SuSharnam

SuSharnam Yoga is not any religion but a way of living. It aims for a healthy mind in a healthy body. Our Guiding Mantra: "Be Good. Do Good." You're feeding a hungry soul.

Join the Susharnam Movement – Where Every Breath Becomes a Blessing

At Susharnam, we’re not just teaching yoga—we’re nurturing lives, healing hearts, and building a more compassionate world. We are a purpose-led community where your journey to inner peace becomes someone else's path to survival. More Than a Practice – A Mission with Heart
Every session you attend, every retreat you join, becomes a ripple of positive change. A large part of what we earn doesn’t stay with us—it flows directly into serving those who are often forgotten. This simple yet profound truth shapes everything we do. Whether it's a yoga posture or a plate of food offered to a soul in need, every act at Susharnam carries the intention of love, care, and upliftment.


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What We’ve Done Together (And You Can Be a Part Of It):

🌿 Healing Through Yoga:
We’ve brought free yoga sessions to over 200 de-addiction centers across the nation—offering not just exercise, but hope, discipline, and self-belief to those battling their inner demons.

🏠 Home for the Forgotten:
A significant part of our earnings is dedicated to the care of mentally challenged individuals who have no one else. From shelter and food to emotional care, we strive to give them dignity and love.


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Why You Matter
When you join a Susharnam workshop or retreat, you're not just transforming your body and mind—you’re becoming a lifeline for someone else. You're sheltering someone without a home. You're healing wounds you may never see—but that matter deeply.


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This is your invitation—
To be more than a . To be more than a . To be a catalyst for change. Come, walk this path with us. Together, let’s breathe love. Let’s live compassion. Let’s be .

☕ एक नई स्टडी ने साबित किया है कि कॉफी सिर्फ आपके मूड को ही नहीं, बल्कि आपकी बॉडी की एजिंग को भी प्रभावित कर सकती है।और ...
08/12/2025

☕ एक नई स्टडी ने साबित किया है कि कॉफी सिर्फ आपके मूड को ही नहीं, बल्कि आपकी बॉडी की एजिंग को भी प्रभावित कर सकती है।
और यह असर खास तौर पर उन लोगों में देखा गया है जो गंभीर मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं—
जैसे स्किज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर या साइकोसिस के साथ डिप्रेशन।

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🔍 स्टडी में क्या पाया गया?

रिसर्च के अनुसार—
जो लोग रोज़ 3 से 4 कप कॉफी पीते हैं, उनके अंदर टिलोमियर लंबाई (Telomere Length) ज़्यादा पाई गई।
टिलोमियर वह मार्कर होता है जिससे पता चलता है कि शरीर जैविक रूप से कितना तेज़ या धीमा बूढ़ा हो रहा है।

📌 जितने लंबे टिलोमियर, उतनी स्लो एजिंग!

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✨ कॉफी पीने का फायदा कितना?

कॉफी पीने वाले प्रतिभागियों में यह असर इतना मजबूत था कि—
उनकी बायोलॉजिकल एज लगभग 5 साल कम पाई गई, उन लोगों की तुलना में जो कॉफी बिल्कुल नहीं पीते।

मतलब —
शरीर अंदर से लगभग 5 साल “युवा” नजर आया।

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⚠️ लेकिन ध्यान रहे—

यह फायदा सिर्फ 3–4 कप कॉफी तक सीमित था।
इससे ज़्यादा कॉफी पीने पर ऐसा असर नहीं मिला।

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अगर संतुलित मात्रा में कॉफी पी जाए तो यह न सिर्फ मानसिक रूप से बल्कि शारीरिक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा कर सकती है।
हालांकि यह प्रभाव खासकर गंभीर मानसिक बीमारियों वाले मरीजों में ज्यादा स्पष्ट देखा गया है।

🌾 पूजा में चावल ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए 5 खास कारण 🌼क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में हमेशा चावल (Akshat) ही क्यो...
07/12/2025

🌾 पूजा में चावल ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए 5 खास कारण 🌼

