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पुरानी जुकाम की एलर्जी (Chronic Cold Allergy / Allergic Rhinitis)लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणासमस्या को समझना जरूरी क्यो...
02/02/2026

पुरानी जुकाम की एलर्जी (Chronic Cold Allergy / Allergic Rhinitis)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा
समस्या को समझना जरूरी क्यों है (Why This Problem Needs Attention):
पुरानी जुकाम की एलर्जी एक आम, लेकिन अक्सर गलत तरीके से समझी जाने वाली समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार छींकें आती हैं, नाक से साफ पानी बहता रहता है और नाक में खुजली या बंद होने की शिकायत रहती है। यह परेशानी कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक चल सकती है और अक्सर बिना बुखार के होती है। इसी कारण लोग इसे साधारण सर्दी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस क्या होता है (What Is Allergic Rhinitis):
चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता है, जिसका सरल अर्थ है नाक की अंदरूनी परत में एलर्जी के कारण होने वाली सूजन। यह कोई संक्रमण नहीं है और न ही यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।

यह समस्या क्यों होती है (Why Does This Allergy Occur):
यह समस्या तब होती है जब शरीर की रक्षा प्रणाली धूल, मिट्टी, पराग, ठंडी हवा, धुआं या तेज गंध जैसी सामान्य चीजों को नुकसानदायक समझ लेती है। इसके जवाब में शरीर एक आंतरिक रासायनिक प्रतिक्रिया करता है, जिससे छींकें और नाक से पानी आने लगता है। यानी समस्या बाहर से नहीं, बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया के कारण होती है।

इसके आम लक्षण क्या हैं (Common Symptoms of Cold Allergy):
इसके लक्षणों में बार-बार छींक आना, नाक से पतला और साफ पानी गिरना, नाक में खुजली, नाक बंद रहना और कई बार आंखों में पानी या जलन शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर इसमें बुखार, बदन दर्द या सामान्य कमजोरी नहीं होती। अगर बुखार हो, तो कारण एलर्जी के अलावा कुछ और भी हो सकता है।

सर्दी और एलर्जी में फर्क (Difference Between Common Cold and Allergy):
साधारण सर्दी और एलर्जी में फर्क समझना जरूरी है। साधारण सर्दी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है और अक्सर संक्रमण से जुड़ी होती है, जबकि एलर्जी लंबे समय तक बनी रह सकती है या समय-समय पर बार-बार लौटती रहती है। सर्दी में दवा लेने से पूरी तरह आराम मिल जाता है, लेकिन एलर्जी में दवा से केवल अस्थायी राहत मिलती है और कारण बने रहने पर लक्षण फिर उभर सकते हैं।

लंबे समय तक अनदेखी के असर (Effects of Long-Term Neglect):
यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन अगर लंबे समय तक अनदेखी की जाए तो यह नींद, काम, पढ़ाई और रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। लगातार नाक बंद रहने से सिर भारी रहना, थकान और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

सही इलाज की दिशा क्या हो (Right Direction for Management):
इलाज की सही दिशा यह है कि केवल दवा पर निर्भर न रहा जाए। धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचाव, नाक की नियमित सफाई, संतुलित खानपान, पूरी नींद और तनाव कम रखना इस समस्या को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, खासकर तब जब समस्या कई हफ्तों तक बनी रहे या दवा बंद करते ही दोबारा शुरू हो जाए।

सरल निष्कर्ष (Simple Takeaway for Readers):
सार रूप में कहा जाए तो, हर बार होने वाला जुकाम सर्दी नहीं होता। बार-बार और लंबे समय तक चलने वाली समस्या अक्सर एलर्जी होती है। सही जानकारी, समय पर पहचान और संतुलित देखभाल से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है, और व्यक्ति सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकता है।

इस लेख का उद्देश्य (Purpose of This Article):
इस लेख का मकसद आपको बीमारी पहचानने में मदद करना है।

पाठकों के लिए संदेश (Message for Readers):
यदि यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो आप इसे शेयर करें और कमेंट बॉक्स में सुझाव दें कि आगे आप किस विषय पर ऐसी जानकारी चाहते हैं।
fans
आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा
Adiwasi Tau (02.02.2026)
Online Herbalist, Homeopath, Counselor & Writer
फ्री परामर्श हेतु अपनी समस्या WhatsApp No.: 8561955619 पर लिखें।

नोट: इस तरह की सामग्री पढने हेतु निम्न पेज को फोलो करें:
https://www.facebook.com/adiwasitau/posts/pfbid0KqGMGtW9US7gBFnteG9kwbT6Qjb3oeHEuXhxcGmQqcFPeh8FzaNxBqLxJLx5pgfbl

पुरानी जुकाम की एलर्जी (Chronic Cold Allergy / Allergic Rhinitis)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा

समस्या को समझना जरूरी क्यों है (Why This Problem Needs Attention):
पुरानी जुकाम की एलर्जी एक आम, लेकिन अक्सर गलत तरीके से समझी जाने वाली समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार छींकें आती हैं, नाक से साफ पानी बहता रहता है और नाक में खुजली या बंद होने की शिकायत रहती है। यह परेशानी कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक चल सकती है और अक्सर बिना बुखार के होती है। इसी कारण लोग इसे साधारण सर्दी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस क्या होता है (What Is Allergic Rhinitis):
चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता है, जिसका सरल अर्थ है नाक की अंदरूनी परत में एलर्जी के कारण होने वाली सूजन। यह कोई संक्रमण नहीं है और न ही यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।

