13/02/2026
Thyroid Health - थायराइड बैलेंस करें नेचुरली: डाइट, योग और घरेलू नुस्खे - इस पोस्ट का टॉपिक बहुत ही इंपॉर्टेंट है - थायराइड। ये कोई छोटी-मोटी ग्रंथि नहीं है, बल्कि ऐसा हार्मोन कंट्रोल सेंटर है जो शरीर की हर एक सेल पर असर डालता है।
अगर ये बैलेंस में है तो सब ठीक, लेकिन जरा सा गड़बड़ हुआ तो वजन, मूड, एनर्जी, बाल, त्वचा, पाचन - सब प्रभावित हो सकते हैं।
तो इस आर्टिकल में हम बिल्कुल डिटेल में समझेंगे:
थायराइड क्या है
क्यों होता है
इसके लक्षण क्या हैं
क्या नहीं खाना चाहिए
और कौन-कौन से घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं
थायराइड आखिर है क्या?
थायराइड एक बटरफ्लाई शेप की ग्रंथि है जो गर्दन के सामने, नीचे की तरफ होती है। इसका काम है दो मुख्य हार्मोन बनाना:
T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन)
T4 (थायरॉक्सिन)
ये दोनों हार्मोन हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म कंट्रोल करते हैं।
मतलब - जो खाना हम खाते हैं, उसे ऊर्जा में बदलना, शरीर की गर्मी संतुलित रखना, दिल की धड़कन, पाचन, दिमाग की एक्टिविटी, यहां तक कि प्रोटीन प्रोडक्शन भी।
अगर ये हार्मोन कम या ज्यादा बनने लगें, तो वहीं से शुरू होती है थायराइड की समस्या।
थायराइड के प्रकार
थायराइड मुख्य रूप से दो तरह का होता है:
1. हाइपरथायराइडिज्म - पतला करने वाला
जब थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगे।
मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है।
2. हाइपोथायराइडिज्म - मोटा करने वाला
जब ग्लैंड जरूरत से कम हार्मोन बनाए।
मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।
महिलाओं में ये समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखी जाती है। इसे कई बार “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं और लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
थायराइड होने के कारण
अब समझते हैं कि ये होता क्यों है।
आयोडीन की गड़बड़ी
हमारा शरीर खुद आयोडीन नहीं बनाता।
कमी होगी - हाइपोथायराइड
ज्यादा होगा - हाइपरथायराइड
जन्मजात समस्या
कुछ बच्चों में जन्म से ही थायराइड ग्रंथि ठीक से विकसित नहीं होती — इसे कंजेनिटल हाइपोथायराइडिज्म कहते हैं।
प्रेगनेंसी
गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे थायराइड असंतुलित हो सकता है।
दवाइयों का असर
कैंसर या हृदय रोग की कुछ दवाइयां थायराइड हार्मोन कम कर देती हैं।
फैमिली हिस्ट्री
अगर परिवार में किसी को है, तो रिस्क बढ़ जाता है।
ज्यादा सोया प्रोडक्ट
सोयाबीन, टोफू, सोया मिल्क आदि का अत्यधिक सेवन थायराइड हार्मोन बनने में बाधा डाल सकता है।
तनाव (Stress)
क्रॉनिक स्ट्रेस थायराइड ग्लैंड पर सीधा असर डालता है।
थायराइड के लक्षण
अब सबसे जरूरी हिस्सा - पहचान कैसे करें?
वजन बढ़ना
मेटाबॉलिज्म धीमा - फैट जमा - मोटापा।
बिना काम के थकान
हर समय कमजोरी महसूस होना।
ठंड या गर्मी सहन न होना
तापमान के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाना।
आवाज भारी होना
डिप्रेशन
कम थायरॉक्सिन - मूड हार्मोन प्रभावित।
नींद की समस्या
बाल झड़ना
रूखे, कमजोर बाल।
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
त्वचा सूखी होना
नाखून पतले और जल्दी टूटना
कब्ज
धीमा मेटाबॉलिज्म - स्लो पाचन।
अगर ये लक्षण लगातार दिख रहे हैं तो टेस्ट जरूर करवाएं।
थायराइड के नॉर्मल लेवल्स (Lab Values Guide)
अब सबसे ज़रूरी सवाल — रिपोर्ट में कौन-सा लेवल नॉर्मल माना जाता है?
