स्वदेशी भारतम् संस्कृत भारतम् swadeshi bharatam sanskrit bharatam

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स्वदेशी भारतम् संस्कृत भारतम् swadeshi bharatam sanskrit bharatam स्वर्णीम भारत बनाना

08/08/2021
10/03/2020

स्वरोजगार लघू उद्योग आयुर्वेद व स्वदेशी अभीयान पर चर्चा करने हेतू व इस अभीयान को भारत के सभी घरो मे पहूचाने हेतू हमने भारत के सभी राज्यो का ग्रूप बनाया है और अब जीले का ग्रूप व इसके बाद तहसील का ग्रूप बनाकर इस ग्रूप चर्चा के माध्यम से विदेशी कम्पनियो के उत्पादन का बहिस्कार करके एक दूसरे को सहयोग करके स्वदेशी कारखानो की स्थापना करंगे तो आपसे विनंती है कि आप अपने परीचितो से चर्चा करके यदि वह अनूमती दे तो उनका नाम मोबाइल नं जिला व राज्य मूझे मेरे वट्स अप नं पर बताइए और आप वट्स अप फेसबूक और दूसरे सभी माध्यम जिसका आप इस्तेमाल करते है वहा पर मेरा यह पोष्ट शेयर करिए आपके ऐसा करने पर जो मित्र इस अभियान मे भाग लेना चाहते है वह मित्र अपना नाम जीला तालूका व राज्य बताएंगे मै आपसे यह सहायता इसलिए मांग रहा हू क्योकि हमारे इस अभियान को सफल बनाने हेतू भारत के सभी राज्यो से लाखो करोडो सदस्य चाहिए जबकी एक वट्स् अप ग्रूप मे सिर्फ 257 सदस्यो की ही छमता है तो आपके माध्यम से जीन मित्रो का परिचय आएगा उन्हे उनके स्थानीय ग्रूप मे मै एड कर सकूंगा और स्वदेशी अभियान को तेजी से भारत के सभी घरो तक पहूचा सकूंगा मेरा परिचय इस प्रकार है मेरा नाम indrajit k. yadav है | जीला- mumbai तालुका- ghatkopar राज्य- maharastra है सभी मित्र इसी तरह अपना परिचय अवस्य दे मेरा नाम इन्द्रजीत है. वंदेमातरम्

----- छोटा -----आम के पेड़ के ही थोड़े बगल में अमरूद का पेड़ है। ये अमरूद का पेड़ हमने बाद में लगाया था। ऐसा लगता है ये अमरू...
18/05/2019

