Swami Vivekananda's Thoughts

Swami Vivekananda's Thoughts This page is dedicated to spread Swami Vivekananda's Thoughts and his ethics.

Name- Swami Vivekananda / स्वामी विवेकानंद
Born- January 12, 1863 , Calcutta, Bengal Presidency, British India
Died- July 4, 1902 , Belur Math near Kolkata
Nationality- Indian
Field Religion, Social Work
Achievement:- Introduced Hindu philosophies of Vedanta and Yoga in Europe and America through his famous speech‘Sisters and Brothers of America’Founded Ramkrishna Mission. Many youths, including Narendranath were deeply inspired by Sri Ramakrishna’s teachings, and eventually when Sri Ramakrishna passed away, Narendranath was instructed to look after the group of youth who began following Sri Ramakrishna’s teachings of spirituality. As Narendranath’s group of youth began to grow in strength, a monastery was established and Narendranath under monastic vows took his name as Swami Vivekananda.

सफर पगडंडी का-एक साधु था जो हमेशा जंगल और गाँव की पगडंडियों पर चलता रहता। लोग उससे पूछते –"बाबा, आप सड़कों को क्यों छोड़...
22/09/2025

सफर पगडंडी का-

एक साधु था जो हमेशा जंगल और गाँव की पगडंडियों पर चलता रहता। लोग उससे पूछते –
"बाबा, आप सड़कों को क्यों छोड़कर इन छोटी पगडंडियों पर चलते हैं?"

साधु मुस्कराकर कहता –
"क्योंकि यह पगडंडी मुझे दो सच्चाइयों का स्मरण दिलाती है।"

पहली सच्चाई यह कि – मार्ग चाहे कितना भी संकरा हो, यदि धैर्य और विश्वास है तो वह अंततः गंतव्य तक पहुँचाता ही है।
यह पगडंडी हरी घास और जंगल के बीच से गुजरती है, जैसे जीवन की कठिनाइयाँ और उलझनें।
लेकिन जो आगे बढ़ता रहे, उसे दूर खड़ा आश्रय जरूर दिखता है – जो भगवान का धाम या शांति का स्थान है।

दूसरी सच्चाई यह कि – आसमान के काले बादल हमेशा स्थायी नहीं रहते।
जीवन में कितनी भी कठिनाई, दुख या अंधेरा क्यों न हो, वे बादल भी समय के साथ छंट जाते हैं और सूर्य (आशा, प्रकाश, कृपा) प्रकट होता है।

साधु ने यह भी कहा –
"यह पगडंडी हमारी आत्मा की यात्रा है। शरीर खेत की तरह है, मन बादलों की तरह डोलता रहता है, और आत्मा उस संकरे मार्ग पर चलने वाला यात्री है। अगर यात्री अपने पगडंडी पर टिका रहे – साधना, भक्ति और सेवा में – तो अंततः उसे शांति का आश्रय अवश्य मिलेगा।"

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👉 यह फोटो हमें यही सिखाता है कि जीवन की पगडंडी कितनी भी संकरी और कठिन क्यों न लगे, यदि विश्वास और धैर्य है, तो मंज़िल (शांति और सत्य) सामने ही है।

"ध्वनि की शक्ति: ओमकार का प्रभाव"क्या आपने कभी सोचा है कि “ओम” (ॐ) का उच्चारण आपके मन और शरीर पर गहरा प्रभाव डाल सकता है...
25/12/2024

"ध्वनि की शक्ति: ओमकार का प्रभाव"

क्या आपने कभी सोचा है कि “ओम” (ॐ) का उच्चारण आपके मन और शरीर पर गहरा प्रभाव डाल सकता है?

वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित किया है कि जब “ओम” का उच्चारण किया जाता है, तो यह एक खास 432 Hz फ्रीक्वेंसी उत्पन्न करता है, जिसे ब्रह्मांड की प्राकृतिक फ्रीक्वेंसी माना जाता है। 432 Hz को “यूनिवर्सल फ्रीक्वेंसी” माना जाता है, जो हमारे मस्तिष्क और शरीर को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ती है।

432 Hz फ्रीक्वेंसी के संगीत को सुनने से मस्तिष्क का तनाव कम होता है।

इसका कंपन मस्तिष्क के अल्फा वेव्स को सक्रिय करता है, जो गहरी शांति और ध्यान की स्थिति को बढ़ावा देता है।

“ओम” के उच्चारण से शरीर की कोशिकाओं में संतुलन और ऊर्जा बहाल होती है।

प्राचीन ऋषियों का यह मंत्र केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर भी लाभकारी है।

