Ayurvedic Vitality - आयुर्वैदिक जीवनशक्ति

  • Home
  • Ayurvedic Vitality - आयुर्वैदिक जीवनशक्ति

Ayurvedic Vitality - आयुर्वैदिक जीवनशक्ति Are you a Ayurvedic Practitioner and looking genuine & authentic ayurveda product ? Fill the form to get the product & price detail.

We offering all product range Direct factory to doctor's on very competitive pricing.

Celebrating my 6th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉 ...
19/12/2025

Celebrating my 6th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
゚viralシalシ

19/12/2025

*स्वास्थ्य संजीवनी* *अजवाइन* 🌾👇🌾

*अजवाइन के उपयोग👇*

सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है यह एक उत्कृष्ट एंटी-ऑक्सिडेंट है अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है ये श्वसन किर्या को दुरुस्त करता है जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में किया जाता है

अजवायन ही एक ऐसी चीज या औषधि है जो अकेली ही सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक,तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि इनका नाश करने वाली होती है

अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है अजवायन में लाल मिर्च की तेजी+राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते है इस लिए यह गुणों का भंङार है यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वैध्य भी कहा गया है अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है-

आइये जाने इसके क्या प्रयोग है -
👇🌾👇🌾👇🌾👇🌾👇
1👉गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए क्युकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है-

2👉यदि अधिक शराब पी लेने से अगर व्यक्ति को उल्टियाँ आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी-

3👉कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है-

4👉गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है-

5👉शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है- घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं-

6👉गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है- अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है-

7👉जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें-

8👉दो चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें चेहरा साफ़ होता जाएगा और मुहांसे से भी निजात मिलेगी-

9👉अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं-

10👉मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है- मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें-सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है-

11👉जुकाम के साथ हल्का बुखार हो तो देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है-अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है-

12👉एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं-एसिडिटी से राहत मिलेगी-

13👉अजवाइन+अदरक(सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा-अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा-

14👉अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें-इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं-अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है-

15👉अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं तो भूख लगने लगेगी-

16👉शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर सिर्फ उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है-

17👉खांसी-जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन,और दो लौंग इन सब को पिस कर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है यह एक रामबाण दवा है-

18👉आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें-इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है-

19👉शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है-अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है-

20👉बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है-

21👉जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा-

22👉अजवायन एक प्रबल कीटनाशक है आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं-अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से भी पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है-सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ ले-इससे भी आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।

23👉अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं-

24👉अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा है यह चमत्कारी लाभ देता है प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है-गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है और दूध ज्यादा बनता है-बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता है।

25👉पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है तथा दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है-।

19/12/2025

*जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर {पुनः प्रेषित}*
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️

*कभी भी गिलास में पानी ना पियें,*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
भारत में हजारों साल की पानी पीने की जो सभ्यता है वो गिलास नही है, ये गिलास जो है विदेशी है. गिलास भारत का नही है. गिलास यूरोप से आया. और यूरोप में पुर्तगाल से आया था. ये पुर्तगाली जबसे भारत देश में घुसे थे तब से गिलास में हम फंस गये. गिलास अपना नही है. अपना लौटा है. और लौटा कभी भी एकरेखीय नही होता. तो वागभट्ट जी कहते हैं कि जो बर्तन एकरेखीय हैं उनका त्याग कीजिये. वो काम के नही हैं. इसलिए गिलास का पानी पीना अच्छा नही माना जाता. लौटे का पानी पीना अच्छा माना जाता है. इस पोस्ट में हम गिलास और लोटा के पानी पर चर्चा करेंगे और दोनों में अंतर बताएँगे.

फर्क सीधा सा ये है कि आपको तो सबको पता ही है कि पानी को जहाँ धारण किया जाए, उसमे वैसे ही गुण उसमें आते है. पानी के अपने कोई गुण नहीं हैं. जिसमें डाल दो उसी के गुण आ जाते हैं. दही में मिला दो तो छाछ बन गया, तो वो दही के गुण ले लेगा. दूध में मिलाया तो दूध का गुण.