----- छोटा -----
आम के पेड़ के ही थोड़े बगल में अमरूद का पेड़ है। ये अमरूद का पेड़ हमने बाद में लगाया था। ऐसा लगता है ये अमरूद कभी बड़ा नहीं हो पायेगा। आम का वृक्ष अपने मजबूत और बड़े होने के कारण इसे चारो तरफ से घेर रखा है। ये अमरूद का पेड़ आम की वजह से दूर से नज़र भी नहीं आता।
छोटा होना एक तरह का श्राप है, मैं भी घर का छोटा हूँ। ये बात मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है।
अठाईस साल का होने वाला हूँ पर छोटा हूँ। भैया इकीस साल में बड़े हो गए। हर फैसला खुद लेते हैं घर का जमीन का या किसी भी बात का। मैं हर फैसले में उनपर निर्भर रहता हूँ। दिल से नही! दबाव से। छोटे होने का दबाव। ये बात मुझे तब समझ नहीं आती थी, पर शादी के बाद सब समझ आने लगा। बीवी कहती है.....
"जिंदगी भर बच्चे ही बने रहो। सुनती हूँ तुम्हारी उम्र से बहुत पहले भैया ने सारी जिम्मेदारी ले ली थी। तुम बस भैया की पूँछ ही पकड़े रहोगे ज़िन्दगी भर, कुछ नहीं कर पाओगे ना खुद के लिए ना बच्चों के लिए।"
इस बात पर दिल में आग लग जाती है। मन में सोचा अब बहुत हुआ।आज फैसला ले ही लूँगा।
"भैया! मैं अपने हिस्से की कुछ जमीन बेचकर पार्ट्स की दुकान लगाने वाला हूँ, और ये पूछ नहीं रहा मेरा खुद का फैसला है।"
"जमीन का हिस्सा कब हुआ रे छोटे! और ये राइस मिल तो ठीक ही चल रहा है अपना" भैया खाने के बाद हाथ धोते हुए बोले.....
"तो फिर आधा पैसा हर साल मुझे क्यूँ नहीं मिलता, मुझे तो कोई हिसाब नहीं देता?"
"आधे के बारे में तो मैं कभी सोचा ही नहीं छोटे! जितनी तुम्हें जरूरत होती तो तुम्हें दे देता हूँ, वैसे ये चाभियाँ है और वो आलमारी। हिसाब समझ आये तो ठीक है नहीं तो कल ऑफिस आकर बाकी समझ ले फिर ज़िम्मेदारी भी ले ले धीरे धीरे" चाभी दे भैया उदास मुस्कुराहट के साथ चले गए।
मैंने सारी फाइल चेक किया, सब हिसाब मिलाया। कुछ और कागजात देखा। भैया से पहले हर जगह मेरा नाम है। मेरे लिए फिक्स डिपॉजिट। मेरे भविष्य के लिए बहुत सारे प्लान्स ले रखे हैं भैया ने। सब वापस बन्द कर मैं आँगन वाले छत पर गया, जानता हूँ भैया जब भी उदास होते हैं वही मिलते हैं।
"अरे छोटे तुम! कुछ हिसाब समझ में आया तुझे?" आंखों में कुछ था जिसे वो साफ करते बोले।
"नहीं भैया! इतना छोटा हूँ कि बड़े दिल का हिसाब समझ ही नहीं पाया" मैं पश्चाताप में बहकर भैया के गले लग गया।
"सुन! तू अब तो थोड़ा समझदार बन, रोज ऑफिस आया कर, सलोनी को भी अच्छा लगेगा।"
मैं भैया के गले लग..उनदोनो वृक्ष को देख रहा था। तेज हवाओं, चिलचिलाती धूप और उनपर फेंके गए पत्थरों को भी पहले आम का पेड़ ही सहता आया है..!

मेरे दिल को छूने वाली बात आप तक प्रिय चिकित्सकों अगर आपको अपने रोगी में निम्न लक्षण दिखें तो कृपया उनकी फीस में रियायत क...
13/05/2019

मेरे दिल को छूने वाली बात आप तक
प्रिय चिकित्सकों अगर आपको अपने रोगी में निम्न लक्षण दिखें तो कृपया उनकी फीस में रियायत कर दिया करें-

1. जिसे उसकी बीमारी जल्द इसलिए ठीक करना है कि जल्दी से वह फिर मजदूरी चला जाए क्योंकि घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं है।

2. जब आप उन्हें कहें कि दवाई दूध से लेना है और वह आपसे बदले में पूछे कि साहब क्या पानी से नहीं ले सकता, क्योंकि दूध तो बहुत महंगा पड़ेगा।

3. जब कोई महिला कहते कहते रो दे कि पति की मौत के बाद उसपर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा है।

4. जब बच्चे की दवाई और आपकी फीस का इंतजाम उस मासूम की बचत वाली गुल्लक तोड़ कर किया गया हो।

5. जब रोगी थोड़ी रियायत मांगे कि उसके पास वापस गांव जाने के पैसे कम पड़ रहे हैं...
..आदि आदि

