21/02/2026
बिहार में सर्दी से गर्मी की तरफ़ मौसम बदलते समय कैसे रखें अपना ख़याल?
सर्दी ख़त्म होते ही बिहार में तापमान तेज़ी से बढ़ने लगता है और कुछ ही हफ्तों में 40 डिग्री के पास पहुँच जाता है। ऐसे में शरीर को एकदम से ठंड से गर्मी में ढालना कई लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और दिल‑BP‑शुगर के मरीज़ों के लिए।
1. रूटीन धीरे‑धीरे बदलें
- गर्मी शुरू होते ही तुरंत भारी ऊनी कपड़े छोड़कर बिल्कुल हल्के कपड़ों पर न आएँ, 1–2 हफ्ते में धीरे‑धीरे लेयर कम करें।
- काम, बाज़ार या वॉक का समय बदलें – ज़्यादातर काम सुबह जल्दी या शाम को करें, दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप से बचें।
2. पानी और तरल पहले से बढ़ा दें
- मार्च‑अप्रैल से ही पानी और तरल की मात्रा बढ़ा दें; प्यास लगे तब तक रुकें नहीं, थोड़ा‑थोड़ा पानी पूरे दिन पीते रहें।
- नींबू पानी, ORS, लस्सी, छाछ, शरबत, नारियल पानी, घर की बनी आम पन्ना/ठंडाई जैसी चीज़ें अच्छे विकल्प हैं।
- बहुत मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स, ज़्यादा चाय‑कॉफ़ी और शराब शरीर को और डिहाइड्रेट कर सकती हैं, इन्हें कम रखें।
3. सही कपड़े और धूप से बचाव
- गर्मी बढ़ते ही हल्के, ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, ये पसीने को सोखते हैं और शरीर को ठंडा रखते हैं।
- धूप में निकलते समय गमछा/दुपट्टा, टोपी या छतरी ज़रूर रखें, और हमेशा जूते‑चप्पल पहनें, नंगे पाँव गर्म ज़मीन पर न चलें।
4. खाना हल्का और ताज़ा रखें
- बहुत तला‑भुना, भारी और बासी खाना पेट पर बोझ डालता है; गर्मी में उल्टी‑दस्त की शिकायत बढ़ सकती है।
- मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा, नींबू, दही, छाछ, सलाद और हल्का घर का खाना ज़्यादा लें।
5. दिल, BP, शुगर और सांस के मरीज क्या ध्यान रखें?
- तेज़ धूप और गर्मी में ज़्यादा मेहनत (भागना, भारी सामान उठाना, खेत या निर्माण में दोपहर की ड्यूटी) से बचें।
- दवाइयाँ समय पर लें, BP और शुगर की रुटीन जांच जारी रखें, और डाक्टर की सलाह के बिना दवा में बदलाव न करें।
- सीने में दर्द, तेज़ धड़कन, बहुत कमजोरी, चक्कर, साँस फूलना या उलझन जैसे लक्षण हों तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएँ – हीट स्ट्रोक में देरी जानलेवा हो सकती है।
6. लू और हीट स्ट्रोक के संकेत पहचानें
- लू लगने के शुरुआती लक्षण: तेज़ प्यास, सूखा मुँह, गहरा पीला पेशाब, सिर दर्द, चक्कर, मांसपेशियों में खिंचाव, उल्टी‑मतली।
- हीट स्ट्रोक के खतरनाक लक्षण: बहुत तेज़ बुखार, गर्म और सूखी त्वचा, पसीना रुक जाना, उलझन, बेहोशी या दौरे।
ऐसे में मरीज़ को तुरंत छाँव या ठंडी जगह ले जाएँ, गीले कपड़े से शरीर पोछें, पंखा करें, होश में हो तो ORS/नींबू‑नमक पानी की छोटी‑छोटी घूँट दें और तुरंत अस्पताल पहुँचे।
सर्दी से गर्मी का मौसम बदलते वक़्त ही सबसे ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत होती है – पानी, हल्का खाना, सही कपड़े, दोपहर की धूप से बचाव और समय पर डॉक्टर से सलाह ही आपको और आपके परिवार को हीटवेव से सुरक्षित रख सकते हैं।