Sethi Rasayan Shala

Sethi Rasayan Shala Herbal Ayurvedic & Patent Medicine We are Manufacturers, Suppliers and Exporters of a qualitative range of Ayurvedic Medicines.

Our range is well-received in the market. Sethi Rasayan Shala established in the year 1980, is a leading manufacturer of Ayurvedic herbal products and pharmaceutical bulk drugs.The factory is established in Indore.

दुबलेपन से परेशान हैं ? स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाने के 25 असरदार उपायअगर आप प्राकृतिक, सुरक्षित और संतुलित तरीके से अपनी ...
31/12/2025

दुबलेपन से परेशान हैं ? स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाने के 25 असरदार उपाय
अगर आप प्राकृतिक, सुरक्षित और संतुलित तरीके से अपनी बॉडी बनाना या वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो सिर्फ कैलोरी बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। सही पोषण, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और कार्बोहाइड्रेट्स का संयोजन जरूरी है । ये उपाय आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करेंगे, मांसपेशियां मजबूत बनाएंगे और मेटाबॉलिज्म को सुधारेंगे । याद रखें, वजन बढ़ाना एक धीमी प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और निरंतरता की जरूरत होती है । नीचे दिए गए सुपरफूड्स और टिप्स को अपनी डाइट में शामिल करें, लेकिन अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें ।

मुख्य आहार (Main Foods)
ये आहार दैनिक भोजन में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं और ये कैलोरी, प्रोटीन तथा आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
केला (Banana) : कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत। रोज़ 2-3 केले खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और पोटैशियम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसे दूध या योगर्ट के साथ मिक्स करके स्मूदी बनाएं।
भैंस का दूध : गाय के दूध की तुलना में इसमें फैट और कैलोरी अधिक होती है। रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध पीने से शरीर की रिकवरी होती है और वजन बढ़ता है। अगर लैक्टोज इंटॉलरेंस है, तो बादाम दूध का विकल्प चुनें।
देसी घी : यह 'हेल्दी सैचुरेटेड फैट' का भंडार है। दाल, दलिया या रोटी में 2-3 चम्मच घी मिलाकर खाने से मेटाबॉलिज्म सुधरता है, पाचन बेहतर होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी ने बताया कि आयुर्वेद में इसे 'ओजस' बढ़ाने वाला माना जाता है, इससे वजन स्वस्थ तरीके से बढ़ता है ।
पीनट बटर (Peanut Butter) : इसमें हाई प्रोटीन और अनसैचुरेटेड फैट होता है। इसे ब्रेड, टोस्ट या फलों के साथ स्नैक्स में लें। रोज़ 2 टेबल स्पून से 200-300 कैलोरी आसानी से मिल जाती हैं ।
उबला या भुना चना : मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प । इसमें फाइबर भी होता है जो पाचन को दुरुस्त रखता है। रोज़ मुट्ठी भर चने नमक और नींबू के साथ खाएं ।
आलू (Potato) : कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर, जो लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं। उबले या भुने आलू को सलाद या सब्जी में शामिल करें, लेकिन फ्राई करने से बचें।
चावल (Rice) : सफेद या ब्राउन राइस कैलोरी का अच्छा स्रोत है। दाल-चावल या खिचड़ी बनाकर खाएं, जो आसानी से पचता है और वजन बढ़ाने में मदद करता है।
ओट्स (Oats) : हाई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। दूध में ओट्स का दलिया बनाकर खाएं, इसमें फल और नट्स मिलाकर कैलोरी बढ़ाएं ।

ड्राई फ्रूट्स और नट्स (Dry Fruits & Seeds)
ये स्नैक्स के रूप में लें, जो कैलोरी डेंस होते हैं और शरीर को आवश्यक फैट्स तथा विटामिन्स प्रदान करते हैं
किशमिश (Raisins) : रात भर भीगी हुई 20-30 किशमिश सुबह खाने से वजन तेजी से बढ़ता है, खून की कमी दूर होती है और एनर्जी लेवल बढ़ता है। इन्हें दूध या योगर्ट में मिलाकर खाएं।
खजूर (Dates) : खजूर को दूध में उबालकर पीने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और मांस बढ़ता है। रोज़ 4-5 खजूर से 200 कैलोरी मिलती हैं, साथ ही आयरन और मैग्नीशियम भी।
अंजीर और बादाम : 2 अंजीर और 5-6 बादाम रात को भिगो दें और सुबह चबाकर खाएं। यह शरीर को अंदरूनी ताकत देता है, हड्डियां मजबूत करता है और वजन बढ़ाने में सहायक है ।
काजू (Cashews) : हेल्दी फैट्स और प्रोटीन से भरपूर । रोज़ मुट्ठी भर काजू खाने से कैलोरी बढ़ती है और ब्रेन हेल्थ भी सुधरती है ।
अखरोट (Walnuts) : ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का स्रोत, जो मेटाबॉलिज्म को बैलेंस करता है । इन्हें सलाद या शेक में मिलाएं ।
चिया सीड्स (Chia Seeds) : फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। पानी या दूध में भिगोकर खाएं, जो पेट भरता है और वजन बढ़ाने में मदद करता है।
कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) : जिंक और मैग्नीशियम से भरपूर, जो हार्मोन बैलेंस करते हैं। रोस्ट करके स्नैक के रूप में लें ।

