ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan

  • Home
  • ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan

ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan, Yoga studio, .

I'm a Spiritual Guide, Yoga Teacher, Life
Coach, and Certified Clinical Hypnosis
Practitioner.

आओ जी आओ 🧘 ध्यान का ध्यान रखें।.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

मत छीनो मेरे खिलौने,मेरी हँसी मेरा बचपन।( "मत छीनो मेरे खिलौने…"ये सिर्फ एक कविता नहीं,एक चीख है उस बच्चे कीजिसने बारूद ...
24/04/2025

मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी मेरा बचपन।

( "मत छीनो मेरे खिलौने…"
ये सिर्फ एक कविता नहीं,
एक चीख है उस बच्चे की
जिसने बारूद में रंग खोजे।)

मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी, मेरा बचपन।
मत करो तुम वीरान,
मेरी जगह मेरा आंगन।
पहलगाम की सड़कों पर
टूटे हैं रंगों के सपने,
काँच की तरह बिखरे हैं
काग़ज़ की नावों के वचन।

बारूद की महक में अब
चॉकलेट भी लगती है सज़ा सी,
हर मोड़ पे मौत बैठी है
कहती है — "अब खेलो मुझसे।"

मेरी किताबें भी सहमी हैं,
हर अक्षर काँपता है डर से।
“अ से अमन” पढ़ने वाला मैं
अब “अ से आतंक” लिखता हूँ।
स्कूल की घंटी भी ख़ामोश है,
रंग-बिरंगे बस्ते — अब
बस गवाह हैं गोली की गूंज के।
जो मासूम कलियाँ थे कल तक,
आज सवाल बन गए हैं — “मैं क्यों?”

मेरे आँगन की मिट्टी अब
गुलाब नहीं उगाती,
सिर्फ़ माँ की दुआओं में
बची है ज़िंदगी की लौ।

जहाँ हर शाम “आओ खेलें” की सदा थी,
अब हर रोज़ “भागो” की गूंज है।
मैं नहीं चाहता टैंक को खिलौना बनाना,
मैं चाहता हूँ गुड्डे-गुड़ियों का जहाँ।

ओ ज़माने! सुनो मेरी सिसकी,
ये कोई एक बच्चे की पुकार नहीं,
पूरे कश्मीर का बचपन चीख रहा है।

हम नहीं चाहते बंदूक की भाषा,
हम चाहते हैं — लोरी, कहानियाँ,
और शाम को लौटता सूरज
जो डर से नहीं, उम्मीद से भरा हो।
ये मेरी लड़ाई नहीं, ये मानवता की जंग है।

जो आया था अमन लाने,
वही छीन रहा है चैन,
जो कहता था "ज़िंदाबाद",
वो ही बन गया है दहशत का नाम।

मत करो ऐसा इल्म का सौदा,
जहाँ बंदूकें पढ़ाई से भारी हो जाएँ।
खिलौने लौटाओ, ख़ुशियाँ लौटाओ,
वरना ये मासूम आँसू
तुम्हारी नींदें भी लूट लेंगे।
_____________________

करीब 30 साल पहले किसी आतंकवादी घटना पर ही मैंने ये कविता लिखी थी अब वैसी ही एक बड़ी घटना हुई है।
इस कविता को इसलिए अब की घटना को समावेश करके मैंने दोबारा लिखा है।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)


"जब काम बोझ लगे, तो भाव बदल दो..."कई बार हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकिलोग हमसे उम्मीद करते हैं। या...
21/04/2025

"जब काम बोझ लगे, तो भाव बदल दो..."

कई बार हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि
लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
या
समाज का डर होता है कि लोग क्या कहेंगे?

धीरे-धीरे मन में ये भाव आने लगते हैं —
"मैं सबके लिए करता हूंँ, कोई मेरी कद्र नहीं करता..."
"मैंने इतना कुछ किया, फिर भी कोई सराहना नहीं करता..."

ऐसे में काम बोझ बन जाते हैं।
मन थकने लगता है। भावनाएं उलझने लगती हैं।

लेकिन जब वही काम हम अपने मन की सच्चाई,
अपने प्रेम और
आंतरिक खुशी से करते हैं,
तो वो बोझ नहीं, मुक्ति का माध्यम बन जाते हैं।

अब मैं कोई भी काम अपेक्षा से नहीं,
बल्कि इसलिए करता हूंँ क्योंकि
मुझे करने में आनंद आता है।

नज़रिया बदलिए, अनुभव बदल जाएगा।
काम वही रहेगा, पर अब वो प्रेम का रूप ले लेगा।
यही है सच्ची आत्म-स्वतंत्रता का रास्ता।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

#योगिकजीवन

"प्रभाव आता है परिस्थिति से,स्वभाव आता है स्थिति से।"बाहरी दुनिया की हलचल हमें प्रभावित कर सकती है — सुख, दुख, सफलता, अस...
20/04/2025

"प्रभाव आता है परिस्थिति से,
स्वभाव आता है स्थिति से।"

बाहरी दुनिया की हलचल हमें प्रभावित कर सकती है — सुख, दुख, सफलता, असफलता...
लेकिन हमारा असली स्वभाव — हमारी शान्ति, स्थिरता और करुणा — यह सब हमारी आंतरिक स्थिति से जन्म लेते हैं।

यदि हम भीतर से संतुलित हैं, तो कोई भी परिस्थिति हमें हिला नहीं सकती।
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो,
जब स्थिति भीतर मजबूत हो, तो स्वभाव दिव्य हो जाता है।

