02/12/2025
प्रश्न :- क्या प्रारब्ध को ठीक किया जा सकता है ? कमजोर प्रारब्ध को ठीक करने का उपाय ज्योतिष लोग पंडित लोग बतलाते हैं । तो क्या इन उपायों से टोटकों से कमजोर प्रारब्ध ठीक हो सकता है ?
उत्तर :- विल्कूल नहीं ।
"लिखा न कोऊ मेटन हारा "
प्रारब्ध में जो लिखा चुका है उसको कोई भी किसी भी उपाय से नहीं मिटा सकता ।।
सबसे पहले समझिए कि प्रारब्ध किसको कहते हैं ? प्रारब्ध कैसे बनता है ? प्रारब्ध का विज्ञान क्या है ?
तो प्रारब्ध हमारे आपके पिछले अनंत जन्मों में किए संचित पाप तथा पुण्य कर्म का फल है । इन्हीं संचित पाप पुण्य रूपी मिश्रित कर्मो के फल से हमारा इस जन्म का प्रारब्ध बन के मिला है ।
तो आप हीं बतलाईए कि है कोई इस ब्रह्माण्ड में जिसको भूतकाल में जाकर अपने किए कर्म को सुधारने का अधिकार है ? तो जब कोई भी जीव भूतकाल में जाकर अपने किए गलत कर्मों को सुधार सकता तो कहा जा सकता था कि प्रारब्ध को ठीक किया जा सकता है ।
लेकिन ऐसा होना असंभव है ।
वो भगवान भी नहीं कर सकते और न महापुरुषों को यह अधिकार है कि वो जीव के पिछले कर्मो को ठीक कर दें ।
तो भला कोई ज्योतिषी, कोई पंडित अगर दावा करता है कि वो किसी जीव के कमजोर प्रारब्ध को मजबूत कर देगा तो वो भयानक ठग है । उससे कहिए कि वो अपने प्रारब्ध को पहले ठीक कर ले और राष्ट्रपति बन जाए , प्रधान मंत्री बन जाए , विलगेट बन जाए ।
प्रारब्ध को पढ़ने के अधिकार केवल ज्योतिष को है लेकिन किसी के प्रारब्ध को ठीक करने का अधिकार किसी को नहीं, वास्तविक महापुरुष और भगवान भी इस लफड़े में नहीं पड़ते कभी ।
एक तो आज इस कलयुग में बढ़िया ज्योतिषियों कि संख्या न के बराबर है , भाग्य भी ठीक से नहीं पढ़ सकते वो, केवल भेटी ठीकते है , कहीं किसी का तुका लग गया तो लग गया , कोई विरला अगर पढ़ भी ले तो फिर प्रारब्ध ठीक करने का अधिकार किसी को नहीं है । सभी गुमराह करते हैं आज लोगों को , ठगते हैं , ठगेरा है ।
आपको चाहे वो हीरा पहना दें , पन्ना निलम या पोखराज पहना दें , सिगनापुर में तेल चढ़वा दे , यज्ञ करवा दें , जाप करवा दें , कुछ भी करवा दें , प्रारब्ध को कोई ठीक नहीं कर सकता ! क्योंकि प्रारब्ध बिता हुआ कल के कर्मो के आधार पर है , पिछले जन्मों के संचित कर्म से बना है , इसलिए वो ठीक नहीं हो सकता , असंभव । वो कर्म बंधन है पिछले किए कर्मो का फल है ।
तो फिर जीव का कल्याण कैसे होगा ?
तो इसके लिए वर्तमान में तथा भविष्य में किया जाने वाला कर्म का सिद्धांत है शास्त्रो़ में ।
जब प्रारब्ध कमजोर हो तो जीव को बढ़िया बढ़िया कर्म करना चाहिए। बढ़िया पुरूषार्थ करना चाहिए, दान पुण्य ठीक ठीक करना चाहिए और लगन से बढ़िया कर्म करना चाहिए।
अपने सोंच को , बुद्धि को , कर्म को ठीक करना चाहिए , कोई गलत कर्म नहीं करना चाहिए।
अभी से ठान लें कि अब अभी से हम कोई गलत बात न सोचेंगे और न करेंगे , और आगे के लिए शपथ ले ले कि भविष्य में भी कोई गलत काम नहीं करेंगे कभी, तो वर्तमान में किए अच्छे कर्मों से कल का प्रारब्ध बनेगा , आगे अच्छे भाग्य का निर्माण होगा । पिछला ठीक नहीं हो सकता कभी ।
पत्थर पहनना , टोटका आदि, पुजा पाठ , यज्ञ हवन आदि केवल आगे का संकल्प करने का साधन है आज हम यज्ञ कर रहे हैं , संकल्प कर रहे हैं कि हम आज से कोई भी गलत काम न सोचेंगे और न करेंगे । किसी का बुरा न सोचेंगे और न कभी करेंगे । और फिर भुल से भी गलत काम न करें तो आगे का बिगड़ी बन सकता है पर पिछला नहीं ठीक हो सकता कभी ।
पिछला संचित कर्म तो जब किसी जीव को भगवद् प्राप्त हो जाता है तो भगवान उसके पिछले अनंत जन्मों के संचित पाप पुण्य दोनों को भष्म कर देते हैं और आगे का ठेका भी भगवान ले लेते हैं । फिर उसके सारे कर्म भगवान द्वारा होता है । उस जीव को कर्म से छुट्टी मिल जाता है , जीव महापुरूष हो जाता है ।
पर साधारण जीव कर्म बंधन से मुक्त तब तक नहीं हो सकता जब तक वो भगवान का पूर्ण शरणागति करके भगवान से निष्काम प्रेम और सेंवा साधना करके उनको प्राप्त न कर ले ।
इसलिए अगर आपको कोई ज्योतिष या बाबा जी कहता है कि हम तुम्हारा पिछला ठीक कर देंगे तो सावधान हो जाइए । वो महाठग है , धूर्त है ।
आपने हमने जो पहले किया है उसके फल को भोगना हीं होगा हमें । चाहे रो कर भोगे या हंस कर भोगे । कोई नहीं बचा है , और न कोई बचा सकता है कर्मो के भोग से , भगवान भी भोग कर दिखाया है हमें लीला में , महापुरूष भी ।
महापुरुष या भगवान हमारे वर्तमान को ठीक करने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि हम अब सावधान हो जाएं ।
भगवान श्री कृष्ण आए , राम आए , अनेकों उनके अवतार महापुरूष बन कर आए और आते रहते हैं हमें प्रेरित करने के लिए । वर्तमान के कर्म के प्रति और भविष्य के प्रति सचेत करते हैं । कुछ लोग सावधान हो जाते हैं और चल पड़ते हैं उनके बतलाए मार्ग पर । अधिकतर लोग नहीं समझते हैं और अहंकार बस भगवान और महापुरुषों का मजाक उड़ाते हैं और फिर उनका जीवन खुद एक दिन माजाक का पात्र बन जाता है तब तक बहुत देर हो जाती है , मानव शरीर कब छीन जाए किसको पता है । अगला जन्म में कौन सा शरीर मिले दंड के रूप में किसी को नहीं पता ।
श्री राधे ।