Dr.Deepak Saini

Dr.Deepak Saini Herbal & Ayurveda medicine's

15/04/2020
सा की हम सभी जानते हैं आजकल कोरोना वायरस इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा है, ऐसे में जरूरी है कि आप अपने आपको इससे बचा कर रखें और स...
14/04/2020

सा की हम सभी जानते हैं आजकल कोरोना वायरस इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा है, ऐसे में जरूरी है कि आप अपने आपको इससे बचा कर रखें और सावधानी बरतें। कोरोना से बचने के लिए जरूरी सावधानी के साथ साथ आवश्यक है आपकी इम्युनिटी भी अच्छी हो। क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति कहाँ से मिलती है? तो आज हम आपको यहाँ बताएंगे की हमारा शरीर किस तरह बीमारियों और इन्फेक्शन से लड़ता है और कौन इसे शक्ति प्रदान करता है। इसका जबाव है – इम्युनिटी (Immunity Meaning in Hindi), जिसे प्रतिरक्षा भी कहा जाता हैै। यह इम्युनिटी ही होती है जो हर तरह के संक्रमण से लड़ती है, कैंसर की कोशिकाओं को मारती है।
यदि आपकी इम्युनिटी सही होगी तो आप कोरोना वायरस के साथ साथ अन्य रोगों और गंभीर बिमारियों से भी लड़ पायेंगे। आइये जानते हैं इम्युनिटी क्या और कितने तरह की होती है। जानिये इम्युनिटी कैसे बढ़ाया जा सकता है और किन किन कारणों से हमारे शरीर की इम्युनिटी कम हो सकती है।

इम्युनिटी क्या है – Immunity Meaning in Hindi
इम्युनिटी को हिंदी में रोग प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा कहा जाता है।

इम्युनिटी के प्रकार
प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है- इनेट और एडेटिव इम्युनिटी (Immunity Meaning in Hindi)

इनेट इम्युनिटी: यह व्यक्ति को रोगों के प्रति सुरक्षा देती है परन्तु यह दीर्घकालिक नहीं होती।
एडेटिव इम्युनिटी: यह व्यक्ति को रोगों के प्रति सुरक्षा देती है साथ ही यह विशिष्ट रोगजनकों के खिलाफ दीर्घकालिक सुरक्षा भी देती है।
“सभी जानवरों, पौधों और कवकों में इनेट इम्युनिटी होती है। जबकि Vertebrates में एडेटिव इम्युनिटी होती है।”

इम्युनिटी कम होने के कारण
क्या आपने कभी सोचा है की कुछ लोग दूसरों की तुलना में ज्यादा बीमार क्यों होते हैं? इसका उत्तर है शायद उनकी बॉडी में उतनी क्षमता नहीं होती कि जर्म्स और वायरस से लड़ सके, जिसका मतलब यह है कि आपकी इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम या उनका इम्यून सीटें कमजोर है। इसके कम होने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं जो नीचे दिए गए हैं-

तनाव: लगभग हम सभी ने हमारे जीवन में किसी न किसी बिंदु पर तनाव जरूर महसूस किया होगा। सिरदर्द, छाती में दर्द, बेचैनी और समग्र तनाव महसूस करने से तनाव की पहचान होती है। ये सभी कारक मिलकर हमारे इम्यून सिस्टम को और कठिन मेहनत करने के लिए मजबूर करते हैं जिससे हमारा शरीर बिमारियों से लड़ सके। परन्तु कभी कभी हमारा इम्यून सिस्टम इनसे लड़ नहीं पता और Low Immunity का कारण बनता है।

व्यायाम न करना: हमारा इम्यून सिस्टम हमारे शरीर के लिए और हमारी लाइफ स्टाइल के अनुसार हमेशा फिट हो यह हर बार जरुरी नहीं होता एक अध्ययन बताता है की नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से न्यूट्रोफिल्स को कार्य करने में सहायता करता है, न्यूट्रोफिल्स वो सेल्स होती हैं जो अवांछित और कभी-कभी खतरनाक सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए काम करती हैं। ये सूक्ष्मजीव स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार एक्सरसाइज न करना Low Immunity का कारण बन सकता है।

सही नींद न लेना: क्या आप जानते हैं कि जब आप सो रहे होते हैं तब भी आपकी ब्लड सेल्स जो इन्फेक्शन से लड़ती हैं, वो उस समय भी इन्फेक्शन को आपकी बॉडी से दूर रखने के लिए कार्य कर रही होती हैं। इसलिए कम नींद और थकान भी Low Immunity का कारण हो सकती है।

अनुचित पोषण: अनुमान यह है कि कम डाइट और व्यायाम की कमी साथ मिलकर, हर साल 310,000 और 580,000 अमेरिकियों की हत्या के लिए जिम्मेदार होती है। इसलिए जरूरी है की संतुलित भोजन करें जिसमे सभी विटामिन, खनिज, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट्स और अभी जरूरी तत्व उपस्थित हों। वहीं फैटी जंक फूड्स को खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमे पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं जो इम्यून सिस्टम को काम करने से रोकते हैं।

इम्युनिटी बढ़ने के उपाय
इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित डाइट्स और उपायों को कर सकते हैं

आयुष मंत्रालय द्वारा इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक शक्ति) बढ़ाने के उपाय

नियमित रूप से व्यायाम करें: नियमित व्यायाम हमारे ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा कर हमारी इम्युनिटी को बढ़ता है

विटामिन डी वाले खाद्य पदार्थों का उपभोग करें: विटामिन डी का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, खासकर जब हमारे शरीर को कोल्डऔर फ्लू सहित श्वसन संक्रमण के खिलाफ लड़ना हो ।

अतिरिक्त दवा खाने से बचें: अत्यधिक दवाएं का सेवन आपकी इम्यून सिस्टम में बाधा डालती हैं और आपके लिवर, किडनी और रेस्पिरेटरी सिस्टम को कार्य करने में बाधा डालती हैं और गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि दवाएं और एंटीबायोटिक्स शरीर को बीमारियों से ठीक करने में मदद करते हैं, पर यह शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने में मदद नहीं करती है।

