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"मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है  #कलौंजी"कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है...
05/01/2026

"मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है #कलौंजी"
कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है
कैसे करें इसका सेवन.....?
कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें
पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ
दूध में कलौंजी उबालें
ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ
कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें
ये किन-किन रोगों में सहायक है...?
टाइप-2 #डायबिटीज:
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है
#मिर्गी:
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है
#उच्चरक्तचाप:
100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच
कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है
यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए
#गंजापन:
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं
#त्वचाविकार:
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं
#लकवा:
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से और नाभि मै डालने लकवा रोग ठीक होता है
कान की सूजन, #बहरापन:
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है इससे बहरापन में भी लाभ होता है
#सर्दी-जुकाम:
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें इससे सर्दी-जुकाम
ठीक होता है यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है
#अस्थमा कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है
#छींके:
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है
#पेटकेकीडे़:
दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं
#प्रसवकीपीड़ा:
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है
#पोलियों का रोग:
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें
इससे पोलियों का रोग ठीक होता है
#मुँहासे:
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं
#स्फूर्ति:
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है
#गठिया:
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है
#जोड़ोंकादर्द:
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है
#आँखों के सभी रोग:
आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि
इस तरह के आँखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें
इससे आँखों के सभी रोग ठीक होते हैं आँखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं इससे आँखों के रोग समाप्त होते हैं रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मांस मछली नहीं खाना चाहिए
#स्नायुविक व मानसिक तनाव:
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है
#गांठ:
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है
#मलेरियाकाबुखार:
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है
#स्वप्नदोष:
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें इससे स्वप्नदोष दूर होता है प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें
#कब्ज:
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है
#खूनकीकमी:
एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए
#पेटदर्द:
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म
पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है
#सिरदर्द:
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है
कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें इससे सिर का दर्द दूर होता है
कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है
#उल्टी:
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है
#हार्निया:
तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है
#मिर्गीकेदौरें:
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए
#पीलिया:
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है
पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए
#कैंसरकारोग:
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है
इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए
#दांत:
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है
आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं
#नींद:
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है
#मासिकधर्म:
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है
जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है
मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है
यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए
इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है
#गर्भवती महिलाओं को वर्जित:
गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है
#स्तनोंकाआकार:
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है
#स्तनोंमेंदूध:
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है
स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की #सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है
#बाल लम्बे व घने:
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने होते हैं
#बेरी-बेरी रोग:
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है
#भूखकाअधिकलगना:
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें इससे भूख का अधिक लगना कम होता है
#नपुंसकता:
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है
#खाज-खुजली:
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है
#नाड़ी का छूटना:
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है
#हिचकी:
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है
या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है और यदि
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।
#स्मरणशक्ति:
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है
#पेटकीगैस:
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है
#पेशाबकीजलन:
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है
🍃जोशी आयुर्वेदा अमरगढ़🍃
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🌿गिलोय🌿 एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं क...
08/10/2025

🌿गिलोय🌿
एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है।
कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।
🌿इसका वानस्पिक नाम( Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं।
🌿आइए_जानते_हैं_गिलोय_के_फायदे…....
🌿गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है,बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।
🌿ठीक करती है बुखार
अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।
🌿गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए
गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।
🌿पाचन शक्ति बढ़ाती है
यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।
🌿कम करती है स्ट्रेस
गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।
🌿बढ़ाती है आंखों की रोशनी
गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।
🌿अस्थमा में भी फायदेमंद
मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।
🌿गठिया में मिलेगा आराम
गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।
🌿अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन
भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।
🌿बाहर निकलेगा कान का मैल
कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।
🌿कम होगी पेट की चर्बी
गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।
🌿खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय
गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….
🌿जवां रखती है गिलोय
गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।
🌿बालों की समस्या भी होगी दूर
अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

🌿गिलोय का प्रयोग ऐसे करें :--
अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…
🌿गिलोय जूस
गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।
🌿काढ़ा
चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।
🌿पाउडर
यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।
🌿गिलोय वटी
बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।
साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम
अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।खांड के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।
🌿साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान
वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।

🌿गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दें।
मेरे घर में नीम के पेड़ पर लगी हैं गिलोय आप सभी भी अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है।

