रखती हंै तथा पति की उन्नति में सहायक होती हैं। इनका पति अगर व्यवसायी हो और इनके नाम पर व्यवसाय करे तो उन्नति होती है।

मूलांक 4: मूलांक 4 वाली स्त्री उच्च शिक्षित, अपनी बात मनवाने वाली, बन-संवर कर रहनेवाली होती है। ऐसी स्त्री घर से बाहर खुश रहती है, किंतु वैवाहिक जीवन साधारण ही रहता है।

मूलांक 5: मूलांक 5 वाली स्त्री व्यवहारकुशल और परिपक्व मस्तिष्क वाली, पारिवारिक समस्याओं से ऊपर उठकर विकास कार्यों में रुचि रखने वाली, पति व बच्चों की प्रगति में सहायक होती है।

मूलांक 6: मूलांक 6 वाली स्त्री रूपवती व दयालु होती है। इसमें अच्छी पत्नी व अच्छी माता के सभी गुण होते हैं। ऐसी स्त्री घर को अच्छे ढंग से चलाने की क्षमता रखती है तथा समाज में प्रतिष्ठित व परिवार में सर्वेसर्वा होती है।

मूलांक 7: अंक 7 वाली स्त्री पर्याप्त शिक्षित होने के बावजूद अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए संघर्षमय रहती है। ऐसी स्त्रियों को अकेले रहना अच्छा लगता है। हर समय पति इनका ध्यान रखें, इनमें ऐसी चाहत हर समय बनी रहती है।

मूलांक 8: मूलांक 8 वाली स्त्री नियम से चलने वाली, कर्मठ, पति व बच्चों के लिए कार्य करने वाली व बौद्धिक शक्ति की धनी होती है। परिवार व व्यवसाय के कार्यों में अच्छी सलाहकार होती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाली स्त्री प्रायः उन्मुक्त और मनमौजी होती है। कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले इन्हें भरोसे में लेना चाहिए। ऐसी स्त्रियों का स्वभाव उग्र तो होता है, पर वे लापरवाह नहीं होती हैं। ये पति के कार्यों में पूरे मनोयोग से सहायता करती हैं।

विभिन्न मूलांक वाले पुरुष
मूलांक 1: मूलांक 1 वाले पुरुष गंभीर, दयालु व महत्वाकांक्षी होते हैं। ये हमेशा यही चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनकी बात मानें। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी का समाज में मान-सम्मान हो। इन्हें अपने घर से लगाव होता है और ये अधिक समय घर पर ही बिताना चाहते हैं।

मूलांक 2: मूलांक 2 वाले पुरुष शांत स्वभाव के होते हैं। ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी इनके कहे बिना ही सब कार्य कर दे। यह एक समझदार व शिष्ट पत्नी चाहते हैं।

मूलांक 3: मूलांक 3 वाले पुरुष आत्मकेंद्रित व अध्यात्म में रुचि रखने वाले होते हैं। ऐसे ज्यादातर पुरुष अपने से ऊंचे घराने में विवाह करते हैं। ये अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखते हैं।

मूलांक 4: मूलांक 4 वाले पुरुष दयालु व विद्रोही स्वभाव के होते हैं। ये सतत लोगों की कमियां निकालते रहते हैं जिसके कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। ये चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनके अनुसार चलें।

मूलांक 5: मूलांक 5 वाले पुरुष हठधर्मी, किंतु व्यवहारकुशल व मितव्ययी होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी बन-संवर कर रहंे। इन्हें अपने बच्चों से लगाव होता है। ये बच्चों पर खुलकर खर्च करने वाले होते हैं।

मूलांक 6: मूलांक 6 वाले पुरुष विलासी, ईमानदार व मधुर स्वभाव वाले होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी ऐसी हो जिस पर ये गर्व कर सकंे। ये घर-परिवार का पूरा ध्यान रखते हैं।

मूलांक 7: मूलांक 7 वाले पुरुष दार्शनिक, भावुक व पराविज्ञान का ज्ञान रखने वाले होते हैं। ये पत्नी की भावनाओं को समझते हंै और हर बात को आलोचनात्मक तरीके से देखते हैं। इस कारण परिवार में अशांति बनी रहती है।

मूलांक 8: मूलांक 8 वाले पुरुष विश्वसनीय, न्यायप्रिय और एकांतप्रिय होते हैं। ऐसे अधिकतर पुरुष विवाह नहीं करना चाहते हंै। जो करते हैं, उन्हें रूढ़िवादी विचारों वाली पत्नी अच्छी लगती है।

