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माजून-ए-जवानी (हिंदी रूपांतरण)सामग्री:मुसली सफ़ेद — 50 ग्रामखौलंजान — 50 ग्रामअश्वगंधा — 50 ग्रामसालेब मिस्री — 50 ग्राम...
08/02/2026

माजून-ए-जवानी (हिंदी रूपांतरण)
सामग्री:
मुसली सफ़ेद — 50 ग्राम
खौलंजान — 50 ग्राम
अश्वगंधा — 50 ग्राम
सालेब मिस्री — 50 ग्राम
मग़ज़ पंबा दाना (कपास बीज की गिरी) — 40 ग्राम
अकरकरा — 20 ग्राम
बीज-ए-कौंच — 20 ग्राम
गोंद कीकर (भुनी हुई) — 20 ग्राम
शकाकुल मिस्री — 20 ग्राम
शतावर — 20 ग्राम
तालमखाना — 20 ग्राम
सालेब पंजा — 20 ग्राम
बीज ओटिंगन — 20 ग्राम
गोखरू मुदब्बर — 20 ग्राम
काली मिर्च — 20 ग्राम
सोंठ (सूखी अदरक) — 20 ग्राम
छोटी इलायची — 15 ग्राम
अंडे की जर्दी — 20 अदद
ज़ाफ़रान — 14 ग्राम
शुद्ध शहद — 1200 ग्राम
तैयारी की विधि:
सभी दवाओं को बारीक पीसकर सफ़ूफ़ बना लें। सफ़ूफ़ को रोगन-ए-ज़र्द में अच्छी तरह चर्ब करें। ज़ाफ़रान को अलग से अर्क-ए-केवड़ा में घोंटकर मिलाएँ। अब सबको शहद में डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। माजून-ए-जवानी तैयार है।
मात्रा (खुराक):
5 ग्राम सुबह-शाम, खाली पेट, आधा कप गुनगुने दूध के साथ।
केवल 15 दिन।
फ़ायदे:
जवानपन, ताक़त और फ़िटनेस चाहने वालों के लिए।
सामान्य शारीरिक, स्नायु और पुरुषों की कमजोरी दूर करता है।
गुप्तांग की दुबलापन/ढीलापन और कामेच्छा की कमी में लाभकारी।
तनाव के साथ सख़्ती (इरेक्शन) बेहतरीन बनाता है।
शीघ्रपतन में लाभ।
इम्साक (संयम) बढ़ाता है।
मधुमेह (शुगर) से होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी और यौन-शक्ति की कमी में सहायक।
सुस्ती, निढालपन और थकान दूर करता है।
अत्यधिक कमज़ोर पुरुषों के लिए जीवनदायक।
हस्तमैथुन या अत्यधिक सहवास से हुई कमजोरी में उपयोगी।
रक्त और वीर्य-उत्पादन बढ़ाता है; वीर्य की पतलापन दूर करता है।
समय से पहले बुढ़ापा नहीं आता; दृष्टि मज़बूत होती है।
नसों की कमजोरी में राहत; शरीर में कंपकंपी नहीं रहती।
घुटने, जोड़, मांसपेशियाँ, दिल-दिमाग़ मज़बूत होते हैं।
युवावस्था की गलत आदतों से पैदा हुई कमज़ोरियों में लाभकारी।
शरीर के प्रमुख अंगों के कार्य सुधरते हैं।

`نظربد کا بہترین نقش`بچوں،بڑوں او ر کاروباری نظربد کا بہترین توڑ ہے،لکھ کر پہنیں/کاروباری جگہ پر لگائیں!
01/02/2026

`نظربد کا بہترین نقش`
بچوں،بڑوں او ر کاروباری نظربد کا بہترین توڑ ہے،لکھ کر پہنیں/کاروباری جگہ پر لگائیں!

