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06/10/2022

The WHO has issued an alert over four cough and cold syrups made by Maiden Pharmaceuticals in India, warning they could be linked to the deaths of 66 children in The Gambia

चेतावनी - भारत की कंपनी के बच्चों की खांसी के इलाज के लिए बनाए चार सीरप हो सकते हैं गांबिया में बच्चों की मौत के ज़िम्मे...
06/10/2022

चेतावनी - भारत की कंपनी के बच्चों की खांसी के इलाज के लिए बनाए चार सीरप हो सकते हैं गांबिया में बच्चों की मौत के ज़िम्मेदार, तुरंत बंद करें इस्तेमाल।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) ने हाल में अफ्रीकी देश गांबिया में हुई दर्जनों मौतों का ज़िम्मेदार एक भारतीय कंपनी के खांसी के उपचार के लिए बनाए चार सीरपों को बताया है।

कहा है कि दिल्ली की मेडेन फ़ार्मा के इन चारों सीरपों में डाईएथेलीन ग्लाइकोल और एथेलीन ग्लाइकोल की मात्रा भयानक स्तर पर ज़्यादा है, और ये दोनों किडनी को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं!

इन चारों सीरपों के नाम हैं- प्रोमीथज़ीन ओरल सलूशन (Promethazine Oral Solution)
कोफ़ेक्समलिन बेबी कॉफ़ सीरप ( Kofexmalin Baby Cough Syrup)
मकाओफ़्फ़ बेबी कॉफ़ सीरप ( Makoff Baby Cough Syrup)
मैग्रिप एन कोल्ड सीरप (Magrip N Cold Syrup)

डबल्यूएचओ ने इन चारों का प्रयोग तुरंत बंद करने की अड्वाइज़री भी जारी की है।

कृपया ये सूचना सभी मित्रों तक पहुँचाएँ क्योंकि भारत सरकार ने अभी तक ये ऐडवाइज़री अपने स्तर पर जारी नहीं की है!
साभार : समर अनार्य

The WHO has issued an alert over four cough and cold syrups made by Maiden Pharmaceuticals in India, warning they could be linked to the deaths of 66 children in The Gambia

05/10/2022
09/01/2021
05/01/2021

आम आदमी को करना होगा इंतजार?

Shiv Pharmacy Jhansi....Dispensing happiness RBC Red सिरप Rs125 अब मात्र Rs95 में...B Complex ताकत का सिरप Rs95 अब मात्र...
18/08/2017

Shiv Pharmacy Jhansi....
Dispensing happiness

RBC Red सिरप Rs125 अब मात्र Rs95 में...
B Complex ताकत का सिरप Rs95 अब मात्रा Rs85 में...
खांसी के सिरप Rs35 और Rs70 में उपलब्ध।

Increase Blood, fortify RBC, cures Anaemia..Only at Rs95.
10/07/2017

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Only at Rs95.

Shiv Pharmacy is completing Two years.Its was great pleasure to dispensing happiness for you.We are committed to give be...
06/07/2017

Shiv Pharmacy is completing Two years.
Its was great pleasure to dispensing happiness for you.
We are committed to give best services for your healthcare and happiness.
Aur new timings are 10:00AM to 10:30PM.

