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Hijama human body me kaise work karta hai
10/11/2025

Hijama human body me kaise work karta hai

. स्वस्थ लिवर (Healthy Liver)· विवरण: यह लिवर का सामान्य और इष्टतम अवस्था है।· कार्य: एक स्वस्थ लिवर शरीर के लिए अत्यंत ...
31/10/2025

. स्वस्थ लिवर (Healthy Liver)

· विवरण: यह लिवर का सामान्य और इष्टतम अवस्था है।
· कार्य: एक स्वस्थ लिवर शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करता है, जैसे:
· विषहरण (Detoxification): रक्त से विषैले पदार्थों (जैसे शराब, दवाओं के अवशेष) को फिल्टर करना।
· पाचन (Digestion): पित्त (Bile) का उत्पादन करना, जो वसा के पाचन में मदद करता है।
· चयापचय (Metabolism): प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय को नियंत्रित करना।
· भंडारण (Storage): ग्लाइकोजन (ऊर्जा का स्रोत), विटामिन और खनिजों का भंडारण करना।
· प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis): रक्त के थक्के जमने के लिए जरूरी प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाना।

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2. फाइब्रोसिस (Fibrosis)

· विवरण: जब लिवर को लगातार क्षति पहुँचती है (जैसे शराब, हेपेटाइटिस वायरस, फैटी लिवर), तो वह स्वयं को ठीक करने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में, घाव भरने वाले ऊतक (scar tissue) बनने लगते हैं। इस अतिरिक्त और असामान्य ऊतक के जमा होने को फाइब्रोसिस कहते हैं।
· प्रभाव:
· यह scar tissue लिवर के स्वस्थ कोशिकाओं (Hepatocytes) की जगह लेने लगता है।
· इससे लिवर का सामान्य ढांचा क्षतिग्रस्त होता है और लिवर कड़ा होने लगता है।
· लिवर का रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है।
· महत्वपूर्ण बिंदु: फाइब्रोसिस की शुरुआती अवस्थाओं में, लिवर अभी भी अपना कार्य कर सकता है क्योंकि पर्याप्त स्वस्थ कोशिकाएं बची रहती हैं। अगर कारण का इलाज कर दिया जाए, तो फाइब्रोसिस का कुछ हिस्सा ठीक भी हो सकता है।

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3. सिरोसिस (Cirrhosis)

· विवरण: जब फाइब्रोसिस बहुत अधिक बढ़ जाता है और पूरे लिवर में फैल जाता है, तो उस अवस्था को सिरोसिस कहते हैं। यह लिवर सिरोसिस लिवर डैमेज का एक अस्थायी (Permanent) और गंभीर चरण है।
· परिवर्तन:
· लिवर सख्त, सिकुड़ा हुआ और झुर्रीदार (nodular) हो जाता है।
· घाव के ऊतक (scar tissue) इतने अधिक हो जाते हैं कि लिवर के सामान्य कार्य में गंभीर रूप से बाधा पड़ती है।
· लक्षण: इस स्टेज में लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं, जैसे:
· पीलिया (Jaundice - त्वचा और आँखों का पीला पड़ना)
· थकान और कमजोरी
· पेट में पानी भरना (Ascites)
· वजन घटना और भूख न लगना
· त्वचा पर खुजली
· हाथों की हथेलियाँ लाल होना

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4. लिवर कैंसर (Liver Cancer)

· विवरण: सिरोसिस लिवर कैंसर के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है। लगातार कोशिकाओं की क्षति और उनकी मरम्मत की प्रक्रिया के कारण आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutations) हो सकते हैं। इससे लिवर की कोशिकाएं

पंपकिन सीड्स के लाभ (Benefits of Pumpkin Seeds)1. शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (Powerful Antioxidants):   · इनमें मौजूद एंटीऑ...
30/10/2025

पंपकिन सीड्स के लाभ (Benefits of Pumpkin Seeds)

1. शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (Powerful Antioxidants):
· इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स (हानिकारक अणुओं) से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इससे कोशिकाओं का क्षरण धीमा होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है।
2. मधुमेह का कम जोखिम (Lower Risk of Diabetes):
· कद्दू के बीज ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इनमें मौजूद मैग्नीशियम और फाइबर जैसे तत्व इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने और शुगर के अवशोषण को धीमा करने में भूमिका निभाते हैं।
3. एंटी-कैंसर गुण (Anti-Cancer Properties):
· कुछ शोधों से पता चला है कि पंपकिन सीड्स में मौजूद यौगिक कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मददगार हो सकते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व इस प्रभाव के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
4. सूजन-रोधी प्रभाव (Anti-Inflammatory Effects):
· इनमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। यह गुण दिल की बीमारियों, गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है।
5. स्वस्थ हृदय कार्य (Healthy Heart Function):
· पंपकिन सीड्स मैग्नीशियम, जिंक, फाइबर और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत हैं। ये सभी तत्व हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं। ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।

29/10/2025

❌ प्रोटीन पाउडर का जाल ❌

आजकल हर जिम, हर फिटनेस वीडियो और हर ट्रेनर की ज़ुबान पर एक ही बात सुनने को मिलती है
“प्रोटीन पाउडर लो, बॉडी बन जाएगी”

आपको कई ऐसे तथाकथित मेडिकल इन्फ़्लुएंसर भी मिल जाएँगे जो धड़ल्ले से ऐसे पाउडर की मार्केटिंग करते हैं ।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई हर इंसान को इसकी ज़रूरत होती है?

क्या ये सचमुच शरीर के लिए फायदेमंद है या धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा रहा है ????

पहले समझिए की प्रोटीन क्या है?

प्रोटीन हमारे शरीर का एक मूलभूत पोषक तत्व है।
ये हमारे बालों, मांसपेशियों, हार्मोन और एंजाइम सबमें मौजूद होता है।

हमारे रोज़मर्रा के खाने जैसे दाल, दूध, अंडा, दही, पनीर, सोया, मछली, मांस, अनाज और मेवों से ही हमें पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता है।

एक सामान्य भारतीय को लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन की जरूरत होती है,
यानि 60 किलो व्यक्ति को करीब 60 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन।
यह मात्रा आसानी से प्राकृतिक आहार से पूरी हो सकती है।

तो फिर प्रोटीन पाउडर की जरूरत किसे है?

केवल उन लोगों को जो पेशेवर एथलीट, बॉडीबिल्डर या बहुत हैवी वर्कआउट करते हैं।

या जिनकी डाइट काफ़ी सीमित या असंतुलित है और डॉक्टर ने विशेष रूप से सलाह दी है।

बाकी सामान्य व्यक्ति को इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती।

अब जानिए कैसे हानिकारक हो सकता है प्रोटीन पाउडर

पाचन संबंधी समस्याएँ:
गैस, कब्ज, दस्त, पेट दर्द, सूजन, ये सब आम शिकायतें हैं।

भारी धातुएँ (Heavy Metals):
कुछ सस्ते या अनब्रांडेड पाउडर में लेड, आर्सेनिक, कैडमियम जैसी धातुएँ पाई गई हैं जो कैंसर तक का कारण बन सकती हैं।

आर्थिक नुकसान:
एक सामान्य भारतीय को जरूरत भी नहीं, फिर भी हर महीने हजारों रुपये का पाउडर खरीदना सिर्फ मार्केटिंग का जाल है।

मानसिक भ्रम:
कई युवा यह सोच लेते हैं कि बॉडी तभी बनेगी जब “शेक” पिएंगे।
जबकि असल बॉडी बनती है संतुलित आहार, नींद, पानी, और नियमित व्यायाम से।

