29/04/2026
FB/WA/DIR-13/2026
रिम्स की 14वीं SFC की बैठक के संदर्भ में छपी ख़बरों के विषय में रिम्स प्रबंधन का पक्ष
दिनाँक 28.04.2026 को संपन्न रिम्स की Standing Finance Committee (SFC) की बैठक में लिए गए निर्णय एवं बैठक से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हेतु एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। निदेशक महोदय की अध्यक्षता में संपन्न इस बैठक में चिकित्सा अधीक्षक, डिप्टी डायरेक्टर फाइनेंस (DDF), अकाउंट ऑफिसर, सम्पदा पदाधिकारी, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, अपर चिकित्सा अधीक्षक, प्रशासनिक पदाधिकारी एवं अपर विधि पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में रिम्स प्रबंधन द्वारा निम्न बिंदुओं पर वस्तुस्थिति स्पष्ट की गयी, जिसकी जानकारी बाद में सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में भी साझा की गयी:
1. रिम्स में किसी भी उपकरण की खरीद के लिए निहित प्रक्रिया का अनुपालन किया जाता है। सर्वप्रथम संबंधित विभाग, जो END USER होते हैं मांग आती है, तदुपरांत स्टोर से फाइनेंसियल अप्रूवल के लिए फाइल raise की जाती है । फाइनेंसियल अप्रूवल के बाद प्रोक्योरमेंट ऑफिसर यह पुष्टि करते हैं कि SFC से अनुमोदन की आवश्यकता है अथवा नहीं? यदि है (एक करोड़ से ज्यादा के वित्तीय मामलों में), तो SFC द्वारा अनुमोदन प्राप्त है अथवा नहीं? चिकित्सा अधीक्षक भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि उक्त की खरीद हेतु जरुरी वित्तीय शक्ति निदेशक के पास है अथवा इस हेतु SFC या GB के अनुमोदन की आवश्यकता है। अकाउंटेंट, अकाउंट ऑफिसर एवं DDF पुनः इस बात की पुष्टि करते हैं। ADA से अनुमोदन के पश्चात फाइल निदेशक के समक्ष उपस्थापित की जाती है जिसे आवश्यक तथ्यों की पुष्टि कर अंतिम रूप से अनुमोदित किया जाता है।
2. ज्ञात हो कि एक करोड़ तक के वित्तीय अधिकार निदेशक को प्राप्त है अत: इस क्रय सीमा के अंदर के उपकरणों के खरीद हेतु SFC का अनुमोदन आवश्यक नहीं है।
3. अभी तक प्रोक्योरमेंट सेल अथवा लेखा शाखा के संज्ञान में एक भी ऐसा मामला नहीं है जिसमें इस प्रक्रिया का विचलन हुआ हो। इसकी लिस्ट सम्मिलित है।
4. निदेशक द्वारा प्रोक्योरमेंट सेल एवं लेखा शाखा के संबंधित अधिकारीयों को यह निर्देश दिया गया कि यदि एक भी ऐसा मामला संज्ञान में आये जिसमें वांछित प्रक्रिया का विचलन हुआ हो तो अविलंब सूचित करें।
5. ज्ञात हो कि, रिम्स में उपकरण खरीद का काम फैकल्टी मेंबर्स के द्वारा ही किया जाता है जिनका प्राथमिक कार्य छात्रों को पढ़ाना, मरीजों का ईलाज करना तथा प्रशासन में मदद करना भी है। इस अति महत्वपूर्ण कार्य के लिए अलग से कार्यबल एवं मुलभुत सुविधाओं की भारी कमी है।
6. Purchase Committee के द्वारा अप्रैल माह में लगभग 40 करोड़ के खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है क्योंकि आवश्यक फंड मार्च के महीने में LAPSE हो जाते हैं।
7. रिम्स रेगुलेशन की अनुसूची 1, क्रमांक 3 में वर्णित नियमानुसार आकस्मिक व्यय तथा भंडार सामग्री एवं लेखन सामग्री का क्रय तथा प्रपत्रों के मुद्रण हेतु स्वीकृत बजट के अंतर्गत पूर्ण वित्तीय शक्ति निदेशक को प्राप्त है। इनके लिए SFC के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।
8. कैंसर विभाग द्वारा प्रस्तावित लगभग 42 करोड़ रुपये के खरीद की प्रक्रिया निविदा की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी पूरी नहीं हो पायी है। इसमें भारत सरकार द्वारा केंद्रीय मद से 38 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए थे परन्तु क्रय की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पायी। इस राशि की REVALIDATION प्रक्रियाधीन है। इसका संज्ञान SFC को देते हुए राज्य में कैंसर के मरीजों के लिए अत्यावश्यक सुविधा प्रदान करने के निमित्त केंद्रीय निधि के REVALIDATION होने की प्रत्याशा में इसकी मांग की गयी थी जिसे SFC ने अस्वीकृत कर दिया।
9. वेंटीलेटर, पोर्टेबल सीटी स्कैन मशीन, मॉनिटर इत्यादि (लगभग 92 करोड़ रुपये मूल्य के) जैसे संवेदनशील उपकरणों की खरीद के लिए निविदा की प्रक्रिया चल रही है, परन्तु इसपर क्रय समिति को आपत्ति है क्योंकि भुगतान हेतु जरुरी फंड अप्रैल माह में उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण यह कार्य लंबित है।
10. निदेशक महोदय ने SFC की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह समझ में नहीं आता है कि SFC की बैठक में पूरे वित्तीय वर्ष में खरीदे जाने वाले उपकरणों के specifications क्यों मांगे जाते हैं। किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं किया जाता है। SFC का मुख्य कार्य जरुरी उपकरणों की सूची, उनका JUSTIFICATION एवं इसके अनुरूप बजट आबंटन एवं अनुमोदन होना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के अनावश्यक एवं अनाधिकृत हस्तक्षेप से कार्य करने में बाधा उत्पन्न होती है एवं खरीद की प्रक्रिया अनावश्यक रुप से लंबित हो जाती है।
11. ज्ञात हो कि, माननीय उच्च न्यायालय ने रिम्स को तीन महीने के अंदर जरुरी उपकरणों के क्रय की प्रक्रिया को पूर्ण कर माननीय न्यायालय को सूचित करने का आदेश दिया था। रिम्स के निवेदन पर आगामी 10 मई तक एफिडेविट दाखिल करते हुए खरीद की प्रक्रिया को 30 मई तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है।
12. इस संदर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि GB से अनुमोदन होने के पश्चात् भी विभिन्न श्रेणियों में लगभग 3000 पदों पर नियुक्ति लंबित है। इस विषय पर विभाग द्वारा या GB की बैठक में कोई भी चर्चा नहीं की जाती है।
13. निदेशक पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा से तमाम दबावों के बाद भी रिम्स में वर्षों से लंबित कार्य संचालित कर रहे हैं। यह समझना कठिन हो रहा है कि जब निदेशक रिम्स एक्ट के अनुसार स्वयं विभागाध्यक्ष हैं तथा सात तरह की झारखण्ड असेंबली द्वारा अनुमोदित STATUTARY बॉडी हैं जिससे रिम्स संचालित होती है, फिर भी उनकी निष्ठा तथा कार्यशैली को जानबूझकर बदनाम करने की बार बार कोशिश क्यों की जा रही है, इसमें क्या उद्देश्य छुपा हो सकता है ?
निर्देशानुसार प्रेषित।