डेयरी और अन्य विकल्प (Dairy & Supplements)
डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन और कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं, जबकि सप्लीमेंट्स शाकाहारी विकल्प प्रदान करते हैं ।
लस्सी और दही : प्रोबायोटिक्स से भरपूर, जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं ताकि आप जो भी खाएं वह शरीर को लगे। मीठी लस्सी में शहद मिलाकर पिएं।
पनीर (Paneer) : स्लो डाइजेस्टिंग प्रोटीन (केसीन) का स्रोत । कच्चा पनीर, सलाद या सब्जी में डालकर खाना फायदेमंद है । इसमें फैट भी अच्छी मात्रा में होता है ।
सोयाबीन/सोया चंक्स*: अगर आप शाकाहारी हैं, तो सोयाबीन प्रोटीन का पावरहाउस है। इसे करी या सूप में शामिल करें, जो मसल्स बिल्डिंग में मदद करता है ।
अंडे (Eggs) : अगर नॉन-वेज खाते हैं, तो उबले अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं। रोज़ 2-3 अंडे से कैलोरी और प्रोटीन बढ़ता है।
चीज़ (Cheese) : हाई फैट और प्रोटीन। सैंडविच या सलाद में मिलाकर खाएं, लेकिन मात्रा सीमित रखें ।

विशेष वेट-गेन ड्रिंक्स और स्मूदीज (Natural Weight Gain Drinks & Smoothies)
ये ड्रिंक्स कैलोरी बढ़ाने का आसान तरीका हैं, जो पचने में आसान होते हैं ।
दूध + शहद : रात को गुनगुने दूध में 1-2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है, शरीर रिकवर होता है और वजन बढ़ता है।
केला और दूध का शेक : सुबह खाली पेट 2 केले, 1 गिलास दूध और थोड़ा शहद मिलाकर शेक बनाएं। यह सबसे प्रसिद्ध 'मास गेनर' है और 400-500 कैलोरी देता है।
साबूदाना की खीर : साबूदाना में अच्छी मात्रा में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट होता है । दूध में बनाकर खाएं, जो वजन बढ़ाने में बहुत सहायक है ।
शकरकंद (Sweet Potato) : कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और फाइबर से भरपूर। उबले शकरकंद को मैश करके दूध के साथ शेक बनाएं या स्नैक के रूप में खाएं ।
एवोकाडो स्मूदी : अगर उपलब्ध हो, तो एवोकाडो में हेल्दी फैट्स होते हैं। इसे दूध, केला और शहद के साथ ब्लेंड करें।
बादाम मिल्क शेक : भिगोए हुए बादाम को दूध में ग्राइंड करके पिएं, जो प्रोटीन और कैलोरी से भरपूर होता है।

स्वस्थ वजन बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी ने बताया कि आयुर्वेद में दुबलेपन का कारण वात दोष, कमजोर पाचन और पोषण की कमी माना जाता है । वजन बढ़ाने के लिए बृंहणा चिकित्सा पद्धति अपनाएं इसके लिए मुख्य औषधियां
अश्वगंधा : तनाव कम करे, मांसपेशियां बढ़ाए । (रात को दूध में 1-2 चम्मच) शतावरी : पौष्टिक, पाचन मजबूत करे। (दूध/घी के साथ 1 चम्मच) च्यवनप्राश : इम्यूनिटी और वजन बढ़ाए। (सुबह 1-2 चम्मच दूध के साथ) सफेद मूसली/विदारीकंद : ताकत और मांस बढ़ाए। *मुलेठी*: भूख बढ़ाए।
घरेलू उपाय : तेल मालिश (अभ्यंग) तिल के तेल से करें । योगासन (सूर्य नमस्कार, भुजंगासन) करें । 7-8 घंटे नींद और तनाव कम करें।

जरूरी सलाह (Expert Tips) : ये टिप्स डाइट को सपोर्ट करेंगे और परिणाम को तेज करेंगे ।
पर्याप्त नींद : शरीर को रिकवर करने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद के दौरान ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जो वजन बढ़ाने में मदद करता है।
हल्का व्यायाम : केवल खाने से फैट बढ़ेगा, मांसपेशियों के लिए पुश-अप्स, स्क्वाट्स या योगासन जरूर करें। वेट ट्रेनिंग शुरू करें लेकिन ओवर न करें।
जंक फूड से बचें : समोसे, पिज्जा या कोल्ड ड्रिंक से वजन नहीं, बीमारियां बढ़ती हैं। हमेशा घर का बना खाना चुनें।
धैर्य रखें*: शरीर को बदलने में समय लगता है, इन उपायों को कम से कम 1-2 महीने लगातार अपनाएं। प्रोग्रेस ट्रैक करें ।
ज्यादा पानी पिएं : डिहाइड्रेशन से मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। रोज़ 3-4 लीटर पानी पिएं, लेकिन भोजन के साथ नहीं ।
छोटे-छोटे मील : 3 बड़े भोजन की बजाय 5-6 छोटे मील लें, जो कैलोरी इनटेक बढ़ाता है।
सप्लीमेंट्स का विचार : अगर जरूरी हो तो व्हे प्रोटीन या मास गेनर सप्लीमेंट लें, लेकिन डॉक्टर की सलाह से।
तनाव कम करें : स्ट्रेस से वजन घटता है । मेडिटेशन या वॉक से तनाव मैनेज करें । इन उपायों को अपनाकर आप स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ा सकते हैं। अगर कोई एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या है, तो विशेषज्ञ से परामर्श लें । ़ाएं

