Kaul Rajesh

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अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम ।।

अर्थ : वृद्धों की नित्य सेवा करने वाले तथा उनका अभिवादन करने वाले के आयु, विद्या, यश और बल ये चारों बढ़ते हैं।

16/02/2026

🔔 “स्वर्ग का मार्ग शक्ति या धन से नहीं—क्षमा और दान से खुलता है।”
#विदुर_नीति

ll स्वर्ग के अधिकारी ll

द्वाविमौ पुरुषौ राजन् स्वर्गस्य परि तिष्ठतः।
प्रभुश्च क्षमया युक्तो दरिद्रश्च प्रदानवान्॥

हे राजन्! दो प्रकार के मनुष्य स्वर्ग के अधिकारी हैं—एक सामर्थ्यवान होकर भी क्षमाशील और दूसरा दरिद्र होकर भी दानशील।
O King, two types attain heaven: the powerful who practice forgiveness and the poor who remain generous in charity despite limited means.

👉🏻इस विदुर नीति पर मनन करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—आपके अनुसार बड़ा गुण कौन-सा है: क्षमा या दान?”

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

16/02/2026

🔔 “संकट में असली चरित्र प्रकट होता है—क्या आपकी मर्यादा अटल है?”

#चाणक्य

ll सज्जनों की मर्यादा ll

प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः।
सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधवः॥

प्रलय में समुद्र भी अपनी मर्यादा तोड़ देते हैं, पर सज्जन लोग कठिन समय में भी मर्यादा और सिद्धांत नहीं छोड़ते।
Even oceans may cross their limits during dissolution, yet noble people never abandon their principles and boundaries, even in times of great crisis.

👉‌ इस चाणक्य नीति पर विचार करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—आप कठिन समय में अपने सिद्धांत कैसे निभाते हैं?

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

16/02/2026

🔔 “सच्ची शांति बाहर नहीं—प्रसन्न मन ही दुःखों का अंत करता है।”
#गीता_उपदेश

ll स्थिर बुद्धि का साधन ll

प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।
प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥

मन की प्रसन्नता से सभी दुःखों का नाश होता है; प्रसन्न चित्त व्यक्ति की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर और स्पष्ट हो जाती है।
From inner serenity arises the destruction of all sorrows; for one with a cheerful mind, the intellect quickly becomes steady and firmly established.

👉इस गीता-सूत्र पर मनन करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—आप मन को प्रसन्न कैसे रखते हैं?

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

16/02/2026

🕉️ॐ श्री परम गुरुभ्यो नमः🕉️

16/02/2026

👉🏻जिस प्रभात में राम हों, वह दिन कैसे साधारण हो सकता है? 🌅✨
🌅 प्रातःकालीन आरती एवं दिव्य दर्शन — श्री राम लला, अयोध्याधाम
📅 १६ फरवरी २०२६
आज के पावन प्रभात में भगवान श्री राम लला के अलौकिक दर्शन आत्मा को शांति, शक्ति और असीम आनंद से भर देते हैं।
अयोध्या धाम की इस दिव्य आभा में आपका दिन मंगलमय और शुभ हो।
जय जय श्री राम! 🙏🔥
👉🏻इस दिव्य अनुभूति को शेयर करें और जय श्री राम लिखकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
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15/02/2026

🕉️ॐ श्री परम गुरुभ्यो नमः🕉️

15/02/2026

🔔 “जब व्यक्ति अपने धर्म से भटकता है, सम्मान स्वतः घट जाता है।”
#विदुर_नीति

ll विपरीत आचरण का दोष ll

द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा।
गृहस्थश्च निरारंभः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः॥

दो व्यक्ति शोभा नहीं पाते—कर्तव्यहीन गृहस्थ और सांसारिक कार्यों में उलझा भिक्षुक; अपने धर्म के विपरीत आचरण व्यक्ति को अपमानित करता है।
Two do not shine when acting contrary to their roles: a householder without initiative and a mendicant absorbed in worldly duties; misplaced conduct diminishes dignity.

👉🏻इस विदुर नीति पर मनन करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—क्या आप अपने कर्तव्य के अनुरूप जी रहे हैं?

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

15/02/2026

🔔 “सच्ची महानता वही है जो हर परिस्थिति में एक-सी रहे।”

#चाणक्य

ll स्थिर चरित्र का महत्व ll

एतदर्थे कुलीनानां
नृपाः कुर्वन्ति सङ्ग्रहम्।
आदिमध्यावसानेषु
न ते गच्छन्ति विक्रियाम्॥

इसी कारण राजा कुलीन व्यक्तियों को अपने पास रखते हैं; क्योंकि वे कार्य के आरंभ, मध्य और अंत में भी स्थिर रहते हैं।

For this reason kings gather noble people, for they remain steady and unchanged in conduct at the beginning, middle, and end of any task.

👉‌ इस चाणक्य नीति पर विचार करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—क्या आप हर परिस्थिति में स्थिर रह पाते हैं?

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

15/02/2026

🔔 “राग-द्वेष से ऊपर उठकर ही मन को सच्ची शांति मिलती है—क्या आप संतुलन में जी रहे हैं?”
#गीता_उपदेश

ll अंतःकरण की शांति की प्राप्ति ll

रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्।
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति॥

जो राग-द्वेष से रहित होकर, वश में की गई इन्द्रियों से विषयों में रहता है, वह संयमी पुरुष अंतःकरण की शांति प्राप्त करता है।
One who moves among sense objects with senses controlled, free from attachment and aversion, and self-disciplined, attains inner peace and serenity. capability.
👉इस गीता-सूत्र पर मनन करें। पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें, और कमेंट में लिखें—आप क्रोध को कैसे नियंत्रित करते हैं?

😂सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
🤣जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

15/02/2026

👉🏻जिस प्रभात में राम हों, वह दिन कैसे साधारण हो सकता है? 🌅✨
🌅 प्रातःकालीन आरती एवं दिव्य दर्शन — श्री राम लला, अयोध्याधाम
📅 १५ फरवरी २०२६
आज के पावन प्रभात में भगवान श्री राम लला के अलौकिक दर्शन आत्मा को शांति, शक्ति और असीम आनंद से भर देते हैं।
अयोध्या धाम की इस दिव्य आभा में आपका दिन मंगलमय और शुभ हो।
जय जय श्री राम! 🙏🔥
👉🏻इस दिव्य अनुभूति को शेयर करें और जय श्री राम लिखकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
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15/02/2026

🕉️ॐ श्री परम गुरुभ्यो नमः🕉️

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147003

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