Himalayan Ayurvedic Products

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03/02/2022

किडनी को सेहतमंद रखने के लिए ये टिप्स आएंगी आपके काम

हमारा शरीर एक मशीन की तरह है और इसके हर अंग का एक अहम रोल है। किडनी शरीर के बहुत जरूरी अंगों में से एक है जो शरीर से पानी को फिल्टर करने और वेस्ट प्रोडक्ट्स निकालने का काम करती है। किडनी की समस्या अगर होने लगे तो परेशानी बढ़ जाती है। किडनी फेलियर और डायलिसिस तक की नौबत आने लगती है। पर किडनी को ठीक रखने के लिए किस तरह के टिप्स फॉलो किए जा सकते हैं?
डायटीशियन और होलिस्टिक न्यूट्रिशनिस्ट और डाइट पोडियम की फाउंडर शिखा महाजन से हमने बात की और इस बारे में और जानने की कोशिश की। शिखा जी ने हमें ठीक तरह से इसके बारे में बताया कि आखिर किडनी की बीमारी शुरू होती है तो कैसे लक्षण दिखते हैं और कैसे किडनी को हेल्दी रखने के लिए कुछ टिप्स फॉलो की जा सकती हैं।
किडनी की बीमारी के लक्षण-
अगर किडनी की बीमारी शुरू हो रही है तो हमारा शरीर हमें कई तरह के लक्षण दिखाता है। जैसे-

- किडनी की बीमारी शुरू होते ही स्किन पर असर दिखने लगता है। स्किन बहुत ड्राई, खुजली वाली, क्रैक्स और स्केल्स वाली बन जाती है।
- खुजली वाले स्ट्रेच मार्क्स हो सकते हैं।
- स्किन का रंग ज्यादा सफेद दिखने लगता है।
- शरीर में कई तरह के मिनरल्स और विटामिन की कमी होने लगेगी।
- नाखूनों में सफेद बैंड्स या स्पॉट्स दिखने लगते हैं।
- नाखून काफी कमजोर और कच्चे होने लगते हैं।
- हाथों और पैरों के तलवों में ज्यादा सूजन दिखने लगती है।
- आपको पेट के निचले हिस्से और कमर में काफी ज्यादा दर्द होने लगेगा।
- यूरिन करने में जलन और परेशानी हो सकती है।
अब बात करते हैं उन टिप्स की जो आपकी परेशानी को थोड़ा कम कर सकते हैं।

इसे जरूर पढ़ें- किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में बैलेंस डाइट के साथ ये 1 फॉर्मूला भी है कारगर

06/12/2021

शरीर को डिटॉक्स करने के लिए किए जा सकते हैं ये 5 तरह के उपवास

अगर आपको अपने शरीर को डिटॉक्स करना है तो उपवास रखना एक अच्छा तरीका हो सकता है। जानिए किस तरह से आप रख सकते हैं उपवास।

उपवास को हमेशा भारत में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। उपवास करने से ना सिर्फ हमारे खाने-पीने की आदत पर कंट्रोल रहता है बल्कि ये वजन को नियंत्रित करने के लिए भी जरूरी है। बड़े-बड़े योगी और ऋषि मुनि भी उपवास के महत्व को बताते हैं। अगर साइंस और डाइट एक्सपर्ट्स की बात करें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग को भी अब ग्लोबली महत्व मिलने लगा है। कई रिसर्च भी इस लिए की गई हैं जो बताती हैं कि उपवास कितना फायदेमंद साबित हो सकता है।
उपवास को करने के नियम और तरीके कई हो सकते हैं। उपवास शरीर को डिटॉक्स करता है और इस कारण आपको कभी ना कभी इसे करना जरूर चाहिए पर लोग उपवास का मतलब ही कुछ और निकाल लेते हैं। यहां उपवास का मतलब साबूदाना वड़ा और कुट्टू के आटे का डोसा खाने से नहीं बल्कि अपने शरीर को डिटॉक्स करने से है।