चेहरा बता देता है लिवर की सेहतफैटी लिवर Fatty Liver Disease को Silent Disease कहा जाता है क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके...
29/12/2025

चेहरा बता देता है लिवर की सेहत
फैटी लिवर Fatty Liver Disease को Silent Disease कहा जाता है क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते । लेकिन शरीर, खासकर चेहरा, इसके शुरुआती संकेत देने लगता है। समय रहते पहचान और lifestyle सुधार से फैटी लिवर को control किया जा सकता है ।

चेहरे पर दिखने वाले संकेत
• चेहरे की चमक कम होना, स्किन का पीला या फीका दिखना : liver toxins ठीक से बाहर नहीं निकाल पा रहा
• आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स : पूरी नींद के बाद भी बने रहें तो liver stress का संकेत
• बार-बार पिंपल्स, खुजली, एलर्जी : खून की सफाई ठीक से न होना
• होंठों का सूखना, रंग गहरा या नीला पड़ना : dehydration और liver dysfunction
• सुबह चेहरा फूला हुआ, आंखों-गालों में सूजन : liver fat और fluid imbalance

साथ में ये लक्षण हों तो सतर्क हो जाएं :*
• जल्दी थकान • पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन • वजन तेजी से बढ़ना • भूख कम लगना

चिकित्सकीय सलाह
जंक और तला-भुना कम करें, मीठा और शराब सीमित करें, रोज़ 30 मिनट walk/exercise करें, वजन control रखें, समय-समय पर Liver Function Test (LFT) कराएं ।
अगर चेहरा बिना वजह थका, पीला या सूजा हुआ दिखे तो इसे beauty या नींद की समस्या न समझें । यह Fatty Liver की early warning हो सकती है ।

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आयुर्वेद की दृष्टि से हार्मोन संतुलन का विज्ञानहार्मोन शरीर के रासायनिक संदेशवाहक हैं, जो भूख, नींद, तनाव, ऊर्जा, प्रजनन...
28/12/2025

आयुर्वेद की दृष्टि से हार्मोन संतुलन का विज्ञान
हार्मोन शरीर के रासायनिक संदेशवाहक हैं, जो भूख, नींद, तनाव, ऊर्जा, प्रजनन और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं। इनके असंतुलन से थकान, वजन बढ़ना या घटना, चिड़चिड़ापन, अनियमित माहवारी, नींद की कमी और यौन कमजोरी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं ।

आयुर्वेद में हार्मोन का सिद्धांत :* इस विषय में आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी बताते हैं कि आयुर्वेद में “हार्मोन” शब्द सीधे नहीं मिलता, लेकिन दोष, धातु, अग्नि, ओज और स्रोतस के सिद्धांतों के माध्यम से हार्मोन संतुलन को गहराई से समझाया गया है । आयुर्वेद के अनुसार शरीर का हर कार्य प्राकृतिक संतुलन पर आधारित होता है, जिसे आधुनिक विज्ञान हार्मोन सिस्टम के रूप में पहचानता है ।
दोष और हार्मोन :* वात दोष नर्व सिस्टम और हार्मोन सिग्नलिंग से जुड़ा है। असंतुलन से तनाव, अनिद्रा और अनियमित हार्मोन स्राव होता है। पित्त दोष मेटाबॉलिज्म और थायरॉयड जैसी क्रियाओं को नियंत्रित करता है । असंतुलन पर चिड़चिड़ापन और हार्मोन ओवरएक्टिव हो जाते हैं । कफ दोष ग्रोथ हार्मोन, इंसुलिन और प्रजनन हार्मोन से जुड़ा है । असंतुलन से मोटापा और हार्मोन की सुस्ती बढ़ती है । तीनों दोष संतुलित हों तो हार्मोन भी संतुलित रहते हैं ।

धातु और हार्मोन :* धातु हार्मोन के परिवहन से, रक्त धातु उनकी क्रिया से, मांस व मेद धातु इंसुलिन से जुड़ी हैं । शुक्र धातु पुरुष हार्मोन व प्रजनन शक्ति से और आर्तव स्त्री हार्मोन से संबंधित है । शुक्र और आर्तव की कमजोरी हार्मोन असंतुलन का प्रमुख कारण बनती है ।

