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21/11/2017

cure diabetes permanently through ayurveda

25/03/2015

Diabetes is a disease in which the body is unable to properly use and store glucose

16/07/2014

‘विजयसार’ है मधुमेह की संजीवनी
चरक संहिता को खंगालने के बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर.) ने मधुमेह की अचूक दवा तैयार कर ली, लेकिन इस संजीवनी फार्मूले को बाजार में लाने के बजाय फाइलों में कैद रखा गया है। तर्क यह है कि जिस पौधे विजयसार से यह दवा विजयसार बनी है, उसकी उपलब्धता कम है। इसलिये कोई दवा कंपनी इस फार्मूले को खरीदने के लिये तैयार नहीं? यदि है तो आयुर्वेदिक दवा कंपनियां इसी दवा को परंपरागत रूप में बनाने के लिये कच्चा माल कहां से ला रही हैं? सवाल यह भी उठता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय में ही एक विभाग ऐसा है जो औषधीय महत्व के पौधों की खेती को बढ़ावा दे रहा है। लेकिन जिन 84 पौधों की खेती हो रही है, उनमें विजयसार शामिल नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मधुमेह की ताउम्र चलने वाली दवा बेचने वाली कंपनियां इस नयी दवा को बाजार में नहीं आने देने की साजिश रच रही है? क्योंकि यह दवा सिर्फ 12 सप्ताह में मधुमेह को ठीक कर देती है। विजयसार के मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है। फिर भी इस फार्मूले को कोई दवा कंपनी लेने को तैयार नहीं। क्योंकि जिस पेड़ विजयसार से यह दवा बनी है, उसकी संख्या कम है। तर्क है कि कंपनियों को कच्चा माल नहीं मिलेगा। तो देशभर की जरूरत के लिये दवा कैसे बन पाएगी! बस, तब से दवा का फार्मूला फाइलों में कैद है। वैज्ञानिक अध्ययनों से इस बात की पुष्टि तो होती है कि इस पौधे की संख्या देश में घट रही है क्योंकि इसकी लकड़ी का व्यवसायिक महत्व है तथा वन विभाग ने इस संरक्षित पौधों की श्रेणी में रखा है।

‘विजयसार’ है मधुमेह की संजीवनीचरक संहिता को खंगालने के बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर.) ने मधुमेह की अच...
16/07/2014

‘विजयसार’ है मधुमेह की संजीवनी
चरक संहिता को खंगालने के बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर.) ने मधुमेह की अचूक दवा तैयार कर ली, लेकिन इस संजीवनी फार्मूले को बाजार में लाने के बजाय फाइलों में कैद रखा गया है। तर्क यह है कि जिस पौधे विजयसार से यह दवा विजयसार बनी है, उसकी उपलब्धता कम है। इसलिये कोई दवा कंपनी इस फार्मूले को खरीदने के लिये तैयार नहीं? यदि है तो आयुर्वेदिक दवा कंपनियां इसी दवा को परंपरागत रूप में बनाने के लिये कच्चा माल कहां से ला रही हैं? सवाल यह भी उठता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय में ही एक विभाग ऐसा है जो औषधीय महत्व के पौधों की खेती को बढ़ावा दे रहा है। लेकिन जिन 84 पौधों की खेती हो रही है, उनमें विजयसार शामिल नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मधुमेह की ताउम्र चलने वाली दवा बेचने वाली कंपनियां इस नयी दवा को बाजार में नहीं आने देने की साजिश रच रही है? क्योंकि यह दवा सिर्फ 12 सप्ताह में मधुमेह को ठीक कर देती है। विजयसार के मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है। फिर भी इस फार्मूले को कोई दवा कंपनी लेने को तैयार नहीं। क्योंकि जिस पेड़ विजयसार से यह दवा बनी है, उसकी संख्या कम है। तर्क है कि कंपनियों को कच्चा माल नहीं मिलेगा। तो देशभर की जरूरत के लिये दवा कैसे बन पाएगी! बस, तब से दवा का फार्मूला फाइलों में कैद है। वैज्ञानिक अध्ययनों से इस बात की पुष्टि तो होती है कि इस पौधे की संख्या देश में घट रही है क्योंकि इसकी लकड़ी का व्यवसायिक महत्व है तथा वन विभाग ने इस संरक्षित पौधों की श्रेणी में रखा है।

16/07/2014

Currently, India has 62 million diabetic patients. Out of this, more than 50% are in the economically productive age group of 35-55.

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821115

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