मूलांक 9: मूलांक 9 वाले पुरुष साहसी, स्वाभिमानी व आत्मविश्वासी होते हैं। इन्हें एक अच्छे घर की लालसा रहती है। अपने परिवार, पत्नी व बच्चों पर इन्हें गर्व होता है।

ई भी अंक अतिमित्र नहीं है। अंक 6, 7 व 9 का कोई भी शत्रु अंक नहीं है। अंक 6 व 9 के अति मित्र अंकों की संख्या 5-5 है, पर जीवनसाथी तो एक ही चुनना है। तो पांचों में से किस एक को अपना जीवनसाथी चुनें? जातकों के प्रचलित नामों का नामांक व संपूर्ण नामांक के आधार पर भी गुणों का मिलान किया जाता है। अंक गुण मिलान के लिये हमें जन्म दिनांक पर आधारित मूलांक व भाग्यांक चाहिये। नाम के आधार पर नामांक व संपूर्ण नामांक का भी विश्लेषण किया जाता है। भारत में विवाह उपरांत कन्या का संपूर्ण नामांक अक्सर परिवर्तित हो जाता है, उसे भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर वे आपस में मित्र न हों तो प्रस्तावित नाम रखकर भी वैवाहिक जीवन सुखी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए वर का नाम दीपक त्रेहन है। उसका जन्म दिनांक 18.09. 1978 है और कन्या का नाम प्रियंका ग्रोवर तथा जन्म दिनांक 11.05.1981 है, तो अंक गुण मिलान फल की गणना निम्न प्रकार से होगी: D E E P A K 4+5+5+8+1+2 = 25 =2+5=7 (नामांक) T R E H A N 4+2+5+8+1+5= 25 =2+5=7 7+7= 14 =14=1+4=5 (संपूर्ण नामांक) दीपक के नाम का नामांक 7 और पूरे नाम का संपूर्ण नामांक 5 हुआ P R I Y A N K A 8+2+1+1+1+5+2+1 = 21 = 2+1 = 3 (नामांक) G R O V E R 3+2+7+6+5+2 = 25 = 5+2 = 7 =3+7= 10 = 1+0= 1(संपूर्ण नामांक) - जन्म दिनांक का मूलांक और भाग्यांक इस प्रकार है: दीपक का जन्म दिनांक: 18.09.1978 दीपक का मूलांक =1+8=9 दिनांक का भाग्यांक 1+8+9+1+9+7+8 = 43 = 4+3 = 7 प्रियंका का जन्म दिनांक: 11.05.1981 प्रियंका का मूलांक = 1+1 = 2 प्रियंका का भाग्यांक 1+1+5+1+9+8+1 = 26 = 2+6 = 8 वर-कन्या के नामों का नामांक और संपूर्ण नामांक की गणना नामांक तालिका ’ख’ द्वारा की गयी हेै। उपर्युक्त गणना का तुलनात्मक अध्ययन हम अंक गुण मिलान सारणी द्वारा भी कर सकते हैं। इस सारणी का मूल आधार अंक मिलान तालिका ’क’ है। गुण मिलान सारणी के कुल अंक 50 होते हैं। उसमें कम से कम 25 अंक अवश्य मिलने चाहिए। वर व कन्या के मिलान में कोई अंक शत्रु नहीं होना चाहिए। मूलांक व भाग्यांक, जन्म दिनांक पर आधारित होने के कारण बदले नहीं जा सकते पर विवाह उपरांत कन्या के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है। अतः प्रस्तावित नाम से वर कन्या के अंक मित्र अंक बनाये जा सकते हैं। उपरोक्त उदाहरण में दीपक व प्रियंका के मूलांक मित्र हैं। भाग्यांक व प्रथम नामांक सम हैं पर संपूर्ण नामांक व विवाह उपरांत नामांक आपस में शत्रु हैं। सुझाव दिया गया कि प्रियंका ग्रोवर या त्रेहन में से किसी भी उपनाम का प्रयोग न करें तो दीपक ग्रोवर व प्रियंका का नाम आपस में मित्र होंगे। सारणी में कुल प्राप्त अंक 28 हैं। इनका दांपत्य जीवन अच्छा व सुखी है। यहां विभिन्न मूलांकों की स्त्रियों और पुरुषों के स्वभाव गुण, दोष आदि का विश्लेषण प्रस्तुत है। इन विवरणों के आधार पर उपयुक्त जीवनसाथी का चयन कर सकते हैं। जिनका विवाह पहले हो चुका है वे अपने जीवनसाथी के मूलांक के आधार पर आपसी समन्वय बनाकर अपने वैवाहिक जीवन को और अधिक खुशहाल बना सकते हैं। व्यक्तित्व वाली होती है। पति जो कुछ दे दे उसी में संतुष्ट रहने वाली होती है। ऐसी स्त्रियों के घर में सुख-साधनों की कमी नहीं रहती, इसलिए आलसी होने की संभावना रहती है। मूलांक 3: मूलांक 3 वाली स्त्री का परिवार पर अच्छा प्रभाव होता है। ऐसी स्त्रियां पति पर पूर्ण अधिकार रखती हंै तथा पति की उन्नति में सहायक होती हैं। इनका पति अगर व्यवसायी हो और इनके नाम पर व्यवसाय करे तो उन्नति होती है। मूलांक 4: मूलांक 4 वाली स्त्री उच्च