योग, ध्यान और आत्म-चिंतन से अपनी "स्थिति" को इतना स्थिर बनाइएं,
कि कोई भी "परिस्थिति" आपको सिर्फ छूकर निकल जाए।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

#योग #स्वभाव #परिस्थिति

15/04/2025

सुबह का mindful breathing रुटीनदिन की शुरुआत 5–10 मिनट की गहरी साँसों (गहरी श्वास-प्रश्वास) के साथ करना शरीर को शांत करत...
14/04/2025

सुबह का mindful breathing रुटीन

दिन की शुरुआत 5–10 मिनट की गहरी साँसों (गहरी श्वास-प्रश्वास) के साथ करना शरीर को शांत करता है और मस्तिष्क को clarity देता है।
इससे पूरा दिन centered और खुशमिज़ाज बना रहता है।.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

यहाँ एक शक्तिशाली सेल्फ हिप्नोसिस मेडिटेशन स्क्रिप्ट दी गई है, जो गुरुश्री के द्वारा हनुमान जयंती के पावन अवसर पर बनाई ग...
12/04/2025

यहाँ एक शक्तिशाली सेल्फ हिप्नोसिस मेडिटेशन स्क्रिप्ट दी गई है, जो गुरुश्री के द्वारा हनुमान जयंती के पावन अवसर पर बनाई गई है।
इसका उद्देश्य है कि आप अपने सबकॉन्शियस माइंड के माध्यम से हनुमान जी की दिव्य शक्तियों को आत्मसात कर सकें और स्वयं को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से बलशाली बना सकें।

हनुमान शक्ति सेल्फ-हिप्नोसिस मेडिटेशन स्क्रिप्ट

शुरुआत (प्रवेश अवस्था):

बैठ जाएँ या लेट जाएँ… शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें…
धीरे-धीरे अपनी साँसों पर ध्यान केंद्रित करें…
हर साँस के साथ गहराई में उतरते जाएँ…
हर श्वास के साथ शांति भीतर उतर रही है…
हर श्वास छोड़ने के साथ तनाव बाहर निकल रहा है…

अब कल्पना करें कि आप एक दिव्य प्रकाश से घिरे हुए हैं…
यह प्रकाश सिंदूरी रंग का है… वही रंग जो हनुमान जी के शरीर की आभा से निकलता है…
यह प्रकाश अब आपके चारों ओर फैल रहा है…
यह आपको सुरक्षित कर रहा है…
यह आपको जोड़ रहा है हनुमान जी की चेतना से…

मूल अवस्था (डीप हिप्नोसिस):

अब आप एक गुफा में हैं… शांत, सुरक्षित, दिव्य…
आपके सामने हनुमान जी प्रकट होते हैं… उनका स्वरूप तेज़ोमय है…
उनकी आँखों में करुणा है… और शक्ति का सागर है…
वो आपको देख कर मुस्कुराते हैं और अपना आशीर्वाद दोनों हाथों से आपको देते हैं…

अब आप महसूस करें कि उनकी शक्तियाँ ऊर्जा बनकर आपके शरीर में प्रवेश कर रही हैं…

बल – हनुमान जी की तरह अनंत बल आपके शरीर की हर मांसपेशी में समा रहा है…

बुद्धि – आपकी बुद्धि तेज़ हो रही है… हर बात को स्पष्ट रूप से समझने की क्षमता जाग रही है…

भक्ति – आपके हृदय में सच्ची निष्ठा और समर्पण का भाव गहराता जा रहा है…

निडरता – हर डर पिघल रहा है… आप अजेय हैं… अडिग हैं…

एकाग्रता – आपकी चेतना केंद्रित हो रही है… जैसे तीर निशाने पर…

सेवा भावना – आप में सेवा का जज़्बा जाग रहा है… संसार के लिए कुछ करने की प्रेरणा उमड़ रही है…

अब आप देख रहे हैं – हनुमान जी की पूँछ आपके मेरुदंड (spine) में ऊर्जा बनकर समा गई है…
वो पूँछ अब मेरुदंड को मजबूत कर रही है…
आपके चक्र (chakras) संतुलित हो रहे हैं…
विशेषकर मूलाधार से लेकर सहस्रार तक एक दिव्य ऊर्जा का प्रवाह हो रहा है…

आपका शरीर अब हनुमान जी के बल, भक्ति, ब्रह्मचर्य, और विवेक से भर चुका है…

संकल्प (संस्कार):

अब अपने सबकॉन्शियस माइंड को ये संकेत दें:

“मैं हनुमान जी की शक्तियों को अपने भीतर स्थायी रूप से आत्मसात कर चुका/चुकी हूँ।
मेरा शरीर, मन और आत्मा अब शक्ति, भक्ति और सेवा का स्रोत हैं।
मैं अजेय हूँ, निडर हूँ, और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हूँ।”

पुनः जागृति:

अब धीरे-धीरे अपने शरीर में चेतना लाना शुरू करें…
अपनी उंगलियाँ हिलाएँ… पैरों को महसूस करें…
गहराई से एक साँस लें और जब तैयार हों…
तब धीरे धीरे आँखें खोलें…

आप अब हनुमान जी की शक्तियों से संपन्न एक जागरूक, शक्ति-सम्पन्न आत्मा हैं।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

Address


Alerts

Be the first to know and let us send you an email when ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan:

  • Want your practice to be the top-listed Clinic?

Share