10/06/2017

स्वस्थ जीवन ही सफलता जीवन की कुंजी है

किसी भी व्यक्ति को अगर किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करनी तो इसके लिए सबसे पहले उसके शरीर का स्वस्थ होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि जब तक स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तब तक सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती है। जिस मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा होता है उस मनुष्य का मस्तिष्क, सोचने-समझने की क्षमता तथा कार्य के प्रति निष्ठा सही होती है और तभी वह मनुष्य किसी भी कार्य को करने में सफलता प्राप्त कर पाता है। इसलिए स्वस्थ जीवन ही सफलता प्राप्त करने की कुंजी है।
स्वस्थ जीवन के लिए कुछ उपयोगी बातें इस प्रकार हैं-
पानी :-
· सभी व्यक्तियों को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन सुबह के समय में बिस्तर से उठकर कुछ समय के लिए पालथी मारकर बैठना चाहिए और कम से कम 1 से 3 गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए या फिर ठंडा पानी पीना चाहिए।
· स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक व्यक्तियों को प्रतिदिन कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए।
महत्वपूर्ण क्रिया :-
· सभी व्यक्तियों को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन दिन में 2 बार मल त्याग करना चाहिए।
· सांसे लंबी-लंबी और गहरी लेनी चाहिए तथा चलते या बैठते और खड़े रहते समय अपनी कमर को सीधा रखना चाहिए।
· दिन में समय में कम से कम 2 बार ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।
· दिन में कम से कम 2 बार भगवान का स्मरण तथा ध्यान करें, एक बार सूर्य उदय होने से पहले तथा एक बार रात को सोते समय।
विश्राम :-
· सभी मनुष्यों को भोजन करने के बाद मूत्र-त्याग जरूर करना चाहिए।
· प्रतिदिन दिन में कम से कम 1-2 बार 5 से 15 मिनट तक वज्रासन की मुद्रा करने से स्वास्थ्य सही रहता है।
· सोने के लिए सख्त या मध्यम स्तर के बिस्तर का उपयोग करना चाहिए तथा सिर के नीचे पतला तकिया लेकर सोना चाहिए।
· सोते समय सारी चिंताओं को भूल जाना चाहिए तथा गहरी नींद में सोना चाहिए और शरीर को ढीला छोड़कर सोना चाहिए।
· पीठ के बल या दाहिनी ओर करवट लेकर सोना चाहिए।
· सभी मनुष्यों को भोजन और सोने के समय में कम से कम 3 घण्टे का अन्तर रखना चाहिए।
व्यायाम :-
· सभी व्यक्तियों को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन सुबह के समय में आधे घण्टे तक व्यायाम करना चाहिए तथा सैर या जॉगिंग करनी चाहिए।
· सभी व्यक्तियों को आसन, सूर्य-नमस्कार, बागवानी, तैराकी, व्यायाम तथा खेल आदि क्रियाएं करनी चाहिए, जिनके फलस्वरूप स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है।
· भोजन करने के बाद कम से कम 20 मिनट तक टहलना चाहिए जिसके फलस्वरूप स्वास्थ्य सही रहता है। excersie
भोजन :-
· कभी भी भूख से ज्यादा भोजन नहीं करना चाहिए तथा जितना आवश्यक हो उतना ही भोजन करना चाहिए।
· भोजन को अच्छी तरह से चबाकर तथा धीरे-धीरे और शांतिपूर्वक खाना चाहिए।
· दिन में केवल 2 बार ही भोजन करना चाहिए।
· सुबह के समय में कम से कम 8-10 बजे के बीच में भोजन करना चाहिए तथा शाम के समय में 5-7 बजे के बीच में भोजन कर लेना चाहिए। ऐसा करने से स्वास्थ्य हमेशा सही रहता है।
· भोजन में बीज या खाद्यान्न उपयोग करने से पहले उसे रात भर पानी में भिगोकर रखना चाहिए। इसके बाद अगले दिन उनका उपयोग भोजन में करना चाहिए।
· भोजन के एक भाग में अनाज तथा दूसरे भाग में सब्जियां होनी चाहिए।
· ज्यादा पके हुए तथा ज्यादा कच्चे अन्न पदार्थों का भोजन नहीं करना चाहिए।
· भोजन में वसायुक्त शुद्ध तेलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे- तिल का तेल या सूरजमुखी का तेल आदि।
