Rajendra Institute of Medical Sciences, Ranchi

Rajendra Institute of Medical Sciences, Ranchi RIMS Ranchi is the premier medical institute of Jharkhand.

FB/WA/DIR-13/2026रिम्स की 14वीं SFC की बैठक के संदर्भ में छपी ख़बरों के विषय में रिम्स प्रबंधन का पक्ष दिनाँक 28.04.2026 ...
29/04/2026

FB/WA/DIR-13/2026
रिम्स की 14वीं SFC की बैठक के संदर्भ में छपी ख़बरों के विषय में रिम्स प्रबंधन का पक्ष

दिनाँक 28.04.2026 को संपन्न रिम्स की Standing Finance Committee (SFC) की बैठक में लिए गए निर्णय एवं बैठक से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हेतु एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। निदेशक महोदय की अध्यक्षता में संपन्न इस बैठक में चिकित्सा अधीक्षक, डिप्टी डायरेक्टर फाइनेंस (DDF), अकाउंट ऑफिसर, सम्पदा पदाधिकारी, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, अपर चिकित्सा अधीक्षक, प्रशासनिक पदाधिकारी एवं अपर विधि पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में रिम्स प्रबंधन द्वारा निम्न बिंदुओं पर वस्तुस्थिति स्पष्ट की गयी, जिसकी जानकारी बाद में सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में भी साझा की गयी:
1. रिम्स में किसी भी उपकरण की खरीद के लिए निहित प्रक्रिया का अनुपालन किया जाता है। सर्वप्रथम संबंधित विभाग, जो END USER होते हैं मांग आती है, तदुपरांत स्टोर से फाइनेंसियल अप्रूवल के लिए फाइल raise की जाती है । फाइनेंसियल अप्रूवल के बाद प्रोक्योरमेंट ऑफिसर यह पुष्टि करते हैं कि SFC से अनुमोदन की आवश्यकता है अथवा नहीं? यदि है (एक करोड़ से ज्यादा के वित्तीय मामलों में), तो SFC द्वारा अनुमोदन प्राप्त है अथवा नहीं? चिकित्सा अधीक्षक भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि उक्त की खरीद हेतु जरुरी वित्तीय शक्ति निदेशक के पास है अथवा इस हेतु SFC या GB के अनुमोदन की आवश्यकता है। अकाउंटेंट, अकाउंट ऑफिसर एवं DDF पुनः इस बात की पुष्टि करते हैं। ADA से अनुमोदन के पश्चात फाइल निदेशक के समक्ष उपस्थापित की जाती है जिसे आवश्यक तथ्यों की पुष्टि कर अंतिम रूप से अनुमोदित किया जाता है।

2. ज्ञात हो कि एक करोड़ तक के वित्तीय अधिकार निदेशक को प्राप्त है अत: इस क्रय सीमा के अंदर के उपकरणों के खरीद हेतु SFC का अनुमोदन आवश्यक नहीं है।

3. अभी तक प्रोक्योरमेंट सेल अथवा लेखा शाखा के संज्ञान में एक भी ऐसा मामला नहीं है जिसमें इस प्रक्रिया का विचलन हुआ हो। इसकी लिस्ट सम्मिलित है।

4. निदेशक द्वारा प्रोक्योरमेंट सेल एवं लेखा शाखा के संबंधित अधिकारीयों को यह निर्देश दिया गया कि यदि एक भी ऐसा मामला संज्ञान में आये जिसमें वांछित प्रक्रिया का विचलन हुआ हो तो अविलंब सूचित करें।

5. ज्ञात हो कि, रिम्स में उपकरण खरीद का काम फैकल्टी मेंबर्स के द्वारा ही किया जाता है जिनका प्राथमिक कार्य छात्रों को पढ़ाना, मरीजों का ईलाज करना तथा प्रशासन में मदद करना भी है। इस अति महत्वपूर्ण कार्य के लिए अलग से कार्यबल एवं मुलभुत सुविधाओं की भारी कमी है।