कॉफी की जगह ग्रीन टी पियें: हालाँकि कॉफ़ी में कुछ एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं पर यह हमारे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को रोकती है इसलिए कॉफ़ी के स्थान पर ग्रीन टी पियें यह आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ती है और इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है।

धूम्रपान और शराब पीने से बचें: धूम्रपान, तम्बाकू और शराब का सेवन आपके इम्यून सीटें को कार्य करने में बाधा डाल सकता है। जिससे आपका शरीर कई बिमारियों से इन्फेक्टेड हो सकता है, इसलिए इन सभी का त्याग करे और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं।

विषाक्त खाद्य पदार्थों को न खायें: रिफाइंड शुगर और प्रोसेस्ड फ़ूड का बहुत लम्बे समय तक और बहुत ज्यादा सेवन आपके इम्यून सिस्टम को कमजोर बना सकता है, जिसके कारण बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है और हमारी वाइट ब्लड सेल्स जो बैक्टीरिया को मारती हैं उनकी क्षमता कम हो जाती है।

स्वच्छता बनाए रखें: ज्यादातर इन्फेक्शन दूषित सतहों को छूने से और फिर उन्ही को अपने मुंह आँख नाक पर लगाने से फैलते हैं। इस इन्फेक्शन के होने की सम्भावना को कुछ अच्छी आदतों को अपनाकर दूर किया जा सकता है, जैसे – आस पास स्वछता का ध्यान रखें, खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद हाथों को अच्छे से धोएं, दूषित भोजन न खाएं, नाखूनों को काट कर रखें इत्यादि।

पर्याप्त नींद लें: नींद की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली को समझौता करने की लिए मजबूर करती है इसलिए आपको हर दिन पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।

दिल खोल कर हँसे: खुल कर हँसने से आपकी इम्युनिटी तो बढ़ती ही है साथ ही आपकी मेन्टल हेल्थ में भी सुधार आता है, इसलिए जब भी मौका मिले अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुल कर हँसे।

प्रतिरक्षा बूस्टिंग फूड्स का उपभोग करें: अपनी समग्र प्रतिरक्षा में सुधार के लिए तरबूज, गेहूं, दही, पालक, मीठे आलू, ब्रोकोली, लहसुन, अदरक, अनार का रस इत्यादि जैसे प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का उपभोग करें। तरबूज में Glutathione, एंटीऑक्सिडेंट होता है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है। प्रतिरक्षा में वृद्धि के लिए गेहूं की जर्म भी खपत की जा सकती है। यह एंटीऑक्सिडेंट्स, बी विटामिन और जस्ता का एक बड़ा स्रोत है। गेहूं की जर्म में प्रोटीन, फाइबर और कुछ स्वस्थ वसा का एक बड़ा संयोजन भी होता है।
हमारे शरीर को प्रतिरक्षा की बहुत आवश्यकता होती है, तभी यह विभिन्न प्रकार के रोगों और इन्फेक्शन से लड़ सकता है, इसलिए जरुरी है कि अपने शरीर का ध्यान रखें, हेल्दी डाइट लें और अपने इम्यून सिस्टम और इम्युनिटी का ख्याल रखें।

डा. दीपक सैनी
(Research Associate)
CCRAS

सीओपीडी फेफड़ों की घातक बीमारी है जिसमें श्वास नलिकाएँ सूजकर सिकुड जाती हैं. इनकी सूजन में लगातार वृद्धि होती रहती है और...
27/10/2019

सीओपीडी फेफड़ों की घातक बीमारी है जिसमें श्वास नलिकाएँ सूजकर सिकुड जाती हैं. इनकी सूजन में लगातार वृद्धि होती रहती है और कुछ समय बाद फेफड़े छलनी हो जाते हैं जिसे एँफयज़ीमा (emphysema) भी कहते हैं. यह रोग साँस लेने में दिक्कत के अनुभव से शुरू होता है और अंत में पूरे श्वसन तंत्र को प्रभावित कर देता है.

रोग के लक्षण Symptoms of COPD

सीओपीडी श्वसन तंत्र में होने वाले रोगों समूह है जिसमें श्वास की लंबाई में लघुता आ जाती है. इससे शरीर की ऑक्सिजन लेने की क्षमता में कमी आ जाती है तथा carbon-di-oxide की मात्रा खून में बढ़ जाती है. फेफड़ों में जलन की वजह से श्वास नलिकाएँ पिचक जाती हैं.

इस रोग से श्वास नलिकायों में खिचाँव भी उत्पन्न होता है जिससे रोगी को श्वास लेने में कष्ट होता है तथा घबराहट भी महसूस होती है. यह लंबी अवधि तक चलने वाली बीमारी है जिसे पूर्णतयः ठीक नही किया जा सकता परंतु इसे बढ़ने से रोका जा सकता है.

सीओपीडी के कारण (Causes of COPD in Hindi)

सीओपीडी मुख्य रूप से धूम्रपान के सेवन से हो जाता है. दूषित वातावरण में प्रवास करने यह रोग उत्पन्न होता है. अधिक प्रदूषण, वातावरण में कीटनाशक या रंग रोगन के केमिकल्स को श्वास के ज़रिए अंदर लेने से शरीर में इस रोग ला सकती है. अधिक प्रदूषण, वातावरण में कीटनाशक या रंग रोगन के केमिकल्स को श्वास के ज़रिए अंदर लेने से शरीर में इस रोग ला सकती है.

इस रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को अनेक सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे वे रिस्क फॅक्टर (risk factors) से दूर रहें. पूर्व लिखित रिस्क फॅक्टर्स के अलावा किचन में उठने वाले धुएं और मसालों की गंध से दूर रहें एवं बत्ती वाले केरोसिन के स्टोव का उपयोग न करें.