Sound Therapy(ध्वनि चिकित्सा) में ध्वनि का उपयोग शरीर को हील करने के लिए किया जाता है।

“ओम” के उच्चारण से Vagus Nerve उत्तेजित होती है, जो तनाव को कम कर शरीर को शांत करती है।

वागस नर्व शरीर के पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम को सक्रिय करती है, जिससे तनाव कम होता है, हृदय गति स्थिर होती है और शरीर में गहरी शांति उत्पन्न होती है। यह फोकस और ध्यान में सुधार करता है।

"ओमकार का जाप केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि आपके मन और शरीर के संतुलन को पुनर्स्थापित करने का तरीका है।"

ध्वनि, जो हमें सुनने में साधारण लगती है, हमारे शरीर, मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। प्राचीन भारतीय परंपरा में “ओम” (ॐ) को ध्वनि ब्रह्मांड का मूल स्वर माना गया है। क्या आप जानते हैं कि “ओम” केवल आध्यात्मिक मंत्र नहीं, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी है? आइए इसे गहराई से समझते हैं।

ओम का उच्चारण तीन ध्वनियों से मिलकर बना है:

‘अ’ (A): यह जागरूकता का प्रतीक है और भौतिक संसार का प्रतिनिधित्व करता है।

‘उ’ (U): यह सूक्ष्म संसार और विचारों का प्रतीक है।

‘म’ (M): यह गहरी शांति और पूर्णता का प्रतीक है।

जब इन तीन ध्वनियों को एक साथ उच्चारित किया जाता है, तो यह ब्रह्मांड की कंपन (Cosmic Vibrations) के साथ सामंजस्य बनाता है।

"ओम" का उच्चारण मस्तिष्क में अल्फा वेव्स को सक्रिय करता है।

अल्फा वेव्स गहरी शांति, रचनात्मकता और ध्यान को बढ़ावा देती हैं।

आधुनिक चिकित्सा में ध्वनि का उपयोग शरीर के ऊर्जात्मक संतुलन को बहाल करने के लिए किया जाता है।

“ओम” की कंपन शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में मदद करती है।

"मन की शक्ति " "The power of thoughts"क्या आपने कभी पानी पर अपने विचारों का प्रभाव देखा है?जापान के मशहूर वैज्ञानिक डॉ. ...
24/12/2024

"मन की शक्ति " "The power of thoughts"

क्या आपने कभी पानी पर अपने विचारों का प्रभाव देखा है?

जापान के मशहूर वैज्ञानिक डॉ. मसारू इमोटो ने पानी के क्रिस्टल पर एक अनोखा प्रयोग किया।
उन्होंने पानी के अलग-अलग नमूनों पर सकारात्मक और नकारात्मक शब्द बोले:

एक नमूने को “धन्यवाद,” “प्रेम,” और “शांति” जैसे शब्द सुनाए।

दूसरे नमूने को “मुझे नफरत है,” “तुम बेकार हो,” जैसे नकारात्मक शब्द सुनाए।

कुछ समय बाद, जब इन पानी के नमूनों को माइक्रोस्कोप से देखा गया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए:

सकारात्मक शब्दों के संपर्क में आए पानी के क्रिस्टल सुंदर, सुसंगठित और चमकदार थे।

नकारात्मक शब्दों वाले पानी के क्रिस्टल विकृत और असामान्य थे।

"हमारे विचार और शब्द, केवल दूसरों पर ही नहीं, बल्कि हमारे खुद के शरीर और जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं।"
👉 हमारा शरीर 70% पानी से बना है। अगर सकारात्मक विचार पानी के क्रिस्टल को बदल सकते हैं, तो सोचिए, हमारे विचार हमारे जीवन को कैसे बदल सकते हैं?

शोध बताते हैं कि सकारात्मक सोच इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

नकारात्मक सोच से तनाव हार्मोन बढ़ता है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए जीवन में सदैव अपने लिए और दूसरों के लिए हमेशा अच्छा ही सोचना चाहिए, इससे हम जिस परिवार, समाज में रह रहे है वहां पर सकारात्मक सोच का ही विकास होगा।

"एक बूंद की ताकत"Swami Vivekananda's Thoughts  Dr. Kumar Vishwas Official Fans Clubक्या आपने कभी सोचा है कि एक बूंद पानी...
22/12/2024

"एक बूंद की ताकत"
Swami Vivekananda's Thoughts Dr. Kumar Vishwas Official Fans Club

क्या आपने कभी सोचा है कि एक बूंद पानी पूरे समंदर की शक्ति को कैसे बदल सकती है?