ऐसे कई और लक्षण हैं जिन्हें देखकर हम समझ सकते हैं कि हमारा मरीज़ कितना गरीब और लाचार है और उसे एक सहारे की ज़रूरत है... उनकी मुश्किलें देखकर आप अपनी फीस थोड़ी या पूरी कम कर दिया करें और दवाओं में अगर आपके पास फिजिशियन सैंपल हो तो उससे या फिर सस्ती (लेकिन असरकारी) दवाई से इलाज करें।

मैं जानता हूँ कि इससे कई लोग आपका फायदा उठाना चाहेंगे लेकिन आप मेरा यक़ीन कीजिए वे केवल 2 या 5% ही होंगे ...95% वाकई मुश्किल में होंगे... और आप जब रोग या बीमारियों को इतने अच्छे से डायग्नोस कर सकते हैं तो फिर सच्ची मजबूरियों को भी डायग्नोस कर ही लेंगे... है ना?

02/05/2019

ऐसे उपाय जो कैंसर से बचाये
सब्जि़यों और फलों में फाइबर होता है।
स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को महत्व दें।
गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से होता है।
अपने वजन को नियंत्रण में रखें।
कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा डर आने लगता है। इस बात में कोई शक नहीं की कैंसर वर्तमान की सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है। लोगों में इस रोग की जानकारी के अभाव के चलते, यह रोग और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालांकि समय से इसकी पहचान कर व कुछ उपायों को कर इस रोग से बचा जा सकता है।
कैंसर जैसी बीमारी के जोखिम कारकों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन अब तक इस बीमारी के वास्तविक कारणों का पता नहीं चला है। ऐसे में आप सावधानी के तौर पर कैंसर से बचने के कुछ सामान्यत उपाय अपना सकते हैं। यदि शुरुआत में कैंसर को पहचान लिया जाए और इसका मुकम्मल इलाज कराया जाए तो कैंसर का इलाज मुमकिन है। वैसे, अगर कुछ चीजों से बचें और लाइफस्टाइल को सुधार लें तो कैंसर के शिकंजे में आने की आशंका ही काफी कम हो जाती है। तो यह सबसे अच्छा विकल्प होना चाहिए। कैंसर से बचाव के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखें।
हरी सब्जि़यां बचायेंगी
ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जि़यां व फल खायें क्योंकि सब्जि़यों और फलों में फाइबर होता है। गाजर, फूलगोभी, पत्ता गोभी जैसी सब्जि़यां जरूर खायें और सेब जैसे फल खायें।
अधिक तला-भुना खाना ना खायें
अपने खाने में स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को महत्व दें क्योंकि ज्यादा तले-भुने आहार के सेवन से आपका पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
इलेक्ट्रानिक चीजों के ज्याद इस्तेमाल से बचें
मोबाइल फोन, एसी, जैसे दूसरे उपकरणों का प्रयोग कम से कम करें क्योंकि इनके अधिक प्रयोग से कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
मोटापे को रखें नियंत्रित
अपने वजन को नियंत्रित रखें क्योंकि मोटापे से कैंसर और दूसरी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
गर्भनिरोधक गोलियों का सहारा ना लें
महिलाओं में लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से कैंसर हो सकता है।
तनाव से दूर रहें
आधुनिक युग की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है तनाव, इसलिए अपने व्यस्त कार्यक्रम में से स्वयं को तनावमुक्त करने का भी समय निकालें।
पर्याप्त नींद क्यों है जरूरी
हम दूसरी बातों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन नींद जैसे विषय को गंभीरता से नहीं लेते। स्वस्थ रहने के लिए कम से कम 8 घंटे जरूर सोयें।
धूम्रपान और नशा
धूम्रपान और नशे को कैंसर का एक बड़ा कारण माना जाता है। नशा चाहे किसी भी प्रकार का हो कैंसर को दावत दे सकता है। इसलिए नशे से दूरी बनाकर रखें।
कैंसर वर्तमान की सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है। हालांकि कुछ बातों का ध्यान रख इस गंभीर बीमारी से न केवल बचाव किया जा सकता है बल्कि इसके उपचार के आसान भी बनाया जा सकता है।

