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11/03/2021
ज्योतिषीय सूत्र 🌸🌿⚜️ दाम्पत्य जीवन में कष्ट⚜️ विवाह न हो पाना⚜️ मेहनत के बावजूद धन न प्राप्त हो पानाधन, सुखी दाम्पत्य जी...
27/02/2021

ज्योतिषीय सूत्र 🌸🌿

⚜️ दाम्पत्य जीवन में कष्ट
⚜️ विवाह न हो पाना
⚜️ मेहनत के बावजूद धन न प्राप्त हो पाना

धन, सुखी दाम्पत्य जीवन व विवाह के कारक बृहस्पति व शुक्र दोनों हैं। इसलिए इन दोनों का उपाय करना होता है। अतः निम्नलिखित सरल व अचूक उपाय कीजिये।

1. बृहस्पतिवार को जल में हल्दी चूर्ण मिलाकर, पीतल के लोटे से केले की जड़ में यह जल अर्पित करें। साथ मे 5 माला बृहस्पति मंत्र प्रातःकाल में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके जपें।

""ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः""

2. हर शुक्रवार को किसी भी देवी मंदिर में उत्तम सा गुलाब के इत्र की शीशी अर्पित करें। साथ में 5 माला शुक्र मंत्र पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जपे।

""ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः""

यह प्रयोग लंबे समय पूर्ण लाभ होने तक करें।

वसंत पंचमी मित्रो आज वसंत पंचमी है यह पर्व ऋतुराज वसंत के आगमन के पहले दिन बनाया जाता है जब प्रकर्ति में एक अद्भुत सा प्...
16/02/2021

वसंत पंचमी

मित्रो आज वसंत पंचमी है यह पर्व ऋतुराज वसंत के आगमन के पहले दिन बनाया जाता है जब प्रकर्ति में एक अद्भुत सा प्रेम दिखाई देता है मौसम में एक अजीब सी खुशबू और प्यार झलकता है उसको वसंत ऋतु कहते है
भगवान श्री कृष्णा इस उत्सव के देवता माने जाते है इसलिए बृज प्रदेश में राधा कृष्ण भगवान का आनंद विनोद बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है
यह ऋतु है भी बहुत अच्छी पक्षियों को चहचहाना फूलो में रस का भर जाना भौरों का फूलो के पास मंडराना एक मौसम में खुशी का बदलाव महसूस होता है
आज के दिन पीले कपड़े पहनने चाहिए पीले फल पीले चावल अपने घर मे बनाने चाहिए और भगवान विष्णु को भोग देना चाहिए और आज के दिन कही पार्क में जहा फल और फूल हो वहाँ घूमने जाना चाहिए
यह जो ऋतु है इसका सम्बन्ध कामदेव और रति के साथ भी है
और इस दिन माँ सरस्वती की पूजा भी की जाती है आज के दिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का आशीर्वाद भी लेना चाहिए माँ सरस्वती हमको संस्कार ज्ञान और जीवन को जीने की कला सिखाती है
ज्ञान के क्षेत्र के जुड़े बच्चे शिक्षक और ज्योतिषाचार्यो के लिए माँ सरस्वती वरदान है
क्योकि जिस काम का सम्बन्ध वाणी से होता है वो माँ सरस्वती के अधीन होती है
देव गुरु बृहस्पति ज्ञान के कारक ग्रह होते है आज के दिन अपने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद जिनसे आपने कभी भी कुछ भी सीखा है उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेने चाहिए
माँ सरस्वती जिस पर मेहरबान हो उसको जीवन मे यश कीर्ति जरूर मिलती है
आज के माँ सरस्वती को पीली चीज़ों का भोग देना चाहिए
सरस्वती की पूजा से पहले विधि विधान से कलश की स्थापना करनी चाहिए
भगवान गणेश सूर्य विष्णु और महादेव की पूजा करनी चाहिए
उत्तर प्रदेश में आज से फाग उड़ना भी शुरू हो जाता है
आज से ही होलो का डांडा भी गाढ़ दिया जाता है
आज के दिन किसान लोग फसल की कटाई शुरू करते है और नया अन्न गुड़ भगवान अग्नि देव को और अपने पितरों को समर्पित करते है
मित्रो जीवन मे ज्ञान के बिना इंसान पशु के सामान होता है
ज्ञान के साथ विवेक का होना भी जरूरी होता है
ज्ञानी होना अच्छी बात है पर उसका अहंकार होना गलत चीज़ है
अपने ज्ञान को आप मानव कल्याण में लगाओ
और अपने ज्ञान की ज्योति से समाज को एक नई दिशा देनी चाहिए

