31/10/2018
दीपावली पर्व मनाने के संदर्भ में .......
1/-इस दिन भगवान श्री राम लंका विजयी होकर अयोध्या लोटे थे,व उनके राज्याभिषेक की खुशी मे दीपोत्सव मनाया गया था,
2/-कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्री कृष्ण सर्वप्रथम ग्वाल बालो के संग वन में गाये चराने गए थे। सांयकाल उनकी वापसी पर गोकुलवासियों ने घर-घर दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
3/-ऋषि उद्धालक के पुत्र नचिकेता जन्म मरण का रहस्य जानने के लिए यम के पास गए तब यमराज ने उनकी कई प्रकार से परीक्षा ली थी। नचिकेता परीक्षा में सफल रहे और यम ने प्रसन्न होकर उन्हें मृत्यु पर विजय का ज्ञान दिया। नचिकेता कि पुन: पृथ्वी पर वापसी पर पृथ्वीवासियो ने घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया। कहा जाता है कि आर्यावर्त की यह पहली दीपावली थी।
4/- बौद्ध धर्म के प्रवर्त्तक गौतम बुद्ध जब 17 वर्ष बाद अनुयायियो के साथ अपने गृह नगर कपिलवस्तु लौटे तो उनके स्वागत में लाखो दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। साथ ही महात्मा बुद्ध ने अपने प्रथम प्रवचन के दौरान 'क्वअप्पो दीपोभव' का उपदेश देकर दीपावली को नया आयाम प्रदान किया था।
5/- सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दीपावली के ही दिन हुआ था।
सम्राट अशोक ने दिग्विजयी अभियान इसी दिन प्रारम्भ किया था। इसी ख़ुशी में दीपदान किया गया था।
6. जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी ने भी दीपावली के दिन निर्वाण प्राप्त किया था। 7. आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन सन् 1883 अजमेर में अपने प्राण त्यागे थे। आर्य समाज में इस दिन का महत्त्व है।
8. महाराज धर्मराज युधिष्ठर ने इसी दिन राजसुई यज्ञ किया था। दीप जलाकर खुशियां मनाई थी।
9. अमृतसर के प्रख्यात स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के दिन ही प्रारम्भ हुआ था। 10. इस प्रकार अनेकानेक संदर्भो में दीपावली (दीपोत्सव) जुड़ा हुआ है। ऋतु विज्ञान की दॄष्टि से यह पर्व दो ऋतुओ में संधिकाल में मनाया जाता है। यह पर्व यह संकेत देता है कि अब शीतकाल आ रहा है और उसके अनुरूप हमें अपनी दिनचर्या करनी है। वास्तव में यह पर्व सर्वजनहिताय सामाजिक चेतना का मूर्त्तरूप है।
11. यह पर्व कृषि विज्ञानं के सिद्धांतो पर भी आधारित है। जिस समय यह पर्व मनाया जाता है, उस समय खरीफ की फसल किसानो को प्राप्त हो जाती है। मानव अनाज विक्रय कर धन प्राप्त करता है। श्रम से प्राप्त प्रसन्नता दीपोत्सव के रूप में प्रकट होती है। यह पर्व नव सस्येष्टि के रूप में भी जाना जाता है।
12. पर्यावरण कि दॄष्टि से भी यह पर्व समस्त वायुमंडल को रोगाणु रहित बनता है। वर्षा ऋतु से व्याप्त अनेकानेक विषाणु, मच्छरादि उत्पन्न हो जाते है। उस पर्व के आगमन के पूर्व सभी लोग अपने घर की सफाई तथा रंग रोगन करते है, इससे विषैले जीव जंतु नष्ट हो जाते है। दीपावली पर पटाखो से उत्पन्न ऊष्मा व दुर्गन्ध जिवाणुओं/मच्छरो को नष्ट कर देती है। इस प्रकार वर्षा ऋतु का प्रदूषण भी समाप्त हो जाता है।
भव्यशक्ति प्रसन्न