Asparsha Yoga

Asparsha Yoga अस्पर्श-योग, ध्यान और योग कि प्राचीन प?

अस्पर्श-योग, योग और ध्यान कि प्राचीन पद्धति है। ध्यान कि विधि होने के साथ-साथ यह उस परम-तत्व का भी नाम है जिसकी असीम शांति और प्रकाश को मन का हलचल और बाहरी परिस्थिति स्पर्श-करके, छु-करके प्रभावित नहीं कर सकती| इस अस्पर्श-योग का उपदेश श्री शंकराचार्य भगवान् के परमगुरु (गुरु के गुरु) श्रीमद् गौड़पादाचार्य भगवान् ने भी किया है|अस्पर्श योग का अत्यंत लाभ होते हुए भी इसको सीखना और करना आसान और सुखद है| इसमे योग और ध्यान कि कई प्राचीन पद्धतियों को बताया जाता है। इन पद्धतियों का उपयोग करके वास्तविक अस्पर्श कि स्थिति प्राप्त कि जा सकती है जहाँ पर कुछ भी करने या होने कि ज़रुरत नहीं है| वर्तमान में अस्पर्श योग करने कि विधि को और भी सरल तरीके से बताया जाता है । इसको कोई भी व्यक्ति सिख सकता है और कर भी सकता है| इसको सिखने के लिए चार दिनों तक प्रतिदिन दो घंटे का समय हीं देना पड़ता है| यह कोर्स ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीको से सिखाया जाता है| समय समय पर इस कोर्स से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस पेज से जुड़े |

परमार्थ सत्य में दिशा नहीं, देश नहीं, गुण नहीं, गति नहीं और परमार्थ सत्य का कोई फल भी नहीं। (दिग्देशगुणगतिफलभेदशून्यं हि...
08/07/2024

परमार्थ सत्य में दिशा नहीं, देश नहीं, गुण नहीं, गति नहीं और परमार्थ सत्य का कोई फल भी नहीं। (दिग्देशगुणगतिफलभेदशून्यं हि परमार्थसत्.. छन्दोग्य-भाष्य)
मतलब परमार्थ सत्य को जानने से कोई फल-विशेष की प्राप्ति हो जाए, ऐसा नहीं।

परंतु, परमार्थ में यह नहीं यह नहीं, यह भी नहीं, वह हमारे जैसे मंदबुद्धि पुरुषों को असत् जैसा प्रतीत होता । लगता है की परमार्थ सत् मतलब कुछ नहीं ।

श्रुति भगवती को हमारी यह मानसिक विकलांगता मालूम है । श्रुति का मत यह है की पहले यह सन्मार्ग पर स्थित हो जाएँ तब धीरे-धीरे परमार्थ सत् भी ग्रहण करवा दूँगी । (......शनैः परमार्थ-सत्-अपि ग्राहयिष्यामि....छन्दोग्य भाष्य..)
एक आख्यायिका है।
पूर्व में देवता और असुर, ने कहीं से सुन और समझ रखा था की आत्मा को जान लेने के बाद जीव 1. सम्पूर्ण लोकों और 2. सम्पूर्ण भोगों को प्राप्त कर लेता है । ये बड़े प्रतापी जीव थे । ये ऊंचे जीव थे ।
हमारे लिए अच्छे से अच्छे फ्लैट, बंगला और फार्महाउस का , अथवा अमरीका का ग्रीन कार्ड का जो महत्व है इनके लिए वही महत्व लोकों का है। लोक मतलब अलग अलग आयाम (dimension) मे विद्यमान जगह ।
उसी तरह जो महत्व हमारे लिए तरह तरह के खान-पान-संगीत-इत्र और उससे उत्पन्न सुख का है, उससे कहीं ज्यादा उत्तम सुख , जो इन पदार्थों के साथ या इनके बिना, ऊर्जा तरंग आदि के रूप में भोग्य हैं, उसको प्राप्त करना चाहते थे।
एक तरह से देखा जाए तो ये देवता और दानव , दोनों हीं आजकल की भाषा में, लोक और सुख के लिए हीं आत्मा को जानना चाहते थे। सामान्य रूप से देखा जाए तो लगेगा, ये कैसी बात है? भला लोक और भोग के लिए आत्मा को जानने की इच्छा करना ?
हरिशंकर परसाई तो ऐसे आत्मा को जिज्ञासुओं पर व्यंग्य लिखे हैं, पर वे व्यंग्यकार अच्छे थे, औपनिषदिक सिद्धांत और जीव के मनोविज्ञान का क्या सम्बद्ध है यह उन्हे थोड़े मालूम था ।
कोई दूसरा होता तो भगा देता- चाहते तो हो “लोक और भोग”- अरे उसका उपाय आत्मा को जानना थोड़े हीं है।
पर श्रुति-भगवती दयालु हैं। वेद -सिद्धांत जीव के मन को समझतें है। वेद-भगवान जो हैं – जीव के कल्याण करने वाला साक्षात ज्ञान राशि ।