ऐसा कभी नही करना चाहिए कि मुझसे बढ़ा ज्ञानी कोई नही
जहा अहंकार आ गया वहाँ से ज्ञान फिर शून्य होने लगता है
इस दुनिया मे सबके पास अलग अलग अनुभव हो सकते है सबका अपना शोध होता है
आज जितने भी बड़े बड़े अविष्कार हुए है
कार आयी पहले टीवी था फिर कुछ और आया
पहले पंखे थे फिर कूलर आया अब ac आ गए यह आब अविष्कार ज्ञान के माध्यम से ही हुए है
अगर ज्ञान को आगे नही बढ़ाया गया होता तो आज डॉक्टर कैंसर जैसी बीमारी का इलाज कैसे ढूंढ पाते
समाज को एक दशा और दिशा ज्ञान से ही आती है
इसलिए मॉनव का जहा कल्याण हो वही ज्ञान श्रेष्ट होता है
सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए. इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करें. सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन एवं स्नान कराएं. इसके बाद माता को फूल एवं माला चढ़ाएं. सरस्वती माता को सिन्दुर एवं अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए. बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है.
देवी सरस्वती स्वेत वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें स्वेत वस्त्र पहनाएं. सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं. प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदिया अर्पित करना चाहिए. इस दिन सरस्वती माता को मालपुए एवं खीर का भी भोग लगाया जाता है.

सरस्वती माता का हवन विधि

सरस्वती पूजा करने बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए. हवन के लिए हवन कुण्ड अथवा भूमि पर सवा हाथ चारों तरफ नापकर एक निशान बना लेना चाहिए. इसे कुशा से साफ करके गंगा जल छिड़क कर पवित्र करने के बाद. आम की छोटी-छोटी लकडि़यों को अच्छी तरह बिछा लें और इस पर अग्नि प्रजज्वलित करें. हवन करते समय गणेश जी, नवग्र के नाम से हवन करें. इसके बाद सरस्वती माता के नाम से "ओम श्री सरस्वतयै नम: स्वहा" इस मंत्र से 108 बार हवन करना चाहिए. हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं.

सरस्वती विसर्जन

माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्टी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए।
सरस्वती वन्दना

सरस्वती या कुन्देन्दु देवी सरस्वती को समर्पित बहुत प्रसिद्ध स्तुति है जो सरस्वती स्तोत्रम का एक अंश है। इस सरस्वती स्तुति का पाठ वसन्त पञ्चमी के पावन दिन पर सरस्वती पूजा के दौरान किया जाता है।
स्तुति घ्यान या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥। घर पर पूजन।
1. इस दिन ब्रह्म महुर्त में स्नान आदि करके पीताम्बर या पीले वस्त्र पहनें।
2. माद्य शुक्ल पंचमी को उत्तम वेदी पर वस्त्र बिछाकर अक्षत(चावल) से अष्टदल कमल बनाएं।
3. इसके अग्र भाग में श्रीगणेश जी को स्थापित करें।
4. वहीं पृष्ठ भाग में बसंत स्थापित करें। बसंत यानि जौ व गेहूं की बाली के पुंज को जल से भरे कलश में डंठल सहित रखकर सजाया जाता है, उसे ही बसंत कहते हैं।
5. इसके बाद सबसे पहले गणेशजी का पूजन करें और फिर पृष्ठ भाग में स्थापित बसंत पुंज के द्वारा रति व कामदेव का पूजन करें। इसके लिए पुंज पर अबीर,केसर व रंगीन पुष्पों के माध्यम से बसंत जैसा माहौल बना लें।



