Sethi Rasayan Shala

Sethi Rasayan Shala We are Manufacturers, Suppliers and Exporters of a qualitative range of Ayurvedic Medicines. Our range is well-received in the market.

SETHI RASAYAN SHALA Manufacturers of Ayurvedic & Herbal Medicines | We Share Authentic Ayurvedic Health Tips, Disease Awareness & Natural Healing Knowledge Based on Traditional Principles | Promoting Holistic Wellness & Preventive Healthcare Through Trus Sethi Rasayan Shala established in the year 1980, is a leading manufacturer of Ayurvedic herbal products and pharmaceutical bulk drugs.The factory is established in Indore.

बढ़ता मौन स्वास्थ्य संकट : विटामिन D और B12 की कमी आयुर्वेद की दृष्टिआज भारत में एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस (मौन स्वास्थ्...
12/04/2026

बढ़ता मौन स्वास्थ्य संकट : विटामिन D और B12 की कमी आयुर्वेद की दृष्टि
आज भारत में एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस (मौन स्वास्थ्य संकट) तेजी से फैल रहा है । विटामिन D और विटामिन B12 की कमी । यह समस्या अब केवल बुजुर्गों या कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों तक सीमित नहीं है । युवा, व्यस्त प्रोफेशनल्स, फिट दिखने वाले लोग और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं ।

हालिया अध्ययनों के अनुसार, भारत में विटामिन D की कमी deficiency or insufficiency लगभग 60-75% लोगों में देखी जा रही है, जबकि विटामिन B12 की कमी 40-60% आबादी में आम है । कुछ क्षेत्रों जैसे उत्तर भारत या शहरी इलाकों में यह आंकड़ा और भी ऊंचा है । चौंकाने वाली बात यह है कि सूर्य प्रचुर भारत में भी यह समस्या बढ़ रही है ।

आयुर्वेद में इसे केवल “विटामिन की कमी” नहीं माना जाता। यह अग्नि मंद्य कमजोर पाचन शक्ति, धातु क्षय शरीर की सात धातुओं का क्षीण होना, वात दोष का वृद्धि और प्रकृति से दूरी का परिणाम है । जब शरीर की मूल प्रणालियां असंतुलित होती हैं, तो आधुनिक विज्ञान के अनुसार “विटामिन डेफिशिएंसी” सामने आती है ।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? :* आयुर्वेदिक कारण और आधुनिक जीवनशैली

1.बदलती जीवनशैली और सूर्य से दूरी :*
आज का इंसान घर, ऑफिस मोबाइल स्क्रीन के बीच कैद है । सुबह-शाम धूप से बचना, सनस्क्रीन का अत्यधिक प्रयोग और बंद कमरों में रहना सामान्य हो गया है ।
आयुर्वेद के अनुसार सूर्य प्राण, तेज और ओजस का मुख्य स्रोत है । सूर्य किरणें भ्राजक पित्त को सक्रिय कर त्वचा में विटामिन D का निर्माण करती हैं। धूप की कमी से अस्थि धातु (हड्डियां) कमजोर होती है, वात दोष बढ़ता है, जिससे थकान, जोड़ों का दर्द और कमजोरी उत्पन्न होती है ।
आयुर्वेद में इसे “आतप सेवन” कहा गया है ।नियमित सूर्य संपर्क शरीर में बल, ऊर्जा और प्राण बढ़ाता है।

2.आहार में असंतुलन (Dietary Imbalance)
विटामिन B12 मुख्य रूप से पशु आधारित आहार अंडा, मछली, दूध, दही में पाया जाता है । शुद्ध शाकाहारी, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और अनियमित भोजन करने वालों में इसकी कमी ज्यादा आम है ।

आयुर्वेद कहता है- “जैसा आहार, वैसा ही शरीर और मन” रूक्ष सूखा, बासी, ठंडा या कृत्रिम भोजन अग्नि को मंद कर देता है । परिणामस्वरूप भोजन से प्राप्त पोषक तत्व ठीक से रस धातु में परिवर्तित नहीं हो पाते । इससे रक्त, मांस और मज्जा धातु क्षीण होती है, जो B12 की कमी से जुड़ी थकान और नसों की समस्या पैदा करती है ।
3.पाचन और अवशोषण की समस्या :*
कई लोग अच्छा भोजन लेते हैं, फिर भी कमी बनी रहती है। कारण हैं- कमजोर जठराग्नि, भोजन के तुरंत बाद चाय, कॉफी पीना, बार-बार उबाला दूध, अनियमित भोजन समय और तनाव ।

आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है- “सर्वे रोगा मंदाग्नौ” (सभी रोगों का मूल कारण मंद अग्नि है) । जब अग्नि कमजोर होती है, तो पोषण तत्व ठीक से अवशोषित नहीं होते। इससे धातु क्षय होता है और विटामिन D व B12 की कमी बढ़ जाती है ।