सीओपीडी में लाभ देने वाली औषधियाँ (Ayurvedic remedies useful in COPD in Hindi)

सीतोपालदी चूर्ण: यह हर प्रकार की श्वसन संबंधित व्याधि के उपचार में प्रयोग होने वाली औषधि है. यह श्वास नलिकायों की जलन और सूजन को कम करते हुये रोगी को साँस लेने में सहयोग करती है . इसके साथ-साथ यह शरीर की रोग-प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाती है.

अकक (Adhatoda vasica): यह श्वसन क्रिया में सहयोग देना वाला और इस तंत्र से संबंधित विभिन्न प्रकार के संक्रमणों को होने से रोकता है.

पुष्करमूल : (Inula racemosa) इस रोग से संबंधित सभी श्वसन संबंधी दिक्कतों से आराम दिलवाने में सक्षम है. यह गाढ़ी, सफेद और हरी तीनो प्रकार की बलगाम (कफ) को निकालने में समर्थ है. यह फेफड़ों में कफ के निर्माण को नियंत्रित करता है और श्वास लेने की क्रिया को भी सहयोग प्रदान करता है.

मुलेठी: (Glycyrhiza glabra) इस औषधि का प्रयोग सूखी खाँसी के उपचार में किया जाता है जब रोगी का कफ आसानी से ना निकलता हो. यह पीली और हरी बलगाम को निकालने में अधिक सहायक् है.

अश्वगन्ध: (Withania somnifera): इस औषधि का प्रयोग इन रोगियों में ताक़त प्रदान करता है और थकावट तथा कमज़ोरी को दूर करता है.

अभ्रक भस्म: इस भस्म के प्रयोग से इस रोग के द्वारा फेफड़ों में और अधिक नुकसान होने से रोका जाता है. इस भस्म के प्रयोग से उस स्थिति में सहयता मिलती है जहाँ श्लेष्मा और कफ को फेफड़ों से निकास बिना किसी रुकावट के हो जाता है. परंतु जहाँ कफ जमा हो और निकलता ना हो, उस स्थिति में इसका प्रयोग नही करना चाहिए अन्यथा कफ सूख कर फेफड़ों में जम जाता है और उनपर अभेद्य परत बना लेता है. परंतु प्रवाल पिशटी और मुलेठी के साथ इसका उपयोग लाभकारी हो सकता है. इस रोग में तीनो औषधियों की मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि ग़लत प्रयोग से बहुत नुकसान होने की संभावना है.

टंकण भस्म: इस भस्म का प्रयोग सीओपीडी रोग के निवारण में किया जाता है. यह गाढ़ी श्लेष्मा को फेफड़ों से निष्कासित करने में सहयता देता है.

शृंग भस्म: इस भस्म का प्रयोग भी फेफड़ों में जमा श्लेष्मा को निकालने के लिए किया जाता है. यह टंकण भस्म से अधिक शक्तिशाली है तथा इससे छाती में मौजूद कफ को निकालने में सहायता करता है. छाती की दर्द , साँस लेने में दिक्कत और श्वास में आई लघुता को दूर करता है.

यूकलिप्टस आयिल (Eucalyptus oil) के प्रयोग से भी इस बीमारी में लाभ होता है. इस रोग से monoterpenes नामक घटक के कारण रोग में लाभ मिलता है.

इससे जमी हुई कफ को फेफड़ों से बाहर निकालने में सहायता मिलती है. Echinacea और वाइल्ड इंडिगो (Wild indigo) तथा सीडर के मिश्रण को लेने से श्वसन संबंधी रोगों में बहुत लाभ मिलता है.

को एंजाइम क्यू (Coenzyme Q) के प्रयोग बहुत सी स्थितियों में लाभकारी पाया गया है.
Dr Deepak Saini
(R.A.) CCRAS
Central Council for Research in Ayurvedic Sciences, Ministry of AYUSH, Government of India

 #योनिभ्रंश_की चिकित्सा :-योनिभ्रंश हर रसायन -(१)- अशोक घनसत्व २० ग्राम(२)- संगेजरहात भस्म २० ग्राम(३)- कुक्कुटाण्डत्वक ...
17/08/2019

#योनिभ्रंश_
की चिकित्सा :-
योनिभ्रंश हर रसायन -
(१)- अशोक घनसत्व २० ग्राम
(२)- संगेजरहात भस्म २० ग्राम
(३)- कुक्कुटाण्डत्वक भस्म १० ग्राम
(४)- लौह भस्म (सत् पुटी) 5 ग्राम
(५)- बंग भस्म 5 ग्राम
बनाने की विधि एवं सेवन :-
इनको कूट-पीस कर कुल 60 पुड़िया बना लें ।
एक पुड़िया सबह और एक पुड़िया शाम शहद में मिलाकर चाटें ‌।
योग नम्बर २ :-
योनिभ्रंश हर चूर्ण -
(1)- माजूफल १०० ग्राम
(2)- अश्वगंधा 50 ग्राम
(3)- आंवला 50 ग्राम
(4)- फिटकरी भस्म 25 ग्राम
(5)- बबूल का गोंद 25 ग्राम
बनाने की विधि -
सबको कूट- कपड़छन चूर्ण बना लें ।
तीन-तीन ग्राम खाने के बाद जल से ले ।
पत्रंगासव २ चम्मच+अशोकारिष्ट २ चम्मच + अश्वगंधारिष्ट २ चम्मच ; बराबर पानी मिलाकर सुबह-शाम खाना खाने के बाद लें ।

खाने-पीने का परहेज रखें ।

गर्भाशयनलिका अवरोध (Tube Block ) के कारण बांझपन औरतों के लिए सरल आर्येदिक औषधियां गर्भ धारण :-जो औरतें सहज रूप से गर्भ ध...
11/05/2019

गर्भाशयनलिका अवरोध (Tube Block ) के कारण बांझपन औरतों के लिए सरल आर्येदिक औषधियां

गर्भ धारण :-
जो औरतें सहज रूप से गर्भ धारण नहीं कर पाती है
उनके लिए आयुर्वेद में कुछ उपचार बताए गये हैं !
जिनको अगर प्रयोग में लाया जाये तो गर्भ
स्थापित हो सकता है ऐसे ही कुछ चुनिन्दा नुस्खे
आपको बता रहा हूँ जो सहज और सरल है और
प्रयोग में लिया जा सकता है !!

