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क्या आप जानते हैं कि लौकी का जूस शरीर के लिए एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम कर सकता है?लौकी में लगभग 92% पानी, विटामिन-C, ...
08/03/2026

क्या आप जानते हैं कि लौकी का जूस शरीर के लिए एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम कर सकता है?

लौकी में लगभग 92% पानी, विटामिन-C, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को अंदर से ठंडक और ऊर्जा देते हैं। नियमित रूप से लौकी का ताजा जूस पीने से दिल की सेहत बेहतर होती है, वजन कम करने में मदद मिलती है, डायबिटीज कंट्रोल रहती है और पाचन भी मजबूत होता है।

इसके अलावा यह एसिडिटी, कब्ज और पेट की जलन में भी राहत देता है और गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।

👉 लेकिन एक जरूरी बात याद रखें:
कड़वी लौकी का जूस कभी न पिएं, इससे नुकसान हो सकता है।

अगर आप रोज सुबह खाली पेट ताजा लौकी का जूस पीते हैं तो शरीर में हल्कापन और ऊर्जा महसूस हो सकती ह!

सिर्फ 4 चीजों से बना यह जूस लिवर को साफ करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकता है !
07/03/2026

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07/03/2026

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07/03/2026

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धमनियों (Arteries) की सफाई:❤️ दिल को स्वस्थ रखने वाले 12 सुपरफूड्स को खाने का सही तरीका! ​क्या आप जानते हैं कि खराब खानप...
06/03/2026

धमनियों (Arteries) की सफाई:❤️ दिल को स्वस्थ रखने वाले 12 सुपरफूड्स को खाने का सही तरीका!

​क्या आप जानते हैं कि खराब खानपान से हमारे दिल की नसों (धमनियों) में प्लाक (Cholesterol) जमने लगता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है? लेकिन कुछ खास खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से आपकी नसों को साफ करने का काम करते हैं।
​आइए जानते हैं इन 12 सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करने का सही तरीका, समय और मात्रा:

​ 1. तैलीय मछली (Fatty Fish - जैसे सैल्मन)

​कैसे खाएं: ग्रिल, रोस्ट या बेक करके (डीप फ्राई न करें)।
​कब खाएं: दोपहर (लंच) या रात के खाने (डिनर) में।
​कितना खाएं: हफ्ते में 2 बार (करीब 100-150 ग्राम)।

​ 2. एवोकैडो (Avocado)

​कैसे खाएं: कच्चा सलाद में, मल्टीग्रेन ब्रेड पर मैश करके या स्मूदी में।
​कब खाएं: सुबह नाश्ते या दोपहर के खाने में।
​कितना खाएं: रोज़ाना आधा एवोकैडो।

3. जैतून का तेल (Extra Virgin Olive Oil)

​कैसे खाएं: सलाद के ऊपर ड्रेसिंग के रूप में डालकर (कच्चा खाना सबसे फायदेमंद है) या बहुत हल्की आंच पर पकाने के लिए।
​कब खाएं: दिन के किसी भी मील में।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 से 2 चम्मच (Tablespoon)।

​ 4. नट्स (बादाम, अखरोट)

​कैसे खाएं: रात भर पानी में भिगोकर (इससे पोषक तत्व बेहतर तरीके से पचते हैं)।
​कब खाएं: सुबह खाली पेट या शाम को भूख लगने पर स्नैक के रूप में।
​कितना खाएं: रोज़ाना एक मुट्ठी (लगभग 20-30 ग्राम)।

​ 5. जामुन / बेरीज़ (Berries)

​कैसे खाएं: ताज़ा धोकर सीधे खाएं या ओट्स/दही में मिलाकर।
​कब खाएं: सुबह नाश्ते में या मिड-मॉर्निंग स्नैक के तौर पर।
​कितना खाएं: रोज़ाना आधा से 1 कप।

​ 6. पत्तेदार साग (पालक, मेथी आदि)

​कैसे खाएं: हल्का उबाल कर (सूप), स्मूदी में, या कम तेल में सब्जी बनाकर।
​कब खाएं: लंच या डिनर में।
​कितना खाएं: रोज़ाना कम से कम 1 से 2 कटोरी।

​ 7. साबुत अनाज (ओट्स, ब्राउन राइस)