लौटे में पानी अगर रखा तो बर्तन का गुण आयेगा. अब लौटा गोल है तो वो उसी का गुण धारण कर लेगा. और अगर थोडा भी गणित आप समझते हैं तो हर गोल चीज का सरफेस टेंशन कम रहता है. क्योंकि सरफेस एरिया कम होता है तो सरफेस टेंशन कम होगा. तो सरफेस टेंशन कम हैं तो हर उस चीज का सरफेस टेंशन कम होगा. और स्वास्थ्य की दष्टि से कम सरफेस टेंशन वाली चीज ही आपके लिए लाभदायक है.अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाली चीज आप पियेंगे तो बहुत तकलीफ देने वाला है. क्योंकि उसमें शरीर को तकलीफ देने वाला एक्स्ट्रा प्रेशर आता है.

*गिलास और लोटा के पानी में अंतर*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
गिलास के पानी और लौटे के पानी में जमीं आसमान का अंतर है. इसी तरह कुंए का पानी, कुंआ गोल है इसलिए सबसे अच्छा है. आपने थोड़े समय पहले देखा होगा कि सभी साधू संत कुए का ही पानी पीते है. न मिले तो प्यास सहन कर जाते हैं, जहाँ मिलेगा वहीं पीयेंगे. वो कुंए का पानी इसीलिए पीते है क्यूंकि कुआ गोल है, और उसका सरफेस एरिया कम है. सरफेस टेंशन कम है. और साधू संत अपने साथ जो केतली की तरह पानी पीने के लिए रखते है वो भी लोटे की तरह ही आकार वाली होती है. जो नीचे चित्र में दिखाई गई है.

सरफेस टेंशन कम होने से पानी का एक गुण लम्बे समय तक जीवित रहता है. पानी का सबसे बड़ा गुण है सफाई करना. अब वो गुण कैसे काम करता है वो आपको बताते है. आपकी बड़ी आंत है और छोटी आंत है, आप जानते हैं कि उसमें मेम्ब्रेन है और कचरा उसी में जाके फंसता है. पेट की सफाई के लिए इसको बाहर लाना पड़ता है. ये तभी संभव है जब कम सरफेस टेंशन वाला पानी आप पी रहे हो. अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाला पानी है तो ये कचरा बाहर नही आएगा, मेम्ब्रेन में ही फंसा रह जाता है.

दुसरे तरीके से समझें, आप एक एक्सपेरिमेंट कीजिये. थोडा सा दूध ले और उसे चेहरे पे लगाइए, 5 मिनट बाद रुई से पोंछिये. तो वो रुई काली हो जाएगी. स्किन के अन्दर का कचरा और गन्दगी बाहर आ जाएगी. इसे दूध बाहर लेकर आया. अब आप पूछेंगे कि दूध कैसे बाहर लाया तो आप को बता दें कि दूध का सरफेस टेंशन सभी वस्तुओं से कम है. तो जैसे ही दूध चेहरे पर लगाया, दूध ने चेहरे के सरफेस टेंशन को कम कर दिया क्योंकि जब किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के सम्पर्क में लाते है तो वो दूसरी वस्तु के गुण ले लेता है.

इस एक्सपेरिमेंट में दूध ने स्किन का सरफेस टेंशन कम किया और त्वचा थोड़ी सी खुल गयी. और त्वचा खुली तो अंदर का कचरा बाहर निकल गया. यही क्रिया लोटे का पानी पेट में करता है. आपने पेट में पानी डाला तो बड़ी आंत और छोटी आंत का सरफेस टेंशन कम हुआ और वो खुल गयी और खुली तो सारा कचरा उसमें से बाहर आ गया. जिससे आपकी आंत बिल्कुल साफ़ हो गई. अब इसके विपरीत अगर आप गिलास का हाई सरफेस टेंशन का पानी पीयेंगे तो आंते सिकुडेंगी क्यूंकि तनाव बढेगा. तनाव बढते समय चीज सिकुड़ती है और तनाव कम होते समय चीज खुलती है. अब तनाव बढेगा तो सारा कचरा अंदर जमा हो जायेगा और वो ही कचरा भगन्दर, बवासीर, मुल्व्याद जैसी सेंकडो पेट की बीमारियाँ उत्पन्न करेगा.

इसलिए कम सरफेस टेंशन वाला ही पानी पीना चाहिए. इसलिए लौटे का पानी पीना सबसे अच्छा माना जाता है, गोल कुए का पानी है तो बहुत अच्छा है. गोल तालाब का पानी, पोखर अगर खोल हो तो उसका पानी बहुत अच्छा. नदियों के पानी से कुंए का पानी अधिक अच्छा होता है. क्योंकि नदी में गोल कुछ भी नही है वो सिर्फ लम्बी है, उसमे पानी का फ्लो होता रहता है. नदी का पानी हाई सरफेस टेंशन वाला होता है और नदी से भी ज्यादा ख़राब पानी समुन्द्र का होता है उसका सरफेस टेंशन सबसे अधिक होता है.