गर्भधारक योग :-
यह योग मासिक धर्म आने के पश्चात् चौथे दिन से दिन में 2 बार 3 दिन तक 1 - 2 गोली खिलाकर ऊपर से दूध पिलावें इस तरह तीन माह करने सें गर्भधारण हो जाता हैं ।

1. एक चम्मच असगंध का चूर्ण , एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ
मासिक धर्म के छठे दिन से पुरे माह पीने से
बंध्यापन दूर होकर गर्भधारण होता है ! यह
प्रयोग सुबह खाली पेट प्रयोग करना चाहिए
और जब तक लाभ ना हो तब तक दोहराते रहना
चाहिए !!

2. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की
मात्रा में दूध के साथ ऋतुकाल के बाद 21 दिनों
तक सेवन करने से गर्भ धारण होता है !!

3. अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन
करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है !!

4. नीलकमल का चूर्ण और धाय (धातकी) के
पुष्पों का चूर्ण समभाग मिलाकर ऋतुकाल
प्रारम्भ होने के दिन से 4 दिनों तक नियमित रूप
से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से
गर्भधारण होता है ! प्रयोग असफल होने अगले
ऋतुकाल से पुनः दोहराए !!

5. पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधे चम्मच की
मात्रा में कच्चे दूध के साथ मासिक धर्म शुरू होने
के पांचवें दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम प्रयोग
करने से गर्भधारण होता है !
6. स्वानुभूत औषधियां एक ख़ास अनुपात मे डाल कर तैयार की जाती है ।
अजवायन चुर्ण
सोंठ चुर्ण
गाजर बीज चुर्ण
काले तिल का चुर्ण
शिवलिंगी बीज चुर्ण आदि और सहायक दवाईयां इस प्रकार है ।
रज: प्रर्वतनी बटी
चन्द्रप्रभा वटी
स्त्री रसायन बटी, फलघृतम आदि ।
दशमुलारिष्ट + पत्रांगासव दोनो का एक ख़ास अनुपात में मिलाकर रख लें ।
यदि गर्भाशय नलिका अवरोध की वजह से बन्धयत्व ( बाझंपन ) हो तो उपरोक्त औषधियों के साथ निम्नलिखित औषधियों के सेवन से विशेष लाभ होता है । उपरोक्‍त. ओषधियो का सेवन चिकित्सक की सलाह से करे।
डा दीपक सैनी
8079072286

लंबाई बढ़ाने के 20 प्राकृतिक उपाय-  20 Natural Ways to Increase height- * लम्बाई और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गेहूँ के दान...
09/05/2019

लंबाई बढ़ाने के 20 प्राकृतिक उपाय-
20 Natural Ways to Increase height-

* लम्बाई और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गेहूँ के दाने के बराबर मात्रा में चूना रोज दही, दाल या सब्जी में मिलाकर खाना चाहिए । या पानी में मिलाके पीना चाहिए । इससे लम्बाई और स्मरण शक्ति दोनों का ही विकास होता है। शरीर में चैतन्यता और चपलता आती है।

इस उपाय को करने से 3 माह में ही कद का बढ़ना शुरू हो जाता है , इसका नियमित रूप से सेवन करने वाले लोग त्रीव बुद्दि वाले और अच्छी लम्बाई वाले होते है । ( लेकिन पथरी के मरीज चूने का सेवन ना करें )

* कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा मंफ खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें।
इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 45 दिन तक लेते रहें। इससे मात्र 45 से 60 दिन में ही लम्बाई बढ़ जाती है । इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।

* 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, 'पुल्ल-अप्स'करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।
इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो,तो अश्वगंधा न लें।

* मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।

1. प्रोटीन, कैल्शियम, वसा और आयरन को अपने आहार में शामिल करें । इसके अलावा खूब सारी सब्जियां और फल का भी नियमित रूप से सेवन करें।

2. शरीर में ग्रोथ हार्मोन को बढाने के लिये आपको दिन में 3 बार खाना खाने के अलावा 6 बार छोटे छोटे मील अवश्य ही खाने चाहिये।

3. लम्बाई बढ़ाने के लिए प्रातःकाल दौड़ लगायें, नित्य सूर्य नमस्कार करें,किसी चीज़ से लटक कर पुल अप्स करें वा ताड़ासन करें ।

4. हाइट बढाने के लिये एंटीबायोटिक्स का सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिये, नहीं तो इसके अधिक प्रयोग से हाइट रुक भी सकती है।

5. लम्बाई बढ़ाने हेतु नित्य 2 काली मिर्च के टुकड़े 20 ग्राम मक्खन में मिलाकर उसे निगल जायें। देशी गाय का दूध कद बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक है।

6. ठीक से सोएं क्योंकि सोते समय आपकी मासपेशियां और शरीर फैलता है, तो ठीक प्रकार से नींद लें।

7. अपनी गर्दन और सिर को हमेशा सीधा और तान कर रखे। यदि आप हमेशा अपने सिर को झुका कर रखेगें तो आपका स्पाइनल कार्ड दब जाएगा और पूरा शरीर छोटा लगेगा।

8. अपने वजन को नियंत्रित करें, क्योंकि अगर आपका वजन कम है तो आपकी हाइट ठीक से नहीं बढेगी।

9. खूब पानी और दूध पियें।

10. जमीन से 7 फुट पर एक छंड गाडे़ और उस पर जितनी देर हो सके उतनी देर तक रोज लटकें। इससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनेगी और आपकी लंबाई बढे़गी।

