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सूर्य - पुरुष , राजा , क्षत्रिय जाति  , पक्षी स्वरूप , पित प्रकृति ,  पाप ग्रह , सतोगुण , तेजस्वी , सांवला लाल मिश्रित र...
28/03/2022

सूर्य -
पुरुष , राजा , क्षत्रिय जाति , पक्षी स्वरूप , पित प्रकृति , पाप ग्रह , सतोगुण , तेजस्वी , सांवला लाल मिश्रित रंग , कम बालों वाला , सुंदर व्यक्तित्व , लंबा शरीर , चौकोर शरीर , आंखो के सफेद भाग में थोड़ा मटमैलापन / आयु – 50 वर्ष , 22 वर्ष में अपना विशेष फल देने वाला / निवास – पर्वत , वन , देव स्थान /
🔹यदि लग्न पर सूर्य का प्रभाव हो तब ऐसे व्यक्तियों के स्वभाव में अहंकार रहता है । किसी को माफ नहीं करते हैं । आपका स्वभाव राजा के समान होता है । ऐसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास बहुत ज्यादा होती है । ऐसे व्यक्ति स्वतंत्र विचार के होते हैं । यह सोचते हैं कि मैं जो चाहूं वही लोग करें और मेरी बातें माने । स्वतंत्र राज्य करने का स्वभाव इनमें रहता है । चेहरे पर भव्यता रहती है । तेज रहता है । समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त होती हैं परंतु ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़ा , जिद्दी एवं गुस्सैल स्वभाव के भी होते हैं । ऐसे व्यक्ति सहनशील भी होते हैं । ऐसे व्यक्ति लंबे होते हैं एवं ललाट ज्यादा दिखता है । सामने से बाल कुछ कम होते हैं । यदि सूर्य शुभ भाव का स्वामी होकर लग्न में विराजमान हो या लग्न में देखें तो ऐसे व्यक्ति को उच्च पद प्राप्त होता है । सरकारी नौकरी मिलने की भी संभावना ज्यादा रहती है ।

♦️ प्रबल – यदि किसी की कुंडली में सूर्य कारक है एवं फलादेश के हिसाब से लाभ पहुंचा रहे हैं और कमजोर हैं तो ऐसी स्थिति में माणिक्य सोने या तांबे में रविवार को धारण करना चाहिए । जब तक आपके पास माणिक्य धारण करने की स्थिति नहीं है तब तक आप बेल का जड़ या लाल चंदन की माला धारण कर सकते हैं । लाल चंदन का तिलक लगा सकते हैं । लाल चंदन की माला से सूर्य मंत्र का जाप कर सकते हैं । ( पूर्ण लाभ माणिक्य से ही होगा )
मंत्र – ।। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ।।

♦️यदि सूर्य जन्म कुंडली में फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न कर रहे हैं तब सूर्य से संबंधित दान एवं उपाय करना चाहिए
सूर्य से संबंधित दान – गेहूं , तांबा , गुड़ , लाल चंदन , लाल वस्त्र किसी 50 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को रविवार को दान करना चाहिए
♻️ग्रुप में निशुल्क परामर्श के लिए ग्रहों के अंश के साथ कुंडली पोस्ट करें और अपना कोई भी एक समस्या लिखें । ♻️ ग्रहों का फलादेश भविष्य इत्यादि जानने के लिए जन्म कुंडली का संपूर्ण विश्लेषण करवाएं इसमें 5 - 7 घंटा समय लगता है और यह निशुल्क संभव नहीं है ।

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23/03/2022

22/03/2022


20/03/2022

होली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ आप सभी को🙏🙏🎉🎉🎉🎉इस होली रंग गुलाल तुम भेज भी देतेपरमेरे चेहरे को जो, रंग जाए,वो तेरे हाथ कहा...
17/03/2022

होली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ आप सभी को
🙏🙏🎉🎉🎉🎉
इस होली रंग गुलाल तुम भेज भी देते
पर
मेरे चेहरे को जो, रंग जाए,
वो तेरे हाथ कहां से लाऊं मैं....
और
मेरा दिल जो चाहे, तुझे रंगने को
तेरे गाल कहां से लाऊं मैं..
जी तो ये भी चाहे, इस होली
तेरे रंग में, रंग जाऊं मैं,
उफ्फ, ये ख्वाब..
मेरे सतरंगी ख्वाब
जो सच हो पाए,
वो लम्हात कहा से लाऊं मैं....


✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦ _••••••✤••••┈••✦👣✦•┈•••••✤•••••_*💥 _17 मार्च 2022 को होली है, जानिए होलिका दहन से लेकर पूजन ...
17/03/2022

✦••• *_जय श्री हरि_* •••✦
_••••••✤••••┈••✦👣✦•┈•••••✤•••••_*
💥 _17 मार्च 2022 को होली है, जानिए होलिका दहन से लेकर पूजन और रंग खेलने तक क्या-क्या करें, 19 काम की बातें_*

🤷🏻‍♀️ *_होलिका, धुलेंडी और रंगपंचमी पर क्या क्या किया जाता है या क्या कर सकते हैं। कैसे होगा होलिका दहन, पूजा, सावधानी, गीत, नृत्य या रंग सभी कुछ जानिए। होलिका दहन से लेकर रंगपंचमी तक किए जाने वाले 19 कार्य या काम की बातें।_*

🔥 *_1. होलिका दहन : 17 मार्च की रात्रि में शुभ मुहूर्त में होलिका दहन होगा। होलिका दहन के पूर्व होलिका के डांडे के आसपास लकड़ी और कंडे, भरभोलिये जमाकर रंगोली बनाई जाती। होलिका दहन के पहले होली के डांडा को निकाल लिया जाता है। उसकी जगह लकड़ी का डांडा लगाया जाता है। फिर विधिवत रूप से होली की पूजा की जाती है और अंत में उसे जला दिया जाता है।_*

🍱 *_2. होलिका पूजा सामग्री : थाली में रोली, कुमकुम, कच्चा सूत, चावल, कर्पूर, साबूत हल्दी और मूंग रखें। इसके बाद थाली में दीपक, फूल और माला भी रखें। थाली में 3 नारियल और कुछ बताशे रखें। फिर थाली में बड़गुल्लों की माला भी रखें। इस दिन कंडे, भरभोलिये (उपलों की माला), रंगोली, सूत का धागा, पांच तरह के अनाज, चना, मटर, गेहूं, अलसी, मिठाई, फल, गुलाल, लोटा, जल, गेहूं की बालियां, लाल धागा आदि सामग्री भी एकत्रित कर लें।_*

💮 *_3. होलिका दहन की पूजा विधि : पूजन करके के पूर्व भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा और आरती करें। फिर सबसे पहले साबूत हल्दी, चावल, मूंग, बताशा, रोली और फूल होलिका पर अर्पित करें। इसके बाद बड़गुल्लों या भरभोलिये की माला अर्पित करें और नारियल भी अर्पित करें और फिर 7 परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत होलिका पर बांधें। होलिका, प्रहलाद और भगवान नृसिंह के मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजन सामग्री से होलिका की पूजा करें। फिर प्रहलाद की और फिर भगवान नृसिंह की पूजा करें। फिर हनुमान जी, शीतला माता, पितरों की पूजा करें। इसके बाद बाद 7 बार परिक्रमा करते हुए होलिका में कच्चा सूत लपेटें। उसके बाद जल, नारियल, कर्पूर, चना, गन्ना, मटर, गेहूं और अन्य पूजा सामग्री होलिका को चढ़ा देते हैं। उसके बाद अग्नि प्रज्वलित करते हैं। फिर जलती हुई होली की भी पूजा और परिक्रमा करते हैं। दूसरे दिन होली को ठंडी करके के लिए भी उसकी पूजा करते हैं।_*

🙇🏻‍♀️ *_4. होलिका पूजन मंत्र_*

*_- होलिका के लिए मंत्र: ओम होलिकायै नम:_*
*_- भक्त प्रह्लाद के लिए मंत्र: ओम प्रह्लादाय नम:_*
*_- भगवान नरसिंह के लिए मंत्र: ओम नृसिंहाय नम:_*

*_- होलिका दहन की अग्नि में सभी सामग्रियों को अर्पित करते वक्त इस मंत्र का जाप करें- अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।_*

*_- भस्म को सिर पर लगाते समय जपें:_*
*_वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।_*
*_अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।_*

