17/03/2026
कोलोरेक्टल कैंसर उस कैंसर को कहते हैं जो बड़ी आंत (Colon) या मलाशय (Re**um) की कोशिकाओं में शुरू होता है। यह पाचन तंत्र का हिस्सा है और मल को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
📊 भारत में इसका ट्रेंड (Trend / बढ़ोतरी)
📈 1. बढ़ रहे मामले
भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले धीरे‑धीरे बढ़ रहे हैं, खासकर शहरों और युवा लोगों में।
🧑🦱 2. युवा लोगों पर असर
पहले यह बीमारी आमतौर पर 50+ उम्र के लोगों में पाई जाती थी, लेकिन पिछले कुछ समय में 30‑40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले आम होते जा रहे हैं।
👉 मामलों में 21‑48% लोग 40 साल से कम उम्र के हैं, जो चिंता का विषय है।
🩺 भारत में आंकड़े (Incidence & Mortality)
कोलोरेक्टल कैंसर भारत में पुरुषों और महिलाओं दोनों में चौथे सबसे आम कैंसर के रूप में सामने आता है।
2022 के आँकड़ों के अनुसार भारत में लगभग लगभग 65,000 नए मामले और 38,000 से अधिक मौतें इसी कैंसर की वजह से हुईं।
🔎 क्यों बढ़ रहे हैं मामले? (Risk Factors / कारण)
कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ने के मुख्य कारणों में शामिल हैं:
🍔 1. अनहेल्दी खानपान
प्रोसेस्ड और हाई‑फैट फूड, जंक फूड जैसे चीज़ों का ज्यादा सेवन।
कम फाइबर वाली डाइट (सलाद, फल, साबुत अनाज की कमी) भी जोखिम बढ़ाती है।
🪑 2. निष्क्रिय जीवन शैली
ज्यादा बैठने वाली दिनचर्या, एक्सरसाइज न करना।
🍷 3. धूम्रपान और शराब
सिगरेट और शराब का सेवन भी CRC के जोखिम को बढ़ाता है।
⚖️ 4. मोटापा और स्वास्थ्य समस्याएँ
मोटापा, डायबटीज़, क्रोनिक सूजन जैसे रोग इससे जुड़े जोखिम कारक हैं।
🧬 5. परिवार में इतिहास
यदि परिवार में किसी को पहले से यह कैंसर रहा हो, तो जोखिम अधिक हो सकता है।
🩹 क्या जल्दी पहचान संभव है?
हाँ। शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:
पाचन में बदलाव (डायरिया/कब्ज़)
मल में खून आना
अचानक वजन गिरना
पेट में दर्द, भूख कम लगना
लेकिन कई लोगों में शुरुआती स्टेज में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग ज़रूरी है।
🩺 स्क्रीनिंग (जांच) और बचाव
कोलोनोस्कोपी, FIT टेस्ट जैसे जांच से यह कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है।
हेल्दी डाइट, रोज़ाना चलना‑फिरना, फाइबर‑रिच खाना, धूम्रपान और शराब से बचना सुरक्षा में मदद करता है।