वेद भगवान ने कहा- आप ठीक हो । देवता और दानव अपने जगह पर सही भी थे । भले हीं वे “लोक और भोग” को चाहते थे , पर चरम लोक और चरम सुख को- नौकरी से, नेतागिरी से , धन से, कुछ लिख-पढ़ कर, आदि आदि से प्राप्त करने की न सोचा । सीधे सीधे “आत्मा के ज्ञान ” के द्वारा हीं “लोक और भोग” को प्राप्त करने की सोचा। यह बड़ी बात है ।

यह जो आत्मा है, यह जो चैतन्य है, उसमें अनंत शक्ति है। यद्यपि परमार्थ रूप से वह शांत और निरीह है, पर सभी ज्ञान, शक्ति, सौन्दर्य, का अधिष्ठान भी वही है। जो इसको जानने की इच्छा को लेकर सभी “लोक और भोग की कामना” छोड़ देता है वह तो उच्च है । परंतु जो “लोक और भोग की प्राप्ति के लोभ से” भी, आत्मा को हीं जानना चाहता है, वह भी उच्च हीं है, क्योंकि भोग की प्राप्ति के लिए भी वह किसी अन्य उपाय की शरण में नहीं गया। आत्मा की हीं शरण में गया। धीरे धीरे उसको भी लोकों और भोगों को प्राप्त होते हुए परमार्थ सत् का ज्ञान हो हीं जाएगा । (......शनैः परमार्थ-सत्-अपि ग्राहयिष्यामि....छन्दोग्य भाष्य..)

हम इस चैतन्य की शक्ति की, Power Of Consciousness की चर्चा करना चाहते हैं। Power of Consciousness के सामने , Power of Unconscious या Power Of Now आदि सभी बौने हैं । उस आत्मा की, चैतन्य की शक्ति और सामर्थ्य अप्रतिहत है। उसको प्रणाम है ।

ध्यान (Meditation) करने से आपकी कार्य क्षमता, एकाग्रता, क्रिएटिविटी और फोकस भी बढता  है|स्वस्थ,तनाव-मुक्त,शांत,सुखी और प...
28/01/2021

ध्यान (Meditation) करने से आपकी कार्य क्षमता, एकाग्रता, क्रिएटिविटी और फोकस भी बढता है|
स्वस्थ,तनाव-मुक्त,शांत,सुखी और प्रेमपूर्ण जीवन जीने के लिए सीखें- ध्यान।

क्या आप ध्यान करना चाहते हैं ? https://www.pragyatrust.com/one-day-course-hindi/

क्या आप ध्यान करना चाहते है परन्तु ध्यान कर नहीं पाते?
क्या कई बार प्रयास के बाद भी बैचनी या ऊब के कारण ध्यान नहीं कर पाते?
ध्यान तो करते हैं पर उसमें और गहरे जाना चाहते हैं?
ध्यान में आने वाले बाधाओं को हटाना चाहते हैं?


उपरोक्त सभी लाभ लेने के लिए प्रज्ञा ट्रस्ट द्वारा आयोजित “एक दिवसीय ध्यान सत्र” में भाग लें| भाग लेने के लिए दिए गए लिंक को क्लिक करें| https://www.pragyatrust.com/one-day-course-hindi/

इसमें सरल तरीके से प्रारंभिक ध्यान की विधि बताई जाती है. श्वास नाद और मन का सम्बन्ध सिखाया जाता है जिससे इससे ध्यान करना आसान हो जाता है. साथ हीं ध्यान के बाधा और उनको हटाने के उपाय भी बताये जाते हैं.

भाग लेने के लिए क्लिक करें - https://www.pragyatrust.com/one-day-course-hindi/

क्या आप तनाव ग्रस्त रहते हैं?क्या आपको हमेशा बिना किसी कारण के घबराहट बनी रहती है?क्या आप हमेशा थके से रहते हैं?क्या कार...
27/01/2021

