25/12/2025
#डॉ के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन, भ्रामक हैं।
NIRMALA HOSPITAL AND MATERNITY CENTRE से रेफर किए गए एक मरीज की MAX HOSPITAL में दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई।
यह क्षति न केवल परिवार, बल्कि पूरे अस्पताल परिवार के लिए भी गहरा आघात है। हम दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि और परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।
लेकिन दुःख के बाद अस्पताल में की गई तोड़फोड़, डॉक्टरों व स्टाफ को धमकाना और बिना पूर्ण तथ्यों के सोशल मीडिया पर बदनामी अत्यंत निंदनीय है।
हर डॉक्टर मरीज को बचाने की अंतिम क्षण तक पूरी कोशिश करता है—असफलता डॉक्टर के लिए भी भीतर से तोड़ देने वाली होती है।
दुःख स्वाभाविक है, पर हिंसा और झूठ किसी समस्या का समाधान नहीं।
सत्य केवल निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आता है।
कृपया तथ्यों की पुष्टि करें—हिंसा नहीं, संवाद और न्याय का रास्ता चुनें।
रास्ता हिंसा नहीं, सेवा होना चाहिए।
Nirmala Hospital पर हुआ हमला
पूरे चिकित्सा तंत्र पर हमला है।
डॉ. राजेंद्र बनौधा और उनकी टीम को न्याय मिलना चाहिए।
किसी भी विवाद अथवा शिकायत के निवारण हेतु भारत के संविधान एवं विधि द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाएँ उपलब्ध हैं, जिनका पालन किया जाना अनिवार्य है।
उक्त कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से दंगा), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना), 427 (नुकसान/तोड़फोड़), 506 (आपराधिक धमकी) सहित अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत संज्ञेय एवं दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं।
इस अवैध कृत्य से अस्पताल की शांति, सुरक्षा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
अस्पताल प्रशासन, डॉ. राजेंद्र बनौधा एवं उनकी संपूर्ण चिकित्सकीय टीम अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत सक्षम प्रशासनिक एवं न्यायिक प्राधिकरणों से निष्पक्ष जाँच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्यवाही की माँग कर रही है।
न्याय की माँग हिंसा या गुंडागर्दी से नहीं, बल्कि केवल विधिसम्मत प्रक्रिया से ही की जानी चाहिए।
— Nirmala Hospital & Maternity Centre, Ayodhya