क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में हमेशा चावल (Akshat) ही क्यों प्रयोग किया जाता है, गेहूं क्यों नहीं?
इसके पीछे बहुत सुंदर और गहरा कारण है… ✨

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✅ 1. चावल शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है

चावल को पूर्णता, पवित्रता और prosperity का चिन्ह माना जाता है, इसलिए पूजा में इसका उपयोग बेहद शुभ माना जाता है।

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✅ 2. Rice = Akshat (अखंड, जो टूटे नहीं)

संस्कृत में चावल को अक्षत कहा गया है।
अर्थ — जो टूटे नहीं।
इसीलिए इसे भगवान को अर्पित करना पवित्र माना जाता है।
गेहूं पिस जाता है, टूट जाता है — इसलिए अक्षत नहीं माना जाता।

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✅ 3. चावल जल्दी positive vibrations को absorb करता है

माना जाता है कि rice divine ऊर्जा और आशीर्वाद को तेजी से धारण करता है, इसलिए यह पूजा का मुख्य हिस्सा है।

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✅ 4. लंबे समय तक बिना खराब हुए सुरक्षित रहता है

मंदिरों और धार्मिक समारोहों के लिए rice को store करना आसान है।

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✅ 5. Practical और symbolic दोनों रूप से perfect

छोटे, हल्के और छिड़कने में आसान—
Tilak, मंत्रोच्चार, कलश पूजा, आशीर्वाद—हर जगह rice का उपयोग सुविधाजनक है।

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किस्मत की रेखाएँ किसी को दिखाई नहीं देतीं…हम जितना उसे समझने की कोशिश करते हैं, उतना ही वह हमें हैरान कर देती है।मुश्किल...
05/12/2025

किस्मत की रेखाएँ किसी को दिखाई नहीं देतीं…
हम जितना उसे समझने की कोशिश करते हैं, उतना ही वह हमें हैरान कर देती है।
मुश्किल समय में हम भाग्य को कोसते हैं—क्यों मेरे साथ?
और अच्छे समय में हम सोचते हैं—हमसे ज़्यादा खुशकिस्मत कोई नहीं।

लेकिन सच तो यह है कि किस्मत का खेल पल भर में बदल सकता है।
कभी राजा रंक बन जाता है… और कभी रंक राजा।

ऐसा ही एक अनोखा मोड़ एक भारतीय युवक की ज़िंदगी में आया।
जर्मनी की मेट्रो में थका-हारा, निराश-सा बैठा वह युवक… न किसी से उम्मीद, न कोई सहारा।
उसे नहीं पता था कि उसी क्षण किस्मत उसके लिए एक नई राह लिख रही है।

संयोग से उसके बगल में बैठी थी हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मेसी विलियम्स—
गेम ऑफ़ थ्रोन्स की स्टार, जिसे दुनिया देखने को तरसती है।
लेकिन वह युवक शांत बैठा रहा—ना कोई उत्साह, ना कोई प्रतिक्रिया।

कुछ ही समय में वह तस्वीर पूरे जर्मनी में वायरल हो गई।
प्रसिद्ध मैगज़ीन Der Spiegel ने उस युवक की तलाश शुरू की
और आखिरकार वह म्यूनिख में मिल गया—बिना कागज़ात के, संघर्षों से घिरा हुआ।

जब पत्रकार ने पूछा कि उसने इतनी बड़ी स्टार को देखकर भी कोई रिएक्शन क्यों नहीं दिया,
तो उसका जवाब हर इंसान को सोचने पर मजबूर कर देता है—

“जब जेब खाली हो, भविष्य धुंधला हो, और हर दिन डर में बीतता हो…
तो फिर फ़र्क नहीं पड़ता कि बगल में कौन बैठा है—चाहे सेलिब्रिटी ही क्यों न हो।”

उसकी ईमानदारी, उसकी सच्चाई और उसका संघर्ष मैगज़ीन के दिल को छू गया।
उन्होंने उसे 800 यूरो प्रति माह की नौकरी ऑफ़र कर दी—एक नई शुरुआत, एक नया जीवन।