6. Purchase Committee के द्वारा अप्रैल माह में लगभग 40 करोड़ के खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है क्योंकि आवश्यक फंड मार्च के महीने में LAPSE हो जाते हैं।

7. रिम्स रेगुलेशन की अनुसूची 1, क्रमांक 3 में वर्णित नियमानुसार आकस्मिक व्यय तथा भंडार सामग्री एवं लेखन सामग्री का क्रय तथा प्रपत्रों के मुद्रण हेतु स्वीकृत बजट के अंतर्गत पूर्ण वित्तीय शक्ति निदेशक को प्राप्त है। इनके लिए SFC के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।

8. कैंसर विभाग द्वारा प्रस्तावित लगभग 42 करोड़ रुपये के खरीद की प्रक्रिया निविदा की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी पूरी नहीं हो पायी है। इसमें भारत सरकार द्वारा केंद्रीय मद से 38 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए थे परन्तु क्रय की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पायी। इस राशि की REVALIDATION प्रक्रियाधीन है। इसका संज्ञान SFC को देते हुए राज्य में कैंसर के मरीजों के लिए अत्यावश्यक सुविधा प्रदान करने के निमित्त केंद्रीय निधि के REVALIDATION होने की प्रत्याशा में इसकी मांग की गयी थी जिसे SFC ने अस्वीकृत कर दिया।

9. वेंटीलेटर, पोर्टेबल सीटी स्कैन मशीन, मॉनिटर इत्यादि (लगभग 92 करोड़ रुपये मूल्य के) जैसे संवेदनशील उपकरणों की खरीद के लिए निविदा की प्रक्रिया चल रही है, परन्तु इसपर क्रय समिति को आपत्ति है क्योंकि भुगतान हेतु जरुरी फंड अप्रैल माह में उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण यह कार्य लंबित है।

10. निदेशक महोदय ने SFC की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह समझ में नहीं आता है कि SFC की बैठक में पूरे वित्तीय वर्ष में खरीदे जाने वाले उपकरणों के specifications क्यों मांगे जाते हैं। किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं किया जाता है। SFC का मुख्य कार्य जरुरी उपकरणों की सूची, उनका JUSTIFICATION एवं इसके अनुरूप बजट आबंटन एवं अनुमोदन होना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के अनावश्यक एवं अनाधिकृत हस्तक्षेप से कार्य करने में बाधा उत्पन्न होती है एवं खरीद की प्रक्रिया अनावश्यक रुप से लंबित हो जाती है।

11. ज्ञात हो कि, माननीय उच्च न्यायालय ने रिम्स को तीन महीने के अंदर जरुरी उपकरणों के क्रय की प्रक्रिया को पूर्ण कर माननीय न्यायालय को सूचित करने का आदेश दिया था। रिम्स के निवेदन पर आगामी 10 मई तक एफिडेविट दाखिल करते हुए खरीद की प्रक्रिया को 30 मई तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है।

12. इस संदर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि GB से अनुमोदन होने के पश्चात् भी विभिन्न श्रेणियों में लगभग 3000 पदों पर नियुक्ति लंबित है। इस विषय पर विभाग द्वारा या GB की बैठक में कोई भी चर्चा नहीं की जाती है।

13. निदेशक पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा से तमाम दबावों के बाद भी रिम्स में वर्षों से लंबित कार्य संचालित कर रहे हैं। यह समझना कठिन हो रहा है कि जब निदेशक रिम्स एक्ट के अनुसार स्वयं विभागाध्यक्ष हैं तथा सात तरह की झारखण्ड असेंबली द्वारा अनुमोदित STATUTARY बॉडी हैं जिससे रिम्स संचालित होती है, फिर भी उनकी निष्ठा तथा कार्यशैली को जानबूझकर बदनाम करने की बार बार कोशिश क्यों की जा रही है, इसमें क्या उद्देश्य छुपा हो सकता है ?