प्राकृतिक प्रोटीन के श्रेष्ठ स्रोत:
दूध, दही, पनीर
दालें, चना, मूँग
सोया चंक्स, टोफू
बादाम, अखरोट
अंडा, मछली या चिकन (यदि नॉन-वेज हैं)

इनसे मिलने वाला प्रोटीन ज्यादा पचने योग्य, सुरक्षित और संतुलित होता है।

याद रखिए

अगर आप कोई खिलाड़ी नहीं हैं, अगर आपका शरीर स्वस्थ है और आप सामान्य भोजन करते हैंतो आपको किसी पाउडर, शेक या सप्लीमेंट की ज़रूरत नहीं।

आपका शरीर प्राकृतिक भोजन से ही उतना ही स्वस्थ और मजबूत बन सकता है।

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1. सर्दी-जुकाम (Flu) का इलाज· अमरूद विटामिन C का एक शक्तिशाली स्रोत है (संतरे से चार गुना अधिक)। यह प्रतिरक्षा प्रणाली (...
24/10/2025

1. सर्दी-जुकाम (Flu) का इलाज

· अमरूद विटामिन C का एक शक्तिशाली स्रोत है (संतरे से चार गुना अधिक)। यह प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत बनाता है और शरीर को सर्दी-जुकाम तथा अन्य संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।
· इसकी पत्तियों की चाय पीने से खांसी और जुकाम में आराम मिलता है।

2. दस्त (Diarrhoea) में मददगार

· अमरूद में मौजूद एस्ट्रिनजेंट (कसैले) गुण पेट और आंतों में बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं, जिससे दस्त ठीक होने में मदद मिलती है।
· इसकी पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। दस्त होने पर अमरूद की पत्तियों का काढ़ा बहुत फायदेमंद माना जाता है।

3. दांत दर्द (Toothache) दूर करना

· अमरूद की पत्तियों में सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) और जीवाणुरोधी (Antibacterial) गुण होते हैं।
· दांत दर्द होने पर अमरूद की ताजी पत्तियों को चबाने या इसके पत्तों के काढ़े से गरारे करने से दर्द और सूजन में राहत मिलती है।

4. रक्तचाप (Blood Pressure) नियंत्रण

· अमरूद में मौजूद पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर में सोडियम के नकारात्मक प्रभाव को कम करके Blood Vessels और धमनियों पर तनाव को कम करता है।

5. मधुमेह (Diabetes) प्रबंधन में सहायक

· अमरूद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) कम होता है और यह फाइबर से भरपूर होता है। यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता।
· अमरूद की पत्तियों की चाय इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने के लिए जानी जाती है।

6. पाचन तंत्र को मजबूत बनाना

· अमरूद फाइबर का एक उत्कृष्ट स्रोत है। यह कब्ज को दूर करने, मल त्याग को नियमित करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

7. त्वचा के लिए फायदेमंद

· इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट कोलेजन (Collagen) उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, जो त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखता है। यह झुर्रियों और उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

8. वजन घटाने में सहायक

· अमरूद कैलोरी में कम, लेकिन फाइबर और पोषक तत्वों में उच्च होता है। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है।

9. आँखों की सेहत के लिए अच्छा

· अमरूद विटामिन A का भी एक अच्छा स्रोत है, जो आँखों की रोशनी को बनाए रखने और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

सारांश: अमरूद न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि यह एक "सुपरफूड" की तरह है जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अद्भुत काम कर सकता है। इसके फल के साथ-साथ इसकी पत्तियाँ भी बहुत गुणकारी हैं।

#अमरूद_

घी के स्वास्थ्य लाभ:· लैक्टोज मुक्त: घी बनाने की प्रक्रिया में दूध के ठोस पदार्थ और पानी निकल जाते हैं, जिससे यह लैक्टोज...
23/10/2025

घी के स्वास्थ्य लाभ:

· लैक्टोज मुक्त: घी बनाने की प्रक्रिया में दूध के ठोस पदार्थ और पानी निकल जाते हैं, जिससे यह लैक्टोज (Lactose) से मुक्त हो जाता है। इसलिए, दूध पचाने में परेशानी होने वाले अधिकांश लोग इसे आसानी से पचा सकते हैं।
· सन्तोषजनक वसा से भरपूर: घी में स्वस्थ संतृप्त वसा (Saturated Fats) होती है जो पेट को लम्बे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है। इससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
· विटामिन ए का अच्छा स्रोत: घी विटामिन ए (Vitamin A) से भरपूर होता है, जो आँखों की रोशनी, त्वचा के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
· उच्च ताप पर पकाने के लिए उत्तम: घी का धुआँ बिंदु (Smoke Point) बहुत अधिक होता है, यानी यह अधिक तापमान पर जलता नहीं है। इस वजह से यह तलने (Frying) और भूनने (Sautéing) जैसी उच्च ताप पर की जाने वाली खाना पकाने की विधियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ विकल्प है

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कस्टर्ड एप्पल (शरीफा) क्या है?कस्टर्ड एप्पल, जिसे हिंदी में "शरीफा" या "सीताफल" कहते हैं, एक मीठा और स्वादिष्ट ट्रॉपिकल ...
23/10/2025

कस्टर्ड एप्पल (शरीफा) क्या है?

कस्टर्ड एप्पल, जिसे हिंदी में "शरीफा" या "सीताफल" कहते हैं, एक मीठा और स्वादिष्ट ट्रॉपिकल फल है। इसका बाहरी छिलका हरा और मोटा होता है, जबकि अंदर का गूदा नरम, मलाईदार और काले बीजों वाला होता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।

1. विटामिन सी का उच्च स्रोत: यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।
2. पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करता है: इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं, जिससे पुरानी बीमारियों का खतरा घटता है।
3. त्वचा में सुधार: विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को स्वस्थ रखते हैं, झुर्रियों को कम करते हैं और चमक बढ़ाते हैं।

#शरीफा #सीताफल

22/10/2025

खाने के तेल और घी का उपयोग:

तेल/घी की मात्रा नियंत्रित रखें।
एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन 4–5 चम्मच से अधिक तेल/घी का सेवन नहीं करना चाहिए।

एक ही तेल लगातार न इस्तेमाल करें ।
अलग अलग तेलों (सरसों, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी, ऑलिव ऑयल) को बदल बदलकर उपयोग करें।

बार बार एक ही तेल को गर्म न करें ।
दोबारा गरम करने से ट्रांस फैट और टॉक्सिन बनते हैं।

डीप फ्राई से बचें ।
यह भोजन को अधिक कैलोरी वाला और हानिकारक बना देता है।

घी पूरी तरह हानिकारक नहीं है ।
नियंत्रित मात्रा (1–2 चम्मच प्रतिदिन) में देसी घी शरीर को ऊर्जा व वसा-घुलनशील विटामिन देता है।

ये एक myth है की घी खाने से हमेशा मोटापा और दिल की बीमारी होती है ।
सच यह है कि संतुलित मात्रा में देसी घी लाभकारी हो सकता है।

ऑलिव ऑयल (Olive Oil) एक अच्छा विकल्प है लेकिन इसे डीप फ्राई में न करें। यह सलाद, हल्की सब्ज़ी और ड्रिज़लिंग के लिए बेहतर है।

सरसों का तेल (Kachi Ghani) में ओमेगा-3 फैटी एसिड है जो दिल और जोड़ों की सेहत के लिए अच्छा है।
Erucic acid की वजह से कई देशों में इसके उपयोग को लेकर संशय है। कई देशों में इसे प्रतिबंधित भी किया गया है ।
लेकिन भारत में यह पारंपरिक और सुरक्षित रूप से प्रयोग होता आया है। संतुलित मात्र में इसे उपयोग कर सकते हैं ।