गिलोय का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।
🌿जोशी आयुर्वेदा अमरगढ़🌿
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🌿भूमि/ #भुईं_आँवला🌿भुई आंवला का पौधा लगभग एक बालिश्त से एक फुट तक ऊंचा होता है और गीली ज़मीन में सर्वत्र पाया जाता है, व...
04/10/2025

🌿भूमि/ #भुईं_आँवला🌿

भुई आंवला का पौधा लगभग एक बालिश्त से एक फुट तक ऊंचा होता है और गीली ज़मीन में सर्वत्र पाया जाता है, विशेष कर वर्षाकाल में यह पौधा बहुतायत से पैदा होता है, शीतकाल में इसमें छोटे छोटे फल लगते हैं जो आंवले की शक्ल के होते हैं और इसके पत्ते भी आंवले के पत्तों जैसे होते हैं इसीलिए इसे भुई आंवला कहा जाता है। इस पौधे में फल भारी मात्रा में लगते हैं इसलिए इसे बहुफला भी कहते हैं। यह पौधा ग्रीष्मकाल में सूख जाता है। इसलिए इसके फल का संग्रह कार्तिक मास में कर लियाñ जाता है। वैसे यह वनस्पति जड़ी बूटी बेचने वाली दुकान पर मिलती है।

अलग-अलग भाषाओं में इसके नाम

हिन्दी - भुई आंवला

मराठी - भुई आंवली

गुजराती - भोंय आंवली

बंगला - भुई आंवला

तैलुगु - नेलनेल्लि

तामिल - कीलकायनेल्लि

कन्नड़ - आर्सनेल्लि

उर्दू - भुई आंवला

लैटिन - फालेन्थस निरुरी

(Phylanthus niruri.)

भुई आंवला के #औषधीय_गुण :

इसका फल वातकारक, कड़वा, कसैला, मधुर, शीतल और प्यास, खांसी, पित्त, रक्तविकार, कफ, खुजली और घाव को ठीक करने वाला है।

#सेवन_की_मात्रा :

तरल रस रूप में 1-2 छोटे चम्मच और चूर्ण रूप में एक छोटा चम्मच उचित अनुपान के साथ।

भुई आंवला के फायदे और उपयोग :

इसका उपयोग आयुर्वेद में प्राचीन काल से एण्टीबायोटिक दवा के रूप में किया जाता है। इस वनस्पति से कई आयुर्वेदिक औषधियां बनाई जाती हैं। बुखार के बाद इसका सेवन रोगी को कराने से, बुखार के कारण आई कमज़ोरी दूर होती है। कफ व पित्त शामक होने से इसका उपयोग कफ और पित्तजन्य रोगों की चिकित्सा में किया जाता है।

गत दिनों जब चिकनगुनिया फैला था तब इस वनस्पति के उपयोग से रोगियों को बहुत लाभ हुआ था। रक्त विकार, चर्मरोग, श्वास-खांसी, योनिदोष, प्रमेह, ज्वर, विषमज्वर आदि रोगों की चिकित्सा में इसका उपयोग लाभप्रद सिद्ध होता है। आवश्यकता के अनुसार इसके पांचों अंगों का उपयोग किया जाता है।

#घरेलू_इलाज में कैसे सेवन करें

#पेचिश में इसके फायदे : इसे पेचिश और डीसेण्ट्री (Dysentery) भी कहते हैं। बार-बार थोड़ा-थोड़ा मल विसर्जन (दस्त) होना इस रोग का मुख्य लक्षण है। इसके फल का चूर्ण का काढ़ा बना कर दिन में तीन बार लाभ न होने तक पीना चाहिए।

2. #पीलिया को दूर करने सहायक : इसे पीलिया और जाण्डिस (Jaundice) भी कहते हैं। इसके पौधे की जड़ को दूध के साथ पीस छान कर 1-1 चम्मच रोगी को सुबह शाम पिलाना चाहिए। दूसरी विधि-डण्ठल सहित इसके पत्तों को कूट पीस कर चूर्ण कर लें। एक चम्मच चूर्ण एक गिलास दूध में डाल कर उबालें फिर उतार कर ठण्डा कर लें। इसे बिना शक्कर या मीठा मिलाए सुबह खाली पेट रोगी को पिला दें। छः दिन तक सुबह सिर्फ एक बार पिला कर सातवें दिन रोगी के खून की जांच करा लें। यह प्रयोग निरापद रूप से गुणकारी है। रोगी को परहेज़ का सख्ती से पालन करते हुए तैल, खटाई, तले पदार्थ, मिर्च मसाले, मलाई दूध व दही व भारी चिकनाई युक्त पदार्थों का सेवन न करके गन्ने का रस, फलों का रस, छाछ व उबले हुए आहार का सेवन करना चाहिए।