शरीर के संकेत Common Symptoms :*
आयुर्वेद में यह होने वाले लक्षण वात वृद्धि और धातु क्षीणता के स्पष्ट संकेत हैं :
लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती, हड्डियों और जोड़ों में दर्द बाल झड़ना, बेजान बाल या समय से पहले सफेद होना, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन या डिप्रेशन, हाथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नता या नसों में कमजोरी, कमजोर इम्यूनिटी और बार-बार बीमार पड़ना ।
ये लक्षण अनदेखे रहने पर हड्डियों की कमजोरी, एनीमिया, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और यहां तक कि हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं ।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संतुलित दृष्टिकोण, समाधान
आयुर्वेद केवल सप्लीमेंट्स पर निर्भर नहीं करता । यह समग्र उपचार Holistic Healing है, जिसमें आहार, विहार, दिनचर्या और औषधि शामिल हैं ।

1.सही धूप/आतप सेवन :*
सुबह का कोमल सूर्य या दोपहर 11 बजे से 2 बजे के बीच 15-30 मिनट धूप लें चेहरे, हाथ, पैर खुले रखें । सप्ताह में 4-5 दिन पर्याप्त ।आयुर्वेद में इसे सूर्य नमस्कार या नियमित आतप सेवन कहा गया है, जो भ्राजक पित्त को सक्रिय कर विटामिन D का प्राकृतिक निर्माण करता है । गर्मी में ज्यादा समय न लें, छाया में भी फायदा होता है ।

2 संतुलित और सात्त्विक आहार :*
विटामिन D के लिए : घी, दूध, दही, मक्खन, मशरूम और सीमित मात्रा में तैलीय मछली non-veg के लिए ।
विटामिन B12 के लिए : ताजा दही, छाछ, पनीर, मूंग दाल, स्प्राउट्स और फर्मेंटेड फूड इडली, डोसा आदि । शाकाहारी लोगों के लिए दूध, दही महत्वपूर्ण हैं ।

आयुर्वेदिक सलाह : ताजा, गरम, सात्त्विक भोजन लें । घी, मूंग दाल, हल्दी, अदरक, जीरा, अजवाइन जैसी चीजें शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड, ठंडा भोजन और भोजन के बाद तुरंत चाय, कॉफी से बचें । कम से कम 45-60 मिनट का अंतर रखें ।
3.अग्नि को मजबूत करना और दिनचर्या :*
भोजन से पहले अदरक का पानी या त्रिकटु चूर्ण लें । त्रिफला चूर्ण रात को पाचन और अवशोषण सुधारता है । नियमित योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और हल्का व्यायाम करें । तनाव कम करें ध्यान, मेडिटेशन करें ।

4.आयुर्वेदिक सहायता :*
अश्वगंधा ऊर्जा और हड्डियों के लिए शतावरी धातु पोषण के लिए, गुडूची और च्यवनप्राश रसायन अग्नि और धातुओं को संतुलित करते हैं । ये केवल लक्षण नहीं, मूल कारण मंदाग्नि और दोष असंतुलन को ठीक करते हैं । योग्य वैद्य की सलाह से लें ।

5.जांच और चिकित्सकीय सलाह :*
बिना ब्लड टेस्ट Serum Vitamin D, B12, Calcium के सप्लीमेंट्स न लें । आयुर्वेदिक चिकित्सक दोष-प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत योजना बनाते हैं ।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण :* बताते हुए वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी कहते हैं- विटामिन D और B12 की कमी केवल पोषण की समस्या नहीं है । यह अग्नि, धातु और दोषों के असंतुलन का परिणाम है । यदि हम अपनी दिनचर्या, आहार और प्रकृति के नियमों सूर्य, मौसम, सात्त्विक भोजन के अनुसार जीवन जीना शुरू करें, तो शरीर स्वयं ही संतुलन स्थापित कर इन कमियों को दूर करने लगता है ।
सिर्फ सप्लीमेंट्स लेना अस्थायी समाधान है । लाइफ स्टाइल सुधार और अग्नि जागरण ही असली उपचार है । शरीर एक समग्र प्रणाली है। जब आप इसे सही वातावरण यानि प्रकृति के निकट, संतुलित आहार, मजबूत अग्नि देते हैं, तो वह स्वयं ही हीलिंग प्रक्रिया शुरू कर देता है ।
आप बताइए ? : क्या आपने हाल ही में अपना विटामिन D और B12 लेवल टेस्ट करवाया है ?
अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव लाने जा रहे हैं ? अपनी अनुभव या प्रश्न कमेंट में साझा करें । स्वस्थ रहें, प्रकृति के साथ जुड़ें और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाएं ।
यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। व्यक्तिगत उपचार के लिए योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें ।
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गौरवशाली परंपरा का स्वर्णिम इतिहास: सेठी रसायन शाला भारत भूमि अनादिकाल से आयुर्वेद की पावन एवं दिव्य परंपरा की जननी रही ...
10/04/2026