और उसी नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट ने उसे तुरंत जर्मनी में रहने का कानूनी परमिट दिला दिया।

यही किस्मत है—जिसे हम देख नहीं पाते, लेकिन जो हमें सही समय पर सही दिशा में मोड़ देती है।
बस टूटना नहीं है… क्योंकि अगला मोड़ शायद आपकी ज़िंदगी बदलने वाला हो।

In today’s fitness culture we spend so much money on fancy protein powders, but interestingly, “Sattu” — our traditional...
05/12/2025

In today’s fitness culture we spend so much money on fancy protein powders, but interestingly, “Sattu” — our traditional roasted gram flour — is becoming a trending natural protein drink in the United States.

People are loving it because it’s clean, wholesome, and 100% natural.

Sattu not only boosts strength and stamina but also supports digestion far better than many commercial protein supplements—and that too without any side effects.
Once known as the go-to food for wrestlers, this simple powerhouse is now being recognized as one of the most affordable and effective sources of real energy.


🌎 Chicxulub Crater: वह विशाल गड्ढा जिसने डायनासोर का अंत कर दियादुनिया के इतिहास में 66 मिलियन साल पहले एक ऐसा हादसा हुआ...
23/11/2025

🌎 Chicxulub Crater: वह विशाल गड्ढा जिसने डायनासोर का अंत कर दिया

दुनिया के इतिहास में 66 मिलियन साल पहले एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पृथ्वी का चेहरा बदल दिया। मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप (Yucatán Peninsula) में एक “अदृश्य लेकिन विशाल” गड्ढा है — Chicxulub Crater — जिसे वैज्ञानिक पृथ्वी का सबसे विनाशकारी प्रभाव स्थल मानते हैं।

यह वही जगह है जहाँ वह विशाल क्षुद्रग्रह (asteroid) टकराया था जिसकी वजह से डायनासोर समेत पृथ्वी की 75% प्रजातियाँ खत्म हो गईं।

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🪐 Chicxulub Crater क्या है?

यह एक impact crater यानी क्षुद्रग्रह/उल्का के टकराने से बना विशाल गड्ढा है।

इसका व्यास लगभग 180 किलोमीटर (180 km wide) है।

यह ज्यादातर भूमि के नीचे दबा हुआ है, इसलिए यह जमीन पर नजर नहीं आता।

यह लगभग 66 मिलियन साल पुराना है।

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☄️ कैसे बना यह गड्ढा?

लगभग 66 मिलियन साल पहले, लगभग 10–12 किलोमीटर चौड़ा एक asteroid 70,000 किमी/घंटा की गति से पृथ्वी से टकराया।
टक्कर इतनी शक्तिशाली थी कि—

विस्फोट की ऊर्जा 10 अरब परमाणु बमों के बराबर थी।

आसपास का तापमान कुछ सेकंड में हजारों डिग्री तक पहुँच गया।

वैश्विक आग, सुनामी और धूल के बादल पूरे ग्रह पर फैल गए।

सूरज की रोशनी महीनों तक कम हो गई — जिसको वैज्ञानिक “इम्पैक्ट विंटर” कहते हैं।

यह घटना डायनासोर का अंत और स्तनधारियों (जिनमें हम इंसान भी आते हैं) के विकास की शुरुआत बनी।

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🌍 Chicxulub Crater क्यों महत्वपूर्ण है?

यह धरती के इतिहास का सबसे बड़ा प्रमाण है कि एक टक्कर पूरी पृथ्वी को बदल सकती है।

इससे हमें समझ आता है कि पृथ्वी पर जीवन कितनी नाज़ुक और कितनी अनोखी प्रक्रिया है।

आधुनिक विज्ञान इस क्रेटर को पढ़कर यह समझता है कि भविष्य में ऐसे टकरावों से पृथ्वी को कैसे बचाया जाए।

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🧬 डायनासोर का अंत और नया जीवन

इस टक्कर के बाद:

लगभग 75% जीव जंतु खत्म हो गए।

डायनासोर का युग समाप्त हुआ।

लेकिन उसी अंधकार से नए जीवन का जन्म हुआ — छोटे स्तनधारी तेज़ी से विकसित हुए, और करोड़ों साल बाद मनुष्य अस्तित्व में आए।

कह सकते हैं —
“अगर यह टक्कर न होती, तो शायद आज इंसान पृथ्वी पर न होते।”

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📍 यह गड्ढा दिखता क्यों नहीं?