29/04/2019

शरीर में कैसे फैलती हैं कैंसर कोशिकाएं
कैंसर शरीर की कोशिकाओं में फैलने वाला रोग है। मानव शरीर छोटी- छोटी करोड़ों कोशिकाओं से मिलकर बना है। कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण कैंसर रोग होता है। कैंसर शरीर के एक भाग में नहीं बल्कि अलग-अलग भागों में भी हो सकता है।
कैंसर की शुरूआत के बाद क्षतिग्रस्त कोशिकाएं तेजी के साथ फैलती हैं। यह उस समय ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब क्षतिग्रस्त कोशिकाएं अनियंत्रित होकर ऊतकों तक फैलने लगती हैं। पहले कैंसर एक कोशिका में फैलता है फिर धीरे-धीरे लिम्फ सिस्टम और खून के जरिए फैलकर स्वस्थ कोशिकाओं को भी अपनी चपेट में ले लेता है। जब कैंसर बढ़कर शरीर के अन्य भागों में फैलता है तो यह स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित करता है। इसके बाद रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है और इसका इलाज भी संभव नहीं हो पाता।
कैसे फैलती हैं कैंसर कोशिकाएं
कैंसर की शुरूआती अवस्था में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के टूटने से ये शरीर के दूसरे भागों में फैलने लगती हैं और उस जगह पर धीरे-धीरे बढ़नी शुरू हो जाती हैं। कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से अलग होती हैं। ये अन्य कोशिकाओं को तेजी से अपने प्रभाव में ले लेती हैं। कैंसर कोशिकाएं निम्न प्राकर से फैलती हैं।
रक्त संचार के द्वारा
क्षतिग्रस्त कोशिकाएं यानी कैंसर कोशिकाएं रक्त संचार के द्वारा शरीर के अन्य हिस्सों फैलती हैं। शुरूआती दौर में जब कैंसर कोशिकाएं जन्म लेती हैं तो ये प्राथमिक कैंसर यानी जिस भाग में कैंसर है वहां से अलग हो जाती हैं। अलग होने के ये रक्त वाहनियों के माध्यम से रक्त प्रवाह में मिल जाती हैं। अब ये कैंसर कोशिकाएं रक्त प्रवाह को प्रभावित करती हैं। रक्त प्रवाह के दौरान रूकावट आने पर क्षतिग्रस्त कोशिकाएं रक्त वाहिनी को प्रभावित करती हैं। इस रक्त वाहिनी का आकार छोटा होता है, इसे केपलरी कहते हैं। रूकावट आने के बाद क्षतिग्रस्त कोशिकाएं रक्त वाहिनी में वापस आना शुरू कर देती हैं और नई कैंसर कोशिकाएं जन्म लेना शुरू कर देती हैं।
लसीकातंत्र के द्वारा
जिस तरह रक्त संचार के द्वारा कैंसर कोशिकाएं शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में फैलती हैं, उसी तरह लसीका तंत्र के द्वारा भी कैंसर कोशिकाएं रक्त प्रवाह में फैल जाती हैं। कैंसर कोशिका पहले प्राथमिक कैंसर यानी शरीर के जिस भाग में कैंसर है वहां से अलग होती है। कैंसर ग्रसित भाग से अलग होने के बाद कैंसर कोशिका लिम्फ फ्लूड में फैल जाती है और तब तक फैलती हैं जब तक कि लिम्फ नोड के छोटे भाग में अवरोध नहीं आता। इसके बाद ये कैंसर के द्वितीय चरण में फैलना शुरू कर देती हैं।
क्यों फैलती हैं कैंसर कोशिकाएं
कैंसर कोशिकाएं शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में क्यों फैलती हैं? यदि कैंसर कोशिकाओं का शरीर के एक भाग से दूसरे भाग फैलना रुक जाए तो कैंसर से होने वाली मौत के आंकड़ों में गिरावट आ जाएगी। कैंसर से होने वाली अधिकतर मौत के मामलों में देखा गया है कि इस रोग के प्राथमिक चरण में होने पर रोगी की मृत्यु नहीं होती बल्कि द्वितीय चरण में रोगी की मौत हो जाती है। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि क्षतिग्रस्त कोशिकाएं स्वस्थ कोशिकाओं से जुड़ी होती हैं और ये लगातार स्वस्थ कोशिकाओं को फॉलो करती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से जुड़े होने के कारण स्वस्थ कोशिकाएं इनके प्रभाव में आ जाती हैं और कैंसर कोशिकाओं का प्रभाव बढ़ जाता है।