शिक्षित, अपनी बात मनवाने वाली, बन-संवर कर रहनेवाली होती है। ऐसी स्त्री घर से बाहर खुश रहती है, किंतु वैवाहिक जीवन साधारण ही रहता है। मूलांक 5: मूलांक 5 वाली स्त्री व्यवहारकुशल और परिपक्व मस्तिष्क वाली, पारिवारिक समस्याओं से ऊपर उठकर विकास कार्यों में रुचि रखने वाली, पति व बच्चों की प्रगति में सहायक होती है। मूलांक 6: मूलांक 6 वाली स्त्री रूपवती व दयालु होती है। इसमें अच्छी पत्नी व अच्छी माता के सभी गुण होते हैं। ऐसी स्त्री घर को अच्छे ढंग से चलाने की क्षमता रखती है तथा समाज में प्रतिष्ठित व परिवार में सर्वेसर्वा होती है। मूलांक 7: अंक 7 वाली स्त्री पर्याप्त शिक्षित होने के बावजूद अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए संघर्षमय रहती है। ऐसी स्त्रियों को अकेले रहना अच्छा लगता है। हर समय पति इनका ध्यान रखें, इनमें ऐसी चाहत हर समय बनी रहती है। मूलांक 8: मूलांक 8 वाली स्त्री नियम से चलने वाली, कर्मठ, पति व बच्चों के लिए कार्य करने वाली व बौद्धिक शक्ति की धनी होती है। परिवार व व्यवसाय के कार्यों में अच्छी सलाहकार होती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाली स्त्री प्रायः उन्मुक्त और मनमौजी होती है। कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले इन्हें भरोसे में लेना चाहिए। ऐसी स्त्रियों का स्वभाव उग्र तो होता है, पर वे लापरवाह नहीं होती हैं। ये पति के कार्यों में पूरे मनोयोग से सहायता करती हैं। विभिन्न मूलांक वाले पुरुष मूलांक 1: मूलांक 1 वाले पुरुष गंभीर, दयालु व महत्वाकांक्षी होते हैं। ये हमेशा यही चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनकी बात मानें। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी का समाज में मान-सम्मान हो। इन्हें अपने घर से लगाव होता है और ये अधिक समय घर पर ही बिताना चाहते हैं। मूलांक 2: मूलांक 2 वाले पुरुष शांत स्वभाव के होते हैं। ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी इनके कहे बिना ही सब कार्य कर दे। यह एक समझदार व शिष्ट पत्नी चाहते हैं। मूलांक 3: मूलांक 3 वाले पुरुष आत्मकेंद्रित व अध्यात्म में रुचि रखने वाले होते हैं। ऐसे ज्यादातर पुरुष अपने से ऊंचे घराने में विवाह करते हैं। ये अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखते हैं। मूलांक 4: मूलांक 4 वाले पुरुष दयालु व विद्रोही स्वभाव के होते हैं। ये सतत लोगों की कमियां निकालते रहते हैं जिसके कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। ये चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनके अनुसार चलें। मूलांक 5: मूलांक 5 वाले पुरुष हठधर्मी, किंतु व्यवहारकुशल व मितव्ययी होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी बन-संवर कर रहंे। इन्हें अपने बच्चों से लगाव होता है। ये बच्चों पर खुलकर खर्च करने वाले होते हैं। मूलांक 6: मूलांक 6 वाले पुरुष विलासी, ईमानदार व मधुर स्वभाव वाले होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी ऐसी हो जिस पर ये गर्व कर सकंे। ये घर-परिवार का पूरा ध्यान रखते हैं। मूलांक 7: मूलांक 7 वाले पुरुष दार्शनिक, भावुक व पराविज्ञान का ज्ञान रखने वाले होते हैं। ये पत्नी की भावनाओं को समझते हंै और हर बात को आलोचनात्मक तरीके से देखते हैं। इस कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। मूलांक 8: मूलांक 8 वाले पुरुष विश्वसनीय, न्यायप्रिय और एकांतप्रिय होते हैं। ऐसे अधिकतर पुरुष विवाह नहीं करना चाहते हंै। जो करते हैं, उन्हें रूढ़िवादी विचारों वाली पत्नी अच्छी लगती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाले पुरुष साहसी, स्वाभिमानी व आत्मविश्वासी होते हैं। इन्हें एक अच्छे घर की लालसा रहती है। अपने परिवार, पत्नी व बच्चों पर इन्हें गर्व होता है।