3. #शीत_ज्वर में इसके फायदे : इसे फ्लू (इन्फ्लुएन्ज़ा) । भी कहते हैं। भुई आंवला के पंचांग का काढ़ा बना कर, 4-4 चम्मच काढ़ा दिन में तीन बार सुबह दोपहर शाम रोगी को पिलाना चाहिए। इससे पसीना आएगा और बुखार उतर जाएगा, मल शुद्धि होगी और नींद अच्छी आएगी। इस काढ़े के सेवन से बुखार आना भी बन्द होता है, यकृत व प्लीहा में वृद्धि हो तो कम होती है और जीर्ण ज्वर भी दूर होता है।

4. #सुज़ाक ( #गोनोरिया) को दूर करने वाला : यह एक गुप्त रोग है जिसे मेडिकल भाषा में गोनोरिया (Gonorrhoea) कहते हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी को भुई आंवला के चूर्ण का काढ़ा बना कर 4 चम्मच काढ़ा और 1 चम्मच गोघृत मिला कर सुबह | शाम पिलाने से मल शुद्धि होती है, मूत्राशय का शोधन होता है और मूत्र की जलन शान्त होती है।

5. #सूजन में लाभदायक औषधि : शोथ को सूजन भी कहते हैं। भुई आंवला के पंचांग का फाण्ट बना कर सुबह शाम पीने से, मूत्र स्राव बढ़ता है और सूजन दूर हो जाती है।

#फाण्ट_बनाने_की_विधि - चूर्ण की मात्रा से चार गुनी मात्रा में जल लेकर शाम को इसमें चूर्ण डाल कर ढक कर रख दें। सुबह इसे उबालें। जब जल आधा शेष बचे | तब उतार कर ठण्डा कर लें फिर छान कर उपयोग में ल

6. #आंखें_लाल होने पर इसके लाभ : इसे मेडिकल भाषा में #कन्जक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) कहते हैं। इस रोग में आंखें लाल हो जाती हैं। हलकी सी सूज जाती हैं और बहुत दर्द होता है। आंखें खोलने में कष्ट होता है। इसकी चिकित्सा के लिए भुई आंवला के पंचांग के रस को तैल में मिला कर लेप बना लें। इस लेप में रुई का फाहा भिगो कर आंखें बन्द कर, पलकों पर यह फाहा रख कर लेटे रहें। इस उपाय से यह व्याधि दूर हो जाती है।

7. #लिवर_की कमज़ोरी दूर करने में फायदेमंद : यकृत (लिवर) की कमज़ोरी दूर करने के लिए इसका चूर्ण एक चम्मच मात्रा में, सुबह खाली पेट, एक गिलास छाछ के साथ पीने से यकृत को बल मिलता है।

8. #भूख_कम_लगना का इलाज : भूख कम लगती हो तो सुबह भुई आंवला 5-6 पत्तियां, खाली पेट, चबा चबा कर खाने से भूख खुल कर लगने लगती है।

9. #घाव के उपचार में इसके फायदे : इस पौधे का दूधिया रस घाव पर लगाने से घाव भर जाता है।

10. #मूत्र रोग में लाभकारी : इसके पंचांग का काढ़ा बना कर सुबह खाली पेट, एक कप काढ़ा, एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से पेशाब खुल कर होता है।

11. #जलोदर के इलाज में इसके फायदे : इसके पंचांग का चूर्ण 10 ग्राम, 4 कप पानी में उबालें। जब पानी एक कप बचे तब उतार कर छान लें। इस काढ़े को सुबह खाली पेट पीने से पेशाब की मात्रा बढ़ती है और जलोदर रोग को दूर करने में मदद मिलती है।

12. अत्यार्तव में इसके लाभ : मासिक ऋतुस्राव

अधिक मात्रा में होना अत्यार्तव (Menorrhagia) कहलाता है। इस व्याधि में भुई आंवला के बीज या पंचांग को पीस कर ठण्डाई की तरह घोट कर पीस छान कर, रुग्णा महिला को सुबह शाम पिलाने से इस व्याधि को दूर करने में सहायता मिलती है।

भुई आंवला के #नुकसान :

@गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चिकित्सक की सलाह बगैर इसका सेवन नही करना चाहिये ।

#मधुमेह के रोगी इसके उपयोग से पहले अपने डॉक्टर से बात करें ।

#सावधान : दवा, उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें

🌿जोशी आयुर्वैदा अमरगढ़🌿
🍃वैद्य प्रिंस जोशी 🍃
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🌿🌿त्रिकटु🌿🌿               आयुर्वेद का चमत्कारी फार्मूलात्रिकटु का मतलब ही है – तीन तीखे मसाले।👉 सोंठ (सूखी अदरक)👉 काली म...
02/09/2025

🌿🌿त्रिकटु🌿🌿
आयुर्वेद का चमत्कारी फार्मूला

त्रिकटु का मतलब ही है – तीन तीखे मसाले।
👉 सोंठ (सूखी अदरक)
👉 काली मिर्च
👉 पिप्पली (लंबी मिर्च)

आयुर्वेद में इसे “उष्ण वीर्य” (गर्म प्रकृति वाला) माना गया है।
यानि ये शरीर की पाचन शक्ति को जगाता है, चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को तेज करता है और शरीर के ज़हरीले तत्वों (आम दोष) को बाहर निकालता है।

🔥 त्रिकटु के अद्भुत फायदे

✅ पाचन तंत्र का रखवाला
भूख बढ़ाए, गैस-अपच दूर करे, आंतों से गंदगी (आम) निकाले और पेट फूलने की समस्या में रामबाण।

✅ वजन घटाने में मददगार
मेटाबॉलिज्म तेज करता है और चर्बी गलाने की प्रक्रिया को तेज़ कर देता है।

✅ सांस की बीमारियों का दुश्मन
खांसी, जुकाम, बलगम, अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस में राहत।

✅ इम्यूनिटी बूस्टर
मौसमी सर्दी-जुकाम, वायरल और फ्लू से बचाने वाला सुरक्षा कवच।

✅ जोड़ों और मांसपेशियों का दोस्त
गर्मी और सूजन कम करके गठिया व दर्द में राहत।

✅ त्वचा की सफाई करने वाला
मुंहासे और स्किन इन्फेक्शन में फायदेमंद।

✅ डिटॉक्स करने वाला
लीवर और किडनी को साफ रखकर शरीर की अशुद्धियां बाहर निकालता है।

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🌱 त्रिकटु के सुपरहिट नुस्खे

1️⃣ त्रिकटु + त्रिफला
👉 कब्ज, पाचन और डिटॉक्स के लिए
🔹 1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी में
🌙 रात को सोने से पहले लें।

2️⃣ त्रिकटु + गिलोय
👉 इम्यूनिटी और बुखार के लिए
🔹 1/4 चम्मच त्रिकटु + 1 चम्मच गिलोय रस + शहद
🌞 सुबह खाली पेट लें।

3️⃣ त्रिकटु + अश्वगंधा
👉 कमजोरी और तनाव दूर करने के लिए
🔹 1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच अश्वगंधा गर्म दूध में
🌙 रात को सोने से पहले पिएं।

4️⃣ त्रिकटु + तुलसी
👉 खांसी-जुकाम और अस्थमा के लिए
🔹 तुलसी की पत्तियां उबालकर काढ़ा बनाएं, उसमें त्रिकटु + शहद मिलाएं।
🌞 सुबह-शाम लें।

5️⃣ त्रिकटु + हल्दी
👉 जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए
🔹 1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच हल्दी दूध/पानी में
🌙 रात को लें।

6️⃣ त्रिकटु + शहद + नींबू
👉 वजन घटाने और डिटॉक्स के लिए
🔹 त्रिकटु + नींबू रस + शहद गुनगुने पानी में
🌞 सुबह खाली पेट पिएं।

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⚖️ सही मात्रा और सावधानियां

📌 मात्रा: 1/4 से 1/2 चम्मच, दिन में 1–2 बार
📌 समय: सुबह खाली पेट या भोजन से पहले

🚫 पित्त प्रकृति वाले लोग, गर्भवती महिलाएं और ज़्यादा गर्मी वाले शरीर वालों को बिना वैद्य की सलाह के न लें।
🚫 अधिक मात्रा लेने पर एसिडिटी, जलन या दस्त हो सकते हैं।