🏌🏻‍♀️ *_5. धुलेंडी : कहते हैं कि त्रैतायुग के प्रारंभ में विष्णु ने धूलि वंदन किया था। इसकी याद में धुलेंडी मनाई जाती है। पुराने समय में चिकनी मिट्टी की गारा का या मुलतानी मिट्टी को शरीर पर लगाया जाता था। आजकल होली के अगले दिन धुलेंडी को पानी में रंग मिलाकर होली खेली जाती है तो रंगपंचमी को सूखा रंग डालने की परंपरा रही है। कई जगह इसका उल्टा होता है। धुलेंडी पर शोकसंतप्त लोगों के यहां रंग डालने और बैठने के रिवाज है। रंग पंचमी पर भांग, ठंडाई आदि पीने का प्रचलन हैं।_*

👣 *_6. संपदा देवी का पूजन : कहते हैं कि इस धन-धान्य की देवी संपदाजी की पूजा होली के दूसरे दिन यानी धुलेंडी के दिन की जाती है। इस दिन महिलाएं संपदा देवी के नाम का डोरा बांधकर व्रत रखती हैं तथा कथा सुनती हैं। मिठाई युक्त भोजन से पारण करती है। इस बाद हाथ में बंधे डोरे को वैशाख माह में किसी भी शुभ दिन इस डोरे को शुभ घड़ी में खोल दिया जाता है। यह डोरा खोलते समय भी व्रत रखकर कथा पढ़ी या सुनी जाती है।_*

🧉 *_7. भांग : होली के दिन भांग पीने का प्रचलन भी सैंकड़ों वर्षों से जारी है। कई लोग मानते हैं कि ताड़ी, भांग और ठंडाई के बिना होली अधूरी है। यदि आप भांग का सेवन करना चाहते हैं तो साथ में चने रख लें। ज्यादा चढ़ जाए तो चने खा लें। तुवर के दाल के पानी से भांग का नशा उतर जाता है। हालांकि आपको किसी विशेषज्ञ से इस संबंध में सलाह लेना चाहिए।_*

🫂 *_8. दुश्मन भी गले मिल जाते हैं : होली के त्योहार के दिन लोग शत्रुता या दुश्मनी भुलाकर एक दूसरे से गले मिलकर फिर से दोस्त या मित्र बन जाते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। आप भी अपने परिवार और रिश्तेदारों से अपने गिले शिकवे मिटा लें।_*

👫 *_9. नवविवाहित न देखें होली : नवविवाहित लड़कियों के लिए होलिका दहन की आग को देखना मना है क्योंकि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। यानी कि आप अपने पुराने साल के शरीर को जला रहे हैं। इसलिए नवविवाहित महिलाओं के लिए होलिका की अग्नि को देखना ठीक नहीं माना जाता है। यह उनके वैवाहिक जीवन के लिए ठीक नहीं होता है।_*

🤰🏻 *_10. गर्भवती महिला या प्रसूता महिला न देखें होली : गर्भवती महिलाओं को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए और न ही उन्हें होली की अग्नि को देखना चाहिए। ऐसा करना गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि वे महिला भी इन नियमों का पालन करें जो हाल ही में मां बनी हैं।_*

🫕 *_11. होली के पकवान : होली के दिन घरों में खीर, पूरी और पूड़े आदि विभिन्न व्यंजन (खाद्य पदार्थ) पकाए जाते हैं। इस अवसर पर अनेक मिठाइयां बनाई जाती हैं जिनमें गुझियों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। बेसन के सेव और दहीबड़े भी सामान्य रूप से उत्तर प्रदेश में रहने वाले हर परिवार में बनाए व खिलाए जाते हैं। कांजी, भांग और ठंडाई इस पर्व के विशेष पेय होते हैं। पर ये कुछ ही लोगों को भाते हैं।_*

🎗️ *_12. रंगपंचमी का रंग : होलिका दहन के ठीक पांचवें दिन रंग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन प्रत्येक व्यक्ति रंगों से सराबोर हो जाता है। शाम को स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद गिल्की के पकोड़े का मजा लिया जाता है।_*

🙏🏼 *_13. पशुओं की पूजा : होली के कुछ दिन पहले ही गांव में पशुओं के शरीर पर रंग बिरेंगे टेटू बनाए जाते हैं। उनके सिंगों पर मोर पंख, गले में घुंघरू बांधे जाते हैं।_*

💃🏻 *_14. गान और नृत्य : आदिवासी क्षेत्रों में हाट बाजार लगते हैं और युवक युवतियां मिलकर एक साथ ढोर की थाप और बांसुरी की धुन पर नृत्य करते हैं। इनमें से कई तो ताड़ी पीकर होली का मजा लेते हैं।_*