18/10/2022

अंक ज्योतिष द्वारा गुण मिलान

मूलांक जन्मतिथि के दिनांक, माह, वर्ष व शताब्दी के सभी अंक जब आपस में जोड़ दिए जाते हैं तो प्राप्त योगफल भाग्यांक कहलाता है। वहीं, केवल जन्मतिथि के अंक या अंकों का योगफल मूलांक कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 25.12.1982 है, तो उसका मूलांक उसके जन्म दिनांक के दोनों अंकों का योगफल अर्थात् 2 + 5 = 7 होगा। भाग्यांक उस व्यक्ति का भाग्यांक निकालने के लिए उसके जन्म की तारीख, मास और वर्ष का योग किया जाएगा जो इस प्रकार होगा- 2 + 5 + 1 ++ 2 + 1 + 9 + 8 + 2 = 30 = 3 + 0 = 3 इस प्रकार, आप अपना मूलांक व भाग्यांक निकालकर अपने जीवनसाथी के मूलांक या भाग्यांक से तुलना करके जान सकते हैं कि उनमें नैसर्गिक मैत्री है या नहीं। तालिका (क) में देखने से पता चलता है कि अंक 1, 5 व 8 का को

मूलांक जन्मतिथि के दिनांक, माह, वर्ष व शताब्दी के सभी अंक जब आपस में जोड़ दिए जाते हैं तो प्राप्त योगफल भाग्यांक कहलाता है। वहीं, केवल जन्मतिथि के अंक या अंकों का योगफल मूलांक कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 25.12.1982 है, तो उसका मूलांक उसके जन्म दिनांक के दोनों अंकों का योगफल अर्थात् 2 + 5 = 7 होगा। भाग्यांक उस व्यक्ति का भाग्यांक निकालने के लिए उसके जन्म की तारीख, मास और वर्ष का योग किया जाएगा जो इस प्रकार होगा- 2 + 5 + 1 ++ 2 + 1 + 9 + 8 + 2 = 30 = 3 + 0 = 3 इस प्रकार, आप अपना मूलांक व भाग्यांक निकालकर अपने जीवनसाथी के मूलांक या भाग्यांक से तुलना करके जान सकते हैं कि उनमें नैसर्गिक मैत्री है या नहीं। तालिका (क) में देखने से पता चलता है कि अंक 1, 5 व 8 का कोई भी अंक अतिमित्र नहीं है। अंक 6, 7 व 9 का कोई भी शत्रु अंक नहीं है।

अंक 6 व 9 के अति मित्र अंकों की संख्या 5-5 है, पर जीवनसाथी तो एक ही चुनना है। तो पांचों में से किस एक को अपना जीवनसाथी चुनें? जातकों के प्रचलित नामों का नामांक व संपूर्ण नामांक के आधार पर भी गुणों का मिलान किया जाता है। अंक गुण मिलान के लिये हमें जन्म दिनांक पर आधारित मूलांक व भाग्यांक चाहिये। नाम के आधार पर नामांक व संपूर्ण नामांक का भी विश्लेषण किया जाता है। भारत में विवाह उपरांत कन्या का संपूर्ण नामांक अक्सर परिवर्तित हो जाता है, उसे भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर वे आपस में मित्र न हों तो प्रस्तावित नाम रखकर भी वैवाहिक जीवन सुखी बनाया जा सकता है।