यह समस्या क्यों होती है (Why Does This Allergy Occur):
यह समस्या तब होती है जब शरीर की रक्षा प्रणाली धूल, मिट्टी, पराग, ठंडी हवा, धुआं या तेज गंध जैसी सामान्य चीजों को नुकसानदायक समझ लेती है। इसके जवाब में शरीर एक आंतरिक रासायनिक प्रतिक्रिया करता है, जिससे छींकें और नाक से पानी आने लगता है। यानी समस्या बाहर से नहीं, बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया के कारण होती है।

इसके आम लक्षण क्या हैं (Common Symptoms of Cold Allergy):
इसके लक्षणों में बार-बार छींक आना, नाक से पतला और साफ पानी गिरना, नाक में खुजली, नाक बंद रहना और कई बार आंखों में पानी या जलन शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर इसमें बुखार, बदन दर्द या सामान्य कमजोरी नहीं होती। अगर बुखार हो, तो कारण एलर्जी के अलावा कुछ और भी हो सकता है।

सर्दी और एलर्जी में फर्क (Difference Between Common Cold and Allergy):
साधारण सर्दी और एलर्जी में फर्क समझना जरूरी है। साधारण सर्दी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है और अक्सर संक्रमण से जुड़ी होती है, जबकि एलर्जी लंबे समय तक बनी रह सकती है या समय-समय पर बार-बार लौटती रहती है। सर्दी में दवा लेने से पूरी तरह आराम मिल जाता है, लेकिन एलर्जी में दवा से केवल अस्थायी राहत मिलती है और कारण बने रहने पर लक्षण फिर उभर सकते हैं।

लंबे समय तक अनदेखी के असर (Effects of Long-Term Neglect):
यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन अगर लंबे समय तक अनदेखी की जाए तो यह नींद, काम, पढ़ाई और रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। लगातार नाक बंद रहने से सिर भारी रहना, थकान और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

सही इलाज की दिशा क्या हो (Right Direction for Management):
इलाज की सही दिशा यह है कि केवल दवा पर निर्भर न रहा जाए। धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचाव, नाक की नियमित सफाई, संतुलित खानपान, पूरी नींद और तनाव कम रखना इस समस्या को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, खासकर तब जब समस्या कई हफ्तों तक बनी रहे या दवा बंद करते ही दोबारा शुरू हो जाए।

सरल निष्कर्ष (Simple Takeaway for Readers):
सार रूप में कहा जाए तो, हर बार होने वाला जुकाम सर्दी नहीं होता। बार-बार और लंबे समय तक चलने वाली समस्या अक्सर एलर्जी होती है। सही जानकारी, समय पर पहचान और संतुलित देखभाल से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है, और व्यक्ति सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकता है।

इस लेख का उद्देश्य (Purpose of This Article):
इस लेख का मकसद आपको बीमारी पहचानने में मदद करना है।

पाठकों के लिए संदेश (Message for Readers):
यदि यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो आप इसे शेयर करें और कमेंट बॉक्स में सुझाव दें कि आगे आप किस विषय पर ऐसी जानकारी चाहते हैं।

आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा
Adiwasi Tau (02.02.2026)
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नींद में तेज खर्राटों की समस्या और देसी समाधान (Snoring and Indigenous Herbal Management):स्वास्थ्य जागरूकता हेतु मैं स्...
29/01/2026

नींद में तेज खर्राटों की समस्या और देसी समाधान (Snoring and Indigenous Herbal Management):

स्वास्थ्य जागरूकता हेतु मैं स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जनजागरूकता हेतु लेखन के माध्यम सार्वजनिक रूप से जानकारी प्रदान करता रहता हूं। इसी क्रम में मुझे एक मरीज ने निम्न समस्या लिखकर भेजी है।

"मेरी उम्र करीब पैंसठ वर्ष है। मुझे नींद में तेज खर्राटे आते हैं। यह परेशानी काफी समय से बनी हुई है। इसी कारण मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं सोती हैं। मुझे लगता है कि मेरी नींद पूरी नहीं हो पाती और सुबह उठने पर शरीर थका हुआ और भारी रहता है।"

मरीज की पहचान गोपनीय रखते हुए उसकी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निम्नानुसार प्रस्तुत है-

परिचय (Introduction):
नींद में तेज खर्राटे प्रायः तब होते हैं जब नींद के दौरान गले का मार्ग संकरा हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों में ढीलापन आना, नाक का बंद रहना और पीठ के बल सोने की आदत इस स्थिति को बढ़ा सकती है। मानसिक तनाव बढ़ने पर Cortisol तनाव हार्मोन यानी Stress Hormone का स्तर बढ़ता है जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। नींद बार बार टूटने से Dopamine आनंद और प्रेरणा रसायन यानी Pleasure and Motivation Chemical का संतुलन भी बिगड़ सकता है। करवट लेकर सोना, रात का भोजन हल्का रखना और सोने से पहले नाक साफ रखना प्रारंभिक सुधार के उपाय हैं।