अग्नि का महत्व :* आयुर्वेद कहता है “अग्नि स्वस्थ तो शरीर स्वस्थ” कमजोर अग्नि से हार्मोन धीमे हो जाते हैं, तीव्र अग्नि से असंतुलन होता है, जबकि सम अग्नि हार्मोन संतुलन बनाए रखती है ।

ओज और हार्मोन शक्ति :* ओज शरीर की जीवन शक्ति है । ओज की कमी से थकान, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और हार्मोन कमजोरी आती है । मजबूत ओज मानसिक शांति और हार्मोन संतुलन प्रदान करता है ।

आयुर्वेदिक उपाय :* अश्वगंधा तनाव और कॉर्टिसोल को संतुलित करती है । शतावरी स्त्री हार्मोन के लिए उपयोगी है। कौंच बीज पुरुष हार्मोन को बढ़ाता है । त्रिफला पाचन और डिटॉक्स में सहायक है । गुडूची हार्मोन और इम्यून संतुलन में लाभकारी मानी गई है ।

आहार व दिनचर्या :* सादा, ताज़ा और सात्विक भोजन करें। घी, दूध, मूंग, चावल, फल और हरी सब्ज़ियाँ लें । अत्यधिक तीखा, तला-भुना, चीनी, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड भोजन से बचें । समय पर सोना जागना, 7–8 घंटे की नींद और तनाव नियंत्रण आवश्यक है ।

योग व प्राणायाम :* अनुलोम विलोम, भ्रामरी, सूर्य नमस्कार, ध्यान और सकारात्मक सोच हार्मोन संतुलन में अत्यंत सहायक हैं ।
वैद्य डॉ. सेठी बताते हैं कि आयुर्वेद हार्मोन को केवल दवा से नहीं, बल्कि संतुलित जीवन शैली से ठीक करता है । संतुलित दोष, सही अग्नि और मजबूत ओज से हार्मोन स्वाभाविक रूप से संतुलित रहते हैं । संतुलित आहार, सही दिनचर्या और शांत मन ही हार्मोन स्वास्थ्य की कुंजी है ।

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डायबिटीज़ आने से पहले शरीर देता है चेतावनीडायबिटीज़ कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर में बढ़ती है औ...
27/12/2025

डायबिटीज़ आने से पहले शरीर देता है चेतावनी
डायबिटीज़ कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर में बढ़ती है और शरीर पहले ही संकेत देने लगता है, लेकिन हम अक्सर उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं ।

शुगर बढ़ने के 9 शुरुआती संकेत इसे अनदेखा न करें
1️⃣ बार-बार प्यास लगना : सामान्य से अधिक प्यास लगना शुगर बढ़ने का शुरुआती संकेत हो सकता है।
2️⃣ बार-बार पेशाब आना : खासतौर पर रात में उठकर पेशाब जाना एक चेतावनी है ।
3️⃣ बिना कारण थकान : कम काम करने पर भी शरीर थका-थका महसूस होना ।
4️⃣ बार-बार भूख लगना : खाने के थोड़ी देर बाद ही फिर भूख लगना।
5️⃣ वजन का धीरे-धीरे कम होना : बिना डाइट या मेहनत के वजन घटने लगे तो सतर्क हो जाएँ ।
6️⃣ आँखों के सामने धुंधलापन : कभी कभी धुंधला दिखाई देना शुगर के उतार-चढ़ाव का संकेत है ।
7️⃣ घाव का देर से भरना : छोटी चोट या कट का देर से ठीक होना इम्युनिटी पर असर दर्शाता है ।
8️⃣ त्वचा में खुजली और रूखापन : खासतौर पर गुप्तांग क्षेत्र में खुजली या अत्यधिक सूखापन ।
9️⃣ हाथ-पैर में झनझनाहट : सुई चुभने जैसी अनुभूति नसों पर शुगर के प्रभाव को दर्शाती है ।

याद रखें :* डायबिटीज़ की शुरुआत चुपचाप होती है । लक्षण हल्के होते हैं लेकिन संकेत स्पष्ट होते हैं । समय रहते जाँच और जीवनशैली में सुधार बहुत ज़रूरी है । यदि ये लक्षण लगातार दिखें तो ब्लड शुगर जाँच अवश्य कराएँ । जानकारी साझा करें, किसी की सेहत बच सकती है ।


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शरीर में गांठ ( लिपोमा ) जानिए बिना सर्जरी गांठ को पिघालने के उपायलिपोमा की गांठ त्वचा की नीचे बढ़ती है और इसे छूने पर दर...
26/12/2025

