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शनि देव न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो इंसान को उनके कर्मों के अनुसार फल (दंड या पुरस्कार) देते हैं। वे सूर्य देव और छ...
14/02/2026

शनि देव न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो इंसान को उनके कर्मों के अनुसार फल (दंड या पुरस्कार) देते हैं। वे सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं, जिन्हें महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। शनि देव मेहनत, अनुशासन और बुजुर्गों के सम्मान को महत्व देते हैं, और गलत काम करने वालों को सजा देते हैं।
शनि देव से जुड़े प्रमुख रहस्य (Shani Dev Secrets):
सबसे बड़े न्यायप्रिय: शनि देव किसी के साथ अन्याय नहीं करते, बल्कि कर्मों का हिसाब रखते हैं। यदि कोई गलत काम करता है तो उन्हें दंड अवश्य मिलता है।
दूरी और गंभीरता: सूर्य से दूर होने के कारण, शनि का स्वभाव ठंडा, धीमा और गंभीर माना जाता है, जो ज्योतिष में शनि की कठोरता को दर्शाता है।
साढ़ेसाती का रहस्य: शनि की साढ़ेसाती या ढैया का मतलब केवल कष्ट नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को मेहनत और सुधार का मौका देती है।
नाराजगी का कारण: शनि देव उन लोगों से नाराज होते हैं जो अपने माता-पिता, बुजुर्गों या गुरुओं का अपमान करते हैं, या जो अन्याय करते हैं।
सबसे प्रिय वस्तुएं: उन्हें काला तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएं, और गुड़ बहुत प्रिय हैं।
पूजा का सही तरीका: शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करना, सरसों के तेल का दीपक जलाना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना उन्हें प्रसन्न करने के सर्वोत्तम उपाय हैं।
उम्र के साथ असर: शनि की ऊर्जा आमतौर पर 36 साल की उम्र के बाद व्यक्ति के जीवन में ज्यादा मुखर और परिपक्व होती है।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए कर्मों की शुद्धता और बड़ों का सम्मान आवश्यक है।

Ganesha is one of the few ancient deities whose influence spread far beyond India without a centralized "missionary" eff...
08/02/2026

Ganesha is one of the few ancient deities whose influence spread far beyond India without a centralized "missionary" effort.
​In Japan: He is known as Kangiten and is often depicted as a dual-bodied deity.
​In Thailand: He is called Phra Phikanet and is the primary patron of the Fine Arts Department.
​In Tibet: He appears in Buddhist ta***ic traditions as a powerful protector.

​🌸The Science of the "Om"
​If you look at Ganesha’s profile (his trunk and the curve of his head), it is traditionally said to physically trace the shape of the Devenagari symbol for Om (ॐ). He is considered the personification of the "Primal Sound," which is why he is always worshipped first before any other god or venture.
​Fun Fact: Ganesha's "vehicle" is a tiny mouse (Mushika). This isn't just a cute pairing; it represents Ganesha’s ability to control the "wandering mouse" of the human mind, which is often distracted and nibbles away at things it shouldn't.

Lord Ganesha is one of the most recognizable figures in the world, but beyond the elephant head and the sweets, there ar...
08/02/2026

Lord Ganesha is one of the most recognizable figures in the world, but beyond the elephant head and the sweets, there are some truly unique layers to his symbolism and history.
​Here is something that sets him apart:
​🌸The "Broken" Intellectual
​While most deities are depicted as physically "perfect," Ganesha is famously Ekadanta (the one-toothed). According to legend, he broke off his own tusk to use as a pen when the sage Vyasa was dictating the Mahabharata.
​This makes him a unique symbol of sacrifice for knowledge. It suggests that the pursuit of wisdom is more important than physical appearance or even one's own body.

05/02/2026

jai shri ram 🙏

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। आप सभी पर बजरंगबली की कृपा बनी रहे। 🙏💪
05/02/2026

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। आप सभी पर बजरंगबली की कृपा बनी रहे। 🙏💪

✨️✨️✨️गरु पर भरोसा✨️✨️✨️एक दिन गरुनानक देव अपने शिष्यों के साथ किसी जंगल से गुजर रहे थे। उनके पास कांसे का एक कटोरा था। ...
21/01/2026