उपचार हेतु जरूरी प्रमुख हर्ब्स की क्रियाविधि एवं औषधीय भूमिका (Mechanism and Medicinal Role of Herb):
(1) वासा (Adhatoda vasica): श्वसन मार्ग की सूजन और जकड़न कम करने में सहायक होता है। इसके Active Constituents vasicine यानी श्वसन नलिकाओं को खोलने वाला घटक और vasicinone यानी बलगम पतला करने में सहायक घटक माने जाते हैं।
(2) यष्टिमधु (Glycyrrhiza glabra): गले की अंदरूनी परत को आराम देता है और खराश व सूखापन घटाने में सहायक होता है। इसके Active Constituents glycyrrhizin यानी सूजन शांत करने वाला घटक और flavonoids यानी प्राकृतिक antioxidant घटक माने जाते हैं।
(3) हरिद्रा (Curcuma longa): नाक और गले की सूजन कम करने में सहायक रहती है। इसके Active Constituents curcumin यानी सूजन नियंत्रित करने वाला प्रमुख घटक माना जाता है।

सेवन एवं उपयोग विधि (Intake and Usage Method):
सामान्य जानकारी के अनुसार इन जड़ी बूटियों का काढ़ा रात में सोने से पहले लिया जाता है। लेकिन हर व्यक्ति का शरीर, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए खुराक, शक्ति और सेवन अवधि तय करने के लिए केस हिस्ट्री की जानकारी आवश्यक होती है। अतः आप इसके लिए किसी अनुभवी उपचारक से संपर्क करें।

यदि खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने जैसा अनुभव हो, अचानक घबराकर नींद टूटती हो, सुबह सिर भारी रहता हो या दिन में अत्यधिक नींद आती हो तो कान नाक गला विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।

आपको जो सुझाई गई औषधियों का सेवन करने से पहले बेहतर होगा कि आप व्यक्तिगत रूप से किसी अनुभवी उपचारक या काउंसलर की सलाह अवश्य लें। मैं आपको इतना विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आप जिन हालातों और तकलीफों से परेशान हैं, इन जैसी ही बल्कि इनसे भी गंभीर परिस्थितियों में जूझने वाले अनेकों मरीजों को मैंने स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीते हुए देखा है। हां आपको अपना आत्मविश्वास बनाए रखने के साथ अपनी जीवनशैली एवं चिंतनशैली में बदलाव लाकर अनुशासित तरीके से औषधियों का सेवन करने के साथ उपचारक और काउंसलर की सलाह का अनुसरण करने की आवश्यकता होगी।

Adiwasi Tau 29.01.2026 गुरुवार
Online Herbalist, Homeopath and Counselor
WhatsApp No.: 85 619 55 619
Note: उक्त जानकारी या सलाह उपयोगी लगी हो तो जनहित में इस जानकारी को अधिकतम लोगों के साथ साझा किया जावे।

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नींद में तेज खर्राटों की समस्या और देसी समाधान (Snoring and Indigenous Herbal Management):

स्वास्थ्य जागरूकता हेतु मैं स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जनजागरूकता हेतु लेखन के माध्यम सार्वजनिक रूप से जानकारी प्रदान करता रहता हूं। इसी क्रम में मुझे एक मरीज ने निम्न समस्या लिखकर भेजी है।

मेरी उम्र करीब पैंसठ वर्ष है। मुझे नींद में तेज खर्राटे आते हैं। यह परेशानी काफी समय से बनी हुई है। इसी कारण मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं सोती हैं। मुझे लगता है कि मेरी नींद पूरी नहीं हो पाती और सुबह उठने पर शरीर थका हुआ और भारी रहता है।

मरीज की पहचान गोपनीय रखते हुए उसकी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निम्नानुसार प्रस्तुत है—

परिचय (Introduction):नींद में तेज खर्राटे प्रायः तब होते हैं जब नींद के दौरान गले का मार्ग संकरा हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों में ढीलापन आना, नाक का बंद रहना और पीठ के बल सोने की आदत इस स्थिति को बढ़ा सकती है। मानसिक तनाव बढ़ने पर Cortisol तनाव हार्मोन यानी Stress Hormone का स्तर बढ़ता है जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। नींद बार बार टूटने से Dopamine आनंद और प्रेरणा रसायन यानी Pleasure and Motivation Chemical का संतुलन भी बिगड़ सकता है। करवट लेकर सोना, रात का भोजन हल्का रखना और सोने से पहले नाक साफ रखना प्रारंभिक सुधार के उपाय हैं।

उपचार हेतु जरूरी प्रमुख हर्ब्स की क्रियाविधि एवं औषधीय भूमिका (Mechanism and Medicinal Role of Herb):
(1) वासा (Adhatoda vasica): श्वसन मार्ग की सूजन और जकड़न कम करने में सहायक होता है। इसके Active Constituents vasicine यानी श्वसन नलिकाओं को खोलने वाला घटक और vasicinone यानी बलगम पतला करने में सहायक घटक माने जाते हैं।
(2) यष्टिमधु (Glycyrrhiza glabra): गले की अंदरूनी परत को आराम देता है और खराश व सूखापन घटाने में सहायक होता है। इसके Active Constituents glycyrrhizin यानी सूजन शांत करने वाला घटक और flavonoids यानी प्राकृतिक antioxidant घटक माने जाते हैं।
(3) हरिद्रा (Curcuma longa): नाक और गले की सूजन कम करने में सहायक रहती है। इसके Active Constituents curcumin यानी सूजन नियंत्रित करने वाला प्रमुख घटक माना जाता है।

