AYUSH Health Wellness Centre

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✨ तुतलाहट और अस्पष्ट बोली अब मजबूरी नहीं!हमदर्द दवा-ए-लुक़्नत – ज़बान और दिमाग़ की नसों को मजबूती देकर बोलने में साफ़ी औ...
29/12/2025

✨ तुतलाहट और अस्पष्ट बोली अब मजबूरी नहीं!

हमदर्द दवा-ए-लुक़्नत – ज़बान और दिमाग़ की नसों को मजबूती देकर बोलने में साफ़ी और आत्मविश्वास लौटाने में सहायक 🌸

👉 अस्पष्ट बोली और ज़बान की कमजोरी के लिए खास यूनानी दवा

🔹 तुतलाहट / हकलाहट
👉 बोलते समय अटकना, रुक-रुक कर बोलना कम करने में सहायक

🔹 अस्पष्ट आवाज़
👉 आवाज़ को साफ, स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने में मदद करती है

🔹 ज़बान की कमजोरी
👉 ज़बान की नसों को ताकत देती है, बोलने की क्षमता बढ़ाती है

🔹 बच्चों और बड़ों दोनों के लिए उपयोगी
👉 जन्मजात या बाद में हुई बोलने की परेशानी में लाभकारी

🔹 दिमाग़ और नसों को मजबूती
👉 नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है

🔬 Research + Unani आधार

यूनानी चिकित्सा के अनुसार लुक़्नत का संबंध ज़बान और दिमाग़ की नसों (Nervous control of speech) से होता है।

दवा-ए-लुक़्नत में मौजूद जड़ी-बूटियाँ नर्व टॉनिक की तरह काम करती हैं, जिससे बोलने की नसों की कमजोरी में सुधार देखा जाता है।

पारंपरिक यूनानी ग्रंथों (जैसे क़राबादीन और मख़ज़न-उल-मुफ़रदात) में इसका उपयोग अस्पष्ट बोली, हकलाहट और ज़बान की जकड़न में बताया गया है।

आधुनिक दृष्टि से देखें तो यह दवा न्यूरो-मस्कुलर कोऑर्डिनेशन (दिमाग़ और ज़बान के तालमेल) को सपोर्ट करती है।

💊 दवा-ए-लुक़्नत – सेवन विधि (Dose)

👉 मात्रा:
✔️ 1 ग्राम सुबह
✔️ 1 ग्राम रात

👉 सेवन का तरीका:
✔️ सोते समय ज़बान (जीभ) पर मलें
✔️ या हकीम/डॉक्टर की सलाह अनुसार

👉 अवधि:

नियमित 6–8 हफ्ते तक सेवन करें

⚠️ परहेज़:
ठंडी चीज़ें, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक से बचें

📌 नियमित सेवन से बोलने में साफ़ी और बेहतर परिणाम मिलते हैं.

 #जिगर ( ) के सभी रोगों के लिए।। जिनको भी  #फैटी_लीवर की समस्या है  #फैटी_लिवर_ग्रेड_1  #ग्रेड_2  #ग्रेड_3  रिपोर्ट जितन...
16/12/2025

#जिगर ( ) के सभी रोगों के लिए।।
जिनको भी #फैटी_लीवर की समस्या है #फैटी_लिवर_ग्रेड_1 #ग्रेड_2 #ग्रेड_3

रिपोर्ट जितनी मर्जी खराब

सुबह आप लोगों से वादा किया था कि शाम तक एक लीवर के सभी रोगों के लिए फार्मूला शेयर करेंगे तो फार्मूला हाजिर है।।

इस फार्मूले में चार प्रकार के अर्क होते हैं लीवर के इस अर्क ने मुझे मजबूर किया,

कि यह चीज़ मुझे अपने से जुड़े लोगों को जरूर बताना चाहिए
लीवर के लिए इससे बेहतर फार्मूला मैंने नहीं देखा,
इसके इतने फायदे हैं कि पूरी किताब इस पर लिखी जा सकती है,
बहुत ही कमाल की चीज़ है और नुकसान की गुंजाइश नहीं है,

नुस्खा (सामग्री)
अर्क मकोय - 1 लीटर
अर्क कासनी - 1 लीटर
अर्क बादियान (सौंफ) - 1 लीटर