गौरवशाली परंपरा का स्वर्णिम इतिहास: सेठी रसायन शाला

भारत भूमि अनादिकाल से आयुर्वेद की पावन एवं दिव्य परंपरा की जननी रही है । यह मात्र चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और दीर्घायु बनाने वाला एक अनुपम विज्ञान है । इसी पवित्र परंपरा को हृदयंगम करते हुए सेठी रसायन शाला ने आयुर्वेद के इस अमूल्य रत्न को संजोया और जन-जन तक पहुँचाने का पुनीत कार्य किया है।

📜 हमारी विरासत और तीन पीढ़ियों का तप :*
संस्थान की जड़ें उस दौर से जुड़ी हैं जब आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि एक साधना थी।
वैद्यराज स्वर्गीय श्री सुंदरलाल जी सेठी :* आप अपने युग के अत्यंत अनुभवी एवं विद्वान वैद्य थे। उनकी नाड़ी परीक्षा और जड़ी-बूटियों की पहचान इतनी अचूक थी कि दूर-दराज से लोग असाध्य रोगों के समाधान के लिए उनके पास आते थे। उन्होंने कई लोगों को कैंसर, पीलिया, और अन्य गंभीर बीमारियों से मुक्त किया।

उदाहरण :* एक बुजुर्ग मरीज को गंभीर पीलिया था, जिसे डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। दादाजी ने अपनी विशेष औषधि से उन्हें कुछ ही हफ्तों में स्वस्थ कर दिया ।
वैद्यराज स्वर्गीय श्री गुलाबचंद जी सेठी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सन् 1975 में नीमच (म.प्र.) में सेठी रसायन शाला की विधिवत स्थापना की । उनके हाथों बनी औषधियों में ऐसी दिव्यता थी कि जो रोगी हर जगह से निराश हो चुके थे, वे यहाँ आकर स्वस्थ हुए ।

उदाहरण 1 :* एक महिला को वर्षों से पुराना सोरायसिस था। गुलाबचंद जी ने अपनी रक्तशोधक औषधियों और विशेष तेलों से उनकी त्वचा को पूरी तरह स्वस्थ किया ।

उदाहरण 2 :* एक युवक को गंभीर जलोदर (Ascites) की समस्या थी । गुलाबचंद जी ने जड़ी-बूटियों के रस और भस्मों से उनका इलाज किया और उन्हें बिना सर्जरी के ठीक किया ।
वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी वर्तमान में सेठी रसायन शाला का नेतृत्व कर रहे हैं । उन्होंने अपने पिता और दादा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक तकनीक और आयुर्वेद का अद्भुत संगम बनाया है ।

उदाहरण 1 :* एक मरीज को गंभीर माइग्रेन की समस्या थी, जो महीनों से दवाओं पर निर्भर था । वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी ने आयुर्वेदिक औषधियों से उन्हें पूरी तरह ठीक किया ।

उदाहरण 2 :* एक बच्चे को लगातार पाचन संबंधी समस्याएं थीं। डॉ. नरेंद्र सेठी ने उनकी आंदोलनशीलता और जड़ी-बूटियों के प्रयोग से उन्हें स्वस्थ बनाया ।

चमत्कारिक उपचारों की जीवंत स्मृतियाँ :*
हमारी परंपरा में ऐसे कई प्रसंग हैं जहाँ आयुर्वेद ने आधुनिक सीमाओं को पार किया
1.असाध्य उदर रोगों से मुक्ति
:* दादाजी श्री सुंदरलाल जी के समय ऐसे कई मरीज़ आए जिन्हें गंभीर जलोदर (Ascites) या पेट की पुरानी गांठें थीं। मात्र स्थानीय जड़ी-बूटियों के रस और विशिष्ट भस्मों के प्रयोग से उन्होंने बिना किसी सर्जरी के उन रोगियों को नवजीवन प्रदान किया।

2 चर्म रोगों का जड़ से उन्मूलन
:* वैद्यराज गुलाबचंद जी के पास 'सफेद दाग' और 'पुराने सोरायसिस' के ऐसे मरीज़ आते थे जो वर्षों से परेशान थे। उनकी निर्मित विशेष तेलों और रक्तशोधक औषधियों ने चमत्कारिक रूप से त्वचा को पुनः स्वाभाविक रूप दिया।

3.नाड़ी विज्ञान का चमत्कार
:* ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ मरीज़ की बिना कोई रिपोर्ट देखे, केवल नाड़ी छूकर पित्त और वात की जटिलताओं को पहचान लिया गया और उन रोगों को जड़ से खत्म किया गया जिन्हें लाइलाज माना जा रहा था।

