08/08/2021
*हरियाली अमावस्या*
श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता हैं। इस अमावस्या का संबंध प्रकृति, पितृ देव और भगवान शिव से है। तीनों लोक से संबंध होने के कारण इस अमावस्या का अपना विशेष महत्व है। श्रावणी, हरियाली अमावस्या का यह पर्व भारत के कई इलाकों में प्रमुखता से मनाया जाता है।
हिन्दी पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 07 अगस्त को शाम 07 बजकर 11 मिनट से हो रहा है। इसका समापन 08 अगस्त को शाम 07 बजकर 19 मिनट पर होगा। आइए जानें कैसे मनाएं हरियाली अमावस्या-
*हरियाली अमावस्या की 15 खास बातें-*
1. भविष्य पुराण के अनुसार जिन्हें संतान न हो, उनके लिए वृक्ष ही संतान हैं अत: इस दिन निष्काम भाव से वृक्ष लगाना चाहिए।
2. हमें ऑक्सीजन देने वाले पीपल में ब्रह्मा, विष्णु, शिव का वास होता है अत: वृक्ष लगाने में सहयोग करने से उसमें विराजित देवता हमारी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।
3. अपने पितरों की शांति के लिए हवन आदि करवाने का विशेष महत्व है।
4. शास्त्रों के अनुसार इस तिथि के स्वामी पितृदेव हैं अत: पितरों की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा अवश्य देना चाहिए।
5. हरियाली अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने ईष्टदेव का ध्यान लगाना चाहिए।
6. अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए किसी एकांत स्थान के जलाशय में स्नान करके योग्य ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
7. अपने पितृगण को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पितरों को स्मरण करते हुए वृक्ष लगाना चाहिए।
8. इस दिन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।
9. सिर्फ वृक्ष लगाने से काम नहीं चलेगा अत: हमें उन्हें खाद-पानी देने का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
10. प्रकृति, पर्यावरण एवं वृक्षों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने हेतु हर व्यक्ति को हरियाली अमावस्या पर 1-1 पौधा रोपण अवश्य करना चाहिए।
11. स्नान दान के लिए अमावस्या बहुत ही सौभाग्यशाली तिथि मानी जाती है। खासकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए हवन-पूजा, श्राद्ध-तर्पण आदि करने के लिए तो अमावस्या श्रेष्ठ तिथि होती है।
12. हरियाली अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करके इसके फेरे लिए जाते हैं और मालपुओं का भोग लगाया जाता है।
13. इस दिन पीपल, बरगद, केला, नीबू, तुलसी आदि का वृक्षारोपण करना अतिशुभ माना जाता है। दरअसल वृक्षों की प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के पर्व के रूप में भी हरियाली अमावस्या को जाना जाता है।
14. हरियाली अमावस्या के दिन नए पौधे लगाकर उसकी देखभाल करने, उन्हें नियमित जल देने और खाद आदि देने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
15. पौधारोपण के लिए विशेषकर अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, उत्तरा भाद्रपदा, रोहिणी, मृगशिर, रेवती, अश्विनी, हस्त, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, चित्रा आदि नक्षत्र शुभ फलदायी माने जाते हैं।
*श्रावण अमावस्या पूजा विधि-*
1. हलहारिणी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठ कर ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करें।
2. सूर्य उदय होने के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
3. सुबह उठकर पूरे विधि विधान से माता पार्वती एवं भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए तथा सुहागन महिलाओ को सिंदूर सहित माता पार्वती की पूजा करना चाहिए और सुहाग सामग्री बांटना चाहिए।
4. इस दिन पितृ तर्पण करें। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
5. आटे की गोलियां बनाएं बनाकर किसी तालाब या नदी में मछलियों अथवा अन्य जीव-जंतुओं को खिलाएं।
6. ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा दक्षिणा अथवा सीदा दें।