Chicxulub Crater समुद्र तट के किनारे और जमीन के नीचे लगभग पूरी तरह दबा हुआ है।
आज इसके ऊपर कस्बे, जंगल और समुद्र हैं।
इसे वैज्ञानिकों ने

भूमिगत राडार

सैटेलाइट मैपिंग

समुद्री ड्रिलिंग
से खोजा और मापा है।

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🎯 5 रोचक तथ्य (FB पर डालने लायक)

1. यह पृथ्वी का तीसरा सबसे बड़ा impact crater है।

2. टकराने वाला asteroid माउंट एवरेस्ट से भी बड़ा था।

3. टक्कर के पल में बनने वाली लहरें 3,000 फीट से ऊँची सुनामी जैसी थीं।

4. क्रेटर इतना बड़ा है कि उसमें पूरा दिल्ली या मुंबई कई बार समा जाए।

5. यदि आप युकातान जाएँ, तो आप इस crater के ऊपर खड़े होंगे — लेकिन यह दिखाई नहीं देगा!

25/09/2025

दुर्गा पूजा में आरती का आनंद लेता तोता

25/09/2025

दुर्गा पूजा में कल क्या करना है ?

स्वस्थ जीवन का आधार: त्रिदोष संतुलन और प्राकृतिक चिकित्सा - पंकज शर्मा आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का स्वास्थ्य वात, ...
21/09/2025

स्वस्थ जीवन का आधार: त्रिदोष संतुलन और प्राकृतिक चिकित्सा - पंकज शर्मा

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का स्वास्थ्य वात, पित्त और कफ नामक तीन मौलिक दोषों के संतुलन पर निर्भर करता है। जब इन दोषों में असंतुलन आता है, तभी हम बीमार पड़ते हैं। इस संतुलन को बनाए रखने और बिगड़े हुए दोषों को ठीक करने के लिए, हम घरेलू चिकित्सा और प्राकृतिक जीवनशैली को अपना सकते हैं।

पंकज शर्मा जी का मानना है कि बड़ी आंत की स्वच्छता किसी भी रोग के निवारण की कुंजी है, और एनीमा इस सफाई के लिए एक प्रभावी पद्धति है।

1. वात (वायु दोष): 80 रोगों का मूल
वात शरीर में गति और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है। जब यह बिगड़ता है, तो शरीर में अवरोध और दर्द पैदा करता है।

मुख्य लक्षण
* दर्द: शरीर में कहीं भी रुककर टकराने वाली वायु दर्द पैदा करती है, जैसे पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, जोड़ों का दर्द, सीने का दर्द।
* अन्य: डकार आना, चक्कर आना, घबराहट और हिचकी आना।

प्रमुख कारण
* आहार: गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ (जैसे दालें), मैदा और बिना चोकर का आटा, बेसन से बनी वस्तुएं, दूध और उसके उत्पाद।
* शारीरिक: व्यायाम न करने से आंतों की कमजोरी।

* विशेष: वात दोष यूरिक एसिड भी बनाता है। जहाँ यूरिक एसिड जमा होता है, हड्डियों का तरल (ग्रीस) कम होने लगता है, जिससे जोड़ घिसते हैं, आवाज़ आती है, और स्लिप डिस्क या स्पोंडिलाइटिस जैसी समस्याएँ होती हैं।
सरल निवारण
* अदरक: वायुनाशक, रक्त पतला करने वाला और कफ निकालने वाला। रात में गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच सोंठ (सूखी अदरक) का सेवन करें।
* लहसुन: किसी भी गैस को तुरंत बाहर निकालता है। सीने में दर्द (ब्लॉकेज) की आशंका पर तुरंत 8-10 कली कच्चा लहसुन खाएं। इसे सब्जी, जूस या चटनी में कच्चा काटकर खाएं।
* मेथीदाना: वात को शांत करने में अदरक और लहसुन जैसा ही प्रभावी है।