उदाहरण के लिए वर का नाम दीपक त्रेहन है। उसका जन्म दिनांक 18.09. 1978 है और कन्या का नाम प्रियंका ग्रोवर तथा जन्म दिनांक 11.05.1981 है, तो अंक गुण मिलान फल की गणना निम्न प्रकार से होगी: D E E P A K 4+5+5+8+1+2 = 25 =2+5=7 (नामांक) T R E H A N 4+2+5+8+1+5= 25 =2+5=7 7+7= 14 =14=1+4=5 (संपूर्ण नामांक) दीपक के नाम का नामांक 7 और पूरे नाम का संपूर्ण नामांक 5 हुआ P R I Y A N K A 8+2+1+1+1+5+2+1 = 21 = 2+1 = 3 (नामांक) G R O V E R 3+2+7+6+5+2 = 25 = 5+2 = 7 =3+7= 10 = 1+0= 1(संपूर्ण नामांक) - जन्म दिनांक का मूलांक और भाग्यांक इस प्रकार है: दीपक का जन्म दिनांक: 18.09.1978 दीपक का मूलांक =1+8=9 दिनांक का भाग्यांक 1+8+9+1+9+7+8 = 43 = 4+3 = 7 प्रियंका का जन्म दिनांक: 11.05.1981 प्रियंका का मूलांक = 1+1 = 2 प्रियंका का भाग्यांक 1+1+5+1+9+8+1 = 26 = 2+6 = 8 वर-कन्या के नामों का नामांक और संपूर्ण नामांक की गणना नामांक तालिका ’ख’ द्वारा की गयी हेै। उपर्युक्त गणना का तुलनात्मक अध्ययन हम अंक गुण मिलान सारणी द्वारा भी कर सकते हैं। इस सारणी का मूल आधार अंक मिलान तालिका ’क’ है।

Get Detailed Kundli Predictions with Brihat Kundli Phal
गुण मिलान सारणी के कुल अंक 50 होते हैं। उसमें कम से कम 25 अंक अवश्य मिलने चाहिए। वर व कन्या के मिलान में कोई अंक शत्रु नहीं होना चाहिए। मूलांक व भाग्यांक, जन्म दिनांक पर आधारित होने के कारण बदले नहीं जा सकते पर विवाह उपरांत कन्या के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है। अतः प्रस्तावित नाम से वर कन्या के अंक मित्र अंक बनाये जा सकते हैं। उपरोक्त उदाहरण में दीपक व प्रियंका के मूलांक मित्र हैं। भाग्यांक व प्रथम नामांक सम हैं पर संपूर्ण नामांक व विवाह उपरांत नामांक आपस में शत्रु हैं। सुझाव दिया गया कि प्रियंका ग्रोवर या त्रेहन में से किसी भी उपनाम का प्रयोग न करें तो दीपक ग्रोवर व प्रियंका का नाम आपस में मित्र होंगे। सारणी में कुल प्राप्त अंक 28 हैं। इनका दांपत्य जीवन अच्छा व सुखी है। यहां विभिन्न मूलांकों की स्त्रियों और पुरुषों के स्वभाव गुण, दोष आदि का विश्लेषण प्रस्तुत है। इन विवरणों के आधार पर उपयुक्त जीवनसाथी का चयन कर सकते हैं। जिनका विवाह पहले हो चुका है वे अपने जीवनसाथी के मूलांक के आधार पर आपसी समन्वय बनाकर अपने वैवाहिक जीवन को और अधिक खुशहाल बना सकते हैं। व्यक्तित्व वाली होती है। पति जो कुछ दे दे उसी में संतुष्ट रहने वाली होती है। ऐसी स्त्रियों के घर में सुख-साधनों की कमी नहीं रहती, इसलिए आलसी होने की संभावना रहती है।

मूलांक 3: मूलांक 3 वाली स्त्री का परिवार पर अच्छा प्रभाव होता है।ऐसी स्त्रियां पति पर पूर्ण अधिकार रखती हंै तथा पति की उन्नति में सहायक होती हैं। इनका पति अगर व्यवसायी हो और इनके नाम पर व्यवसाय करे तो उन्नति होती है।

मूलांक 4: मूलांक 4 वाली स्त्री उच्च शिक्षित, अपनी बात मनवाने वाली, बन-संवर कर रहनेवाली होती है। ऐसी स्त्री घर से बाहर खुश रहती है, किंतु वैवाहिक जीवन साधारण ही रहता है।

मूलांक 5: मूलांक 5 वाली स्त्री व्यवहारकुशल और परिपक्व मस्तिष्क वाली, पारिवारिक समस्याओं से ऊपर उठकर विकास कार्यों में रुचि रखने वाली, पति व बच्चों की प्रगति में सहायक होती है।