निर्देशानुसार प्रेषित।

IDBI बैंक, अपर बाजार, रांची शाखा द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत रिम्स के रक्त केंद्र को 15-सीटर ट्र...
29/04/2026

IDBI बैंक, अपर बाजार, रांची शाखा द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत रिम्स के रक्त केंद्र को 15-सीटर ट्रैवलर बस प्रदान की गई। यह बस डॉक्टरों और स्टाफ को ब्लड डोनेशन कैंप तक लाने-ले जाने में उपयोग की जाएगी, जिससे टीम को आवागमन में काफी सुविधा होगी। बस का उद्घाटन रिम्स निदेशक प्रो (डॉ.) राजकुमार के करकमलों द्वारा प्रशासनिक बिल्डिंग के सामने किया गया। इस अवसर पर आईडीबीआई बैंक, अपर बाजार, रांची से महाप्रबंधक श्री ऋषि गुप्ता, सहायक महाप्रबंधक अनुज सहाय, शाखा प्रमुख एवं सहायक महाप्रबंधक नीलेश चौधरी, तथा प्रबंधक मनीष कुमार उपस्थित रहे।

रिम्स की ओर से डीन (प्रो) डॉ. दीपेंद्र कुमार सिंहा, चिकित्सा अधीक्षक प्रो (डॉ.) हीरेंद्र बिरूआ, डीन (परीक्षा) एवं माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो (डॉ.) मनोज कुमार, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेश त्रिपाठी, प्रशासनिक पदाधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर डॉ. अजय कुमार, डीडीएफ सुरेंद्र कुमार गोप, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सुषमा कुमारी तथा सेंट्रल लैब से डॉ. साकेत कुमार, डॉ. पुष्पांजलि और सूचना एवं जनसम्पर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार सहित अन्य चिकित्सक व पदाधिकारी उपस्थित थे।

रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने इस सहयोग के लिए आईडीबीआई बैंक का आभार व्यक्त किया।

FB/VR-12/2026आज दिनांक 27.04.2026 को रिम्स निदेशक प्रोo डॉo राज कुमार द्वारा प्रशासनिक भवन में स्थित कार्यालय का औचक निर...
27/04/2026

FB/VR-12/2026

आज दिनांक 27.04.2026 को रिम्स निदेशक प्रोo डॉo राज कुमार द्वारा प्रशासनिक भवन में स्थित कार्यालय का औचक निरीक्षण किया गया । निरीक्षण के क्रम में स्थापना शाखा, लेखा शाखा, प्रोक्योरमेंट शाखा, छात्र शाखा, आगत-निर्गत शाखा, CMRD एवं निदेशक कोषांग में पदस्थापित कतिपय कर्मी अपराह्न 02:30 बजे तक भी अपने निर्धारित कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए । उक्त स्थिति को गंभीर अनुशासनहीनता एवं कार्य के प्रति लापरवाही मानते हुए निदेशक महोदय द्वारा संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण की पृच्छा की गयी है । संतोषजनक उत्तर नहीं पाए जाने की स्थिति में संबंधित कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी । निदेशक महोदय ने कर्मियों की कार्यशैली पर घोर नाराजगी व्यक्त करते हुए यह स्पष्ट किया कि “कार्यक्षेत्र में अनुपस्थिति, लापरवाही एवं अनुशासनहीनता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति होने पर दोषी कर्मचारियों/अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी ।”

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के महिला समाज कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा SOTTO झारखंड व रिम्स क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के सहयोग से ...
26/04/2026

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के महिला समाज कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा SOTTO झारखंड व रिम्स क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के सहयोग से रांची प्रेस क्लब में आज नेत्र दान-अंगदान सह नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे एक अत्यंत सराहनीय और मानवीय पहल बताया।

अपने संबोधन में श्री संजय सेठ ने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी नागरिकों से अपील की कि वह इस नेक कार्य में आगे आएं और दूसरों के जीवन में आशा की किरण बनें। उन्होंने कहा कि, "अंगदान और नेत्रदान, जीवन के बाद भी मानव सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है।"

कार्यक्रम के दौरान SOTTO झारखंड की ओर से मीडिया कंसल्टेंट साल्विया शार्ली ने अंगदान के महत्व, इसके सामाजिक प्रभाव तथा आमजन किस प्रकार इस नेक कार्य में सहयोग कर सकते हैं, इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंगदान के माध्यम से एक व्यक्ति कई लोगों को नया जीवन दे सकता है और समाज में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