घरेलू खाना पकाते समय कम आँच पर तेल का प्रयोग करें ज्यादा आँच पर तेल जलकर हानिकारक पदार्थ बनाता है।

बाज़ार के तले-भुने स्नैक्स (समोसा, पकोड़ा, चिप्स) से बचें ।
इनमें अक्सर बार-बार इस्तेमाल किया हुआ तेल होता है।

तेल के साथ-साथ आहार में फल, सब्ज़ियाँ, दालें, और अनाज का संतुलन रखें ।
केवल तेल बदलने से ही स्वास्थ्य नहीं सुधरेगा।

तेल/घी संतुलित मात्रा में लेने पर भी अगर शरीर एक्टिव नहीं है, तो वसा जमकर मोटापा और बीमारियाँ बढ़ाती है।
इसीलिए Physical Activity काफ़ी ज़रूरी है ।

Fida Hussian Haq ki bat @
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सुन्नाह का मोटापा कम करने वाला पेयसुबह उठने के बादसामग्री:· 1 कप गुनगुना पानी· 1 चम्मच शहद· ½ चम्मच कलौंजी का तेल (ब्लैक...
19/10/2025

सुन्नाह का मोटापा कम करने वाला पेय

सुबह उठने के बाद

सामग्री:

· 1 कप गुनगुना पानी
· 1 चम्मच शहद
· ½ चम्मच कलौंजी का तेल (ब्लैक सीड ऑयल)
· 1 चम्मच नींबू का रस

लाभ:

· मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है - चयापचय को तेज करता है
· पेट की चर्बी घटाता है - पेट की चर्बी को पिघलाता है
· पाचन में सुधार करता है - पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है
· प्राकृतिक सुन्नाह उपचार - पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की परंपरा पर आधारित प्राकृतिक इलाज

बनाने की विधि:

सभी सामग्रियों को एक कप में अच्छी तरह मिला लें।

#सुन्नाह_ड्रिंक #फैटबर्निंगड्रिंक #वजनघटानेकाउपाय #प्राकृतिकइलाज #सुबहकापेय #पेटकीचर्बीघटाएं #कलौंजीतेल #शहदऔरनींबू #स्वस्थजीवन #हदीससेइलाज

17/10/2025

चावल बनाम रोटी: शुगर कंट्रोल का पूरा सच जानिए! 🍚🆚🍞

अक्सर हमारे दिमाग में यह बैठ जाता है कि डायबिटीज या वेट लॉस में चावल छोड़ना ही पड़ेगा और रोटी ही एकमात्र सही विकल्प है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह से गलत है! आइए, विज्ञान के आधार पर इस भ्रम को तोड़ते हैं।

1. मूल बात: कार्बोहाइड्रेट है दोनों में

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात: चावल और रोटी दोनों ही मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट के स्रोत हैं।

· एक मध्यम आकार की रोटी (30 ग्राम आटा) में लगभग 15-18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है।
· एक कटोरी पके हुए चावल (30 ग्राम, लगभग 100 ग्राम पके हुए) में भी लगभग 15-18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है।

तो फर्क कहाँ है? फर्क है ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI), फाइबर, पोषक तत्वों और खाने के तरीके में।

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2. चावल का विज्ञान: आप क्या चुनते हैं और कैसे बनाते हैं?

· सफेद चावल vs. ब्राउन राइस:
· सफेद चावल में फाइबर और पोषक तत्व प्रोसेसिंग के दौरान निकल जाते हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) उच्च होता है, यानी यह जल्दी पचकर खून में शुगर तेजी से बढ़ाता है।
· ब्राउन राइस या भूरे चावल में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं। फाइबर की वजह से इसका GI कम होता है और यह शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करता है।
· जादू: रेज़िस्टेंट स्टार्च (Resistant Starch)
· जब आप पके हुए चावल को ठंडा करते हैं (जैसे चावल की सलाद बनाना या फ्रिज में रखे चावल को दोबारा गर्म करके खाना), तो उसमें एक खास तरह का स्टार्च बन जाता है जिसे रेज़िस्टेंट स्टार्च कहते हैं।
· यह स्टार्च हमारे शरीर में पचता नहीं है, बल्कि फाइबर की तरह काम करता है। यह पेट को भरा रखता है, कैलोरी इनटेक कम करता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है।

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3. रोटी का विज्ञान: आटा ही सब कुछ है!