उपवास रखने के लिए नियम का पालन करना जरूरी होता है। आप अपने शरीर को डिटॉक्स करने के लिए कई तरह से इसे कर सकते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसार ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उपवास के बारे में कुछ जरूरी जानकारी शेयर की है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर बताया है कि वो हर शनिवार उपवास रखती हैं और ये फिजिकल लेवल पर काफी अच्छा होता है।
उपवास के क्या हैं फायदे?
दिक्षा भावसार के मुताबिक ये हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को वो जरूरी राहत देता है जिसकी उसे जरूरत है। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम रात में सोते हैं जिससे हमारा शरीर काफी राहत भरा रहे। हमारी आंतों को हमेशा फास्टिंग की जरूरत होती है और ये अच्छा होगा अगर आप हफ्ते या 15 दिन में एक बार उपवास रख लिया करें।

उपवास रखने से शरीर में हीलिंग एक्टिव होती है
ये शरीर को तरोताजा करता है
ये शरीर को डिटॉक्स करता है
उपवास करने से शरीर रिलैक्स होता है
इसके अलावा, अगर सिर्फ हेल्थ से जोड़कर देखा जाए तो हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए भी उपवास करना बहुत जरूरी है। ये कई सारी हेल्थ से जुड़ी समस्याओं में मदद कर सकता है जैसे -

VDO.AI

पीसीओएस
मोटापा
हाई कोलेस्ट्रॉल
लिवर की समस्याएं
कैंसर
थायराइड
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
हार्मोनल समस्याएं
ऑटो इम्यून डिसऑर्डर
स्किन से जुड़ी समस्याएं
स्ट्रेस और स्ट्रेस से जुड़ी समस्याएं
एक्ने की समस्या
डल स्किन और बहुत कुछ
कितनी तरह से किए जा सकते हैं उपवास?
अब बात करते हैं अलग-अलग तरह के उपवासों की जिनकी मदद आप ले सकते हैं। आप अपने शरीर की स्थिति के हिसाब से इसे करें।

1. ड्राई फास्ट -

ऐसा उपवास जिसमें ना तो पानी पिया जाता है और ना ही खाना खाया जाता है। ऐसा उपवास एकदम से नहीं ट्राई करना चाहिए बल्कि धीरे-धीरे इसकी आदत डालनी चाहिए और शुरुआत कुछ घंटों से करनी चाहिए। इसी के साथ, ऐसा फास्ट करने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।

2. पानी वाला फास्ट-

जैसा कि नाम बता रहा है ये वो उपवास होता है जिसमें सिर्फ पानी ही पिया जाता है और खाना नहीं खाया जाता। लो बीपी वाले लोगों को ये बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस तरह का उपवास आपको हाइड्रेट रखता है।

3. फलाहार-

ये वो उपवास होता है जिसमें सिर्फ फलों को ही खाया जाता है। ये फलाहार कई लोग नवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे धार्मिक दिनों में भी करते हैं। उसमें नमक नहीं लिया जाता है और शरीर को नमक से डिटॉक्स किया जाता है।
4. अन्न न खाने वाला उपवास-

ये उन लोगों के लिए अच्छा है जो भूखे नहीं रह सकते और जिन्हें हेल्थ के हिसाब से थोड़ा सा नमक लेना भी जरूरी होता है। इस तरह के उपवास में सिर्फ अन्न ही खाया जाता है।

5. नमक और शक्कर से उपवास-

ये ऐसा उपवास होता है जिसमें नमक और शक्कर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आप अन्न भी खा सकते हैं, लेकिन नमक और शक्कर से शरीर को डिटॉक्स किया जाता है।

6. सोशल मीडिया से उपवास-

वैसे से शारीरिक हेल्थ पर कम और मानसिक हेल्थ पर ज्यादा असर डालता है। सोशल मीडिया से दूर रहना ना सिर्फ आपकी आंखों के लिए अच्छा है बल्कि इससे आपको मानसिक शांति भी मिल सकती है।

