21/09/2025
स्वस्थ जीवन का आधार: त्रिदोष संतुलन और प्राकृतिक चिकित्सा - पंकज शर्मा
आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का स्वास्थ्य वात, पित्त और कफ नामक तीन मौलिक दोषों के संतुलन पर निर्भर करता है। जब इन दोषों में असंतुलन आता है, तभी हम बीमार पड़ते हैं। इस संतुलन को बनाए रखने और बिगड़े हुए दोषों को ठीक करने के लिए, हम घरेलू चिकित्सा और प्राकृतिक जीवनशैली को अपना सकते हैं।
पंकज शर्मा जी का मानना है कि बड़ी आंत की स्वच्छता किसी भी रोग के निवारण की कुंजी है, और एनीमा इस सफाई के लिए एक प्रभावी पद्धति है।
1. वात (वायु दोष): 80 रोगों का मूल
वात शरीर में गति और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है। जब यह बिगड़ता है, तो शरीर में अवरोध और दर्द पैदा करता है।
मुख्य लक्षण
* दर्द: शरीर में कहीं भी रुककर टकराने वाली वायु दर्द पैदा करती है, जैसे पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, जोड़ों का दर्द, सीने का दर्द।
* अन्य: डकार आना, चक्कर आना, घबराहट और हिचकी आना।
प्रमुख कारण
* आहार: गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ (जैसे दालें), मैदा और बिना चोकर का आटा, बेसन से बनी वस्तुएं, दूध और उसके उत्पाद।
* शारीरिक: व्यायाम न करने से आंतों की कमजोरी।
* विशेष: वात दोष यूरिक एसिड भी बनाता है। जहाँ यूरिक एसिड जमा होता है, हड्डियों का तरल (ग्रीस) कम होने लगता है, जिससे जोड़ घिसते हैं, आवाज़ आती है, और स्लिप डिस्क या स्पोंडिलाइटिस जैसी समस्याएँ होती हैं।
सरल निवारण
* अदरक: वायुनाशक, रक्त पतला करने वाला और कफ निकालने वाला। रात में गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच सोंठ (सूखी अदरक) का सेवन करें।
* लहसुन: किसी भी गैस को तुरंत बाहर निकालता है। सीने में दर्द (ब्लॉकेज) की आशंका पर तुरंत 8-10 कली कच्चा लहसुन खाएं। इसे सब्जी, जूस या चटनी में कच्चा काटकर खाएं।
* मेथीदाना: वात को शांत करने में अदरक और लहसुन जैसा ही प्रभावी है।
प्राकृतिक उपचार
* सिकाई: प्रभावित अंग पर गर्म और ठंडी सिकाई करें। यदि अंग गर्म है, तो ठंडी सिकाई करें। यदि ठंडा है, तो गर्म सिकाई करें। यदि सामान्य है, तो 1 मिनट गर्म और 1 मिनट ठंडी सिकाई बारी-बारी से करें।
2. कफ (श्लेष्मा दोष): 28 रोगों का नियंत्रक
कफ शरीर में स्थिरता, चिकनाहट और रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करता है। इसके बिगड़ने से शरीर में भारीपन और चिपचिपापन आता है।
मुख्य लक्षण
* श्वसन: मुंह और नाक से बलगम आना, सर्दी, ज़ुकाम, खांसी, अस्थमा, टीबी, निमोनिया।
* अन्य: सीढ़ी चढ़ने पर हांफना, सांस लेने में तकलीफ।
प्रमुख कारण
* आहार: अत्यधिक तेल और चिकनाई वाली वस्तुएं, दूध और दूध के उत्पाद, ठंडा पानी और फ्रिज की वस्तुएं।
* जीवनशैली: धूल, धुएं में अधिक रहना, धूप का सेवन न करना।
सरल निवारण
* विटामिन C: यह कफ का शत्रु है। आंवला जैसे विटामिन C से भरपूर पदार्थों का सेवन करें, जो मल के रास्ते कफ को बाहर निकालते हैं।
* लहसुन और अदरक: दोनों ही सर्वश्रेष्ठ कफनाशक हैं। लहसुन पसीने के रूप में कफ को गलाकर बाहर निकालता है।
प्राकृतिक उपचार
* गरारे: एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें।
* पाद स्नान: गुनगुने पानी में पैर डालकर बैठें, 2 गिलास सादा पानी पिएं और सिर पर ठंडा कपड़ा रखें। रोज़ 10 मिनट करें।
* धूप: रोज़ 30-60 मिनट धूप लें।
3. पित्त (अग्नि/तेज दोष): पेट एवं जलन के रोग
पित्त पाचन, चयापचय और शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। वात और कफ के रोगों को छोड़कर, शेष सभी रोग, जिनमें BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस आदि शामिल हैं, पित्त के बिगड़ने से होते हैं।
मुख्य लक्षण
* जलन: शरीर में कहीं भी जलन, जैसे पेट में जलन, मूत्र/मल त्याग में जलन, त्वचा में जलन।
* अन्य: खट्टी डकारें, शरीर में भारीपन।
प्रमुख कारण
* आहार: गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार, चाय, कॉफी।
* व्यसन: सिगरेट, तम्बाकू, शराब, मांस, मछली, अंडा।
* जीवनशैली: दिनभर पका हुआ भोजन करना, क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव, दवाइयों का सेवन।
* शारीरिक: मल-मूत्र, छींक जैसे 13 वेगों को रोकना।
रामबाण निवारण
* फटे हुए दूध का पानी: पुराने और नए सभी रोगों का एक समाधान है। गर्म दूध में नींबू डालकर फाड़ें, फिर पानी छानकर पिएं। यह पेट के रोगों और सभी प्रकार के बुखार में रामबाण है।
* ताज़ा रस: फलों और सब्जियों का रस, जैसे अनार, लौकी, पत्ता गोभी का रस।
* नींबू पानी का सेवन।
प्राकृतिक उपचार
* ठंडक: पेट को गीले कपड़े से ठंडक दें।
* रीढ़ की हड्डी पर पट्टी: रीढ़ की हड्डी को गीले कपड़े से ठंडक दें, क्योंकि लकवा जैसी समस्याएं इसी हिस्से की गर्मी से होती हैं।
* जीवनशैली: व्यायाम, योग और गहरी नींद लें।
पंकज शर्मा जी का बोलना है कि रोगों का मूल कारण केवल त्रिदोषों का बिगड़ना ही नहीं, बल्कि तन को बिगाड़ने वाला भोजन, मन को बिगाड़ने वाले विचार, और मनोदिशा को बिगाड़ने वाले लोगों का साथ भी है।
इलाज से बेहतर बचाव है। मेरा निवेदन है कि स्वदेशी बनें, प्रकृति से जुड़ें और इन सरल नियमों का पालन कर खुद को स्वस्थ रखें।
यह मार्गदर्शन (www.sushrnam.in) द्वारा संकलित है।
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नोट:- लेख में दिए उपचार और विधि का प्रयोग जानकारी हेतु है लेख में बताए किसी भी उपचार को किसी योग्य योग और आयुर्वेदिक के जाना से सलाह कर के उपयोग में लाए।