08/11/2025
अब महाशिविर आयोजित करने की ज़रूरत है
जितनी "बड़ी संख्या" है उतना बड़ा वायुमंडल।
अब अभी बहुत से प्रश्न होते हैं जिनको मैं छोड़ देता हूं, सिर्फ इसीलिए कि वह जिन लोगों के सामने बात की जानी चाहिए वे लोग तो नहीं हैं, तो उनकी क्या बात करें ???
अब जैसे कि निरंतर ऐसा कोई दिन नहीं होता जिस दिन कि शिक्षा पर कोई प्रश्न न पूछ लेता हो।
लेकिन शिक्षा पर बात करने से क्या प्रयोजन है ???
जब तक कि "शिक्षाशास्त्री" के सामने वह बात न की जाए। आप क्या करेंगे बहुत उसके लिए ???
अब कल दो-एक प्रश्न हैं राजनीति पर,लेकिन क्या मतलब है उनकी बात करने से ???
जब तक कि हमारे पास एक राजनैतिक पूरी योजना, जहां से हम पूरी बात कह सकें पूरी दृष्टि को ध्यान में रख कर। और किनके सामने कहें ???
मुल्क की, जीवन के बहुत पहलू हैं, सभी पहलुओं पर संयुक्त क्रांति का काम हो सकता है।
पर इसके लिए हमारी तैयारी बढ़नी चाहिए। अब जैसे यही कैंप है, चार सौ लोग आए हैं; इस कैंप में दो हजार लोग भी हो सकते थे।
हमें थोड़ी फिकर करनी चाहिए
और आप हैरान होंगे कि चार सौ लोग, यही चार सौ लोगों को ज्यादा फायदा होता अगर दो हजार लोग यहां होते तो।
क्योंकि जितनी "बड़ी संख्या" हो ,उतना बड़ा वायुमंडल,
उतना बड़ा एटमास्फियर खड़ा होता है।
और हमारा चूंकि जीवन हमेशा से विस्तार को अनुभव करता है, जितना विस्तीर्ण हो। आप ध्यान करने बैठे हैं, अगर आपके आस-पास दस हजार लोग ध्यान कर रहे हैं,आपके ध्यान में फर्क पड़ता है। और आप अकेले कर रहे हैं तो फर्क पड़ता है।
क्योंकि आपको लगता है,
कुछ समझ में आना शुरू हुआ,
फिर एक साइकिक, एक मनो-वातावरण बनता है। इतने लोगों का चिंतन,इतने लोगों के मन की हवाएं, इतने लोगों के मन की तरंगें एक हवा बनाती हैं।
बुद्ध जिस गांव में भी जाते, दस हजार भिक्षु साथ जाते।
हम कहेंगे, इतनी भीड़ लेकर चलने का क्या मतलब था ???
लेकिन पूरे गांव की हवा बदल देते।
क्योंकि दस हजार भिक्षु एक खास ढंग से निर्मित, एक खास तरह के चित्त को लिए हुए,
खास तरह की आंखें,
खास तरह के पैर--चलने का ढंग,
उठने का ढंग,
बात करने का ढंग,
दस हजार शांत लोग, जिस गांव में खड़े हो जाते दस हजार लोग शांत, वह गांव एकदम देखता रह जाता कि क्या ।
एक गांव में ठहरे हैं, उस गांव का राजा मिलने गया। दस हजार लोग ठहरे हैं गांव के बाहर। तो उसने अपने मंत्रियों से कहा,कितनी दूर है ???
उन्होंने कहा, बस ये जो वृक्ष दिखाई पड़ रहे हैं, उसके पास है।
उसने कहा, मुझे शक होता है। अपनी तलवार बाहर निकाल ली।
तुम मुझे धोखा देना चाहते हो ???
तुम कहते हो दस हजार लोग ठहरे हैं, लेकिन यहां तो ऐसा पता नहीं चलता कि एक आदमी भी ठहरा हुआ है!
इतना सन्नाटा,
दस हजार लोग थोड़े ही फासले पर ठहरे हैं दरख्तों के पास, इतना सन्नाटा है रात में! मुझे शक होता है।
उसने तलवार बाहर निकाल ली। कोई षडयंत्र तो नहीं है!
वे मंत्री हंसे, उन्होंने कहा कि आप तलवार बाहर ही रखिए, कोई षडयंत्र नहीं है, लेकिन आप चलिए, वे दस हजार लोग और ही तरह के लोग हैं।
वह गया, वह देख कर वहां दंग रह गया कि वृक्षों के नीचे दस हजार लोग बैठे हैं,चुपचाप! कोई एक बात नहीं कर रहा है।
अब यह राजा एक साइकिक वातावरण में प्रवेश कर रहा है।
जहां यह बोलना भी चाहे तो नहीं बोल सकता। दस हजार लोग मौजूद हैं चुपचाप। कोई बात नहीं कर रहे हैं, बैठे हैं चुप। तो यह आदमी इनमें रुकता है, यह आदमी बदल जाता है। यह इसने देखा ही नहीं है, इसकी कल्पना में नहीं है कि ऐसी भी एक हवा हो सकती है।
ओशो
अनंत की पुकार—