सेवन एवं उपयोग विधि (Intake and Usage Method): सामान्य जानकारी के अनुसार इन जड़ी बूटियों का काढ़ा रात में सोने से पहले लिया जाता है। लेकिन हर व्यक्ति का शरीर, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए खुराक, शक्ति और सेवन अवधि तय करने के लिए केस हिस्ट्री की जानकारी आवश्यक होती है। अतः आप इसके लिए किसी अनुभवी उपचारक से संपर्क करें।

यदि खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने जैसा अनुभव हो, अचानक घबराकर नींद टूटती हो, सुबह सिर भारी रहता हो या दिन में अत्यधिक नींद आती हो तो कान नाक गला विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।

आपको जो सुझाई गई औषधियों का सेवन करने से पहले बेहतर होगा कि आप व्यक्तिगत रूप से किसी अनुभवी उपचारक या काउंसलर की सलाह अवश्य लें। मैं आपको इतना विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आप जिन हालातों और तकलीफों से परेशान हैं, इन जैसी ही बल्कि इनसे भी गंभीर परिस्थितियों में जूझने वाले अनेकों मरीजों को मैंने स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीते हुए देखा है। हां आपको अपना आत्मविश्वास बनाए रखने के साथ अपनी जीवनशैली एवं चिंतनशैली में बदलाव लाकर अनुशासित तरीके से औषधियों का सेवन करने के साथ उपचारक और काउंसलर की सलाह का अनुसरण करने की आवश्यकता होगी।
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ओमेज कैप्शूल से अल्सर और बवासीर होता है?एक जिज्ञासु ने पूछा है, ''ताऊजी मैं देखता हूं कि ऐसीडिटी के मरीज हर रोज सुबह खाल...
27/01/2026

ओमेज कैप्शूल से अल्सर और बवासीर होता है?

एक जिज्ञासु ने पूछा है, ''ताऊजी मैं देखता हूं कि ऐसीडिटी के मरीज हर रोज सुबह खाली पेट ओमेज कैप्शूल का सेवन करते रहते हैं। महिनों और वर्षों तक यह सिलसिला चलता रहता है। मगर उनमें से किसी को भी स्थायी आराम नहीं मिलता। अनेकों को तो कुछ समय बाद पेट में अल्सर होते देखे जा सकते हैं। कुछ बवासीर होने की शिकायत करते हैं। ऐसा क्यों होता है? कृपया मार्गदर्शन करें और ऐसीडिटी के लिए कोई नुस्खा या किट हो तो बताएं।''

इस विषय में बताना चाहता हूं कि ऐसीडिटी के रोगी अक्सर रोज सुबह खाली पेट ओमेज जैसा कैप्सूल लेते हैं। कुछ समय तक जलन, खट्टी डकार या सीने में जलन कम लगती है, इसलिए उन्हें लगता है कि इलाज सही चल रहा है। पर सच यह है कि यह दवा बीमारी की जड़ नहीं, केवल लक्षणों को दबाती है। पेट में बनने वाला तेजाब भोजन पचाने के लिए जरूरी होता है; समस्या तब बनती है जब भोजन, समय और जीवनशैली बिगड़ने से वही तेजाब जरूरत से ज्यादा या गलत समय पर बनने लगता है।

जब हम महीनों और वर्षों तक तेजाब को दबाने वाली दवा लेते रहते हैं, तो शरीर का पाचन तंत्र धीरे-धीरे सुस्त हो सकता है। पाचन तंत्र यानी वह पूरी व्यवस्था जो भोजन को तोड़कर शरीर के काम का बनाती है। तेजाब कम होने पर कई लोगों में खाना ठीक से नहीं पचता, गैस बनती है, पेट फूलता है और कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है। कब्ज यानी मल का नियमित रूप से ठीक से साफ न होना या देर से होना। इस स्थिति में रोगी बार-बार वही दवा लेता रहता है, मगर कारण दूसरे रहते हैं। जैसे: अनियमित भोजन, देर रात खाना, बहुत तला भुना, चाय कॉफी का अधिक सेवन, धूम्रपान और लगातार तनाव।

ऐसी हालत लंबी चले तो पेट की अंदरूनी परत चिड़चिड़ी और कमजोर हो सकती है। अंदरूनी परत से आशय पेट की वह सतह है जो भोजन और तेजाब के सीधे संपर्क में रहती है। जब यह संतुलन खराब होता है, तो कुछ लोगों में घाव बनने लगते हैं, जिन्हें अल्सर कहा जाता है; अल्सर यानी पेट या आंत की सतह पर घाव। इसका मतलब यह नहीं कि हर अल्सर केवल दवा से होता है, लेकिन केवल दवा पर टिके रहना, कारण न सुधारना और लक्षणों को लगातार दबाते रहना अल्सर का जोखिम बढ़ा सकता है।

