19/03/2020
Values which matters......
दो कहानियाँ
1. कक्षा 6
गर्मी की छुट्टियों में लम्बी यात्रा कर मैं नानी के घर पहुँचा था काफ़ी थका था जैसे ही घर के दरवाज़े पे मैं नानी हाँथ में पानी लिए खड़ी थी उन्होंने पानी उतारा,और मुझे कहा कि मैं बाहर ही बनें कुएँ पे नहा लूँ और धुले कपड़े पहन लूँ,फिर अंदर आऊँ। मेरे लिए यह सामान्य था क्योंकि नानी हमेशा ही ऐसे नियमों का पालन करती थी ख़ासकर अगर आप किसी दूसरे शहर या गाँव से आ रहे हों।ऐसे ही नानी किसी को भी बिना नहाए या हाँथ पैर धोए रसोई घर में नही जाने देती थी।घर के कोने कोने की रोज़ सफ़ाई होती थी।
जब मैं बड़ा हुआ तो मुझे ये लगता था की ये बिना मतलब का छुआ छूत है।पर जब मैं डॉक्टर बना तो मुझे ये सब समझ में आने लगा।जैसा हम ऑपरेशन थीयटर में करते हैं की पूरी तरह से सफ़ाई रखना,हाथ धुलना,दस्ताने आदि पहनाना,मास्क लगाना।क्यूँ
ऐसा इसलिए क्योंकि सर्जरी के घाव में इन्फ़ेक्शन ना हो।इसके साथ में जब कोई बीमार होता है तो उसके लिए सामान्य इन्फ़ेक्शन भी ख़तरनाक होते हैं।
वैसे ही पूराने समय में जब महामारी आती थी,तो लोग ऐसे नियमों का पालन करते थे,बाद में ये आदत में बदल जाते हैं,और पीढ़ी दर पीढ़ी चलते रहते हैं।पर समझने वाली बात है की इन सब के मूल में छुपा सफ़ाई का मंत्र जिसे हमें हमेशा याद रहना चाहिए।
2. कक्षा 8
दादी का घर
कुछ महीने पहले मेरे एक चचेरे भाई को चिकेन पॉक्स हुआ था।धीरे धीरे कर के यह घर के कई अन्य लोगों को भी हुआ।मैं भी उस समय गाँव में ही था।मुझे तेज बुख़ार आया और अगले दिन एक दो दाग दिखे।दादी समझ चुकी थी मुझे क्या हुआ है।उन्होंने कहा कि देवी(चिकन पॉक्स का लोक भाषा का नाम) आयी हैं।मुझे एक अलग कमरे में रखा गया,और मुझे लगभग १० दिन तक वंहा से बाहर जाने में मनाई थी।सब लोग मुझसे दूर रहते थे। मेरे पास दादी रहती थी जो मुझे भोजन और अन्य समान ला कर देती थी।मेरे कपड़े और उपयोग किए बर्तन अलग धुलते थे ।धीरे धीरे मैं ठीक हो गया।
ऐसा ही करना होता है होम कुआरंटीन में ,इस विषय में में अलग पोस्ट में लिखूँगा।
मैं कहना ये चाहता हूँ की पुराने जमाने के बहुत से नियमों के पीछे कई अच्छे तथ्य हैं,पर ना तो उनका अंधे हो कर पालन करें ना ही उसे यूँ ही नकार दें।
• जैसे सामान्य समय में भी हाँथ पैर धुलना,घर आकर कपड़े बदलना,सफ़ाई से रहना सबके लिए अच्छा है पर दिन भर हाँथ धुलना और ये सोचना की बीमारी हो जाएगी,वो भी मानसिक बीमारी है
• जैसे दादी के घर में जो मुझे अलग रखा गया वो सही है,पर उसको आज के समय में देवी मानना ग़लत है(हालाँकि ऐसा पुराने समय में लोगों को डराने के लिए किया गया होगा,जिससे वो नियमों का पालन करें)।ये सोचना की इसकी दवाई नही वो भी ग़लत है।अगर चिकन पॉक्स पता चलते ही दो तीन दिन के भीतर आप इसकी दवा डॉक्टर से लें तो,इस बिमारी के फैलने को और इसके दुष्परिणामों को रोका जा सकता है।वैसे ही अब चिकन पॉक्स का टीका मौजूद है जिसे लगाने से इस बीमारी के होने की संभावना को ख़त्म किया जा सकता है
• जब भी आस पास के क्षेत्र में कोई महामारी फैले,ख़ासकर साँस की बीमारी या दस्त जैसे की हैज़ा आदि, उस समय सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
यः पश्यति स पश्यति
अजय शुक्ला