एक बार एक शोधकर्ता ने एक प्रयोग किया। उसने एक छोटे से बर्तन में पानी भरा और उसमें एक गंदगी का टुकड़ा डाला। धीरे-धीरे वह पूरा पानी दूषित हो गया। फिर उसने उस बर्तन में एक पानी साफ करने वाला प्राकृतिक तत्व, चारकोल की एक छोटी सी बूँद, डाली। कुछ समय में पानी धीरे-धीरे साफ होने लगा।
"यह बूँद हमें सिखाती है कि छोटा सा सकारात्मक कदम भी बड़े बदलाव ला सकता है।"
हमारी सोच भी इसी पानी की तरह है। अगर उसमें नकारात्मकता का एक अंश भी घुल जाए, तो यह पूरे जीवन को दूषित कर सकता है। लेकिन अगर हम अपने विचारों में एक सकारात्मक सोच या एक अच्छा काम शामिल करें, तो यह हमारे पूरे जीवन को साफ और सशक्त बना सकता है।

Activated charcoal अशुद्धियों को सोख लेता है और पानी को शुद्ध करता है।
यह प्रक्रिया हमारे विचारों के लिए प्रतीकात्मक है – सकारात्मकता अशुद्ध विचारों को कम कर सकती है।
नकारात्मक सोच से तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ता है, जो हमारे शरीर और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है।
सकारात्मक सोच से सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे खुशी के हार्मोन उत्पन्न होते हैं।

"आपके जीवन में कौन सा सकारात्मक कदम सबसे बड़ा बदलाव लेकर आया?"
कमेंट में अपनी कहानी जरूर साझा करें।

असली शक्ति की खोज - स्वामी विवेकानंद के युवावस्था के दिनों की बात है, जब वे आध्यात्मिक सत्य की खोज में देश भर में भ्रमण ...
12/12/2024

असली शक्ति की खोज -

स्वामी विवेकानंद के युवावस्था के दिनों की बात है, जब वे आध्यात्मिक सत्य की खोज में देश भर में भ्रमण कर रहे थे। यह वह समय था जब उनके मन में जीवन और ईश्वर के रहस्यों को समझने की तीव्र प्यास थी।

नरेंद्र एक संपन्न परिवार से थे, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में उन्होंने सब कुछ त्याग दिया। वे भारत के विभिन्न तीर्थ स्थानों की यात्रा करने लगे। उनका एक ही प्रश्न था: “क्या किसी ने सच में भगवान को देखा है?”

वे विभिन्न संतों, गुरुओं और संन्यासियों से मिले, परंतु कोई भी उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया। कोई उन्हें शास्त्रों के जटिल सिद्धांत सुनाता तो कोई दर्शनशास्त्र के कठिन विचार। लेकिन नरेंद्र का हृदय इस सब से संतुष्ट नहीं हुआ।

एक दिन, किसी ने उन्हें बताया कि कोलकाता के निकट दक्षिणेश्वर में रामकृष्ण परमहंस नाम के एक महान संत रहते हैं। नरेंद्र पहले तो संकोच में थे, लेकिन ईश्वर की खोज में उनकी जिज्ञासा उन्हें रामकृष्ण परमहंस के पास ले गई।

जैसे ही नरेंद्र ने सवाल किया:“क्या आपने भगवान को देखा है?”

रामकृष्ण परमहंस की आँखों में एक अनोखी चमक आ गई। उन्होंने शांत भाव से उत्तर दिया:“हाँ, मैंने भगवान को उसी प्रकार देखा है जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूँ। मैं उनके साथ बात करता हूँ जैसे मैं तुमसे कर रहा हूँ।”

यह उत्तर नरेंद्र के लिए चमत्कारिक था। उन्होंने पहली बार किसी को इतनी सरलता और विश्वास से ऐसा कहते सुना। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने का निर्णय लिया और उनकी शिक्षाओं में गहराई से डूब गए।

परंतु ज्ञान प्राप्त होने के बाद भी उनके जीवन में एक बार कुछ ऐसा हुआ जिस से उन्हें एहसास हुआ कि अभी वो पूरी तरह स्वयं को नियंतृत नहीं कर पायें हैं हुआ कुछ ऐसा की एक बार स्वामी विवेकानंद भारत भ्रमण के दौरान एक छोटे राज्य के राजा के निमंत्रण पर उनके दरबार पहुंचे। राजा ने स्वामी जी के स्वागत के लिए एक भव्य आयोजन रखा। दरबार में राजकीय अधिकारी, मंत्री और विद्वान तो थे ही, साथ ही राजा ने एक प्रसिद्ध नर्तकी (वेश्या) को भी बुलाया, ताकि वह स्वामी जी के स्वागत में अपनी कला का प्रदर्शन कर सके।