· भोजन में कच्चे पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए जैसे- अंकुरित चीजें, ताजी और पत्तेदार हरी सब्जियां, सलाद, फलों का रस, नींबू तथा शहद मिला हुआ पानी, मौसम के अनुसार फल आदि।
· दूध की जगह छाछ या दही का अधिक उपयोग करना चाहिए।
· पका हुआ भोजन करने के लिए चोकर सहित आटे की रोटी, दलिए तथा बिना पॉलिश किए हुए चावल का उपयोग करना चाहिए।
· सप्ताह में कम से कम 1 बार फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए।
· स्वस्थ रहने के लिए जैसे ही बीमार पड़े तुरंत ही प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करना चाहिए।
कम उपयोग करने वाली चीजें :-
· मिर्च-मसाले, दालें, घी, आइसक्रीम, क्रीम, नमक, मिठाईयां, गिरीदार चीजें तथा पकाई हुई चीजों का भोजन में बहुत ही कम उपयोग करना चाहिए।
· अधिक वजन उठाने का कार्य नहीं करना चाहिए।
· बहुत ज्यादा कठिन व्यायाम नहीं करना चाहिए।
· ऊंची एड़ी के जूते नहीं पहनने चाहिए।
· टी.वी. तथा फिल्में आदि ज्यादा नहीं देखनी चाहिए।
इन पदार्थों के सेवन से बचें :-
· चाय, कॉफी, शराब, नशीली दवाईयां, धूम्रपान, सॉफ्ट ड्रिंक, तम्बाकू, पान, जर्दा तथा अन्य दूषित पदार्थ जिनसे शरीर को हानि होती हो, का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन पदार्थों से शरीर का स्वास्थ्य केवल बेकार होता है सही कभी भी नहीं होता है।
· चीनी, मैदा तथा पॉलिश किये हुए चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए।
· दूषित भोजन का सेवन न करें क्योंकि इसके सेवन से कई प्रकार के रोग हो सकते हैं और शरीर का स्वास्थ्य गिर सकता है।
· रंगदार भोजन, फ्लेवर्ड, सिन्थेटिक, कृत्रिम खाद्य पदार्थ, डिब्बाबंद, ड्राइड तथा मिलावटी चीजों का सेवन न करें।
· रिफाइंड तेलों का कम उपयोग करना चाहिए।
· गैर-प्राकृतिक भोजन तथा पेय पदार्थों का उपयोग कम से कम करना चाहिए।
· भूख न होने पर भोजन नहीं करना चाहिए।
· ज्यादा चिंता नहीं करना चाहिए तथा किसी से नहीं डरना चाहिए।
· ज्यादा गर्म तथा ज्यादा ठंडी चीजों का भोजन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
· वायु, जल तथा शोर वाले प्रदूषणों से बचना चाहिए।
· हानिकारक प्रसाधन सामग्री व वस्त्र, औषधियुक्त साबुन व क्रीम का उपयोग नहीं करना चाहिए।
· भोजन करने के समय में बीच-बीच में पानी नहीं पीना चाहिए।
· भोजन करने के कम से कम 1 घण्टे के बाद ही पानी पीना चाहिए।
· रात के समय में देर से भोजन नहीं करना चाहिए।
· भारी तथा ठोस भोजन नहीं करना चाहिए।
· रात के समय में देर से नहीं सोना चाहिए।
अभ्यास :-
· अपनी आंखों को स्वस्थ बनाये रखने के लिए प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में त्रिफला के पानी से आंखों को धोना चाहिए।
· दिन में 1 बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करने चाहिए, इसके फलस्वरूप स्वास्थ्य सही बना रहता है।
· यदि कब्ज की शिकायत हो तो कुछ दिनों तक लगातार गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए और पेट को साफ करना चाहिए।
· स्वस्थ रहने के लिए सप्ताह में कम से कम 1 बार वमन धौति क्रिया (कुंजल या वमन) करनी चाहिए।
· सप्ताह में कम से कम 1 बार शरीर की मालिश करनी चाहिए तथा धूप-स्नान करना चाहिए, जिसके फलस्वरूप शरीर का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
· प्रतिदिन सुबह के समय में अपने तालू पर अच्छी तरह मालिश करनी चाहिए।
· हर समय खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए तथा सभी व्यक्तियों से हंसना-बोलना चाहिए।
· प्रतिदिन 2 बार माथे या आंखों पर पानी के छींटे मारने चाहिए तथा मुंह पर पानी मारना चाहिए जिसके फलस्वरूप स्वास्थ्य सही रहता है।
कुछ सावधानियां :-
· फलों और सब्जियों को खाने से पहले अच्छी तरह से धो लेना चाहिए तथा जो फल छीलकर खाने वाले हो उसे छीलकर ही खाने चाहिए।