अब बात बवासीर की। जब कब्ज लंबे समय तक रहती है, तो शौच के समय जोर लगाना पड़ता है। बार बार जोर लगाने से गुदा क्षेत्र की नसें फूल सकती हैं और दर्द, जलन या खून जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसी को सामान्य भाषा में बवासीर कहा जाता है। यानी समस्या पेट से शुरू होकर नीचे तक जाती है, और रोगी समझता है कि दवा लेने के बाद भी नई परेशानी क्यों बढ़ रही है।

इसलिए स्थायी राहत केवल ओमेज जैसे कैप्सूल नहीं हैं। दवा कभी-कभी जरूरी होती है, उसे स्थायी बैशाखी जैसा सहारा बनाना उचित नहीं। बैशाखी समाधान नहीं है। समाधान तब आता है, जब भोजन का समय तय हो, रात का खाना हल्का और समय पर हो, तला भुना और बहुत मसालेदार कम हो, पानी पर्याप्त पीएं, नींद पूरी हो, और तनाव को कम करने के उपाय जीवनशैली में शामिल हों। जब पाचन सुधरता है, तो तेजाब अपने आप सही दिशा में आने लगता है और दवा पर निर्भरता घटने लगती है।

जहां तक ऐसीडिटी के नुस्खे की बात है तो हम Acidity Care Kit No. 30 उपलब्ध करवाते हैं। जिसमें चयनित देसी बूटियों का संतुलित संयोजन है। इसे निम्न WhatsApp पर सम्पर्क करके घर बैठे मंगवाया जा सकता है।
आदिवासी ताऊ, संचालक: निरोगधाम (India’s First Curative & Organic Herbal Center), मूंडियारामसर, सिरसी-बेगस रोड, जयपुर, राजस्थान। WhatsApp: 85619-55619, 27.01.2026
नोट: इस तरह की सामग्री पढने हेतु निम्न पेज को फोलो करें:
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ओमेज कैप्शूल से अल्सर और बवासीर होता है?

एक जिज्ञासु ने पूछा है, ''ताऊजी मैं देखता हूं कि ऐसीडिटी के मरीज हर रोज सुबह खाली पेट ओमेज कैप्शूल का सेवन करते रहते हैं। महिनों और वर्षों तक यह सिलसिला चलता रहता है। मगर उनमें से किसी को भी स्थायी आराम नहीं मिलता। अनेकों को तो कुछ समय बाद पेट में अल्सर होते देखे जा सकते हैं। कुछ बवासीर होने की शिकायत करते हैं। ऐसा क्यों होता है? कृपया मार्गदर्शन करें और ऐसीडिटी के लिए कोई नुस्खा या किट हो तो बताएं।''

इस विषय में बताना चाहता हूं कि ऐसीडिटी के रोगी अक्सर रोज सुबह खाली पेट ओमेज जैसा कैप्सूल लेते हैं। कुछ समय तक जलन, खट्टी डकार या सीने में जलन कम लगती है, इसलिए उन्हें लगता है कि इलाज सही चल रहा है। पर सच यह है कि यह दवा बीमारी की जड़ नहीं, केवल लक्षणों को दबाती है। पेट में बनने वाला तेजाब भोजन पचाने के लिए जरूरी होता है; समस्या तब बनती है जब भोजन, समय और जीवनशैली बिगड़ने से वही तेजाब जरूरत से ज्यादा या गलत समय पर बनने लगता है।

जब हम महीनों और वर्षों तक तेजाब को दबाने वाली दवा लेते रहते हैं, तो शरीर का पाचन तंत्र धीरे-धीरे सुस्त हो सकता है। पाचन तंत्र यानी वह पूरी व्यवस्था जो भोजन को तोड़कर शरीर के काम का बनाती है। तेजाब कम होने पर कई लोगों में खाना ठीक से नहीं पचता, गैस बनती है, पेट फूलता है और कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है। कब्ज यानी मल का नियमित रूप से ठीक से साफ न होना या देर से होना। इस स्थिति में रोगी बार-बार वही दवा लेता रहता है, मगर कारण दूसरे रहते हैं। जैसे: अनियमित भोजन, देर रात खाना, बहुत तला भुना, चाय कॉफी का अधिक सेवन, धूम्रपान और लगातार तनाव।

ऐसी हालत लंबी चले तो पेट की अंदरूनी परत चिड़चिड़ी और कमजोर हो सकती है। अंदरूनी परत से आशय पेट की वह सतह है जो भोजन और तेजाब के सीधे संपर्क में रहती है। जब यह संतुलन खराब होता है, तो कुछ लोगों में घाव बनने लगते हैं, जिन्हें अल्सर कहा जाता है; अल्सर यानी पेट या आंत की सतह पर घाव। इसका मतलब यह नहीं कि हर अल्सर केवल दवा से होता है, लेकिन केवल दवा पर टिके रहना, कारण न सुधारना और लक्षणों को लगातार दबाते रहना अल्सर का जोखिम बढ़ा सकता है।

अब बात बवासीर की। जब कब्ज लंबे समय तक रहती है, तो शौच के समय जोर लगाना पड़ता है। बार बार जोर लगाने से गुदा क्षेत्र की नसें फूल सकती हैं और दर्द, जलन या खून जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसी को सामान्य भाषा में बवासीर कहा जाता है। यानी समस्या पेट से शुरू होकर नीचे तक जाती है, और रोगी समझता है कि दवा लेने के बाद भी नई परेशानी क्यों बढ़ रही है।