मूलांक 6: मूलांक 6 वाली स्त्री रूपवती व दयालु होती है। इसमें अच्छी पत्नी व अच्छी माता के सभी गुण होते हैं। ऐसी स्त्री घर को अच्छे ढंग से चलाने की क्षमता रखती है तथा समाज में प्रतिष्ठित व परिवार में सर्वेसर्वा होती है।

मूलांक 7: अंक 7 वाली स्त्री पर्याप्त शिक्षित होने के बावजूद अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए संघर्षमय रहती है। ऐसी स्त्रियों को अकेले रहना अच्छा लगता है। हर समय पति इनका ध्यान रखें, इनमें ऐसी चाहत हर समय बनी रहती है।

मूलांक 8: मूलांक 8 वाली स्त्री नियम से चलने वाली, कर्मठ, पति व बच्चों के लिए कार्य करने वाली व बौद्धिक शक्ति की धनी होती है। परिवार व व्यवसाय के कार्यों में अच्छी सलाहकार होती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाली स्त्री प्रायः उन्मुक्त और मनमौजी होती है। कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले इन्हें भरोसे में लेना चाहिए। ऐसी स्त्रियों का स्वभाव उग्र तो होता है, पर वे लापरवाह नहीं होती हैं। ये पति के कार्यों में पूरे मनोयोग से सहायता करती हैं।

विभिन्न मूलांक वाले पुरुष
मूलांक 1: मूलांक 1 वाले पुरुष गंभीर, दयालु व महत्वाकांक्षी होते हैं। ये हमेशा यही चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनकी बात मानें। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी का समाज में मान-सम्मान हो। इन्हें अपने घर से लगाव होता है और ये अधिक समय घर पर ही बिताना चाहते हैं।

मूलांक 2: मूलांक 2 वाले पुरुष शांत स्वभाव के होते हैं। ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी इनके कहे बिना ही सब कार्य कर दे। यह एक समझदार व शिष्ट पत्नी चाहते हैं।

मूलांक 3: मूलांक 3 वाले पुरुष आत्मकेंद्रित व अध्यात्म में रुचि रखने वाले होते हैं। ऐसे ज्यादातर पुरुष अपने से ऊंचे घराने में विवाह करते हैं। ये अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखते हैं।

मूलांक 4: मूलांक 4 वाले पुरुष दयालु व विद्रोही स्वभाव के होते हैं। ये सतत लोगों की कमियां निकालते रहते हैं जिसके कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। ये चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनके अनुसार चलें।

मूलांक 5: मूलांक 5 वाले पुरुष हठधर्मी, किंतु व्यवहारकुशल व मितव्ययी होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी बन-संवर कर रहंे। इन्हें अपने बच्चों से लगाव होता है। ये बच्चों पर खुलकर खर्च करने वाले होते हैं।

मूलांक 6: मूलांक 6 वाले पुरुष विलासी, ईमानदार व मधुर स्वभाव वाले होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी ऐसी हो जिस पर ये गर्व कर सकंे। ये घर-परिवार का पूरा ध्यान रखते हैं।

मूलांक 7: मूलांक 7 वाले पुरुष दार्शनिक, भावुक व पराविज्ञान का ज्ञान रखने वाले होते हैं। ये पत्नी की भावनाओं को समझते हंै और हर बात को आलोचनात्मक तरीके से देखते हैं। इस कारण परिवार में अशांति बनी रहती है।

मूलांक 8: मूलांक 8 वाले पुरुष विश्वसनीय, न्यायप्रिय और एकांतप्रिय होते हैं। ऐसे अधिकतर पुरुष विवाह नहीं करना चाहते हंै। जो करते हैं, उन्हें रूढ़िवादी विचारों वाली पत्नी अच्छी लगती है।

मूलांक 9: मूलांक 9 वाले पुरुष साहसी, स्वाभिमानी व आत्मविश्वासी होते हैं। इन्हें एक अच्छे घर की लालसा रहती है। अपने परिवार, पत्नी व बच्चों पर इन्हें गर्व होता है।