11. प्रतिदिन 10 से 20 मिनट रस्सी अवश्य ही कूदें इससे भी लम्बाई बढ़ती है ।

12. कद लम्बा करने के लिए अंगूठों को खीचिए ताकि मांसपेशियों में खिंचाब बढे़ इससे शरीर में रक्त का दौरा भी बढ़ता है ।

13. 16 से 18 वर्ष की आयु के बाद ज्यादातर बच्चों के शरीर में कार्टिलेज फैलने के बजाय जमा होने लगता है जिससे हड्डियों का विकास रुक जाता है। ऐसे में कम उम्र से ही अगर बच्चों को स्ट्रेचिंग करने अभ्यास कराएं तो बहुत लाभ मिलता है । स्ट्रेचिंग से रीढ़ की हड्डी को बल व मांसपेशियों को विस्तार मिलता है।

इसके लिए बच्चे को सीधा दीवार की ओर मुंह करके खड़ा करें और उसके कद को मार्क करें। अब बच्चे को हाथ ऊपर करके खुद को ऊपर की ओर जितना हो सके खींचने को कहें। शरीर का सारा भार सिर्फ पैर के अंगूठों पर ही होना चाहिए। फिर उसकी हाथ के छोर को भी मार्क करें। बच्चे से रोजाना यह स्ट्रेचिंग करवाएं और साथ-साथ उसकी हाइट व स्ट्रेचिंग की क्षमता को भी चेक करते रहें।

14. बच्चों को कंप्यूटर पर गेम खेलने के बजाय बाहर बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, दौड़, स्विमिंग और साइकिलिंग जैसे खेल खेलने के प्रोत्साहित करें। इससे उनकी मांसपेशियां भी प्राकृतिक तरीके से मजबूत होती हैं और लंबाई बढ़ती है।

15. कभी भी झुककर बैठना या झुककर चलना नहीं चाहिए । चलते और बैठते समय अपनी कमर और छाती को सीधा रखे ।

16. भुजंग आसन करें, इससे आपके सीने और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव होगा। इसको रोजाना करने से लंबाई बढाई जा सकती है। इसको करते समय जितना पीछे हो सके उतना हों। इसी पोजीशन में करीब 20 सेकेंड तक रहें और कम से कम 3-4 बार करें।

17. कैल्शियम शरीर के लिए एक आवश्यक खनिज है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है। कैल्शियम हमें दूध, चीज़, दही आदि में मिलता है। ऊंचा लंबा कद पाने के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी है। मिनरल-खनिज हड्डी के ऊतकों का निर्माण करता है। ये हड्डी के विकास और शरीर में रक्त के प्रवाह में सुधार करते हैं।

18. अगर आपको अपनी लंबाई बढ़ानी है तो खनिज से भरपूर तत्वों का इस्तेमाल करें। यह पालक, हरी बीन्स, फलियां, ब्रोकोली, गोभी, कद्दू, गाजर, दाल, मूंगफली, केले, अंगूर और आड़ू में पाया जाता है। लंबाई बढ़ाने के लिए जिस विटामिन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह विटामिन डी। यह दाल, टोफू, सोया मिल्कर, सोया बीन, मशरूम और बादाम आदि में पाया जाता है। इसके साथ ही टेनिस व बास्केट बॉल भी अनिवार्य रूप से खेलें।

19.अश्वगंधा जड़ का आधा चम्मच चूर्ण सुबह खाली पेट पानी से ले इसके 5 मिनट बाद एक कप गर्म दूध अवश्य ही पियें। इसे 3 माह तक लगातार लेने से शरीर की हड्डियाँ मजबूत होती है, शरीर बलवान होता है और लम्बाई बढ़ने लगती है

20. लम्बाई और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गेहूँ के दाने के बराबर मात्रा में चूना रोज दही, दाल या सब्जी में मिलाकर खाना चाहिए या पानी में मिलाके पीना चाहिए । इससे लम्बाई और स्मरण शक्ति दोनों का ही विकास होता है। शरीर में चुस्ती फुर्ती बनी रहती है । लेकिन जिन लोगो को पथरी की समस्या हो उन्हें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

माइग्रेन के रोगियों के लिये बहुत काम की है यह जानकारीमाइग्रेन का दर्द सूरज उगने के साथ शुरू होकर दोपहर तक बढ़ता है और दोप...
16/04/2019

माइग्रेन के रोगियों के लिये बहुत काम की है यह जानकारी
माइग्रेन का दर्द सूरज उगने के साथ शुरू होकर दोपहर तक बढ़ता है और दोपहर के बाद घटना शुरू हो जाता है । इस रोग में चार से बारह घण्टे तक सिर में असहनीय पीड़ा होती है । इस लेख के माध्यम से हम माइग्रेन के रोग के समाधान के लिये कुछ उपयोगी जानकारी आपको दे रहे हैं, पाँच मिनट का समय निकालकर जरूर पढ़ियेगा ।

कम सोना, थकान रहना, समय से भोजन ना करना, लम्बे समय तक भूखे रहने, ज्यादा तनाव में रहने से, और रात को ज्यादा देर तक जागते रहने से यह रोग हो जाया करता है । ज्यादा ठण्डी चीजों के सेवन से और ठण्डी जगहों पर ज्यादा देर तक ठहरने से भी इस रोग की सम्भावनायें बढ़ जाती हैं ।

अमूमन दर्द शुरू होने से पहले ही रोगी को इसके संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं । आँखों के सामने काला धब्बा और धुँधलापन सा छाने लगता है । कभी कभी तेज रोशनी की भी अनुभूति होती है । रोगी को हाथ पैर में झुनझुनाहट और सुन्नता महसूस होती है । मानसिक रूप से रोगी खिन्न सा रहता है और चिड़चिड़ा स्वभाव हो जाता है । आगे बात करते हैं इस रोग के समाधान के लिये कुछ कारगर उपायों की ।