द्रोणपुष्पी, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गुमा’ के नाम से भी जाना जाता है, आयुर्वेद में एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा माना...
01/02/2026

द्रोणपुष्पी, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गुमा’ के नाम से भी जाना जाता है, आयुर्वेद में एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा माना जाता है। यह प्राचीन काल से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह पौधा खेतों, बंजर भूमि और गांवों में सहज रूप से उग जाता है। आयुर्वेद के अनुसार द्रोणपुष्पी शरीर को भीतर से शुद्ध करने और दोषों को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है। इसके पत्ते, फूल और जड़—तीनों ही औषधीय दृष्टि से उपयोगी हैं। यह न केवल विभिन्न शारीरिक रोगों में लाभकारी मानी जाती है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में भी सहायक बताई गई है। द्रोणपुष्पी में कफनाशक, ज्वरनाशक, जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं।

इस औषधि का उल्लेख ‘भावप्रकाश निघण्टु’ सहित अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसके गुण, रस, प्रभाव और औषधीय उपयोगों का विस्तृत वर्णन उपलब्ध है।

✅️ द्रोणपुष्पी के प्रमुख औषधीय उपयोग —

1️⃣ सर्दी-खांसी और बुखार :-
द्रोणपुष्पी के पत्तों का काढ़ा पारंपरिक रूप से जुकाम, खांसी और हल्के बुखार में दिया जाता है। इसके ज्वरनाशक (antipyretic) और सूजनरोधी गुण शरीर के तापमान और गले की सूजन कम करने में सहायक हो सकते हैं।

2️⃣ श्वसन संबंधी समस्याएँ :-
इसमें मौजूद बायोएक्टिव तत्व श्वसन तंत्र की सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। लोकचिकित्सा में इसे बलगम निकालने के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

3️⃣ त्वचा रोग (फोड़े-फुंसी, खुजली, संक्रमण) :-
इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण त्वचा संक्रमण में सहायक माने जाते हैं। पत्तों का लेप फोड़े-फुंसी या हल्की सूजन पर लगाया जाता है।

4️⃣ पीलिया :-
इसके पत्तों का रस लिवर की सफाई करता है और पीलिया के इलाज में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।

5️⃣ जोड़ों का दर्द और सूजन :-
सूजनरोधी (anti-inflammatory) प्रभाव के कारण इसके अर्क का उपयोग दर्द और सूजन में राहत के लिए किया जाता है, हालांकि इस पर बड़े मानव-अध्ययन सीमित हैं।

6️⃣ पाचन समस्याएँ :-
हल्के अपच, गैस या पेट दर्द में पारंपरिक रूप से इसका उपयोग किया जाता है। इसके कुछ घटक पाचन क्रिया को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं।

7️⃣ कीट-दंश (Insect bites) :-
ग्रामीण क्षेत्रों में इसके पत्तों को मसलकर कीट के काटने वाली जगह पर लगाया जाता है, जिससे जलन और सूजन में राहत मिल सकती है।

8️⃣ घाव भरने में सहायक :-
कुछ प्रारंभिक अध्ययनों में इसके एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन देने से जुड़े पाए गए हैं।

✅️ सेवन का तरीका और मात्रा —

■ स्वरस (Juice) :-
ताजे पत्तों को पीसकर रस निकालें, 5–10 मिली० (शहद के साथ) दिन में एक बार ले सकते है। यह खांसी, बलगम, हल्का अस्थमा, इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है।

■ काढ़ा (Decoction) :-
5–10 ग्राम सूखी पत्तियाँ या पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल) को 200–250 ml पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो छान लें। दिन में 1–2 बार, भोजन के बाद 20–30 मिली० सेवन कर सकते है। यह बुखार, सर्दी-खांसी, गले की सूजन, हल्के पाचन विकार में फायदेमंद है।

■ चूर्ण (Powder) :-
छाया में सुखाए गए पंचांग का चूर्ण 1–3 ग्राम गुनगुने पानी या शहद के साथ दिन में एक बार ले सकते है। यह पाचन सुधार, हल्की सूजन, सामान्य कमजोरी में फायदेमंद है।