अगर प्रकृति में देखेंगे तो बारिश का पानी गोल होकर धरती पर आता है. मतलब सभी बूंदे गोल होती है क्यूंकि उसका सरफेस टेंशन बहुत कम होता है. तो गिलास की बजाय पानी लौटे में पीयें. तो लौटे ही घर में लायें. गिलास का प्रयोग बंद कर दें. जब से आपने लोटे को छोड़ा है तब से भारत में लौटे बनाने वाले कारीगरों की रोजी रोटी ख़त्म हो गयी. गाँव गाँव में कसेरे कम हो गये, वो पीतल और कांसे के लौटे बनाते थे. सब इस गिलास के चक्कर में भूखे मर गये. तो वागभट्ट जी की बात मानिये और लौटे वापिस लाइए।

19/12/2025

🟠 *स्वदेशी चिकित्सा* 🟠

सिक्थैविरहितो मण्डः पेया सिक्थ समन्विताः । धन सिक्था विलेपी स्यात् यवागू विरलद्रवा ।।

अर्थ : से धान की लावा को 6 गुने जल में पकाकर कपड़े से छानकर लेने का नाम मण्ड और बिना छाने हुये लेने का नाम पेया। तथा गाढे रूप में बनाने का नाम विलेपी है। इनमें सबसे लघु मण्ड, उससे गुरू पेया, उससे गुरू विलेपी, और उनसे गुरू भात होता है। यही कारण है कि वमन और विरेचन के बाद अत्यधिक अग्नि के मन्द होने पर मण्ड, पेया, विलेपी का प्रयोग किया जाता है। यद्यपि वमन-विरेचन के बाद मण्ड का विधान नहीं किया गया है फिर भी अत्यन्त लघु होने के कारण इसका प्रयोग किया जाता है।

क्षुतृष्णाग्लानिदौर्बल्यकुक्षिरोगज्वरापहा । मलानुलोमनी पथ्या पेया दीपनपाचनी ।।

अर्थ : पेया का गुण-पेया क्षुधा और प्यास से उत्पन्न ग्लानि दुर्बलता तथा उदर के रोग और ज्वर को दूर करती है। मलों का अर्थात् विकृत वात, पित, कफ एवं मल-मूत्र स्वेद का अनुलोमन करती है। यदि यह वातादि दोष और मल दूसरे मार्गों में गये होते हैं तो उन्हें अपने मार्ग में लाती है। यह शरीर के लिए हितकारी अग्नि को दीप्त करने वाली और आम दोष को पकाने वाली है।

विलेपी ग्रहिणी हृद्या तृष्णाघ्नी दीपनी हिता। व्ररगाक्षिरोगसंशुद्धदुर्बलस्नेहपायिनाम् ।।

अर्थ : विलेपी का गुण-विलेपी ग्राही अर्थात् अतिसार ग्रहणी आदि रोगों में मल का संग्रह करती है। हृदय के लिए बलदायक, प्यास को दूर करने वाली, अग्नि को दीप्त करने वाली तथा व्रण नेत्ररोग, वमन विरेचन से शुद्ध दुर्बल पुरूष और नित्य स्नेह पान करने वाले व्यक्तियों के लिए हितकर है।