मल-मूत्र, गैस और भूख के वेगों को रोकना नही चाहिये । यथासम्भव शीघ्र इनका त्याग कर देना चाहिये । मौसम के अनुकूल ही रहन सहन और खाना पीना रहना चाहिये ।

माइग्रेन के रोगी को हल्का, सुपाच्य और फाइबर युक्त भोजन करना चाहिये और हरी पत्तेदार सब्जियों और मौसमी फलों का सेवन जरूर करना चाहिये ।

रात को जल्दी सोने और सुबह को जल्दी उठने की आदत को नियमित बनायें । क्रोध, चिन्ता, तनाव आदि मानसिक विकारों से बचें ।

अपने आहार शैली पर जरूर ध्यान दें । मौसम के अनुसार ताजा बना भोजन ही करें और ठण्डी चीजों के सेवन से हर स्थिति में बचें । विशेष तौर पर रात के समय चावल, मूली, दही, राजमा आदि खाने से बचें ।

इस रोग की अचूक व रामबाण औषधी है देशी गाय का घी (जितना पुराना उतना उत्तम) इसको हल्का गर्म करके रात को सोते वक्त 2 2 बून्द दोनों नाक में डाले व हल्का खिंचे। इस प्रक्रिया से माईग्रेन ही नही , खराटे,लकवा,नकसीर,नाक की हड्डी बढ़ना,अनिद्रा,स्मरण शक्ति का कम होना, एलर्जी, ब्रेन में खून के बहाव की कमी जैसे जाने अनजाने सभी रोगों का नाश करती है।

सूर्योदय से पहले गाय के दूध के साथ जलेबी खाना, गुड़ की शक्कर डालकर गाय का दूध पीना बहुत लाभकारी होता है ।

माइग्रेन के दर्द की तीव्र अवस्था में दालचीनी पीसकर चन्दन के पेस्ट अथवा पानी के साथ सिर पर लेप करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

पुराना देशी गाय का घी या पंचगव्य नस्यधृत सुबह व रात को दोनो नाक में हल्का गर्म कर 2 2 बून्द डालकर धीरे से खीचने व इसके सेवन के बाद 1 घण्टे तक कुछ भी न सेवन करने से जड़मूल से नष्ट होता है।

जब भी नजला जुकाम सर्दी खाँसी सिरदर्द व माइग्रेन के दर्द का आभास हो उसी पल नाक में सरसोतेल की 2 2 बूंद डालकर खिंचे व अजवायन को भूनकर भीमसेनी कपूर मिलाकर रुमाल की पोटली बनाकर सूंघते रहे इस प्रयोग से हर प्रकार के एलर्जी व वायरस के आक्रमण से बचते हैं।

केसर और चीनी को घी में भूनकर सूंघने से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।

अदरक सूखी हो अथवा गीली, माइग्रेन के रोग में बहुत लाभ करती है । दिन भर में चार पाँच बार अदरक की गाँठ को चूसने से अथवा अदरक के चूर्ण का गरम पानी के साथ सेवन करने से दर्द की तीव्रता में बहुत आराम मिलता है ।

कनेर के पेड़ की पत्तियॉ छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को नाक में गहरी साँस के साथ सूँघने से खूब सारी छींके आती हैं और नाक से बहुत सारा पानी गिरता है । ऐसा होने से माइग्रेन के दर्द में तुरन्त आराम मिलता है ।

(माइग्रेन): दर्द सूर्य के निकलने तथा अस्त होने के साथ घटे-बढे़ उसे दूर करने के लिए 12 ग्राम गुड़ को 6 ग्राम घी के साथ मिलाकर सुबह सूर्योदय से पहले तथा रात को सोते समय खाएं।

माइग्रेन के समाधान कए लिये इस लेख में दिये गये सभी प्रयोग हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं ।

माइग्रेन अकेले नहीं आता, साथ में लाता है ये 3 बड़े रोग

ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव आदि के कारण अधिक होता है माइग्रेन।
माइग्रेन का दर्द कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रह सकता है।
सर्दी लगना, वायरस और बुखार भी सिरदर्द के कारण बन जाते हैं।

*बार-बार सिर दर्द को हल्के में नहीं लेना आपको भारी पड़ सकता हैl

डॉ दीपक सैनी
(Ayurveda medicine $ surgery)

14/04/2019

■ पीरियड्स आपके अनियमित हो रहे है, लिपिड्स रोज आपके बढ़ रहे है, एलेक्ट्रोलयट्स आपके आये दिन गिर जाते है, वजन आपका बढ़ रहा है, इनफर्टिलिटी से आप जूझ रही हो, हर पल मूड स्विंग आपके होते है, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की परेशानियां) आपको है, यूटराइन फायब्रॉइड, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी चीजें आपको मालूम ही नही। स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे कील-मुंहासे आदि रोज होती है, झड़ते बालों की गवाही आपकी कंघी दे देती है, हर दिन फेशियल हेयर ग्रोथ हो रही है, डिप्रेशन, थकान, चिड़चिड़ापन,कमजोरी आप मे अक्सर दिखती है, सेक्स करने की इच्छा आपको होती नही, मोटापे ने आपको कस के जकड़ रखा है, भूख - नींद का कोई अता पता नही आपको !!

आपको ये सब इन चार दिनों में नहीं हुआ है। यह सालों का बवाल है। कई बातें आपको इसके बारे में पापा-मम्मी से मिली हैं, कई उनसे भी पहले की पीढ़ियों से। आपके जींस, आपका पर्यावरण, आपका समाज, सब आपके खिलाफ आपके हॉर्मोन्स के पक्ष में हैं। आपका चटपटा भोजन, ज़िन्दगी जीने के आसान ढंग, बढ़ता तनाव, घटती कसरत, बढ़ते नशे !! सबसे आप को अकेले लड़ना है पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट के साथ। कैसे लड़ोगी ?

