14/04/2019
■ पीरियड्स आपके अनियमित हो रहे है, लिपिड्स रोज आपके बढ़ रहे है, एलेक्ट्रोलयट्स आपके आये दिन गिर जाते है, वजन आपका बढ़ रहा है, इनफर्टिलिटी से आप जूझ रही हो, हर पल मूड स्विंग आपके होते है, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की परेशानियां) आपको है, यूटराइन फायब्रॉइड, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी चीजें आपको मालूम ही नही। स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे कील-मुंहासे आदि रोज होती है, झड़ते बालों की गवाही आपकी कंघी दे देती है, हर दिन फेशियल हेयर ग्रोथ हो रही है, डिप्रेशन, थकान, चिड़चिड़ापन,कमजोरी आप मे अक्सर दिखती है, सेक्स करने की इच्छा आपको होती नही, मोटापे ने आपको कस के जकड़ रखा है, भूख - नींद का कोई अता पता नही आपको !!
आपको ये सब इन चार दिनों में नहीं हुआ है। यह सालों का बवाल है। कई बातें आपको इसके बारे में पापा-मम्मी से मिली हैं, कई उनसे भी पहले की पीढ़ियों से। आपके जींस, आपका पर्यावरण, आपका समाज, सब आपके खिलाफ आपके हॉर्मोन्स के पक्ष में हैं। आपका चटपटा भोजन, ज़िन्दगी जीने के आसान ढंग, बढ़ता तनाव, घटती कसरत, बढ़ते नशे !! सबसे आप को अकेले लड़ना है पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट के साथ। कैसे लड़ोगी ?
हमारी बॉडी में मौजूद कोशिकाओं और ग्रन्थियों में से निकलने वाले केमिकल्स को हॉर्मोन कहते है। ये शरीर में अलग-अलग कामों को कंट्रोल करते हैं। करीब 230 तरह के हॉर्मोन्स में से एक ही हॉर्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के काम करने के तरीके को बदलने के लिए काफी है। दरअसल, यह एक केमिकल मेसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं। जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रन्थियों पर असर डालते हैं। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम, रिप्रॉडक्टिव सिस्टम, शरीर के डिवेलपमेंट और मूड पर पड़ता है। एक गलत मेसेज आपकी लाइफ का बैलेंस बिगाड़ सकता है। हमारी बॉडी में हर तरह के हॉर्मोन का अलग-अलग रोल होता है। किसी भी तरह के हॉर्मोन का तय से ज्यादा या कम मात्रा में निकलने को हॉर्मोन असंतुलन कहा जाता है। वैसे तो पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही कई तरह के हॉर्मोंस पाए जाते हैं, लेकिन कुछ का असर सीधे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।
महिलाओं में हॉर्मोंस असंतुलित होने के कई कारण इसीलिए है क्योंकि उनकी खराब लाइफस्टाइल, न्यूट्रीशियन की कमी, एक्सरसाइज न करना, तनाव, बहुत के कारण है। कुछ मानती हैं कि हॉर्मोन असंतुलन मेनोपॉज के बाद होता है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। कई महिलाएं सारी उम्र हॉर्मोन असंतुलन से परेशान रहती हैं। कॉफी, चाय, चॉकलेट और सॉफ्ट ड्रिंक आदि के ज्यादा सेवन के कारण भी कई महिलाओं की एड्रिनलीन ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो जाती है, जो हर्मोन के स्राव को प्रभावित करती है। - गर्भनिरोधक गोलियां भी हॉर्मोन के स्राव को प्रभावित करती हैं।
ज्यादातर महिलाओं में ये हॉर्मोन्स इम्बैलेंस देखने को मिलते है :-