अर्क बिरंजआसफ - आधा लीटर
इन सबको मिला लें।

सेवन विधि (Dose)
सभी अर्क को बराबर मात्रा में किसी अलग शीशी में मिलाकर रख लीजिए

सभी के मिले हुए मै से 60 ml
subh खाली पेट

60 मिलीलीटर (ml)

शाम को सूरज छिपने के समय

बराबर मात्रा में पानी मिलाकर ले सकते हैं

फ़ायदे (Benefits)
एक सहायक के तौर पर हर बीमारी में इस्तेमाल कराया जा सकता है।
बच्चों में भूख की कमी के लिए बहुत बेहतरीन है।
पीलिया (Yellow Jaundice)
लीवर पर चर्बी (Fatty Liver)
ए एल टी (ALT - Elevated Liver Enzymes)
जहाँ पर भी आपको लीवर को मज़बूती (ताक़त) देनी हो, वहाँ पर यह इस्तेमाल कराएँ।
यह मेरे दिल का एक बहुत कीमती राज़ था।
लीवर की गर्मी के लिए

आप इस अर्क के मिश्रण के साथ

जवारिश अनारेन सुबह शाम खाने के 30 मिनट आधा आधा चम्मच गुंगुने पानी से ले सकते हैं

और लीवर के बढ जाने के लिए

हब्बे कबिद नौशादरी

जवारिश अनारेन के साथ 2__2 गोली चला सकते हैं।

गण्डूष यानी तैल को मुख में धारण कर धीरे-धीरे घुमाना।यह केवल मुख-स्वच्छता नहीं यह शरीर-शुद्धि का प्रथम संस्कार है।आयुर्वे...
13/12/2025

गण्डूष यानी तैल को मुख में धारण कर धीरे-धीरे घुमाना।
यह केवल मुख-स्वच्छता नहीं यह शरीर-शुद्धि का प्रथम संस्कार है।
आयुर्वेद मानता है कि मुख “अग्नि” का द्वार है, और उसका संतुलन ही
पाचन, त्वचा, नेत्र, और मानसिक प्रसन्नता का आधार बनता है।
तैल गण्डूष की विधि (Morning Ritual)
1.प्रातः काल खाली पेट बैठें।
2.1 चम्मच तिल या नारियल तेल मुख में रखें।
3.धीरे-धीरे 5–10 मिनट तक घुमाएँ।
4.कभी निगलें नहीं।
5.तेल को बाहर थूकें।
6.गुनगुने जल से कुल्ला करें।
7.तत्पश्चात “कवला” करें अर्थात् मुख में जल लेकर कुछ क्षण हिलाएँ।

Note:
तेल को जब मुख में हल्का और पतला महसूस करें, तभी बाहर निकालें बनयह संकेत है कि अम्ल व विष बाहर आ चुके हैं।

🕉️ “नस्य”—नाक से दिया गया औषध ही सिर के रोगों का सर्वोत्तम उपचार #नस्यकर्म   #शिरोरोगउपचार    आयुर्वेद में पंचकर्म को शर...
12/12/2025

🕉️ “नस्य”—नाक से दिया गया औषध ही सिर के रोगों का सर्वोत्तम उपचार

#नस्यकर्म #शिरोरोगउपचार

आयुर्वेद में पंचकर्म को शरीर से रोग और विषैले द्रव्यों को निकालने वाली सर्वोच्च प्रक्रिया कहा गया है। इन पाँचों में से एक—नस्य कर्म (Nasya Therapy)—को शिरोरोगों का राजा माना गया है।
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदयम्—तीनों शास्त्रों में नस्य को दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या) का अनिवार्य अंग बताया गया है।

🔶 नस्य क्या है?

