Aarogyadham Ayurvedic Clinic

Aarogyadham Ayurvedic Clinic Aarogyadham Ayurvedic Clinic is started by Dr. Anup Mahajan . Here patients are treated by only Ayurvedic Medicines and Therapies.

Here in this hospital we cure the life style disorder diseases like Diabetes, Obesity , Blood pressure, Hypothyroid, PCOD , and Heart diseases

16/04/2024
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18/08/2021

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Reverse your diabetes with Madhavbaug and free from the disease,  ,  ,
18/08/2021

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18/12/2020
🚩 *शरद पूर्णिमा पर यह काम करेंगे तो सालभर रहेगे स्वस्थ्य और होगी धनप्राप्ति*29 अक्टूबर 2020azaadbharat.org*🚩आश्विन मास क...
30/10/2020

🚩 *शरद पूर्णिमा पर यह काम करेंगे तो सालभर रहेगे स्वस्थ्य और होगी धनप्राप्ति*

29 अक्टूबर 2020
azaadbharat.org

*🚩आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ बोलते हैं । शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि में चंद्रमा का ओज सबसे तेजवान और ऊर्जावान होता है। पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है । इस साल 30 अक्टूबर की रात में खीर बनाकर खानी है व 31 अक्टूबर को व्रत-पूजन करना है।*

*🚩इस दिन रास-उत्सव और कोजागर व्रत किया जाता है । गोपियों को शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था ।*

*🚩यूं तो हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है।*

*🚩 शरद पूर्णिमा से जुड़ी बातें....*

*इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं, जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है, इसके बाद उसे खाया जाता है।*

*🚩 नारद पुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए निशिद काल में पृथ्वी पर भ्रमण करती है। माता यह देखती है कि कौन जाग रहा है?*
*यानी अपने कर्तव्‍यों को लेकर कौन जागृत है? जो इस रात में जागकर मां लक्ष्मी की उपासना करते हैं, मां उन पर असीम कृपा करती है।*

*🚩वैज्ञानिक भी मानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य व सकारात्मकता देने वाली मानी जाती है क्योंकि चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है। शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा की किरणों में खास तरह के लवण व विटामिन आ जाते हैं। पृथ्वी के पास होने पर इसकी किरणें सीधे जब खाद्य पदार्थों पर पड़ती हैं तो उनकी क्वालिटी में बढ़ोतरी हो जाती है।*

*🚩 शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुबह उठकर व्रत करके अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए। इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी का दीपक जलाकर, गंध पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए। ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।*

*🚩लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।*

*🚩 शरद पूनम की रात को क्या करें, क्या न करें ?*

*🚩 अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं । जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लेना ।*

*🚩इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।*

*🚩शरद पूर्णिमा की चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है ।*

*🚩 अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है । जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है । इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न होता है।*

*🚩 खीर को बनायें अमृतमय प्रसाद...*

*🚩खीर को रसराज कहते हैं । सीताजी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे ।*

*🚩खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धोकर खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्त्व भी उसमें आ जायेगा । खीर में इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पड़ेंगे । रात्रि 8 बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर 11 बजे के बाद भगवान को भोग लगा के प्रसादरूप में खा लेनी चाहिए । लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना । सुबह गर्म करके भी खा सकते हो ।*
*(खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी - इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती ।) यह खीर खाने से सालभर मनुष्य स्वथ्य रहता है ।*

*🚩स्वास्थ्य प्रयोग...*

*इस रात्रि में 3-4 घंटे तक बदन पर चन्द्रमा की किरणों को अच्छी तरह पड़ने दें ।*

*🚩दो पके सेवफल के टुकड़े करके शरद पूर्णिमा को रातभर चाँदनी में रखने से उनमें चन्द्रकिरणें और ओज के कण समा जाते हैं । सुबह खाली पेट सेवन करने से कुछ दिनों में स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक लाभकारी परिवर्तन होते हैं ।*

*🚩250 ग्राम दूध में 1-2 बादाम व 2-3 छुहारों के टुकड़े करके उबालें । फिर इस दूध को पतले सूती कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में 2-3 घंटे तक रख दें । यह दूध औषधीय गुणों से पुष्ट हो जायेगा । सुबह इस दूध को पी लें ।*

*🚩सोंठ, काली मिर्च और लौंग डालकर उबाला हुआ दूध चाँदनी रात में 2-3 घंटे रखकर पीने से बार-बार जुकाम नहीं होता, सिरदर्द में लाभ होता है ।*