7. लिक्विड पर फास्टिंग -

ये ऐसा उपवास है जिसमें हर्बल ड्रिंक्स ही पी जाती हैं। आप जीरा पानी, सौंफ का पानी, अन्य हर्बल शरबत आदि पी सकते हैं। ये आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होती है।

8. नेगेटिविटी से फास्टिंग-

किसी भी तरह की बुराई, गलत सोच, गलत स्टोरी, न्यूज आदि से फास्टिंग को सही माना जा सकता है। मानसिक शांति के लिए ये बहुत जरूरी है। अगर आपको लग रहा है कि आपको बहुत ज्यादा नेगेटिविटी घेर रही है तो उससे दूर रहने की कोशिश करें।

9. इंटरमिटेंट फास्टिंग-

दिन के सिर्फ कुछ घंटे ही खाएं-पिएं बाकी समय खाने-पीने से बचें। जैसे आप 16 घंटे का उपवास रख सकती हैं जिसमें सोना भी शामिल होता है।
10. सर्काडियन रिदम फास्टिंग-

आपके बॉडी क्लॉक को सेट करने के लिए उसी तरह से फास्टिंग करना। इसे बिना एक्सपर्ट के खुद से ट्राई नहीं करना चाहिए और ये करने के लिए हफ्ते में दो या तीन दिन चुन लेने चाहिए। पर इस तरह का उपवास आपके बॉडी क्लॉक को सही तरह से सेट करने के लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है।

11. सर्काडियन इंटरमिटेंट फास्टिंग-

इसके लिए भी आप किसी डाइटीशियन की मदद से अपने लिए फास्टिंग प्लान बना सकते हैं। ये सर्काडियन रिदम को ठीक करने के लिए किया जाता है। आपके बॉडी क्लॉक के हिसाब से ही शरीर डिटॉक्स होता है।




















03/12/2021

लंबे समय से हैं कब्ज से परेशान तो ये टिप्स करेंगे आपकी मदद

अगर आपको कब्ज की समस्या परेशान कर रही है तो ये आपके लिए ये कुछ टिप्स बहुत मददगार साबित हो सकती हैं।
आजकल कई लोगों को कब्ज की समस्या होती है और ऐसे में हम कई बार डॉक्टर से बात करते हैं, कई तरह की दवाएं खाते हैं, कुछ लोग चूर्ण पर भरोसा करते हैं, लेकिन ये समस्या ठीक नहीं होती। कब्ज की समस्या काफी हद तक लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है और अगर आप अपनी लाइफस्टाइल के कारण ज्यादा परेशान होते हैं। हमारी लाइफस्टाइल कुछ इस तरह से बदल गई है कि अब चलना-फिरना कम हो गया है और यही कारण है कि हमारी परेशानी बढ़ती जा रही है।
कब्ज की समस्या के लिए खाने पीने से जुड़ी कई चीज़ों को बताया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोने का तरीका भी इस समस्या को बढ़ा या घटा सकता है? हमें भले ही ये लगता हो कि हमारे शरीर के लिए किसी भी पोजीशन में सोना एक जैसा ही होता है, लेकिन ये सही नहीं है।
आपको बता दें कि इसे आयुर्वेद में वामकुक्षी (Vamkukshi) कहा जाता है। ये एक ऐसा तरीका है जिसमें ये बताया गया है कि अगर आप बाईं करवट सोते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए कितना लाभकारी साबित हो सकता है।

सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कब्ज से राहत देने के लिए सोने का एक तरीका बताया है। पूजा मखीजा ने बाईं करवट सोने के फायदे बताए हैं।