■ लेप (Paste) :-
ताजी पत्तियों को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। यह फोड़े-फुंसी, त्वचा संक्रमण, कीट-दंश, जोड़ों का दर्द में प्रभावी है।

⚠️ सावधानी —

1) इसका स्वाद अत्यंत कड़वा और तीखा होता है, अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से यह पेट में जलन पैदा कर सकता है।

2) गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका सेवन बिना अनुभवी वैद्य की सलाह के नहीं करना चाहिए।

💮 سوتے میں پیشاب کرنا اور مثانے کی کمزوری کے لیے 💮یہ نقش کسی کاغذ پر کھانے کی زرد رنگ سے لکھ کر ایک گلے میں ڈال دیں اور ...
01/02/2026

💮 سوتے میں پیشاب کرنا اور مثانے کی کمزوری کے لیے 💮

یہ نقش کسی کاغذ پر کھانے کی زرد رنگ سے لکھ کر ایک گلے میں ڈال دیں اور کچھ پلیٹوں پر لکھ کر صبح،دوپہر وشام ایک ایک پانی میں دھوکر کر مریض کو پلائیں ۔۔۔

*لیکوریا نیا ہو یا پرانا 30 دن میں ٹھیک**ھوالشافی*خارخسک 40 گرام ، ستاور 40 گرام ، موچرس 40 گرام ، پھلی صمغ 40 گرام ، تا...
31/01/2026

*لیکوریا نیا ہو یا پرانا 30 دن میں ٹھیک*

*ھوالشافی*
خارخسک 40 گرام ، ستاور 40 گرام ، موچرس 40 گرام ، پھلی صمغ 40 گرام ، تالمکھانہ 40 گرام ، نرکچور 40 گرام ، ست گلو 40 گرام ، طباشیر 40 گرام ، ثعلب مصری 40 گرام ، صمغ عربی 40 گرام ، مصطگی رومی 20 گرام ، کشتہ قلعی در گندھک 40 گرام ، تخم خرفہ 50 گرام ، صمغ ڈھاک 50 گرام ، صندل سفید 50 گرام

تمام اشیاء کو بریک پیس کر کپڑ چھان کر لین ، اور 500 ایم جی کے کیپسول بھر لین

*خوراک*
صبح دوپہر شام 1 کیپسول دودھ کے ساتھ ، مستقل آرام کے لیے 30 روز تک استعمال کریں

*نوٹ*
ڈیٹ سےفراغت کے بعد استعمال کریں

بسم اللہ الرحمٰن الرحیم *نقش سورۂ اخـــــــــلاص* 🌷 منقول ہے حضرت علی کرم اللہ وجہہ الکریم سے کہ سورہ اخلاص اس ترتیب سے ...
19/01/2026

بسم اللہ الرحمٰن الرحیم

*نقش سورۂ اخـــــــــلاص* 🌷

منقول ہے حضرت علی کرم اللہ وجہہ الکریم سے کہ سورہ اخلاص اس ترتیب سے لوح محفوظ میں لکھی ہے ۔