✨️✨️✨️गरु पर भरोसा✨️✨️✨️
एक दिन गरुनानक देव अपने शिष्यों के साथ किसी जंगल से गुजर रहे थे। उनके पास कांसे का एक कटोरा था। डस कटोरे से वे पानी पीते, खाना खाते थे। सभी शिष्य जानते थे ग़्रुनानक को ये कटोरा बहुत प्रिय है। जंगल में गुरुनानक को कीचड़ का एक गड्ढा दिखाई दिया तो उन्होंने अचानक वो कटोरा उस गड्ठे में फेंक दिया। ये देखकर सभी शिष्य हैरान हो गए। गरुनानक ने सभी से कहा 'जाओ. मेरा कटोरा कीचड से निकाल लाओ।' कीचड़ बहुत गंदा था। सभी शिष्य सोचने लगे कि कीचड में से कटोरा कैसे निकालेंगे? पता नहीं ये कितना गहरा है? अंदर जाएंगे तो कपडे खराब हो जाएंगे। डस तरह के सोच-विचार करने के बाद सभी शिष्यों ने अलग-अलग बहाने बना दिए कि वे कटोरा नहीं निकाल पाएंगे। ग्रुनानक चूप होकर सभी की बातें सन रहे थे. लेकिन गुरुनानक के प्रिय शिष्य लहना ने कपड़े गंदे होने की परवाह नहीं की और वह कीचड में उतर गया। उसने कटोरा कीचड से निकाला और उसे साफ पानी से धोकर गरुनानक को दे दिया। बाद में यही शिष्य लहना गुरु अंगद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। सीख - गुरुनानक ने वो कटोरा कीचड में क्यों फेंका था? दरअसल, वे गुरु और शिष्यों के बीच के रिश्ते की परख करना चाहते थे। डस कथा की सीख - यह है कि हम जिसे गरु मानते हैं. उसकी हर बात माननी चाहिए। माता-पिता, कोई संत या अन्य कोई व्यक्ति, गुरु कोई भी हो सकता है। गूरु के साथ भरोसे का रिश्ता होना चाहिए। यही भरोसा गुरु और शिष्य के रिश्ते को मजबूत करता है।

💫💫💫असली- नकली की पहचान💫💫💫एक लडका अपने परिवार के साथ रहता था। उसके पिता जौहरी थे। एक दिन उसके पिता बीमार पड गए, धीरे- धीर...
21/01/2026

💫💫💫असली- नकली की पहचान💫💫💫
एक लडका अपने परिवार के साथ रहता था। उसके पिता जौहरी थे। एक दिन उसके पिता बीमार पड गए, धीरे- धीरे उनकी हालत बिगडती गयी और अंत में उनका निधन हो गया। पिता के निधन के बाद परिवार पर आथिक संकट आ गया। ऐसे में मां ने घर चलाने के लिए बेटे को अपना एक कीमती हार दिया और कहा कि इसे अपने चाचा की दकान पर दिखा देना, वे भी एक जौहरी हैं। इसे बेचकर जो पैसे मिलेंगे वह ले आना
लड़के ने अपने चाचा को जब यह " हार दिखाया, तो चाचा ने हार को s अच्छे से देखा और कहा कि अभी बाजार बहुत 'मंदा है, इसे थोड़ा रुककर बेचना. तो अच्छे दाम मिल जाएंगे। ऋ तो तुम मेरी दुकान पर नौकरी कर लो, वैसे भी" की जरूरत है।
फिलहाल मुझे एक भरोसेमंद लड़के
लड़का अगले दिन से दकान का काम सीखने लगा। वहां उसे हीरों व रतों की परख का काम सिखाया गया। अब उस लड़के के घर में आर्थिक समस्या नहीं रहीं। धीरे धीरेरतनोंकी परख में उसका यश दूरदराज के शहरों तक फैबोलगा से लोग उसके पास अपने गहनों की परख करवाने आने लगे। एक बार उसके चाचा ने उसे बुलाया और कहा कि जो हार तम बेचना चाहते थे, उसे अबेर्लै"आरओ। लड़कै ने घर जाकर मांका हार जैंसे ही हाथ मेंलेकर गौर से द्ेाीके माया कि वह हार तो नकली है। वह तुरंत दौड़कर चाचा के पास पहुचा औरेदसपू्छा कि २ आपने मझे तभी सच कयों नहीं बताया, जब मैं इस हार को बेचने्आथा्था२ इस पर चाचा ने कहा कि अगर मैं तम्हें उस समय सच बताता तो तुम्हें लगता कि संकट कि घड़ी में चाचा भी तुम्हार कीमती हार को नकली बता रहे हैं और मुझ पर यकीन नहीं होता, लेकिन आज जब तुम्हें खुद ही गहनों को परखने काज्ञान हो गया है, त अब तुम खुद असली-नकली की पहचान कर सकते हो।

☀️☀️☀️☀️निदा पर ध्यान न दे ☀️☀️☀️☀️प्राचीन काल में एक संत दूसरे गांव जाने के क्रम मं अपने एक शिष्य के साथ एक गांव मं कुछ...
21/01/2026