🙏 संतों का आशीर्वाद :*
सेठी रसायन शाला द्वारा उत्पादित औषधीय की गुणवत्ता इतनी अधिक अच्छी होती हैं कि कठोर आहारविहार का नियम पालने वाले जैन मुनि, साधु संत भी उनकी बनी हुई औषधीयों का निःसंकोच सेवन करते थे ।
आज भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी द्वारा भी अनेकों जैन मुनि, साधु संत साध्वी और अन्य किसी भी संप्रदाय के साधु संत को निःसंकोच दवा देने का कार्य करते हैं ।

वर्तमान और आधुनिक विस्तार :*
आज यह संस्थान परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर सेवा कर रहा है ।
वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी के कुशल नेतृत्व में इस विरासत को नई ऊंचाइयां मिली हैं । अतुल सेठी (M. Pharm) एवं अक्षय सेठी (MBA) युवा पीढ़ी के सहयोग से वर्ष 2019 में इंदौर में अत्याधुनिक निर्माण इकाई सेठी रसायन शाला के साथ इसे और उन्नत बनाया गया है । यहां उच्च कोटि की गुणवत्ता पूर्वक औषधीयां बनाई जाती है ।

📞 परामर्श के लिए संपर्क करें :* चिकित्सा परामर्श हेतु क्लीनिक 540, अशोक नगर, इंदौर अथवा मोबाइल नंबर पर
वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी से सीधे जुड़ें: 📱 094248 96884

❤️ हमारी पहचान :*
150 वर्षों की पावन परंपरा, शुद्धता और अटूट विश्वास ।
संत-महात्माओं और ऋषितुल्य जीवन जीने वाले महापुरुषों की पहली पसंद ।

हमारा संकल्प :
केवल औषधि निर्माण नहीं, बल्कि आयुर्वेद के माध्यम से "निरोगी भारत"* का निर्माण करना ।

“परंपरा, शुद्धता और विश्वास” यही हमारी पहचान है, यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है ।
सेठी रसायन शाला : आयुर्वेद की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक ✨

10/04/2026

प्रकृति की पुकार : पंछियों की विनती

अपनी-अपनी भाषा में चहचहाते ये नन्हे पंछी आज आपसे कुछ कह रहे हैं…
गर्मी बढ़ रही है, वातावरण कठोर होता जा रहा है, मानव के संघर्ष और युद्धों ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है ।

ये मासूम जीव आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं..🙏 कृपया युद्ध और हिंसा को रोकें,
🌿 मानवता का परिचय दें,
💧 और हमारे लिए दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें।
एक छोटा सा प्रयास, कई नन्हीं जिंदगियों को बचा सकता है… 🐦💛

ीवन_संरक्षण

सिर्फ 2 मिनट में तनाव दूर : जानिए 4-6 ब्रीदिंग तकनीक का कमालआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम समस्या बन चुकी...
08/04/2026

सिर्फ 2 मिनट में तनाव दूर : जानिए 4-6 ब्रीदिंग तकनीक का कमाल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम समस्या बन चुकी है । ऐसे में एक बेहद सरल लेकिन प्रभावी उपाय है--
4-6 की साँस लेने की तकनीक, जो मात्र 2 मिनट से भी कम समय में आपके नर्वस सिस्टम को शांत कर सकती है ।

इस तकनीक में आपको 4 गिनती तक धीरे-धीरे साँस अंदर लेनी होती है और फिर 6 गिनती तक लंबी साँस बाहर छोड़नी होती है । यह “लंबा एक्सहेल” (साँस छोड़ना) आपके शरीर को यह संकेत देता है कि अब रिलैक्स होने का समय है । इससे दिल की धड़कन धीरे-धीरे सामान्य होती है और तनाव कम होने लगता है ।

विशेष बात यह है कि इस तकनीक के लिए किसी ऐप, मशीन या विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं होती । आप इसे कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं.. चाहे ऑफिस में तनाव के दौरान, सोने से पहले, यात्रा के समय, या जब भी मानसिक रूप से खुद को रीसेट करने की जरूरत महसूस हो ।

कैसे करें यह तकनीक :*
• आराम से बैठें या खड़े रहें
• 4 सेकंड तक गहरी साँस अंदर लें
• 6 सेकंड तक धीरे-धीरे साँस बाहर छोड़ें
• इसे 1 - 2 मिनट तक दोहराएं

फायदे :*
तनाव और चिंता में तुरंत राहत, दिल की धड़कन को संतुलित करना, बेहतर नींद में सहायक, मन को शांत और केंद्रित बनाना ।