· किसी भी सब्जी तथा फलों को काटने से पहले अच्छी तरह से धो लेना चाहिए क्योंकि इन पर कीटनाशी तथा अन्य दूषित तत्व जमे होते हैं।
· टी.वी. तथा पिक्चर आदि देखने के लिए उचित दूरी पर बैठकर देखें क्योंकि इससे आंखे खराब हो सकती हैं।
याद रखने लायक कुछ बातें :-
· औषधियां बीमारियों से ज्यादा खतरनाक होती हैं इसलिए औषधियों का उपयोग ज्यादा नहीं करना चाहिए।
· स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त जगह, शुद्ध वायु, शुद्ध जल, धूप, व्यायाम तथा शारीरिक क्रिया करना बहुत ही आवश्यक हैं तथा इसके बाद उचित भोजन का करना आवश्यक है।
· भोजन, नींद, व्यायाम तथा विश्राम सम्बंधी नियमों का पालन करना चाहिए तभी स्वास्थ्य ठीक प्रकार से बना रह सकता है।
· किसी भी बीमार व्यक्ति के लिए जल औषधि तथा आहार दवा के सामान होता है अत: किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए इनका उपयोग अधिक करना चाहिए।
· किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए उपवास चिकित्सा का महत्वपूर्ण अंग है इसके द्वारा कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
· किसी भी व्यक्ति को कोई भी कार्य करने के लिए जल्दबाजी नहीं करना चाहिए।
· स्वस्थ रहने के लिए चिंता-फिक्र का त्याग कर देना चाहिए।
· तेज मसालेदार तथा चिकनाईयुक्त सब्जियां व्यक्ति को बीमार कर देती हैं इसलिए इन चीजों का बहुत ही कम उपयोग करना चाहिए।
अच्छा स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए कुछ आवश्यक बातों पर नजर :-
· सभी प्रकार के रोगों को ठीक करने की शक्ति शरीर में ही मौजूद होती है।
· थकान, बीमारी, दर्द होने पर तथा तनाव की स्थिति या फिर जल्दबाजी में भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
· किसी भी रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा का सहारा लेना चाहिए, क्योंकि यह चिकित्सा सर्वाधिक सुरक्षित और स्थायी होती है।
· भोजन करने से आधा घण्टा पहले पानी पीना चाहिए तथा भोजन करने के कम से कम 1 घण्टे के बाद ही पानी पीना चाहिए। भोजन करने के समय में कभी भी पानी नहीं पीना चाहिए।
· रोग की अवस्था में उचित भोजन का ही उपयोग करना चाहिए तथा कभी भी ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जिससे बीमारी का प्रकोप और बढ़ जाए।
· अच्छा स्वास्थ्य संतुलित भोजन और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पर ही निर्भर करता है अत: भोजन उतना ही करना चाहिए जितना आवश्यक हो।
· नशीली चीजें, तम्बाकू, शराब तथा अन्य विषैले पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इन चीजों से स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
· स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन दिन में 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए।
· रात के भोजन और सोने के बीच में कम से कम 3 घण्टे का अन्तर रखना चाहिए इससे स्वास्थ्य सही रहता है।
· धन से दवाई खरीदी जा सकती है स्वास्थ्य नहीं यह ध्यान रखना चाहिए।
· चाय, कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इन चीजों से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
· अनुशासित जीवन आपको दीर्घजीवी और खुशहाल बनाता है अत: अपने जीवन में अनुशासित रूप अपनाना चाहिए।
· परिवर्तन संसार का नियम है इसलिए इसके साथ-साथ छेड़-छाड़ नहीं करनी चाहिए।
· शरीर, मस्तिष्क व आत्मा को शुद्ध रखने के लिए योग सबसे आसन तरीका है। इसलिए अपने जीवन में योग का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए।
· किसी भी रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा और योग एक ही गाड़ी के 2 पहिए हैं।
· रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा पर विश्वास करना बहुत ही आवश्यक है। इसके फलस्वरूप रोग जल्द ही ठीक हो जाता है।