वहीं, रिम्स (RIMS) के क्षेत्रीय नेत्र बैंक की टीम की ओर से अभिमन्यु कुमार ने नेत्रदान पर केंद्रित सत्र आयोजित किया, जिसमें नेत्रदान की प्रक्रिया, उसके लाभ एवं भ्रांतियों के निवारण पर प्रकाश डाला गया।

इस शिविर के दौरान लोगों में उत्साह देखने को मिला, जहाँ लगभग 18–20 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया, जबकि 2 लोगों ने अंगदान के NOTTO की केंद्रीय वेबसाइट पर पंजीकरण कराया।

FB/WA-10/2026रीढ़ की हड्डी में फंसी हुई थी गोली, रिम्स के डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जानरिम्स के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर...
25/04/2026

FB/WA-10/2026
रीढ़ की हड्डी में फंसी हुई थी गोली, रिम्स के डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

रिम्स के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों की टीम ने एक 48 वर्षीय गंभीर मरीज की जान बचाई । मरीज के रीढ़ की हड्डी (Dorsal Vertebra) में गोली फंसी हुई थी, जिसे डॉo विनय प्रभात एवं उनकी टीम ने सफल ऑपरेशन कर बाहर निकाला । ज्ञात हो कि, रीढ़ की हड्डी की कोई भी सर्जरी चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि इसमें मेरुदंड (Spinal Cord) के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है । ऑपरेशन की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही । इस जटिल ऑपरेशन में निश्चतेना विभाग के डॉo मुकेश एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा ।

रांची, 24 अप्रैल 2026रिम्स, रांची के Technical Resource Center द्वारा “Diagnostic Test Accuracy Meta-analysis with Criti...
25/04/2026

रांची, 24 अप्रैल 2026

रिम्स, रांची के Technical Resource Center द्वारा “Diagnostic Test Accuracy Meta-analysis with Critical Appraisal” विषय पर एक विशेष academic training program आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम 23 से 26 अप्रैल 2026 तक प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक Research & Administration Cell, 3rd Floor, RIMS Ranchi में आयोजित किया जा रहा है ।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य doctors, researchers, faculty members, residents, PhD scholars तथा healthcare professionals को यह समझाना है कि किसी diagnostic test की accuracy, reliability और clinical usefulness का scientific evaluation कैसे किया जाता है, ताकि patients को evidence-based diagnosis तथा बेहतर treatment decisions मिल सके।
कार्यक्रम का उद्घाटन 24 अप्रैल 2026 को प्रातः 10:30 बजे किया गया ।
उद्घाटन सत्र में Dr. D. K. Sinha (Dean Academics), Dr. P. K. Bhattacharya (Dean Research), Dr. Manoj Kumar (Dean Examination), Dr. Shiv Priye (Dean Student Welfare) उपस्थित रहे । इनके साथ Technical Resource Center के Investigator Dr. Amit Kumar, तथा टीम सदस्य Dr. Anupa Prasad, Dr. Ankita Tandon, Dr. Arpita Rai और Dr. Shreya Chattarjee भी उपस्थित रहे ।
RIMS Ranchi का Technical Resource Center सितंबर 2024 से सक्रिय रूप से कार्यरत है । अब तक center द्वारा Multiple Sclerosis में Stem Cell Therapy पर आधारित एक महत्वपूर्ण guideline सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी है, जो Department of Health Research (DHR), Government of India की official website पर प्रकाशित है ।
इसके अतिरिक्त, Intra-abdominal Infections पर आधारित एक review question भी पूर्ण कर DHR को प्रस्तुत किया जा चुका है । वर्तमान में center द्वारा Depression एवं उसके treatment पर आधारित दो interventional meta-analysis projects पर कार्य जारी है ।
इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे AIIMS New Delhi, AIIMS Patna, AIIMS Bhopal, Gandhi Medical College Bhopal, JIPMER Puducherry, SGPGI Lucknow, ESIC Medical College, Assam University, ICMR-RMRC Gorakhpur, Fortis Healthcare Research Foundation, Medanta Patna, ASCOMS Jammu सहित अनेक academic institutions के प्रतिभागी सम्मिलित हो रहे हैं ।
यह कार्यक्रम research capacity building, evidence-based healthcare तथा high-quality clinical guidelines development की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है ।

