16/10/2025
पत्नी के ताने-पति को पल पल कैसे मारते हैं?
(समस्या समाधान)
पत्नी के ताने जब रोज-रोज दिल में उतरने लगें, तो सिर्फ प्यार नहीं मरता, साथ में पति का आत्मविश्वास, यौन इच्छा और जीने की उमंग भी मरने लगती हैं!
समस्या:
''ताऊजी जोहार। मेरी उम्र 55 वर्ष है। मैं काम की अनेकों प्रकार की उलझनों और तनावों को झेलकर शांति की उम्मीद में शाम को घर लौटता हूं और सोचता हूं कि आज पत्नी के साथ प्रेमपूर्ण संभोग करूंगा, लेकिन जैसे ही घर पहूंचता हूं तो पत्नी अपनी समस्याओं का पितारा खोल देती है। जिनमें उसे अपनी बहू और मेरे माता-पिता से अनेकों प्रकार की शिकायतें होती हैं। जिनके लिए वो मुझे खूब सुनाती है। मैं पहले से ही परेशान हालत में होने के कारण चुप रहता हूं तो मेरी चुप्पी को पत्नी, बहू एवं मेरे माता पिता को मेरा समर्थन मानकर मुंह फुला लेती है। बड़बड़ाने लगती है कि मेरी तो घर में कोई इज्जत ही नहीं है। मेरी तो कोई सुनता ही नहीं है। ऐसी ही अनेकों बातों को दोहराती रहती है। इस सब से मेरा मूड खराब हो जाता है। सारी भूख प्यास उड़ जाती है। कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता। जैसे तैसे कुछ खाकर पेट भरता हूं। जिससे मेरा स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। मेरा पेट खराब रहने लगा है। जीवन में उत्साह तो खत्म ही हो गया है। ऐसा आए दिन होता रहता है। किसी न किसी बात पर पत्नी का मुंह फूला रहता है। वो मुझ से सीधे मुंह बात ही नहीं करती। इससे मेरा मूड खराब हो जाता है। ऐसे में सेक्स करना तो दूर सेक्स करने का मन ही नहीं करता है। बहुत दुखी और परेशान हो जाता हूं। सबसे दुखद तो ये कि इन हालातों में जब एक दो सप्ताह तक सेक्स नहीं कर पाता हूं तो इसी बात को लेकर पत्नी मुंह फुला लेती है और बोलती है पता नहीं किससे चक्कर चल रहा है, मेरी ओर तो देखते भी नहीं। ताऊ जी मैं बहुत दुखी हूं। अब तो ऐसा लगता है जैसे मेरी सेक्स की इच्छा ही मर गई है। अब आप ही मुझे और मेरी सेक्स लाइफ को बचा सकते हैं। मेरा मार्गदर्शन करें।''
आदिवासी ताऊ का समाधान:
पति-पत्नी के बीच जब संवाद टूटने लगता है और भावनाएँ एक-दूसरे तक नहीं पहुँच पाती, तो शरीर में तनाव का रासायनिक असर शुरू हो जाता है। हर बार जब झगड़ा, ताना या मानसिक दबाव बढ़ता है, तब मस्तिष्क से Cortisol (कॉर्टिसोल-तनाव हार्मोन) और Prolactin (प्रोलैक्टिन-यौन इच्छा घटाने वाला हार्मोन) अधिक मात्रा में निकलते हैं। साथ ही Dopamine (डोपामिन-आनंद और प्रेरणा देने वाला रसायन) तथा Testosterone (टेस्टोस्टेरोन-पुरुष ऊर्जा हार्मोन) घट जाते हैं।
यह असंतुलन मन और शरीर दोनों पर असर डालता है-व्यक्ति को थकान, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, यौन-अनिच्छा, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक शून्यता महसूस होती है।
जब यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो धीरे-धीरे रक्त-चाप असंतुलित होता है, हृदय की धड़कनें अनियमित होने लगती हैं, और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदयाघात (Heart Attack), लकवा (Stroke), मस्तिष्क रक्तस्राव (Brain Hemorrhage), मधुमेह (Diabetes), नामर्दी (Impotence), स्मृतिह्रास (Memory Loss) तथा हिस्टीरिया (Hysteria) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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पत्नी के ताने-पति को पल पल कैसे मारते हैं? समस्या समाधान
पत्नी के ताने जब रोज-रोज दिल में उतरने लगें, तो सिर्फ प्यार नहीं मरता, साथ में पति का आत्मविश्वास, यौन इच्छा और जीने की उमंग भी मरने लगती हैं!