हमारी बॉडी में मौजूद कोशिकाओं और ग्रन्थियों में से निकलने वाले केमिकल्स को हॉर्मोन कहते है। ये शरीर में अलग-अलग कामों को कंट्रोल करते हैं। करीब 230 तरह के हॉर्मोन्स में से एक ही हॉर्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के काम करने के तरीके को बदलने के लिए काफी है। दरअसल, यह एक केमिकल मेसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं। जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रन्थियों पर असर डालते हैं। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम, रिप्रॉडक्टिव सिस्टम, शरीर के डिवेलपमेंट और मूड पर पड़ता है। एक गलत मेसेज आपकी लाइफ का बैलेंस बिगाड़ सकता है। हमारी बॉडी में हर तरह के हॉर्मोन का अलग-अलग रोल होता है। किसी भी तरह के हॉर्मोन का तय से ज्यादा या कम मात्रा में निकलने को हॉर्मोन असंतुलन कहा जाता है। वैसे तो पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही कई तरह के हॉर्मोंस पाए जाते हैं, लेकिन कुछ का असर सीधे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।

महिलाओं में हॉर्मोंस असंतुलित होने के कई कारण इसीलिए है क्योंकि उनकी खराब लाइफस्टाइल, न्यूट्रीशियन की कमी, एक्सरसाइज न करना, तनाव, बहुत के कारण है। कुछ मानती हैं कि हॉर्मोन असंतुलन मेनोपॉज के बाद होता है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। कई महिलाएं सारी उम्र हॉर्मोन असंतुलन से परेशान रहती हैं। कॉफी, चाय, चॉकलेट और सॉफ्ट ड्रिंक आदि के ज्यादा सेवन के कारण भी कई महिलाओं की एड्रिनलीन ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो जाती है, जो हर्मोन के स्राव को प्रभावित करती है। - गर्भनिरोधक गोलियां भी हॉर्मोन के स्राव को प्रभावित करती हैं।

ज्यादातर महिलाओं में ये हॉर्मोन्स इम्बैलेंस देखने को मिलते है :-

👉 इंसुलिन :- इसका मुख्य काम बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करना है। यह ब्लड में ग्लूकोज को बढ़ने से रोकता है। हमारी बॉडी में ग्लूकोज की नॉर्मल मात्रा फास्टिंग में 70-100 तक और नॉन फास्टिंग में 140 ग्राम/डेसीलीटर तक होनी चाहिए। असंतुलित होने पर :- ब्लड में इंसुलिन कम होने पर ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है इसका असर बॉडी के करीब सभी ऑर्गन्स पर पड़ता है। इसके असंतुलन से घाव जल्दी नहीं भरते। हाथ-पैरों में दर्द रहना शुरू हो जाता है। जल्दी-जल्दी पेशाब आना, वजन घटना, भूख का काफी कम हो जाना आदि इसके लक्षण हैं।

👉 थायरॉयड :- यह हमारे गले में मौजूद एक ग्रंथि का नाम है। इससे निकलने वाले हॉर्मोन को थायरॉइड हॉर्मोन कहते हैं, जिनके नाम हैं T3, T4, TSH !! TSH हमारे दिमाग में मौजूद पिट्यूट्री ग्लैंड से निकलता है, जिसका काम T3 और T4 को कंट्रोल करना होता है। यह हॉर्मोन हमारी बॉडी की ग्रोथ रेग्युलेट करता है। असंतुलित होने पर :- इस हॉर्मोन के असंतुलन का सबसे ज्यादा असर उनकी फर्टिलिटी (बच्चे पैदा करने की क्षमता) पर पड़ता है।

👉 पैराथायरॉयड :- यह भी गले में मौजूद होती है और इसका काम हमारी बॉडी में कैल्शियम के लेवल को कंट्रोल करने का होता है। असंतुलित होने पर :- हड्डियां कमजोर हो जाएंगी। यह बूढ़े लोगों में ज्यादा होता है।

👉 इपाइनेफ्राइन या एड्रेनेलिन :- इसे 'फाइट ऑर फ्लाइट' हॉर्मोन भी कहा जाता है। यह बॉडी में रिजर्व एनर्जी की तरह होता है। इसका काम अचानक आ जाने वाली परेशानी को हैंडल करने की ताकत देना होता है। यह शरीर में मौजूद मिनरल्स को मेनटेन करता है।
असंतुलित होने पर :- इसके कुछ केस में मौत होने तक की आशंका रहती है। एड्रेनेलिन फेल्योर की कंडिशन में बीपी तेजी से गिरता है। हालांकि ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं।

👉 एस्ट्रोजेन और प्रॉजेस्ट्रॉन :- ये दोनों ही सेक्स हॉर्मोन होते हैं, जो महिलाओं में फर्टिलिटी से जुड़े होते हैं। महिलाओं में हर महीने फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन बनता है। एस्ट्रोजेन का काम हड्डियों को मजबूत करना भी होता है। महिलाओं में मिनोपॉज के बाद हड्डियां का कमजोर हो जाने की वजह भी एस्ट्रोजेन की कमी ही होती है। इसके लिए डॉक्टर उन्हें कैल्शियम की गोलियां खाने को देते हैं। वहीं पॉजेस्ट्रॉन का काम महिलाओं में पीरियड्स के साइकल को सही रखना और पहले तीन महीने में मां के गर्भ में बच्चे के बढ़ने में मदद करना होता है। असंतुलन होने पर :- मेंसेस साइकल में गड़बड़ी होना, ज्यादा ब्लीडिंग होना। कभी-कभी महीने में तीन या चार बार ब्लीडिंग होना जैसी समस्याएं होती हैं। उम्र बढ़ने पर बच्चे पैदा करने में दिक्कत आने जैसी परेशानी हो सकती है।

■ अब आपको इनसे बचना है !! बचोगी कैसे ?? हॉर्मोंस को बैलेंस रखने के 3 सबसे आसान उपाय हैं : वजन कंट्रोल में रखना, तनावरहित रहना और सही डाइट लेना। इसके अलावा भी कुछ जरूरी बातें हैं :-