19/12/2025

BMI અને બેરિયાટ્રિક સર્જરી

BMI એટલે બોડી માસ ઈન્ડેકસ. તે વ્યક્તિની ઊંચાઈના પ્રમાણમાં તેનું વજન કેટલું છે તે જાણવાનો એક વૈજ્ઞાનિક માપદંડ છે. આ આંકડા પરથી જાણી શકાય છે કે વ્યક્તિનું વજન સામાન્ય છે, ઓછું છે કે તે મેદસ્વિતા (સ્થૂળતા) તરફ જઈ રહી છે.
BMI કેવી રીતે જાણી શકાય? (ગણતરી)
BMI ની ગણતરી કરવા માટેનું સૂત્ર ખૂબ જ સરળ છે:
BMI= વજન ÷ (ઊંચાઈ×ઉંચાઈ).
(અહીં વજન મીટરમાં લેવાનું છે)
ઉદાહરણ તરીકે:
ધારો કે કોઈ વ્યક્તિનું વજન ૭૦ કિલોગ્રામ છે અને તેની ઊંચાઈ ૧.૬ મીટર (લગભગ ૫ ફૂટ ૩ ઈંચ) છે.
* પહેલા ઊંચાઈનો વર્ગ કરો: ૧.૬×૧.૬= ૨.૫૬
* હવે વજનને આ આંકડા વડે ભાગો: ૭૦÷૨.૫૬= ૨૭.૩૪
આમ, તે વ્યક્તિનો BMI ૨૭.૩૪ ગણાશે.
હવે એ જોઈએ કે આપણો જે BMI હોય તેનું અર્થઘટન કેવી રીતે કરાશે.
તમારા BMI ના આંકડા મુજબ તમે નીચેની શ્રેણીમાં આવી શકો છો:
BMI ૧૮.૫ થી ઓછો એટલે ઓછું વજન.
BMI ૧૮.૪ થી ૨૪.૯ એટલે સામાન્ય કે તંદુરસ્ત વજન.
બની ૨૫ થી ૨૯.૯ એટલે વધુ વજન
BMI ૩૦ થી વધુ એટલે મેદસ્વિતા.
હવે એ જોઈએ કે BMI નું મહત્વ શું છે.
BMI એ માત્ર વજનનો આંકડો નથી, પરંતુ તે તમારાં સ્વાસ્થ્યનું પ્રતિબિંબ છે:
* રોગોનું જોખમ જાણવા: જો તમારો BMI ૩૦ થી વધુ હોય, તો ટાઈપ-૨ ડાયાબિટીસ, હાઈ બ્લડ પ્રેશર અને હૃદયરોગ જેવી બીમારીઓ થવાનું જોખમ વધી જાય છે.
* સ્વાસ્થ્યનું સંતુલન: જો BMI ૧૮.૫ થી ઓછો હોય, તો તે કુપોષણ અથવા નબળી રોગપ્રતિકારક શક્તિની નિશાની હોઈ શકે છે.
* યોગ્ય આહારનું આયોજન: BMI ના આધારે તમે નક્કી કરી શકો છો કે તમારે વજન ઘટાડવા માટે ડાયટ કરવાની જરૂર છે કે વજન વધારવા માટે પૌષ્ટિક ખોરાકની.
* શારીરિક સક્રિયતા: તે આપણને કસરત અને શારીરિક પ્રવૃત્તિઓ વધારવા માટે પ્રોત્સાહન આપે છે.
અહીં એ બાબત ખાસ ધ્યાનમાં લેવાની છે કે BMI એ એક અંદાજિત માપ છે. તે શરીરમાં ચરબી અને સ્નાયુઓ વચ્ચેનો તફાવત બતાવતું નથી. જે લોકો બોડી બિલ્ડિંગ કરતા હોય તેમનો BMI સ્નાયુઓને કારણે વધુ હોઈ શકે છે, જેનો અર્થ એ નથી કે તેઓ મેદસ્વી છે.
​જો કોઈ વ્યક્તિનો BMI ૩૫ થી વધુ હોય, તો તેને 'ક્લાસ-૩' મેદસ્વિતા (ગંભીર મેદસ્વિતા) ગણવામાં આવે છે. આવા કિસ્સામાં, જો ડાયટ અને કસરતથી વજન ઘટતું ન હોય, તો બેરિયાટ્રિક સર્જરીની સલાહ આપવામાં આવે છે.
​૨. જો BMI ૩૦ થી ૩૫ ની વચ્ચે હોય (બીમારીઓ સાથે)
​જો તમારો BMI ૩૦ થી ૩૫ ની વચ્ચે હોય, પરંતુ તમને મેદસ્વિતાને કારણે ગંભીર બીમારીઓ હોય, તો પણ ડોક્ટર સર્જરી સૂચવી શકે છે.
જેવી કે:
​ટાઈપ-૨ ડાયાબિટીસ (જે દવાઓથી કંટ્રોલ ન થતો હોય).
​હાઈ બ્લડ પ્રેશર
​સ્લીપ એપ્નિયા (ઊંઘમાં શ્વાસ લેવામાં તકલીફ).
​હૃદય રોગ અથવા સાંધાના અસહ્ય દુ:ખાવા.
​• એશિયન/ભારતીય લોકો માટેના ખાસ માપદંડ
​ભારતીયોમાં ચરબીનું વિતરણ અલગ હોવાથી (ખાસ કરીને પેટની ચરબી), અહીંના ડોક્ટરો થોડા નીચા BMI પર પણ સર્જરીની ભલામણ કરે છે:
​BMI જો ૩૨.૫ થી વધુ હોય તો જો કોઈ ગંભીર બીમારી ન હોય તો પણ.
​BMI > ૨૭.૫, જો ગંભીર ડાયાબિટીસ કે અન્ય જીવલેણ બીમારીઓ મેદસ્વિતાને કારણે હોય.
અહીં એ ધ્યાનમાં લેવું જરૂરી છે કે બેરિયાટ્રિક સર્જરી કરાવતાં પહેલાં ડાયેટ અને એક્સરસાઈઝથી વજન ઘટાડવાનો સંનિષ્ઠ પ્રયાસ થવો જ જોઈએ કારણ કે બેરિયાટ્રિક સર્જરી જોખમી તો છે જ અને બીજું કે એ કરાવ્યા પછી પણ આકરી પરેજી તો પાળવી જ પડે છે અને બીજી પણ અનેક મુશ્કેલીઓ પડે છે અને એ કોઈ યોગ્ય શોર્ટ કટ નથી.
. . . . તો આજે જ તમારો BMI ગણી કાઢો અને જો વધુ હોય તો તેનાથી ડાયેટ અને એક્સરસાઈઝ પરત્વે ગંભીર લક્ષ આપવાનું શરૂ કરી દો જેથી મામલો હદની બહાર બીચકે નહીં !