शरीर में गांठ ( लिपोमा ) जानिए बिना सर्जरी गांठ को पिघालने के उपाय
लिपोमा की गांठ त्वचा की नीचे बढ़ती है और इसे छूने पर दर्द नहीं होता है। कई बार शरीर के किसी भी हिस्से में ऐसी गांठ बन जाती है, जिसमें दर्द नहीं होता है। आमतौर शरीर में त्वचा के नीचे बनने वाली गांठ में दर्द हो सकता है ।
यह ऐसी गांठ होती है, जिसे दबाने से दर्द नहीं होता, यह किसी रबर की तरह महूस होती है और इसे आसानी से हिलाया जा सकता है । मेडिकल भाषा में इस तरह की गांठ को लिपोमा (Lipoma) कहा जाता है । इस तरह की गांठ अक्सर हाथ या पैर में बन सकती है । लिपोमा की गांठ त्वचा की नीचे बढ़ती है और इसे छूने पर दर्द नहीं होता है ।
इस तरह की गांठ किसी स्वास्थ्य समस्या का कारण नहीं बनती है लेकिन सुंदरता को प्रभावित जरूर करती है । जानते हैं कि शरीर में इस तरह की गांठ क्यों बन जाती है, इससे आपको क्या खतरा है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे छुटकारा पा सकते हैं ?

लिपोमा क्या है ?
कई लोगों के हाथ-पैर या शरीर के किसी हिस्से पर एक नरम या कोमल गांठ दिखाई देती है । इसमें दर्द नहीं होता है । लिपोमा एक गोल या अंडाकार गांठ होती है जो त्वचा के ठीक नीचे बढ़ती है । यह फैट से बनी होती और इसे छूने पर आसानी से हिल सकती है ।
आमतौर पर इसमें दर्द नहीं होता है । लिपोमा की गांठ शरीर के किसी भी हिस्से में बन सकती है लेकिन पीठ, धड़, हाथ, कंधे और गर्दन पर सबसे ज्यादा बनती है । वास्तव में यह सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर हैं धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कैंसर का कारण नहीं बनते ।

लिपोमा सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है
एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग हर 1 हजार लोगों में से 1 को लिपोमा होता है । लिपोमा अक्सर 40 और 60 की उम्र के बीच दिखाई देते हैं, लेकिन वे किसी भी उम्र में हो सकते हैं । वे जन्म के समय भी उपस्थित हो सकते हैं । लिपोमा सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन यह महिलाओं में अधिक हैं ।

लिपोमा के लक्षण
बहुत से लोग जिन्हें लिपोमा होता है प्रारंभ में उनको कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है । लिपोमा अपने आसपास के ऊतकों में नहीं फैलते हैं । लिपोमा आमतौर पर दर्दनाक नहीं होते हैं । हालांकि कई मामलों में जब गांठ बड़ी हो जाती है तो किसी नस के दबने पर दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ता है । इनका आकार गोल या अंडाकार होता है ।
इसका आकार धीरे धीरे बड़ा होता जाता है तरह की गांठ का साइज प्रारंभ में 2 इंच से छोटा होता है लेकिन बढ़ते हुए इस तरह की गांठ 6 इंच से अधिक बड़ी हो जाती है ।

लिपोमा की गांठ के कारण
लिपोमा की गांठ किस कारण होती है ? इसके पर्याप्त सबूत नहीं हैं । यह किसी को भी या अनुवांशिक या किसी बीमारी के कारण शरीर पर लिपोमा बन जाते हैं ।
इनमें शामिल हैं डर्कम रोग, गार्डनर सिंड्रोम, जेनेटिक मल्टिपल लिपोमैटोसिस और मैडेलुंग डिजीज जो लिपोमा को बढ़ने का कारण बनते है ।

लिपोमा के लिए प्रचलित उपचार
आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी ने बताया कि
आयुर्वेद के माध्यम से इसका उपचार करके गांठों को गलाया जाता है । डॉक्टर इसे आपरेशन करके आसानी से हटा सकते हैं । घरेलू उपचार में हल्दी का इस्तेमाल खाने एवम लगाने में करना है । हल्दी में उपस्थित यौगिक करक्यूमिन लिपोमा से निपटने में मदद करता है ।
होम्योपैथिक उपचार में थूजा ऑक्सिडेंटलिस का भी इस्तेमाल किया जाता हैं । इसको पानी में मिलाकर गांठों पर हर दिन तीन बार लगाने की जरूरत होती है ।

आयुर्वेदिक में उपयोग की जाने वाली औषधियां
कचनार की छाल, कचनार गूगल, आरोग्यवर्धिनी वटी, वृद्धि वाधिका वटी, कसमर्दा, मेदोहर गुगल, अनंतमूल, धमासा, रुद्रवंती, सरफूंका आदि औषधियों का प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है ।
यह औषधियां और जड़ी बूटीयां प्रभावी है, जिनका प्रयोग बहुत समय से किया जाता रहा है शास्त्रों में इसका विषद उल्लेख है । इन में ऐसे गुण होते हैं, जो फैट को कम करते हैं और लिपोमा को घुलने में मदद करते है ।
इसमें लगाने के लिए विभिन्न लेप और तेल आदि का उपयोग किया जाता है ।
ऐसी ही प्रभावी आयुर्वेदिक औषधियों के मिश्रण से निर्मित की गई लिपोडाइन टैबलेट है LIPODINE TAB जिसके निरंतर प्रयोग से शरीर में होने वाली गाठों के फैट को कम करने, लिपोमा को घुलने, और नए नहीं बनने में मदद करते है

