16/08/2020
*MANAGEMENT OF ACID PEPTIC DISEASES IN AYURVEDA*
*अम्लपित्त / परिणामशूल का आयुर्वैदिक उपचार*
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- *Dr. S.M Joshi*
* BAMS , MD (Acu) *
अम्लपित्त / परिणामशूल (Acid Peptic Diseases - APD) का प्रचलन काफी बढ़ गया है। आयुर्वेद के सिद्धाँतों व आधुनिक रिसर्च पर आधारित इन रोगों की निम्न प्रकार से चिकित्सा की जा सकती है -
*कारण (Causes):*
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोगों में मुख्य कारण हैं -
1. उष्ण, तीक्ष्ण, विदाही, क्षोभक (Irritant) आहार / औषध का सेवन करना;
2. अत्यधिक अथवा चिरकालीन मनःउद्वेग / चिन्ता / मनःअवसाद / शोक इत्यादि होना; तथा
3. रोगी के आमाशय / ग्रहणी में ऍच. पाइलोरी नामक जीवाणु-जन्य संक्रमण होना।
*सम्प्राप्ति (Pathogenesis):*
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोगों निम्न सम्प्राप्ति व उससे होने वाली विकृतियाँ पैदा हो सकती है-
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोगों में निम्न मुख्य विकृतियाँ हो सकती हैं -
1. आमाशय में अम्ल (Gastric HCl) की आवश्यकता से अधिक उत्पत्ति होना;
2. आमाशय में मौजूद क्लेदक कफ (Gastric mucosal barrier) का क्षीण होना;
3. आमाशय-कला में शोथ (Gastritis) व व्रण (Ulcer) होना;
4. आमाशय की अनुलोम-गति (Peristalsis) को धीमा होना तथा आमाशय के खाली होने का समय बढ़ना; तथा
5. आमाशय / ग्रहणी में ऍच. पाइलोरी नामक जीवाणु-जन्य संक्रमण होना
*उपचार (Management):*
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोगों की निम्न चिकित्सा-सूत्रों व औषधियों द्वारा चिकित्सा की जा सकती है -
_1. आमाशयगत अम्ल की उत्पत्ति कम करें -_
आमाशय में सामान्य से अधिक अम्ल (Gastric HCl) की उत्पत्ति होने पर, उसकी उत्पत्ति कम करने के लिए निम्न औषधियों का उपयोग करें -_
• शटी, भृंगराज , पटोल (पत्र-स्वरस), गुडूची (घन-वटी), वासा, धत्तूरा (सूतशेखर रस)।
_2. आमाशयगत क्लेदक कफ की उत्पत्ति बढ़ाएँ -_
आमाशय में मौजूद क्षीण क्लेदक कफ (Gastric mucosal barrier) को बढ़ाने, आमाशय-कला में शोथ (Gastritis) कम करने, तथा आमाशय-कला में व्रण (Ulcer) रोपण के निम्न औषधियों का उपयोग करें -
• मधुयष्टी , आमलकी, शतावरी, गुडूची।
_3. आमाशय की अनुलोम गति को बढ़ाएँ -_
आमाशय की शिथिल अनुलोम-गति (Peristalsis) को बढ़ाने तथा आमाशय को ज़ल्दी खाली कराने के लिए निम्न औषधियों का उपयोग करें -
• शटी, भृंगराज , शुण्ठी, पोदीनक, निशोथ (अविपत्तिकर चूर्ण), हरीतकी।
_4. आमाशयगत अत्यधिक अम्ल को निष्प्रभावी करें -_
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोग में आमाशय में मौजूद अधिक अम्ल (Gastric HCl) को निष्प्रभावी (Neutralize) करने के लिए निम्न औषधियों का उपयोग करें -
• मुक्ताशुक्ति , प्रवाल, मुक्ता, स्वर्जिकाक्षार, गुडूची (घनवटी), अभ्रक, निम्बु।
_5. आमाशय में मौजूद संक्रमण की चिकित्सा करें -_
अम्लपित्त / परिणामशूल (APD) रोग में आमाशय / ग्रहणी में ऍच. पाइलोरी नामक जीवाणु-जन्य संक्रमण होने पर निम्न औषधियों का उपयोग करें -
• अतिविषा, पञ्चामृत-पर्पटी , चिरायता, गन्धक इत्यादि।
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