कब्ज की समस्या से बचाएगा ये हैक-
अगर आपको कब्ज परेशान कर रहा है तो आप बाईं करवट सोना शुरू कर दें। न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा के अनुसार ये क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन में सहायक होता है और अगर आपको स्टूल पास करने में दिक्कत होती है तो उसके लिए भी ये सहायक है।
दरअसल, इसके काम करने के पीछे एक बड़ा कारण ये है कि ऐसी स्थिति में हमारे डाइजेस्टिव जूस पेट के निचले हिस्से में पहुंच जाते हैं और अपना काम तेज़ी से करते हैं। पूजा मखीजा के अनुसार, 'हमें भले ही ये लगता हो कि हमारे शरीर में सब कुछ एक समान है और शरीर सिमेट्रिकल है, लेकिन अंदरूनी अंगों की बात करें तो ऐसा नहीं है। हमारे मुख्य अंग अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं और इसलिए बाईं करवट लेकर सोना शरीर के फीकल मैटर को मूव करने में मदद करता है। इसमें ग्रैविटी का भी असर होता है और ये वेस्ट बड़ी आंत से होते हुए छोटी आंत में जाता है और आखिर में टॉयलेट में निकलता है।'

पूजा मखीजा ने बाईं करवट सोने के कई अन्य फायदे भी बताए हैं जो इस प्रकार हैं-

बाईं ओर करवट लेकर सोने से खर्राटे कम आते हैं।
इससे नींद सही आती है।
ये पाचन के लिए बहुत जरूरी साबित हो सकता है।

कब्ज को दूर करने के अन्य तरीके-
कब्ज को दूर करने के लिए अन्य कई तरीके हो सकते हैं जो आपकी डाइट से जुड़े हुए हैं जैसे-

फाइबर से भरपूर खाना खाएं। कई स्टडीज कहती हैं कि अगर आप फाइबर से भरपूर खाना खाते हैं और अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और होल ग्रेन्स शामिल करते हैं तो कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
प्रोसेस्ड फूड्स और रिफाइंड शुगर को अपनी डाइट से कम करें। इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है जो कब्ज की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
ये बहुत जरूरी है कि आप खुद को हाइड्रेट रखें और अगर आप ऐसा करेंगे तो अपने आप ही कब्ज की समस्या कम होती जाएगी।
एक्सरसाइज और चलने-फिरने से कब्ज की समस्या में राहत मिलती है।
आपको अगर समस्या ज्यादा हो रही है तो डॉक्टर की मदद जरूर लें। अपनी समस्या के बारे में बताने से ही ये समस्या खत्म होगी।





















24/11/2021

वायरल फीवर से बचाव के उपाय (Prevention for Viral Fever in Hindi)
अब तक आपने वायरल फीवर होने के लक्षण और कारणों के बारे में जाना। लेकिन कुछ सावधानियां बरतने पर यानि जीवनशैली में और खान-पान में थोड़ा बदलाव लाने पर इस रोग को होने से रोक सकते हैं।

खाने में उबली हुई सब्जियां, हरी सब्जियां खाना चाहिए।
दूषित पानी एवं भोजन से बचें।
पानी को पहले उबाल कर थोड़ा गुनगुना ही पिएँ।
वायरल बुखार से ग्रस्त रोगी के सम्पर्क में आने से बचें।
मौसम में बदलाव के समय उचित आहार-विहार का पालन करें।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनायें रखने के लिए आयुर्वेदिक उपचार एवं अच्छी जीवन शैली को अपनायें।


वायरल बुखार से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्ख़े (Home remedies for Viral Fever Treatment in Hindi)
आम तौर पर वायरल फीवर राहत पाने के लिए घरेलू नुस्ख़ो को ही अपनाया जाता है। इनमें वह चीजें होती हैं जो आसानी से घर में मिला जायें या उसको इस्तेमाल करने का तरीका आसान हो। चलिये इनके बारे में विस्तृत से जानते हैं।

वायरल बुखार एक वायरस से संक्रमित समस्या है अत इसमें एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए। यह बुखार कस से कम 3-4 दिन तथा ज्यादा से ज्यादा दो सप्ताह तक रह सकता है। वायरल बुखार के लिए आयुर्वेदीय चिकित्सा श्रेष्ठ है, यह कूपित दोषों को समावस्था में लेकर आती है।