यह तकनीक जितनी सरल है, उतनी ही प्रभावशाली भी । आपका शरीर कठिन प्रयास से नहीं, बल्कि इस संतुलित रिदम से सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है ।

अगर आप दिनभर में सिर्फ 2 मिनट निकालकर यह अभ्यास करें, तो मानसिक शांति और संतुलन को आसानी से महसूस कर सकते हैं ।

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शिलाजीत v/s वियाग्रा : जानिए फर्क आयुर्वेदिक औषधियों से कैसे बढ़ाएं प्राकृतिक पुरुष शक्तिआजकल पुरुष अपनी यौन शक्ति बढ़ान...
07/04/2026

शिलाजीत v/s वियाग्रा : जानिए फर्क आयुर्वेदिक औषधियों से कैसे बढ़ाएं प्राकृतिक पुरुष शक्ति

आजकल पुरुष अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए शिलाजीत और वियाग्रा जैसी दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन इनके बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है । शिलाजीत एक प्राकृतिक आयुर्वेदिक रसायन है जो शरीर को अंदर से ताकत देता है, जबकि वियाग्रा एक एलोपैथिक दवा है जिसे केवल डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए ।
शिलाजीत शरीर की ऊर्जा, स्टैमिना और टेस्टोस्टेरोन स्तर को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे कामेच्छा और प्रदर्शन में सुधार होता है, जबकि वियाग्रा का मुख्य काम केवल इरेक्शन को अस्थायी रूप से बढ़ाना होता है ।

शिलाजीत ही नहीं… ये आयुर्वेदिक औषधियां भी बढ़ाएं पुरुष शक्ति और ऊर्जा
शिलाजीत के साथ साथ आयुर्वेद में कई अन्य प्रभावी औषधियां भी हैं जैसे अश्वगंधा जो तनाव कम करके ताकत बढ़ाती है, सफेद मूसली जो पुरुष शक्ति और स्टैमिना के लिए जानी जाती है, कौंच बीज जो प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाता है, गोक्षुर जो हार्मोन बैलेंस में सहायक है और शतावरी जो शरीर को पोषण देकर ऊर्जा बढ़ाती है ।
इन सभी औषधियों का नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से शीघ्रपतन, कमजोरी, नपुंसकता जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है ।
जहां वियाग्रा तुरंत असर दिखाती है, लेकिन उसके साइड इफेक्ट भी हैं वहीं शिलाजीत और अन्य आयुर्वेदिक औषधियां धीरे-धीरे शरीर को जड़ से मजबूत बनाती हैं और लंबे समय तक फायदा देती हैं ।
इसलिए किसी भी दवा का सेवन करने से पहले सही जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है,
ताकि शरीर को नुकसान न हो और सही परिणाम मिल सके ।

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एक दिन में बवासीर से राहत का पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खानारियल की जटा (छिलके के रेशे) लें, उसे जलाकर भस्म बना लें और शीशी...
07/04/2026

एक दिन में बवासीर से राहत का पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खा

नारियल की जटा (छिलके के रेशे) लें, उसे जलाकर भस्म बना लें और शीशी में रख लें। 1–1.5 कप ताज़ी (बिना खट्टी) छाछ या दही के साथ 3 ग्राम भस्म खाली पेट दिन में 3 बार सिर्फ एक दिन लें। माना जाता है कि यह पुरानी से पुरानी बवासीर में भी राहत देता है ।

अन्य उपयोग : रक्तस्राव रोकने, महिलाओं में अधिक मासिक धर्म, श्वेत प्रदर, हैजा, वमन व हिचकी में भी उपयोगी बताया गया है (एक घूंट पानी के साथ)।

सावधानी : दवा से 1 घंटा पहले और बाद तक कुछ न खाएं, दही/छाछ ताज़ा हो । जरूरत हो तो 2–3 दिन तक ले सकते हैं ।

बचाव : बहुत गर्म पानी से गुदा न धोएं, मिर्च-मसाले व गरिष्ठ भोजन से परहेज रखें, वरना बवासीर दोबारा हो सकती है।
यह पारंपरिक नुस्खा है, गंभीर समस्या में चिकित्सक की सलाह लें । जनहित में शेयर करें 🙏

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☕ एक कप चाय : स्वाद, संबंध और आयुर्वेदिक सुकूनभारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक भावना है… एक रिश्ता है… एक ऐसा मध...
04/04/2026

☕ एक कप चाय : स्वाद, संबंध और आयुर्वेदिक सुकून

भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक भावना है… एक रिश्ता है… एक ऐसा मधुर बहाना है, जो हर दिल को जोड़ देता है । हर कप चाय की अपनी कहानी होती है, अपना स्वाद होता है और अपना असर भी । अब अगर इसमें आयुर्वेद का नजरिया जोड़ दें, तो चाय सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का भी साथी बन जाती है ।