कुदरत न कोई देवी है न देवता। वह तो हमारे चारों ओर है और आप भी उसी का हिस्सा हैं। आपको कोई रोग हो गया है, वह भी उसी का हिस्सा है। वह हुआ है, क्योंकि आपने अपने बाहर-भीतर की कुदरत बदल दी है। खानपान बदल गया है, रहन-सहन बदल गया है, आदतें बदल गयी हैं। ऐसा नहीं है कि कुरकुरे, नमकीन, अचार, गोलगप्पे दो दिन में खाने से हॉर्मोन घट-बढ़ गया है। ऐसा भी नहीं है कि थायरॉइड के कारण आपका मोटापा एक हफ़्ते में बढ़ चुका है। मामले की गम्भीरता इससे कहीं अधिक है, जिसे जानने-समझने की ज़रूरत है।

सिर्फ आप ही नहीं, संसार की हर महिला लगभग हर रोग को प्राकृतिक तरीक़ों से ठीक करना चाहती है। यह इच्छा औचित्यपूर्ण है। कौन नहीं चाहता कि कुदरत के सहयोग से उसका रोग ऐसा कटे कि फिर दोबारा दिखायी न दे। लेकिन कुदरती तरीक़े से रोग-नियन्त्रण के साथ कुछ बातें समझनी ज़रूरी हो जाती है। वो आप समझ नही पाई हो या पाती हो !! क्योंकि आपने मेडिकल साइंस नही पढ़ी।

भोजन में चटपटापन छोड़िए। जीभ की गुलामी सबसे बड़ी ग़ुलामी है। आप धार्मिक हैं, तो जान लीजिए कि पेटपूजा कितना बड़ा पाप माना गया है और नास्तिक है, तो आपको विज्ञान का कहा सरलता से समझ आ जाना चाहिए।

- मोटा छिलकेदार अनाज खाने में लीजिए।
- पानी कम पीते हों , तो बढ़ाइए।
- हल्का भोजन करें, खासकर रात को सोने से पहले।
- ताजा और पौष्टिक भोजन ही खाएं।
- हरी सब्जियों, ताजे फलों और दालों को खाएं।
- पेट साफ रखें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- रोज 7-8 घंटे की नींद लें।
- चाय, कॉफी, शराब के सेवन से बचें।
- पीरियड्स से जुड़ी गड़बड़ियों को गंभीरता से लें।
- 7-8 घंटे की नींद लें। नींद पूरी या सही से नींद न लेने पर भी बॉडी में हॉर्मोंन असंतुलन की समस्या हो जाती है।
- मन को हल्का रखें। खुश रहें और दिन में तीन से चार बार जोर-जोर से हंसें।
- सुबह या शाम के वक्त 25 से 30 मिनट की वॉक करें। पार्क में कुछ वक्त गुजारें
- चाहे तो पूरे दिन में एक टाइम (सुबह या शाम) वॉक करें और दूसरे वक्त योगासन का पूरा पैकेज करें।
- संतुलित, कम फैट वाले और ज्यादा रेशेदार भोजन का सेवन करें।
- ओमेगा-3 और ओमेगा-6 युक्त भोजन हॉर्मोन संतुलन में सहायक है। यह सूरजमुखी के बीजों, अंडे, सूखे मेवों और चिकन में पाया जाता है
- हॉर्मोंस को संतुलित रखने के लिए विटामिन डी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए थोड़ी देर धूप में जरूर रहें।

व्यायाम नित्य करिए। नित्य...रोज़...लगातार ! कोई बहाना नहीं। आप करते जाएँगे , शरीर बेहतर होता जाएगा। आसान व्यायामों से शुरू करिए , धीरे-धीरे स्तर बढ़ाइए। अपने-आप शरीर बेहतर होगा। कमर का घटता घेरा हॉर्मोन्स, शुगर, ब्लड-प्रेशर को नीचे लाएगा।

स्पाइसी भोजन बुरा है। जंक फूड बुरे है। कोई लाग-लपेट नहीं, कोई किन्तु-परन्तु नहीं। इनका इस्तेमाल बिना हेलमेट के सड़क पर चलने-सा है। सन्तोष तो आते-आते आएगा। और पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन के लोभ ने शरीर को जो हानि दे दी है सालों में, वह तुरन्त कैसे चली जाएगी ?? आप जोखिम ले रही है। समाज आपको इस थ्रिल-स्वैग-जैसी बेवकूफियाँ दिखा रहा है। आप जो आज खा रहे हैं, पूरी दुनिया खा रही है। यह एक ट्रेंड चल पड़ा है। समाज के जीने का एक ढर्रा, जिसमें आप नमकीन अगर न खाएँ तो आपके दोस्त आपपर हँसने लगेंगे। आप ब्लड-प्रेशर का भय दिखाएँगे, वे और ज़ोर से हँस देंगे।

👉 फिर इसी हँसी ठहाकों के बीच कोई आप में से चल बसेगी। हल्के से दर्द की एक लहर उठेगी और परिवार अगले दिन आपको नहीं पाएगा। आपके लिए बारह दिन रोएगा और तेरहवीं करता आगे बढ़ जाएगा। फिर आनन-फानन में आप सब लोग परहेज़ की ओर दौड़ेंगे। तमाम वायदे करेंगे स्वयं से, प्रण, वचन, नियम सब की दुहाई देंगे स्वयं को।

याद रखिये हॉर्मोन्स के दुष्प्रभाव गहरे और विस्तृत हैं जो शरीर के तमाम अंगों पर पड़ते हैं। खलनायक का पूरा चरित्र फ़िल्म देखने के बाद ही समझ में आता है।

Remember:Antibiotics do not treat viral infections, like colds and fluALWAYS seek the advice of a qualified health care ...
21/12/2018

Remember:
Antibiotics do not treat viral infections, like colds and flu

ALWAYS seek the advice of a qualified health care professional before taking antibiotics

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