अगले पोस्ट मे हम बचाव के बारे मे बताएगे
वन्देमातरम्

28/04/2019

राजीव भाई के लिए ''स्वदेशी'' का अर्थ बिलकुल सरल और स्पष्ट है ।
क्योंकि राजीव भाई के "'स्वदेशी" की परिकल्पना आजादी बचाओ आंदोलन के समय राजीव भाई उनके मित्रो योगेश मिश्र और अन्य साथियो के कई दिन तक किए गए शोध का परिणाम है ।

आप ऐसे समझे कि मूलतः तीन चीजे है विदेशी-देशी-और स्वदेशी ।

आप लोग ''देशी'' को ''स्वदेशी'' समझने की भूल कर रहे है इसीलिए लोगो मे स्वदेशी को लेकर भ्रम है । समझिए कैसे ?

स्वदेशी की सरलीकृत परिभाषा ( केवल भाव को समझाने के लिए)

स्वदेशी: जो प्रकृति और मनुष्य का शोषण किये बिना अपनी सनातन संस्कृति और सभ्यता के अनुकूल आपके स्थान के सबसे निकट किसी स्थानीय कारीगर द्वारा बनायीं गयी या कोई सेवा दी गयी हो और जिसका पैसा स्थानीय अर्थव्यवस्था में प्रयोग होता हो वो स्वदेशी है ।

(जैसे- कुम्हार, बढ़ई, लौहार, मोची, किसान, सब्जीवाला, स्थानीय भोजनालय, धोबी, नाई, दर्जी आदि द्वारा उत्पादित वस्तु या सेवा)

उदाहरण के तौर पर - नीम ,बाबुल,कीकड़ आदि का दातुन स्वदेशी कहा जाएगा ,
जो आपके घर के निकट किसी कोने मे किसी गरीब द्वारा बेचा जा रहा है ।
एक तो दातुन बनने मे प्रकृति का कोई शोषण नहीं है , दूसरा ये पूर्ण रूप से प्रकृतिक है , और किसी गरीब द्वारा आपके घर के निकट बेचा जा रहा है ।
(इसके साथ बस आपको अपने जन्मदिन पर के नीम का पेड़ भी लगाना है)

लेकिन अब अगर ये दातुन रिलाईंस ,टाटा बिरला,पतंजलि जैसी कंपनी बेचने लगे , तो दातुन करना तो स्वदेशी ही माना जाएगा । लेकिन घर के निकट किसी गरीब को छोड़ कर हजारो करोड़ रु मुनाफा कमाने वाली इन कंपनियो से दातुन खरीद कर करना स्वदेशी नहीं माना जाएगा ।

इसलिए दाँतो के लिए दातुन स्वदेशी है,नमक तेल आदि से बना मंजन स्वदेशी है जिसमे प्रकृति का कोई शोषण नहीं है बेशर्ते वो आपके घर के निकट किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा बेचा जा रहा हो ।

