03/03/2026
किडनी (गुर्दे) हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टर हैं। जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है — जिसे मेडिकल भाषा में Chronic Kidney Disease या एंड स्टेज में Kidney Failure कहा जाता है — तब शरीर में यूरिया, क्रिएटिनिन, पोटैशियम और अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है।
ऐसे में सही आहार (Renal Diet) दवा जितना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
किडनी फेलियर यानी गुर्दों की कमजोरी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारे शरीर का प्राकृतिक “फिल्टर सिस्टम” ठीक से काम नहीं कर पाता।
सामान्य व्यक्ति की किडनी रोज़ खून को साफ करके यूरिया, क्रिएटिनिन, अतिरिक्त नमक और पानी को पेशाब के माध्यम से बाहर निकाल देती है।
लेकिन जब यह क्षमता कम हो जाती है - तब शरीर में गंदे पदार्थ जमा होने लगते हैं। यही कारण है कि ऐसे मरीजों के लिए दवा जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी सही भोजन भी है।
1️⃣ नमक:-
सबसे पहले समझिए कि किडनी के मरीजों को नमक क्यों कम करना चाहिए। जब किडनी कमजोर होती है, तो वह अतिरिक्त नमक और पानी को बाहर नहीं निकाल पाती।
परिणामस्वरूप शरीर में सूजन आ जाती है, पैरों में पानी भर जाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और सांस फूलने लगती है। यदि मरीज नमकीन, अचार, पापड़, चिप्स और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खाते रहते हैं, तो शरीर में पानी और नमक जमा होता रहेगा और किडनी पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा। इसलिए नमक कम खाना किडनी को “आराम” देने जैसा है।
2️⃣ प्रोटीन:-
अब बात करते हैं प्रोटीन की। सामान्य व्यक्ति को प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है क्योंकि शरीर की मरम्मत और मांसपेशियों के लिए यह आवश्यक है। लेकिन जब हम दाल, राजमा, छोले, पनीर या मांस खाते हैं तो उनके पाचन के बाद जो अपशिष्ट बनता है (यूरिया), उसे बाहर निकालने का काम किडनी करती है।
यदि किडनी पहले से कमजोर है और हम बहुत अधिक प्रोटीन खा लेते हैं, तो यूरिया तेजी से बढ़ने लगता है और मरीज को उल्टी, कमजोरी, भूख न लगना जैसी समस्याएँ होने लगती हैं।
इसलिए सीमित मात्रा में प्रोटीन देना जरूरी होता है ताकि शरीर को जरूरत भी मिले और किडनी पर बोझ भी न पड़े। हालांकि जो मरीज Hemodialysis या Peritoneal Dialysis पर होते हैं, उनकी जरूरत अलग हो सकती है।
3️⃣ पोटैशियम:-
किडनी के मरीजो के लिए पोटैशियम भी एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करता है, लेकिन जब इसका स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो यह खतरनाक हो सकता है। सामान्यतः किडनी अतिरिक्त पोटैशियम को बाहर निकाल देती है, पर किडनी फेलियर में यह जमा हो जाता है।
केला, संतरा, नारियल पानी, आलू और टमाटर जैसे खाद्य पदार्थों में पोटैशियम अधिक होता है।
यदि मरीज इन्हें अधिक मात्रा में खाता है, तो खून में पोटैशियम अचानक बढ़ सकता है और हृदय गति अनियमित हो सकती है।
यही कारण है कि सब्जियों को काटकर पानी में भिगोकर उबालने और उसका पानी फेंकने की सलाह दी जाती है — इससे पोटैशियम कुछ हद तक कम हो जाता है।
4️⃣ लिक्विड डाइट :-
किडनी के मरीजों में तरल पदार्थ (पानी, दूध, छाछ, सूप) भी सोच-समझकर लेने चाहिए। जब पेशाब कम बनता है तो शरीर में अतिरिक्त पानी जमा हो जाता है। इससे सूजन और फेफड़ों में पानी भरने का खतरा होता है।
इसलिए डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर तय करते हैं कि दिनभर में कितना पानी लेना सुरक्षित है। यहाँ “ज्यादा पानी पीना हमेशा अच्छा है” वाला नियम लागू नहीं होता।
5️⃣ भोजन:-
अब प्रश्न आता है कि किडनी के मरीजो को क्या खाना चाहिए?
किडनी के मरीजों को ऐसा भोजन देना चाहिए जिससे शरीर को ऊर्जा मिले लेकिन किडनी पर अधिक बोझ न पड़े।
सफेद चावल, गेहूं की रोटी, सूजी, पोहा जैसे अनाज ऊर्जा देते हैं और अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं।
लौकी, तोरी, परवल जैसी हल्की सब्जियाँ कम पोटैशियम वाली होती हैं, इसलिए नियंत्रित मात्रा में दी जा सकती हैं। सेब, नाशपाती और पपीता जैसे फल सीमित मात्रा में सुरक्षित माने जाते हैं।
भोजन हल्का, कम नमक वाला और ताज़ा बना हुआ होना चाहिए।
सरल शब्दों में समझें तो किडनी फेलियर में आहार का सिद्धांत यह है — “जो चीज शरीर में जमा होकर किडनी को निकालनी पड़ती है, उसे कम करें; और जो चीज शरीर को ऊर्जा दे लेकिन किडनी पर कम बोझ डाले, उसे अपनाएँ।”
सही आहार से सूजन कम होती है, यूरिया नियंत्रित रहता है, हार्ट की जटिलताएँ घटती हैं और मरीज का जीवन अपेक्षाकृत बेहतर रहता है।
किडनी के मरीज के लिए भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Dr Ajay Gupta
BAMS, MD(Kayachikitsa),
Ph.D. (IMS-BHU, Varanasi)
Assistant Professor
Government Ayurveda Medical College
Former Assistant Professor, IMS, BHU
Senior Ayurveda Consultant
More than 20+ Years of Experience
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