जब स्वामी विवेकानंद ने नर्तकी को देखा, तो उनके चेहरे पर असहजता और क्रोध के भाव आ गए। उन्होंने राजा से कहा:“एक संन्यासी के स्वागत के लिए इस तरह का आयोजन अनुचित है। यह स्थान पवित्र होना चाहिए।” ये कह कर वो महल के एक कमरे में चले गए, विवेकानंद की यह बात वेश्या की कानों तक पहुंच गई। स्वामी जी की कड़ी बातों से नर्तकी को गहरा आघात लगा,

राजा और दरबार के सभी लोग स्तब्ध रह गए। पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया।

थोड़ी देर बाद उनके कानों पर हल्की हल्दी की आवाज कलाकार की आने लगी जो कि संगीत गा रही थी, स्वामी जी के कमरे के एक कोने में आके उसको ध्यान से सुनने लगे, गीत सन्यास पर आधारित था। वेश्या ने गाते हुए कहा, 'मैं जानती हूं, मैं आपके योग्य नहीं हूं लेकिन आप मुझ पर थोड़ी दया कर सकते थे। मैं जानती हूं कि मैं रास्ते की गंदगी हूं। लेकिन आपको मुझसे नफरत करने की जरूरत नहीं है। मेरा कोई वजूद नहीं है, मैं अज्ञानी हूं, मैं पापी हूं, लेकिन आप तो एक संत हैं, फिर आप मुझसे डर क्यों रहे हैं?' और जानती हूं कि आप एक महान संन्यासी हैं। परंतु क्या मेरा शरीर अपवित्र होने से मेरी आत्मा भी अपवित्र हो गई है? क्या ईश्वर सिर्फ महलों में रहते हैं? क्या उनका वास मेरे भीतर नहीं हो सकता?”

यह बात जैसे ही विवेकानंद के कानों तक पहुंची, उन्हें तुरंत अपनी गलती का अहसास हो गया। उन्होंने खुद से पूछा कि आखिर वो वेश्या से डर क्यों रहे हैं? वेश्या के पास जाने में क्या पाप है?
यह सुनकर स्वामी विवेकानंद चकित रह गए। उन्होंने महसूस किया कि वे एक व्यक्ति के बाहरी स्वरूप को देखकर उसका न्याय कर बैठे थे। यह उनकी अपनी शिक्षाओं के विरुद्ध था, जिसमें वे कहते थे कि “हर इंसान में भगवान का अंश है।”

स्वामी जी ने अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी और बोले:“तुमने आज मुझे जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखाया है। शरीर तो नश्वर है, पर आत्मा अमर है। हर व्यक्ति में भगवान का वास है, चाहे वह किसी भी स्थिति में क्यों न हो।”इसके बाद विवेकानंद को अहसास हो गया कि उन्हें वेश्या के आक्रर्शन का डर है। अगर वो अपने मन से यह डर निकाल देंगे तो उनका मन शांत हो जाएगा, जिससे वो एक संपूर्ण सन्यासी बनने की तरफ बढ़ सकेंगे। इसके बाद वो फौरन दरवाजे से बाहर निकले और वेश्या को प्रणाम किया। न सिर्फ वो वेश्या के आगे गए ब्लकि उन्होंने वेश्या से बातचीत करते हुए कहा, 'भगवान ने आज एक बड़ा रहस्य खोल दिया है। मुझे डर था कि मेरे अंदर कोई वासना होगी लेकिन आपने मुझे पूरी तरह परास्त कर दिया। मैंने ऐसी शुद्ध आत्मा पहले कभी नहीं देखी।' विवेकानंद ने आगे कहा कि अगर मैं आपके साथ अकेले भी रहूं तो मुझे कोई परवाह नहीं।

इस अनुभव ने स्वामी विवेकानंद की आत्मा को और अधिक मजबूत बना दिया। उन्होंने महसूस किया कि उनके जीवन का उद्देश्य हर मनुष्य में छिपी दिव्यता को पहचानने और जागरूक करने का संदेश देना है।

1893 में शिकागो के विश्व धर्म महासभा में जब उन्होंने अपने प्रसिद्ध भाषण की शुरुआत “अमेरिका के भाइयों और बहनों” से की, तो पूरा विश्व मंत्रमुग्ध हो गया। उन्होंने भारत के आध्यात्मिक संदेश को इन सरल शब्दों में प्रस्तुत किया:“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”