👉 इंसुलिन :- इसका मुख्य काम बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करना है। यह ब्लड में ग्लूकोज को बढ़ने से रोकता है। हमारी बॉडी में ग्लूकोज की नॉर्मल मात्रा फास्टिंग में 70-100 तक और नॉन फास्टिंग में 140 ग्राम/डेसीलीटर तक होनी चाहिए। असंतुलित होने पर :- ब्लड में इंसुलिन कम होने पर ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है इसका असर बॉडी के करीब सभी ऑर्गन्स पर पड़ता है। इसके असंतुलन से घाव जल्दी नहीं भरते। हाथ-पैरों में दर्द रहना शुरू हो जाता है। जल्दी-जल्दी पेशाब आना, वजन घटना, भूख का काफी कम हो जाना आदि इसके लक्षण हैं।
👉 थायरॉयड :- यह हमारे गले में मौजूद एक ग्रंथि का नाम है। इससे निकलने वाले हॉर्मोन को थायरॉइड हॉर्मोन कहते हैं, जिनके नाम हैं T3, T4, TSH !! TSH हमारे दिमाग में मौजूद पिट्यूट्री ग्लैंड से निकलता है, जिसका काम T3 और T4 को कंट्रोल करना होता है। यह हॉर्मोन हमारी बॉडी की ग्रोथ रेग्युलेट करता है। असंतुलित होने पर :- इस हॉर्मोन के असंतुलन का सबसे ज्यादा असर उनकी फर्टिलिटी (बच्चे पैदा करने की क्षमता) पर पड़ता है।
👉 पैराथायरॉयड :- यह भी गले में मौजूद होती है और इसका काम हमारी बॉडी में कैल्शियम के लेवल को कंट्रोल करने का होता है। असंतुलित होने पर :- हड्डियां कमजोर हो जाएंगी। यह बूढ़े लोगों में ज्यादा होता है।
👉 इपाइनेफ्राइन या एड्रेनेलिन :- इसे 'फाइट ऑर फ्लाइट' हॉर्मोन भी कहा जाता है। यह बॉडी में रिजर्व एनर्जी की तरह होता है। इसका काम अचानक आ जाने वाली परेशानी को हैंडल करने की ताकत देना होता है। यह शरीर में मौजूद मिनरल्स को मेनटेन करता है।
असंतुलित होने पर :- इसके कुछ केस में मौत होने तक की आशंका रहती है। एड्रेनेलिन फेल्योर की कंडिशन में बीपी तेजी से गिरता है। हालांकि ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं।
👉 एस्ट्रोजेन और प्रॉजेस्ट्रॉन :- ये दोनों ही सेक्स हॉर्मोन होते हैं, जो महिलाओं में फर्टिलिटी से जुड़े होते हैं। महिलाओं में हर महीने फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन बनता है। एस्ट्रोजेन का काम हड्डियों को मजबूत करना भी होता है। महिलाओं में मिनोपॉज के बाद हड्डियां का कमजोर हो जाने की वजह भी एस्ट्रोजेन की कमी ही होती है। इसके लिए डॉक्टर उन्हें कैल्शियम की गोलियां खाने को देते हैं। वहीं पॉजेस्ट्रॉन का काम महिलाओं में पीरियड्स के साइकल को सही रखना और पहले तीन महीने में मां के गर्भ में बच्चे के बढ़ने में मदद करना होता है। असंतुलन होने पर :- मेंसेस साइकल में गड़बड़ी होना, ज्यादा ब्लीडिंग होना। कभी-कभी महीने में तीन या चार बार ब्लीडिंग होना जैसी समस्याएं होती हैं। उम्र बढ़ने पर बच्चे पैदा करने में दिक्कत आने जैसी परेशानी हो सकती है।
■ अब आपको इनसे बचना है !! बचोगी कैसे ?? हॉर्मोंस को बैलेंस रखने के 3 सबसे आसान उपाय हैं : वजन कंट्रोल में रखना, तनावरहित रहना और सही डाइट लेना। इसके अलावा भी कुछ जरूरी बातें हैं :-
कुदरत न कोई देवी है न देवता। वह तो हमारे चारों ओर है और आप भी उसी का हिस्सा हैं। आपको कोई रोग हो गया है, वह भी उसी का हिस्सा है। वह हुआ है, क्योंकि आपने अपने बाहर-भीतर की कुदरत बदल दी है। खानपान बदल गया है, रहन-सहन बदल गया है, आदतें बदल गयी हैं। ऐसा नहीं है कि कुरकुरे, नमकीन, अचार, गोलगप्पे दो दिन में खाने से हॉर्मोन घट-बढ़ गया है। ऐसा भी नहीं है कि थायरॉइड के कारण आपका मोटापा एक हफ़्ते में बढ़ चुका है। मामले की गम्भीरता इससे कहीं अधिक है, जिसे जानने-समझने की ज़रूरत है।