(નોંધ: અહીં દર્શાવેલા આંકડાઓ અંગે મતમતાંતરો હોઈ શકે છે, કોઈ પણ તબીબી લેખ નિષ્ણાત ડોક્ટરની વ્યક્તિ અનુસારની સલાહનો વિકલ્પ નથી.)

सब बीमारी का एक इलाज …………250 ग्राम मैथीदाना100 ग्राम अजवाईन50 ग्राम काली जीरीउपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-...
19/12/2025

सब बीमारी का एक इलाज …………

250 ग्राम मैथीदाना

100 ग्राम अजवाईन

50 ग्राम काली जीरी

उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर डिब्बा-शीशी या बरनी में भर लेवें ।

रात्रि को सोते समय चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है।

गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है।

यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी ।

पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

फायदे

1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।

2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।

3. आख का तेज बढ़ेगा ।

4. बालों का विकास होगा।

5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।

6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।

7. कफ से मुक्ति ।

8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।

9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।

10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।

11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।

12. कान का बहरापन दूर होगा ।

13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।

14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।

15. शरीर की सभी खून की नलिकाए शुद्ध हो जाएगी ।

16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।

17. नपुसंकता दूर होगी।

18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा ।

यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है तो अपने डॉक्टर की सलाह से ही यह दवाइयां ले।

19/12/2025

आज की अधिकांश पाचन समस्याएँ
भोजन की कमी से नहीं,
भोजन की समझ के अभाव से जन्म लेती हैं।

आयुर्वेद हमें यह सिखाता है कि
हर आहार अपने-आप में शुद्ध हो सकता है,
परंतु गलत संयोजन में लिया गया भोजन
शरीर के लिए भार बन जाता है।

दूध, दही, फल, शहद या अनाज
प्रत्येक का अपना स्वभाव,
अपनी पाचन-गति
और अग्नि पर अपना प्रभाव होता है।
जब इनका मेल
प्रकृति के विरुद्ध होता है,
तब वही आहार
धीरे-धीरे आम उत्पन्न करता है।

यह कैरोसल
मनाही की सूची नहीं है,
यह समझ का निमंत्रण है
कि हम भोजन को केवल स्वाद से नहीं,
उसके संयोजन और समय से भी आँकें।

स्वास्थ्य का वास्तविक मार्ग
दवाओं से नहीं,
अनुशासित आहार-बुद्धि से निकलता है।

भोजन को सरल रखिए।
संयोजन को समझिए।
और शरीर को वह सम्मान दीजिए
जिसका वह अधिकारी है।

18/12/2025
16/12/2025

तंत्र साधना में कुंडली की स्थिति
तंत्र साधना के दौरान जो आवाज़ें आती हैं, वो सचमुच कौन हैं? ⚡

रात का आखिरी पहर।
कमरे में सिर्फ़ दीये की लौ और आपकी साँसों की आवाज़।
अचानक कान में फुसफुसाहट होती है।
“डर मत… मैं यहीं हूँ।”

या कभी कोई औरत हँसती है, कभी बच्चा रोता है, कभी कोई बूढ़ा गुस्से में चिल्लाता है।
शरीर में कंपकंपी दौड़ जाती है।
मन डर से भर जाता है – “क्या कोई भूत आ गया?”