सरस्वती वाणी एवं ज्ञान की देवी है. ज्ञान को संसार में सभी चीजों से श्रेष्ठ कहा गया है. इस आधार पर देवी सरस्वती सभी से श्रेष्ठ हैं. कहा जाता है कि जहां सरस्वती का वास होता है वहां लक्ष्मी एवं काली माता भी विराजमान रहती है।

सरस्वती पूजा के दिन यानी माघ शुक्ल पंचमी के दिन सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षक एवं छात्रगण सरस्वती माता की पूजा एवं अर्चना करते हैं. सरस्वती माता कला की भी देवी मानी जाती हैं अत: कला क्षेत्र से जुड़े लोग भी माता सरस्वती की विधिवत पूजा करते हैं. छात्रगण सरस्वती माता के साथ-साथ पुस्तक, कापी एवं कलम की पूजा करते हैं. संगीतकार वाद्ययंत्रों की, चित्रकार अपनी तूलिका की पूजा करते हैं.

सृष्टि के निर्माण के समय सबसे पहले महालक्ष्मी देवी प्रकट हुईं. इन्होंने भगवान शिव, विष्णु एवं ब्रह्मा जी का आह्वान किया. जब ये तीनों देव उपस्थित हुए. देवी महालक्ष्मी ने तब तीनों देवों से अपने-अपने गुण के अनुसार देवियों को प्रकट करने का अनुरोध किया. भगवान शिव ने तमोगुण से महाकली को प्रकट किया, भगवान विष्णु ने रजोगुण से देवी लक्ष्मी को तथा ब्रह्मा जी ने सत्वगुण से देवी सरस्वती का आह्वान किया है।
महत्व। -------- इस दिवस अबुझ मुहूर्त रहता है अर्थात बिना पंचांग देखे ही कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ कर सकते है। ज्योतिष में पांचवी राशि के अधिष्ठाता भगवान सूर्यनारायण होते है। इसलिए वसंत पंचमी अज्ञान का नाश करके प्रकाश की ओर ले जाती है। इसलिए सभी कार्य इस दिन शुभ होते है इस दिन विद्यार्थी, शिक्षक एवं अन्य सभी देवी सरस्वती का पूजन करें। गरीब छात्रों को पुस्तक, पेन, आदि विद्या उपयोगी वस्तु का दान करें। इस दिन शक्तियों के पुनर्जागरण होता है। बसंत पंचमी के दिन सबसे अधिक विवाह होते एवं इस दिन गृह प्रवेश, वाहन क्रय, भवन निर्माण प्रारंभ, विद्यारंभ ग्रहण करना, अनुबंध करना, आभुषण क्रय करना व अन्य कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य सफल होते है।वसंत पंचमी की विशेषताएं... - माघमाह:-इस महिने को भगवान विष्णु का स्वरूप बताया है।- शुक्ल पक्ष:-इस समय चन्द्रमा अत्यंत प्रबल रहता है।- गुप्त नवरात्री इस समय गुप्त नवरात्र होते है।जो साधना पूजा हेतु उत्तम है।-सिद्धी,साधना,गुप्तसाधनाके लिए मुख्य समय- उत्तरायण सूर्यः-देवताओं का दिन इस समय सूर्य देव पृथ्वी के निकट रहते है।। ये समय- वसंत ऋतु:-समस्त ऋतुओं की राजा इसे ऋतुराज वसंत कहते है । ब्रह्मपुराण के अनुसार देवी सरस्वती इस दिन ब्रह्माजी के मानस से अवतीर्ण हुई थी।। इस अवसर पर विधार्थी मत्र जाप करे इसी को सारस्वत मत्र कहते है।तो सफलता प्राप्त होती है। सरस्वती मंत्र: ऊं ऐं सरस्वत्यै नमः।