टूथपेस्ट कभी स्वदेशी नहीं हो सकता ,क्योंकि कोई भी टूथपेस्ट जितना मर्जी आयुर्वेदिक ही क्यों ना हो उसमे कुछ तो कैमिकल पड़ते ही पड़ते है । और टूथपेस्ट हमेशा बड़ी-बड़ी विदेशी और भारतीय कंपनियो द्वारा बेचा जाता है ,
अब अगर आप किसी भारतीय कंपनी का बना टूथपेस्ट करते हो तो वो देशी माना जाएगा स्वदेशी नहीं ।

__________________________________________
इसी प्रकार ताजा गन्ने का ,मौसमी का,संतरे आदि फल का रस जो आपके घर के निकट किसी स्थानीय गरीब रेहड़ी वाला बेच रहा होगा वो उससे खरीदकर वो रस पीना स्वदेशी माना जाएगा । क्योंकि फल का रस पूर्ण रूप से प्रकृतिक है और आपके स्थानीय किसी व्यक्ति को रोजगार भी दे रहा है ।

अब आप सोचिए कि टाटा,बिरला,अंबानी,पारले,पतंजलि आदि हजारो करोड़ कमाने वाली कंपनियाँ नारियल पानी,गन्ने का रस,मौसमी का रस,फ्रूटी ,एपी फ़िज़ आदि पैक करके बेचना चालू कर दे तो उनसे खरीदकर किसी फल का रस पीना कभी स्वदेशी नहीं कहलाएगा । ( वो देशी होगा)

1) तो विदेशी कंपनियो द्वारा बनाया गया पेय पदार्थ कोक,पेप्सी,लिमका,फेंटा आदि खरीदकर पीना ""विदेशी" ,

2) टाटा,बिरला,अंबानी,पतंजलि आदि हजारो करोड़ कमाने वाली भारतीय कंपनियो का बना कोई पेय पदार्थ खरीदना और पीना ये हुआ ''देशी''

3) घर के निकट किसी स्थानीय व्यक्ति ,(गरीब रेहड़ी वाला आदि) से खरीदकर
उसे रोजगार देकर कोई पेय पदार्थ जिसमे प्रकृति का शोषण न हो वो ''स्वदेशी'' है ।

(दारू हमारी सभ्यता का अंश नहीं है इसलिए दारू पीना कभी स्वदेशी नहीं हो सकता वो बेशक घर के निकट कोई बेचे या कोई भारतीय कंपनी)

क्योंकि मैंने ऊपर ही कहा था कि स्वदेशी का अर्थ अपनी सभ्यता,संस्कृति का उल्लघन करना नहीं है ,

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इसी प्रकार दीपवाली के दिनो मे मिट्टी के दीपक जलाना ,और वो दीपक किसी स्थानीय कुम्हार से खरीदना कर जलाना ही स्वदेशी कहलाएगा । क्योंकि मिट्टी से बना दीपक पूर्ण रूप से प्रकृतिक है ,और स्थानीय कुम्हार से खरीदना उसे रोजगार देना ही स्वदेशी है ।

बिजली की झालड़ (लड़ी) वो बेशक भारत की किसी बड़ी कंपनी ने ही क्यों ना बनाई हो वो देशी कहलाएगी , स्वदेशी नहीं , स्वदेशी तो मिट्टी का दीपक ही होगा बेशर्ते वो किसी स्थानीय कुम्हार द्वारा निर्मित हो और बेचा जाए ।