साभार : कुमारहेल्थ ब्लॉग

23/02/2016

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

दोस्तों ,

बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं ! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है ! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं ! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है ,--'माफ़ कीजिएगा ! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है ,थोडा अपना ध्यान रखिए ! आप ये सुन कर shocked हो जाते हैं ! लेकिन अब इसके बाद जो आपकी प्रतिक्रिया होती है ,वो महत्वपूर्ण है ! इस खबर को सुनने के बाद आप दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं ! पहला , ये सुनते ही आपका मन कहता है ,देखा , में तो पहले ही कह रहा था कुछ तो गड़बड़ है ! तुम बीमार होने वाले हो ! आप तुरंत doctor के prediction के आगे हथियार डाल देते हैं ! आपकी नकारात्मक सोच आपकी उम्र को 10 साल आगे की स्थिति में पहुंचा देती है ! आप हताश और निराश से कुर्सी से उठते हैं ! किसी पराजित आदमी की तरह अपने कंधे झुका कर clinic से बाहर निकलते हैं ! घर आकर चुपचाप या तो बिस्तर या TV के आगे बेठ जाते हैं ! आपके मन में ये prediction मजबूती से बेठ गई है की ये तो होना ही है तो क्यों मैं सुबह जल्दी उठूं ,व्यायाम करूँ ,सही आहार लूँ ,मेहनत करूँ ! ये विचार आपके मनोमस्तिक्ष पर इतनी बुरी तरह हावी हो जाते हैं की सोते ,जागते खाते ,पीते आप बस ये ही सोचते रहते हैं की अब तो मुझे diabetes और heart problem होने वाली है आखिर अब तो doctor ने भी ये कह दिया है ! आप निरुत्साहित से अपने काम करते हैं ! चिंता में TV के सामने बेठ कुछ ना कुछ खाते रहते हैं ! आप अपनी चिंता को खाने की आड़ में दबाने की कोशिश करते हैं ! फिर ऐसे ही हताशा ,निराशा और आलस से भरी आपकी दिनचर्या हो जाती है ! फिर एक दिन अचानक आपकी तबियत ज्यादा खराब हो जाती है ! आप डॉक्टर के यहाँ जाते हैं ! आपका सारा checkup करने के बाद doctor बड़े ही निराशा भरे स्वर में कहता है ,-- 'मुझे अफ़सोस है ! लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की आपको high BP ,diabetes और heart problem हो चुका है ! अगर अब भी आप अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो गाडी ज्यादा देर और दूर तक नहीं चल पाएगी ! आप shocked से सामने दिवार पर लगा कैलेंडर देखते हैं ! अरे अभी तो केवल 5 महीने ही गुजरे हैं ,डॉक्टर ने तो 1 साल की कहा था ! आपकी सोच और मन की हार ने उस भविष्यवाणी को समय से पहले ही सच साबित कर दिया ! आप फिर पहले से भी ज्यादा हताश ,निराश और झुके हुए कन्धों के साथ clinic से बाहर निकलते हैं ! और ये कहानी दोस्तों फिर ज्यादा लम्बी नहीं चलती है ........! वहीं दूसरी तरफ doctor के ये कहते ही , की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है , आपको आपकी अंतरात्मा को एक झटका सा लगता है ! आप इस बात को एक चुनोती की तरह लेते हैं ! तुरंत आपका मन और आत्मबल एक निर्णय लेते हैं ,की अरे ये सिर्फ एक prediction ही तो है ,हकीकत नहीं है ,और मैं इसे हकीकत बनने भी नहीं दूंगा ! आप मन ही मन संकल्पित होते हैं ,अपनी पिछली जिंदगी की कमियों ,लापरवाहियों और आलस पर एक नजर डालते हैं और तुरंत निर्णय लेते हैं ,बस अब और नहीं ! अब मेरी जिंदगी ,मेरी सेहत मेरे हाथ में है ! आपकी सोच पूरा u -turn ले लेती है ! आप ये ठान लेते हैं की आज से बल्कि अभी से मैं अपने आप को ,अपनी आदतों को बदल दूंगा ! इस prediction को मैं झूठा साबित कर के रहूँगा ! आप एक संकल्प और मन के विश्वास के साथ कुर्सी से उठते हैं और clinic से बाहर निकलते हैं ! आप अपनी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल देते हैं ! जल्दी उठना ,व्यायाम ,सही आहार ,सकारात्मक सोच ,श्रद्धा ,आशावादिता ,उमंग ,उत्साह और पर्याप्त मेहनत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेते हैं ! कुछ दिनों के बाद जब मन में निराशा के भाव आने लगते हैं ,आलस पुनः आप पर हावी होना चाहता है ! तो डॉक्टर की भविष्यवाणी को याद कर आप अपनी हताशा को पीछे धकेल देते हैं ! आपका ये संकल्प की इस prediction को मैं सही साबित नहीं होने दूंगा ,आप को वापस अपने सेहत के रास्ते पर अग्रसर कर देता है ! फिर आप कई साल बाद ऐसे ही अपने routine checkup के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं ! डॉक्टर बड़ी गर्मजोशी और उमंग से कहता है ,-क्या बात है ! आपने तो अपना कायाकल्प ही कर लिया है ! आप तो पहले से भी ज्यादा सेहतमंद और जवान हो गए हैं ! आप मुस्कुरा कर डॉक्टर से हाथ मिलाते हैं और सीटी बजाते हुए क्लिनिक से बाहर आ जाते हैं ! और ये कहानी बहुत अच्छे तरीके से बहुत लम्बी चलती है ! तो दोस्तों ,कहानी कैसी लगी ? वैसे ये कहानी है ही नहीं ! हकीकत है ! हम लोगों में से 90 से 95 % लोग पहले वाली सोच के होते हैं ,है ना ? केवल 5 या 10 % लोग ही दूसरे नजरिये वाले होते हैं ! जो अपने पुरुषार्थ ,मनोबल और मेहनत से भविष्यवाणी को भी बदल देते हैं ! आपके मन की नकारात्मक सोच आपको समय से पहले डूबा भी सकती हैं और सकारात्मक सोच अनेकों ऊँचाइयों तक उठा भी सकती है ! इसलिए जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और तदुपरांत सार्थक प्रयत्न आपकी सफल ,सेहत भरी जिंदगी और उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है ! है ना ? तो मन का कैसा नजरिया रखना चाहेंगे आप ? आखिर ..

