31/01/2026
किडनी की सेहत समझने के लिए आज सबसे भरोसेमंद पैरामीटर माना जाता है eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate)।
आसान शब्दों में कहें तो eGFR यह बताता है कि आपकी किडनी एक मिनट में खून को कितनी अच्छी तरह साफ कर पा रही है। यह रिपोर्ट सीधे-सीधे नहीं मापा जाता, बल्कि सीरम क्रिएटिनिन, उम्र, लिंग और कभी-कभी शरीर की बनावट को ध्यान में रखकर गणना की जाती है।
जितना ज्यादा eGFR, उतनी बेहतर किडनी की कार्यक्षमता।
👉 सामान्यतः 90 या उससे ऊपर eGFR को लगभग सामान्य माना जाता है, जबकि इसका लगातार कम होना किडनी की कमजोरी की ओर इशारा करता है।
👉 आज का पोस्ट उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसे रोगों से परेशान है। यदि आपको या किसी परिचित को ऐसी समस्या है तो नजदीकी वैद्य से मिलकर परामर्श जरूर ले। मुझसे परामर्श लेना हो तो व्हाट्सएप करे।
इस पोस्ट को बढिया लगे तो लाइक करे और शेयर करे जिससे औरों तक यह जानकारी पहुंच सके। तो चलिए वापस आते है टॉपिक पर ...
45 साल के एक मरीज रिपोर्ट लेकर आए और बोले – “डॉक्टर साहब, क्रिएटिनिन तो 1.6 है, ज्यादा नहीं लगता, फिर सब लोग इतना क्यों डरा रहे हैं?”
जब उनकी रिपोर्ट ध्यान से देखी गई, तो eGFR सिर्फ 42 था। मरीज को सूजन नहीं थी, पेशाब भी ठीक लग रहा था, इसलिए उन्हें लगता था कि सब नॉर्मल है।
यही सबसे बड़ी दुविधा होती है – किडनी की बीमारी अक्सर बिना लक्षण के चुपचाप बढ़ती है।
जब समझ आता है, तब काफी नुकसान हो चुका होता है।
जब मरीज पूछता है – “डॉक्टर साहब, मेरी किडनी कितनी खराब है?” तो असली जवाब सिर्फ क्रिएटिनिन से नहीं, बल्कि eGFR के स्टेज देखकर मिलता है।
🔥 किडनी की बीमारी की Grading :-
किडनी की कार्यक्षमता को समझने के लिए eGFR के आधार पर उसे अलग-अलग स्टेज / ग्रेड में बांटा गया है। इसी grading से यह पता चलता है कि किडनी कितनी सुरक्षित है, कितनी कमजोर हो चुकी है और आगे कितना खतरा है।
1️⃣ Stage 1 – Normal या Almost Normal Kidney Function
👉 इस स्टेज में eGFR 90 या उससे अधिक रहता है। किडनी की सफाई क्षमता लगभग सामान्य होती है, लेकिन कई बार पेशाब में प्रोटीन, शुगर या BP की समस्या मौजूद हो सकती है। मरीज को आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए बीमारी अक्सर पकड़ में नहीं आती। यही वह स्टेज है जहाँ सावधानी से आगे की खराबी को रोका जा सकता है।
2️⃣ Stage 2 – Mild Kidney Damage
👉 जब eGFR 60–89 के बीच होता है, तब किडनी की क्षमता हल्की कम मानी जाती है। लेकिन यही वह समय होता है जब डायबिटीज, हाई BP, दर्द की दवाइयाँ या गलत खान-पान किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा रहे होते हैं।
3️⃣ Stage 3 – Moderate Kidney Damage
👉 इस ग्रेड को दो भागों में समझा जाता है।
3A: eGFR 45–59 – शुरुआती मध्यम कमजोरी
3B: eGFR 30–44 – स्पष्ट मध्यम कमजोरी
इस स्टेज में थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण शुरू हो सकते हैं।
4️⃣ Stage 4 – Severe Kidney Damage
👉 जब eGFR 15–29 तक गिर जाता है, तब किडनी काफी हद तक खराब हो चुकी होती है। इस स्टेज में एनीमिया, सूजन, भूख न लगना, कमजोरी, BP कंट्रोल न होना जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। यहाँ से आगे बढ़ने पर डायलिसिस की तैयारी पर चर्चा शुरू होती है।
5️⃣ Stage 5 – Kidney Failure / ESRD
👉 इस अंतिम ग्रेड में eGFR 15 से कम हो जाता है। किडनी शरीर का कचरा साफ नहीं कर पाती। मरीज को उल्टी, सांस फूलना, ज्यादा सूजन, पेशाब बहुत कम या बंद होने जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। इस स्टेज में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जीवन रक्षक विकल्प बन जाते हैं।
👉 किडनी की grading सिर्फ डराने के लिए नहीं होती, बल्कि सही समय पर इलाज और जीवनशैली बदलकर किडनी को फेल होने से बचाने का मौका देती है। जितनी जल्दी eGFR की गिरावट पकड़ी जाए, उतना ही बेहतर भविष्य संभव है।
👉 इसलिए किडनी की सही स्थिति जानने के लिए सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि eGFR, यूरिन टेस्ट (प्रोटीन/एल्ब्यूमिन), BP, शुगर और समय-समय पर फॉलो-अप जरूरी है।
सही समय पर डाइट, दवा और जीवनशैली सुधार से किडनी को और बिगड़ने से रोका जा सकता है। याद रखिए – eGFR डराने के लिए नहीं, बचाने के लिए होता है।
Dr Ajay Gupta
BAMS, MD(Kayachikitsa),
Ph.D. (IMS-BHU, Varanasi)
Assistant Professor
Government Ayurveda Medical College
Former Assistant Professor, IMS, BHU
Senior Ayurveda Consultant
More than 20+ Years of Experience
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