15/01/2026
AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*गायत्री की दैनिक साधना एवं यज्ञ पद्धति*
*दैनिक साधनाक्रम*
*दैनिक हवन*
॥ कलशस्थापन॥
३- मङ्गलद्रव्यस्थापन- मन्त्र के साथ कलश में दूर्वा- कुश, पूगीफल- सुपारी, पुष्प और पल्लव डालें। भावना करें कि स्थान और व्यक्तित्व में छिपी पात्रता में दूर्वा जैसे जीवनी शक्ति, कुश जैसी प्रखरता, सुपारी जैसी गुणयुक्त स्थिरता, पुष्प जैसा उल्लास तथा पल्लवों जैसी सरलता, सादगी का संचार किया जा रहा है।
ॐ त्वां गन्धर्वाऽअखनँस्त्वाम्, इन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः।
त्वामोषधे सोमो राजा, विद्वान्यक्ष्मादमुच्यत॥ - १२.९८
४- सूत्रवेष्टन- मन्त्र के साथ कलश में कलावा लपेटें। भावना करें कि पात्रता को अवाञ्छनीयता से जुड़ने का अवसर न देकर उसे आदर्शवादिता के साथ अनुबन्धित कर रहे हैं, ईश अनुशासन में बाँध रहे हैं।
ॐ सुजातो ज्योतिषा सह, शर्मवरूथ माऽसदत्स्वः।
वासोऽ अग्ने विश्वरूप œ, सं व्ययस्व विभावसो॥ -११.४०
५- नारिकेल संस्थापन- मन्त्र के साथ कलश के ऊपर नारियल रखें। भावना करें कि इष्ट के चरणों में समर्पित पात्रता सुख- सौभाग्य की आधार बन रही है। यह दिव्य कलश जहाँ स्थापित हुआ है, वहाँ की जड़- चेतना सारी पात्रता इन्हीं संस्कारों से भर रही है।
ॐ याः फलिनीर्या ऽ अफलाऽ, अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता, नो मुञ्चन्त्व œ हसः। -१२.८९
तत्पश्चात् ॐ मनोजूतिर्जुषताम् ० मन्त्र से (दोनों हाथ लगाकर) प्रतिष्ठा करें। बाद में तत्त्वायामि० मन्त्र का प्रयोग करते हुए पंचोपचार पूजन करें और कलशस्य मुखे विष्णुः० इत्यादि मन्त्रों से प्रार्थना करें।
*क्रमशः* *........*
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A step-by-step guide on how to perform daily gayatri mantra j*p, sadhana and havan, including the preliminary disciplines of pavitrikaran (purification),...