क्या आप तनाव ग्रस्त रहते हैं?
क्या आपको हमेशा बिना किसी कारण के घबराहट बनी रहती है?
क्या आप हमेशा थके से रहते हैं?
क्या कार्य करने में आपको मन नहीं लगता?
क्या आप काम करते करते तुरंत थक जाते हैं?
क्या आप अनावश्यक रूप से इन्टरनेट सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते रहते हैं, और आपको पता भी नहीं चलता?
क्या आप भविष्य कि बात को सोच कर घबरा जाते हैं?
क्या भूतकाल कि कोई घटना या यादें आपको परेशान करती है?
क्या आप किसी चीज़ का पश्चाताप (Guilt) अनुभव करते रहते हैं ?
क्या आप बेवजह लोगो पर चिढ जातें हैं या गुस्सा जातें हैं?
क्या आप को रात में नींद नहीं आती या देर से आती है?
इन चीजों से बचने और स्वस्थ,तनाव-मुक्त,शांत,सुखी और प्रेमपूर्ण जीवन जीने के लिए सीखें–ध्यान- https://www.pragyatrust.com/one-day-course-hindi/
ध्यान करने से आपकी कार्य क्षमता एकाग्रता क्रिएटिविटी और फोकस भी बढती है|
इसके साथ साथ अगर आप ध्यान करना चाहते है परन्तु ध्यान करना नहीं जानते; या ध्यान करना जानते हैं परन्तु कर नहीं पातें; या ध्यान तो करते हैं पर उसमें और गहरे जाना चाहते हैं; या ध्यान में आने वाले बाधाओं को हटाना चाहते हैं?
उपरोक्त सभी लाभ लेने के लिए प्रज्ञा ट्रस्ट द्वारा आयोजित “एक दिवसीय ध्यान सत्र” में भाग लें| भाग लेने के लिए दिए गए लिंक को क्लिक करें| https://www.pragyatrust.com/one-day-course-hindi/

ध्यान और उससे होने वाले फायदे के बारे में सभी लोग जानते हैं| ध्यान से शारीरिक स्वस्थ्य, मानसिक शक्ति और प्रसन्नता तो मिल...
15/01/2021

ध्यान और उससे होने वाले फायदे के बारे में सभी लोग जानते हैं| ध्यान से शारीरिक स्वस्थ्य, मानसिक शक्ति और प्रसन्नता तो मिलती ही है पर उसके साथ-साथ आप जो चाहे वह प्राप्त कर सकते हैं। छान्दोग्य उपनिषद में ध्यान के महत्व को बताया गया है: “... ध्यायतीव पृथिवी ध्यायतीव अन्तरिक्षम्...” पृथिवी मानो ध्यान में है, अंतरिक्ष मानो ध्यान में है|
1. क्या आप ध्यान के फायदे जानते हैं?
2. आप फायदे जानते हैं पर ध्यान कैसे करें यह नहीं जानते?
3. आप ध्यान करना जानते हैं पर ध्यान में मन लग नहीं पाता?
4. कभी ध्यान लग पाता है,कभी नहीं लगता?
5. क्या ध्यान के समय नींद आती है?
6. ध्यान करते समय तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन दैनिक जीवन में उसका असर नहीं दीखता?
7. क्या एक ही विधि का उपयोग करने के चलते मन ऊब जाता है और ध्यान करने के लिए उत्साहित नहीं हो पाता?
8. क्या ध्यान करते-करते आप ध्यान की किसी अवस्था या परिणाम में फंस-से तो नहीं गए है जहां से आगे नहीं बढ़ पा रहे?
9. गलत तरीके से ध्यान करने के कारण आप किसी शारीरिक या मानसिक रोग के शिकार तो नहीं हो गए हैं?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए सीखें अस्पर्श-योग!
अस्पर्श योग में आपको ध्यान करने के सहज और सरल विधियां सिखाई जाती हैं| यह ऐसी प्रक्रिया है जिसे कोई भी कर सकता है। इसमें ध्यान करने के तरीके तो बताएं ही जाते है इसके साथ साथ ध्यान में आने वाली बाधाएं, जैसे ध्यान में मन न लगना, मन का विचारों और कल्पनाओं में भटकना अथवा नींद लग जाना आदि को हटाने का उपाय भी बताया जाता है| अस्पर्श योग के ज्ञान और ध्यान को अपनाने से आपका मन (thought world) ऐसा हो जायेगा कि दैनिक जीवन में भी उसका असर दिखाई देगा| अस्पर्ष योग में ध्यान करने की सिर्फ एकही विधि नहीं बताई जाती,बल्कि कई ऐसी विधियाँ बतायी जातीहैंजो एक-दूसरे से जुड़े होते हुए भी विशिष्ट हैं| आपका मन हमेशा शांत या हमेशा चंचल हीं नहीं रहता, अलग-अलग समय और अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग हालत में होता है। अस्पर्ष योग में बताई गयी अलग-अलग विधियों का उपयोग आप अपने मन कीस्थिति (चंचल मन या शांत मन) के अनुसार कर सकते हैं| अस्पर्ष योग में ध्यान की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में भी बताया जाता है, उन अवस्थाओं का महत्व और उनसे आगे बढ़ने कि पद्धति भी बताई जाती है। अगर गलत तरीके से ध्यान करने की वजह से आप किसी समस्या से ग्रस्त होगये हैं तो भी अस्पर्श योग के द्वारा उसका समाधान हो सकता है| साथ ही अलग अलग विधियों का उपयोग करने के चलते मन उबता भी नहीं है|

12/01/2021

Address

Varanasi
221005

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Asparsha Yoga posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Asparsha Yoga:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram