07/12/2025
होम्योपैथी - नींद न आना- (अनिद्रा रोग) Insomnia
परिचय- यह रोग कई बार तो किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है इसलिए इस रोग को ठीक करने के लिए ऐसी औषधियों को उपयोग करना चाहिए जो किसी ऐसे रोग को ठीक करता हो जिसमें नींद न आने के लक्षण उत्पन्न हों। ऐसे औषधि जहां इस रोग को ठीक करेगी, वही वह नींद भी लाने में मदद करेगी। होम्योपैथी में सिर्फ नींद लाने के लिए कोई विशेष औषधि नहीं है और प्रत्येक औषधि का नींद पर प्रभाव पड़ता है इसलिए मुख्य-रोग के लिए चुनाव ही ऐसी औषधि का होना चाहिए जिसमें मुख्य रोग के लक्षणों के साथ नींद के लक्षण भी हों।
यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है जैसे- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।
कारण :- सिर में रक्त की अधिकता, सिर का अधिक ठंडा होना, अधिक खाना, उपवास, बहुत ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन करना, मानसिक उत्तेजना होना, कब्ज की समस्या होना या अधिक चिंता होना आदि कारणों से यह रोग होता है। कई प्रकार के रोग होने के कारण से भी नींद न आने की शिकायत हो सकती है।
विभिन्न औषधियों से चिकित्सा-
१. लाइकोडियम- दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
२. चायना- रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि ६ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।
३. कैल्केरिया कार्ब - इस औषधि की ३० शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नींद नहीं होती बल्कि नींद होती है।
४. कॉफिया - खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, ३ बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहे, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी तो स्वप्न देखे। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की २०० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की ६ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
५. जेल्सीमियम - यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनको अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हों तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
६. ऐकोनाइट - बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पायें, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की ३० का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
७. कैम्फर - नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।
८. इग्नेशिया - किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की २०० शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की २०० शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है,नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है। मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौंक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की ३ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
९. बेलाडोना - मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थकावट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटे भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
१०. काक्युलस- यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की ३ से ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।
११. सल्फर - रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जरा सी भी आवाज आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।
१२. नक्स वोमिका - रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यदि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए। कब्ज बनना, पेट में कीड़े होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की ६ या ३० शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।
१३.पल्स - रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागृत अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा होता है, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशानी भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोंके आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त होता है अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और ३-४ बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण शराब, चाय, काफी के सेवन के कारण नींद न आना है। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।
१४. सेलेनियम - रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग करना चाहिये।
१५. ऐम्ब्राग्रीशिया - रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंता होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की २ या ३ शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।
१६. फॉसफोरस - रोगी को दिन के समय में नींद रहती है, भोजन के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का आक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।
१७. टैबेकम- यदि स्नायुविक अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की ३० शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।
१८. ऐवैना सैटाइवा - स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के ५ से १० बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छुडाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
१९. स्कुटेलेरिया - यदि किसी रोगी को अनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।
२०. सिप्रिपीडियम - अधिक खुशी का समाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के ३० से ६० बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।
२१. कैमोमिला - दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा ऊँघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती हो। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की १२ शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।
२२. बेल्लिस पेरेन्निस- यदि किसी रोगी को सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या ३ शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
२३. कैनेबिस इंडिका- अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। यदि रोगी में इस प्रकार के लक्षण हैं तो कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या ३ शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।
२४. पल्सेटिला- रात के समय में लगभग ११ से १२ बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
२५. सिमिसि- यदि स्त्रियों के वस्ति-गन्हर की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की ३ शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।
२६. साइना- पेट में कीड़े होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की २ मात्रा या २०० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।
२७. पैसिफ्लोरा इंकारनेट- नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मूल-अर्क का एक बूंद से ३० बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।
नींद लाने के लिए कुछ अन्य उपाय :-
¬ सोने से पहले मुंह, गर्दन का पिछला भाग, कान और दोनों पैर ठंडे पानी से धोए।
¬ सोने से पहले हल्का गर्म पानी में एक कपड़े को डालकर उसे अच्छी तरह से निचोड़ ले और फिर इसके बाद इससे पूरे शरीर को पोछें और थोड़ी देर बाद घूमने के लिए जाना चाहिए तथा इसके बाद सोना चाहिए इससे अच्छी नींद आती है।
¬ रोगी को भारी पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
¬ ऊंची तकिए पर सिर रखकर सोना चाहिए।