*24 घंटे में होते हैं कितने और कौन से मुहूर्त〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ किसी भी प्रकार के मंगल कार्य करने के लिए सबसे पहले म...
21/01/2021

*24 घंटे में होते हैं कितने और कौन से मुहूर्त
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किसी भी प्रकार के मंगल कार्य करने के लिए सबसे पहले मुहूर्त और चौघड़िया देखा जाता है। आज कल लोग शुभघड़ी को मुहूर्त कहने लगे हैं। दिन व रात मिलाकर 24 घंटे के समय में, दिन में 15 व रात्रि में 15 मुहूर्त मिलाकर कुल 30 मुहूर्त होते हैं अर्थात् एक मुहूर्त 48 मिनट (2 घटी) का होता है।

मुहूर्त का नाम समय प्रारंभ समय समाप्त
रुद्र 06.00. 06.48
आहि 06.48 07.36
मित्र 07.36 08.24
पितृ 08.24 09.12
वसु 09.12 10.00
वराह 10.00 10.48
विश्‍वेदेवा 10.48 11.36
विधि 11.36 12.24
सप्तमुखी 12.24 13.12
पुरुहूत 13.12 14.00
वाहिनी 14.00 14.48
नक्तनकरा 14.48 15.36
वरुण 15:36 16:24
अर्यमा 16:24 17:12
भग 17:12 18:00
गिरीश 18:00 18:48
अजपाद 18:48 19:36
अहिर बुध्न्य 19:36 20:24
पुष्य 20:24 21:12
अश्विनी 21:12 22:00
यम 22:00 22:48
अग्नि 22:48 23:36
विधातॄ 23:36 24:24
कण्ड 24:24 01:12
अदिति 01:12 02:00
जीव/अमृत. 02:00 02:48
विष्णु 02:48 03:36
युमिगद्युति. 03:36 04:24
ब्रह्म 04:24 05:12
समुद्रम 05:12 06:00

दैनिक मुहूर्त निकालते समय अपने शहर के सूर्योदय से ही गणना करनी चाहिए।

मुहूर्त संबंधित ग्रंथ
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मुहूर्त संबंधित कई ग्रंथ हैं जो वेद, स्मृति आदि धर्मग्रंथों पर आधारित है। ये ग्रंथ है- मुहूर्त मार्तण्ड, मुहूर्त गणपति मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त पारिजात, धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु आदि। शुभ मुहूर्त जानते वक्त तिथि, वार, नक्षत्र, पक्ष, अयन, चौघड़ियां और लग्न आदि का भी ध्यान रखा जाता है।

कौन-सा 'समय' सर्वश्रेष्ठ होता है
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किसी भी कार्य का प्रारंभ करने के लिए शुभ लग्न और मुहूर्त को देखा जाता है। जानिए वह कौन-सा वार, तिथि, माह, वर्ष लग्न, मुहूर्त आदि शुभ है जिसमें मंगल कार्यों की शुरुआत की जाती है।

श्रेष्ठ दिन :
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दिन और रात में दिन श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ मुहूर्त :
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दिन-रात के 30 मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त ही श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ वार :
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सात वारों में रवि, मंगल और गुरु श्रेष्ठ है।

चौघड़िया :
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शुभ चौघड़िया श्रेष्ठ है जिसका स्वामी गुरु है। अमृत का चंद्रमा और लाभ का बुध है।

