No More Suicide और आत्महत्या नहीं

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  या छुपा अवसाद या गुप्त अवसाद और आज बात करते है इन सब के उल्टे की भी ।दुख गहरा भी है , लम्बा भी होता जा रहा है और इस दु...
05/03/2024

या छुपा अवसाद या गुप्त अवसाद और आज बात करते है इन सब के उल्टे की भी ।

दुख गहरा भी है , लम्बा भी होता जा रहा है और इस दुख को व्यक्त करने में विभिन्न कारणों की वजह से झिझक भी है .... इस लिए छुपा रहे है , ऊपर से व्यक्ति / परिवार / समाज / कार्यस्थल पर खुश नजर आ रहे है ।

सहारा नही है , किसी से कह नहीं सकता , कोई समझेगा नही , परिस्थितियां अनुकूल नहीं है वगैरह वगैरह.... ये सब तड़का लगा लीजिए पर वास्तव में आप " masking depression " या छुपा अवसाद या गुप्त अवसाद का शिकार है ।

मै ठीक हूं या सब सही तो है या मैं खुश हूं का मुखौटा पहन कर आप न सिर्फ खुद को अपितु परिवार को भी गुमराह कर रहे है । यह असामान्य और गंभीर भी है ।

अपराधबोध से ग्रसित होना , शर्मिंदगी में रहना , पुरानी गलतियां वर्तमान मे भी हावी रहना , धोखा को सहन न कर पाना , अवसरों में कमी या खुद को दोषी ठहराना जैसे अनगिनत जीवन चलचित्र होते है जीने हम देखते और उनसे गुजरते है , आप को ये सब पढ़ने की जरूरत सिर्फ इस लिए पड़ रही है कि आप अमुक घटना के कारण वहीं रुक गए है , पर जीवन चल रहा है ।

अब बात करते है गुप्त अवसाद ( masking depression ) के उल्टा की , ये भी खूब मिल रहा है आज कल , बीमार या अवसाद ग्रसित होने का ढोंग अर्थात अपनी समस्याओं से भगोड़ापन या डरपोक या दब्बू होने की वजह से खुद को मानसिक बीमार बना कर सहानुभूति बटोरना या जिम्मेदारी से भाग जाने के रास्ते तलाश करना ।
छोटी सी शारीरिक समस्या को बढ़ा चढ़ा कर बताना भी इसी समस्या का अक्सर छोटा सा रूप होता है ।

निदान , सब समस्यायों का एक समाधान नहीं होता , और आप उम्मीद कर रहे है की मैं चंद लाइनों में कोई हल बता दूं गा तो फिर से आप गलत है ,

सरल शुरुवात
अपने दुख , दर्द , संघर्ष , गुस्सा , हताशा सब को साझा करे ।
पर्याप्त भोजन लें ।
घूमना , टहलना , योग ,ध्यान , अध्यन , एक्सरसाइज और संगीत फिल्म ( मनोरंजन ) जरूर करें ।
पर्याप्त नींद लें ।
सोशल बनें – सामाजिक कार्य और सामाजिक उत्सवों में भागीदारी करें ।
बदलाव करें – सब में खाना / पीना / कपड़े / विचार / रास्ते ।
पसंदीदा काम करें भले ही वो आप के व्यवसाय या उम्र से इतर हो ।
वास्तविक समस्या पर थोड़ा ध्यान दे कर हल निकालने का प्रयास करे ( सिर्फ सोचें न एक्शन ले )

मै खुद नही जानता की ये नीचे की पंक्तियां क्यों लिखने का मन कर रहा है –
बर्बादियों का शोख मनाना फिजूल था ,
मै बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया ।
-साहिर लुधियानवी
#मनोरोग

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