ई भी अंक अतिमित्र नहीं है। अंक 6, 7 व 9 का कोई भी शत्रु अंक नहीं है। अंक 6 व 9 के अति मित्र अंकों की संख्या 5-5 है, पर जीवनसाथी तो एक ही चुनना है। तो पांचों में से किस एक को अपना जीवनसाथी चुनें? जातकों के प्रचलित नामों का नामांक व संपूर्ण नामांक के आधार पर भी गुणों का मिलान किया जाता है। अंक गुण मिलान के लिये हमें जन्म दिनांक पर आधारित मूलांक व भाग्यांक चाहिये। नाम के आधार पर नामांक व संपूर्ण नामांक का भी विश्लेषण किया जाता है। भारत में विवाह उपरांत कन्या का संपूर्ण नामांक अक्सर परिवर्तित हो जाता है, उसे भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर वे आपस में मित्र न हों तो प्रस्तावित नाम रखकर भी वैवाहिक जीवन सुखी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए वर का नाम दीपक त्रेहन है। उसका जन्म दिनांक 18.09. 1978 है और कन्या का नाम प्रियंका ग्रोवर तथा जन्म दिनांक 11.05.1981 है, तो अंक गुण मिलान फल की गणना निम्न प्रकार से होगी: D E E P A K 4+5+5+8+1+2 = 25 =2+5=7 (नामांक) T R E H A N 4+2+5+8+1+5= 25 =2+5=7 7+7= 14 =14=1+4=5 (संपूर्ण नामांक) दीपक के नाम का नामांक 7 और पूरे नाम का संपूर्ण नामांक 5 हुआ P R I Y A N K A 8+2+1+1+1+5+2+1 = 21 = 2+1 = 3 (नामांक) G R O V E R 3+2+7+6+5+2 = 25 = 5+2 = 7 =3+7= 10 = 1+0= 1(संपूर्ण नामांक) - जन्म दिनांक का मूलांक और भाग्यांक इस प्रकार है: दीपक का जन्म दिनांक: 18.09.1978 दीपक का मूलांक =1+8=9 दिनांक का भाग्यांक 1+8+9+1+9+7+8 = 43 = 4+3 = 7 प्रियंका का जन्म दिनांक: 11.05.1981 प्रियंका का मूलांक = 1+1 = 2 प्रियंका का भाग्यांक 1+1+5+1+9+8+1 = 26 = 2+6 = 8 वर-कन्या के नामों का नामांक और संपूर्ण नामांक की गणना नामांक तालिका ’ख’ द्वारा की गयी हेै। उपर्युक्त गणना का तुलनात्मक अध्ययन हम अंक गुण मिलान सारणी द्वारा भी कर सकते हैं। इस सारणी का मूल आधार अंक मिलान तालिका ’क’ है। गुण मिलान सारणी के कुल अंक 50 होते हैं। उसमें कम से कम 25 अंक अवश्य मिलने चाहिए। वर व कन्या के मिलान में कोई अंक शत्रु नहीं होना चाहिए। मूलांक व भाग्यांक, जन्म दिनांक पर आधारित होने के कारण बदले नहीं जा सकते पर विवाह उपरांत कन्या के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है। अतः प्रस्तावित नाम से वर कन्या के अंक मित्र अंक बनाये जा सकते हैं। उपरोक्त उदाहरण में दीपक व प्रियंका के मूलांक मित्र हैं। भाग्यांक व प्रथम नामांक सम हैं पर संपूर्ण नामांक व विवाह उपरांत नामांक आपस में शत्रु हैं। सुझाव दिया गया कि प्रियंका ग्रोवर या त्रेहन में से किसी भी उपनाम का प्रयोग न करें तो दीपक ग्रोवर व प्रियंका का नाम आपस में मित्र होंगे। सारणी में कुल प्राप्त अंक 28 हैं। इनका दांपत्य जीवन अच्छा व सुखी है। यहां विभिन्न मूलांकों की स्त्रियों और पुरुषों के स्वभाव गुण, दोष आदि का विश्लेषण प्रस्तुत है। इन विवरणों के आधार पर उपयुक्त जीवनसाथी का चयन कर सकते हैं। जिनका विवाह पहले हो चुका है वे अपने जीवनसाथी के मूलांक के आधार पर आपसी समन्वय बनाकर अपने वैवाहिक जीवन को और अधिक खुशहाल बना सकते हैं। व्यक्तित्व वाली होती है। पति जो कुछ दे दे उसी में संतुष्ट रहने वाली होती है। ऐसी स्त्रियों के घर में सुख-साधनों की कमी नहीं रहती, इसलिए आलसी होने की संभावना रहती है। मूलांक 3: मूलांक 3 वाली स्त्री का परिवार पर अच्छा प्रभाव होता है। ऐसी स्त्रियां पति पर पूर्ण अधिकार रखती हंै तथा पति की उन्नति में सहायक होती हैं। इनका पति अगर व्यवसायी हो और इनके नाम पर व्यवसाय करे तो उन्नति होती है। मूलांक 4: मूलांक 4 वाली स्त्री उच्च शिक्षित, अपनी बात मनवाने वाली, बन-संवर कर रहनेवाली होती है। ऐसी स्त्री घर से बाहर खुश रहती