नींबू वाली चाय पेट को हल्का करती है और आयुर्वेद के अनुसार यह अग्नि (पाचन शक्ति) को प्रबल करती है, जिससे भोजन अच्छे से पचता है । अदरक वाली चाय कफ को कम करके गले की खराश दूर करती है और सर्दी-जुकाम में बहुत लाभकारी मानी जाती है ।

मसाले वाली चाय जिसमें दालचीनी, लौंग, इलायची जैसे तत्व होते हैं.. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाती है और वात-कफ दोष को संतुलित करती है । वहीं हल्की मलाई वाली चाय शरीर को ऊर्जा देती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसे सीमित मात्रा में ही लेना उचित है ।

सुबह की चाय शरीर में स्फूर्ति लाती है और मन को जाग्रत करती है, जबकि शाम की चाय दिनभर की थकान और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है ।

दुकान की चाय का स्वाद अनोखा होता है.. शायद उसमें मिट्टी की खुशबू और अपनापन घुला होता है। पड़ोसी के साथ चाय पीना संबंधों को मजबूत करता है, और दोस्तों के साथ वही चाय जिंदगी में रंग भर देती है ।

कभी पुलिसिया चाय मुसीबत से राहत दिला देती है, तो अधिकारियों की चाय काम की गति बढ़ा देती है । नेताओं की चाय बिगड़े काम बना देती है, विद्वानों की चाय विचारों को सुंदर बनाती है और कवियों की चाय भावनाओं की धारा बहा देती है ।

रिश्तेदारों के साथ चाय रिश्तों में मिठास घोल देती है..और यही तो जीवन का असली आनंद है ।

आयुर्वेद के अनुसार चाय के मुख्य गुण :* आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी ने बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार चाय दीपन पाचन, भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने में सहायक होती है ।
कफ नाशक है, और सर्दी, खांसी में लाभकारी है । उत्तेजक (Stimulant) होने से यह मानसिक जागरूकता बढ़ाती है, थकान हरने वाली तथा शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाली होती है ।
इसका मूत्रल (Diuretic) गुण शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक होते हैं ।
लेकिन आयुर्वेद यह भी कहता है कि अधिक मात्रा में चाय पीना वात दोष बढ़ा सकता है, गैस, अनिद्रा, अम्लपित्त या चिड़चिड़ापन हो सकता है.. इसलिए संतुलन ही सबसे बड़ा नियम है ।

असल में.. एक कप चाय भूख को शांत कर देती है, एक कप चाय आलस्य को दूर भगा देती है,
एक कप चाय रिश्तों को जोड़ देती है,और एक कप चाय जीवन में मिठास घोल देती है ।

तो आइए… चाय पिएं, चाय पिलाएं और आयुर्वेद के साथ स्वस्थ व आनंदमय जीवन अपनाएं ।

अगर शुगर है, तो फीकी चाय अपनाएं… लेकिन जिंदगी को हमेशा मीठा ही बनाए रखें... ☕
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🚩 श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🚩बजरंगबली की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और शक्ति का वास हो । हर संकट दूर...
02/04/2026

🚩 श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🚩
बजरंगबली की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और शक्ति का वास हो । हर संकट दूर हो और सफलता आपके कदम चूमे ।
जय श्री राम..जय हनुमान.. 🙏

महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएंभगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के सिद्धांत हमारे जीवन को शांति, सद्भा...
30/03/2026

महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के सिद्धांत हमारे जीवन को शांति, सद्भाव और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाएं।
उनका दिव्य संदेश हमें हर परिस्थिति में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देता रहे । जय जिनेन्द्र 🙏

श्वेत प्रदर / रक्त प्रदर : महिलाओं की अनदेखी लेकिन गंभीर समस्यामहिलाओं में योनि मार्ग से बार-बार सफेद, चिपचिपा, दूधिया य...
29/03/2026

श्वेत प्रदर / रक्त प्रदर : महिलाओं की अनदेखी लेकिन गंभीर समस्या

महिलाओं में योनि मार्ग से बार-बार सफेद, चिपचिपा, दूधिया या कभी-कभी पीला स्राव निकलना श्वेत प्रदर Leucorrhea कहलाता है । यदि स्राव में खून मिला हो या अत्यधिक रक्तस्राव हो, तो इसे रक्त प्रदर कहा जाता है ।
रक्त प्रदर को इंग्लिश में आमतौर पर Menorrhagia कहते हैं जब मासिक धर्म (periods) में अत्यधिक रक्तस्राव होता है, तथा जब पीरियड्स के बीच में अनियमित रक्तस्राव होता है तब इसे Metrorrhagia कहते हैं ।
सामान्य भाषा में इसे Abnormal Uterine Bleeding (AUB) भी कहते हैं ।