असली शक्ति हमारे भीतर है। खुद पर विश्वास रखें, सच्चे गुरु की खोज करें, और जीवन के हर संघर्ष को आत्मबल से पार करें। किसी भी इंसान को उसके बाहरी रूप, पेशे या स्थिति के आधार पर मत आंकिए। ईश्वर हर जगह हैं और हर प्राणी में विद्यमान हैं।

10/12/2024

सर्दियों की ठंडी शाम थी। मुंबई से दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस अपने तय समय पर प्लेटफॉर्म से रवाना हुई। कोच ए1 की सीट नंबर 17 और 18 पर बैठे दो मुसाफिर रवि और नेहा थे, जो कभी कॉलेज के दिनों में एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते थे। लेकिन वक्त और हालातों ने उन्हें अलग कर दिया था।

ट्रेन रफ्तार पकड़ चुकी थी। रवि ने देखा कि नेहा खिड़की के बाहर देख रही थी, जैसे अतीत में कहीं खो गई हो। एक अजीब सी खामोशी के बीच यादों का तूफान दोनों के दिलों में उमड़ने लगा।

कॉलेज की वो शाम याद आई, जब रवि ने नेहा को पहली बार गुलाब का फूल दिया था। नेहा की आंखों की चमक आज भी वैसी ही थी, बस उस चमक के पीछे छुपा हुआ दर्द आज रवि को साफ दिख रहा था। रवि ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी, "नेहा, तुमने मुझे बिना कुछ कहे क्यों छोड़ दिया था?"

नेहा ने सिर झुकाते हुए कहा, "पापा का कारोबार खत्म हो गया था। घर कर्ज में डूब गया था। मां की बीमारी और छोटी बहन की पढ़ाई की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। मजबूरी में मुझे एक अमीर परिवार में शादी करनी पड़ी। तुम्हें बताकर तुम्हारी जिंदगी खराब नहीं करना चाहती थी।"

रवि के दिल में गहरी टीस उठी, लेकिन उसने अपने भाव छुपा लिए।
नेहा की आंखों में आंसू छलक पड़े। उसने धीरे से कहा, "लेकिन मेरी किस्मत ने वहां भी मेरा साथ नहीं दिया। मेरी शादी टूट गई। अब मैं अपनी बेटी के साथ अकेली हूं, संघर्ष कर रही हूं। किसी तरह एक सरकारी स्कूल में नौकरी मिली है।"

रवि के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन नेहा यह समझ नहीं पाई। उसने खुद को संभालते हुए कहा, "पता नहीं कैसे, पिछले एक साल से मेरी बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च कोई अनजान शख्स उठा रहा है। मैंने कभी उस इंसान को देखा नहीं, पर उसकी मदद के बिना हम आज इस सफर में भी नहीं होते।"

रवि चुप रहा, लेकिन उसकी आंखों में सुकून झलकने लगा। नेहा नहीं जानती थी कि पिछले एक साल से उनकी जिंदगी का छुपा हुआ मददगार कोई और नहीं, बल्कि खुद रवि था। उसने कभी भी नेहा को अपने प्यार से दूर नहीं होने दिया था।

ट्रेन दिल्ली पहुंचने वाली थी। रवि ने धीरे से कहा, "नेहा, कभी-कभी किस्मत हमें दूसरे मौके भी देती है। क्या हम अपनी अधूरी कहानी को एक नई शुरुआत दे सकते हैं?"

नेहा कुछ पल के लिए चुप रही, फिर मुस्कुराते हुए बोली, "शायद, कुछ सफर दोबारा शुरू करने के लिए ही बनते हैं।"

ट्रेन रुकी, लेकिन उनके दिलों में एक नई उम्मीद और एक अधूरी कहानी का नया अध्याय लिखने का संकल्प जाग चुका था।
**सच्चा प्यार वक्त और हालातों के बंधन से परे होता है। कभी-कभी चुपचाप मदद करना और किसी की जिंदगी में उजाला लाना ही असली प्यार की पहचान है। गरीबी और मजबूरी भले ही इंसान को तोड़ दें, लेकिन सच्चा साथ उसे फिर से संवार सकता है।**

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09/12/2024

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"सृजन और निर्माण के देवता, भगवान विश्वकर्मा की कृपा से हो हर कार्य में सिद्धि। विश्वकर्मा पूजा के इस पावन अवसर पर सभी को...
17/09/2024

"सृजन और निर्माण के देवता, भगवान विश्वकर्मा की कृपा से हो हर कार्य में सिद्धि। विश्वकर्मा पूजा के इस पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं! 🙏✨
#विश्वकर्मा_पूजन #सृजन_के_देवता #शुभकामनाएं"

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