Kapil clinic पहाड़ियां दी हट्टी

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Kapil clinic पहाड़ियां दी हट्टी Complete Solution for all type of disese. specially for piles , jaundice, hair fall, skin and all types stomach disease with ayurvedic medicine

09/11/2025

04/11/2025

03/11/2025
27/08/2025

“वोटचोर” सुनते ही अंधभक्तों के कान खड़े हो जाते हैं…🤣

21/07/2025

क्या आप गुदा रोग बवासीर (Piles),भगंदर(Fistula) और फिशर(Fissure) से परेसान है???
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■जो लोग गुदा मार्ग की बीमारी जैसे बवासीर ,भगंदर एवं फिसर से परेशान है.
■गुदा मार्ग में खुजली और जलन होती है.
■गुदा मार्ग से खून आता है.
■गुदा मार्ग में दर्द बहुत रहता हो.

■बवासीर , भगंदर और फिशर का आयुर्वेदिक क्षार सूत्र पद्धति द्वारा बिना किसी जटिल सर्जरी के सफल इलाज होता है.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया कराने के 30 मिनट बाद आप घर जा सकते हैं.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया में ना किसी प्रकार का दर्द होता है ना ब्लड आता है.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया कराने के बाद बवासीर (Piles) ,भगंदर (fistula) और फिशर(Fissure)आदि गुदा रोगों के फिर से होने की संभावना लगभग शून्य होती है

●हमारे यहां इन सभी गुदा मार्ग की बीमारियो का इलाज आयुर्वेदिक क्षार सूत्र और लेजर द्वारा कुशल चिकित्सकों द्वारा किया जाता है।

●जो इन परेशानियों से परेसान है वो एक बार आकर जरूर मिले..

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--------: रोजमेरी एसेंशियल ऑयल :---------              ( उपयोगिता और प्रयोग )       रोजमेरी एसेंशियल ऑयल (Rosemary Essen...
03/07/2025

--------: रोजमेरी एसेंशियल ऑयल :---------
( उपयोगिता और प्रयोग )
रोजमेरी एसेंशियल ऑयल (Rosemary Essential Oil) एक प्रसिद्ध औषधीय तेल है जो रोजमेरी पौधे (Rosmarinus officinalis) की पत्तियों से निकाला जाता है। यह तेल आयुर्वेद, यूनानी, और आधुनिक अरोमाथेरेपी में अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
1- मुख्य उपयोगिताएँ ------
(1) स्नायु एवं मानसिक शक्ति बढ़ाने में ------
* याददाश्त बढ़ाने, एकाग्रता सुधारने और मानसिक थकान को दूर करने में सहायक।
* विद्यार्थियों और मानसिक कार्य करने वालों के लिए विशेष उपयोगी।
(2) बालों की देखभाल में ------
* बालों का झड़ना रोकता है।
* स्कैल्प को उत्तेजित कर नए बाल उगाने में सहायता करता है।
* डैंड्रफ कम करता है।
(3) त्वचा संबंधी समस्याओं में ------
* त्वचा को टोन करता है और मुंहासों को कम करता है।
* एंटीसेप्टिक गुणों के कारण संक्रमण से सुरक्षा करता है।
(4) मांसपेशियों एवं जोड़ों के दर्द में ------
* एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है।
(5) सांस संबंधी लाभ -------
* सर्दी, खांसी, जुकाम, ब्रोंकाइटिस आदि में उपयोगी।
* भाप में मिलाकर सूंघने से बलगम ढीला करता है।
2- प्रयोग विधियाँ ------
(1) अरोमाथेरेपी में ------
* डिफ्यूज़र में 3–5 बूंदें डालें।
* मानसिक तनाव, थकान, और उदासी दूर करने में सहायक।
(2) बालों के लिए -----
* नारियल या बादाम तेल में 4–5 बूंदें मिलाकर स्कैल्प पर मालिश करें।
* सप्ताह में 2–3 बार प्रयोग करें।
(3) त्वचा के लिए ------
* एलोवेरा जेल या कैरियर ऑयल में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
* सीधे न लगाएं, त्वचा पर जलन हो सकती है।
(4) मालिश के लिए ------
* सरसों, नारियल या तिल तेल में मिलाकर जोड़ों या पीठ पर मालिश करें।
(5) स्टीम इनहेलेशन ------
* गर्म पानी में 2–3 बूंदें डालें, सिर पर तौलिया रखकर भाप लें।
3- सावधानियाँ ------
(1) इसे कभी भी सीधे त्वचा या बालों पर न लगाएं। हमेशा कैरियर ऑयल में मिलाकर प्रयोग करें।
(2) गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, और छोटे बच्चों पर उपयोग से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।
(3) आँखों और मुँह में न जाने दें।

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---------: एडोमेट्रियोसिस में, पिचु-उपनाह उपचार :-------       एंडोमेट्रियोसिस एक जटिल स्त्री रोग है,  जिसमें गर्भाशय की...
03/07/2025

---------: एडोमेट्रियोसिस में, पिचु-उपनाह उपचार :-------
एंडोमेट्रियोसिस एक जटिल स्त्री रोग है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) की ऊत्तकें गर्भाशय के बाहर—जैसे डिंबग्रंथि, अंडवाहिनी या श्रोणि गुहा—में बढ़ने लगती हैं, जिससे तीव्र दर्द, अनियमित मासिक धर्म, बांझपन व सूजन आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।
आयुर्वेद में इसे " वन्ध्यत्व हेतुक योनिविकार " और " वात-कफज योनिशूलय " की श्रेणियों में रखा जाता है।
1- एंडोमेट्रियोसिस में पिचु व उपनाह चिकित्सा ------
योनि पिचु (Yoni Pichu)
(1) उद्देश्य -------
* गर्भाशय की शुद्धि, वात-कफ शमन।
* दर्द व सूजन नियंत्रण।
* योनिकांठ, गर्भाशय की नसों में पौष्टिकता।
(2) सामग्री ---------
* सुपर्णिका तैल (स्त्रीजनन संस्थान हेतु विशेष तैल)।
* या बालान तैल (गर्भाशय व योनिशूल में लाभकारी)।
* रुई (स्वच्छ व कोमल)।
* गुनगुना जल।
(3) विधि -------
* रात्रि में सोने से पहले, सुपर्णिका तैल को थोड़ा गुनगुना करें।
* रुई में तैल भिगोकर निचोड़ें, ताकि वह टपके नहीं।
* उसे योनिमार्ग में धीरे-से प्रवेश कराएं (2–3 cm तक)।
* 3–4 घंटे तक रखें या पूरी रात।
* सुबह गुनगुने पानी से स्नान करें।
* 21 दिन तक रोज, फिर 7 दिन विराम। इस चक्र को 2–3 बार दोहराएं।
2- अधोवस्ति उपनाह (Lower Abdomen Upanaha)
(1) उद्देश्य -------
* श्रोणि क्षेत्र में रुके रक्त, कफ व वात का निवारण।
* सूजन, मासिक पीड़ा में आराम।
(2) सामग्री ------
* रसनादि चूर्ण या अरिष्टक चूर्ण या गोक्षुर + गुडुचि + अरंडी मूल।
* सुपर्णिका तैल या माष तैल।
* जौ या गेंहूं का आटा (संयोजन हेतु)।
* एरण्ड पत्र (बांधने के लिए)।
* गरम पट्टी या ऊन का कपड़ा
(3) विधि ------
* चूर्ण + तैल + आटा मिलाकर गाढ़ा लेप बना लें।
* हल्का गरम करके, नाभि के नीचे अधोवस्ति क्षेत्र पर लगाएं।
* ऊपर से एरण्ड पत्र या कपड़ा रखें।
* हल्की पट्टी से बांधें।
* 3–4 घंटे तक रखें या रातभर।
* दिन में एक बार, 21 दिन तक प्रयोग करें।
3- पूरक उपाय (With Pichu & Upanaha)
उपचार/ औषधि या विधि -----
(1) औषध सेवन/ अशोकघन वटी, सुपर्णिका वटी, राजःप्रवर्तिनी वटी (चक्रानुसार)
(2) क्वाथ या काढ़ा/ दशमूल क्वाथ + अशोक + लोध्र।
(3) वास्ति (बस्ती)/ स्नेहबस्ती – सुपर्णिका तैल (पंचकर्म वैद्य देखरेख में)।
(4) योग/ सुप्तबद्धकोणासन, मंडूकासन, पवनमुक्तासन।
(5) पथ्य आहार/ तिक्त-काशाय रस, त्रिकटु युक्त भोजन, तेल मुक्त, लघु सुपाच्य आहार।
4- सावधानी --------
(1) पिचु, मासिक धर्म के दिनों में न करें।
(2) संक्रमण, जलन, या अज्ञात योनि रोगों में पिचु न डालें।
(3) उपनाह, यदि बहुत गर्म हो, तो त्वचा जल सकती है — पहले हाथ पर परीक्षण करें।
(4) औषधि चयन हेतु, वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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अच्छा "स्वास्थ" ही आपका असली "धन" है। बाकी सब बाद में ......आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें!! फाइबर युक्त आहार लें, खूब ...
01/07/2025