पर सच्चाई इससे कहीं गहरी और रहस्यमयी है।

तंत्र शास्त्र में इन आवाज़ों को “सिद्ध-संकेत” या “शक्ति-वाणी” कहा जाता है।

ये न भूत होते हैं, न प्रेत, न कोई बाहरी आत्मा।
ये आपकी अपनी कुंडलिनी शक्ति के जागरण के दौरान निकलने वाले “आंतरिक ध्वनि-नाद” हैं।

ये आवाज़ें असल में कौन हैं?

1. आपके पिछले जन्मों की छुपी यादें

जब कुंडलिनी मूलाधार से ऊपर उठती है, तो वह आपके सूक्ष्म शरीर में जमा पुराने संस्कारों को हिलाती है। पिछले जन्मों में जो आप थे – कोई स्त्री, कोई बच्चा, कोई योद्धा – उनकी आवाज़ें बाहर निकलने लगती हैं। ये सिर्फ़ “रिलीज़” हो रही हैं।

2. आपके भीतर की देव-शक्तियाँ

तंत्र में हर चक्र पर एक देवता और देवी निवास करते हैं।
मूलाधार पर गणेश की हल्की हँसी
स्वाधिष्ठान पर ब्रह्मा-सरस्वती की फुसफुसाहट
मणिपूर पर विष्णु-लक्ष्मी की मधुर बातें
हृदय चक्र पर शिव-पार्वती की प्रेम भरी आवाज़
जब ये चक्र खुलते हैं, तो इन देवताओं की सूक्ष्म वाणी सुनाई देती है।

3. यक्ष-किन्नर-गंधर्व और सिद्धों की आवाज़ें

जब साधक का सूक्ष्म शरीर जागता है, तो वह “सिद्ध लोक” के करीब पहुँच जाता है। वहाँ रहने वाले यक्ष, किन्नर, गंधर्व या पुराने सिद्ध साधक आपकी साधना देखकर आशीर्वाद देते हैं। उनकी आवाज़ें कभी गाना बनकर, कभी हँसी बनकर आती हैं।

4. माँ शक्ति का सीधा संवाद

सबसे ऊँचा स्तर – जब कुंडलिनी आज्ञा या सहस्रार तक पहुँचती है, तो माँ काली या आदिशक्ति खुद बोलती हैं। उनकी आवाज़ इतनी स्पष्ट होती है कि लगता है कोई कान के पास खड़ा होकर बोल रहा है। वो मार्गदर्शन देती हैं, चेतावनी देती हैं, या सिर्फ़ “डर मत, मैं तेरे साथ हूँ” कहती हैं।

मेरे साथ ऐसा अनुभव कई बार हुआ है।

पहली बार काली साधना में कुछ रात्रि साधना में मैंने सुना।
एक औरत धीरे से मेरे नाम से पुकार रही थी।
मैं डर गया,साधना छोड़कर भागा।
अगले दिन गुरु से बताया तो वो हँसे और बोले:
“वो माँ काली थीं। तू डरा, इसलिए वो चली गईं।
अब फिर बुला और इस बार डर मत।”
दूसरी बार जब वही आवाज़ आई, तो मैंने पूछा – “आप कौन हैं?”
जवाब आया – “तेरी माँ हूँ। डर मत।”

उस रात के बाद मेरी साधना में ऐसा तेज आया कि 40 दिन में ही मुझे वो प्राप्त हो गया जो में चाहता था।

क्या करना चाहिए जब आवाज़ें आएँ?