कई लोग टेस्ट तो करा लेते हैं, लेकिन समझ नहीं पाते कि रिपोर्ट सही है या नहीं।
थायराइड की जांच में मुख्य रूप से ये तीन चीजें देखी जाती हैं:
1. TSH (Thyroid Stimulating Hormone)
यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है।
TSH पिट्यूटरी ग्लैंड बनाती है और यह थायराइड को कंट्रोल करती है।
नॉर्मल रेंज:
0.4 से 4.0 mIU/L (कुछ लैब 0.5–5.0 भी मानती हैं)
अगर TSH ज्यादा है (4 से ऊपर) - हाइपोथायराइड का संकेत
अगर TSH कम है (0.4 से नीचे) - हाइपरथायराइड का संकेत
याद रखें: शुरुआती स्टेज में TSH ही पहले गड़बड़ होता है।
2. Free T4 (Thyroxine)
यह मुख्य हार्मोन है जो थायराइड बनाती है।
नॉर्मल रेंज:
0.8 से 1.8 ng/dL
कम T4 - हाइपोथायराइड
ज्यादा T4 - हाइपरथायराइड
3. Free T3 (Triiodothyronine)
यह ज्यादा एक्टिव हार्मोन है।
नॉर्मल रेंज:
2.3 से 4.2 pg/mL
कम T3 - थकान, सुस्ती
ज्यादा T3 - घबराहट, तेज धड़कन
स्पेशल सिचुएशन
प्रेग्नेंसी में
TSH की नॉर्मल रेंज थोड़ी कम रखी जाती है (लगभग 0.1–2.5 पहले ट्राइमेस्टर में)।
इसलिए प्रेग्नेंसी में अलग रेफरेंस रेंज फॉलो होती है।
सबक्लिनिकल थायराइड
TSH थोड़ा बढ़ा हुआ
लेकिन T3 और T4 नॉर्मल
इसमें लक्षण हल्के हो सकते हैं, पर निगरानी जरूरी है।
एक जरूरी बात
हर लैब की रेफरेंस रेंज थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए अपनी रिपोर्ट में दी गई रेंज जरूर देखें।
सिर्फ नंबर देखकर घबराएं नहीं -
लक्षण + रिपोर्ट + डॉक्टर की सलाह - तीनों मिलाकर निर्णय लें।
Allopathy Treatment
अब बात करते हैं - अगर रिपोर्ट में थायराइड गड़बड़ आ जाए तो एलोपैथी में क्या इलाज किया जाता है?
इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको हाइपोथायराइड है या हाइपरथायराइड।
1. हाइपोथायराइड (थायराइड कम काम कर रहा है)
इसमें शरीर में थायरॉक्सिन हार्मोन कम बनता है।
इलाज सीधा और काफी प्रभावी होता है।
मुख्य दवा:
Levothyroxine (T4 tablet)
(ब्रांड नाम अलग-अलग हो सकते हैं)
कैसे ली जाती है?
सुबह खाली पेट
पानी के साथ
खाने से 30–45 मिनट पहले
रोज एक ही समय पर
डोज कैसे तय होती है?
उम्र
वजन
TSH लेवल
हार्ट की स्थिति
प्रेग्नेंसी
डोज व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग होती है।
6–8 हफ्ते बाद TSH टेस्ट करके डोज एडजस्ट की जाती है।
ध्यान रखें:
कैल्शियम, आयरन की दवा 3–4 घंटे बाद लें
दवा अचानक बंद न करें
यह अक्सर लंबी अवधि की दवा होती है
2. हाइपरथायराइड (थायराइड ज्यादा काम कर रहा है)
इसमें हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनता है।
मुख्य दवाएं:
Methimazole
Carbimazole
Propylthiouracil (PTU)
ये दवाएं थायराइड हार्मोन का निर्माण कम करती हैं।
साथ में:
अगर धड़कन तेज है या घबराहट है तो
Beta blockers (जैसे Propranolol) दिए जाते हैं।
अगर दवाओं से कंट्रोल न हो तो?