*🚩तुलसी के 10-12 पत्ते एक कटोरी पानी में भिगोकर चाँदनी रात में 2-3 घंटे के लिए रख दें । फिर इन पत्तों को चबाकर खा लें व थोड़ा पानी पियें । बचे हुए पानी को छानकर एक-एक बूँद आँखों में डालें, नाभि में मलें तथा पैरों के तलुओं पर भी मलें । आँखों से धुँधला दिखना, बार-बार पानी आना आदि में इससे लाभ होता है । तुलसी के पानी की बूँदें चन्द्रकिरणों के संग मिलकर प्राकृतिक अमृत बन जाती हैं ।*

*नोट : दूध व तुलसी के सेवन में दो घंटे का अंतर रखें ।*

*🚩 भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, 'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।'*
*अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।* *(गीताः15.13)*

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03/05/2020

*ब्राह्ममुहूर्तावर उठण्याचे लाभ*

ब्राह्ममुहूर्त हा ३.४५ ते ५.३०
असा पावणे दोन तासाचा
असतो.
याला रात्रीचा चौथा प्रहर
अथवा उत्तररात्र असेही
म्हणतात.

या काळात अनेक गोष्टी
अशा ‌घडत असतात ज्या
दिवसभराच्या कामासाठी
लागणारी ऊर्जा देत असतात.

या मुहूर्तावर उठल्याने
आपणास एकाच वेळी
अनेक लाभ होतात.

१) पहिला लाभ म्हणजे
या काळात ओझोन (O३) हा वायू
पृथ्वीच्या वातावरणाच्या
सर्वात खालच्या थरात
जास्त प्रमाणात आलेला
असतो.
या ओझोनमध्ये मानवास
श्वसनासाठी आवश्यक
असणारा प्राणवायू
(आॅक्सिजन) मोठ्या
प्रमाणात असतो.

त्यामुळे या काळात उठून
उजवी नाकपुडी चालू
करून दीर्घ श्वसन केले
असता रक्तशुद्धी होते.

रक्तात प्राणवायूचे प्रमाण
वाढल्याने हिमोग्लोबिन
सुधारते. त्यामुळे ९० टक्के
रोगांपासून मुक्ती मिळते...

२) दुसरा लाभ असा की
या काळात मंद प्रकाश
असतो. डोळे उघडल्यावर
एकदम लख्ख प्रकाश
डोळ्यावर पडला तर काही
काळ आपणास काहीच
दिसत नाही. असे वारंवार
होत राहिले तर डोळ्यांचे
विकार जडतात व दृष्टी
क्षीण होऊ शकते.

तसे होऊ नये यासाठी आकाशात तारका असेपर्यंत उठावे.

३) तिसरा लाभ म्हणजे
या काळात पंचतत्त्वांपैकी
वायुतत्त्व जास्त प्रमाणात
कार्यरत असते व मानवी
शरीरातील अपानवायू
हा कार्यरत असतो.

हा अपानवायू मलनिःसारण
व शरीरशुद्धीचे कार्य करतो.

हा वायू कार्यरत असताना
मल बाहेर टाकण्याचे कार्य
कोणताही यत्न न करिता
सहजतेने होऊ शकते.

कुंथून प्रयत्न करावा लागल्यास
हळूहळू मूळव्याध होण्याची
शक्यता असते. त्यामुळे
मूळव्याध होऊ नये व
उत्तम शरीरशुद्धी व्हावी
यासाठी याच काळात मलनिःसारण करावे.

तसेच जैविक घड्याळाप्रमाणे या काळात मोठ्या आतड्यामध्ये
आपली ऊर्जा कार्यरत असते.

४) चौथा लाभ म्हणजे
आपल्या शरीरात
दिवसभरात जमा झालेली घाण
नऊ ठिकाणांहून
बाहेर पडत असते.

या नऊ ठिकाणांना
नवद्वार म्हणतात.

दोन डोळे, दोन नाकपुड्या,
दोन कान, एक तोंड, एक
शिश्नद्वार व एक गुदद्वार.

या नऊ ठिकाणी रात्री
शरीरातील घाण जमा होते.
त्या घाणीत अनेक जंतू ,
विषाणू असतात जे रोग
उत्पन्न करू शकतात.

या जंतू , विषाणूं फार मोठ्या
प्रमाणात वाढ होऊ शकते
व आपण रोगास बळी पडू
शकतो.

हे होऊ नये यासाठी
ब्राह्ममुहूर्तावर उठून
ही घाण शरीराबाहेर
काढून टाकली पाहिजे..