प्राकृतिक उपचार
* सिकाई: प्रभावित अंग पर गर्म और ठंडी सिकाई करें। यदि अंग गर्म है, तो ठंडी सिकाई करें। यदि ठंडा है, तो गर्म सिकाई करें। यदि सामान्य है, तो 1 मिनट गर्म और 1 मिनट ठंडी सिकाई बारी-बारी से करें।

2. कफ (श्लेष्मा दोष): 28 रोगों का नियंत्रक
कफ शरीर में स्थिरता, चिकनाहट और रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करता है। इसके बिगड़ने से शरीर में भारीपन और चिपचिपापन आता है।

मुख्य लक्षण
* श्वसन: मुंह और नाक से बलगम आना, सर्दी, ज़ुकाम, खांसी, अस्थमा, टीबी, निमोनिया।
* अन्य: सीढ़ी चढ़ने पर हांफना, सांस लेने में तकलीफ।

प्रमुख कारण
* आहार: अत्यधिक तेल और चिकनाई वाली वस्तुएं, दूध और दूध के उत्पाद, ठंडा पानी और फ्रिज की वस्तुएं।
* जीवनशैली: धूल, धुएं में अधिक रहना, धूप का सेवन न करना।
सरल निवारण
* विटामिन C: यह कफ का शत्रु है। आंवला जैसे विटामिन C से भरपूर पदार्थों का सेवन करें, जो मल के रास्ते कफ को बाहर निकालते हैं।
* लहसुन और अदरक: दोनों ही सर्वश्रेष्ठ कफनाशक हैं। लहसुन पसीने के रूप में कफ को गलाकर बाहर निकालता है।

प्राकृतिक उपचार
* गरारे: एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें।
* पाद स्नान: गुनगुने पानी में पैर डालकर बैठें, 2 गिलास सादा पानी पिएं और सिर पर ठंडा कपड़ा रखें। रोज़ 10 मिनट करें।
* धूप: रोज़ 30-60 मिनट धूप लें।

3. पित्त (अग्नि/तेज दोष): पेट एवं जलन के रोग
पित्त पाचन, चयापचय और शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। वात और कफ के रोगों को छोड़कर, शेष सभी रोग, जिनमें BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस आदि शामिल हैं, पित्त के बिगड़ने से होते हैं।

मुख्य लक्षण
* जलन: शरीर में कहीं भी जलन, जैसे पेट में जलन, मूत्र/मल त्याग में जलन, त्वचा में जलन।
* अन्य: खट्टी डकारें, शरीर में भारीपन।
प्रमुख कारण
* आहार: गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार, चाय, कॉफी।
* व्यसन: सिगरेट, तम्बाकू, शराब, मांस, मछली, अंडा।
* जीवनशैली: दिनभर पका हुआ भोजन करना, क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव, दवाइयों का सेवन।
* शारीरिक: मल-मूत्र, छींक जैसे 13 वेगों को रोकना।

रामबाण निवारण
* फटे हुए दूध का पानी: पुराने और नए सभी रोगों का एक समाधान है। गर्म दूध में नींबू डालकर फाड़ें, फिर पानी छानकर पिएं। यह पेट के रोगों और सभी प्रकार के बुखार में रामबाण है।
* ताज़ा रस: फलों और सब्जियों का रस, जैसे अनार, लौकी, पत्ता गोभी का रस।
* नींबू पानी का सेवन।