यह समस्या शुरू में साधारण लगती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने पर शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है, रक्त की कमी (एनीमिया) बढ़ाती है और कई स्त्री रोगों जैसे गर्भाशय की सूजन, संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन या बांझपन का खतरा पैदा करती है ।
आधुनिक जीवनशैली, तनाव और गलत खान-पान के कारण आजकल यह समस्या काफी आम हो गई है ।

क्या यह सामान्य है ? :*
योनि से हल्का, बिना गंध वाला, सफेद या पारदर्शी स्राव महिलाओं में प्राकृतिक रूप से होता है । यह योनि को स्वस्थ और नम रखने में मदद करता है, खासकर अंडोत्सर्ग (ovulation) के समय । लेकिन यदि स्राव की मात्रा अचानक बढ़ जाए, उसमें बदबू आए, रंग बदल जाए पीला, हरा या भूरा, खुजली, जलन,सूजन या दर्द हो, तो यह संक्रमण या रोग का संकेत है । ऐसे में इसे नजरअंदाज न करें ।

आधुनिक और आयुर्वेदिक कारण :* आयुर्वेद के अनुसार श्वेत प्रदर मुख्यतः कफ दोष की वृद्धि के कारण होता है, जिसमें वातऔर पित्त का असंतुलन भी जुड़ सकता है । रज-धातु मासिक धर्म संबंधी ऊतक और रक्त धातु की कमजोरी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।
गर्भाशय या योनि में बैक्टीरियल/फंगल/कैंडिडा संक्रमण । बार-बार गर्भपात, कठिन प्रसव या डिलीवरी के बाद कमजोरी । हार्मोनल बदलाव, अनियमित पीरियड्स, थायरॉइड या PCOS, खून की कमी (एनीमिया) और पोषण की कमी (विटामिन, आयरन, प्रोटीन) ।
अत्यधिक तनाव, चिंता, अनिद्रा। गलत आहार अधिक मसालेदार, तला भुना, जंक फूड, ठंडा और भारी भोजन व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी, गंदे या टाइट सिंथेटिक कपड़े, ज्यादा पैंटी लाइनर्स का उपयोग भी इस रोग का कारण बनते हैं ।

प्रमुख लक्षण:🥰 बार-बार सफेद, चिपचिपा या पीला स्राव, कभी दुर्गंधयुक्त । कमर दर्द, जांघों और पेट के निचले हिस्से में भारीपन या दर्द। सामान्य कमजोरी, थकान, आलस्य और सुस्ती। चक्कर आना, आँखों के आगे अंधेरा छाना। योनि में खुजली, जलन, सूजन या लालिमा। चेहरे पर चमक का कम होना, बाल झड़ना। मानसिक चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, भूख न लगना ।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:🥰 आयुर्वेद में श्वेत प्रदर को मुख्य रूप से कफ दोष की वृद्धि और रज-धातु की दुर्बलता से जोड़ा जाता है । यह केवल स्राव रोकने की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रजनन तंत्र को मजबूत करने की है । आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी का मानना है कि उपचार का असली लक्ष्य स्राव को रोकना नहीं, बल्कि गर्भाशय को मजबूत करना, तीनों दोषों (वात-पित्त-कफ) को संतुलित करना और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है ।
सही समय पर आयुर्वेदिक उपचार, पथ्य संतुलित आहार दिनचर्या और परहेज अपनाने से इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है ।
श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर को कभी भी सामान्य न समझें समय रहते ध्यान दें, ताकि महिलाओं का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बने । लंबे समय तक यह समस्या रहने पर यह मासिक धर्म को अनियमित बना सकता है और गर्भधारण में भी कठिनाई पैदा करता है ।
स्वस्थ नारी ही स्वस्थ परिवार की नींव है इसलिए इस समस्या को नजर अंदाज करना खतरनाक हो सकता है ।

आयुर्वेदिक औषधियाँ :* वैद्य/डॉ. की सलाह से
अशोकारिष्ट : गर्भाशय को टोन देता है, हार्मोन संतुलित करता है और रक्त प्रदर में विशेष लाभकारी ।
लोध्रासव : अत्यधिक स्राव को नियंत्रित करता है, संक्रमण कम करता है और योनि स्वास्थ्य सुधारता है ।
प्रदरांतक लौह : कमजोरी, एनीमिया और रक्त की कमी दूर करने में बेहद उपयोगी ।
शतावरी चूर्ण या शतावरी कल्प: स्त्री स्वास्थ्य के लिए "रानी जड़ी" कहीं जाती है। हार्मोन बैलेंस और ऊर्जा बढ़ाता है।
गिलोय सत् और आंवला : इम्युनिटी बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में सहायक।
अन्य औषधियां : चंद्रप्रभा वटी, पुष्यानुग चूर्ण, प्रदरान्तक टेबलेट, ल्यू सिरप/टैब
ये औषधियाँ रोगी के व्यक्तिगत दोष, प्रकृतिऔर लक्षणों के अनुसार वैद्य द्वारा निर्धारित की जाती हैं । स्वयं न लें ।