FB/WA-09/2026

झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति एवं रिम्स, रांची के सामुदायिक चिकित्सा (PSM) विभाग के बीच राज्य के एआरटी केन्द्रों में ...
23/04/2026

झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति एवं रिम्स, रांची के सामुदायिक चिकित्सा (PSM) विभाग के बीच राज्य के एआरटी केन्द्रों में HIV उपचार सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया है । इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि एआरटी (ART) केन्द्रों में पंजीकृत होने के बावजूद एचआईवी संक्रमित मरीज उपचार से क्यों नहीं जुड़ पाते हैं, तथा उनके उपचार में निरंतरता बनाए रखने के लिए किन प्रभावी उपायों की आवश्यकता है ।

झारखंड राज्य में वर्तमान में लगभग 18,000 HIV संक्रमित व्यक्ति पंजीकृत हैं । इनमें से लगभग 2 प्रतिशत मरीज Loss to Follow-Up (उपचार से छूटे) की श्रेणी में आते हैं, अर्थात् यह मरीज ART केन्द्रों से नियमित रूप से उपचार प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं । राज्य में HIV संक्रमित व्यक्तियों को निःशुल्क दवा एवं उपचार उपलब्ध कराने हेतु कुल 13 एआरटी केन्द्र संचालित हैं । इस शोध के अंतर्गत इन ART केन्द्रों में पंजीकृत LFU मरीजों पर विशेष अध्ययन किया जाएगा ।

यह अध्ययन निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास करेगा:
• मरीज एआरटी केन्द्रों तक नियमित रूप से क्यों नहीं पहुँच पा रहे हैं ?
• उनके सामने कौन-कौन सी सामाजिक, आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी बाधाएँ हैं ?
• उपचार में निरंतरता बनाए रखने में क्या चुनौतियाँ हैं ?

इस अध्ययन के माध्यम से उपचार से छूटे मरीजों के कारणों की पहचान की जाएगी और उनके पुनः उपचार से जुड़ाव (re-linkage) के लिए रणनीतियाँ विकसित की जाएंगी।

साथ ही, एआरटी सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता एवं पहुँच को बेहतर बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित सुझाव भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे राज्य में एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

इस शोध कार्य में सामुदायिक चिकित्सा (PSM) विभाग, रिम्स, राँची से डॉ शालिनी सुंदरम (विभागाध्यक्ष), डॉ मिथिलेश कुमार, डॉ देवेश कुमार एवं डॉ अनित कुजूर भाग लेंगे ।

FB/WA-08/2026
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, रिम्स, रांची

22/04/2026

आज दिनाँक 22.04.2026 को Safe Disposal of Biomedical Waste विषय पर चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, भवन निर्माण विभाग, परिचारिका, मातृका, नर्सिंग स्टाफ, हाउसकीपिंग स्टाफ एवं संबंधित एजेंसी Medicare के officials के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की गयी, जिसमें निम्न बिंदुओं पर चर्चा की गयी:
• Biomedical Waste (BMW) का समुचित Collection, Segregation एवं Safe Transport to the Common BMW Collection Centre सभी stakeholders का समेकित दायित्व है, अतः सभी से वांछित सहयोग अपेक्षित है ।
• सभी stakeholders अपने-अपने स्तर से Biomedical Waste के निस्तारण एवं सुरक्षित संधारण सुनिश्चित करेंगे ।
• आवारा कुत्तों (Stray Dogs) से सबंधित राज्य के मुख्य सचिव महोदय के स्तर से प्राप्त दिशा-निर्देश के आलोक में यह सुनिश्चित करना है कि General Waste एवं Biomedical Waste किसी भी परिस्थिति में आवारा कुत्तों द्वारा मिश्रित न किये जा सकें एवं इनका यत्र-तत्र बिखराव न हो ।
• इस विषय पर यह निर्णय लिया गया कि रिम्स परिसर में अवस्थित Solid Waste Disposal परिक्षेत्र में जालीदार बाउंड्री की जाएगी ताकि आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं के प्रवेश को रोका जा सके ।
• यह भी जानकारी मिली है कि रिम्स परिसर में विभिन्न स्थानों पर आवारा कुत्ते घुमते रहते हैं । इस आशय की जानकारी नगर निगम को देते हुए इन्हें नियमानुसार परिसर से हटाने की कार्यवाही की जाएगी ।

