04/11/2025
हम खुद बीमारियाँ खरीदते हैं, और फिर इलाज में सेहत ढूंढते हैं
हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि
स्वस्थ रहने का सामान हमारे घर में होता है,
और बीमारी बनाने वाला सामान बाहर से मँगाया जाता है।
घर में फल, सलाद, नींबू पानी, घर का सादा खाना होता है
पर हम लालच में बाहर की कचौड़ी, समोसा, चाट, और तली हुई चीजें खा लेते हैं।
थोड़ी देर का स्वाद जीत जाता है
और सेहत हार जाती है।
फिर एक दिन वही इंसान अस्पताल के बेड पर मिलता है।
डॉक्टर कहता है कि फल खाओ, हल्का खाना खाओ, तेल मसाला बंद करो।
अब परिवार वाले वही फल और जूस लेकर अस्पताल पहुँचते हैं
जो पहले घर में रखा होता था, पर तब उसकी कद्र नहीं थी।
सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि
मरीज अंदर सेब खा रहा होता है
और उसके रिश्तेदार बाहर अस्पताल के कैंटीन में समोसे और कचौड़ी खा रहे होते हैं।
इसी को जीवन का काल चक्र कहो तो गलत नहीं।
हम समझने में देर कर देते हैं
कि बीमारी अचानक नहीं आती,
हम धीरे-धीरे उसे न्योता देते हैं।
स्वाद कभी भी सेहत का विकल्प नहीं हो सकता।
पाँच मिनट का स्वाद, कई साल की दवाइयाँ बन जाता है।
और यह कोई प्रवचन नहीं, सच्चाई है।
अगर आप सच में अपनी और अपने परिवार की सेहत चाहते हैं
तो यह चक्र तोड़ना होगा।
फल, पानी, घर का खाना, चलना, थोड़ा समय खुद के लिए
यही भविष्य की बीमारी से बचाव है।
आपकी जिंदगी है, निर्णय आपका है।
या तो समय रहते सुधार कर लो
वरना बाद में पछतावा और दवाइयाँ ही साथी बनेंगी l
“Health is not a goal, it’s a lifestyle.”