7. श्रावणी अमावस्या का उपवास करें।
8. इस दिन पीपल, बरगद, केला, नींबू अथवा तुलसी का वृक्षारोपण जरूर करें।
9. अपने घर के पास चींटियों को चीनी या सूखा आटा खिलाएं।
10. गरीब या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
11. श्रावणी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विधान है।
12. हरी चूड़िया, सिंदूर, बिंदी बांटने से सुहाग की आयु लंबी होती है और साथ ही घर में खुशहाली आती है।
13. अच्छे भाग्य के उद्देश्य से लड़के भी चूड़ियां, मिठाई आदि सुहागन स्त्रियों को भेंट कर सकते हैं। लेकिन यह कार्य दोपहर से पहले कर लेना चाहिए।
14. हरियाली अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा करना चाहिए।
15. इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा एवं फेरे किए जाते हैं तथा मालपूए का भोग बनाकर चढाए जाने की परंपरा है।
*मंत्र-*
1. मंत्र- ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो भगवते रुद्राय।
*हरियाली अमावस्या कथा-*
कहते हैं कि एक राजा की बहू ने एक दिन मिठाई चोरी करके खा ली और नाम एक चूहे का ले दिया। यह बात जानकर चूहे को क्रोध आया और उसने तय किया कि एक दिन राजा के सामने सच लेकर ही आऊंगा। फिर एक दिन राजा के यहां अतिथि पधारे और राजा के ही अतिथि कक्ष में सोऐ। चूहे ने रानी के वस्त्र ले जाकर अतिथि के पास रख दिए। प्रात:काल उठकर सभी लोग आपस में बात करने लगे की छोटी रानी के कपड़े अतिथि के कमरे में मिले। यह बात जब राजा को पता चली तो उस रानी को घर से निकाल दिया।
रानी प्रतिदिन संध्या को दिया जलाती और ज्वार बोती और पूजा करके गुडधानी का प्रसाद बांटती थीं। फिर एक दिन राजा शिकार करके उधर से निकले तो राजा की नजर रानी पर पड़ी। राजा ने महल में आकर कहा कि आज तो वृक्ष के नीचे चमत्कारी चीज हैं, अपने झाड़ के ऊपर जाकर देखा तो दिये आपस में बात कर रहे थे। आज किसने क्या खाया, और कौन क्या है।
उसमें से एक दिया बोला आपके मेरे जान-पहचान के अलावा कोई नहीं है। आपने तो मेरी पूजा भी नहीं की और भोग भी नहीं लगाया बाकी के सब दिये बोले ऐसी क्या बात हुई तब दिया बोला मैं राजा के घर का हूं उस राजा की एक बहू थी उसने एक बार मिठाई चोरी करके खा ली और चूहे का नाम लें लिया। जब चूहे को क्रोध आया तो रानी के कपड़े अतिथि के कमरे में रख दिये राजा ने रानी को घर से निकाल दिया, वो रोज मेरी पूजा करती थी भोग लगाती थी। उसने रानी को आशीर्वाद दिया और कहा की सुखी रहे। फिर सब लोग झाड़ पर से उतरकर घर आए और कहा की रानी का कोई दोष नहीं था। यह सुनकर राजा ने रानी को घर बुलाया और फिर सभी सुखपूर्वक रहने लगे।
*सरल उपाय-*
1. सावन और अमावस्या के योग में शिवजी की पूजा-अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी कोरोना महामारी के चलते मंदिर में शिव पूजन के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घबराएं नहीं घर पर ही पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिवजी का पंचामृत से अभिषेक-पूजन करें।
2. इस दिन चीटियों को चीनी मिला हुआ आटा खिलाना शुभ माना जाता है।
3. इस दिन शिवजी को खीर और मालपूए का भोग लगाने का रिवाज है। इसीलिए घर में खीर, मालपूए बनाकर उसका भोग लगाएं। अगर यह भी न हो सकें तो शिवजी को शकर का प्रसाद अवश्य चढ़ाएं।
4. इस समयावधि में आपके पास घर पर ही जो भी सामग्री हैं उन्हें शिवजी को अर्पित करें। जैसे शकर, पुष्प, फल, जल, कच्चा दूध चढ़ाकर भी आप इस दिन कमा लाभ उठा सकते हैं।
5. इस दिन गेहूं और ज्वार की धानी खाने अथवा खिलाने के साथ झुला झूलने का विशेष महत्व है।
6. हरियाली अमावस्या की शाम को गाय के घी का 1 दीपक लगाएं तथा बत्ती में रुई की जगह लाल रंग के धागे का इस्तेमाल करें। लाल धागे की बत्ती के साथ ही दीये में थोड़ी सी केसर डालें और इसे घर के ईशान कोण में जलाएं।
7. हरियाली अमावस्या के दिन श्रीविष्णु के मंत्र, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ तथा अधिक से अधिक मात्रा में शिव मंत्रों का जाप करें।
Vandanna Mishrra
Divine blessings🙏🙏🙏