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✨ निष्कर्ष

त्रिकटु छोटा पैकेट बड़ा धमाका है।
यह पाचन, वजन, श्वसन और इम्यूनिटी – हर क्षेत्र में कमाल दिखाता है।
और जब इसे त्रिफला, गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी या शहद के साथ मिलाया जाता है – तो इसका असर और कई गुना बढ़ जाता है।

👉 लेकिन याद रखिए –
"औषधि उतनी ही वरदान है, जितनी सही मात्रा में ली जाए।" 🙏

🌿जोशी आयुर्वेदा अमरगढ़🌿
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🌿🌿शिवलिंगी🌿🌿बच्चा होने में प्रॉब्लम आ रही है शुक्राणुओं की कमी है या पत्नी में अंडे में प्रॉब्लम आ रही है कनवे नहीं कर प...
01/09/2025

🌿🌿शिवलिंगी🌿🌿
बच्चा होने में प्रॉब्लम आ रही है शुक्राणुओं की कमी है या पत्नी में अंडे में प्रॉब्लम आ रही है कनवे नहीं कर पा रहे हैं तो यह पोस्ट आपके लिए है

शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है।
शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,,

गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:
प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।

कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं।

जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े वाले गाय के दूध के साथ सेवन करना उपयुक्त होता है,और जिन्हें पुत्री प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़ी वाली गाय के दूध के साथ सेवन करना उत्तम रहता है।

जिन महिलाओं को गर्भ नहीं ठहरता हो अर्थात बार-बार गर्भ गिर जाता हो उन लोगों को मासिक धर्म के बाद पहले दिन से एक शिवलिंगी बीज का शुरुआत करते हुए प्रत्येक दिन एक बी बढ़ते जाएं और इस तरह 21 दिन करने से बांझ औरत मां बन जाती है और अगर बार-बार गर्भपात होता हो तो वह भी ठीक होकर गर्भ ठहर जाता है।

शिवलिंगी बीज आधा ग्राम और पुत्र जीवक एक ग्राम की मात्रा में लेकर के पाउडर बनाकर इसी के बराबर धागे वाली मिश्री मिक्स करके सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से संतान की प्राप्ति होती है और बांझपन दूर हो जाता है।

बुखार में फायदेमंद,,,,,,
डिलीवरी के बाद जिन महिलाओं को बुखार आ जाता हो उसमें यह बहुत ही कारगर होता है शिवलिंगी के पंचांग के चूर्ण का 2 से 4 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार उतर जाता है।

शिवलिंगी के बीजों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय में आई हुई सुजन तथा गर्भाशय का दर्द भी खत्म हो जाता है।

ल्यूकोरिया में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज 50 ग्राम
रसवंती 50 ग्राम
मोचरस 50 ग्राम
नागकेसर 50 ग्राम
धागे वाली मिश्री 100 ग्राम
सबको लेकर के कूट पीसकर पाउडर बना कर रख ले। सुबह शाम 5/5 ग्राम के करीब खाना खाने के पश्चात सेवन करने से ल्यूकोरिया अर्थात सफेद पानी का आना बंद हो जाता है।

▪️कुष्ठ रोग में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज के रस में लाल चंदन घिसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कुष्ठ रोग नष्ट होने लगता है।

▪️ शिवलिंगी बीज शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाता है: ......
जिन पुरुषों को वीर्य में शुक्राणु की कमी हो जाती है वह लोग संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। उन लोगों के लिए शिवलिंगी का बीज बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए लेना होगा
शिवलिंगी बीज 300 ग्राम
शतावरी 200 ग्राम
सफेद मूसली 200 ग्राम
शुद्ध कौंच बीज 200 ग्राम
अश्वगंधा 200 ग्राम
बिनोली गिरी 200 ग्राम
सभी को कूट पीसकर पाउडर बनाकर रख लें 5/5 ग्राम सुबह शाम दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करने से शुक्राणुओं के संख्या में वृद्धि होने लगती है और यौन रोग से संबंधित सारी समस्याएं दूर हो जाती है।

गर्भ धारण करने के ५२ दिन से पहले ही सुबह सुबह सूर्योदय से पहले पूर्व की ओर मुंह करके बछड़े ्वाली गाय के कच्चे दूध से आधा चम्मच पिसी हुई शिवलिंगी ली जाय एक सप्ताह ऐसा करें तो पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी ,,,

नोट:- .......
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लें।

इस तरह की हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए हमें फॉलो करें!
धन्यवाद!।।।