तीन ऑप्शन होते हैं:
1. Radioactive Iodine Therapy
- थायराइड कोशिकाओं को धीरे-धीरे कम करता है
2. सर्जरी (Thyroidectomy)
- जब गांठ बड़ी हो या कैंसर का शक हो
3. लंबे समय तक दवा मॉनिटरिंग
सबक्लिनिकल केस में
अगर TSH थोड़ा ही बढ़ा है और लक्षण कम हैं,
तो डॉक्टर तुरंत दवा शुरू नहीं भी कर सकते -
सिर्फ मॉनिटरिंग की जाती है।
सबसे जरूरी बात
खुद से दवा शुरू न करें
डोज खुद से बदलना खतरनाक हो सकता है
प्रेग्नेंसी में कंट्रोल बहुत जरूरी है
हार्ट पेशेंट्स में सावधानी जरूरी
थायराइड का इलाज मुश्किल नहीं है -
बस सही डायग्नोसिस, सही डोज और नियमित फॉलो-अप जरूरी है।
थायराइड में क्या नहीं खाना चाहिए?
अब डाइट की बात करते हैं - क्योंकि सही खाना आधा इलाज है।
ज्यादा कैफीन
चाय-कॉफी अधिक मात्रा में लेने से समस्या बढ़ सकती है।
ज्यादा आयोडीन
अगर हाइपोथायराइड है तो आयोडीन का ओवरडोज न लें।
सोया प्रोडक्ट
थायराइड हार्मोन बनने की प्रक्रिया बाधित कर सकते हैं।
क्रूसिफेरस सब्जियां (अगर आयोडीन की कमी हो)
ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी — सीमित मात्रा में लें।
ज्यादा शुगर
कोल्ड ड्रिंक, केक, पेस्ट्री — सिर्फ कैलोरी, कोई पोषण नहीं।
ग्लूटेन
गेहूं, मैदा, पास्ता, ब्रेड — कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकता है।
जंक फूड
तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड — कोलेस्ट्रॉल और वजन दोनों बढ़ाते हैं।
थायराइड के घरेलू उपाय
अब बात करते हैं नेचुरल सपोर्ट की।
1. तेजपत्ता (सेज की पत्ती) चाय
एक कप पानी उबालें।
उसमें 1–2 तेजपत्ता डालें।
5–10 मिनट ढककर रखें।
छानकर चाहें तो शहद/नींबू मिलाएं।
सुबह खाली पेट पिएं।
प्रेग्नेंट महिलाएं और मिर्गी मरीज बिना सलाह न लें।
2. धनिया पानी
2 चम्मच साबुत धनिया
एक गिलास पानी में रातभर भिगो दें।
सुबह उबालें जब तक आधा न रह जाए।
छानकर पिएं।
3. दालचीनी + अजवाइन + मेथी पाउडर
तीनों 25-25 ग्राम लें।
पीसकर मिक्स करें।
रोज 1 चम्मच गुनगुने पानी से लें।
4. अदरक पानी
1 इंच अदरक कद्दूकस करें।
डेढ़ कप पानी में उबालें।
एक कप बचे तो छानकर पिएं।
5. लौकी का रस
सुबह खाली पेट एक गिलास।
2–3 तुलसी पत्ते मिलाएं तो और बेहतर।
6. मल्टीग्रेन आटा
5 किलो गेहूं + 1 किलो बाजरा + 1 किलो ज्वार
इसकी रोटी खाएं।
योग से थायराइड कंट्रोल
उज्जायी प्राणायाम
सीधे बैठें
नाक से गहरी सांस लें
हल्की खर्राटे जैसी आवाज गले से आए
कुछ सेकंड रोकें
एक नासिका बंद कर दूसरी से छोड़ें
10–20 मिनट अभ्यास करें
लंबे समय तक करने से अच्छा लाभ मिलता है।
अनानास का सेवन
सुबह अनानास या उसका जूस लें।
विटामिन C, ब्रोमेलेन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर।
वजन नियंत्रण में भी मददगार।
सबसे जरूरी बात – वजन कंट्रोल रखें
थायराइड में वजन तेजी से बढ़ता है।
अगर वजन कंट्रोल में है, तो आधी समस्या अपने आप कम हो जाती है।
Conclusion
थायराइड कोई अचानक आने वाली बीमारी नहीं है।
ये धीरे-धीरे शरीर में असंतुलन पैदा करती है।
अगर:
समय पर टेस्ट
सही डाइट
स्ट्रेस कंट्रोल
वजन कंट्रोल
नियमित योग
इन पांच चीजों पर ध्यान दिया जाए, तो थायराइड को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।
ध्यान रखें — घरेलू उपाय सपोर्ट करते हैं, लेकिन दवाई चल रही हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।
अपना ख्याल रखें। शरीर संकेत देता है — बस हमें सुनना आना चाहिए।
आपका थायराइड लेवल बैलेंस है या नहीं, कमेंट में लिखें