*نقش مبارک کے جملہ فوائد۔۔*

لکھ کر دریا کے پانی سے دھو کر درد شکم والے کو پلائے ان شاءاللہ شفا پائے۔

لکھ کر مسجد کے بیچ میں دفن کرے غائب حاضر ہوں۔

بخار والے کے بازو پر باندھنے سے

لکھ کر دیوانہ یاپاگل کے گلے میں باندھے صحت ہو۔

کسی کو دیو یا جن کا خلل ہو یہی نقش باندھے شفاء ہو۔

لکھ کر کلام پاک میں رکھے جو آرزو ہو خواب میں معلوم ہو جائے ۔

لکھ کر دریا میں ڈالے جومراد ہومولی تعالی پوری فرمائے ۔

دردسر کے واسطے سر میں باندھے درد رفع ہو جائے۔

اگر لکھ کر بازو پر باندھے رزق میں برکت ہو۔

اگر لکھ کر گونگے بچے کو کھلاۓ بولنے لگے۔

ہرقسم کے درد والا اس کو دیکھتا رہے۔ دیکھتے دیکھتے درد کافور ہو۔

لکھ کر گلے میں ڈالے اس کے دشمن دوست بن جائیں

اگر مردے کے کفن پر لکھے عذاب قبر سے نجات ملے۔

شرف آفتاب با مشتری یا شرف قمر میں لکھ کر کسی میٹھی چیز پر مطلوب کو کھلا دے یک لحظہ جدا نہ ہونا چاہے

لکھ کر پرانی قبر میں دفن کرے دشمن مقہور ہو۔

جنگ میں بازو پہ باندھ

⭐ حفاظت حمل کا خاص مجرب نقش ⭐اگر کسی حاملہ کو حمل ضائع ہونے کی خطرہ ہو تو یہ نقش آتشی چال میں لکھ کر حاملہ کو دے دیں کہ ...
16/01/2026

⭐ حفاظت حمل کا خاص مجرب نقش ⭐

اگر کسی حاملہ کو حمل ضائع ہونے کی خطرہ ہو تو یہ نقش آتشی چال میں لکھ کر حاملہ کو دے دیں کہ وہ وضع حمل تک ہر وقت ناف پر بندھا رہے۔
فلاں بنت فلاں کی جگہ حاملہ اور اس کی ماں کا نام لکھیں۔ مجرب اور خاص نقش ہیں۔

(قاری شاھد منصور)

अश्वगंधा एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता रहा है।...
16/01/2026

अश्वगंधा एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता रहा है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और लीवर टॉनिक जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को रोगों से बचाने के साथ ऊर्जा और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यह शारीरिक कमजोरी और मानसिक तनाव को कम करती है। इन्हीं गुणों के कारण आयुर्वेद में अश्वगंधा को “इंडियन जिनसेंग” कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को पुनर्जीवित करने की क्षमता रखती है।

✅️ अश्वगंधा के प्रमुख औषधीय फायदे जाने —

1️⃣ शारीरिक कमजोरी और थकान दूर करें :-
नियमित सेवन से शरीर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, कमजोरी दूर होती है और शारीरिक स्टैमिना में वृद्धि होती है। इसलिए यह खिलाड़ियों, मेहनत करने वाले लोगों और वृद्धों के लिए भी उपयोगी मानी जाती है।

2️⃣ ब्लड प्रेशर और तनाव पर नियंत्रण :-
अश्वगंधा का नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। यह मानसिक तनाव, चिंता और थकान को कम करके मन को शांत रखता है।

3️⃣ जोड़ों के दर्द से राहत :-
अश्वगंधा का तेल जोड़ो के दर्द और सूजन को कम करने में बहुत उपयोगी है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के दर्द और अकड़न से राहत दिलाते हैं।

4️⃣ पुरुषों के लिए लाभदायक :-
अश्वगंधा पुरुषों में हार्मोनल संतुलन बनाने, शुक्राणु की गुणवत्ता सुधारने और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। यह समग्र पुरुष स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक है।

5️⃣ महिलाओं के लिए उपयोगी :-
अश्वगंधा महिलाओं में हार्मोन संतुलन बनाए रखने, कमजोरी दूर करने और तनावजनित समस्याओं को कम करने में सहायक है।

6️⃣ नींद की गुणवत्ता में सुधार :-
अगर आपको नींद न आने की समस्या है, तो अश्वगंधा एक बेहतरीन उपाय है। यह तनाव और चिंता को कम करके मन को शांत करता है, जिससे नींद गहरी और सुकूनभरी आती है।

7️⃣ एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर :-
यह कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर बढ़ती उम्र के लक्षणों को धीमा करती है। त्वचा में निखार और बालों की मजबूती बनाए रखने में भी सहायक है।