☀️☀️☀️☀️निदा पर ध्यान न दे ☀️☀️☀️☀️
प्राचीन काल में एक संत दूसरे गांव जाने के क्रम मं अपने एक शिष्य के साथ एक गांव मं कुछ दिनों क लिए रुके। गांव के लोग संत क पास अपनां समस्याए लकर पहंचने लगे। संत बहत विद्वान थे। वे अपर्न बुद्धि से सभी परेशानियों क दूर करने रास्ता बता देते थे कुछ ही दिनों में संत क प्रांसद्ध पूर क्षेत्र में फैल गयी।
संत रोज प्रवचन भी देते थे
उनके उपदेश सुनने के लिए गांव में दूर-दू से लोग आने लगे। संत की बढ़ती प्रसिद्ध को देखकर गांव वे एक पजारी को जलन होने लगी। वह सोचने लगा कि डस तरह तो उसके भक्त र्भ संत के पास पहंचने लगेंगे। पजारी जलन की वजह से संत को शत्रू मानने लगा थ पुजारी नेसंत की छवि खराब करना शुरू कर दिया। वह गांव के लोगों को कहन लगा कि ये संत पाखंडी है और लोगों मूख बना रहा है। पुजारी के कुछ साथा भा इस काम में उसका साथ दे रहे थे। एक दिन संत के शिष्य ने गांव में अपने गरु की बराई सनी तो वह क्रोधित हो गया।

शिष्य तुरत ही गुरु के पास पहुंचा और गांव में हो रही बुराइ क बार म बत्नाया। सत ने शिष्य की बातें सुना ओर कहा क हमें इन बातों पर ध्यान नहा दना त्चाहए। अगर दम उस पॉडत से वाद-विवाद करेंगे तो भी ये बातें चलती रहेंगी। लिस तरहाहाथी प कुत्ते भौंकते हैं, लेकिन हाथी अपनी मस्त चाल में चलते रहता है। दौकडसी तरहै हम्े भी ऐसी बराइयों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अपने काम में मर्लमपानहचाहिए संदेश : यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति आपके पक्ष में हो। समाज में कुछ लोग हमा पक्ष में होते हैंतो कुछ विपक्ष में भी होते हैं। हमसे मतभद रखन लाल लाग दसरां क + सामन हमारा बराइ करत हैं ओर वे हमारी परेशानियां बढ़ान रहत हैं। एसीं स्थिति में हमें निदाओं से विचलित हुए बिना अपना काम करते रहना/चाढिए

एक संत थे वे भगवान राम को मानते थे कहते है यदि भगवान से निकट आना है तो उनसे कोई रिश्ता जोड़ लो.जहॉँ जीवन में कमी है वही ...
21/01/2026

एक संत थे वे भगवान राम को मानते थे कहते है यदि भगवान से निकट आना है तो उनसे कोई रिश्ता जोड़ लो.जहॉँ जीवन में कमी है वही ठाकर जी को बैठा दो, वे जरुर उस सम्बन्ध को निभायेगे, इसी तरह संत भी भगवान राम को अपना शिष्य मानते थे और शिष्य पुत्र के समान होता है इसलिए माता सीता को पुत्र वधु (बह)के रूप में देखते थे
उनका नियम था रोज मंदिर जाते और अपनी पहनी माला भगवान को पहनाते थे पर उनकी यह बात मंदिर के लोगो को अच्छी नहीं लगती थी उन्होंने पजारी से कहा - येबाबा रोज मंदिर आते है और भगवान को अपनी उतारी हुई माला पहनाते है, कोई तो बाजार से खरीदकर भगवान को पहनाता है और ये अपनी पहनी हुई भगवान को पहनाते है
पुजारी जी को सबने भडकाया कि बाबा की माला आज भगवान को मत पहनाना.अब जैसे ही बाबा मंदिर आये और पुजारी जी को माला उतार कर दी,तो आज पुजारी जी ने माला भगवान को पहनाने से इंकार कर दिया. और कहा यदि आपको माला पहनानी है तो बाजार से नई माला लेकर आये ये पहनी हई माला ठाकुर जी को नहीं पह्लायेगे.वे बाजार गए और नर्ड माला लेकर आये. आज संत मन में बडे उदास थे अब जैसे ही पुजारी जी ने वह नई माला भगवान श्री राम को पहनाई तुरंत वह माला ट्रट कर नीचे गिर गई उन्होंने फिर जोडकर पहनाई, फिर ट्रटकर गिर पड़ी, ऐसा तीन-चार बार किया पर भगवान ने वह माला स्वीकार नहीं की. तब पुजारी जी समझ गए कि मुझसे बहत बड़ा अपराध हो गया है.और पुजारी जी ने बाबा से क्षमा मॉँगी.

With Narayan Narayan Kumar – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
01/01/2026

With Narayan Narayan Kumar – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

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