21/07/2015

बरसात यदि आपको अच्छी लगती है
तो जीवाणु-रोगाणु और बैक्टीरिया का भी यह पसंदीदा मौसम है। बरसात में फैलने वाले रोगों में थोड़ी सावधानी बरती जाए तो स्वस्थ रहा जा सकता है।
जलजनित रोग
हैजा, टायफॉइड, हेपेटाइटिस-ए, डायरिया जैसे रोग बरसात में आम हैं। बचाव के लिए घर का बना खाना खाएं और उबला हुआ साफ पानी पिएं।

डेंगू
मच्छरजनित वायरल से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। 104-105 डिग्री फारेनहाइट तापमान के साथ सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होता है। बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और ऎसे कपड़े पहनें जिनसे आप पूरी तरह कवर रहें।

डायरिया
वायरल, बैक्टीरिया या परजीवी जन्य संक्रमण से होने वाला रोग है डायरिया। रोग गंभीर होने पर किडनी फेल्योर का खतरा भी बढ़ जाता है। शरीर में लिक्विड का स्तर बनाकर इस रोग से बचा जा सकता है।
फूड पॉइजनिंग
गर्मी व बारिश का मिला-जुला मौसम सेहत के लिए संवेदनशील होता है। इस मौसम में फूड पॉइजनिंग का खतरा बना रहता है। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें। फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया युक्त भोजन करने से होती है। इससे बचाव के लिए घर में साफ-सफाई से बना हुआ ताजा खाना खाएं। अगर बाहर का खाना खा रहे हैं तो ध्यान रखें कि खुले में रखे हुए खाद्य पदार्थो व एकदम ठंडे भोजन का सेवन न करें। किचन में भी साफ-सफाई का ध्यान रखें। गंदे बर्तनों का उपयोग न करें। कम अम्लता वाला भोजन करें क्योंकि इस मौसम में पाचनक्रिया सुस्त हो जाती है।

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