24/11/2021

वायरल बुखार होने के कारण (Causes of Viral Fever in Hindi)

आम तौर पर वायरल फीवर मौसम के बदलने पर प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने पर होता है। लेकिन इसके सिवा और भी कारण होते है जिनके कारण बुखार आता है।

दूषित जल एवं भोजन का सेवन
प्रदूषण के कारण दूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों का शरीर के भीतर जाना
रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी
वायरल बुखार हुए रोगी के साथ रहना

22/11/2021

जवां और हेल्‍दी बनाने वाले आयुर्वेदिक टिप्‍स

1. आयुर्वेद के अनुसार, 'ब्रह्म मुहूर्त' के दौरान यानि सुबह 4-5.30 बजे के बीच उठना सही रहता है।
2. यह बहुत जरूरी है कि आप सुबह-सुबह पानी पीएं। हालांकि, यह ध्यान रखें कि पानी कमरे के तापमान पर होना चाहिए और इसे रात में पहले से शुद्ध तांबे के गिलास में भर कर रख लें।
3. आंखों को प्रतिदिन ताजे पानी या त्रिफला के पानी (जिसे आप रात को बनाकर रख सकती हैं) से साफ करना चाहिए।
4. दांतों, मसूड़ों और जबड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए ऑयल पुलिंग करने की कोशिश करें। इससे आपकी आवाज में सुधार होगा और गालों से झुर्रियां दूर होंगी। गुनगुने तिल के तेल से दिन में दो बार गरारे करें। मुंह में ऑयल को होल्‍ड करके रखें, इसे जोर से मुंह में चारों ओर घुमाएं, फिर इसे बाहर थूक दें और धीरे से एक अंगुली से मसूड़ों की मसाज करें।

18/11/2021

मोटापा से बचने के लिए क्या ना खाएं?

ज़्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ, जैसे – मिठाई व खीर ।
ज़्यादा चीनी वाले पेय, जैसे – कोल्ड ड्रिंक व शर्बत।
ज़्यादा तेल वाले खाद्य पदार्थ, जैसे – फ़्रेंच फ्राई व चिप्स।

18/11/2021

मोटापे से बचने के लिए क्या खाएं और कैसे खाएं?

सलाद खाएं
लो कैलोरी फूड लें
मोटे अनाज शामिल करें
चबाकर खांए
शहद और नींबू
डेयरी उत्पाद, जैसे – दही व मक्खन आदि।
नट्स जैसे – मूंगफली व बादाम आदि।
खट्टे फल
सूप पींए
पालक
सेब
दाल
दलिया
अंडा
विनेगर
एवोकैडो

12/11/2021

दवा का असर कब होता है?

वैसे हर दवा का असर करने का समय अलग-अलग होता है। ज्यादातर ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिसका असर कम से कम 24 घंटे तक रहे।

12/11/2021

आयुर्वेदिक दवा कितने दिन में असर करती है?

ऐसी बहुत ही कम आयुर्वेदिक मेडिसिन्स हैं जो एक हफ्ते से पहले असर दिखाने लगती हैं। कई बार बीमारी ठीक होने में एक महीने से लेकर साल भर भी लग जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक मेडिसिन्स का प्रभाव ज्यादा टिकाऊ होता है। ये रोग की गहराई में जाकर उसे जड़ से खत्म करती है।

06/11/2021

शरीर की सफाई
विभिन्न चयापचयी गतिविधियों के कारण शरीर में कुछ जीव – विष (टौक्सीन) एकत्रित हो जाते हैं।इन जीव- विष को शरीर से निकलना बहुत जरूरी होता, क्योंकी ये रोग पैदा कर सकते हैं।आयुर्वेद उपवास को इन जीव–विषों से मुक्ति का एक उपाय या एक तरह की चिकित्सा मानता है ।

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