22/04/2026

रिम्स परिसर में यत्र-तत्र खड़े निजी एम्बुलेंस के संबंध में रिम्स प्रबंधन ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निर्णय लिया है कि परिसर में संचालित सभी निजी एम्बुलेंस का विस्तृत डेटा संकलित किया जाएगा । जिन एम्बुलेंस के पास वैध Commercial लाइसेंस नहीं पाया जाएगा, उनकी जानकारी संबंधित विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी तथा उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी । साथ ही, प्रबंधन के संज्ञान में आया है कि कुछ मामलों में एम्बुलेंस की आड़ में अनैतिक गतिविधियाँ भी संचालित की जा रही हैं । ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ।

यह उल्लेखनीय है कि सम्पूर्ण रिम्स परिसर ‘Silence Zone’ के अंतर्गत आता है। अत: एम्बुलेंस चालकों को यह निर्देश दिया जाता है कि रिम्स परिसर में प्रवेश के उपरांत सायरन का उपयोग बंद कर दें ।

रिम्स परिसर में पार्किंग की व्यवस्था के लिए Tender प्रक्रियाधीन है, जिसके पूर्ण होते ही SOP (Standard Operating Procedure) के अनुसार विभिन्न श्रेणी के वाहनों के पार्किंग को सुव्यवस्थित किया जाएगा ।

22/04/2026

आज के समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि रिम्स के चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं में से लगभग 25% दवाएँ निःशुल्क दवा केंद्रों पर उपलब्ध नहीं हैं । इस संदर्भ में रिम्स प्रबंधन निम्नलिखित तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक समझता है:

• रिम्स प्रशासन द्वारा सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि ओपीडी में लिखी जाने वाली दवाएँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के निर्धारित मानकों के अनुरूप ही हों । सभी चिकित्सकों को यह अनिवार्य रूप से निर्देशित किया गया है कि वह दवाओं के केवल जेनेरिक नाम बड़े अक्षरों में लिखें ।

• इसके अतिरिक्त, सभी विभागों से ओपीडी में आवश्यक दवाओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है । साथ ही यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उक्त सूची ओपीडी में प्रदर्शित रहे, ताकि मरीजों को आवश्यक जानकारी सहज रूप से प्राप्त हो सके ।

• वर्तमान में रिम्स द्वारा लगभग 300 प्रकार की दवाओं के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट किया जा चुका है । इसके अतिरिक्त लगभग 1400 दवाओं के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया तकनीकी पुनरीक्षण के चरण में है, जिसे आगामी 4 से 6 हफ़्तों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।

• रिम्स प्रबंधन मरीजों को आवश्यक दवाओं की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रति पूर्णतः संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है । इस दिशा में सभी विभागों को पुनः निर्देशित किया जाएगा कि वे निर्धारित दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें ।