समस्या:
''ताऊजी जोहार। मेरी उम्र 55 वर्ष है। मैं काम की अनेकों प्रकार की उलझनों और तनावों को झेलकर शांति की उम्मीद में शाम को घर लौटता हूं और सोचता हूं कि आज पत्नी के साथ प्रेमपूर्ण संभोग करूंगा, लेकिन जैसे ही घर पहूंचता हूं तो पत्नी अपनी समस्याओं का पितारा खोल देती है। जिनमें उसे अपनी बहू और मेरे माता-पिता से अनेकों प्रकार की शिकायतें होती हैं। जिनके लिए वो मुझे खूब सुनाती है। मैं पहले से ही परेशान हालत में होने के कारण चुप रहता हूं तो मेरी चुप्पी को पत्नी, बहू एवं मेरे माता पिता को मेरा समर्थन मानकर मुंह फुला लेती है। बड़बड़ाने लगती है कि मेरी तो घर में कोई इज्जत ही नहीं है। मेरी तो कोई सुनता ही नहीं है। ऐसी ही अनेकों बातों को दोहराती रहती है। इस सब से मेरा मूड खराब हो जाता है। सारी भूख प्यास उड़ जाती है। कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता। जैसे तैसे कुछ खाकर पेट भरता हूं। जिससे मेरा स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। मेरा पेट खराब रहने लगा है। जीवन में उत्साह तो खत्म ही हो गया है। ऐसा आए दिन होता रहता है। किसी न किसी बात पर पत्नी का मुंह फूला रहता है। वो मुझ से सीधे मुंह बात ही नहीं करती। इससे मेरा मूड खराब हो जाता है। ऐसे में सेक्स करना तो दूर सेक्स करने का मन ही नहीं करता है। बहुत दुखी और परेशान हो जाता हूं। सबसे दुखद तो ये कि इन हालातों में जब एक दो सप्ताह तक सेक्स नहीं कर पाता हूं तो इसी बात को लेकर पत्नी मुंह फुला लेती है और बोलती है पता नहीं किससे चक्कर चल रहा है, मेरी ओर तो देखते भी नहीं। ताऊ जी मैं बहुत दुखी हूं। अब तो ऐसा लगता है जैसे मेरी सेक्स की इच्छा ही मर गई है। अब आप ही मुझे और मेरी सेक्स लाइफ को बचा सकते हैं। मेरा मार्गदर्शन करें।''
आदिवासी ताऊ का समाधान:
पति-पत्नी के बीच जब संवाद टूटने लगता है और भावनाएँ एक-दूसरे तक नहीं पहुँच पाती, तो शरीर में तनाव का रासायनिक असर शुरू हो जाता है। हर बार जब झगड़ा, ताना या मानसिक दबाव बढ़ता है, तब मस्तिष्क से Cortisol (कॉर्टिसोल-तनाव हार्मोन) और Prolactin (प्रोलैक्टिन-यौन इच्छा घटाने वाला हार्मोन) अधिक मात्रा में निकलते हैं। साथ ही Dopamine (डोपामिन-आनंद और प्रेरणा देने वाला रसायन) तथा Testosterone (टेस्टोस्टेरोन-पुरुष ऊर्जा हार्मोन) घट जाते हैं।
यह असंतुलन मन और शरीर दोनों पर असर डालता है-व्यक्ति को थकान, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, यौन-अनिच्छा, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक शून्यता महसूस होती है।
जब यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो धीरे-धीरे रक्त-चाप असंतुलित होता है, हृदय की धड़कनें अनियमित होने लगती हैं, और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदयाघात (Heart Attack), लकवा (Stroke), मस्तिष्क रक्तस्राव (Brain Hemorrhage), मधुमेह (Diabetes), नामर्दी (Impotence), स्मृतिह्रास (Memory Loss) तथा हिस्टीरिया (Hysteria) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए पहला उपचार है-संवाद और संयम।