शिवलिंगी एक बेल (लता) है जो बरसात के मौसम में पाई जाती है।
इसका पौधा बेल जैसा होता है, जिसमें पतली, धारीदार और रेशेदार शाखाएं होती हैं। पत्तियां करेले के पत्तों जैसी दिखती हैं, ऊपर से हरी और खुरदरी, नीचे से चिकनी। फल गोल, चिकने और आठ सफेद धारियों वाले होते हैं। कच्चे फल हरे होते हैं, पकने पर लाल हो जाते हैं। बीज भूरे रंग के और शिवलिंग के आकार के होते हैं।।

पौधे की विशेषताएं:
शिवलिंगी एक बेल की तरह होती है, जो दूसरी चीजों पर चढ़ती है.
तना:
तना चिकना और चमकदार होता है.
पत्तियां:
पत्तियां करेले के पत्तों की तरह दिखती हैं, ऊपर से खुरदरी और नीचे से चिकनी.
फूल:
फूल छोटे और हरे-पीले रंग के होते हैं.
फल:
फल गोल, चिकने और आठ सफेद धारियों वाले होते हैं। कच्चे फल हरे और पकने पर लाल होते हैं.
बीज:
बीज भूरे रंग के और शिवलिंग के आकार के होते हैं.।।

यह पौधा भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में।

पौधे का उपयोग:
औषधीय:
शिवलिंगी के बीज, फल, पत्तियां और जड़ें औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाती हैं.
संतान प्राप्ति:
कुछ लोग इसका उपयोग संतान प्राप्ति के लिए करते हैं, खासकर शिवलिंगी के बीज।
अन्य उपयोग:
इसका उपयोग बुखार, चर्म रोगों और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए भी किया जाता है।

ध्यान दें: किसी भी औषधि का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना उचित है।

आप शिवलिंगी का पौधा निम्नलिखित स्थानों पर ढूंढ सकते हैं।

जंगलों में:
यह पौधा आमतौर पर जंगलों में पाया जाता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में.
सड़क के किनारे:
बारिश के बाद, आप इसे सड़क के किनारे या खुले, झाड़ीदार क्षेत्रों में भी देख सकते हैं।

खेती वाले क्षेत्रों में:
कुछ स्थानों पर, इसकी खेती भी की जाती है.

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🌿🌿महिलाओं की सभी समस्याओं का समाधान है ये अकेला पौधा ।।🌿🌿खाली पेट 20-30ml पंचांग का स्वरस पीने से लगभग सभी प्रकार के लाभ...
30/08/2025

🌿🌿महिलाओं की सभी समस्याओं का समाधान है ये अकेला पौधा ।।🌿🌿

खाली पेट 20-30ml पंचांग का स्वरस पीने से लगभग सभी प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं या पांच ग्राम पंचांग चूर्ण या दस ग्राम पंचांग का काढ़ा उबालकर छानकर पिएं

एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम 'अचिरांथिस अस्पेरा' (ACHYRANTHES ASPERA) है। हिन्दी में इसे 🌿चिरचिटा', लटजीरा', चिरचिरा ' 🌿आदि नामों से जाना जाता है।इसे लहचिचरा भी कहा जाता है।
सफेद और लाल दोनों प्रकार के अपामार्ग की मंजरियां पत्तों के डण्ठलों के बीच से निकलती हैं। ये लंबे, कर्कश, कंटीली-सी होती है। इनमें ही सूक्ष्म और कांटे-युक्त बीज होते हैं। ये बीज हल्के काले रंग के छोटे चावल के दाने जैसे होते हैं। ये स्वाद में कुछ तीखे होते हैं। इसके फूल छोटे, कुछ लाल हरे या बैंगनी रंग के होते हैं। लाल अपामार्ग की डण्डियां और मञ्जरियां कुछ लाल रंग की होती हैं। इसके पत्तों पर लाल-लाल सूक्ष्म दाग होते हैं।

ये एक गज़ब का डाइयुरेटिक और डिटाक्सीफायर है,,,,
आप इसके इस्तेमाल से 1 महीने के भीतर ही अपना वज़न कम कर सकते हैं। अपामार्ग के पत्ते आपके शरीर से ज़हरीले पदार्थो को बाहर निकालते हैं और आपके शरीर के अन्दर फ़ालतू पानी को भी बाहर निकालते हैं। किडनी तथा लिंफेटिक सिस्टम की विषाक्तता को डिटॉक्स करने के लिए अपामार्ग जबरदस्त औषधि है