प्राकृतिक उपचार
* ठंडक: पेट को गीले कपड़े से ठंडक दें।
* रीढ़ की हड्डी पर पट्टी: रीढ़ की हड्डी को गीले कपड़े से ठंडक दें, क्योंकि लकवा जैसी समस्याएं इसी हिस्से की गर्मी से होती हैं।

* जीवनशैली: व्यायाम, योग और गहरी नींद लें।

पंकज शर्मा जी का बोलना है कि रोगों का मूल कारण केवल त्रिदोषों का बिगड़ना ही नहीं, बल्कि तन को बिगाड़ने वाला भोजन, मन को बिगाड़ने वाले विचार, और मनोदिशा को बिगाड़ने वाले लोगों का साथ भी है।

इलाज से बेहतर बचाव है। मेरा निवेदन है कि स्वदेशी बनें, प्रकृति से जुड़ें और इन सरल नियमों का पालन कर खुद को स्वस्थ रखें।

यह मार्गदर्शन (www.sushrnam.in) द्वारा संकलित है।

आपसे विनम्र निवेदन है कि इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।🙏

नोट:- लेख में दिए उपचार और विधि का प्रयोग जानकारी हेतु है लेख में बताए किसी भी उपचार को किसी योग्य योग और आयुर्वेदिक के जाना से सलाह कर के उपयोग में लाए।

शारदीय नवरात्रि और योग साधनाभारत की संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल आनंद और उत्सव का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये आत्मशुद्धि...
21/09/2025

शारदीय नवरात्रि और योग साधना

भारत की संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल आनंद और उत्सव का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये आत्मशुद्धि और साधना के भी अवसर हैं। इन्हीं में से एक है शारदीय नवरात्रि, जो अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। परंतु यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नवरात्रि: आत्मजागरण का पर्व

‘नवरात्रि’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘नौ रात्रियाँ’। ये नौ दिन साधक को आत्मजागरण, आत्मशुद्धि और शक्ति-संचय की ओर ले जाते हैं। हर दिन देवी के एक स्वरूप की पूजा करके हम भीतर के एक नकारात्मक भाव को समाप्त कर सकारात्मकता का संचार कर सकते हैं। यही कारण है कि ऋषियों और योगियों ने इस समय को साधना, उपवास और संयम का विशेष काल माना है।

योग साधना का महत्व

नवरात्रि के दौरान उपवास और सात्त्विक आहार से शरीर हल्का और मन एकाग्र रहता है। यह योगाभ्यास के लिए सर्वोत्तम स्थिति है। योग और ध्यान साधना के माध्यम से साधक अपने भीतर की सुप्त शक्तियों को जाग्रत कर सकता है।

प्राणायाम
नवरात्रि में अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम अत्यंत लाभकारी हैं। ये श्वास-प्रश्वास को संतुलित कर मानसिक शांति और शुद्धता प्रदान करते हैं।

ध्यान
देवी की मूर्ति या स्वरूप का ध्यान करते हुए “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप साधक के मन को केंद्रित करता है और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है।

योगासन
सूर्य नमस्कार ऊर्जा जागरण का उत्तम साधन है। वहीं पद्मासन, वज्रासन और सिद्धासन जैसे आसन ध्यान और मंत्रजप के लिए उपयुक्त हैं।

सात्त्विक आहार और संयम

नवरात्रि साधना का मूल आधार है सात्त्विक आहार। फल, दूध, सूखे मेवे और हल्के आहार से शरीर शुद्ध रहता है। साथ ही, संयमित जीवनशैली और सकारात्मक विचार साधना को गहराई प्रदान करते हैं।

शारदीय नवरात्रि हमें केवल पूजा और अनुष्ठान का नहीं, बल्कि आत्मशक्ति जागरण का भी संदेश देती है। जब हम इस पावन काल में योग, ध्यान और संयम का सहारा लेते हैं, तो न केवल हमारा शरीर और मन शुद्ध होता है, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और संतुलन का उदय भी होता है।

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✅ आष्टांग योग के दो स्तंभ – यम और नियमपतंजलि योगसूत्र में बताए गए आष्टांग योग की नींव हैं – यम (Yama) और नियम (Niyama)। ...
19/09/2025

