14/02/2026
शनि देव न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो इंसान को उनके कर्मों के अनुसार फल (दंड या पुरस्कार) देते हैं। वे सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं, जिन्हें महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। शनि देव मेहनत, अनुशासन और बुजुर्गों के सम्मान को महत्व देते हैं, और गलत काम करने वालों को सजा देते हैं।
शनि देव से जुड़े प्रमुख रहस्य (Shani Dev Secrets):
सबसे बड़े न्यायप्रिय: शनि देव किसी के साथ अन्याय नहीं करते, बल्कि कर्मों का हिसाब रखते हैं। यदि कोई गलत काम करता है तो उन्हें दंड अवश्य मिलता है।
दूरी और गंभीरता: सूर्य से दूर होने के कारण, शनि का स्वभाव ठंडा, धीमा और गंभीर माना जाता है, जो ज्योतिष में शनि की कठोरता को दर्शाता है।
साढ़ेसाती का रहस्य: शनि की साढ़ेसाती या ढैया का मतलब केवल कष्ट नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को मेहनत और सुधार का मौका देती है।
नाराजगी का कारण: शनि देव उन लोगों से नाराज होते हैं जो अपने माता-पिता, बुजुर्गों या गुरुओं का अपमान करते हैं, या जो अन्याय करते हैं।
सबसे प्रिय वस्तुएं: उन्हें काला तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएं, और गुड़ बहुत प्रिय हैं।
पूजा का सही तरीका: शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करना, सरसों के तेल का दीपक जलाना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना उन्हें प्रसन्न करने के सर्वोत्तम उपाय हैं।
उम्र के साथ असर: शनि की ऊर्जा आमतौर पर 36 साल की उम्र के बाद व्यक्ति के जीवन में ज्यादा मुखर और परिपक्व होती है।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए कर्मों की शुद्धता और बड़ों का सम्मान आवश्यक है।