नाक, मानव शरीर का “शीर्ष द्वार” है। आयुर्वेद कहता है—
“नासा हि शिरसो द्वारम्।”
यानि नाक से दी गई औषध सीधा मस्तिष्क, सिर, गला, आँख, कान, नाक और स्नायु तंत्र पर कार्य करती है।
नस्य में विशेष औषधीय तेलों, घृत या काढ़े की कुछ बूँदें नाक के भीतर दी जाती हैं ताकि सिर, मस्तिष्क व नाक मार्ग की शुद्धि हो सके।

🔶 नस्य क्यों है इतना प्रभावी? (Rare but True Facts)

✔ नाक की नसें सीधे ब्रेन तक पहुँचती हैं—जो औषध को कुछ ही मिनटों में प्रभावी बनाती हैं।
✔ यह एकमात्र उपचार है जो साइनस, माइग्रेन, तनाव, नींद की समस्या तक में गहराई से असर करता है।
✔ नस्य से पिटक (कफ) पिघल कर बाहर निकलता है, जिससे नाक और माथे का भारीपन तुरंत कम होता है।
✔ यह शरीर के प्राण वायु को संतुलित करता है—जो मानसिक शांति, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है।
✔ नस्य करने से चेहरे के ग्लो तक बढ़ जाता है—इसलिए इसे “यूथ थेरेपी” भी कहा गया है।

🔶 नस्य करने के मुख्य लाभ (Proved Benefits)
1️⃣ सिरदर्द, माइग्रेन से राहत

औषधीय तेल ब्रेन व नसों को शांत करता है और तनाव हार्मोन कम करता है।

2️⃣ साइनस, नाक बंद, एलर्जी का समाधान

यह कफ को पिघलाकर नाक मार्ग साफ करता है, जिससे सांस लेना आसान होता है।

3️⃣ मानसिक तनाव, चिंता, अनिद्रा में राहत

नस्य से मस्तिष्क की नसें रिलैक्स होती हैं। यह प्रसन्नता व शांत मन देता है।

4️⃣ बालों का झड़ना कम व जड़ें मजबूत

नस्य शिरो-धातु को मजबूत करके बालों को पोषण देता है।

5️⃣ आँखों की रोशनी, चेहरा और आवाज़ सुधरना

सिर और चेहरे के सभी अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।

6️⃣ याददाश्त व एकाग्रता बढ़ना

यह ब्रेन में ऑक्सीजन सप्लाई और न्यूरोनल एक्टिविटी बढ़ाता है।

🔶 नस्य के लिए कौन सा तेल इस्तेमाल करें? (Ayurvedic Selection)

शास्त्रों के अनुसार—

अणु तेल – मस्तिष्क, साइनस, माइग्रेन, तनाव

शदबिंदु तेल – नाक बंद, बाल झड़ना, सिर भारी रहना

घृत (जैसे ब्राह्मी घृत) – मानसिक शांति, स्मृति वृद्धि

तिल तेल (गर्म करके) – दैनिक नस्य, त्वचा व बालों के लिए श्रेष्ठ

लहसुन सिद्ध तेल – अत्यधिक कफ व जमाव में प्रभावी

Note: तीव्र रोगों में चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

🔶 नस्य कब करना चाहिए? (काल का महत्व)

आयुर्वेद कहता है—सही समय पर नस्य = दोगुना लाभ

⏰ सुबह 6–9 बजे – सर्वश्रेष्ठ समय; कफ ढीला होता है
⏰ शाम 4–6 बजे – मानसिक तनाव व नाक बंद में लाभ
❌ भोजन के तुरंत बाद नहीं
❌ स्नान से पहले भी नहीं
❌ तेज सर्दी-जुकाम, बुखार, गर्भावस्था में चिकित्सक की सलाह अनिवार्य

🔶 नस्य कैसे करें? (Simple Home Method)

नाक व चेहरे पर हल्का गुनगुना तिल तेल लगाकर मालिश करें।

गर्म पानी की भाप 1–2 मिनट लें।

सिर पीछे झुकाएँ और हर नथुने में 2–3 बूँद तेल डालें।

मुँह से हल्की साँस लें और अतिरिक्त कफ बाहर निकालें।

10 मिनट आराम करें।

🔶 निष्कर्ष

नस्य एक ऐसा उपचार है जो ना सिर्फ नाक, बल्कि पूरे मस्तिष्क, भावनाओं, साँसों, बालों और चेहरे तक का संतुलन बनाए रखता है।
यह योग, आयुर्वेद और आधुनिक न्यूरो-रिसर्च—तीनों में उत्कृष्ट, सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध है।

नाभि में तेल लगाने का आयुर्वेदिक रहस्य:      🌙 नाभि: शरीर का “केंद्रीय हब” — आयुर्वेद का अनोखा दृष्टिकोणआयुर्वेद में नाभ...
11/12/2025

नाभि में तेल लगाने का आयुर्वेदिक रहस्य:



🌙 नाभि: शरीर का “केंद्रीय हब” — आयुर्वेद का अनोखा दृष्टिकोण

आयुर्वेद में नाभि को “नाडी मूल” कहा गया है—यानी 72,000 नाड़ियों का केंद्र। यह वह स्थान है जहाँ से गर्भावस्था में पूरा पोषण मिलता है। यही कारण है कि नाभि की देखभाल सीधे पाचन, हार्मोन, त्वचा और मनोदशा पर असर डालती है।
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि नाभि के आसपास का क्षेत्र अत्यंत vascular होता है, जहाँ से तेल प्राकृतिक रूप से absorb होकर therapeutic प्रभाव देता है।

💡 नाभि में तेल लगाने से आखिर होता क्या है?

✔ त्वचा की dryness कम होती है
✔ Digestion एवं metabolism में subtle सुधार
✔ Reproductive system, Hormonal balance पर gentle असर
✔ Nervous system को शांत करने वाला प्रभाव
✔ उसकी warmth से Vata शांत होता है—ठंड के मौसम में बेहद लाभकारी

नाभि में तेल लगाने को “Marma Therapy” का आसान घरेलू रूप भी माना जाता है।

🔥 वैज्ञानिक दृष्टिकोण: कैसे करता है काम?

नाभि क्षेत्र में मौजूद capillaries तेल के active compounds को हल्के-हल्के absorb करती हैं।
➡ इससे skin barrier मजबूत होता है
➡ गर्माहट internal circulation को activate करती है
➡ Sesame oil में मौजूद sesamol, linoleic acid त्वचा व कोषों की मरम्मत करते हैं
➡ Coconut oil के MCTs anti-inflammatory होते हैं
➡ Mustard oil की गर्म तासीर winter में congestion व stiffness कम करती है

🌿 कब, कैसे और कौन सा तेल? — फायदे डबल करने वाली गाइड
1️⃣ रात को सोने से पहले — सबसे प्रभावी समय

क्यों?
रात को शरीर repair mode में होता है, तेल की absorption सबसे बेहतर होती है।

👉 कैसे लगाएँ:
2–3 बूंद तेल नाभि में डालें और clockwise direction में 1 मिनट मालिश करें।

2️⃣ कौन सा तेल किस समस्या में? — चुनें बिल्कुल सही तेल
🟡 1. सरसों का तेल — Winter Warrior (Vata pacifying)

✔ अत्यधिक ठंड, dryness, cracked lips
✔ Indigestion व gas tendency
✔ Muscle stiffness
Mustard oil की गर्म तासीर सर्दियों में double असर दिखाती है।

⚪ 2. नारियल तेल — Skin & Hormone Balancer

✔ Skin dryness
✔ Hormonal acne
✔ Constipation में subtle relief
इसमें मौजूद lauric acid anti-bacterial और soothing होता है।

🟤 3. तिल का तेल — सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक विकल्प

✔ Joint pain
✔ Anxiety / तनाव
✔ Deep nourishment
तिल के तेल को “त्वचा बल्य” कहा गया है—skin & nerves दोनों का पोषण।

🔵 4. घी — Ultimate Cooling & Healing

✔ Dehydration
✔ Body heat imbalance
✔ Chronic constipation
घी का snehan मन और शरीर—दोनों को शांत करता है।

3️⃣ इन गलतियों से बचें

✘ गंदे हाथों से तेल न लगाएँ
✘ तुरंत बाद पानी न पिएँ
✘ पेट फूला हो, infection हो तो ज्यादा नहीं लगाएँ
✘ एक-बार में बहुत अधिक तेल न डालें

💎 नाभि में तेल लगाने के 10 सिद्ध लाभ — बेहद असरदार

1️⃣ त्वचा में तुंरत नमी और glow बढ़ता है
2️⃣ पेट की गैस और bloating कम
3️⃣ Period pain और pelvic stiffness में राहत
4️⃣ ठंड में cracking skin व lips का बचाव
5️⃣ नींद की गुणवत्ता बेहतर
6️⃣ Anxiety व irritability कम
7️⃣ Circulation में subtle सुधार
8️⃣ Hormonal balance को support
9️⃣ Constipation में gentle relief
🔟 शरीर का overall Vata संतुलित — जिससे सर्दियों के कई रोग दूर रहते हैं

🔍 निष्कर्ष: छोटा उपाय, बड़े लाभ

नाभि में तेल लगाने की यह परंपरा सिर्फ घरेलू उपाय नहीं, बल्कि एक आसान Marma Therapy है। आधुनिक विज्ञान भी इसके moisturizing, anti-inflammatory और hormonal balance effects को मानता है।
सर्दियों में यह उपाय double प्रभाव दिखाता है—यह Skin, Digestion, Hormones और Mind—चारों को support करता है।

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून (autoimmune) त्वचा रोग है जिसमें त्वचा पर लाल, खुजलीदार और पपड़ीदार धब्बे बन जाते हैं। होम्योपैथी ...
11/12/2025

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून (autoimmune) त्वचा रोग है जिसमें त्वचा पर लाल, खुजलीदार और पपड़ीदार धब्बे बन जाते हैं। होम्योपैथी में सोरायसिस का उपचार व्यक्ति की विशिष्ट स्थिति और लक्षणों पर निर्भर करता है, और दवाएं एक योग्य चिकित्सक द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

**सोरायसिस के लक्षण
सोरायसिस के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

*त्वचा पर लाल धब्बे: त्वचा पर उठे हुए, सूजन वाले लाल रंग के पैच (plaque) बनना।

*चांदी जैसी पपड़ी: इन लाल धब्बों पर मोटी, सफेद या चांदी के रंग की पपड़ी जमना, जो आमतौर पर कोहनी, घुटनों, पीठ के निचले हिस्से और खोपड़ी (scalp) पर दिखाई देते हैं।

*खुजली और जलन: प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर तीव्र खुजली, जलन या दर्द महसूस होना।

*सूखी और फटी त्वचा: त्वचा का अत्यधिक सूखा होना, जिसमें दरारें पड़ सकती हैं और खून भी आ सकता है।

*नाखूनों में बदलाव: नाखूनों का मोटा होना, उनमें गड्ढे पड़ना, या रंग बदलना।

*जोड़ों में दर्द: कुछ मामलों में (सोरियाटिक गठिया), जोड़ों में सूजन, अकड़न और दर्द भी हो सकता है।

** #सोरायसिस के लिए होम्योपैथिक दवाएं

होम्योपैथिक उपचार रोगी के संपूर्ण स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और विशिष्ट लक्षणों के संयोजन पर आधारित होता है। कुछ सामान्य दवाएं जो अक्सर इस्तेमाल की जाती हैं, वे हैं:

# #लाइकोपोडियम (Lycopodium30): कुछ अध्ययनों ने प्लाक सोरायसिस के प्रबंधन में लाइकोपोडियम की प्रभावशीलता दिखाई है।
# #सल्फर (Sulphur30): यह अक्सर खुजली और जलन वाले त्वचा विकारों के लिए उपयोग की जाने वाली एक आम दवा है।
# #आर्सेनिक एल्बम (Arsenicum Album30): यह दवा आमतौर पर सूखी, पपड़ीदार त्वचा और जलन के लक्षणों के लिए दी जाती है।
# #एंटीमोनियम क्रूडम (Antimonium Crudum30): यह नाखूनों के सोरायसिस के मामलों में प्रभावी हो सकती है।

** लगाने के लिए Lebendar Hair oil (similia ) दिन में तीन से चार बार जहां-जहां है वहां वहां लगाना है

10/12/2025

•Sinusitis साइनोसाइटिस की आयुर्वेदिक चिकित्सा•
इस रोग से बहुत लोग दु:खी है । जानकारी के अभाव में लोग कैमीकल वाली दवाईयाँ खाते रहते है, लेकिन कोई सही इलाज नही मिल पाता ।
अआप घबराएं नही , आयुर्वेद में इसकी सफल चिकित्सा है । मैं आपके लिए अच्छी आयुर्वेदिक चिकित्सा लिखूंगा जो आपको कैमीकल वाली दवाओं से बचाएगी और जो साथ में गिफ्ट में रोग मिलते है उनसे भी बचाव होगा ।
आयुर्वेद अनुसार यह नजला-जुकाम है जो साइनस के affect होने से होता है। साइनस (Sinus) हवा से भरी खोखली छोटी-छोटी गुहा रूपी structures हैं, जो nose के आसपास चेहरे व सिर की bones के inside होते हैं तथा nose के inside खुलते है। जैसे both side face की bones में maxileri साइनस, nose के ऊपर head में frontal साइनस, eyes के पास ethmoid साइनस तथा
inside part में बीचोबीच mind से सटा sfenoid साइनस।
Sinusitis साइनस व आइटिस से मिलकर बना शब्द है, जिसका मतलब है साइनस के inside swelling आना। बहुत लोगों को इस problem में साइनस के साथ nose भी affect होती है इसलिए इसके लिए rainosities word का use भी किया जाता है। Related साइनस से nose के inside खुलने वाला austriyo छिद्र close हो जाता है। इसके अंदर बने mucus के मार्ग में बाधा start होने से कई समस्याएं पनपने लगती हैं। सब से ज्यादा maxileri साइनस (Sinus), फिर ethmoid साइनस, फिर frontal व सबसे कम sfenoid साइनस affect होते हैं। सभी साइनस एक साथ affect होने पर इस stage को pain sinusitis कहा जाता है। यह सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करने वाली एक साधारण समस्या है। हर साल प्रत्येक दस में तीन लोग इस रोग से पीड़ित हो जाते हैं। लगभग 15% में साइनस की समस्या पुरानी रहती है। 4 हफ्तों से कम समस्या रहने पर नई व 3 माह से अधिक रहने पर chronic Sinusitis कहलाती है।

कारण: – इस रोग के मुख्य कारण में नाक व साइनस में सूजन तथा एलर्जी बने रहना है। नाक के अंदर कई समस्याएं इसका कारण बन सकती हैं। जैसे हड्डी का टेढ़ापन। deviated nasal septum, terminates का बढ़ना, adenoids tissue बढ़ना, pollips का बनना आदि। 20% में maxileri साइनसाइटिस का कारण दांतो की समस्या होती है। बढ़ता प्रदूषण, गंदे पानी में swimming करना भी इसका कारण बन सकता है। लम्बे समय तक allergy रहने पर साइनस के inside की mucosa झिल्ली फूलकर रसोली (गांठ) जैसा आकार ले लेती है। इनको pollips कहते हैं। virus, bacteria के अलावा fungus भी साइनस infection का कारण होते हैं।

लक्षण: –सिर दर्द, भारीपन व संबंधित साइनस की जगह पर stress महसूस होता है। साइनस का दर्द आगे झुकने पर प्राय: बढ़ जाता है। बुखार, कमजोरी, सूंघने की शक्ति में कमी, सांस में बदबू आना। जैसे लक्षण हो सकते हैं। इंफेक्शन रिसाव के नाक के पीछे से throught में post nasal drip के रूप में टपकने से गला damage रहता है। खांसी बनी रह सकती है। nose से ear को जाने वाली Eustachian tube के प्रभावित होने पर ear में infection, भारीपन व hearing में problem हो सकती हैं। इलाज न होने पर आँखें और दिमाग की नजदीकी के कारण इन हिस्सों के प्रभावित होने की आशंका रहती है। इससे ओर vital cellulite, मेनिन्जाइटिस, cavernous साइनस thrombosis जैसी जटिल situation हो सकती है।

जांच व उपचार: Nasal endoscopy द्वारा nose व साइनस को दूरबीन की मदद से पर्दे पर देखा जाता है। C.T.scan से सभी साइनस की real situation व अन्य important structure के बारे में जानकारी मिल जाती है। antibiotics, anti allergic anti clock spray के प्रयोग से ज़्यादातर लोगों में इस समस्या को ठीक किया जा सकता है। Steam का परयोग भी लाभकारी होता है। बार-बार लंबे समय तक साइनस infection का कारण यदि हड्डी का टेढ़ापन, pollip या बढ़े हुए adenoids हैं तो इन्हे ठीक करना भी जरूरी होता है। Allopathic डाकटर जब रोग पकड़ में न आए तो surgery के लिए बोल देते है। इसे fuctional endoscopic साइनस surgery कहते हैं। इसमें बिना बाहरी चीर-फाड़ के दूरबीन की मदद से नाक के अन्दर साइनसेज के Austina को खोल दिया जाता है, जिससे mucus का रास्ता सुचारु हो जाता है अन्य technique balloon sinoplasty है, जिसमें पतले लचीले balloon को फूलकर साइनस के खोल को चौड़ा किया जाता है।

मेरे पास बहुत मरीज आप्रेशन करवा कर भी जब ठीक नही होते तो इलाज के लिए आते है । आयुर्वेद चिकित्सा करवाने के बाद उन्हे कभी किसी तरह की समस्या नही आती । अपना जीवन साधारण मनुष्य की तरह बिताते है ।

आपकी सेवा में कुछ उपाय बता रहा हुँ .... कुशल आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करके प्रयोग करें ।

Sinusitis साइनोसाइटिस का मेरा आयुर्वेदिक अनुभूत इलाज:-

नुस्खा नं:1
100ग्राम देशी हल्दी को देशी घी में भूनकर ठंडा होने के बाद ,उसमें 200ग्राम त्रिफला , 50ग्राम सफेद मिर्च , दालचीनी 50ग्राम , छोटी इलाची बीज 5ग्राम कूट पीसकर,छानकर सबको मिलाकर रख लें ।
सुबह-शाम 1-1चम्मच चूर्ण गर्म पानी या दूध से लें ।

नुस्खा नं:2
महालक्षमी विलास रस 1गोली ,
पुनर्नवादि मंडूर 2गोली ,
अरोग्यावर्धनी वटी 1गोली
चयवनप्राश 20ग्राम
सुबह खाली पेट चाटकर, थोड़ा गर्म पानी या चाय पी लें ।

नुस्खा नं:3
नवजीवन रस 5ग्राम
टंकण भस्म 10ग्राम
महालक्षमी विलास रस 6ग्राम
पुनर्नवादि मंडूर 15ग्राम
गोदंती भस्म 10ग्राम
ताप्यादि लोह नं१ - 5ग्राम
मधुयष्ठी चूर्ण 20ग्राम

सबको मिलाकर 60पुडिया बना लें । सुबह-शाम शहद से एक-एक पुडियाँ चाटकर ऊपर से कनकासव 2-2चम्मच गर्म पानी में मिलाकर खाने के १ घंटे बाद लें ।

नुस्खा नं:4
मेरा बेसन वाला नुस्खा , जो पहले लिख चुका हुँ । रात का खाना छोड़कर , बनाकर खाएं । साथ में नाक में किसी भी कंपनी ( वैद्यनाथ,डाबर , पतंजली ) का Shadbindu oil रात को सोते समय सिर टेढ़ा करके नाक में चार-चार बूंद डालें । 10 मिनट तक पूरा सिर टेढ़ा करके रखें ।
1 घंटे तक पहले और बाद में कोई भी तरल ठंडी चीज न लें ।
आप यह दवाओ का प्रयोग करके सदा के लिए इस रोग के लिए छुटकारा पा सकते है ।

जरूरी सूचना :- नुस्खा नं:2 और नुस्खा नं:3 में से कोई एक ही इस्तेमाल करें । बाकी सारे इस्तेमाल करने है । यानि Total तीन नुस्खें इस्तेमाल करने है ।

आयुर्वेद के ऐसे और नुस्खों की जानकारी के लिए हमें follow जरूर करें, Post शेयर करें। स्वर्ण योगों की जानकारी के लिए स्वर्ण भस्म श्रृंखला पढ़ें और अनुभूत नुस्खों के लिए श्री अमनामृत सागर -अनुभूत नुस्खे श्रृंखला के सभी भाग पढ़ते रहिए। धन्यवाद 🙏🏻

★Disclaimer 👇🏻
👉🏾 आपसे एक जरुरी बात :- नशा किसी भी तरह का हो , चाहे सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू,गांजा,अफीम,शराब, स्मैक, हीरोइन आदि। जिन्होंने भूतकाल में सेवन किया हो , या दवा के साथ सेवन कर रहा हो , छोड़ न रहा हो , तो चाहे लाखों की दवा खा लें। कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