​कैसे खाएं: दलिया, खिचड़ी या मल्टीग्रेन रोटी के रूप में।
​कब खाएं: सुबह नाश्ते (ओट्स) या मुख्य भोजन में।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 से 2 कटोरी पके हुए साबुत अनाज।

​ 8. फलियां (बीन्स, राजमा, दालें)

​कैसे खाएं: रात भर भिगोकर और अच्छी तरह उबाल कर सब्जी, दाल या सूप के रूप में।
​कब खाएं: दोपहर के खाने में (रात में कुछ लोगों को पचने में भारी लग सकती हैं)।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 कटोरी (पकी हुई)।

​9. टमाटर (Tomatoes)

​कैसे खाएं: कच्चा (सलाद में) या पकाकर (सूप/सब्जी में)। हल्का पकाने से टमाटर का 'लाइकोपीन' (दिल के लिए फायदेमंद तत्व) बेहतर तरीके से काम करता है।
​कब खाएं: दिन के किसी भी समय।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 से 2 मध्यम आकार के टमाटर।

​🧄 10. लहसुन (Garlic)

​कैसे खाएं: कच्ची कली को हल्का सा कुचल कर 10 मिनट के लिए छोड़ दें (इससे इसमें एलिसिन एक्टिवेट होता है), फिर खाएं।
​कब खाएं: सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी के साथ।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 से 2 कली।

​👉 11. डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate - कम से कम 70% कोको)

​कैसे खाएं: सीधे खाएं (इसमें चीनी या दूध वाली मिल्क चॉकलेट नहीं होनी चाहिए)।
​कब खाएं: खाना खाने के बाद मीठे की क्रेविंग होने पर या शाम को।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1-2 छोटे टुकड़े (करीब 15-20 ग्राम)।

​❤️ 12. ग्रीन टी (Green Tea)

​कैसे खाएं: गर्म पानी में ब्रू करके (बिना चीनी और दूध के)। चाहें तो नींबू की कुछ बूंदें डाल सकते हैं।
​कब खाएं: खाना खाने के 1 घंटे बाद या शाम को (सुबह खाली पेट या रात को सोने से तुरंत पहले पीने से बचें)।
​कितना खाएं: रोज़ाना 1 से 2 कप।

👉 ​ज़रूरी सलाह:

यह डाइट आपके दिल की सेहत सुधारने में मदद कर सकती है, लेकिन अगर आप हार्ट पेशेंट हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो कोई भी नया बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें!

​भूल न जाएं, इसलिए इस पोस्ट को अभी SAVE करें!

अपने परिवार और दोस्तों के साथ SHARE करके उन्हें भी स्वस्थ रहने में मदद करें।

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04/03/2026

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28/02/2026
क्या आप रोज़ हरी मिर्च खाते हैं? 🌶️जानते हैं यह आपकी सेहत के लिए वरदान है या नुकसान?क्या हरी मिर्च सच में इम्युनिटी बढ़ा...
27/02/2026

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भोजन ही औषधि है: जानें क्या कहता है आयुर्वेद ‘खाना खाने के सही तरीके’आधुनिक जीवनशैली में हम क्या खा रहे हैं, इस पर तो चर...
26/02/2026

भोजन ही औषधि है: जानें क्या कहता है आयुर्वेद ‘खाना खाने के सही तरीके’

आधुनिक जीवनशैली में हम क्या खा रहे हैं, इस पर तो चर्चा होती है, पर कैसे खा रहे हैं — इस पर कम ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि वही शरीर की औषधि है। सही तरीके से खाया गया आहार रोगों को दूर रखता है, जबकि गलत ढंग से लिया गया वही भोजन “आम” (टॉक्सिन) का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है —

“हितभुक् मितभुक् ऋतभुक् च।”
अर्थ: जो व्यक्ति हितकारी (प्रकृति के अनुकूल), मित (संतुलित मात्रा में) और ऋतु के अनुसार भोजन करता है, वही स्वस्थ रहता है।

यह सूत्र आज भी उतना ही सत्य है जितना हजारों वर्ष पहले था।

🍲 1️⃣ गर्म, ताजा और स्निग्ध भोजन का महत्व

चरक संहिता में कहा गया है:
“उष्णं अश्नीयात्, स्निग्धं अश्नीयात्।”
अर्थ: भोजन गर्म और हल्का स्निग्ध (घी/तेल युक्त) होना चाहिए।