______________________________________

21/04/2019

वन्दे मातरम्

21/04/2019

‘‘ क्यों ! ! तुम लोगों ने घंटी नहीं सुनी? क्लास शुरु
हो चुकी है और तुम लोग यहाॅं क्या कर रहे हो?‘‘
‘‘ साॅरी सर! हमलोग विचारों में इतने खो गये कि
कब घंटी बज गई पता ही नहीं चला‘‘
अच्छा! हम भी तो जाने किन विचारों में खो गये थे?
क्लास अटेंड न करने का यह कौन सा प्लान चल
रहा था?‘‘
सर! हम लोग यह सोच रहे थे कि पिछले तीन वर्षों
से हमारे इस ग्राॅउंड के चारों ओर फारेस्ट
डिपार्टमेंट बृक्षारोपण करता है और देखभाल की
जिम्मेवारी लेता है पर उन सैकड़ों रोपे गये पौधों में
से केवल दो ही जीवित हैं उनकी भी न तो छाया का
लाभ होता है और न ही उनके फूलों में सुगंध, ये लोग
इस प्रकार के अनुपयोगी पौधे क्यों बार बार लगाते
हैं?‘‘
‘‘ तुम लोगों का सोच तो सही है, पर यह सब हमारे
देश के नेताओं और उनके सलाहकार अफसरों की
सनक का प्रभाव ही कहा जायेगा जो हर काम को
यह सोचकर करते कराते हैं कि उसमें उनको
कितना आर्थिक लाभ होगा ‘‘
‘‘ सर ! कल हमलोगों को विज्ञान की क्लास में
पढ़ाया गया है कि पीपल का पेड़ पर्यावरण के
प्रदूषण को दूर करने में बहुत सहायक है, वह दिन
रात जीवनदायनी आक्सीजन देता है और प्रदूषण
कारक कार्वनडाईआक्साइड सोखता है, जबकि
अन्य पेड़ पौधे केवल दिन में ही आक्सीजन दे पाते
हैं। पीपल को अधिक खाद पानी की भी जरूरत नहीं
होती, कहीं भी उग आता है, तो इस प्रकार के
वहुउपयोगी और कम लागत पर उपलब्ध होने वाले
पीपल के पौधे का सभी जगह रोपण क्यों नहीं किया
जाता?‘‘
‘‘ मैंने कहा न! देश के कर्णधार पहले प्रदूषण
फैलाने के लिये बड़े बड़े उद्योग लगायेंगे फिर, हो
हल्ला मचायेंगे कि जीवन को खतरा है.... और एक
ही जगह बार बार अनुपयोगी अल्पजीवी पौधों का
रोपण करायेंगे.... जैसा कि तुम लोगों ने देखा भी है‘‘
‘‘सर! क्या देश के सभी उद्योगिक परिसरों में
अधिक से अधिक पीपल के पेड़ लगाने का सुझाव
नहीं दिया जा सकता ताकि प्रदूषण फैले ही नहीं?‘‘
‘‘क्यों नहीं ! परंतु उस पर ध्यान कौन देता है?
हमारी सुनता कौन है?‘‘
‘‘ अच्छा सर! तो क्या पीपल के पेड़ लगाने का
काम हम लोग अपने परिसर से ही प्रारंभ नहीं कर
सकते? उसकी तो कलम भी लग जाती है, कुछ दिनों
तक ही पानी देना पड़ता है फिर तो वह अपने आप
बढ़ने लगता है , कहीं भी पनप जाता है और सैकड़ों
वर्ष जीवित रहता है, छाया भी खूब घनी होती है,
उसके फल और छाल आयुर्वेदिक औषधियाॅं बनाने
के काम आती हैं, यह हमने पढ़ा है।‘‘
‘‘ क्यों नहीं , गुड आइडिया, परिसर में ही क्यों ?
सड़कों के किनारे और गाॅंव के आस पास रिक्त
स्थानों पर भी उन्हें क्यों न लगाया जाये, हमें
देखकर अन्य स्कूलों में भी पीपल के पेड़ लगाने
का विचार आयेगा। आज शाम को ही हम लोग चारों
ओर एक एक पीपल का पेड़ लगायेंगे और पूरा बढ़
चुकने तक उसकी देखरेख करेंगे , गाॅंव के अन्य
स्थानों के संबंध में ग्राम प्रधान से मैं आज ही बात
करता हॅूं।‘‘

वन्दे मातरम्
15/03/2019

वन्दे मातरम्

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Mumbai

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+919323068697

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