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आयुर्वेद के अनुसार गैस-पाद बढ़ाने वाले प्रमुख 13 आहार (Vata दोष बढ़ाने वाले भोजन)यदि बार-बार गैस, पेट फूलना, पाद, डकार, ...
26/12/2025

आयुर्वेद के अनुसार गैस-पाद बढ़ाने वाले प्रमुख 13 आहार
(Vata दोष बढ़ाने वाले भोजन)
यदि बार-बार गैस, पेट फूलना, पाद, डकार, भारीपन रहता है तो इन आहारों पर ध्यान दें ।
1️⃣ उड़द की दाल – अत्यधिक वातकारक
2️⃣ चना, छोले, राजमा – भारी व गैस बनाने वाले
3️⃣ मटर (हरी/सूखी) – किण्वन बढ़ाती है
4️⃣ कच्चा दूध – पाचन कमजोर करता है
5️⃣ दही (रात में) – गैस व कफ बढ़ाता है
6️⃣ दूध + नमक/फल – विरुद्ध आहार
7️⃣ तले-भुने पदार्थ – जठराग्नि मंद करते हैं
8️⃣ मैदा, ब्रेड, पिज़्ज़ा, बिस्किट – वातकारक
9️⃣ कोल्ड ड्रिंक/सोडा – वात उग्र करता है
🔟 कच्चा प्याज़ – गैस व जलन बढ़ाता है
1️⃣1️⃣ कच्ची गोभी/फूलगोभी – पेट फूलना
1️⃣2️⃣ बासी भोजन – आम (Toxin) बनाता है
1️⃣3️⃣ फल और भोजन साथ में – पाचन बिगाड़ता है

आयुर्वेदिक कारण :* इन आहारों से वात दोष बढ़ता है, जठराग्नि कमजोर होती है और भोजन सही से नहीं पचता, जिससे गैस-पाद व दर्द होता है।

उपयोगी सुझाव :* भोजन गर्म व ताजा लें, अदरक, अजवाइन, सौंफ उपयोग करें, समय पर भोजन करे, रात का भोजन हल्का रखें। यह सामान्य जानकारी है, दीर्घकालीन समस्या में वैद्य/डॉक्टर से सलाह लें ।

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स्पर्श चिकित्सा : बिना दवा, बिना साइड इफेक्टस्पर्श चिकित्सा एक प्राकृतिक शाश्वत उपचार पद्धति है, जिसमें हाथों के स्पर्श,...
26/12/2025

स्पर्श चिकित्सा : बिना दवा, बिना साइड इफेक्ट
स्पर्श चिकित्सा एक प्राकृतिक शाश्वत उपचार पद्धति है, जिसमें हाथों के स्पर्श, ध्यान और चेतना के माध्यम से शरीर की ऊर्जा को संतुलित किया जाता है ।

कैसे काम करती है ?
यह चिकित्सा पंच तत्त्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश को संतुलित कर शरीर की स्व उपचार शक्ति को सक्रिय करती है।
जब शरीर की ऊर्जा रुक जाती है, तभी दर्द और रोग उत्पन्न होते हैं। कोमल स्पर्श और सकारात्मक संकल्प से ऊर्जा पुनः प्रवाहित होने लगती है और शरीर स्वयं ठीक होने लगता है ।

कैसे करें ?
1️⃣ शांत स्थान चुनें जहाँ शोर न हो और मन शांत रह सके ।
2️⃣ आरामदायक स्थिति में बैठें या लेटें
रीढ़ सीधी रखें, शरीर ढीला छोड़ दें।
3️⃣ हथेलियाँ आपस में रगड़ें
जब तक हल्की गर्मी महसूस न हो इससे ऊर्जा सक्रिय होती है।
4️⃣ दर्द या समस्या वाले स्थान पर हल्का स्पर्श करें
दबाव नहीं डालना है, केवल कोमल स्पर्श।
5️⃣ मन में सकारात्मक भावना रखें
जैसे “मेरा शरीर स्वयं स्वस्थ हो रहा है।”
6️⃣ 5–10 मिनट तक करें
गहरी और धीमी साँस लेते रहें । इसे दिन में 1–2 बार किया जा सकता है ।

किसमें लाभकारी ?
घुटनों का दर्द,सर्वाइकल व गर्दन दर्द,कमर व पीठ दर्द,नसों का दर्द,जोड़ों की जकड़न,तनाव व थकान,नींद की समस्या

शरीर स्वयं बनता है अपना चिकित्सक
दवा नहीं, दबाव नहीं, चमत्कार नहीं सिर्फ़ स्पर्श और चेतना की शक्ति । शरीर स्वयं बनता है अपना चिकित्सक.. यही है शाश्वत स्पर्श चिकित्सा यह उपचार डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक पद्धति है।
#स्पर्शचिकित्सा


