17/11/2025
Another daily story at my clinic:
“डॉक्टर साहब, आपने कोई ब्लड टेस्ट नहीं कराया?”
Full Body Check Up कब करवाएंगे?”
मेरे क्लिनिक में रोज़ ऐसे कई मरीज आते हैं जिन्हें लगता है कि
इलाज शुरू होने से पहले 10–15 ब्लड टेस्ट doctor करा कर संतुष्ट हो जाये.
एक होम्योपैथिक डॉक्टर के तौर पर मैं साफ कहता हूँ—
हर बीमारी रिपोर्ट से नहीं पकड़ी जाती…
और हर रिपोर्ट बीमारी नहीं पकड़ती।
यही भ्रम आज समाज में बहुत गहराई तक फैला हुआ है।
Homeopathic View
होम्योपैथी सिर्फ report numbers नहीं देखती…
हम देखते हैं:
• मरीज का constitution, प्रकृति
• Mind–Emotions, स्वभाव व्यवहार
• Past history
• क्या बढ़ाता–घटाता है
• Family medical tendency
• Symptom की पूरी totality
असली बीमारी यहाँ दिखती है —
ना कि 3 पन्नों की रिपोर्ट में।
Full Body Packages का सच
999/- वाले Whole Body Packages…
Attractive names… लंबी lists…
लेकिन असलियत:आधे टेस्ट clinically ज़रूरी नहींNormal चीज़ें भी “abnormal” दिखा दी जाती हैं
जिसे मरीज डर जाता हैफोकस reports पर चला जाता है
और लोग मान लेते हैं—
“Report normal है मतलब मैं ठीक हूँ”
जबकि symptoms तो बने रहते हैं।
Unnecessary Tests से Unnecessary Anxiety
Report में थोड़ा कम–ज़्यादा आते ही मरीज घबरा जाता है, Google करता है, Stress बढ़ जाता है Anxiety अपने peek पर.
जबकि ये variations अक्सर normal physiology होती हैं।
बार-बार Testingशरीर पर गलत असर डालती है
• बार-बार खून निकालना
• Imaging में contrast agents
• कुछ scans में radiation
बिना जरूरत की testing शरीर पर भार डालती है।
Commercial Bundles and Over-Testing
ये packages मरीज की health के हिसाब से नहीं,
बिज़नेस logic से बनाए जाते हैं।
ज़रूरी टेस्ट कम Non-essential टेस्ट ज्यादा
मरीज सोचता है — “इतना सब है पैकेज में, करवाना चाहिए…” और यहीं trap शुरू होता है।
Reports → Confusion → Wrong Medicines
Borderline रिपोर्ट देखकर
मरीज खुद दवाइयाँ शुरू कर देता है।
Self-medication बीमारी की जड़ छुपा देती है
और आगे चलकर नुकसान करती है।
टेस्ट तभी — जब उसका कारण हो
Test करवाएं सिर्फ तब जब:
• लक्षण persistent हों
• Existing medical issue हो
• Monitoring ज़रूरी हो
• Age-risk factors हों
• Doctor clinically advise करे
हर व्यक्ति को हर साल
“पूरा शरीर स्कैन” जरूरी नहीं।
My Approach
मैं टेस्ट करवाता हूँ — लेकिन सिर्फ:
लक्षणों के आधार पर
जरूरत के हिसाब से
Scientific indication के साथ
Test for the sake of test गलत चिकित्सा है.
Smart Testing, Not Blind Testing
ब्लड टेस्ट ज़रूरी हैं,
लेकिन हर मरीज को पूरा body panel दे देना—
यह इलाज नहीं… सिर्फ बिज़नेस मॉडल है।
कम रिपोर्ट, ज़्यादा समझ — यही असली होम्योपैथिक उपचार है।
Symptoms कभी झूठ नहीं बोलते। clinical judgment जादा प्रभावशाली है.
Dr.P.K.Rai (Prrasanjeet)