· मैदा/सफेद आटा vs. साबुत गेहूं का आटा:
· मैदे या रिफाइंड आटे की रोटी भी सफेद चावल की तरह ही काम करती है। इसमें फाइबर न के बराबर होता है और इसका GI उच्च होता है।
· साबुत गेहूं के आटे (जिसमें चोकर हो) की रोटी फाइबर, विटामिन-B और मिनरल्स से भरपूर होती है। इसका GI कम होता है और यह शुगर कंट्रोल के लिए बेहतर विकल्प है।
· और भी बेहतर विकल्प:
· सिर्फ गेहूं ही नहीं, जौ, बाजरा, रागी, चना आटा आदि मिलाकर बनाई गई मल्टीग्रेन रोटी और भी ज्यादा फायदेमंद है। ये फाइबर और पोषक तत्वों का पावरहाउस हैं।

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4. अंतिम निष्कर्ष: क्या खाएं और कैसे खाएं?

दोनों पर पाबंदी नहीं, समझदारी से चुनाव जरूरी है।

1. मात्रा सबसे महत्वपूर्ण है: चाहे रोटी खाएं या चावल, पोर्शन साइज पर ध्यान दें। एक बार में 2 रोटी या एक कटोरी चावल ही काफी है।
2. क्वालिटी पर ध्यान दें:
· चावल खाएं तो ब्राउन राइस को प्राथमिकता दें।
· चावल को ठंडा करके खाने की कोशिश करें।
· रोटी खाएं तो साबुत गेहूं या मल्टीग्रेन आटे की ही खाएं।
3. संतुलन जरूरी है: अपनी प्लेट का आधा हिस्सा सब्जियों और सलाद से भरें। प्रोटीन (दाल, पनीर, चिकन, दही) को जरूर शामिल करें। इससे कार्ब्स का असर और कम हो जाता है और शुगर नियंत्रित रहती है।
4. निजी अनुभव को समझें: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। अपने ब्लड शुगर लेवल को चेक करके देखें कि आपके शरीर पर किस चीज का क्या असर हो रहा है।

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वायरल हैशटैग्स:

इन हैशटैग्स के साथ इस पोस्ट को शेयर करें और जागरूकता फैलाएं!

#चावलVsरोटी #शुगरकंट्रोल #संतुलितआहार

चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका:वॉक (चलना) से रन (दौड़ना)चरण 140-45 सेकंड तक चलेंचरण 215-20 सेकंड तक दौड़ेंचरण 3इस चक्र को 20-30...
16/10/2025

चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका:
वॉक (चलना) से रन (दौड़ना)

चरण 1
40-45 सेकंड तक चलें

चरण 2
15-20 सेकंड तक दौड़ें

चरण 3
इस चक्र को 20-30 बार दोहराएँ

चरण 4
धीरे-धीरे दौड़ने का समय बढ़ाएँ

चरण 5
चलने का समय कम करते हुए, लगातार 20-30 मिनट तक बिना रुके दौड़ें!

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सारांश:
यह गाइड एक व्यवस्थित तरीकेसे चलने (Walking) की आदत को दौड़ने (Running) में बदलने में मदद करती है। शुरुआत में कम समय के लिए दौड़ें और ज्यादा समय तक चलें, फिर धीरे-धीरे दौड़ के समय को बढ़ाते हुए और चलने के समय को कम करते हुए, अंतत: लगातार 20-30 मिनट तक बिना रुके दौड़ने की क्षमता हासिल करें।














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