#शाश्वतचिकित्सा

#पंचतत्त्व

#बिनादवा

सफेद दाग में वर्जित द्विदल / मिक्स भोजन❌ दूध-दही के साथ न लें• दही + बेसन• दही + उड़द दाल• दही + चना / चना दाल• दूध + को...
25/12/2025

सफेद दाग में वर्जित द्विदल / मिक्स भोजन
❌ दूध-दही के साथ न लें
• दही + बेसन
• दही + उड़द दाल
• दही + चना / चना दाल
• दूध + कोई भी दाल
• दूध + नमकीन / तला हुआ
• दूध + खट्टे फल
• दही + फल
• दही + मछली / अंडा

❌ दाल / बेसन के साथ खट्टा नहीं
• बेसन + दही
• दाल + इमली
• दाल + नींबू
• चना / राजमा + ज्यादा टमाटर

❌ फल के साथ विरुद्ध संयोजन
• दूध + केला
• दूध + आम
• दही + केला
• फल + नमक

❌ अन्य विरुद्ध आहार
• मछली + दूध / दही
• शहद + गर्म दूध
• शहद + घी (बराबर मात्रा)
• दाल + दही
• दाल + दूध से बनी मिठाई

⚠️ क्यों परहेज?
ये विरुद्ध आहार पाचन बिगाड़ते हैं, रक्त दोष बढ़ाते हैं और सफेद दाग को बढ़ा सकते हैं।

✅ सुरक्षित तरीका
• दाल व दही अलग समय पर
• दही दिन में, दूध रात में
• फल अकेले खाएँ
• मूंग दाल सबसे सुरक्षित
जानकारी उपयोगी लगे तो शेयर करें
#सफेददाग


#विरुद्धआहार





थायरॉयड संतुलन में हो, तो जीवन संतुलन में !क्या आप जानते हैं ? गले के नीचे स्थित एक छोटी सी थायरॉयड ग्रंथि जिसका वजन 20 ...
25/12/2025

थायरॉयड संतुलन में हो, तो जीवन संतुलन में !
क्या आप जानते हैं ? गले के नीचे स्थित एक छोटी सी थायरॉयड ग्रंथि जिसका वजन 20 से 25 ग्राम होता है, यह पूरे शरीर को नियंत्रित करती है । शरीर का तापमान, वजन, दिल की धड़कन, ऊर्जा, मानसिक स्थिति और मूड सब इसी पर निर्भर हैं । समय पर जाँच, सही जीवनशैली, योग और आयुर्वेद से थायरॉयड प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है ।

थायरॉयड क्या है ?
यह तितली के आकार की ग्रंथि है जो T3 व T4 हार्मोन बनाकर मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करती है।
यानि थायरॉयड सही = शरीर सही

थायरॉयड के मुख्य कार्य :
• भोजन को ऊर्जा में बदलना
• वजन व तापमान संतुलन
• हृदय धड़कन नियंत्रण
• मानसिक एकाग्रता व मूड
• महिलाओं में मासिक धर्म व प्रजनन स्वास्थ्य

थायरॉयड की बीमारियाँ :
1️⃣ हाइपोथायरॉयड : वजन बढ़ना, थकान, ठंड लगना, कब्ज, बाल झड़ना
2️⃣ हाइपरथायरॉयड : वजन घटना, धड़कन तेज, घबराहट, पसीना
3️⃣ घेंघा (Goiter) : आयोडीन की कमी से गले में सूजन

योग व प्राणायाम :
• सर्वांगासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन
• उज्जायी, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम

आहार व घरेलू उपाय :
• सुबह 1 चम्मच वर्जिन नारियल तेल
• धनिया बीज का पानी
• अंकुरित दालें, तिल, अलसी
• कच्ची पत्ता गोभी/ब्रोकली से परहेज़

आयुर्वेदिक औषधियाँ :
आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेन्द्र सेठी ने बताया कि थायराइड के लिए वैद्य परामर्श से निम्न औषधीय ली जा सकती है ।
• कांचनार गुग्गुल
• त्रिफला चूर्ण
• अश्वगंधा
• पुनर्नवा मंडूर
• ब्राह्मी
• शंखपुष्पी
• थायरोनिड टैब
• थायरोनिड सिरप

महत्वपूर्ण तथ्य :
• महिलाओं में समस्या 6–8 गुना अधिक
• डिप्रेशन का कारण भी हो सकता है
• गर्भावस्था में नियंत्रण बहुत जरूरी है।












देह के भीतर बैठा परम चिकित्सककोल्ड-फ्लू होते ही कफ बनता है, गला सूजता है और ज्वर आता है । यह बीमारी नहीं, शरीर की स्वाभा...
23/12/2025