✅️ अश्वगंधा का उपयोग कैसे करें —
अश्वगंधा का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है - इसकी जड़ों को सुखाकर पाउडर बनाएं और दूध या गुनगुने पानी के साथ लें। इसके पत्तों से बना पाउडर भी स्वास्थ्यवर्धक होता है। अश्वगंधा का तेल शरीर की मालिश में उपयोग किया जा सकता है, जिससे मांसपेशियों को आराम और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

⚠️ सावधानियां —
अश्वगंधा भले ही प्राकृतिक और आयुर्वेदिक औषधि हो, लेकिन किसी भी हर्बल सप्लीमेंट की तरह इसे भी सीमित मात्रा में लेना जरूरी है। यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं, तो सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

آپ ہارمونز کو دواؤں سے ٹھیک کرنا چاہتے ہیں، مگر اصل مسئلہ جڑ سے نظرانداز ہو رہا ہے۔تھکن، بے چینی، وزن کا بگڑنا، نیند کی ...
16/01/2026

آپ ہارمونز کو دواؤں سے ٹھیک کرنا چاہتے ہیں، مگر اصل مسئلہ جڑ سے نظرانداز ہو رہا ہے۔

تھکن، بے چینی، وزن کا بگڑنا، نیند کی خرابی، یہ سب ہارمونز کے بگڑنے کی خاموش نشانیاں ہیں۔

جسم چیخ چیخ کر بتاتا ہے، مگر ہم وقتی حل میں اصل وجہ بھول جاتے ہیں۔

ایک دیسی جڑی بوٹی صدیوں سے استعمال ہو رہی ہے، مگر آج اسے کم لوگ جانتے ہیں۔

یہ جڑی بوٹی جسم کو زبردستی نہیں چلاتی بلکہ اندرونی نظام کو متوازن کرتی ہے۔

اسگند ناگوری آہستہ آہستہ اعصاب کو مضبوط بناتی اور ذہنی دباؤ کو کم کرتی ہے۔

جب دباؤ کم ہوتا ہے تو ہارمونز خود بخود ترتیب میں آنے لگتے ہیں۔

یہ جڑی بوٹی مرد و عورت دونوں میں اندرونی عدم توازن کو سنبھالنے میں مدد دیتی ہے۔

کن لوگوں کو فائدہ ہوتا ہے جو ذہنی دباؤ، کمزوری یا بے ترتیب نیند کا شکار ہوں۔

کن لوگوں کو احتیاط کرنی چاہیے وہ افراد جو مستقل طاقتور دوائیں استعمال کر رہے ہوں۔

مزاج کے لحاظ سے اس کی تاثیر گرم اور مضبوط کرنے والی سمجھی جاتی ہے۔

استعمال کا بہترین وقت رات کو سونے سے پہلے تھوڑی مقدار کے ساتھ ہوتا ہے۔

مقدار ہمیشہ کم رکھنی چاہیے تاکہ جسم آہستہ آہستہ ہم آہنگ ہو سکے۔

دودھ یا نیم گرم پانی کے ساتھ لینا اس کے اثر کو بہتر بنا سکتا ہے۔

جب جسم دباؤ سے نکلتا ہے تو ہارمونز لڑنا چھوڑ دیتے ہیں اور سکون بحال ہوتا ہے۔

یاد رکھیں توازن زبردستی نہیں آتا، اسے وقت اور درست عادتیں درکار ہوتی ہیں۔

With Asad Mehmood – I'm on a streak! I've been a top fan for 3 months in a row. 🎉
14/01/2026

With Asad Mehmood – I'm on a streak! I've been a top fan for 3 months in a row. 🎉

आयुर्वेद के अनुसार शंखपुष्पी (Shankhpushpi) एक ऐसी जड़ी-बूटी हैं जो दिमाग को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अनेक तरह के बीमारियो...
11/01/2026