गर्म भोजन जठराग्नि को प्रज्वलित करता है, पाचन सुधारता है और वात दोष को संतुलित रखता है। बासी, अत्यधिक ठंडा या बार-बार गरम किया गया भोजन अग्नि को मंद कर सकता है।

⏳ 2️⃣ भूख लगने पर ही भोजन

आयुर्वेद कहता है:
“जिर्णे भोजनं कुर्वीत।”
अर्थ: जब पूर्व भोजन पच जाए, तभी अगला भोजन करें।

बिना भूख के भोजन करना “अग्नि मंद” कर देता है, जिससे अपच, गैस और भारीपन उत्पन्न हो सकता है। सच्ची भूख शरीर का संकेत है कि अग्नि तैयार है।

🧘 3️⃣ शांत मन से भोजन

चरक संहिता में उल्लेख है:
“नातिद्रुतं नातिविलम्बितम्।”
अर्थ: न बहुत तेजी से खाएं, न बहुत देर लगाएं।

जल्दी-जल्दी खाने से भोजन सही प्रकार से चबता नहीं और पाचन बाधित होता है। वहीं बहुत देर तक खाने से भी अग्नि असंतुलित हो सकती है।

भोजन करते समय क्रोध, चिंता या मोबाइल का उपयोग आयुर्वेद के अनुसार उचित नहीं। मन और भोजन का गहरा संबंध है।

🪑 4️⃣ उचित आसन और दिशा

आयुर्वेद परंपरा में जमीन पर सुखासन में बैठकर भोजन करने की सलाह दी गई है। इससे पाचन अंगों पर हल्का दबाव बनता है और रक्तसंचार संतुलित रहता है।

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति से जुड़ा माना गया है।

🥄 5️⃣ मात्रा का विज्ञान

आयुर्वेद का प्रसिद्ध सिद्धांत है:
“अर्धं भोजनस्य पच्यते, तृतीयं जलपानम्, शेषं वायोः।”
अर्थ: पेट का आधा भाग भोजन से, एक भाग जल से और एक भाग खाली (वायु के लिए) रखना चाहिए।

अधिक भोजन जठराग्नि पर भार डालता है और रोगों का कारण बन सकता है। संतुलित मात्रा ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य का आधार है।

💧 6️⃣ भोजन के साथ जल सेवन

भोजन के तुरंत बाद अधिक ठंडा पानी पीना आयुर्वेद में वर्जित माना गया है।
हल्का गुनगुना जल या जरूरत अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी पाचन में सहायक होता है।

🌿 7️⃣ ऋतु और प्रकृति अनुसार आहार

आयुर्वेद “ऋतुचर्या” और “प्रकृति” को महत्व देता है।

गर्मियों में शीतल, हल्का भोजन

सर्दियों में पौष्टिक और स्निग्ध आहार

वात, पित्त, कफ प्रकृति के अनुसार चयन

यह व्यक्तिगत पोषण का प्राचीन विज्ञान है।

🔎 दुर्लभ पर सत्य तथ्य

🔹 आयुर्वेद के अनुसार, गलत समय पर लिया गया पौष्टिक भोजन भी रोगकारक हो सकता है।
🔹 भोजन के बाद 100 कदम टहलना पाचन के लिए लाभकारी माना गया है।
🔹 दिन का मुख्य भोजन दोपहर में लेना श्रेष्ठ है, क्योंकि उस समय जठराग्नि सूर्य के समान प्रबल होती है।

🏥 निष्कर्ष

आयुर्वेद स्पष्ट कहता है — भोजन ही औषधि है, बशर्ते उसे सही विधि से ग्रहण किया जाए।
सही समय, सही मात्रा, सही मनोदशा और सही संयोजन — यही स्वास्थ्य का मूल मंत्र है।

जब हम भोजन को केवल स्वाद नहीं, बल्कि साधना मानकर ग्रहण करते हैं, तब वही आहार शरीर और मन दोनों का उपचार बन जाता है।

क्या आप जानते हैं कि रोज़ थोड़ा सा अदरक खाने से नसें साफ रखने में मदद मिल सकती है?क्या आप भारीपन, गैस या जंक फूड के असर ...
26/02/2026

क्या आप जानते हैं कि रोज़ थोड़ा सा अदरक खाने से नसें साफ रखने में मदद मिल सकती है?
क्या आप भारीपन, गैस या जंक फूड के असर से परेशान रहते हैं?
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