इसका उपयोग करने से आपका पेट भरा भरा हुआ सा लगता हैं, जिससे आपको भूख नहीं लगती हैं और आपका वज़न बहुत ही जल्दी कम होने लगता हैं। इसके सेवन से आपको बार-बार पेशाब लगने लगता हैं, लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं हैं। पेशाब के जरिये यह आपके शरीर के अंदरूनी सफाई करके विषैले टोक्सिन्स को बाहर निकालता हैं

पुरूषों के लिए भी ये महा गुणकारी है अपामार्ग चूर्ण 8 ग्राम पानी में पीसकर छानकर 5 ग्राम शहद और 250 मिली दूध के साथ पीने से शीघ्रपतन नहीं होता है
अपामार्ग के 5-8 ग्राम बीजों का चूर्ण बराबर मिश्री के साथ दिन में दो बार खाने से जो बार बार भूख लगती है वो शांत हो जाती है यानी भस्मिक रोग शांत हो जाता है

इसके बीजों की खीर बनाकर खाने से कई दिन तक भूख नहीं लगती और शरीर कमजोर नहीं होता है। साथ ही #मोटापा दूर करने में मददगार होता है।
इसमें लिपोमा और अन्य गांठों को पिघलाने के भी जबरदस्त गुण पाए जाते हैं
लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में अपामार्ग क्षार, सज्जी क्षार और जवाक्षार को लेकर पानी में पीसकर सूजन वाली गांठ पर लेप की तरह सेलगाने से सूजन दूर हो जाती है।
इस के रस में रूई को डुबाकर दांतों में लगाने से दांतों का दर्द कम होता है।
इसकी ताजी जड़ से दातून करने से भी दांतों का दर्द ठीक होता है। साथ ही दांतों की सफाई दातों का हिलना, मसूड़ों की कमजोरी और मुंह की बदबू भी दूर होती है।

अपामार्ग के पंचांग का काढ़ा लगभग 14 से 28 मिलीलीटर दिन में 3 बार सेवन करने से कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।

अपामार्ग का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की
मात्रा में लेकर पीने से जलोदर (पेट में पानी भरना) की सूजन कम होकर समाप्त हो जाती है।
अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में पीस लें। इसे घोलकर पिलाने से पथरी की बीमारी में बहुत लाभ होता है। यह औषधि किडनी की पथरी को टुकडे-टुकड़े करके शरीर से बाहर निकाल देती है। किडनी में दर्द के लिए यह औषधि बहुत काम करती है।

*महिलाओं के लिए वरदान है अपामार्ग *
अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म विकार ठीक होता है।
अपामार्ग की जड़ के रस से रूई को भिगोएं। इसे योनि में रखने से मासिक धर्म की रुकावट खत्म होती है।
अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते और 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। अब इसे गाय के दूध में मिला लें। इसमें ही 20 मिली या इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाने से मासिक धर्म के दौरान अधिक खून बहने की परेशानी में लाभ होता है। इसे रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें।
अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव की समस्या ठीक होती है।
सिस्ट और फाइब्रॉयड के इलाज में अपामार्ग के जबरदस्त फायदे होते हैं। अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते एवं 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। इसे गाय के 20 मिली दूध में मिलाकर पिलाएँ। इसमें इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाएं। यह प्रयोग रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें। इससे गर्भाशय में गांठ (सिस्ट फाइब्रॉयड ) की बीमारी ठीक हो जाती है।
ल्यूकोरिया का इलाज करने के लिए अपामार्ग का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हैं। अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से ल्यूकोरिया ठीक होता है।

इसके अलावा इसके तंत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण प्रयोग हैं
प्रसव पीड़ा प्रारम्भ होने से पहले अपामार्ग के जड़ को एक धागे में बांधकर कमर में बांधने से प्रसव सुखपूर्वक होता है, परंतु प्रसव होते ही उसे तुरंत हटा लेना चाहिए।

इसे वज्र दन्ती भी कहते हैं। इसकी जड़ से दातून करने से दांतों की जड़ें मजबूत और दाँत मोती की तरह चमकते हैं। पायरिया मसूड़ों दांतों की कमजोरियां और सड़न हटाने में चमत्कारिक रूप से प्रभावी है
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फोटो गूगल से लिए गए है ।।।

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