सिर्फ आप ही नहीं, संसार की हर महिला लगभग हर रोग को प्राकृतिक तरीक़ों से ठीक करना चाहती है। यह इच्छा औचित्यपूर्ण है। कौन नहीं चाहता कि कुदरत के सहयोग से उसका रोग ऐसा कटे कि फिर दोबारा दिखायी न दे। लेकिन कुदरती तरीक़े से रोग-नियन्त्रण के साथ कुछ बातें समझनी ज़रूरी हो जाती है। वो आप समझ नही पाई हो या पाती हो !! क्योंकि आपने मेडिकल साइंस नही पढ़ी।
भोजन में चटपटापन छोड़िए। जीभ की गुलामी सबसे बड़ी ग़ुलामी है। आप धार्मिक हैं, तो जान लीजिए कि पेटपूजा कितना बड़ा पाप माना गया है और नास्तिक है, तो आपको विज्ञान का कहा सरलता से समझ आ जाना चाहिए।
- मोटा छिलकेदार अनाज खाने में लीजिए।
- पानी कम पीते हों , तो बढ़ाइए।
- हल्का भोजन करें, खासकर रात को सोने से पहले।
- ताजा और पौष्टिक भोजन ही खाएं।
- हरी सब्जियों, ताजे फलों और दालों को खाएं।
- पेट साफ रखें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- रोज 7-8 घंटे की नींद लें।
- चाय, कॉफी, शराब के सेवन से बचें।
- पीरियड्स से जुड़ी गड़बड़ियों को गंभीरता से लें।
- 7-8 घंटे की नींद लें। नींद पूरी या सही से नींद न लेने पर भी बॉडी में हॉर्मोंन असंतुलन की समस्या हो जाती है।
- मन को हल्का रखें। खुश रहें और दिन में तीन से चार बार जोर-जोर से हंसें।
- सुबह या शाम के वक्त 25 से 30 मिनट की वॉक करें। पार्क में कुछ वक्त गुजारें
- चाहे तो पूरे दिन में एक टाइम (सुबह या शाम) वॉक करें और दूसरे वक्त योगासन का पूरा पैकेज करें।
- संतुलित, कम फैट वाले और ज्यादा रेशेदार भोजन का सेवन करें।
- ओमेगा-3 और ओमेगा-6 युक्त भोजन हॉर्मोन संतुलन में सहायक है। यह सूरजमुखी के बीजों, अंडे, सूखे मेवों और चिकन में पाया जाता है
- हॉर्मोंस को संतुलित रखने के लिए विटामिन डी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए थोड़ी देर धूप में जरूर रहें।
व्यायाम नित्य करिए। नित्य...रोज़...लगातार ! कोई बहाना नहीं। आप करते जाएँगे , शरीर बेहतर होता जाएगा। आसान व्यायामों से शुरू करिए , धीरे-धीरे स्तर बढ़ाइए। अपने-आप शरीर बेहतर होगा। कमर का घटता घेरा हॉर्मोन्स, शुगर, ब्लड-प्रेशर को नीचे लाएगा।
स्पाइसी भोजन बुरा है। जंक फूड बुरे है। कोई लाग-लपेट नहीं, कोई किन्तु-परन्तु नहीं। इनका इस्तेमाल बिना हेलमेट के सड़क पर चलने-सा है। सन्तोष तो आते-आते आएगा। और पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन के लोभ ने शरीर को जो हानि दे दी है सालों में, वह तुरन्त कैसे चली जाएगी ?? आप जोखिम ले रही है। समाज आपको इस थ्रिल-स्वैग-जैसी बेवकूफियाँ दिखा रहा है। आप जो आज खा रहे हैं, पूरी दुनिया खा रही है। यह एक ट्रेंड चल पड़ा है। समाज के जीने का एक ढर्रा, जिसमें आप नमकीन अगर न खाएँ तो आपके दोस्त आपपर हँसने लगेंगे। आप ब्लड-प्रेशर का भय दिखाएँगे, वे और ज़ोर से हँस देंगे।
👉 फिर इसी हँसी ठहाकों के बीच कोई आप में से चल बसेगी। हल्के से दर्द की एक लहर उठेगी और परिवार अगले दिन आपको नहीं पाएगा। आपके लिए बारह दिन रोएगा और तेरहवीं करता आगे बढ़ जाएगा। फिर आनन-फानन में आप सब लोग परहेज़ की ओर दौड़ेंगे। तमाम वायदे करेंगे स्वयं से, प्रण, वचन, नियम सब की दुहाई देंगे स्वयं को।
याद रखिये हॉर्मोन्स के दुष्प्रभाव गहरे और विस्तृत हैं जो शरीर के तमाम अंगों पर पड़ते हैं। खलनायक का पूरा चरित्र फ़िल्म देखने के बाद ही समझ में आता है।