है, किंतु वैवाहिक जीवन साधारण ही रहता है। मूलांक 5: मूलांक 5 वाली स्त्री व्यवहारकुशल और परिपक्व मस्तिष्क वाली, पारिवारिक समस्याओं से ऊपर उठकर विकास कार्यों में रुचि रखने वाली, पति व बच्चों की प्रगति में सहायक होती है। मूलांक 6: मूलांक 6 वाली स्त्री रूपवती व दयालु होती है। इसमें अच्छी पत्नी व अच्छी माता के सभी गुण होते हैं। ऐसी स्त्री घर को अच्छे ढंग से चलाने की क्षमता रखती है तथा समाज में प्रतिष्ठित व परिवार में सर्वेसर्वा होती है। मूलांक 7: अंक 7 वाली स्त्री पर्याप्त शिक्षित होने के बावजूद अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए संघर्षमय रहती है। ऐसी स्त्रियों को अकेले रहना अच्छा लगता है। हर समय पति इनका ध्यान रखें, इनमें ऐसी चाहत हर समय बनी रहती है। मूलांक 8: मूलांक 8 वाली स्त्री नियम से चलने वाली, कर्मठ, पति व बच्चों के लिए कार्य करने वाली व बौद्धिक शक्ति की धनी होती है। परिवार व व्यवसाय के कार्यों में अच्छी सलाहकार होती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाली स्त्री प्रायः उन्मुक्त और मनमौजी होती है। कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले इन्हें भरोसे में लेना चाहिए। ऐसी स्त्रियों का स्वभाव उग्र तो होता है, पर वे लापरवाह नहीं होती हैं। ये पति के कार्यों में पूरे मनोयोग से सहायता करती हैं। विभिन्न मूलांक वाले पुरुष मूलांक 1: मूलांक 1 वाले पुरुष गंभीर, दयालु व महत्वाकांक्षी होते हैं। ये हमेशा यही चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनकी बात मानें। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी का समाज में मान-सम्मान हो। इन्हें अपने घर से लगाव होता है और ये अधिक समय घर पर ही बिताना चाहते हैं। मूलांक 2: मूलांक 2 वाले पुरुष शांत स्वभाव के होते हैं। ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी इनके कहे बिना ही सब कार्य कर दे। यह एक समझदार व शिष्ट पत्नी चाहते हैं। मूलांक 3: मूलांक 3 वाले पुरुष आत्मकेंद्रित व अध्यात्म में रुचि रखने वाले होते हैं। ऐसे ज्यादातर पुरुष अपने से ऊंचे घराने में विवाह करते हैं। ये अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखते हैं। मूलांक 4: मूलांक 4 वाले पुरुष दयालु व विद्रोही स्वभाव के होते हैं। ये सतत लोगों की कमियां निकालते रहते हैं जिसके कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। ये चाहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य इनके अनुसार चलें। मूलांक 5: मूलांक 5 वाले पुरुष हठधर्मी, किंतु व्यवहारकुशल व मितव्ययी होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी बन-संवर कर रहंे। इन्हें अपने बच्चों से लगाव होता है। ये बच्चों पर खुलकर खर्च करने वाले होते हैं। मूलांक 6: मूलांक 6 वाले पुरुष विलासी, ईमानदार व मधुर स्वभाव वाले होते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी पत्नी ऐसी हो जिस पर ये गर्व कर सकंे। ये घर-परिवार का पूरा ध्यान रखते हैं। मूलांक 7: मूलांक 7 वाले पुरुष दार्शनिक, भावुक व पराविज्ञान का ज्ञान रखने वाले होते हैं। ये पत्नी की भावनाओं को समझते हंै और हर बात को आलोचनात्मक तरीके से देखते हैं। इस कारण परिवार में अशांति बनी रहती है। मूलांक 8: मूलांक 8 वाले पुरुष विश्वसनीय, न्यायप्रिय और एकांतप्रिय होते हैं। ऐसे अधिकतर पुरुष विवाह नहीं करना चाहते हंै। जो करते हैं, उन्हें रूढ़िवादी विचारों वाली पत्नी अच्छी लगती है। मूलांक 9: मूलांक 9 वाले पुरुष साहसी, स्वाभिमानी व आत्मविश्वासी होते हैं। इन्हें एक अच्छे घर की लालसा रहती है। अपने परिवार, पत्नी व बच्चों पर इन्हें गर्व होता है।
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