आयुर्वेद के अनुसार शंखपुष्पी (Shankhpushpi) एक ऐसी जड़ी-बूटी हैं जो दिमाग को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अनेक तरह के बीमारियों के लिए औषधि के रूप में काम करती हैं। इसमें सफेद या हल्के नीले रंग के फूल पाये जाते हैं।

■ सेहत के लिए वरदान हैं शंखपुष्पी :-

1) इस जड़ी-बूटी को दिमाग और याद्दाश्‍त तेज करने वाला टॉनिक भी कहा जा सकता हैं। ये बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने का काम करती हैं। ये जड़ी-बूटी बढ़ती उम्र में याद्दाश्‍त कमजोर होने से भी रोकती हैं और इसे चिंता एवं डिप्रेशन को कम करने में भी असरकारी पाया गया हैं। इससे अल्‍जाइमर, तनाव, चिंता, डिप्रेशन और मानसिक तनाव जैसी कई समस्‍याओं का इलाज किया जा सकता हैं।

2) मूत्र रोग में शंखपुष्पी बहुत लाभकारी औषधि हैं। पेशाब करते समय जलन या दर्द होना, रुक-रुककर पेशाब होना, पेशाब में पस आना आदि रोग इसके सेवन से ठीक हो जाते हैं। ऐसे रोगों से राहत पाने के लिए प्रतिदिन शंखपुष्पी चूर्ण को गाय के दूध, मक्खन, शहद अथवा छाछ के साथ सेवन करने से लाभ होता हैं।

3) शंखपुष्पी के फूलों में एथेनॉलिक अर्क पाया जाता हैं, जो नॉन-एस्ट्रिफाइड फैटी एसिड के लेवल को कम करता हैं। इससे हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉक, ब्लड क्लॉट आदि गंभीर रोगों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलती हैं। यह रक्त को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करता हैं।

4) अगर मिर्गी के मरीज को बार-बार दौरा पड़ रहा हैं तो शंखपुष्पी के रस में शहद मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से लाभ मिलता हैं।

5) डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए शंखपुष्पी के चूर्ण को सुबह-शाम गाय के मक्खन के साथ या पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ मिलता हैं।

6) शंखपुष्पी खून की उल्टी रोकने वाली उत्तम औषधि हैं। यदि किसी को खून की उल्टी हो रही हो तो शंखपुष्पी का रस, दूब घास तथा गिलोय का रस मिलाकर पिलाने से तत्काल लाभ होता हैं। नाक से खून बहने पर भी इसकी बूंद नाक में डालने से खून आना बंद हो जाता हैं।

7) शंखपुष्पी के फूल का इस्तेमाल पीलिया, पेचिश, बवासीर जैसे अन्य पेट से जुड़े विकारों के लिए किया जाता हैं। इसके अलावा शंखपुष्पी का रस चेहरे की झुर्रियां और उम्र बढ़ने के लक्षणों को रोकने में मदद करता हैं।

8) गर्भाशय से निकलने वाले रक्त को रोकने के लिए यह एक उत्तम और पौष्टिक औषधि हैं। गर्भाशय से संबंधित किसी भी रोग में यह अत्यंत लाभकारी साबित होती हैं। इसके लिए शंखपुष्पी को हरड़, घी, शतावरी और शक्कर मिलाकर सेवन करना चाहिए।

9) अक्सर बच्चे रात में सोते समय बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। इस बीमारी में भी शंखपुष्पी का चूर्ण काम आता हैं। उन बच्चों को रात में सोते समय शंखपुष्पी चूर्ण और काला तिल मिलाकर दूध के साथ सेवन कराने से इस बीमारी से राहत मिलती हैं।

10) मौसम बदलने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में शंखपुष्पी एक असरदार औषधि साबित होती हैं। खांसी में इसके रस का सेवन तुलसी और अदरक के साथ किया जाता हैं।

यह पोस्ट सिर्फ जानकारी हेतु हैं, शंखपुष्पी का सेवन किसी आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही करें।

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