11/01/2026
मोतियाबिंद के "जादुई इलाज" का सच: क्या आई-ड्रॉप्स से मोतियाबिंद ठीक हो सकता है?
आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे कई विज्ञापन आते हैं जो दावा करते हैं कि बिना सर्जरी के, केवल आई-ड्रॉप्स से मोतियाबिंद को "घोला" या ठीक किया जा सकता है।
इतिहास गवाह है, मोतियाबिंद की सर्जरी कोई नया "व्यापार" नहीं है, बल्कि यह भारतीय चिकित्सा विज्ञान की देन है। महर्षि सुश्रुत, जिन्हें 'फादर ऑफ सर्जरी' माना जाता है, ने दुनिया का सबसे पहला मोतियाबिंद का ऑपरेशन यहीं काशी में लगभग 600 ईसा पूर्व में किया था। 2500 साल पहले भी यह स्पष्ट था: आँख के लेंस में आए इस धुंधलेपन का इलाज केवल सर्जरी ही है।
विज्ञान क्या कहता है:
आज तक, ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि Cineraria Maritima, हर्बल ड्रॉप्स या कोई अन्य दवा इंसान की आँखों में मोतियाबिंद को गला सकती है।
मोतियाबिंद का मतलब है लेंस के प्रोटीन का जम जाना, जैसे उबला हुआ अंडा वापस कच्चा और पारदर्शी नहीं हो सकता, वैसे ही दवा से मोतियाबिंद ठीक नहीं हो सकता।
सरकार का डेटा क्या कहता है?
अगर कोई "जादुई ड्रॉप" सच में काम करती, तो भारत सरकार सबसे पहले उसे अपनाती।
1️⃣ नेत्र ज्योति अभियान के तहत, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत में 90 लाख से अधिक मोतियाबिंद सर्जरी की गईं।
2️⃣ सरकार ने इस मिशन (National Programme for Control of Blindness) के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया है, ताकि लोगों की सर्जरी हो सके, न कि उन्हें ड्रॉप्स बांटी जाएं। यह अपने आप में सबूत है कि सर्जरी ही एकमात्र कारगर इलाज है।
☠️ इंतजार करने का जोखिम:
जादुई दवाओं के चक्कर में मरीज अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे:
1️⃣ मोतियाबिंद बहुत ज्यादा पक जाता है (Hyper-mature cataract), जिससे सर्जरी जटिल हो जाती है।
2️⃣ काला मोतिया (Glaucoma) होने का खतरा बढ़ जाता है।
3️⃣ अनजाने में गलत ड्रॉप्स डालने से आँखों को नुकसान हो सकता है।
सही रास्ता:
आज के समय में फेको सर्जरी चिकित्सा जगत की सबसे सुरक्षित और सफल प्रक्रियाओं में से एक है। अपनी आँखों की रोशनी के साथ जुआ न खेलें। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान, दोनों यही कहते हैं कि सर्जरी ही इसका सही समाधान है।