✅ आष्टांग योग के दो स्तंभ – यम और नियम

पतंजलि योगसूत्र में बताए गए आष्टांग योग की नींव हैं – यम (Yama) और नियम (Niyama)। ये केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और आध्यात्मिक प्रगति की आधारशिला हैं।

🕉️ यम (Yama) – सार्वभौमिक नैतिक आचार संहिता

यम हमें यह सिखाते हैं कि हम समाज और दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करें।

पहला है अहिंसा – मन, वाणी और कर्म से किसी को आहत न करना। जब हम करुणा और प्रेम अपनाते हैं तो हमारे आस-पास का वातावरण शांत और सुरक्षित बनता है।

दूसरा है सत्य – विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता रखना। सत्य वही है जो हितकारी और मधुर हो, जिससे विश्वास और पारदर्शिता कायम होती है।

तीसरा है अस्तेय – किसी भी प्रकार की चोरी न करना, चाहे वह वस्तु की हो, समय की हो या श्रेय की। इससे मन में संतोष और ईमानदारी का विकास होता है।

चौथा है ब्रह्मचर्य – अपनी इन्द्रियों पर संयम रखकर ऊर्जा का सही दिशा में प्रयोग करना। यह हमें एकाग्र और ऊर्जावान बनाता है।

पाँचवाँ है अपरिग्रह – आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना। जब हम लालच छोड़कर सरल जीवन जीते हैं, तो मन हल्का और तनाव मुक्त होता है।

🕉️ नियम (Niyama) –

आत्म-अनुशासन और आंतरिक शुद्धि

नियम हमें अपने भीतर अनुशासन और पवित्रता स्थापित करना सिखाते हैं।

पहला है शौच – शरीर, मन और विचार की शुद्धि। यह स्वास्थ्य और एकाग्रता के लिए आवश्यक है।

दूसरा है संतोष – जो है उसमें तृप्त रहना और परिणाम को स्वीकारना। संतोष से मन शांत होता है और भीतर आनंद का अनुभव होता है।

तीसरा है तप – कठिनाई सहने की क्षमता और अनुशासन। साधना और अनुशासन से आत्मबल और सहनशक्ति बढ़ती है।

चौथा है स्वाध्याय – शास्त्रों और आत्म-अध्ययन के माध्यम से स्वयं को जानना। इससे ज्ञान और आत्मबोध की प्राप्ति होती है।

पाँचवाँ है ईश्वर प्राणिधान – अहंकार का त्याग कर हर कर्म को ईश्वर को समर्पित करना। इससे मन विनम्र और शांत होता है।

✨ निष्कर्ष

यम हमें समाज और दूसरों के प्रति कर्तव्य सिखाते हैं, जबकि नियम हमें अपने भीतर अनुशासन और पवित्रता स्थापित करना सिखाते हैं। इन दोनों के बिना योग केवल शारीरिक व्यायाम रह जाता है। सच्चा योग तभी शुरू होता है जब हम अपने जीवन में यम और नियम को उतारते हैं।

लोग हमेशा कुछ न कुछ कहेंगे…पर जीवन आपका है और यह दोबारा नहीं मिलेगा।वही कीजिए, जिसमें आपको सच्चा सुख और आनंद मिले—क्योंक...
12/09/2025

लोग हमेशा कुछ न कुछ कहेंगे…
पर जीवन आपका है और यह दोबारा नहीं मिलेगा।
वही कीजिए, जिसमें आपको सच्चा सुख और आनंद मिले—
क्योंकि भीतर से खोखला होकर जीना, जीना नहीं कहलाता।

गुड़ बनाम चीनीएक है सुपरफ़ूड, दूसरा है साइलेंट किलर।आपकी पसंद कौन सी है?इस लेख को पढ़ने के बाद, शायद आप अपने स्वीटनर को ...
09/09/2025