अच्छा "स्वास्थ" ही आपका असली "धन" है।
बाकी सब बाद में ......

आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें!! फाइबर युक्त आहार लें, खूब पानी पीएं, चीनी नमक और फूड ऑयल का संतुलित मात्रा में उपयोग करें।

एसिडिक फूड जैसे - चाय बिस्कुट नमकीन, फास्ट फूड और मिठाईयां को अपनी डाइट से कम करें।

एल्कलाइन जैसे - ताजे फल और हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें तथा रोजाना कम से कम 10,000 कदम जरूर चलें।

थोड़ा सा बदलाव आपके जीवन में बड़ी खुशी लेकर आएगा और अलग पहचान भी दिलाएगा 🎉🎉

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---------: थायराइड में औषधीय प्रयोग : -----------      थायरॉयड के दोनों प्रकार — हाइपोथायरॉयडिज्म और हाइपरथायरॉयडिज्म — ...
28/06/2025

---------: थायराइड में औषधीय प्रयोग : -----------
थायरॉयड के दोनों प्रकार — हाइपोथायरॉयडिज्म और हाइपरथायरॉयडिज्म — में आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करते समय -- मात्रा, अनुपान (सेवन के साथ लिया जाने वाला द्रव्य) और अवधि (कोर्स की लंबाई) बहुत महत्वपूर्ण होती है। नीचे दोनों प्रकार के अनुसार विवरण दिया गया है --------
1- हाइपोथायरॉयडिज्म में औषधीय विवरण -----
(1) कचनार गुग्गुल ------
2 से 3 गोली ( 500mg) लगभग, गुनगुने पानी के साथ, भोजन के बाद दिन में दो बार, 3 या 6 महीने ( चिकित्सक परामर्श अनुसार )।
(2) अश्वगंधा चूर्ण / घन वटी ------
3 से 5 ग्राम ( एक चम्मच )/ घन वटी 1से 2 गोली, दूध या गर्म पानी के साथ, रात को सोते समय, 3 महीने से अधिक समय तक।
(3) त्रिफला चूर्ण -----
3 से 5 ग्राम ( एक चम्मच ) , गरम पानी के साथ, रात में भोजन के बाद, लम्बे समय तक लें।
(4) ब्राह्मी वटी / चूर्ण ------
1-2 गोली चूर्ण 3-5 ग्राम ( एक चम्मच ) लगभग, पानी या शहद के साथ, सुबह खाली पेट या रात में, 2 से 3 महीने तक ले सकते है।
(5) पुनर्नवा मण्डूर --------
1-2 गोली, गुनगुने पानी के साथ, भोजन के बाद दोनों समय, 2-3 महीने तक ले सकते है।
2- हाइपरथायरॉयडिज्म में औषधीय विवरण -------
(1) प्रवाल पिष्टी -----
125/ 250 mg तक, ठंडे पानी या शहद के साथ, सुबह खाली पेट, 1-2 महीने तक सेवन करें।
(2) मुक्ता पिष्टी ------
125/250mg तक, ठंडे ताजी पानी या गुलाब जल के साथ, सुबह खाली पेट, 1 से 2 महीने तक ले सकते है।
(3) ब्राह्मी घन वटी ------
1-2 गोली , पानी या शहद के साथ, सुबह और रात को , 2-3 महीने तक ले सकते है।
(4) जटामाशी चूर्ण / वटी -----
500mg या एक ग्राम, दूध या शहद के साथ, रात को सोने से पहले, 1से 3 महीने तक।
(5) गिलोय सत्व वटी -----
250 से 500 mg तक, गुनगुने पनी के साथ, सुबह खाली पेट, तीन महीने तक ले सकते है।
महत्वपूर्ण सुझाव --------
(1) औषधियों का सेवन किसी आयुर्वेद चिकित्सक के मार्गदर्शन में करें। क्योंकि , शरीर प्रकृति, अन्य रोग, पाचन शक्ति और जीवनशैली के अनुसार मात्रा में परिवर्तन संभव होता है।
(2) यदि आप एलोपैथिक थायरॉयड की गोली (जैसे Eltroxin) ले रहे हैं, तो पहले उस चिकित्सक से परामर्श लें। क्योंकि , आयुर्वेदिक औषधीय के साथ समन्वय आवश्यक होता है।
(3) औषधि सेवन के समय योग, निद्रा, और मानसिक शांति का विशेष ध्यान रखें।
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-------: IBS का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण :-------      आयुर्वेद में,  इसे " ग्रहणी दोष " की संज्ञा दी गई है। यह अग्निमांद्य ...
27/06/2025