इसलिए स्थायी राहत केवल ओमेज जैसे कैप्सूल नहीं हैं। दवा कभी-कभी जरूरी होती है, उसे स्थायी बैशाखी जैसा सहारा बनाना उचित नहीं। बैशाखी समाधान नहीं है। समाधान तब आता है, जब भोजन का समय तय हो, रात का खाना हल्का और समय पर हो, तला भुना और बहुत मसालेदार कम हो, पानी पर्याप्त पीएं, नींद पूरी हो, और तनाव को कम करने के उपाय जीवनशैली में शामिल हों। जब पाचन सुधरता है, तो तेजाब अपने आप सही दिशा में आने लगता है और दवा पर निर्भरता घटने लगती है।

जहां तक ऐसीडिटी के नुस्खे की बात है तो हम Acidity Care Kit No. 30 उपलब्ध करवाते हैं। जिसमें चयनित देसी बूटियों का संतुलित संयोजन है। इसे निम्न WhatsApp पर सम्पर्क करके घर बैठे मंगवाया जा सकता है।
आदिवासी ताऊ, संचालक: निरोगधाम (India’s First Curative & Organic Herbal Center), मूंडियारामसर, सिरसी-बेगस रोड, जयपुर, राजस्थान। WhatsApp: 85619-55619, 27.01.2026
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विश्वासघात का सदमा और असमय टूटता जीवन–Broken Trust और Sudden Death | Adiwasi Tau | Nirogdham Jaipurक्या आप जानते हैं कि ...
25/01/2026

विश्वासघात का सदमा और असमय टूटता जीवन–Broken Trust और Sudden Death | Adiwasi Tau | Nirogdham Jaipur

क्या आप जानते हैं कि एक विश्वासघात कैसे हँसते खेलते जीवन को भीतर से तोड़ देता है। दिमाग दिल और शरीर को एक साथ बीमार बना देता है और इंसान को ऐसे अंधेरे में धकेल देता है। जहाँ से लौटना आसान नहीं होता। किसी अपने का एक धोखा सिर्फ दिल नहीं तोड़ता, बल्कि दिमाग के रसायन बिगाड़ देता है। शरीर के तनाव हार्मोन बढ़ा देता है और कभी कभी एक बिल्कुल स्वस्थ इंसान को अचानक अवसाद हृदयाघात या आत्मघात तक पहुँचा देता है। आज हम उसी छिपे हुए सच की बात करेंगे, जिसे लोग कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं।
विज्ञान सम्मत और अनुभवसिद्ध जानकारी हेतु पूरा वीडियो देखें और जानें।
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क्या आप जानते हैं कि एक विश्वासघात कैसे हँसते खेलते जीवन को भीतर से तोड़ देता है। दिमाग दिल और शरीर को एक साथ बीमार .....

*सर्दी के मौसम में छोटे बच्चों की सही देखभाल और ठंड से बचाव कैसे करें? Adiwasi Tau | Nirogdham Jaipur*सर्दियों में बच्चो...
24/01/2026

*सर्दी के मौसम में छोटे बच्चों की सही देखभाल और ठंड से बचाव कैसे करें? Adiwasi Tau | Nirogdham Jaipur*

सर्दियों में बच्चों की मासूम सी लापरवाही भी उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि उनका शरीर अभी संक्रमण से लड़ना सीख रहा होता है। सर्दी का मौसम आते ही छोटे बच्चों की हल्की सी नाक बहना, खांसी या सुस्ती कई बार बड़ी परेशानी की शुरुआत बन जाती है, क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा पूरी तरह मजबूत नहीं होती। सही देखभाल, समय पर समझ और वैज्ञानिक जानकारी ही वह कुंजी है, जो बच्चों को ठंड के असर से सुरक्षित रखती है।
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सर्दियों में बच्चों की मासूम सी लापरवाही भी उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि उनका शरीर अभी संक्रमण से लड़ना स....

*जंगली गोभी | Powerful Herb for Liver Protection | Adiwasi Tau-Nirogdham | Jaipur-WA-8561955619*शरीर का सबसे व्यस्त अंग ...
24/01/2026

*जंगली गोभी | Powerful Herb for Liver Protection | Adiwasi Tau-Nirogdham | Jaipur-WA-8561955619*

शरीर का सबसे व्यस्त अंग लीवर जब चुपचाप कमजोर होने लगे, थकान, भारीपन और अंदरूनी विषाक्तता बढ़ने लगे, तब प्रकृति की एक साधारण दिखने वाली जंगली बूटी गहराई से काम करती है। जंगली गोभी अपने वैज्ञानिक रूप से पहचाने गए गुणों के कारण लीवर की सुरक्षा, कोशिकीय संतुलन और प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया में एक मजबूत बूटी है।
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शरीर का सबसे व्यस्त अंग लीवर जब चुपचाप कमजोर होने लगे, थकान, भारीपन और अंदरूनी विषाक्तता बढ़ने लगे, तब प्रकृति की एक...