20/04/2026

रिम्स में डायलिसिस की सुविधा वर्त्तमान में नेफ्रोप्लस (Nephroplus) के माध्यम से दी जा रही है। इसके अन्तर्गत आयुष्मान योजना से आच्छादित लाभुकों को भी डायलिसिस की सुविधा दी जानी है, परन्तु नेफ्रोप्लस ने रिम्स पर भुगतान में देरी का आरोप लगाते हुए अपनी सेवाएं वापस लेने की बात कही है। इस विषय पर रिम्स प्रबंधन स्पष्ट करना चाहता है कि:
• नेफ्रोप्लस को मार्च 2025 तक का भुगतान प्राप्त हो चुका है।
• अप्रैल 2025 का बिल, फरवरी 2026 में जमा किया गया था, जो प्रक्रियाधीन है तथा लेखा (Accounts) अनुभाग में है।
• मई 2025 से फरवरी 2026 के बिल भी मार्च 2026 में जमा किये गए थे ।
• आयुष्मान सेल द्वारा जाँच/स्क्रूटनी के दौरान प्री-ऑथराइजेशन के पंजीकरण संख्या में कई त्रुटियाँ पाई गई।
• त्रुटियों वाले बिल को छोड़कर अन्य के भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसे अतिशीघ्र पूर्ण कर लिया जाएगा ।

लगभग एक माह पूर्व नेफ्रोप्लस (पूर्वी) के Accounts Head के साथ आयोजित बैठक में दस्तावेजों की जाँच AI सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराने का प्रस्ताव रखा गया था, जैसा कि बिहार एवं गुजरात में पहले से संचालित है।

ज्ञात हो कि डायलिसिस सेवा गंभीर किडनी रोग से ग्रसित मरीजों के लिए जीवनरक्षी एवं अत्यंत आवश्यक है। अतः इसे जल्दबाजी में वापस लेना उचित नहीं है। ऐसा किए जाने की स्थिति में नेफ्रोप्लस द्वारा इसे Contract Agreement का उल्लंघन माना जाएगा

रिम्स, रांची के अस्पताल प्रबंधन विभाग द्वारा आज अस्पताल परिसर में अग्निशमन मॉक ड्रिल एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोज...
18/04/2026

रिम्स, रांची के अस्पताल प्रबंधन विभाग द्वारा आज अस्पताल परिसर में अग्निशमन मॉक ड्रिल एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से आग लगने की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया, आग बुझाने के विभिन्न तरीकों तथा आपातकालीन प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों के संचालन का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। साथ ही, आग लगने की स्थिति में सभी को निर्धारित Assembly Point पर तुरंत एकत्रित होने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर अग्निशमालय विभाग से अग्निशमन स्टेशन पदाधिकारी श्री रबीन्द्र ठाकुर, सब ऑफिसर श्री जीतराम उरांव, हवलदार श्री अनिल कुमार तिवारी एवं श्री विकास कुमार उपस्थित रहे। उनके द्वारा आग के विभिन्न प्रकार, अग्निशमन यंत्रों के उपयोग तथा अग्निरोधक उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण सत्र लगभग दो घंटे तक चला।

कार्यक्रम के दौरान अग्निशमन पदाधिकारियों द्वारा अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर फायर ऑडिट भी किया गया। साथ ही, अग्निशमन सेवा सप्ताह के अवसर पर दान पात्र में अपर चिकित्सा अधीक्षक द्वारा उदारतापूर्वक योगदान भी दिया गया।

इस मॉक ड्रिल में अपर चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स के चिकित्सक एवं चिकित्सा पदाधिकारी, डॉक्टर छात्र-छात्राएं (SR, PG, PG-MHA, MBBS), मातृका, प्रभारी परिचारिका, परिचारिकाएं, पैरामेडिकल स्टाफ, सुरक्षा पदाधिकारी एवं जवान (पुलिस, सैप एवं गृह रक्षक), कक्ष सेवक, सफाई कर्मी, पाकशाला कर्मी, आउटसोर्स कर्मी, अस्पताल में आए मरीज एवं उनके परिजन सहित लगभग 250 लोग उपस्थित रहे।

अस्पताल प्रबंधन विभाग द्वारा इस प्रकार का अग्निशमन मॉक ड्रिल एवं प्रशिक्षण प्रत्येक तिमाही (Quarterly) आयोजित किया जाता है, ताकि अस्पताल परिसर में सुरक्षा एवं आपातकालीन तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

Address

Bajra-Bariatu Road
Ranchi
834009

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