श्रेष्ठ पक्ष :
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कृष्ण और शुक्ल पक्षों के दो मास में शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ एकादशी :
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प्रत्येक वर्ष चौबीस और अधिकमास हो तो 26 एकादशियां होती हैं। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में एकादशियों को श्रेष्ठ माना है। उनमें भी इसमें कार्तिक मास की देव प्रबोधिनी एकादशी श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ माह :
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मासों में चैत्र, वैशाख, कार्तिक, ज्येष्ठ, श्रावण, अश्विनी, मार्गशीर्ष, माघ, फाल्गुन श्रेष्ठ माने गए हैं उनमें भी चैत्र और कार्तिक सर्वश्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ पंचमी :
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प्रत्येक माह में पंचमी आती है उसमें माघ माह के शुक्ल पक्ष की बसंत पंचमी श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ अयन :
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दक्षिणायन और उत्तरायण मिलाकर एक वर्ष माना गया है। इसमें उत्तरायण श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ संक्रांति :
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सूर्य की 12 संक्रांतियों में मकर संक्रांति ही श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ ऋ‍तु :
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छह ऋतुओं में वसंत और शरद ऋतु ही श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ नक्षत्र :
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नक्षत्र 27 होते हैं उनमें कार्तिक मास में पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र श्रेष्ठ है। इसके अलावा अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रावण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती नक्षत्र शुभ माने गए हैं।
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मकर सक्रांति (14जनवरी 2021)संक्रांति उसको कहते है जब सूर्य एक राशि को बदलकर दूसरी राशि मे प्रवेश करता है साल में 12 सक्र...
13/01/2021

मकर सक्रांति (14जनवरी 2021)

संक्रांति उसको कहते है जब सूर्य एक राशि को बदलकर दूसरी राशि मे प्रवेश करता है साल में 12 सक्रांति होती है क्योकि 12 रशिया होती है हर महीने भगवान सूर्य राशि को बदलते है जिसको सक्रांति कहा जाता है।

जब सूर्य अपने पुत्र शनि की मकर राशि मे प्रवेश करते है इसको मकर सक्रांति कहते है इस साल भगवान सूर्य 14 जनवरी की सुबह लगभग 8 बजे बजकर 15 मिनट पर मकर राशि मे जाएंगे
मकर संक्रांति को माघी या मकर संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू देवताओं में सूर्य भगवान को समर्पित यह त्यौहार हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है। मकर संक्रांति का यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। जैसा कि माना जाता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे मकर के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति उस महीने के अंत का भी प्रतीक है जब सर्दियाँ अपने चरम पर होती हैं, जोकि वर्ष की सबसे अंधेरी रात के रूप में भी संदर्भित है। मकर संक्रांति यह संकेत भी देता है, कि (ऋतु परिवर्तन) फिर से दिन के बड़े होने की शुरुआत हो गई है। हिंदू परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति का यह त्यौहार छह महीने की शुभ अवधि के साथ उत्तरायण की शुरुआत भी करता है।

इस त्यौहार के सबसे खास पहलुओं में से एक यह है कि सौर चक्र के अनुसार हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाले कुछ प्राचीन त्यौहारों में से यह त्यौहार एक है।

ज्यादातर हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार अपने त्यौहारों को मनाते हैं। संयोगवश हिंदू कैलेंडर का स्वरूप चन्द्र-सौर पंचांग की तरह होता ही है। चूंकि मकर संक्रांति सौर चक्र के अनुसार ही मनाया जाता है, इसलिए यह ग्रेगोरीयन कैलेंडर की एक ही तारीख 14 जनवरी को आता है। हालांकि, कुछ वर्षों से यह तिथि दिन-प्रतिदिन बदलती जा रही है। हालांकि इस स्थिति में, पृथ्वी और सूर्य एक जटिल अंतरंग गति पर स्थापित हो सकते हैं, हालांकि इन वर्षों में स्थित बहुत दुर्लभ होती है। मकर संक्रांति का त्यौहार भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इसका उल्लेख भी किया गया है।

उत्तरी भारत के सिख और हिंदू इस त्यौहार को लोहड़ी के नाम से मनाते हैं, जबकि मध्य भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। असम में हिंदू इस त्यौहार को भोगली बिहू के नाम से मनाया जाता है। तमिलनाडु और दक्षिणी भारत के अन्य हिस्सों में हिंदू इस त्यौहार को पोंगल के नाम से मनाया जाता है।