देह के भीतर बैठा परम चिकित्सक
कोल्ड-फ्लू होते ही कफ बनता है, गला सूजता है और ज्वर आता है । यह बीमारी नहीं, शरीर की स्वाभाविक प्रतिरक्षा प्रक्रिया है ।
कहीं चोट लगते ही गुमड़ा बन जाता है, हजारों कोशिकाएँ तुरंत मरम्मत में लग जाती हैं । घाव सूखता है, पपड़ी बनती है और कुछ दिनों में नई त्वचा उभर आती है । हमारे भीतर एक अत्यंत दक्ष और सजग चिकित्सक निरंतर कार्यरत है । उसकी भाषा शब्दों की नहीं, संकेतों की है ।
❤️ थकान :विश्राम का संकेत है ।
❤️ भूख कम :अल्प-आहार का संकेत है ।
❤️ ठंड : ऊष्मा देने का संकेत है ।
वह बताता है कब क्या खाना है, कितना व्यायाम, कितनी ऑक्सीजन और धूप चाहिए।
चाहे हृदय हो या मस्तिष्क, आंत हो या सिस्ट सबसे काबिल डॉक्टर हमारा शरीर स्वयं है । वायरस या संक्रमण आते ही शरीर भीतर ही युद्ध शुरू कर देता है ।
हमें तब पता चलता है जब ज्वर, कफ, सर्दी, कमजोरी बाहर दिखती है । देह की भाषा समझ लें, तो रोग आरंभ में ही नष्ट हो सकता है ।
हर जटिल रोग का समाधान शरीर में मौजूद है । उसे बस सहयोग चाहिए अच्छी ऑक्सीजन, पर्याप्त जल, पथ्य विवेक और प्रसन्न चित्त । इतना मिल जाए तो बड़े से बड़ा रोग भी हार सकता है।
❤️ देह की दो अपेक्षाएँ हैं : देह में अपशिष्ट न जमा हों और हों तो निकलें । मन में भी टॉक्सिन न रखें, द्वेष, कुंठा, शोक, बदला। क्योंकि पहले विचार बीमार होता है, फिर शरीर।
जल्दबाज़ी में जीना, जल्दबाज़ी में खाना । अनचबा भोजन, पेट, आंत और लीवर की बीमारी । बीमार ढंग से जीना बीमारी लाता है, सजग जीना स्वास्थ्य ।
सजगता केवल खान-पान नहीं, धन, लालसा, दिखावा, कामना और संग्रह हवस के प्रति भी है ।
❤️ मन में गांठ तो शरीर में गांठ दूर नहीं विचारों की जकड़न तो जोड़ों की जकड़न । देह-मन की सफाई ही सच्चा उपचार है । बाहरी चिकित्सा कितनी भी उन्नत हो, भीतर बैठे परम चिकित्सक के सामने अभी भी विद्यार्थी है ।
#स्वउपचार




#देहऔरमन

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🫀 सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ जाता है ?सर्दी में खून गाढ़ा हो जाता है, नसें सिकुड़ जाती हैं और दिल पर ज़्य...
23/12/2025

🫀 सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ जाता है ?
सर्दी में खून गाढ़ा हो जाता है, नसें सिकुड़ जाती हैं और दिल पर ज़्यादा दबाव पड़ता है । सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब रात या सुबह नींद से अचानक उठकर पेशाब के लिए सीधे खड़े हो जाते हैं । इससे ब्लड प्रेशर अचानक गिरता है, दिमाग तक खून नहीं पहुँचता और हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है ।
❤️ जान बचाने का साढ़े तीन मिनट का गोल्डन रूल ❤️
नींद से उठते ही सीधे खड़े न हों
1️⃣ 30 सेकंड बेड पर लेटे रहें
2️⃣ 30 सेकंड धीरे बैठें
3️⃣ 2.5 मिनट पैर नीचे लटकाकर बैठें

बस इतनी सावधानी से ब्लड सर्कुलेशन बैलेंस रहता है और दिल सुरक्षित रहता है । ये छोटी-सी आदत बड़ी जान बचा सकती है । कृपया यह मैसेज अपने शुभ चिंतको परिचितों, और परिजनों को जरूर भेजें ।आपका एक शेयर एक ज़िंदगी बचा सकता है ।
यह जानकारी जागरूकता हेतु है । कोई परेशानी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें ।

श्वांस रोग में धुएँ द्वारा धूमकल्प चिकित्साआयुर्वेद में श्वांस (दमा) रोग के उपचार का उल्लेख बहुत प्राचीन है । महर्षि सुश...
20/12/2025

श्वांस रोग में धुएँ द्वारा धूमकल्प चिकित्सा
आयुर्वेद में श्वांस (दमा) रोग के उपचार का उल्लेख बहुत प्राचीन है । महर्षि सुश्रुत को श्वांस रोग में धुएँ द्वारा उपचार (धूमकल्प चिकित्सा) का प्रवर्तक माना जाता है, जिसे आज के इन्हेलर की प्रारंभिक अवधारणा कहा जा सकता है ।
इस विधि में धतूरा पत्र, भीमसेनी कपूर, विजया और वासा पत्र का चूर्ण बनाकर चिलम में भरा जाता था और उसका धुआँ लिया जाता था ।
इससे दमे के दौरे में तुरंत आराम मिलता था और श्वास नलिकाएँ खुलती थीं । यह उपचार केवल वैद्य की देखरेख में ही बताया गया है ।

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