प्रभावी घरेलू उपाय :* सुबह खाली पेट आंवला चूर्ण (1 चम्मच) + शहद मिलाकर 1 महीने तक लें । मेथी दाना रातभर भिगोकर या उबालकर उसका पानी पीएं, सूजन और संक्रमण कम करता है ।
रोज केला + मिश्री या केला + दूध + शहद का सेवन कमजोरी दूर करता है । नारियल पानी रोज पिएं हाइड्रेशन और पोषण देता है । त्रिफला जल या लोध्र काढ़ा से योनि की बाहरी स्वच्छता (योनि धुलाई) संक्रमण रोकता है।

क्या करें (पथ्य) :* रोजाना अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता रखें मल-मूत्र के बाद साफ पानी से धोएं । सूती (कॉटन) और ढीले-ढाले कपड़े पहनें, टाइट सिंथेटिक कपड़ों से बचें । पौष्टिक आहार लें हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दूध, दही, अनाज, घी (मर्यादित मात्रा में)।कच्चा टमाटर खाएं, प्याज का रस + शहद (सुबह-शाम), जीरा भूनकर चीनी के साथ ।
रोज योगासन~ भुजंगासन, धनुरासन, पवनमुक्तासन, प्राणायाम और हल्का व्यायाम करें । तनाव कम करें, पर्याप्त नींद 7-8 घंटे लें और सकारात्मक रहें ।

क्या न करें (परहेज) :* तला भुना, ज्यादा मिर्च-मसाले, जंक फूड, ठंडा भोजन और ज्यादा मीठा । देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या। टाइट या गंदे कपड़े पहनना। बिना वैद्य/डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयाँ लेना। समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना, इससे जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।

कब डॉक्टर/वैद्य से मिलें ? :* स्राव में बदबू, खुजली या जलन बढ़ जाए। स्राव का रंग पीला, हरा या खूनी हो जाए। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, थकान या पेट दर्द हो। रक्तस्राव ज्यादा हो या समस्या 2-3 सप्ताह से अधिक बनी रहे । गर्भ धारण में कठिनाई या मासिक धर्म अनियमित हो ।

श्वेत प्रदर एक आम लेकिन उपेक्षा न करने वाली समस्या है । आयुर्वेदिक उपचार, घरेलू नुस्खे, सही आहार और स्वच्छता से इसे आसानी से नियंत्रित और जड़ से समाप्त किया जा सकता है। स्वयं का निदान न करें अनुभवी वैद्य या स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें ।
🥰स्वस्थ नारी ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की नींव है ।
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#श्वेतप्रदर #महिलास्वास्थ्य #आयुर्वेदिकउपचार

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27/03/2026

🔥हर दिन नई ऊर्जा, हर पल नया जोश : सेठी रसायन वटी के साथ..!🔥

हर उम्र में ऊर्जा, शक्ति और उत्साह : अब आयुर्वेद के साथ

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कमजोरी, थकान, कम स्टैमिना, मानसिक तनाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना एक आम समस्या बन चुकी है । ऐसे में शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के लिए जरूरी है एक ऐसा आयुर्वेदिक समाधान, जो केवल लक्षण नहीं बल्कि जड़ से पोषण दे ।
प्रस्तुत है - सेठी रसायन वटी
एक प्रीमियम आयुर्वेदिक रसायन योग, जो प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित होकर शरीर की शक्ति, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है ।

इसके नियमित सेवन से मिलते हैं अनेक लाभ :
शरीर की कमजोरी, थकान और आलस्य में सहायक
ऊर्जा, स्टैमिना और सहनशक्ति बढ़ाने में उपयोगी
मानसिक व शारीरिक कार्यक्षमता में सुधार
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक
पुरुषों व महिलाओं दोनों के लिए उपयोगी
हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत बनाए
हृदय व संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए :
उम्र जनित कमजोरी व थकान में सहायक
स्मरण शक्ति व मानसिक सक्रियता बढ़ाने में सहायक
दैनिक ऊर्जा व स्फूर्ति बनाए रखने में उपयोगी

यह एक उन्नत आयुर्वेदिक “रसायन” फॉर्मूला है, जो शरीर को अंदर से पोषण देकर संतुलित स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है ।
उपलब्ध पैक: 30 / 60 / 120 टैबलेट
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🙏राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्...
27/03/2026

🙏राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे ।
धर्म, सत्य और सदाचार का प्रकाश आपके जीवन को सदैव उज्जवल करता रहे ।
May Lord Ram bless you with happiness, good health and success.
जय श्रीराम 🚩

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