Acidum Aceticum: लंबे रोग के बाद आई गहरी कमजोरी में उपयोगी होम्योपैथिक दवालेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणायह दवा तब याद आती...
23/01/2026

Acidum Aceticum: लंबे रोग के बाद आई गहरी कमजोरी में उपयोगी होम्योपैथिक दवा
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा
यह दवा तब याद आती है, जब रोगी अत्यधिक दुर्बल हो, शरीर की शक्ति तेजी से घट रही हो और तरल पदार्थों की हानि से जीवन-ऊर्जा क्षीण दिखाई दे, यह भीतर से सहारा देकर शरीर को टूटने से बचाती है और धीरे-धीरे संतुलन की ओर ले जाती है। यह दवा लंबे रोगों में सहनशक्ति बनाए रखने में सहायक होती है। यह गहरी थकावट और जलनयुक्त अवस्थाओं में संतुलन लाती है।

परिचय (Introduction): यह दवा Acetic Acid से होम्योपैथिक पद्धति द्वारा तैयार की जाती है। इसकी शक्तिकृत क्रिया मुख्यतः शरीर पर गहराई से प्रभाव डालती है और दीर्घकालिक रोग अवस्थाओं में मन पर अप्रत्यक्ष रूप से सहायक होती है। यह दवा Acidum Aceticum के नाम से भी जानी जाती है और अत्यधिक दुर्बलता तथा तरल-क्षरण की अवस्थाओं में उपयोगी मानी जाती है।

अति-विशिष्ट/अदभुत लक्षण (Unique Symptoms): अत्यधिक कमजोरी के साथ तीव्र प्यास, ठंडे पेय की प्रबल इच्छा और पीने से अस्थायी राहत, पानी जैसे दस्त के बाद गहरी थकावट।

विशेष रूप से किन वर्गों में उपयोगी: यह दवा वृद्धों, लंबे समय से बीमार, अत्यधिक क्षीण तथा रिकवरी अवस्था में चल रहे रोगियों में विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।

मुख्य लाभ एवं उपयोग: यह दवा जीवनशक्ति के क्षरण और जलनयुक्त शारीरिक अवस्थाओं में सहायक होती है।

मानसिक लक्षणानुसार (Mind Symptoms): लंबे रोग से उत्पन्न मानसिक थकान, उदासी और निराशा, कमजोरी के कारण चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, शांत रहना पसंद करना।

शारीरिक लक्षणानुसार प्रभाव (Physical Symptoms): अत्यधिक दुर्बलता, पानी जैसे दस्त, तीव्र प्यास, ठंडे पेय की इच्छा, जलनयुक्त दर्द, रात में पसीना, वजन का गिरना।

आंतरिक सेवन एवं उपयोग विधि (Dosage & Usage): आमतौर पर यह दवाई Q, 3x, 6x, 30 या 200 पोटेंसी में प्रयोग की जाती है, लेकिन इसके सेवन का अंतिम निर्णय किसी अनुभवी होम्योपैथ की सलाह से ही करें, क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर, लक्षण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए सही खुराक, पोटेंसी और सेवन अवधि तय करने से पहले मरीज की केस हिस्ट्री (Case History) की जानकारी जरूरी होती है।
सावधानियाँ (Precautions): अत्यधिक दुर्बल रोगी स्वयं औषधि सेवन न करें और लंबे समय तक बिना परामर्श सेवन से बचें।
सारांश (Summary): Acidum Aceticum एक महत्वपूर्ण होम्योपैथिक दवा है जो अत्यधिक कमजोरी, तरल-क्षरण और जलनयुक्त अवस्थाओं में जीवनशक्ति को संभालने में सहायक मानी जाती है।
Adiwasi Tau:
Online-Harbalist, Homeopath, Counselor & Writer
Contact: WhatsApp No: 85-619-55-619 (23.10.25)
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Acidum Aceticum: लंबे रोग के बाद आई गहरी कमजोरी में उपयोगी दवा

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा
यह दवा तब याद आती है, जब रोगी अत्यधिक दुर्बल हो, शरीर की शक्ति तेजी से घट रही हो और तरल पदार्थों की हानि से जीवन-ऊर्जा क्षीण दिखाई दे, यह भीतर से सहारा देकर शरीर को टूटने से बचाती है और धीरे-धीरे संतुलन की ओर ले जाती है। यह दवा लंबे रोगों में सहनशक्ति बनाए रखने में सहायक होती है। यह गहरी थकावट और जलनयुक्त अवस्थाओं में संतुलन लाती है।

परिचय (Introduction): यह दवा Acetic Acid से होम्योपैथिक पद्धति द्वारा तैयार की जाती है। इसकी शक्तिकृत क्रिया मुख्यतः शरीर पर गहराई से प्रभाव डालती है और दीर्घकालिक रोग अवस्थाओं में मन पर अप्रत्यक्ष रूप से सहायक होती है। यह दवा Acidum Aceticum के नाम से भी जानी जाती है और अत्यधिक दुर्बलता तथा तरल-क्षरण की अवस्थाओं में उपयोगी मानी जाती है।

अति-विशिष्ट/अदभुत लक्षण (Unique Symptoms): अत्यधिक कमजोरी के साथ तीव्र प्यास, ठंडे पेय की प्रबल इच्छा और पीने से अस्थायी राहत, पानी जैसे दस्त के बाद गहरी थकावट।