पत्नी से बातचीत हमेशा तब करें-जब दोनों का मूड शांत हो। आरोप-प्रत्यारोप की बजाय एक-दूसरे की भावनाएँ सुनें। हल्का टहलना, सुबह-शाम ध्यान या प्राणायाम और सोने-जागने का नियमित समय शरीर में Dopamine (डोपामिन-आनंद और प्रेरणा देने वाला रसायन) की मात्रा बढ़ाकर मूड और इच्छा दोनों को सुधारता है।
रात में मोबाइल, टीवी और नकारात्मक बातचीत से दूरी रखें। मन को शांत करने के लिए दिन में कम-से-कम दस मिनट गहरी साँस पर ध्यान केंद्रित करें।
तनाव और हार्मोनल असंतुलन को सुधारने में कुछ प्रमुख जड़ी-बूटियाँ अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई हैं। जिनमें कुछ प्रमुख हैं-
1. अश्वगंधा (Withania somnifera) में पाए जाने वाले Withanolides (विथानोलाइड्स-तनाव नियंत्रक यौगिक) Cortisol को घटाते हैं और Testosterone को बढ़ाकर यौन-ऊर्जा व आत्मविश्वास को पुनः सक्रिय करते हैं।
2. शतावरी (Asparagus racemosus) में उपस्थित Saponins (सैपोनिन्स-हार्मोन स्थिरकारी तत्व) भावनात्मक स्थिरता बढ़ाते हैं और नपुंसकता या कमजोरी की स्थिति को रोकते हैं।
3. मालकांगनी (Celastrus paniculatus) का तेल तंत्रिका शिथिलता को दूर कर स्मृति और मनोबल दोनों को सुधारता है।
इन सबका सम्मिलित प्रभाव तनाव को कम, रक्त परिसंचरण को बेहतर और मन को संतुलित रखता है।
यदि मानसिक बेचैनी, निराशा या संवादहीनता गहराई पर हो, तो होम्योपैथिक औषधियाँ प्रभावी रहती हैं। जिनमें कुछ प्रमुख हैं-
1. Ignatia amara तब दी जाती है जब मन आघात या भावनात्मक झटके से व्यथित हो;
2. Natrum muriaticum उन लोगों के लिए उपयोगी है जो भीतर-ही-भीतर दुख दबाकर रखते हैं;
3. Lycopodium clavatum आत्मविश्वास और यौन-इच्छा को पुनः जगाने में सहायक है।
इसके साथ Bach Flower Remedies में Holly (ईर्ष्या और क्रोध कम करने हेतु), Willow (कटुता दूर करने हेतु) और Hornbeam (मानसिक थकान मिटाने हेतु) बहुत कारगर हैं।
सेवन एवं उपयोग विधि:
हर व्यक्ति का शरीर, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए खुराक, शक्ति यानी पोटेंसी और सेवन अवधि तय करने से पहले उपचारक को मरीज की केस हिस्ट्री (Case History) की जानकारी आवश्यक होती है। अतः आप इसके लिए किसी अनुभवी उपचारक और काउंसलर से सम्पर्क करें।
यदि उपलब्ध हो सके तो अश्वगंधा या शतावरी का आदिवासी पारंपरिक भापक यंत्र से तैयार जैविक अर्क भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसमें volatile oils (वाष्पशील तेल) और जल-घुलनशील औषधीय घटक दोनों एक साथ बने रहते हैं, जो शरीर में शीघ्र अवशोषित होकर संतुलन लाते हैं। एक साथ ये दोनों घटक बाजारू अर्क में नहीं होते हैं।
आपको जो सुझाई गई दवाइयों का सेवन करने से पहले बेहतर होगा कि आप व्यक्तिगत रूप से किसी उपचारक की सलाह अवश्य लें।
उक्त जवाब के बारे में कोई पूरक सवाल नहीं पूछें, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
आपको स्वस्थ और सुखी जीवन की अनंत शुभकामनाएं।
जोहार यानी हम सबकी रक्षक प्रकृति की जय हो!
-Adiwasi Tau डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा, (15.10.2025, बुधवार)
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