गुड़ बनाम चीनी

एक है सुपरफ़ूड, दूसरा है साइलेंट किलर।

आपकी पसंद कौन सी है?
इस लेख को पढ़ने के बाद, शायद आप अपने स्वीटनर को पहले जैसी नज़र से नहीं देख पाएँगे।
👇 आइए गहराई से समझते हैं 👇

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1. गुड़ – सिर्फ़ मिठास नहीं, सेहत का खज़ाना

गुड़ को सिर्फ़ एक मीठा पदार्थ मानना उसके साथ नाइंसाफी होगी।

✅ कैलोरी: 353
✅ आयरन: 4.6 mg
✅ कैल्शियम: 107 mg
✅ फाइबर, प्रोटीन, खनिज – सब बरकरार
✅ पाचन सुधारता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और ऊर्जा देता है
✅ आयुर्वेदिक पावरहाउस

गुड़ केवल मिठास ही नहीं देता, बल्कि आपके शरीर और मन दोनों को ताक़तवर बनाता है।

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2. चीनी – सफेद जहर

चीनी का स्वाद मीठा ज़रूर है, लेकिन असर कड़वा है।

❌ कैलोरी: 383 (गुड़ से भी ज़्यादा)
❌ शून्य फाइबर
❌ शून्य आयरन
❌ शून्य कैल्शियम
❌ शून्य प्रोटीन

यानि सिर्फ़ खाली कार्बोहाइड्रेट, जो इंसुलिन लेवल बढ़ाते हैं और धीरे-धीरे मधुमेह, मोटापा और थकान की जड़ बन जाते हैं।

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3. असली फ़र्क कहाँ है?

🔹 चीनी = रसायनों से संसाधित
🔹 गुड़ = गन्ने के रस से प्राकृतिक रूप से बना

गुड़ में वो सभी सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, जिन्हें चीनी बनाने की प्रक्रिया नष्ट कर देती है।
यानी एक तरफ़ है प्रकृति का उपहार, और दूसरी तरफ़ कारखाने में बना ज़हर।

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4. गुड़ के गज़ब के फायदे

✅ लिवर को डिटॉक्स करता है
✅ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
✅ पीएमएस के लक्षणों को कम करता है
✅ पाचन सुधारता है
✅ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर
✅ सर्दियों में शरीर को गर्म रखता है
✅ एनीमिया से बचाता है

अब सोचिए, इतने फायदे मिलने के बाद भी कोई चीनी क्यों चुनेगा?

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5. अगर चाय या मिठाई में मिठास चाहिए तो?

चीनी की बजाय गुड़ डालिए और फ़र्क खुद महसूस कीजिए –

☕ ऊर्जा में बढ़ोतरी
🧘‍♀️ स्वास्थ्य में सुधार
🩺 बीमारियों से सुरक्षा
❤️ लंबा और बेहतर जीवन

गुड़ = आत्मा के साथ मिठास।

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6. चीनी के नुकसान – जो दिखते नहीं लेकिन असर करते हैं

❌ मोटापा
❌ टाइप 2 मधुमेह
❌ हृदय रोग
❌ दाँतों की सड़न
❌ मूड स्विंग और अवसाद

सिर्फ़ कुछ सेकंड की मिठास, और बदले में पूरी ज़िंदगी की परेशानियाँ।

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7. आयुर्वेद की सीख

"जैसा आहार, वैसा विचार।"
यानि आपका भोजन आपके विचार और जीवन दोनों को आकार देता है।

इसलिए गुड़ को अपनाइए।
अपने शरीर और मन को फर्क महसूस करने दीजिए।
हमारे पूर्वज जानते थे कि असली मिठास कहाँ है।

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निष्कर्ष

✨ गुड़ = प्राकृतिक, पौष्टिक, जीवन देने वाला
💀 चीनी = परिष्कृत, खाली और नुकसानदायक

मुद्दा सिर्फ़ स्वाद का नहीं है,
मुद्दा है – लत छोड़कर जीवन चुनने का।

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#स्वास्थ्य #पोषण #आयुर्वेद #गुड़_बनाम_चीनी

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