विशेष रूप से किन वर्गों में उपयोगी: यह दवा वृद्धों, लंबे समय से बीमार, अत्यधिक क्षीण तथा रिकवरी अवस्था में चल रहे रोगियों में विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।

मुख्य लाभ एवं उपयोग: यह दवा जीवनशक्ति के क्षरण और जलनयुक्त शारीरिक अवस्थाओं में सहायक होती है।

मानसिक लक्षणानुसार (Mind Symptoms): लंबे रोग से उत्पन्न मानसिक थकान, उदासी और निराशा, कमजोरी के कारण चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, शांत रहना पसंद करना।

शारीरिक लक्षणानुसार प्रभाव (Physical Symptoms): अत्यधिक दुर्बलता, पानी जैसे दस्त, तीव्र प्यास, ठंडे पेय की इच्छा, जलनयुक्त दर्द, रात में पसीना, वजन का गिरना।

आंतरिक सेवन एवं उपयोग विधि (Dosage & Usage): आमतौर पर यह दवाई Q, 3x, 6x, 30 या 200 पोटेंसी में प्रयोग की जाती है, लेकिन इसके सेवन का अंतिम निर्णय किसी अनुभवी होम्योपैथ की सलाह से ही करें, क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर, लक्षण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए सही खुराक, पोटेंसी और सेवन अवधि तय करने से पहले मरीज की केस हिस्ट्री (Case History) की जानकारी जरूरी होती है।

सावधानियाँ (Precautions): अत्यधिक दुर्बल रोगी स्वयं औषधि सेवन न करें और लंबे समय तक बिना परामर्श सेवन से बचें।
सारांश (Summary): Acidum Aceticum एक महत्वपूर्ण होम्योपैथिक दवा है जो अत्यधिक कमजोरी, तरल-क्षरण और जलनयुक्त अवस्थाओं में जीवनशक्ति को संभालने में सहायक मानी जाती है।

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Allergy Care Comboपुरानी जुकाम की एलर्जी-लगातार छींकें और नाक से लगातार पानी आने की तकलीफ का यह कॉम्बो प्रभावी उपाय है, ...
23/01/2026

Allergy Care Combo

पुरानी जुकाम की एलर्जी-लगातार छींकें और नाक से लगातार पानी आने की तकलीफ का यह कॉम्बो प्रभावी उपाय है, लेकिन पूर्ण स्वस्थ होने तक नियमित सेवन करना जरूरी होता है, क्योंकि तन एवं मन की लगातार-लंबे समय तक अनदेखी और लापरवाही के कारण ही इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिसे फिर से मजबूत करने में भी समय लगता है। इसके आलावा हर व्यक्ति का शरीर, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए इम्यूनिटी रिकवरी का कोई फिक्स Time Bound सिद्धांत नहीं है। इस सबके बावजूद यह कॉम्बो बहुत प्रभावी और दूरगामी असरकारी है।-Adiwasi Tau, WA No.: 85-619-55-619
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पुरानी जुकाम की एलर्जी-लगातार छींकें और नाक से लगातार पानी आने की तकलीफ का यह कॉम्बो प्रभावी उपाय है, लेकिन पूर्ण स्वस्थ होने तक नियमित सेवन करना जरूरी होता है, क्योंकि तन एवं मन की लगातार-लंबे समय तक अनदेखी और लापरवाही के कारण ही इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिसे फिर से मजबूत करने में भी समय लगता है। इसके आलावा हर व्यक्ति का शरीर, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए इम्यूनिटी रिकवरी का कोई फिक्स Time Bound सिद्धांत नहीं है। इस सबके बावजूद यह कॉम्बो बहुत प्रभावी और दूरगामी असरकारी है।-Adiwasi Tau, WA No.: 085619 55619
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13 वर्ष पुरानी सफेद पानी की बीमारी में आराम-खुद मरीज के शब्दों में हेल्थ प्रोग्रेस रिपोर्ट    fans
22/01/2026

13 वर्ष पुरानी सफेद पानी की बीमारी में आराम-खुद मरीज के शब्दों में हेल्थ प्रोग्रेस रिपोर्ट fans

जिंदगी पूछती है-“क्या सीख लिया?”   fans
15/01/2026

जिंदगी पूछती है-“क्या सीख लिया?” fans

मकोय Makoy | Herb for Liver Protection लीवर रक्षक   fansआज का खानपान, दवाइयों का दबाव और जीवनशैली सबसे पहले असर डालती है...
12/01/2026

मकोय Makoy | Herb for Liver Protection लीवर रक्षक
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आज का खानपान, दवाइयों का दबाव और जीवनशैली सबसे पहले असर डालती है हमारे लीवर पर, जो चुपचाप शरीर की सफाई करता रहता है। मकोय एक ऐसी प्राकृतिक जड़ी-बूटी है, जो लीवर की कोशिकाओं की रक्षा, सूजन के संतुलन और उसकी कार्यक्षमता को सहारा देने के लिए जानी जाती है, यही वजह है कि इसे लीवर रक्षक कहा जाता है।
विज्ञान सम्मत और अनुभवसिद्ध जानकारी हेतु पूरा वीडियो देखें और जानें।
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आज का खानपान, दवाइयों का दबाव और जीवनशैली सबसे पहले असर डालती है हमारे लीवर पर, जो चुपचाप शरीर की सफाई करता रहता है। ....

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