07/12/2025

होम्योपैथी - नींद न आना- (अनिद्रा रोग) Insomnia

परिचय- यह रोग कई बार तो किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है इसलिए इस रोग को ठीक करने के लिए ऐसी औषधियों को उपयोग करना चाहिए जो किसी ऐसे रोग को ठीक करता हो जिसमें नींद न आने के लक्षण उत्पन्न हों। ऐसे औषधि जहां इस रोग को ठीक करेगी, वही वह नींद भी लाने में मदद करेगी। होम्योपैथी में सिर्फ नींद लाने के लिए कोई विशेष औषधि नहीं है और प्रत्येक औषधि का नींद पर प्रभाव पड़ता है इसलिए मुख्य-रोग के लिए चुनाव ही ऐसी औषधि का होना चाहिए जिसमें मुख्य रोग के लक्षणों के साथ नींद के लक्षण भी हों।

यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है जैसे- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।

कारण :- सिर में रक्त की अधिकता, सिर का अधिक ठंडा होना, अधिक खाना, उपवास, बहुत ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन करना, मानसिक उत्तेजना होना, कब्ज की समस्या होना या अधिक चिंता होना आदि कारणों से यह रोग होता है। कई प्रकार के रोग होने के कारण से भी नींद न आने की शिकायत हो सकती है।

विभिन्न औषधियों से चिकित्सा-
१. लाइकोडियम- दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

२. चायना- रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि ६ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।

३. कैल्केरिया कार्ब - इस औषधि की ३० शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नींद नहीं होती बल्कि नींद होती है।

४. कॉफिया - खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, ३ बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहे, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी तो स्वप्न देखे। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की २०० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की ६ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

५. जेल्सीमियम - यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनको अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हों तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

६. ऐकोनाइट - बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पायें, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की ३० का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।

७. कैम्फर - नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।

८. इग्नेशिया - किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की २०० शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की २०० शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है,नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है। मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौंक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की ३ या ३० शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।

९. बेलाडोना - मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थकावट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटे भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।

१०. काक्युलस- यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की ३ से ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।

११. सल्फर - रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जरा सी भी आवाज आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।

१२. नक्स वोमिका - रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यदि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।

किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए। कब्ज बनना, पेट में कीड़े होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की ६ या ३० शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।

१३.पल्स - रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागृत अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा होता है, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशानी भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोंके आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त होता है अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और ३-४ बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण शराब, चाय, काफी के सेवन के कारण नींद न आना है। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।

१४. सेलेनियम - रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग करना चाहिये।

१५. ऐम्ब्राग्रीशिया - रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंता होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की २ या ३ शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।

१६. फॉसफोरस - रोगी को दिन के समय में नींद रहती है, भोजन के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की ३० शक्ति का उपयोग करना चाहिए।

आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।

रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का आक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।

१७. टैबेकम- यदि स्नायुविक अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की ३० शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।

१८. ऐवैना सैटाइवा - स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के ५ से १० बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छुडाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।

१९. स्कुटेलेरिया - यदि किसी रोगी को अनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।

२०. सिप्रिपीडियम - अधिक खुशी का समाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के ३० से ६० बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।

२१. कैमोमिला - दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा ऊँघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती हो। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की १२ शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।

२२. बेल्लिस पेरेन्निस- यदि किसी रोगी को सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या ३ शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
२३. कैनेबिस इंडिका- अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। यदि रोगी में इस प्रकार के लक्षण हैं तो कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या ३ शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।

२४. पल्सेटिला- रात के समय में लगभग ११ से १२ बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की ३० शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।

२५. सिमिसि- यदि स्त्रियों के वस्ति-गन्हर की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की ३ शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।

२६. साइना- पेट में कीड़े होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की २ मात्रा या २०० शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।

२७. पैसिफ्लोरा इंकारनेट- नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मूल-अर्क का एक बूंद से ३० बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।

नींद लाने के लिए कुछ अन्य उपाय :-

¬ सोने से पहले मुंह, गर्दन का पिछला भाग, कान और दोनों पैर ठंडे पानी से धोए।

¬ सोने से पहले हल्का गर्म पानी में एक कपड़े को डालकर उसे अच्छी तरह से निचोड़ ले और फिर इसके बाद इससे पूरे शरीर को पोछें और थोड़ी देर बाद घूमने के लिए जाना चाहिए तथा इसके बाद सोना चाहिए इससे अच्छी नींद आती है।

¬ रोगी को भारी पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
¬ ऊंची तकिए पर सिर रखकर सोना चाहिए।

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