जैसा कि भारत में किसी अन्य त्यौहार की तरह ही मकर संक्रांति के त्यौहार को भी काफी सजावट के साथ मनाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और घर के व्यंजन जो सामान्य रूप से गुड़ और तिल के बने होते हैं, का स्वाद लेते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस त्यौहार पर खिचड़ी खाने और खिलाने का प्रचलन भी है। तमिलनाडु में, मकर संक्रांति के इस त्यौहार को पोंगल के नाम से भी जाना जाता है और लोग चावल खाते हैं, जो ताजे दूध और गुड़ के साथ उबले हुए होते हैं। यह पकवान काजू, ब्राउन शुगर (भूरी शक्कर) और किशमिश को उसके ऊपर डालकर विधिवत रूप से तैयार किया जाता है।

मकर संक्रांति को कई अन्य तरीकों जैसे मेले का आयोजन करके, अलाव (बोनफायर्स) जलाकर, नृत्य तथा प्रीतिभोज का आयोजन करके और पतंग उड़ा कर भी करते हैं। डायना एल एक्क, हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इंडोलॉजी की विशेषज्ञ ने कहा है कि वास्तव में महाभारत में भी माघ मेले का उल्लेख किया गया है। इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि यह मकर संक्रांति का त्यौहार लगभग 2000 वर्षों से मनाया जा रहा है। इस दिन, बहुत सारे लोग नदियों और झीलों को पवित्र मान कर सूरज को अर्ध्य देकर स्नान करते हैं। मकर संक्रांति के त्यौहार पर कुंभ मेले में भी काफी भीड़ देखने को मिलती है, जो दुनिया के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है और इस मेले का आयोजन प्रत्येक 12 साल बाद किया जाता है। अनुमान लगाया गया है कि लगभग 4 करोड़ से 10 करोड़ लोग इस मेले में भाग लेते हैं।

इस कुंभ मेले के दौरान लोगों का मानना है कि यहाँ पर स्नान करते हुए अपनी प्रार्थना के दौरान लोगों को सूर्य देवता को अर्ध्य देना चाहिंए। यह प्रयाग नाम के एक संगम पर होता है। यह वह जगह है जहाँ गंगा नदी यमुना नदी से मिलती है। इन दोनों नदियों को भारतीय देवी-देवताओं में दैवीय दर्जा दिया गया है। ऐसा कहा जाता है कि कुंभ मेला आदि शंकरा नामक ऋषि द्वारा शुरू किया गया था।

मकर संक्रांति एक शुभ त्यौहार है, इसलिए इस त्यौहार के दिन लोग गरीबों को भोजन, कंबल, कपड़े आदि वस्तुओं का दान किया जाता है।

आप जो भी नया कार्य आरम्भ करे, भगवान सूर्य भास्कर
आपको सफलता दे। आपके कार्यो में यश
मिले। भगवान सूर्य से प्रार्थना है कीआपसभी को
सुख सम्पन्नता से परिपूर्ण रखे, जिनके कार्यो में
बाधा या विघ्न आरहे हो, वो पूर्ण हो। और जो आप के अधिकारी बात नहीं मानते हो उनके लिए सूर्य बहुत उपयोगी है क्यों कि सूर्य राजा है सरकारी सर्विस और राज्य का पिता का कारक भी।आज से नित्य प्रतिदिन ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप प्रतिदिन 108 बार करे ।आप के परिवार का कोई व्यक्ति कहना नहीं मानता हो तो वह यह मंत्र करे सूर्य को अर्क दे 180 दिन और वह भी एक समय सुबह 8 बजे।।अनुकूल लाभ मिलेगा ।

Address

Ludhiana
141001

Opening Hours

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Tuesday 8am - 8pm
Wednesday 8am - 8pm
Thursday 8am - 8pm
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Telephone

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