16/02/2026
मुंह के छाले (मुखपाक) का आयुर्वेदिक समाधान : कारण, उपचार और बचाव
मुंह के छाले देखने में छोटे होते हैं लेकिन दर्द, जलन और खाने-पीने में तकलीफ के कारण काफी परेशानी देते हैं । आयुर्वेद में इसे “मुखपाक” कहा गया है और यह केवल मुंह का रोग नहीं बल्कि शरीर के अंदर चल रहे पित्त असंतुलन और पाचन कमजोरी का संकेत माना जाता है ।
आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी के अनुसार बार बार छाले होना इस बात का संकेत है कि शरीर में पित्त बढ़ रहा है, अग्नि मंद है या रक्त दूषित हो रहा है, इसलिए समय रहते ध्यान देना आवश्यक है ।
मुखपाक मुंह के छाले का मुख्य कारण
आयुर्वेद अनुसार प्रायः पित्त वृद्धि, अम्लता, अग्निमांद्य या रक्तदोष के कारण होते हैं । जिनमें मुंह के अंदर जलन, दर्द और छोटे घाव बन जाते हैं । अत्यधिक तीखा, खट्टा और तला-भुना भोजन, ज्यादा चाय-कॉफी, अनियमित भोजन समय, कब्ज, गैस, अपच, तनाव, नींद की कमी, विटामिन B12 या आयरन की कमी तथा धूम्रपान इसके मुख्य कारण है ।
आयुर्वेदिक उपाय और औषधियां
इसके लिए यष्टिमधु (मुलेठी) चूर्ण शहद के साथ लगाना या काढ़े से कुल्ला करना लाभकारी है। त्रिफला चूर्ण रात को गुनगुने पानी से लेना व त्रिफला जल से कुल्ला करना पाचन व रक्तशोधन में सहायक है। कामदुधा रस, प्रवाल पिष्टी या मुक्ताशुक्ति भस्म जलन एवं पित्त शांत करता है । शतावरी चूर्ण शीतलता व पोषण देता है । नारियल तेल या घी छालों पर लगाने से आराम मिलता है । गिलोय सत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है । खदिरादि वटी और अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन उपयोगी होता है ।
यष्टिमधु (मुलेठी) से कुल्ला करना, शहद और हल्दी का लेप लगाना, नारियल तेल या शुद्ध घी लगाना, और धनिया पानी पीना लाभकारी होता है । सभी औषधियां चिकित्सकीय सलाह से सेवन करें।
क्या नहीं करें
तीखा-खट्टा भोजन न लें, पर्याप्त पानी पिएं, कब्ज न होने दें और तनाव कम रखें, इस दौरान बहुत गरम, मसालेदार और खट्टा भोजन, अधिक चाय-कॉफी, धूम्रपान और छालों को बार-बार छेड़ने से बचना चाहिए । यदि छाले 10-15 दिन में ठीक न हों, बार बार हों या अत्यधिक दर्द के साथ हों तो चिकित्सकीय जांच आवश्यक है ।
आयुर्वेद का सिद्धांत है कि रोग के मूल कारण को दूर करने से ही स्थायी समाधान मिलता है, इसलिए संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और पित्त शमन ही मुखपाक से बचाव की कुंजी है।
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