-------: IBS का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण :-------
आयुर्वेद में, इसे " ग्रहणी दोष " की संज्ञा दी गई है। यह अग्निमांद्य (पाचन अग्नि की दुर्बलता), दोषों के विषम अवस्था और मनसिक कारणों से उत्पन्न होता है।
(ख)
IBS (ग्रहणी) का उपचार – आयुर्वेदिक व प्राकृतिक पद्धति --------
1- अग्नि दीपन और आमपाचन (Digestive correction) --------
(1) हिंग्वाष्टक चूर्ण – 1-2 ग्राम भोजन से पहले या बाद में।
(2) अविपत्तिकर चूर्ण – IBS-D में।
(3) त्रिफला चूर्ण – IBS-C में, रात को गुनगुने जल से।
(4) शंखवटी, चंद्रप्रभा वटी – वात-कफज IBS में।
(5) तक्र (छाछ) सेवन – सैंधव लवण व अजवायन मिलाकर।
2- मानसिक संतुलन हेतु -------
(1) ब्राह्मी घृत या सर्पगंधा वटी – नींद व चिंता नियंत्रण हेतु।
(2) अश्वगंधा चूर्ण – 3–5 ग्राम, दूध के साथ।
3- पंचकर्म (यदि गहन स्थिति हो) ------
(1) वमन (यदि कफ प्रधान हो)।
(2) विरेचन (यदि पित्त या मलसंचय अधिक हो)।
(3) बस्ती (यदि वात प्रधान हो, विशेषतः कब्ज वाले IBS में अत्यंत लाभकारी)।
4- खानपान व दिनचर्या -------
(1)पथ्य -------
* सादा दलिया, मूँग की खिचड़ी, पतली मूँग दाल।
* छाछ (buttermilk), जीरा-हींग का जल
* पके फल – केला, सेब, पपीता।
* हल्दी, सौंठ, अजवायन, धनिया, सैंधव।
(2) निषेध -------
* दूध, आइसक्रीम, ब्रेड, मैदा।
* तैलीय, अधिक मिर्च-मसाले।
* चाय-कॉफी, शराब, धूम्रपान।
* मानसिक उत्तेजना के कारण बन सकने वाले सोशल मीडिया या टीवी आदि।
5- योग व प्राणायाम -------
पवनमुक्तासन, अपानासन, भुजंगासन, मंडूकासन।
नाड़ी शोधन प्राणायाम ------
शीतली-शीतकारी,
योगनिद्रा / ध्यान।
6- विशेष घरेलू उपाय -------
(1) 1 चम्मच सौंफ + अजवायन + जीरा मिलाकर भून लें, भोजन के बाद सेवन करें।
(2) तुलसी का काढ़ा + सेंधा नमक – अपच व ऐंठन में आराम।
(3) छाछ + हिंग + पुदीना रस – IBS-D में तुरंत लाभ।
IBS कोई जानलेवा रोग नहीं है। लेकिन, जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है। शरीर-मन-आहार का संतुलन, सही दिनचर्या, आयुर्वेदिक औषधियां, और नियमित योग के द्वारा, इसे पूर्णतः नियंत्रित किया जा सकता है।
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