५) पाचवा लाभ म्हणजे
सूर्योदयाच्या आधी
ब्राह्ममुहूर्तावर स्नान
केल्यास त्वचेची रंध्रे
मोकळी होतात.

त्यामुळे शुद्ध हवा आत
शोषली जाऊन सर्व
अवयवांना शुद्ध प्राणवायू
मिळाल्याने संपूर्ण शरीर
दिवसभराच्या कामासाठी
ताजेतवाने होते.

दिवसभर काम केले तरी
आपण एकदम फ्रेश राहतो..

६) सहावा लाभ म्हणजे
या काळात मेंदूमधील
*स्मरणशक्ती* ची जी केंद्रे असतात
ती जागृत असतात.

या काळात *विद्याअध्ययन*
केल्यास इतर वेळेपेक्षा
जास्त काळ स्मरणात राहते.

तसेच या काळात *ॐकार*
जप केल्यास मेंदूमधील
स्मरणशक्तीची केंद्रे तसेच
इतर शक्ती केंद्रे , नित्य
स्वरूपात जागृत होतात..

७) सातवा लाभ म्हणजे
सूर्योदयावेळी अनेक
प्रकारच्या आरोग्यदायी
लहरी वातावरणात
सूर्यकिरणांद्वारे
येत असतात.
त्या आपल्या त्वचेद्वारे
शोषल्या जातात
पण त्वचेची रंध्रे मोकळी
असतील तरच.

त्यासाठी ब्राह्ममुहूर्तावर उठून
शरीरशुद्धी केली पाहिजे..

८) आठवा लाभ म्हणजे
या काळात आपण *ॐकार* साधना केल्यास
*सप्तचक्रे* जागृत होतात,

कारण या मुहूर्तावर
वातावरण शुद्ध असल्याने
जास्त प्रमाणात कंपने
निर्माण होतात व
या कंपनांद्वारे
कुंडलिनी शक्ती जागृती होते..

९) नववा लाभ म्हणजे
या ब्राह्ममुहूर्तावर
अनेक पुण्यात्मे, सिद्धात्मे
हे परलोकातून पृथ्वीतलावर
आलेले असतात.

या सिद्धात्म्यांना आपण
साधनेद्वारे भेटू शकतो व
उत्तम मार्गदर्शन
मिळवू शकतो.

असे अनेक लाभ
आपण एकाच वेळेस
ब्राह्ममुहूर्तावर उठून
साधना, स्नानादी कर्मे
केल्याने मिळवू शकतो...

*।। जय श्रीगुरुदेवदत्त ।।*
🕉🌷🙏🏼

20/04/2020

🌷 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌷

🌹 *ग्रीष्म ऋतु विशेष*

*१. धनिया, जीरा, आँवला, व मिश्री समभाग मिलाकर पीसकर रखें | दो चम्मच मिश्रण २०० मि.ली. पानी में भिगोकर रख दें | दो घंटे बाद हाथ से मसलकर छान लें और सेवन करें |*

*२. रात्रि में १ से २ चम्मच त्रिफला धृत, दूध में मिलाकर पियें |*

*३. सत्तू में ठंडा पानी, घी व मिश्री मिलाकर लें |*

*४. जीरा व गुड मिलाकर बनाया गया कच्चे आम का पना भी खूब लाभदायी है |*

*५. मधुर, अम्ल व लवण रसयुक्त पदार्थ अधिक लें | कड़वे कसैले व तीखे पदार्थ अत्यल्प मात्रा में लें |*

*६. ग्रीष्म में दालों का उपयोग बहुत कम करना चाहिए | मूँग की पतली दाल कभी-कभी ले सकते हैं |*

*७. ग्रीष्म की दाहकता व गर्मिजन्य रोगों से प्याज शरीर की रक्षा करता है | इसे अधिक मात्रा में न लें | मात्र लहसुन वर्जित है |*

*८. ग्रीष्म में दही व छाछ का उपयोग नहीं करना चाहिए | यदि छाछ पीनी ही हो तो जीरा व मिश्री मिला के ताजी व कम मात्रा में ले सकते हैं |*

*९. सप्ताह में एकाध दिन श्रीखंड का सेवन पुष्टि, शक्ति व तृप्ति देनेवाला है |*

*१०. मुलतानी मिट्टी लगाकर स्नान करें | पीने के पानी में खस या गुलाब डालकर रखें |*

🌹 *लोक कल्याण सेतु - April ' 2012*

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Near Trikoni Baag, Wagh Building
Amalner
425401

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