🍿 *_15. होली में अनाज : घरों में बने पकवानों का यहां भोग लगाया जाता है। इस आग में नई फसल की गेहूं की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है।_*

🗣️ *_16. होली के गीत : गांवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं। स्थानीय भाषाओं में बने होली के गीतों में कुछ ऐसे गीत हैं जो सदियों से गाए जा रहे हैं।_*

🤴🏻 *_17. होली पर 10 देवताओं की पूजा : होली पर भगवान विष्णु, नृसिंह भगवान, श्री शिव, कामदेव, श्री कृष्ण, श्री राधा, श्री पृथु, श्री हनुमान, श्री लक्ष्मी, अग्नि एवं संपदा देवी की पूजा होती है।_*

📿 *_18. भरभोलिये : होली में आग लगाने से पहले भरभोलिए की माला को भाइयों के सिर के ऊपर से 7 बार घूमा कर होली की आग में फेंक दिया जाता है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नज़र भी जल जाए। कंडे की माला को भरभोलिए कहते हैं। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं।_*

🎨 *_19. रंग से बचने के उपाय : होली पर रंग खेलने के पूर्व पूरे शरीर पर अच्छे से तेल लगा लें। होली प्राकृतिक रंगों से ही खेलें केमिकल रंगों से दूर रहें। होली खेलते समय सन ग्लासेस का जरूर इस्तेमाल करें, क्योंकि ये आपकी आंखों को रंग से बचाए रखने में काफी हद तक मदद करेंगे।_*

14/03/2022

Ekadashi 2022: 14 मार्च रंगभरी
तथा आमलकी एकादशी? जानें व्रत पारण का समय व नियम |
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आप सभी भक्तों  को रंग भरी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ.. आज ही के दिन बाबा भोलेनाथ जी ने माता पार्वती जी के साथ होली खेल...
14/03/2022

आप सभी भक्तों को रंग भरी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ.. आज ही के दिन बाबा भोलेनाथ जी ने माता पार्वती जी के साथ होली खेली थी। इसी उपलक्ष में रंगभरी एकादशी की होली काशी में खेली जाती है।
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#रंगभरीएकादशी

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13/03/2022

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👉पंचम भाव से पेट ,  गर्भ , संतान ,  विद्या , बुद्धि ,  वाणी  , इष्ट देव ,  मंत्रणा शक्ति , प्रेम ,  प्रतियोगी परीक्षा , ...
05/03/2022

👉पंचम भाव से पेट , गर्भ , संतान , विद्या , बुद्धि , वाणी , इष्ट देव , मंत्रणा शक्ति , प्रेम , प्रतियोगी परीक्षा , लेखन शक्ति इत्यादि के बारे में विचार किया जाता है ।
👉 यदि पंचम भाव बली हो शुभ हो तो दूसरों को मार्गदर्शन करने की योग्यता अच्छी होती है
👉संतान - पंचम भाव पर सूर्य और मंगल का प्रभाव हो तो गर्भ नाश करता है विशेष शत्रु राशि हो , परंतु दूसरे शुभ ग्रहों की दृष्टि से इसमें कमी भी आती है । इस स्थान में बलवान चंद्र अधिक कन्याओं की उत्पत्ति करता है । बुध एवं शनि के पंचम में होने से पुत्र प्राप्ति में विलंब होती है क्योंकि दोनों ठंडे तथा नपुंसक ग्रह
हैं । गुरु इस स्थान में संतान के लिए शुभ नहीं होता है एवं बड़े पुत्र से मतभेद करता है । गुरु इस स्थान में तभी शुभ फल प्रदान करता है जब पापयुक्त , पापदृष्टय या निर्बल ना हो । शुक्र इस स्थान में पुत्र पुत्रियां दोनों देता है । राहु और केतु संतान संबंधी परेशानी देते हैं । ( एक ही ग्रह के फलादेश को आखिरी निर्णय ना मानें । दूसरे ग्रहों की दृष्टि फलादेश में परिवर्तन भी कर देती है । )
👉प्रेम विवाह - पंचम स्थान प्रेमी प्रेमिका का होता है जब इस भाव का संबंध सप्तम भाव या उसके स्वामी से होता है तो प्रेम विवाह होने की संभावना ज्यादा रहती है । प्रेम विवाह के और भी कई योग
होते हैं ।
👉प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए पंचम भाव की स्थिति अच्छी होनी चाहिए ।

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