डरना बिल्कुल नहीं – डरते ही नकारात्मक शक्तियाँ (जो वाकई बाहर हैं) मौका पा जाती हैं।

आँखें बंद करके मन में बोलो: “जय माँ काली, जो भी हो, मेरी रक्षा करो।”

अगर आवाज़ मार्गदर्शन दे रही हो, तो सुनो और नोट करो।

अगर डरावनी लगे, तो तुरंत हनुमान चालीसा या “ॐ क्रीं कालीकायै नमः” 11 बार बोलो।

ये आवाज़ें डर की नहीं, आपके जागरण की निशानी हैं।
जितनी गहरी साधना, उतनी स्पष्ट आवाज़ें।

एक दिन आएगा जब ये आवाज़ें बंद हो जाएँगी।
क्योंकि तब आप और शक्ति एक हो चुके होंगे।
फिर न कोई बोलने वाला रहेगा, न सुनने वाला।

अगर आपकी साधना में भी ऐसी आवाज़ें आई हैं,
तो कमेंट में सिर्फ़ अपना अनुभव लिखो।

30/11/2025

दिव्य शिवलिंग है हमारा अपना अंगूठा ..........

जब हम अपनी चार उंगलिओं को मोड़ कर अंगूठा ऊपर करते हैं तब हमारा अंगूठा एक शिव लिंग का आकार ले लेता है . यही है हमारे शरीर में हमारा साथ सदा रहने वाला शिव लिंग. यदि आपको कहीं मंदिर में कोई शिव लिंग उपलब्ध नही हो पाता है तो आप अपने अंगूठे पर ही जलाभिषेक करके भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं .
अंगूठे का नाखून शिव लिंग के साथ में चन्द्र का प्रतीक है। अंगूठे पर बनी तीन मोटी रेखाएं प्राकृतिक रूप से इस शिवलिंग को तिलक करती हैं. नाखून के पीछे की रेखाएं (जिनका प्रयोग फिंगर प्रिंट के लिए होता है ) वो भगवान शिव की जटाएं हैं . हर व्यक्ति के अंगूठे रूपी शिव लिंग में ये जटाएं एक अलग तरह की होती हैं. बिना अंगूठे के प्रयोग के आप केवल अपनी बाक़ी चार उँगलियों से कोई बड़ा कार्य जैसे भार उठाना, लिखना आदि नही कर सकते क्योंकि आप बिना शिवजी की सहायता के कुछ नही कर सकते.

अंगूठे से तिलक करने से आपको भगवान शिव का आशीर्वाद स्वतः मिल जाता है .

शिवलिंग मुद्रा.........

बाएं हाथ को पेट के पास लाकर सीधा रखें। दाएं हाथ की मुठ्ठी बना कर बाईं हथेली पर रखें और दाएं हाथ का अंगूठा सीधा ऊपर की ओर रखें। नीचे वाले बाएं हाथ की अंगुलियाँ और अंगूठा मिला कर रखें। दोनों बाजुओं की कोहनियाँ सीधी रखें। इस मुद्रा को शिवलिंग मुद्रा कहते हैं।

शिवलिंग मुद्रा दिन में दो बार पाँच मिनट के लिए लगाएं।

लाभ .............

शिवलिंग मुद्रा लगाने से सुस्ती, थकावट दूर हो नयी शक्ति का विकास होता है।
शिवलिंग मुद्रा लगाते हुए लम्बे व गहरे सांस लेने चाहिये।
शिवलिंग मुद्रा लगाने से मानसिक थकान व चिंता दूर होती है।

हाथ की उंगलियों में पंच तत्व का वास.........
हमारे हाथ की उंगलियों में पंच तत्व का वास है। हमारे अंगुष्ठ में आकाश, तर्जनी में वायु, मध्यमा में अग्नि, अनामिका में जल एवं कनिष्ठा में पृथ्वी तत्व स्थित है।भोजन हाथ से ही करें, कटलरी से नहीं.....
हमारी उंगलियों को ऋषि स्वरूप एवं हमारे भोजन को देवी स्वरूप माना जाता है। जब हम भोजन हाथ से करते हैं, तो ऋषि हमारे भोजन को मुंह तक ले जाते हैं, जिससे हम जीवित रहते हैं। अतः भोजन साफ-सुथरे हाथ से ही करें, कटलरी से नहीं। भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे तो उसका अच्छा असर हमारे शरीर, मन और बुद्धि तक होगा ।
कटलरी अर्थात चाकू, छूरी, कांटे से भोजन को काटना, फाड़ना एवं छेदना क्या असभ्यता की निशानी नहीं है ?

29/11/2025
29/11/2025

Address


Telephone

+917984556490

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurvedic Vitality - आयुर्वैदिक जीवनशक्ति posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ayurvedic Vitality - आयुर्वैदिक जीवनशक्ति:

  • Want your practice to be the top-listed Clinic?

Share